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Pakistani Anchor Crying Video Viral:

Pakistani Anchor Crying Video Viral: ऑपरेशन सिंदूर के बाद वायरल हुआ पाकिस्तानी एंकर के रोने का वीडियो

Indian Army’s ‘Operation Sindoor’ shook Pakistan. A viral video shows a Pakistani news anchor crying, claiming to mourn deaths due to the airstrike. Full details on Desh Harpal. भारतीय सेना ने पहलगाम हमले के जवाब में ‘Operation Sindoor’ के तहत बड़े स्तर पर कार्रवाई की है। मंगलवार देर रात करीब डेढ़ बजे इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने आतंकियों के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। इस कार्रवाई के बाद पूरे पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है। वायरल वीडियो में पाकिस्तानी एंकर का रोता हुआ चेहरा सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक पाकिस्तानी न्यूज एंकर लाइव टीवी पर रोते हुए दिखाई दे रही है। दावा किया जा रहा है कि वह भारतीय हवाई हमले में मारे गए पाकिस्तानी नागरिकों के लिए दुख जता रही है। वीडियो में वह टूटे दिल से दया और हिम्मत की दुआ मांगती नजर आ रही है। एंकर रोते हुए कहती है कि जो मासूम शहीद हुए उनकी आत्मा को शांति मिले। क्या है वीडियो की सच्चाई? इस वायरल वीडियो की सत्यता की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, सोशल मीडिया पर कई लोग इसे हाल ही में भारतीय सेना द्वारा किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का रिएक्शन मान रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह वीडियो पुराने फुटेज का भी हो सकता है, जिसे मौजूदा हालात के साथ जोड़ा जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर: पाकिस्तान में खौफ भारतीय सेना के ‘Operation Sindoor’ के बाद पाकिस्तान में दहशत का माहौल है। आतंकियों के खिलाफ की गई इस बड़ी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में असंतोष और भय का माहौल बना हुआ है। भारतीय सेना ने इस ऑपरेशन के तहत आतंकवादियों के ठिकानों पर बड़ा प्रहार किया। सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं लोग सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ इसे भारतीय सेना की कड़ी प्रतिक्रिया मान रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि यह पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा का हिस्सा भी हो सकता है। वायरल वीडियो और ऑपरेशन सिंदूर के बीच क्या संबंध है, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। लेकिन भारतीय सेना की इस कार्रवाई ने पाकिस्तान में हड़कंप जरूर मचा दिया है।
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Operation Sindoor

Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर बना भारत की शान, पीएम मोदी बोले – “Pride of India”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) को भारत के लिए “गर्व का विषय (Pride of India)” बताया और इसे भारतीय सेना की ताकत और रणनीतिक क्षमता का प्रतीक कहा। यह ऑपरेशन 6 मई को उस आतंकी हमले के जवाब में किया गया, जिसमें जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। प्रधानमंत्री ने सोमवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में कहा, “पूरा देश हमारी ओर देख रहा था। सेना ने जिस तरह से यह ऑपरेशन अंजाम दिया, वह सराहनीय है। हमें अपनी सेना पर गर्व है।” मंत्रियों ने मेज थपथपाकर ऑपरेशन की सराहना की और पीएम मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताया। Operation Sindoor की रणनीति और सफलता 6 मई की रात 1:05 बजे शुरू हुए इस हाईली कोऑर्डिनेटेड स्ट्राइक में मात्र 25 मिनट में दुश्मन के कब्जे वाले इलाके में मौजूद 9 आतंकी कैंप और ट्रेनिंग फैसिलिटीज को तबाह कर दिया गया। भारतीय वायुसेना ने इस मिशन में फ्रांस निर्मित HAMMER Bomb और SCALP Missile जैसे अत्याधुनिक स्टैंड-ऑफ हथियारों का इस्तेमाल किया। इस स्ट्राइक को इस तरह डिज़ाइन किया गया था कि दुश्मन को इसका अंदेशा भी न हो और अधिकतम नुकसान पहुंचाया जा सके। Operation Sindoor” नाम का भावनात्मक संदेश प्रधानमंत्री मोदी ने इस मिशन का नाम ‘सिंदूर’ रखा, जो भारतीय संस्कृति में विवाहित महिलाओं के माथे की पहचान है। यह नाम उन महिलाओं को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने पहलगाम आतंकी हमले में अपने पति खो दिए। यह सिर्फ एक सैन्य ऑपरेशन नहीं बल्कि मानवता और न्याय की लड़ाई का प्रतीक भी है। शहीदों के परिजनों की प्रतिक्रिया हमले में मारे गए सुमित परमार के भतीजे ने कहा, “हम सरकार के आभारी हैं। हमें लगता है कि हमारे परिवार को न्याय मिला है। हम पीएम मोदी से अपील करते हैं कि आतंकवाद का सफाया पूरी तरह हो।” देशभर में सराहना और समर्थन कैबिनेट मंत्रियों ने एकमत से ऑपरेशन सिंदूर का समर्थन किया और प्रधानमंत्री मोदी की नेतृत्व क्षमता की तारीफ की। पूरे देश में इस जवाबी कार्रवाई को सराहा जा रहा है और सोशल मीडिया पर लोग इसे #OperationSindoor और #PrideOfIndia के रूप में ट्रेंड करा रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Operation Sindoor

