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Malviya Nagar

Malviya Nagar Hotel Fire: बिना Fire NOC चल रहा था होटल, हादसे के बाद कई बड़े खुलासे

दिल्ली के मालवीय नगर (Malviya Nagar) में हुआ होटल अग्निकांड सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी लापरवाही की दर्दनाक तस्वीर बनकर सामने आया है। बुधवार सुबह लगी भीषण आग ने कुछ ही मिनटों में कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस हादसे में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं। सबसे दर्दनाक बात यह रही कि मरने वालों में कई विदेशी नागरिक भी शामिल थे, जो इलाज के लिए दिल्ली आए थे और उसी होटल में ठहरे हुए थे। हादसे के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। कैसे लगी आग? जानकारी के मुताबिक मालवीय नगर के हौज रानी इलाके में स्थित एक होटल और रेस्टोरेंट वाली बिल्डिंग में अचानक आग लग गई। शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि आग बेसमेंट या रेस्टोरेंट एरिया से शुरू हुई और तेजी से ऊपर की मंजिलों तक फैल गई। होटल के अंदर धुआं इतनी तेजी से भर गया कि लोगों को बाहर निकलने तक का मौका नहीं मिला। कई लोग खिड़कियों और बालकनी से मदद के लिए चिल्लाते नजर आए। आसपास मौजूद लोगों ने नीचे गद्दे डालकर कुछ लोगों की जान बचाने की कोशिश भी की। एक Exit Gate बना मौत का रास्ता जांच में सामने आया कि होटल में सुरक्षा के नाम पर बेहद खराब इंतजाम थे। पूरी बिल्डिंग में सिर्फ एक एंट्री और एग्जिट पॉइंट था। आग लगने के बाद वही रास्ता धुएं और लपटों से भर गया, जिससे लोग अंदर फंस गए। फायर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बिल्डिंग में Emergency Exit, Smoke Ventilation और Fire Alarm जैसी जरूरी सुविधाएं या तो मौजूद नहीं थीं या सही तरीके से काम नहीं कर रही थीं। License और Fire NOC में बड़ा खेल हादसे के बाद जांच एजेंसियों को कई चौंकाने वाली जानकारियां मिली हैं। बताया जा रहा है कि होटल को सिर्फ 6 कमरों का Bed & Breakfast License मिला था, लेकिन वहां करीब 25 कमरे बनाए गए थे। इतना ही नहीं, होटल के पास वैध Fire NOC भी नहीं थी। इसके बावजूद लंबे समय से होटल का संचालन किया जा रहा था। जांच टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर बिना जरूरी सुरक्षा मंजूरी के होटल कैसे चल रहा था। होटल मालिक और मैनेजर पर शिकंजा हादसे के बाद होटल मालिक और मैनेजर दोनों जांच के घेरे में आ गए। पुलिस ने होटल मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मैनेजर की तलाश लगातार जारी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक हादसे के वक्त होटल स्टाफ में अफरा-तफरी मच गई थी और कई कर्मचारी लोगों की मदद करने के बजाय मौके से भाग निकले। अब CCTV फुटेज और कॉल रिकॉर्ड के जरिए पूरे मामले की जांच की जा रही है। विदेशी मेहमानों की मौत से बढ़ी चिंता इस हादसे में बांग्लादेश, अफगानिस्तान, नाइजीरिया और अफ्रीकी देशों के कई नागरिकों की मौत हुई है। इनमें से कई लोग दिल्ली के बड़े अस्पतालों में इलाज कराने आए थे। अस्पतालों के बाहर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल दिखाई दिया। कुछ परिवार ऐसे भी थे जिन्होंने एक साथ अपने कई सदस्यों को खो दिया। प्रशासन पर उठे सवाल दिल्ली हाईकोर्ट पहले भी राजधानी में फायर सेफ्टी को लेकर सख्त टिप्पणी कर चुका है। इसके बावजूद कई होटल, गेस्ट हाउस और कमर्शियल बिल्डिंग बिना सुरक्षा मानकों के चल रही हैं। अब इस हादसे के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में कई इमारतें नियमों के खिलाफ बनाई गई हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। दिल्ली सरकार का बड़ा Action हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने राजधानी में बड़े स्तर पर Fire Safety Drive शुरू करने का फैसला लिया है। होटल, हॉस्टल, रेस्टोरेंट, अस्पताल और कोचिंग सेंटरों की जांच की जाएगी। सरकार का कहना है कि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। वहीं पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस पूरे मामले में किन अधिकारियों की लापरवाही रही। लोगों के दिलों में छोड़ गया डर मालवीय नगर होटल अग्निकांड ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर शहरों में सुरक्षा नियमों को लेकर इतनी लापरवाही क्यों बरती जाती है। जिन परिवारों ने अपने अपनों को खोया, उनके लिए यह हादसा जिंदगीभर का दर्द बन गया है। स्थानीय लोग अब मांग कर रहे हैं कि दोषियों पर सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि ऐसा सिस्टम बनाया जाए जिससे भविष्य में कोई और परिवार इस तरह बर्बाद न हो। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मुजफ्फरपुर हॉस्पिटल अग्निकांड: ICU में लगी आग, 5 मरीजों की मौत