Operation Sindoor: India Strikes Terror Targets in PoK, China Expresses Concern

भारत ने 7 मई 2025 को एक बड़ा सैन्य ऑपरेशन, जिसे ‘Operation Sindoor’ कहा गया, पाकिस्तान और पाकिस्तान-आधारित कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाते हुए शुरू किया। इस ऑपरेशन का उद्देश्य जम्मू और कश्मीर में हुए पहलगाम हमले में मारे गए भारतीय नागरिकों का बदला लेना था। भारत ने दावा किया कि इस कार्रवाई के तहत जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकवादी संगठनों के ठिकानों को निशाना बनाया गया। Operation Sindoor के प्रमुख तथ्य: Operation Sindoor में भारतीय सेना ने पाकिस्तान-आधारित कश्मीर (PoK) के आतंकी कैंपों पर हमले किए, जिसमें कई आतंकवादी ठिकानों को नष्ट किया गया। यह हमला पाकिस्तान के बालाकोट इलाके में हुआ, जहां आतंकवादी समूहों की गतिविधियाँ जारी थीं। भारत सरकार के मुताबिक, यह हमले पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ किए गए थे और इसने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला लिया, जिसमें 26 भारतीय नागरिकों और एक नेपाली नागरिक की मौत हो गई थी। पाकिस्तान का विरोध: पाकिस्तान ने इस हमले में नागरिकों के मरने की पुष्टि की और भारतीय लड़ाकू विमानों को मार गिराने का दावा किया। भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा (LoC) पर तनाव बढ़ गया है और दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष का खतरा उत्पन्न हो गया है। पाकिस्तान ने इस हमले को उकसावे का कारण बताया और इसके जवाब में कड़े कदम उठाने की धमकी दी। चीन की प्रतिक्रिया: भारत के Operation Sindoor पर चीन ने गहरी चिंता जताई है। चीन के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “चीन भारत की सैन्य कार्रवाई पर खेद व्यक्त करता है और वर्तमान घटनाओं के संबंध में चिंतित है। चीन आतंकवाद के सभी रूपों का विरोध करता है और दोनों देशों से अपील करता है कि वे शांति बनाए रखें और संयम बरतें, ताकि स्थिति और जटिल न हो।” चीन का यह बयान उसकी पहले की नीति के अनुरूप है, जिसमें उसने हमेशा भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने और विवादों को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने की वकालत की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का संदेश: संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन इस बढ़ते तनाव पर नजर बनाए हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने भारत और पाकिस्तान से शांति बनाए रखने और सैन्य संघर्ष से बचने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों देशों से आग्रह किया है कि वे बातचीत के जरिए समाधान खोजें और क्षेत्रीय शांति को खतरे में न डालें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Operation Sindoor: India's Decisive Strike Against Terrorism

Operation Sindoor:भारतीय सेना ने इन दमदार मिसाइलों से मचाया पाकिस्तान में कोहराम

भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से पाकिस्तानी आतंकी ठिकानों पर किया करारा प्रहार Operation Sindoor: India’s Decisive Strike Against Terrorism 7 मई की रात भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पीओके में 9 आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में यह सैन्य अभियान शुरू किया गया, जिसमें अत्याधुनिक हथियारों और मिसाइलों का उपयोग किया गया। SCALP मिसाइल: दुश्मन के किले पर सटीक वार इस अभियान में भारतीय सेना ने SCALP क्रूज मिसाइल का इस्तेमाल किया। फ्रांसीसी-ब्रिटिश मूल की यह मिसाइल लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम है। 250 से 560 किमी तक की रेंज और 1000 किमी प्रति घंटे की गति वाली इस मिसाइल का वजन 1300 किलोग्राम है। राफेल और यूरोफाइटर टाइफून से दागी जाने वाली इस मिसाइल का उपयोग इराक, लीबिया और सीरिया में भी हो चुका है। HAMMER मिसाइल: हवा से जमीन तक अचूक वार फ्रांसीसी कंपनी SAFRAN द्वारा निर्मित HAMMER मिसाइल मध्यम दूरी की मिसाइल है। इसकी रेंज 20 से 70 किलोमीटर तक हो सकती है। GPS और लेजर गाइडेंस से लैस इस मिसाइल में इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग का भी सामना करने की क्षमता है। इसका उपयोग अफगानिस्तान, लीबिया, इराक और माली में किया गया है। राफेल की ताकत: पाकिस्तान के लिए खौफ Rafale fighter jets की गति 2202 किमी प्रति घंटा है, जो पाकिस्तान के JF-17 और J-10 से अधिक है। इसकी फ्यूल कैपेसिटी 11,202 लीटर है और यह 50 हजार फीट तक उड़ सकता है। राफेल में लगी SCALP और HAMMER मिसाइलों के कारण पाकिस्तान में इसका डर हमेशा बना रहता है। ऑपरेशन सिंदूर का संदेश इस अभियान ने न केवल आतंकवादियों को कड़ा संदेश दिया है, बल्कि पाकिस्तान में छिपे आतंकियों के मन में भय भी पैदा किया है। राफेल की मारक क्षमता और आधुनिक मिसाइल तकनीक ने यह साबित कर दिया है कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
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Rahul Gandhi News, Shankaracharya Avimukteshwaranand

कांग्रेस नेता राहुल गांधी सनातन धर्म से बहिष्कृत! शंकराचार्य ने सुनाया बड़ा फैसला