Muzaffarpur Hospital अग्निकांड: ICU में लगी आग, 5 मरीजों की मौत

बिहार के Muzaffarpur में गुरुवार को एक निजी हॉस्पिटल में भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। इस दर्दनाक हादसे में 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से ज्यादा मरीज और उनके परिजन झुलस गए। आग इतनी तेजी से फैली कि ICU में भर्ती मरीज खुद को बचाने में असहाय नजर आए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अस्पताल में अचानक धुआं भरने लगा। कुछ ही देर में आग ICU तक पहुंच गई। वहां मौजूद लोगों ने मरीजों को बचाने के लिए ICU के खिड़की-दरवाजे तोड़ दिए और किसी तरह बाहर निकाला। कई मरीजों को स्ट्रेचर और गोद में उठाकर बाहर लाया गया। हादसे के बाद अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मच गई। परिजन अपने प्रियजनों को बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। मौके पर पहुंची दमकल की टीम ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। घायलों को आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। कुछ मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने की वजह माना जा रहा है, हालांकि प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में जुटी रही। घटना के बाद पूरे इलाके में मातम का माहौल है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते फायर सेफ्टी के इंतजाम बेहतर होते तो शायद इतने लोगों की जान नहीं जाती। यह हादसा एक बार फिर अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था और फायर सेफ्टी को लेकर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IMD

IMD Alert: Kerala में मानसून एंट्री तय, उत्तर भारत के कई राज्यों में बारिश की चेतावनी

देशभर में भीषण गर्मी से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। दक्षिण-पश्चिम मानसून अब Kerala के बेहद करीब पहुंच चुका है और मौसम विभाग का कहना है कि आज शाम तक इसकी आधिकारिक एंट्री हो सकती है। दूसरी तरफ Madhya Pradesh, Rajasthan, Delhi-NCR समेत कई राज्यों में प्री-मानसून बारिश और तेज आंधी ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक आने वाले 7 दिनों तक देश के कई हिस्सों में तेज बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है। कई राज्यों के लिए Heavy Rain Alert भी जारी किया गया है। Kerala में कभी भी पहुंच सकता है मानसून हर साल जून की शुरुआत में लोग मानसून का इंतजार करते हैं और इस बार भी Kerala से इसकी शुरुआत होने जा रही है। मौसम विभाग का कहना है कि अरब सागर से उठ रही नमी और तेज हवाएं मानसून को लगातार आगे बढ़ा रही हैं। पिछले कुछ दिनों में मौसम की रफ्तार थोड़ी धीमी जरूर हुई थी, लेकिन अब परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बताई जा रही हैं। यही वजह है कि Kerala में जल्द मानसून की एंट्री लगभग तय मानी जा रही है। MP और Rajasthan में प्री-मानसून बारिश जारी मध्य प्रदेश और राजस्थान में बीते दो-तीन दिनों से मौसम अचानक बदला हुआ नजर आ रहा है। कई शहरों में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। लोगों को गर्मी से राहत जरूर मिली, लेकिन कई जगह धूलभरी आंधी और बिजली गिरने की घटनाओं ने परेशानी भी बढ़ाई। भोपाल, इंदौर, जयपुर, कोटा और आसपास के इलाकों में बादलों की आवाजाही लगातार बनी हुई है। मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है। अगले 7 दिन कैसा रहेगा मौसम? IMD के अनुसार दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर राज्यों और तटीय इलाकों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश हो सकती है। वहीं उत्तर और मध्य भारत में भी बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी रह सकता है। दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और हरियाणा में भी मौसम बदलने के संकेत मिल रहे हैं। कई जगहों पर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। किसानों के लिए राहत की खबर मानसून की अच्छी शुरुआत किसानों के लिए काफी अहम मानी जाती है। खासतौर पर खरीफ फसलों की बुवाई मानसून पर ही निर्भर रहती है। समय पर बारिश होने से खेतों में नमी बढ़ेगी और खेती की तैयारी आसान हो जाएगी। गांवों में किसान अब आसमान की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। कई इलाकों में किसानों ने शुरुआती खेती की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। लोगों को मिली गर्मी से राहत मई के आखिर और जून की शुरुआत में कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच गया था। ऐसे में बारिश और बादलों की वजह से लोगों को बड़ी राहत महसूस हो रही है। शाम के समय चल रही ठंडी हवाओं ने मौसम को सुहावना बना दिया है। हालांकि मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि बारिश के दौरान खुले इलाकों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें, क्योंकि कई जगह बिजली गिरने की संभावना बनी हुई है। आने वाले दिनों में मानसून की रफ्तार और तेज हो सकती है। ऐसे में पूरे देश की नजर अब Kerala से शुरू होने वाले मानसून पर टिकी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kuwait

Kuwait Airport Drone Attack कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला, भारतीय की मौत और 60+ घायल

कुवैत (Kuwait) इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए भीषण ड्रोन हमले ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को हिला कर रख दिया है। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हमले में एक भारतीय नागरिक की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 60 से अधिक लोग घायल हुए हैं। घटना के बाद एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी मच गई और कई उड़ानों को तुरंत रोकना पड़ा। यह हमला ऐसे समय पर हुआ है जब मध्य पूर्व में पहले से ही तनाव की स्थिति बनी हुई है, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं। एयरपोर्ट पर अचानक ड्रोन अटैक, यात्रियों में दहशत प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एयरपोर्ट परिसर में अचानक ड्रोन और मिसाइल जैसे हमलों की आवाजें सुनाई दीं, जिसके बाद लोग इधर-उधर भागने लगे। टर्मिनल को तुरंत खाली कराया गया और सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया। राहत और बचाव टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। Indian Citizen Death: एक भारतीय की मौत, कई गंभीर घायल इस हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत की पुष्टि हुई है, जिससे भारत में भी चिंता का माहौल है।करीब 60 लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर है। डॉक्टरों की टीम लगातार घायलों का इलाज कर रही है। Kuwait Government Response: जांच के आदेश और सुरक्षा बढ़ाई गई कुवैत सरकार ने इस हमले को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है। एयरपोर्ट और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है। भारतीय दूतावास ने भी इस घटना पर दुख जताते हुए कहा है कि वे पीड़ित परिवारों के संपर्क में हैं और हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है। Middle East Tension: खाड़ी में बढ़ता तनाव इस हमले ने पूरे मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच पहले से चल रहे विवाद के बीच यह घटना एक बड़ा सुरक्षा संकट मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस हमले की निंदा हो रही है और कई देश स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। कुवैत एयरपोर्ट हमला बनी बड़ी चिंता कुवैत एयरपोर्ट पर हुआ यह ड्रोन हमला सिर्फ एक सुरक्षा चूक नहीं, बल्कि क्षेत्रीय तनाव का गंभीर संकेत माना जा रहा है। एक भारतीय की मौत और दर्जनों लोगों के घायल होने से यह घटना और भी दर्दनाक बन गई है। फिलहाल जांच जारी है और आने वाले समय में इस मामले में और अहम खुलासे हो सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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DK Shivakumar

Big Breaking Karnataka Politics: DK Shivakumar बने CM, नई कैबिनेट में बड़ा बदलाव

कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लंबे समय से चल रही सत्ता संतुलन की खींचतान के बीच कांग्रेस ने नई सरकार का फॉर्मूला तय कर लिया है। इसी क्रम में DK Shivakumar मुख्यमंत्री पद की शपथ के लिए लोकभवन पहुंच गए हैं, जहां शपथ ग्रहण की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। यह सिर्फ एक शपथ ग्रहण नहीं बल्कि कर्नाटक की राजनीति में नए सत्ता समीकरण की शुरुआत मानी जा रही है। सत्ता संतुलन के साथ नई सरकार का गठन कांग्रेस ने इस बार सरकार बनाने में संगठनात्मक अनुभव और क्षेत्रीय संतुलन दोनों को ध्यान में रखा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता G Parameshwara को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा लगभग तय मानी जा रही है। पार्टी का उद्देश्य स्पष्ट है—सभी प्रमुख गुटों को साथ लेकर स्थिर सरकार चलाना। 12 मंत्रियों की नई टीम, Siddaramaiah फैक्टर भी अहम नई कैबिनेट में करीब 12 मंत्रियों के शपथ लेने की संभावना है। इस सूची में पूर्व मुख्यमंत्री Siddaramaiah के बेटे का नाम भी चर्चा में है। इस कदम को कांग्रेस की “नई पीढ़ी को मौका देने” की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। साथ ही अनुभवी और युवा चेहरों का मिश्रण सरकार को मजबूती देने की कोशिश है। राजनीतिक माहौल गर्म, समर्थकों में उत्साह लोकभवन के बाहर और भीतर राजनीतिक हलचल तेज है। सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता व नेता मौजूद हैं। यह बदलाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि कांग्रेस की आंतरिक राजनीति में एक नए संतुलन का संकेत भी माना जा रहा है। मुख्य अपडेट हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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TMC

TMC vs Opposition: Suvendu Meeting में 18 MLA की मौजूदगी से बंगाल में हलचल

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। विपक्षी नेता Suvendu Adhikari की एक अहम बैठक में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के करीब 18 विधायकों के शामिल होने की खबर ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों खेमों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। इधर मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पार्टी संगठन को और मजबूत करने की दिशा में सख्त संकेत दिए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पार्टी के अंदर बड़े फैसले देखने को मिल सकते हैं। आखिर हुआ क्या था? सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में एक राजनीतिक बैठक के दौरान TMC के कई विधायक अचानक विपक्षी खेमे से जुड़े कार्यक्रम में दिखाई दिए। शुरुआती जानकारी में इनकी संख्या करीब 18 बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि सामने आई सूची में कुछ ऐसे नाम भी शामिल हैं, जो पिछले कुछ समय से पार्टी लाइन से नाराज़ बताए जा रहे थे। हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। TMC के अंदर बढ़ती बेचैनी इस खबर के सामने आने के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर हलचल बढ़ गई है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक बैठक तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से चल रही नाराज़गी और असंतोष को भी दर्शाता है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन नेतृत्व स्तर पर लगातार बैठकें चल रही हैं। Mamata Banerjee का सख्त संदेश मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए पार्टी संगठन को मजबूत करने और अनुशासन बनाए रखने पर जोर दिया है। संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में पार्टी स्तर पर कुछ कड़े फैसले लिए जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, नेतृत्व अब ऐसे सभी मामलों पर नजर रख रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने। राजनीतिक असर क्या हो सकता है? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Varanasi

Varanasi Bulldozer Action: 200 साल पुरानी मस्जिद पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

Varanasi (काशी) में देर रात प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 200 साल पुरानी मस्जिद को ढहा दिया। यह पूरा ऑपरेशन तेजी से सिर्फ 22 मिनट में पूरा किया गया, जिससे इलाके में देर रात हलचल मच गई। आधी रात 1000 जवानों की तैनाती, पूरा इलाका सील सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई से पहले पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया था। करीब 1000 पुलिसकर्मी मौके पर तैनात किए गए और आसपास की गलियों को पूरी तरह खाली करा दिया गया ताकि किसी भी तरह का विरोध या भीड़ जमा न हो सके 5 बुलडोजर से चला ध्वस्तीकरण अभियान कार्रवाई के दौरान 5 बुलडोजर लगाए गए जिन्होंने मस्जिद को ढहाने का काम किया। प्रशासन ने पूरे ऑपरेशन को बेहद नियंत्रित और योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया। रातों-रात हटाया गया मलबा, सुबह तक साफ हुआ इलाका मस्जिद गिराए जाने के बाद मलबा भी तुरंत हटवा दिया गया, जिससे सुबह तक पूरा इलाका साफ दिखाई दिया। प्रशासन की कोशिश रही कि स्थिति जल्द से जल्द सामान्य हो जाए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Malviya Nagar

Malviya Nagar Hotel Fire Delhi अग्निकांड में 21 की मौत, कैसे हुआ इतना बड़ा हादसा?