Breaking: Shankaracharya Expels Rahul Gandhi from Sanatan Dharma, Here’s Why उत्तराखंड के बद्रीनाथ स्थित ज्योतिर्मठ से सनातन धर्म को लेकर एक बड़ा बयान सामने आया है। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को हिंदू धर्म से सार्वजनिक रूप से बहिष्कृत करने की घोषणा कर दी है। शंकराचार्य का आरोप है कि राहुल गांधी ने संसद में मनुस्मृति के खिलाफ जो टिप्पणी की, उससे संपूर्ण सनातन धर्मावलंबियों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि संसद में राहुल गांधी ने कहा कि “बलात्कारी को बचाने का फॉर्मूला संविधान में नहीं, आपकी किताब में है” — जो सीधा मनुस्मृति को लेकर कहा गया माना गया। पहले दी गई थी चेतावनी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अनुसार, राहुल गांधी को तीन महीने पहले एक नोटिस भेजा गया था, जिसमें पूछा गया था कि उन्होंने जो बात मनुस्मृति के बारे में कही, वह ग्रंथ में कहां लिखी है? लेकिन राहुल गांधी की ओर से न कोई जवाब आया और न ही उन्होंने क्षमा याचना की। सार्वजनिक बहिष्कार की घोषणा इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, शंकराचार्य ने अब औपचारिक रूप से राहुल गांधी को सनातन धर्म से बहिष्कृत करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि “जो व्यक्ति धर्म ग्रंथों का सार्वजनिक रूप से अपमान करे और पश्चाताप भी न करे, वह हिंदू नहीं रह सकता।” क्या है आगे की राह? यह बयान राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही स्तरों पर बड़ी बहस का कारण बन गया है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या धार्मिक संस्थाओं को किसी राजनेता को धर्म से बहिष्कृत करने का अधिकार है? और क्या राहुल गांधी को अब सफाई देनी चाहिए? देश हरपल इस मुद्दे पर होने वाले हर अपडेट को आप तक पहुंचाता रहेगा।
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India Pakistan tension

War Before War: भारत की स्ट्रैटेजिक स्ट्राइक से बिना लड़े ही कंगाल हो रहा Pakistan

नई दिल्ली: पहलगाम आतंकी हमले (Pahalgam Terror Attack) के बाद भारत ने पाकिस्तान को जवाब देने के लिए जो रणनीति बनाई है, वो किसी मिसाइल या बम से कम नहीं है। ये ‘वॉटर स्ट्राइक’ और ‘फाइनेंशियल स्ट्राइक’ इतनी असरदार साबित हो रही हैं कि पाकिस्तान युद्ध लड़े बिना ही आर्थिक रूप से थकने लगा है। भारत ने सबसे पहले सिंधु जल समझौते (Indus Water Treaty) पर पुनर्विचार शुरू कर दिया और पाकिस्तान के साथ व्यापारिक रिश्तों को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इससे पाकिस्तान को दोहरी मार पड़ी – एक तो पानी का दबाव और दूसरा व्यापारिक घाटा। हर दिन जल रहा अरबों का इंधन:एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान हर रोज़ करीब 4 अरब पाकिस्तानी रुपये सिर्फ बॉर्डर अलर्ट पर खर्च कर रहा है। यानी न युद्ध हुआ, न गोली चली, लेकिन आर्थिक नालियों में उसका खजाना बहता जा रहा है। सिर्फ ‘अलर्ट’ रहने के लिए इतनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। चीन ने भी बनाई दूरी:जहां पहले चीन पाकिस्तान का सबसे करीबी रणनीतिक साझेदार माना जाता था, अब उसी चीन ने धीरे-धीरे दूरी बनानी शुरू कर दी है। बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट ठंडे पड़ चुके हैं और आर्थिक मदद की गारंटी भी नहीं दी जा रही। परमाणु की धमकी… लेकिन जेब खाली:पाकिस्तान की ओर से अक्सर परमाणु हमले की धमकियां दी जाती हैं, लेकिन जिस देश की जेब पहले से ही खाली हो और IMF की शर्तों पर बंधा हो, वो युद्ध की भारी कीमत कैसे चुका पाएगा? यही बड़ा सवाल है। भारत की ‘War Before War’ रणनीति:भारत ने बिना सीमा लांघे, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और सैन्य ऊर्जा को कमज़ोर करने की रणनीति पर अमल शुरू कर दिया है। यही है असली ‘War Before War’ – जिसमें दुश्मन खुद ही थककर मैदान छोड़ दे।
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Pahalgam Terror Attack

Pahalgam Attack: इसी महिला की बहादुरी से सामने आया आतंकी का चेहरा

​ जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए भीषण आतंकी हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की जान चली गई। इस हमले में एक बहादुर महिला की सूझबूझ और साहस ने आतंकियों की पहचान में अहम भूमिका निभाई।​ 📸 महिला ने खींची आतंकी की तस्वीर Pahalgam Attack के दौरान, जब गोलियों की बौछार से लोग इधर-उधर भाग रहे थे, तब एक महिला ने साहस दिखाते हुए हमलावर की तस्वीर अपने मोबाइल फोन से खींच ली। इस तस्वीर में आतंकी का चेहरा स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को उनकी पहचान करने में मदद मिली। इस महिला की बहादुरी की सराहना पूरे देश में हो रही है।​ 🕵️‍♂️ आतंकियों की पहचान और जांच सुरक्षा एजेंसियों ने हमले के पीछे तीन आतंकियों की पहचान की है: असीफ फूजी, सुलेमान शाह और अबू तल्हा। ये सभी आतंकी लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन “द रेजिस्टेंस फ्रंट” (TRF) से जुड़े हुए हैं। हमलावरों ने बायसरण घाटी में पर्यटकों पर अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें कई लोग मारे गए और घायल हुए। ​ 🌍 अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भारत की कार्रवाई हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है। भारत ने पाकिस्तान के नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए हैं और कूटनीतिक स्तर पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमले की निंदा करते हुए दोषियों को सजा दिलाने का संकल्प लिया है। ​ 🧭 निष्कर्ष पहलगाम आतंकी हमले में महिला की बहादुरी ने आतंकियों की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि आम नागरिकों की सतर्कता और साहस से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मदद मिल सकती है।​
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Pahalgam Terror Attack