दिल्ली के मालवीय नगर इलाके (Malviya Nagar) में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने पूरे शहर को हिला दिया है। एक बहुमंज़िला इमारत, जिसमें होटल और रेस्टोरेंट दोनों चल रहे थे, वहां अचानक लगी आग ने कुछ ही मिनटों में भयावह रूप ले लिया। इस हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं। सुबह का वक्त था… लोग अपने काम में लगे थे, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ ही देर में यह जगह मौत का मंजर बन जाएगी। आग कैसे लगी? प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक: कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि यह भवन एक छोटे होटल/बीएनबी (B&B) स्टाइल सेटअप के रूप में चल रहा था। 21 लोगों की मौत कैसे हुई? इस हादसे में सबसे ज्यादा जानें धुएं और घुटन की वजह से गईं: होटल कौन चला रहा था? फिलहाल इस पर जांच जारी है: रेस्क्यू ऑपरेशन बड़ी लापरवाही पर सवाल इस हादसे ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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DK Shivakumar

DK Shivakumar Oath Ceremony: कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन, आज होगा नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण

कर्नाटक की राजनीति में आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। लंबे समय से चल रही राजनीतिक चर्चाओं और कांग्रेस हाईकमान की बैठकों के बाद आखिरकार डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) आज कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। बेंगलुरु में शाम 4 बजे होने वाले इस शपथ ग्रहण समारोह पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं। कांग्रेस पार्टी के लिए यह सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व अब राज्य में नए चेहरे के साथ नई शुरुआत करने की तैयारी में है। आज जारी हो सकती है मंत्रियों की पहली List सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण के साथ ही कैबिनेट के कुछ मंत्रियों के नामों का भी ऐलान किया जा सकता है। पिछले कई दिनों से दिल्ली में लगातार बैठकों का दौर चल रहा था, जहां राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने संभावित मंत्रियों के नामों पर चर्चा की। बताया जा रहा है कि कांग्रेस इस बार क्षेत्रीय और जातीय संतुलन पर खास ध्यान दे रही है ताकि राज्य के हर वर्ग को प्रतिनिधित्व मिल सके। पार्टी पुराने अनुभव और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में है। Siddaramaiah को मिली बड़ी जिम्मेदारी डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को कांग्रेस संगठन में बड़ी भूमिका दी गई है। उन्हें कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी CWC का सदस्य बनाया गया है। राजनीतिक जानकार इसे कांग्रेस का संतुलन साधने वाला फैसला मान रहे हैं। सिद्धारमैया लंबे समय से कर्नाटक कांग्रेस का बड़ा चेहरा रहे हैं और उनका संगठन में सक्रिय रहना पार्टी के लिए अहम माना जा रहा है। इससे यह भी साफ संकेत मिलता है कि कांग्रेस राज्य और राष्ट्रीय राजनीति दोनों स्तरों पर संतुलन बनाए रखना चाहती है। बेंगलुरु में बढ़ी हलचल, सुरक्षा के कड़े इंतजाम शपथ ग्रहण समारोह को लेकर बेंगलुरु में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। कार्यक्रम में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं और अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हो सकते हैं। समारोह को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। सरकार ने कुछ सरकारी दफ्तरों में आधे दिन की छुट्टी घोषित की है ताकि कार्यक्रम के दौरान ट्रैफिक और भीड़ को संभाला जा सके। DK Shivakumar के सामने होंगी कई बड़ी चुनौतियां मुख्यमंत्री बनने के बाद डीके शिवकुमार के सामने कई बड़ी जिम्मेदारियां होंगी। उन्हें सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाना होगा। साथ ही चुनावी वादों को जमीन पर उतारना, विकास कार्यों को गति देना और विपक्ष के आरोपों का जवाब देना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस अब कर्नाटक में मजबूत पकड़ बनाए रखने के साथ-साथ आने वाले लोकसभा चुनावों की रणनीति भी तैयार कर रही है। ऐसे में डीके शिवकुमार का कार्यकाल पार्टी के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CM उमर अब्दुल्ला ने आखिरी वक्त पर बदला बैठक का ठिकाना

CM Omar Abdullah ने आखिरी वक्त पर बदला बैठक का ठिकाना

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोमवार को अचानक अपनी अहम बैठक का स्थान बदल दिया। पहले यह बैठक किसी और जगह आयोजित होनी थी, लेकिन आखिरी समय में इसे डाचीगाम में रखने का फैसला लिया गया। खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री के साथ मंत्री और विधायक भी टेम्पो में सवार होकर डाचीगाम पहुंचे। इस अनोखे अंदाज ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। आमतौर पर वीआईपी काफिले और बड़ी गाड़ियों में चलने वाले नेताओं को इस बार साधारण टेम्पो में सफर करते देखा गया। रास्ते में लोगों ने भी इस दृश्य को देखकर हैरानी जताई और कई लोगों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला डाचीगाम क्षेत्र की जमीनी स्थिति और स्थानीय व्यवस्थाओं का जायजा लेना चाहते थे। इसी वजह से उन्होंने अचानक बैठक स्थल बदलने का फैसला लिया। उनके साथ मौजूद मंत्री और विधायक भी बिना किसी औपचारिकता के टेम्पो में ही रवाना हो गए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों से बातचीत भी की और उनकी समस्याएं सुनीं। लोगों ने सड़क, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी परेशानियां सामने रखीं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जरूरी निर्देश देने की बात कही। उमर अब्दुल्ला का यह सादगी भरा अंदाज अब चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर लोग इसे आम जनता से जुड़ने की कोशिश बता रहे हैं। वहीं कुछ लोग इसे राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देख रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CJI Surya Kant

CJI Surya Kant राहुल गांधी के मार्च पर बोले- कोर्ट के बाहर क्या हो रहा, सब पता है

राहुल गांधी के मार्च और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार, 15 अक्टूबर को सुनवाई हुई। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अदालत को बाहर दिए जा रहे बयानों और अंदर चल रही कार्यवाही, दोनों की जानकारी है। न्यायपालिका किसी दबाव में काम नहीं करती। राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं की ओर से 12 अक्टूबर को निकाले गए मार्च के बाद यह मामला चर्चा में है। दूसरी ओर, SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष चुनाव आयोग से लगातार सवाल पूछ रहा है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में गड़बड़ियों से वास्तविक मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। अब इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई पर सबकी नजर है। CJI सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान क्या कहा? सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका को किसी तरह के दबाव या धमकी से प्रभावित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अदालत को पता है कि बाहर क्या कहा जा रहा है और कोर्ट के भीतर क्या हो रहा है। उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब सुप्रीम कोर्ट के बाहर हुए राजनीतिक मार्च और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विवाद जारी है। अदालत ने इस मामले में संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। हालांकि, नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि किसी नेता के खिलाफ आरोप साबित हो गए हैं। अंतिम निर्णय सुनवाई और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर होगा। Rahul Gandhi March: 12 अक्टूबर को क्या हुआ था? 12 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के कई नेताओं ने दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया था। इस दौरान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर विरोध जताया गया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलती से नहीं हटना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी अपनी मांगें रखीं। विपक्ष इस मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर देख रहा है। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया को चुनाव व्यवस्था का जरूरी हिस्सा बताया जाता है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की CJI से मुलाकात क्यों नहीं हुई? मार्च से पहले राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने CJI सूर्यकांत से मुलाकात का समय मांगा था। वे SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर अपना पक्ष रखना चाहते थे। हालांकि, CJI ने मुलाकात के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने संकेत दिया कि न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उचित कानूनी माध्यम से अदालत के सामने रखा जाना चाहिए। इसका मतलब यह है कि यदि किसी पक्ष को चुनाव प्रक्रिया या मतदाता सूची को लेकर शिकायत है, तो वह संबंधित नियमों के तहत याचिका दाखिल कर सकता है। अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलता है। SIR Controversy: मतदाता सूची से नाम हटाने पर क्यों है विवाद? SIR को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि मतदाता सूची को अपडेट करते समय वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। विपक्ष का आरोप है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने से पात्र मतदाताओं को परेशानी हो सकती है। वहीं, चुनाव आयोग की प्रक्रिया का उद्देश्य मृत, स्थानांतरित और अन्य कारणों से अपात्र हो चुके मतदाताओं के रिकॉर्ड को अपडेट करना है। ऐसे में पारदर्शिता, उचित सत्यापन और शिकायतों के समय पर समाधान की भूमिका अहम हो जाती है। किसी मतदाता का नाम सूची में नहीं होने पर उसके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है, इसलिए इस प्रक्रिया में सावधानी बरतना जरूरी है। Supreme Court Hearing: अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट में SIR से संबंधित याचिकाओं पर आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। अदालत संबंधित पक्षों के जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मामले पर विचार करेगी। राहुल गांधी के मार्च से जुड़े विवाद में भी अदालत की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी। फिलहाल, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, अदालत की गरिमा और मतदाता सूची की पारदर्शिता इस पूरे मामले के प्रमुख पहलू बने हुए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