Cross-Border Marriage Crisis: अब फस गयी पाकिस्तान में ब्याही महिलाएं

नई दिल्ली।Pahalgam Terror Attack के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों की खाई और चौड़ी हो गई है। इस बार सिर्फ राजनयिक बयानबाज़ी नहीं हुई, Diplomatic Fallout इतना गहरा है कि दोनों देशों की सरकारों ने एक-दूसरे के नागरिकों को फौरन देश छोड़ने का आदेश दे दिया है। लेकिन इस एक फैसले ने एक अनदेखी Fault Line को सबके सामने उजागर कर दिया है—उन भारतीय महिलाओं की, जिन्होंने पाकिस्तानियों से शादी की थी। इनमें से अधिकांश महिलाएं जम्मू-कश्मीर और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों से हैं, जो कभी प्यार तो कभी धोखे में सीमा पार चली गई थीं। अब जबकि दोनों देशों के बीच तनातनी चरम पर है, तो पाकिस्तान सरकार ने उन्हें वापसी देने से इनकार कर दिया है। भारत सरकार की तरफ से उन्हें अपने वीज़ा या निवास को लेकर स्पष्ट निर्देश नहीं मिल रहे हैं, जिससे वे Legal Limbo में फंस गई हैं। Cross-Border Marriage Crisis: पाकिस्तान से रिश्ता, भारत में शक भारत में इन महिलाओं को दोहरी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है—एक तरफ वे कानूनी मान्यता के लिए संघर्ष कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उन पर पाकिस्तानी जासूसी एजेंसियों से जुड़े होने का शक किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ऐसे मामलों में महिलाएं कई बार अनजाने में या मजबूरी में Spy Tools बन जाती हैं। Social और National Security Concern बनती महिलाएंजानकारों का मानना है कि ऐसे मामलों में कई बार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI इन महिलाओं का इस्तेमाल ‘स्लीपर सेल’ या ‘soft espionage’ के लिए करती है। उन्हें भारत भेज कर संवेदनशील इलाकों में बसाया जाता है।जब ये महिलाएं लौटती हैं, तो उनके पास Pakistan की रहन-सहन, नेटवर्क और विचारधारा का असर होता है, जो आगे जाकर भारत की सुरक्षा नीति के लिए चिंता बन सकता है।
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Pakistan Terror Support Confession

Pakistan Terror Support Confession पाक के रक्षा मंत्री ने खुद कबूली 30 साल की गलती

Pakistan Terror Support Confession डेस्क रिपोर्ट।“Terror Support”, “Freedom Fighters”, “Nuclear Threats” – ये तीन keywords पिछले 24 घंटे में पाकिस्तान की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय छवि पर सबसे बड़ा सवाल बनकर उभरे हैं। एक ओर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने British चैनल ‘The Sky’ को दिए इंटरव्यू में ये कबूल किया कि उनका देश 30 सालों से आतंकियों को ट्रेनिंग देता रहा है और ये सब अमेरिका और पश्चिमी देशों के कहने पर किया गया, वहीं दूसरी ओर विदेश मंत्री इशाक डार ने आतंकियों को ‘स्वतंत्रता सेनानी’ बताकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया। ❝ Terrorism को पालना एक बड़ी गलती थी, अब हम उसकी सज़ा भुगत रहे – ख्वाजा आसिफ ❞ ब्रिटिश एंकर यल्दा हकीम के एक तीखे सवाल के जवाब में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ(Khawaja Asif) ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान ने वैश्विक शक्तियों के कहने पर कई आतंकी गुटों को सपोर्ट किया और ये गंदा काम 30 साल तक चलता रहा। उन्होंने माना कि अगर पाकिस्तान ने 1980 के दशक में सोवियत यूनियन के खिलाफ जंग में दखल न दिया होता और 9/11 के बाद अमेरिका के साथ जुड़कर आतंक के खिलाफ लड़ाई न लड़ी होती, तो आज उनका देश ‘बेदाग’ होता। आसिफ ने साफ कहा – “हमने एक बहुत बड़ी भूल की और अब इसकी सजा भुगत रहे हैं। पाकिस्तान को एक मोहरे की तरह इस्तेमाल किया गया।” ❝ Nuclear Powers के बीच Conflict दुनिया के लिए खतरा – पाकिस्तान ❞ कश्मीर के पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले को लेकर जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा, तो ख्वाजा आसिफ ने चेतावनी दी कि “अगर भारत ने कोई एक्शन लिया, तो पाकिस्तान जवाब देने को मजबूर होगा।”उन्होंने कहा – “हमारे पास कोई और विकल्प नहीं रहेगा। दोनों देश परमाणु शक्ति संपन्न हैं, इसलिए दुनिया को इस टकराव से डरना चाहिए।”हालांकि उन्होंने ये उम्मीद भी जताई कि मामला बातचीत से सुलझ सकता है। ❝ TRF और LeT? हमें तो नाम भी नहीं पता – पाकिस्तान ❞ जब इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि क्या TRF यानी ‘The Resistance Front’ लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा है, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने इस नाम को पहली बार सुना है। और फिर लश्कर-ए-तैयबा को ही ‘पुराना और अप्रासंगिक’ बता दिया। ❝ ये आतंकी नहीं, Freedom Fighters हो सकते हैं – विदेश मंत्री इशाक डार ❞ दूसरी तरफ पाकिस्तान के विदेश मंत्री और डिप्टी PM इशाक डार (Iswhaq Dar ) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जो कहा, उसने आग में घी डालने का काम किया। उन्होंने कहा – “हमें शुक्रगुजार होना चाहिए कि ये लोग फ्रीडम फाइटर्स भी हो सकते हैं। हमें नहीं पता ये कौन हैं, पर भारत हमेशा अपनी नाकामी का दोष पाकिस्तान पर डालता है।” उन्होंने भारत की तरफ से मिले सबूतों की मांग करते हुए कहा कि “अगर उनके पास कुछ है, तो दुनिया के सामने पेश करें।” साथ ही उन्होंने बांग्लादेश और अफगानिस्तान की अपनी यात्राएं रद्द कर दी हैं ताकि इस मसले पर कूटनीतिक प्रतिक्रिया तैयार की जा सके। 🔴 निष्कर्ष: पाकिस्तान की सरकार के दो शीर्ष मंत्रियों ने इस पूरे मामले में जो बयान दिए हैं, उसने उसकी विदेश नीति, आंतरिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर आतंकियों को 30 साल तक समर्थन देने की स्वीकारोक्ति और दूसरी ओर उन्हें ‘फ्रीडम फाइटर’ कहने की कोशिश – यह स्पष्ट करता है कि पाकिस्तान आज भी उस दोराहे पर खड़ा है, जहाँ उसे तय करना होगा कि वह आतंक का साथ देगा या शांति का। 👉 अधिक अपडेट्स के लिए जुड़े रहें Desh Harpal से।
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Indo -Pak Tension-LoC Firing: पाकिस्तान की हरकतों से बढ़ा तनाव , Indian Army का करारा जवाब

नई दिल्ली/श्रीनगर। LoC firing के जरिए पाकिस्तान ने एक बार फिर अपनी बौखलाहट का प्रदर्शन किया है। गुरुवार देर रात जम्मू-कश्मीर में Line of Control (LoC) के कई क्षेत्रों में पाकिस्तानी सेना ने छोटे हथियारों से अकारण फायरिंग की। हालांकि, Indian Army ने इस कायराना हरकत का मुंहतोड़ जवाब दिया। पाकिस्तानी सेना की इस नापाक कोशिश में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन दोनों देशों के बीच पहले से चल रहा तनाव और गहरा गया है। खासकर Pahalgam Attack के बाद पाकिस्तान की घबराहट और बढ़ गई है, और वह Indian retaliation से डरा हुआ है। इसी डर के चलते वह नियंत्रण रेखा पर उकसावे की कार्रवाई कर रहा है। Pahalgam Attack के बाद से LoC पर मूवमेंट तेज सेना से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, Indian Army ने नियंत्रण रेखा पर हुई गोलीबारी का “सटीक और प्रभावी” जवाब दिया है। गुरुवार रात को पुंछ और राजौरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में पाकिस्तान ने अचानक गोलीबारी शुरू की, लेकिन भारत ने अपने अनुभव और रणनीति के बल पर उसे शांत कर दिया। यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब पहुलगाम आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत के बाद देश में आक्रोश है और केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ zero tolerance की नीति अपनाई है। Indian Army की सतर्कता और रणनीतिक जवाब पाकिस्तान की इस हरकत से यह साफ है कि वह भारत को अस्थिर करने के अपने प्रयासों से बाज नहीं आ रहा है। Indian defence forces पहले से ही हाई अलर्ट पर हैं और ऐसी किसी भी हरकत का तुरंत और करारा जवाब देने को तैयार हैं। सेना के एक अधिकारी ने बताया, “हमारे जवान हर मोर्चे पर सतर्क हैं। LoC पर शांति भंग करने की किसी भी कोशिश का जवाब दिया जाएगा और पाकिस्तान को उसकी भाषा में समझाया जाएगा।” Indo -Pak Tension , लेकिन नियंत्रण में है स्थिति इस घटना के बाद सीमावर्ती गांवों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां मिलकर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं, नागरिकों से अफवाहों से बचने और सुरक्षाबलों का सहयोग करने की अपील की गई है। Desh Harpal की राय:LoC पर पाकिस्तान की यह हरकत उसकी हताशा को दर्शाती है। भारत ने जिस तरह से हर हमले का जवाब संयम और ताकत से दिया है, वह देश की सैन्य क्षमता और रणनीतिक दृढ़ता का प्रमाण है। ऐसे समय में जनता को चाहिए कि वह सेना और सरकार पर भरोसा बनाए रखे, क्योंकि जवाब सिर्फ बंदूक से नहीं, बल्कि नीति और रणनीति से भी दिया जा रहा है
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Delhi SIR Protest: बंगला साहिब के पास प्रदर्शन, ‘ज्ञानेश कुमार गद्दी छोड़ो’ के नारे