इंदौर में कमजोर मानसून से जल संकट का खतरा, महापौर ने मांगा 50 करोड़ का पैकेज

इंदौर। मध्य प्रदेश में कमजोर मानसून के कारण आने वाले महीनों में जल संकट की आशंका बढ़ गई है। प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में सामान्य तौर पर करीब 37 इंच बारिश होती है, लेकिन इस बार अब तक केवल 23 इंच वर्षा दर्ज की गई है। हालात को देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल प्रबंधन के लिए 50 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज देने की मांग की है। जल संकट से निपटने की रणनीति तैयार करने के लिए नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और इंदौर नगर निगम सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की जा रही है। 40 लाख आबादी, रोजाना 750 से 800 एमएलडी पानी की मांग इंदौर की आबादी करीब 40 लाख है। शहर में घरेलू जरूरतों के लिए प्रतिदिन लगभग 620 एमएलडी पानी की आवश्यकता होती है। औद्योगिक, व्यावसायिक, संस्थागत और अन्य उपयोगों को शामिल करने पर कुल मांग बढ़कर 750 से 800 एमएलडी तक पहुंच जाती है। वर्ष 2008 में भी शहर में करीब 20 इंच बारिश हुई थी, जिसके कारण जल संकट की स्थिति बनी थी। अब 18 साल बाद कम बारिश ने एक बार फिर गर्मियों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। डीमार्ट के पास नर्मदा की पाइपलाइन फूटी, अंडरपास बंद कम बारिश के बीच पानी की बर्बादी से जुड़ी समस्या भी सामने आई है। गुरुवार सुबह बंगाली चौराहे से बायपास के बीच डीमार्ट के पास नर्मदा जलापूर्ति की पाइपलाइन फूट गई। पाइपलाइन से तेज दबाव के साथ पानी निकलने लगा, जिससे सड़क पर जाम लग गया। पानी भरने के कारण अंडरपास भी बंद करना पड़ा। भूजल दोहन 90 प्रतिशत के करीब विशेषज्ञों के मुताबिक, इंदौर की बड़ी आबादी नर्मदा जलापूर्ति पर निर्भर है। इसके जरिए शहर को प्रतिदिन करीब 440 एमएलडी पानी मिलता है। हालांकि, लीकेज और अन्य कारणों से लगभग 22 प्रतिशत पानी बर्बाद हो जाता है। शहर में एक लाख से अधिक निजी बोरवेल हैं। इसके अलावा नगर निगम के करीब 6,500 बोरवेल और हाइड्रेंट भी हैं। केंद्रीय भूजल बोर्ड की 2025 की रिपोर्ट में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों को क्रिटिकल जोन में रखे जाने का उल्लेख है। रिपोर्ट के मुताबिक, भूजल दोहन का स्तर करीब 90 प्रतिशत है। इसमें और वृद्धि होने पर जल संकट की स्थिति गंभीर हो सकती है। पिछली गर्मियों में 700 टैंकरों से पहुंचाना पड़ा था पानी पिछली गर्मियों में बोरवेल पर निर्भर आबादी के करीब 40 प्रतिशत हिस्से को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ा था। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लगभग 700 टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति करनी पड़ी थी। इस बार तालाबों में कम जलभराव, भूजल का लगातार दोहन और जलापूर्ति नेटवर्क में पानी की बर्बादी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौतियां बन सकती हैं। ऐसे में शहर की जल जरूरतों को पूरा करने के लिए बेहतर जल प्रबंधन, लीकेज पर नियंत्रण और उपलब्ध जल स्रोतों का प्रभावी उपयोग अहम होगा।
Punjab

Punjab Protest: झोटा हत्याकांड पर सड़कों पर उतरे लोग, SHO सस्पेंड; DSP पर कार्रवाई की मांग

Punjab में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद लोगों में गुस्सा है। इसी के विरोध में गुरुवार, 15 अक्टूबर को पंजाब बंद का आह्वान किया गया। राज्य के कई शहरों में बाजार बंद रहे और कुछ जगहों पर स्कूल-कॉलेज भी नहीं खुले। बठिंडा-चंडीगढ़ हाईवे पर प्रदर्शनकारियों ने जाम लगाया। वहीं, झोटा का परिवार न्याय की मांग पर अड़ा है और उसने शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। दूसरी ओर, संबंधित SHO को सस्पेंड किए जाने की खबर सामने आई है। परिवार और प्रदर्शनकारी अब मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और नशे के अवैध कारोबार पर सख्ती की मांग कर रहे हैं। Punjab Bandh Today: बाजार बंद, सड़कों पर उतरे लोग परविंदर सिंह झोटा के पिता भीम सिंह ने 15 अक्टूबर को सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक पंजाब बंद का आह्वान किया था। इस बंद को विभिन्न राजनीतिक दलों, किसान संगठनों और कर्मचारी संगठनों का समर्थन मिला। मानसा, बठिंडा, लुधियाना, जालंधर और अमृतसर समेत कई शहरों में बंद का असर देखने को मिला। कई बाजारों में दुकानें नहीं खुलीं, जबकि कुछ इलाकों में निजी स्कूल और कॉलेज भी बंद रहे। बंद के दौरान आवश्यक सेवाओं को चालू रखने की अपील की गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने सरकार से इस मामले में गंभीरता से कार्रवाई करने और जांच में पारदर्शिता बनाए रखने की मांग की। बठिंडा-चंडीगढ़ हाईवे पर जाम, यातायात प्रभावित पंजाब बंद के दौरान बठिंडा-चंडीगढ़ हाईवे पर प्रदर्शन के कारण यातायात प्रभावित हुआ। कई जगहों पर लोगों ने सड़क पर उतरकर विरोध जताया। कुछ अन्य मार्गों पर भी जाम की स्थिति बनी। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक परिवार को न्याय का भरोसा नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रह सकता है। बंद के कारण आम लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। परिवार ने शव का अंतिम संस्कार करने से किया इनकार परविंदर सिंह झोटा का शव मानसा के सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया है। परिवार ने मांग की है कि मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए। इसके साथ ही पोस्टमॉर्टम PGIMER चंडीगढ़ में कराने की मांग भी उठाई गई है। झोटा के पिता भीम सिंह का कहना है कि परिवार को न्याय चाहिए और हत्या से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। परिवार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब के DGP गौरव यादव के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। परिवार का विरोध केवल आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। वह यह जानना चाहता है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका भी थी। फिलहाल अंतिम संस्कार को लेकर परिवार का रुख सख्त बना हुआ है। Parvinder Singh Jhota Murder Case: मुख्य आरोपी गिरफ्तार परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह नशे के खिलाफ अभियान चलाते थे और कथित तौर पर मेडिकल स्टोरों पर नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री के मुद्दे उठाते थे। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, घटना से पहले झोटा का मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार के साथ विवाद हुआ था। इसी दौरान गोली चलने से झोटा की मौत हो गई। घटना के समय वह कथित तौर पर फेसबुक लाइव भी कर रहे थे। पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी अश्वनी कुमार को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया। अब पुलिस हत्या के पीछे की परिस्थितियों और विवाद के कारणों की जांच कर रही है। मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका होने या साजिश से जुड़े पहलुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। SHO सस्पेंड, DSP पर कार्रवाई की मांग हत्या के बाद पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मामले में मानसा की संबंधित SHO बिएंत कौर को सस्पेंड किए जाने की खबर सामने आई है। वहीं, DSP और अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है। परिवार और प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच हो और यदि किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। DSP के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश और अन्य विभागीय कदमों की अंतिम स्थिति की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। फिलहाल इस मामले में पुलिस की जवाबदेही भी विरोध का एक प्रमुख मुद्दा बनी हुई है। आरोपी की दुकान में तोड़फोड़, घर के हिस्से पर बुलडोजर कार्रवाई झोटा की हत्या के बाद मानसा में आक्रोशित लोगों ने आरोपी की मेडिकल दुकान में तोड़फोड़ की। इसके बाद दुकान को नुकसान पहुंचने और आग लगाए जाने की खबरें सामने आईं। प्रशासन ने आरोपी के घर के एक हिस्से को भी गिराया। इन घटनाओं के बीच इलाके में तनाव बढ़ गया और पुलिस को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी पड़ी। प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों की मांगों पर ध्यान देने की चुनौती है। CM भगवंत मान ने जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं को देखा जाएगा और जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आने पर उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, विपक्षी दलों ने राज्य में कानून-व्यवस्था और नशे के अवैध कारोबार को लेकर सरकार से जवाब मांगा है। झोटा हत्याकांड ने पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोगों की सुरक्षा का मुद्दा भी फिर चर्चा में ला दिया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

DAVV में शुरू होगा गर्भ संस्कार पर PG डिप्लोमा कोर्स, पहले बैच में 30 विद्यार्थियों को मिलेगा प्रवेश

इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) गर्भावस्था और मां-बच्चे के स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर नया पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी कर रहा है। विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ फिजिकल एजुकेशन के अंतर्गत स्कूल ऑफ योगा में गर्भ संस्कार पर पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा (PG Diploma) कोर्स शुरू करने की योजना है। इसे शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शुरू करने का प्रस्ताव है। पहले बैच में 30 विद्यार्थियों को प्रवेश देने की योजना बनाई गई है। इस पाठ्यक्रम में भारतीय परंपरा में प्रचलित गर्भ संस्कार की अवधारणा को आधुनिक गर्भावस्था देखभाल से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। विद्यार्थियों को गर्भधारण से लेकर प्रसव तक महिला के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। गर्भावस्था से प्रसव तक की देखभाल की पढ़ाई प्रस्तावित कोर्स में गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में होने वाले बदलाव, भ्रूण का विकास, संतुलित पोषण और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषय शामिल होंगे। इसके अलावा योग, प्राणायाम, ध्यान और मां तथा गर्भस्थ शिशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव से जुड़े पहलुओं को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की योजना है। विद्यार्थियों को गर्भावस्था के अलग-अलग चरणों में सुरक्षित शारीरिक गतिविधियों और तनाव प्रबंधन के बारे में भी पढ़ाया जाएगा। इसका उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान देखभाल से संबंधित विषयों की व्यवस्थित जानकारी देना है। सैद्धांतिक पढ़ाई के साथ अस्पतालों में प्रशिक्षण गर्भ संस्कार के पीजी डिप्लोमा में कक्षा में पढ़ाई के साथ अस्पतालों में व्यावहारिक प्रशिक्षण देने की भी योजना है। इससे विद्यार्थियों को गर्भावस्था देखभाल से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं को समझने का अवसर मिल सकेगा। हालांकि, गर्भावस्था के दौरान योग, व्यायाम, पोषण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी उपायों को अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह जरूरी है। यह पाठ्यक्रम चिकित्सा विशेषज्ञों की देखरेख और निर्धारित स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप तैयार किया जाना महत्वपूर्ण होगा। योग से जुड़े तीन सर्टिफिकेट कोर्स भी प्रस्तावित DAVV के स्कूल ऑफ योगा में पीजी डिप्लोमा के साथ तीन सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने की भी तैयारी है। इनमें शामिल हैं: इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को योग, पोषण, प्राकृतिक स्वास्थ्य पद्धतियों और एक्यूप्रेशर से जुड़े विषयों की बुनियादी जानकारी देने की योजना है। विश्वविद्यालय की इस पहल के तहत योग और स्वास्थ्य से जुड़े नए शैक्षणिक विकल्प उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। पाठ्यक्रमों के प्रवेश और संचालन से संबंधित विस्तृत जानकारी विश्वविद्यालय की आधिकारिक घोषणा के बाद स्पष्ट होगी।
Pakistan

Pakistan School Accident: पेशावर में दर्दनाक हादसा, 40 से ज्यादा घायल; राहत-बचाव जारी