दिल्ली में SIR (Special Intensive Revision) को लेकर विरोध तेज होता नजर आ रहा है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को बंगला साहिब गुरुद्वारे के पास प्रदर्शनकारियों ने जुटकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने ‘ज्ञानेश कुमार गद्दी छोड़ो’ के नारे लगाते हुए चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकालने का ऐलान किया। इसे देखते हुए पुलिस ने इलाके में बैरिकेडिंग की और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी। इस प्रदर्शन के केंद्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया है। आंदोलन से जुड़े संगठन इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं और चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। Delhi Protest: बंगला साहिब के पास जुटे प्रदर्शनकारी SIR के विरोध में विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने दिल्ली में प्रदर्शन का आह्वान किया। प्रदर्शनकारियों के जुटने के लिए बंगला साहिब गुरुद्वारे के आसपास, गोल डाकखाना और गोल मार्केट जैसे स्थानों का जिक्र किया गया। आंदोलन से जुड़े लोगों ने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च निकालने की योजना बनाई। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय ध्वज के साथ मार्च निकालने और अपनी मांगें उठाने की बात कही। आयोजकों की योजना के मुताबिक, मार्च रोके जाने की स्थिति में शांतिपूर्ण सभा करने का विकल्प भी रखा गया था। SIR Controversy: आखिर क्यों हो रहा है विरोध? SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची की विशेष जांच और संशोधन की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज जानकारी का सत्यापन करना और सूची को अपडेट करना है। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर कई संगठनों ने चिंता जताई है। प्रदर्शन कर रहे संगठनों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटने का खतरा है। उनका कहना है कि किसी भी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। आंदोलन से जुड़े कुछ संगठनों ने मतदाता सूची से कथित तौर पर हटाए गए 13.41 करोड़ लोगों के नाम और मतदान अधिकार बहाल करने की मांग उठाई है। यह आंकड़ा संगठनों का दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। Election Commission से प्रदर्शनकारियों की क्या मांगें हैं? SIR के विरोध में उतरे संगठनों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं: इन मांगों के जरिए प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग पर दबाव बनाना चाहते हैं। हालांकि, इन मांगों पर आयोग की ओर से किसी नए आधिकारिक फैसले या प्रतिक्रिया की पुष्टि होने पर ही स्थिति स्पष्ट होगी। Delhi Police Alert: बैरिकेडिंग और Traffic Advisory प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने संबंधित इलाकों में बैरिकेडिंग की और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की। चुनाव आयोग की ओर जाने वाले रास्तों पर भीड़ और यातायात की स्थिति को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई। यातायात प्रतिबंधों या रूट डायवर्जन के कारण आम लोगों को परेशानी हो सकती है। ऐसे में इन इलाकों से गुजरने वाले लोगों को निकलने से पहले दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ताजा एडवाइजरी देखनी चाहिए और अतिरिक्त समय लेकर यात्रा करनी चाहिए। पहले भी उठ चुका है SIR का मुद्दा SIR को लेकर दिल्ली में पहले भी विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली है। आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। वहीं, SIR के उद्देश्य और इसके क्रियान्वयन को लेकर जारी बहस में मतदाता सूची की शुद्धता, नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा चुनाव आयोग की जवाबदेही जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। आगे क्या होगा? दिल्ली में इस प्रदर्शन के बाद अब सबकी नजर चुनाव आयोग तक मार्च की स्थिति और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर होने वाली प्रतिक्रिया पर है। पुलिस की ओर से मार्च को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं और चुनाव आयोग इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान देता है या नहीं, यह आगे महत्वपूर्ण रहेगा। फिलहाल, प्रदर्शनकारियों ने SIR के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है। इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया के साथ पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Tiger Shroff

Tiger Shroff Firing Case: कोटा में पकड़े गए 3 आरोपी, ट्रेन के General Coach में पुलिस का ऑपरेशन

मुंबई में बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ (Tiger Shroff) की कार पर फायरिंग की घटना ने सभी को चौंका दिया था। वारदात के बाद आरोपी शहर से निकल गए, लेकिन पुलिस की जांच और लगातार मिल रहे इनपुट के चलते उनकी फरारी ज्यादा लंबी नहीं चल सकी। राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन पर पुलिस ने ट्रेन के जनरल कोच से तीनों आरोपियों को पकड़ लिया। इस पूरे ऑपरेशन में करीब 15 से 20 मिनट लगे। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों को पकड़ने के लिए मुंबई पुलिस से मिली जानकारी, तकनीकी इनपुट और स्थानीय पुलिस की टीमों ने अहम भूमिका निभाई। अब मुंबई पुलिस इस मामले में हमले की वजह और कथित साजिश की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। Tiger Shroff Firing Case: क्या है पूरा मामला? 18 अक्टूबर 2026 की शाम मुंबई के जुहू इलाके में Tiger Shroff की कार पर फायरिंग की घटना सामने आई थी। पुलिस के अनुसार, बाइक पर सवार हमलावरों ने कार को निशाना बनाते हुए कई राउंड फायर किए। इस घटना में टाइगर श्रॉफ सुरक्षित रहे, जबकि उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति को चोटें आईं। घटना के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। मौके से मिले सुराग, आसपास के CCTV फुटेज और संदिग्धों की आवाजाही की जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई। पुलिस यह पता लगाने में जुटी कि हमले की योजना किसने बनाई और इसमें किन लोगों की भूमिका थी। मुंबई से सूरत होते हुए कोटा पहुंचे आरोपी जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि घटना के बाद आरोपी मुंबई से बाहर निकल गए थे। रिपोर्टों के मुताबिक, वे सूरत पहुंचे और फिर ट्रेन से जयपुर की ओर जा रहे थे। पुलिस को शक था कि उनका अगला पड़ाव दिल्ली हो सकता है और वहां से वे नेपाल जाने की कोशिश कर सकते हैं। मुंबई पुलिस से मिले इनपुट के बाद कोटा पुलिस ने रेलवे स्टेशन पर तलाश शुरू की। पुणे-जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस के जनरल कोच में संदिग्धों की पहचान की गई। इसके बाद अलग-अलग टीमों ने मिलकर कार्रवाई की और तीनों को हिरासत में ले लिया। 15 मिनट में पूरा हुआ Kota Police का ऑपरेशन कोटा पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम के मुताबिक, इस कार्रवाई में स्थानीय पुलिस, साइबर सेल और रेलवे से जुड़ी टीमों ने मिलकर काम किया। पुलिस ने ट्रेन और स्टेशन परिसर में तलाश की। करीब 15 से 20 मिनट के भीतर तीनों संदिग्धों को पकड़ लिया गया। इस कार्रवाई की खास बात यह रही कि पुलिस को मुंबई से मिली जानकारी के आधार पर सीमित समय में संदिग्धों तक पहुंचना था। गिरफ्तारी के बाद तीनों को मुंबई पुलिस के हवाले कर दिया गया, जहां उनसे पूछताछ की गई। कौन हैं Tiger Shroff Firing Case के तीन आरोपी? मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रेहान उर्फ सुक्का, ऋतिक कुर्मी उर्फ रोशन और फूल सिंह के रूप में हुई है। पुलिस इन तीनों की कथित भूमिका, आपसी संपर्क और घटना से जुड़े अन्य लोगों के बारे में पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियों को यह भी पता लगाना है कि हमले में इस्तेमाल किए गए हथियार कहां से आए और घटना के पीछे क्या मकसद था। पुलिस ने अदालत में हथियार बरामद करने और कथित साजिश की जांच के लिए आरोपियों की हिरासत मांगी थी। Latest Update: 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत 21 अक्टूबर 2026 को मुंबई की अदालत ने तीनों आरोपियों को 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के जरिए हमले की वजह, हथियारों की बरामदगी और दूसरे संदिग्धों की भूमिका का पता लगाया जाएगा। जांच में कुछ अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस कथित तौर पर हथियारों की सप्लाई और आरोपियों के संपर्कों की कड़ियां जोड़ रही है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होनी बाकी है। अब पुलिस किन सवालों के जवाब तलाश रही है? टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में पुलिस के सामने कई अहम सवाल हैं। हमले की साजिश किसने रची, आरोपियों को किसने मदद दी और घटना के पीछे असली मकसद क्या था—इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। कोटा रेलवे स्टेशन पर हुई गिरफ्तारी ने जांच को आगे बढ़ाने में मदद की है। अब मुंबई पुलिस की पूछताछ और आगे मिलने वाले सबूतों से इस मामले की बाकी कड़ियां स्पष्ट होने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Global Protest

Global Protest Network: फ्रांस से भारत तक प्रदर्शनों की चर्चा, 101 संगठनों पर रिपोर्ट

फ्रांस में जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी मीडिया संस्थान Fox News Digital की एक रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक संगठनों के बीच संपर्कों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। 20 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 13 देशों में फैले 101 संगठन प्रदर्शनों को आयोजित करने, उनके बीच तालमेल बनाने और उनके संदेशों को लोगों तक पहुंचाने में सक्रिय हैं। रिपोर्ट में भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट सामने आने के बाद भारत में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भाजपा ने कांग्रेस और राहुल गांधी से अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ कथित संपर्कों को लेकर सवाल पूछे हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इन आरोपों को राजनीतिक ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है। हालांकि, रिपोर्ट में बताए गए संपर्कों और भारत में प्रदर्शनों को किसी विदेशी नेटवर्क द्वारा सीधे संचालित किए जाने के दावे के बीच अंतर समझना जरूरी है। Fox News Report: 101 संगठनों के Network में कौन-कौन शामिल? पत्रकार Asra Q. Nomani की रिपोर्ट का शीर्षक है, Global ‘Chaos Inc’ grows to 101 groups with plans for new rounds of demonstrations। रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में पहले 54 संगठनों की पहचान की गई थी, जिनकी संख्या बढ़कर 101 हो गई। ये संगठन 13 देशों में फैले बताए गए हैं। रिपोर्ट में छात्र और युवा समूहों, श्रमिक संगठनों, समाजवादी तथा कम्युनिस्ट विचारधारा से जुड़े समूहों और सामाजिक अभियानों का उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि 33 संगठनों का नेतृत्व छात्र या युवा करते हैं। Fox News ने इस नेटवर्क को ‘Red-Green Alliance’ नाम दिया है। रिपोर्ट में ‘Red’ का इस्तेमाल वामपंथी, समाजवादी और कम्युनिस्ट समूहों के लिए, जबकि ‘Green’ का इस्तेमाल इस्लामी संगठनों के संदर्भ में किया गया है। यह रिपोर्ट में इस्तेमाल किया गया वर्गीकरण है। इससे यह अपने आप साबित नहीं होता कि सभी संगठन एक ही नेतृत्व के तहत काम करते हैं। जांच में मुख्य रूप से तीन तरह की गतिविधियों पर ध्यान दिया गया है—प्रदर्शन आयोजित करना, अलग-अलग आंदोलनों के बीच तालमेल बनाना और सोशल मीडिया व मीडिया कवरेज के जरिए उनके संदेशों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाना। India Protest: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाले प्रदर्शनों का जिक्र Fox News की रिपोर्ट में भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों को भी शामिल किया गया है। ये प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों के बीच हुए थे। रिपोर्ट में भारत के साथ फ्रांस, स्पेन और अल्बानिया में चल रहे आंदोलनों का भी उल्लेख है। इसके जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई है कि कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठन अलग-अलग देशों में होने वाले विरोध-प्रदर्शनों को एक साझा राजनीतिक विमर्श से जोड़ रहे हैं। यहां सवाल उठता है कि क्या ये संगठन केवल एक-दूसरे के आंदोलनों का समर्थन कर रहे हैं या उनके आयोजन और रणनीति में भी उनकी भूमिका है? इसका जवाब देने के लिए ठोस साक्ष्यों की जरूरत है। किसी प्रदर्शन के समर्थन में बयान देना, सोशल मीडिया पर उसका प्रचार करना और प्रदर्शनकारियों को निर्देश देकर आंदोलन चलाना अलग-अलग बातें हैं। भारत में हुए प्रदर्शनों को विदेशी संगठन द्वारा सीधे संचालित किए जाने की पुष्टि के लिए स्वतंत्र प्रमाण आवश्यक होंगे। Progressive International का नाम क्यों आया? Fox News की रिपोर्ट में Progressive International का खास तौर पर उल्लेख किया गया है। यह एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसका घोषित उद्देश्य दुनिया भर की प्रगतिशील राजनीतिक शक्तियों और सामाजिक आंदोलनों के बीच सहयोग बढ़ाना है। रिपोर्ट के अनुसार, संगठन ने 16 अक्टूबर 2026 की अपनी ब्रीफिंग में फ्रांस, स्पेन, भारत और अल्बानिया में चल रहे आंदोलनों का एक साथ जिक्र किया था। इसमें इन आंदोलनों के बीच संपर्क बढ़ाने और उन्हें संगठित राजनीतिक शक्ति में बदलने से जुड़े विचार भी सामने आए। Fox News ने इसे अलग-अलग देशों में चल रहे प्रदर्शनों के बीच संभावित राजनीतिक समन्वय के उदाहरण के रूप में पेश किया है। हालांकि, किसी आंदोलन को समर्थन देना और उसके आयोजन को नियंत्रित करना एक जैसी गतिविधियां नहीं हैं। इसलिए Progressive International का नाम रिपोर्ट में आने को भारत में प्रदर्शनों के प्रत्यक्ष संचालन का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता। Rahul Gandhi-Sonia Gandhi की मुलाकात पर BJP ने उठाए सवाल Progressive International को लेकर चर्चा के बीच कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और सोनिया गांधी की संगठन के प्रतिनिधिमंडल से हुई मुलाकात भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई है। अप्रैल 2025 में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नई दिल्ली स्थित 10 जनपथ आवास पर Progressive International के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। उस समय विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई थी। अब भाजपा इसी मुलाकात का हवाला देकर कांग्रेस से सवाल पूछ रही है कि संगठन के प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत में किन मुद्दों पर चर्चा हुई थी और क्या भारत में हुए प्रदर्शनों के साथ कोई समन्वय किया गया था। हालांकि, मुलाकात का होना और उसके आधार पर प्रदर्शनों के आयोजन में कथित भूमिका का आरोप लगाना दो अलग बातें हैं। सार्वजनिक रूप से सामने आई जानकारी से यह साबित नहीं होता कि बैठक में भारत में विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने या किसी सरकार को बदलने की योजना बनाई गई थी। BJP vs Congress: आरोप-प्रत्यारोप से गरमाई राजनीति Fox News की रिपोर्ट सामने आने के बाद भाजपा ने 22 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए अंतरराष्ट्रीय संगठनों और भारत के प्रदर्शनों के बीच कथित संबंधों को लेकर आरोप लगाए। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी Progressive International और अलग-अलग देशों के आंदोलनों के बीच साझा संदेशों का मुद्दा उठाया। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से पूछा कि संगठन के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में क्या बातचीत हुई थी और क्या भारत में हुए प्रदर्शनों के दौरान किसी तरह का समन्वय किया गया था। कांग्रेस ने इन आरोपों को राजनीतिक मुद्दा बताते हुए कहा कि भाजपा कथित वोट चोरी से जुड़े सवालों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। इस विवाद में भाजपा...
Jantar Mantar