Pakistan के पेशावर में गुरुवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया। यहां एक निजी स्कूल की छत गिरने से 21 लोगों की मौत की खबर है। मृतकों में 20 बच्चे और एक महिला टीचर शामिल हैं। हादसे में 40 से ज्यादा लोग घायल भी हुए हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। बच्चों को मलबे से निकालने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। Peshawar School Accident: अचानक गिरी स्कूल की छत मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हादसा पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी पेशावर की देर कॉलोनी में हुआ। यहां एक निजी स्कूल की छत अचानक गिर गई। उस समय स्कूल में बच्चे और स्टाफ मौजूद थे। छत गिरने से कई लोग मलबे में दब गए। हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचे। मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया गया। इस दौरान घायलों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई। 20 बच्चों और महिला टीचर की मौत इस हादसे में 20 बच्चों और एक महिला टीचर समेत 21 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। शुरुआती रिपोर्टों में मृतकों की संख्या अलग-अलग बताई गई थी, लेकिन बाद में सामने आए आंकड़ों में मौत का आंकड़ा बढ़ गया। इस घटना ने बच्चों के परिवारों को गहरे दुख में डाल दिया है। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। हालांकि, मृतकों और घायलों की संख्या से जुड़ी अंतिम आधिकारिक पुष्टि के लिए प्रशासन की विस्तृत जानकारी का इंतजार करना जरूरी है। 40 से ज्यादा घायल, अस्पताल में इलाज जारी हादसे में घायल हुए 40 से ज्यादा लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया। पेशावर के लेडी रीडिंग अस्पताल में घायलों के इलाज की जानकारी रिपोर्टों में सामने आई है। अस्पताल में घायलों को जरूरी चिकित्सा सहायता दी जा रही है। दूसरी ओर, बचाव दल ने घटनास्थल पर मलबा हटाने का काम किया। ऐसे हादसों में शुरुआती समय बेहद अहम होता है, क्योंकि मलबे में फंसे लोगों को जल्द बाहर निकालना जरूरी होता है। Pakistan School Accident: कैसे गिरी छत? जांच के बाद होगा खुलासा फिलहाल स्कूल की छत गिरने की असली वजह स्पष्ट नहीं है। यह पता लगाने के लिए जांच जरूरी है कि इमारत की हालत कैसी थी और निर्माण में सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। जांच पूरी होने के बाद ही हादसे के कारणों को लेकर स्थिति साफ हो सकेगी। इस घटना ने एक बार फिर स्कूलों की इमारतों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल ऐसी जगह हैं, जहां बच्चे दिन का बड़ा हिस्सा बिताते हैं। ऐसे में भवन की नियमित जांच, समय पर मरम्मत और सुरक्षा नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। स्कूलों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल पेशावर का यह हादसा केवल एक इमारत के गिरने की घटना नहीं है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला भी है। स्कूल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि बच्चों को सुरक्षित माहौल मिले और इमारतों की स्थिति की समय-समय पर जांच की जाए। फिलहाल, इस हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों और महिला टीचर के परिवारों के लिए यह बेहद मुश्किल समय है। राहत एवं बचाव कार्य और घायलों के इलाज से जुड़ी आगे की जानकारी पर सभी की नजर बनी हुई है।पाकिस्तान के पेशावर में गुरुवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया। यहां एक निजी स्कूल की छत गिरने से 21 लोगों की मौत की खबर है। मृतकों में 20 बच्चे और एक महिला टीचर शामिल हैं। हादसे में 40 से ज्यादा लोग घायल भी हुए हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। बच्चों को मलबे से निकालने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। Peshawar School Accident: अचानक गिरी स्कूल की छत मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हादसा पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी पेशावर की देर कॉलोनी में हुआ। यहां एक निजी स्कूल की छत अचानक गिर गई। उस समय स्कूल में बच्चे और स्टाफ मौजूद थे। छत गिरने से कई लोग मलबे में दब गए। हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचे। मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया गया। इस दौरान घायलों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई। 20 बच्चों और महिला टीचर की मौत इस हादसे में 20 बच्चों और एक महिला टीचर समेत 21 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। शुरुआती रिपोर्टों में मृतकों की संख्या अलग-अलग बताई गई थी, लेकिन बाद में सामने आए आंकड़ों में मौत का आंकड़ा बढ़ गया। इस घटना ने बच्चों के परिवारों को गहरे दुख में डाल दिया है। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। हालांकि, मृतकों और घायलों की संख्या से जुड़ी अंतिम आधिकारिक पुष्टि के लिए प्रशासन की विस्तृत जानकारी का इंतजार करना जरूरी है। 40 से ज्यादा घायल, अस्पताल में इलाज जारी हादसे में घायल हुए 40 से ज्यादा लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया। पेशावर के लेडी रीडिंग अस्पताल में घायलों के इलाज की जानकारी रिपोर्टों में सामने आई है। अस्पताल में घायलों को जरूरी चिकित्सा सहायता दी जा रही है। दूसरी ओर, बचाव दल ने घटनास्थल पर मलबा हटाने का काम किया। ऐसे हादसों में शुरुआती समय बेहद अहम होता है, क्योंकि मलबे में फंसे लोगों को जल्द बाहर निकालना जरूरी होता है। Pakistan School Accident: कैसे गिरी छत? जांच के बाद होगा खुलासा फिलहाल स्कूल की छत गिरने की असली वजह स्पष्ट नहीं है। यह पता लगाने के लिए जांच जरूरी है कि इमारत की हालत कैसी थी और निर्माण में सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। जांच पूरी होने के बाद ही हादसे के कारणों को लेकर स्थिति साफ हो सकेगी। इस घटना ने एक बार फिर स्कूलों की इमारतों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल ऐसी जगह हैं, जहां बच्चे दिन का बड़ा हिस्सा बिताते हैं। ऐसे में भवन की नियमित जांच, समय पर मरम्मत और सुरक्षा नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। स्कूलों की सुरक्षा पर...

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