Jantar Mantar Case: जमानत के बाद भी CJP नेताओं की मुश्किलें बरकरार, फिर बुलाएगी पुलिस

Jantar Mantar पर प्रदर्शन को लेकर शुरू हुआ विवाद अभी थमता नजर नहीं आ रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस एक बार फिर पूछताछ के लिए बुला सकती है। दोनों नेता पिछले नोटिस पर क्राइम ब्रांच के सामने पेश नहीं हुए थे और उन्होंने इसके लिए अतिरिक्त समय मांगा था। अब पुलिस की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर है। यह मामला 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। CJP के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करना चाहते थे। पार्टी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच विवाद की स्थिति बनी। पिछले Notice पर पेश नहीं हुए CJP नेता मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को पूछताछ के लिए बुलाया था। उन्हें राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय में उपस्थित होना था। हालांकि, सौरव और आशुतोष तय समय पर नहीं पहुंचे और उन्होंने पुलिस से कुछ अतिरिक्त समय मांगा। अब पुलिस उन्हें दोबारा नोटिस जारी कर जांच में शामिल होने के लिए कह सकती है। जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम को लेकर पुलिस पहले ही मामले दर्ज कर चुकी है। जांच एजेंसी प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं और लगाए गए आरोपों की पड़ताल कर रही है। Jantar Mantar Protest से कैसे शुरू हुआ विवाद? 13 अक्टूबर को CJP के नेताओं और समर्थकों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की कोशिश की थी। उनकी प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा था। पार्टी का आरोप था कि SIR प्रक्रिया के कारण मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश की और कुछ लोगों ने बैरिकेडिंग पार की। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इस घटना के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ भी कार्रवाई हुई। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर नियमों के उल्लंघन और पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डालने से जुड़े आरोपों की जांच शुरू की। इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत को करना है। सात दिन बाद Jail से मिली थी राहत सौरव दास और आशुतोष रांका करीब सात दिन न्यायिक हिरासत में रहने के बाद 21 अक्टूबर को जेल से बाहर आए थे। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत ने उन्हें कुछ शर्तों के साथ राहत दी थी। दोनों नेताओं को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया गया था। इसके अलावा, उन्हें शांति बनाए रखने और अदालत की शर्तों का पालन करने का आश्वासन देना पड़ा। दोनों ने यह भी भरोसा दिया था कि जंतर-मंतर को दोबारा अधिकृत प्रदर्शन स्थल घोषित किए जाने तक वहां प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे। भविष्य में विरोध प्रदर्शन संवैधानिक दायरे में करने की बात भी कही गई थी। हालांकि, जेल से रिहाई का मतलब यह नहीं है कि मामले की जांच खत्म हो गई है। पुलिस अपनी जांच के लिए दोनों नेताओं को पूछताछ में शामिल होने के लिए बुला सकती है। दो FIR के बाद Crime Branch कर रही जांच जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम को लेकर दिल्ली के कनॉट प्लेस और संसद मार्ग थानों में दो FIR दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इनमें सरकारी आदेश की अवहेलना, कथित अनधिकृत प्रवेश और पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डालने जैसे आरोप शामिल बताए गए हैं। बाद में दोनों मामलों की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई। अब जांच एजेंसी घटना से जुड़े तथ्यों और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। CJP के एक अन्य सदस्य अजिंक्य शिंदे को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था। ऐसे में जांच का दायरा केवल दो नेताओं तक सीमित नहीं है। पुलिस आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर करेगी। अब आगे क्या होगा? फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि सौरव दास और आशुतोष रांका पुलिस के अगले नोटिस पर कब पेश होते हैं। पूछताछ के दौरान पुलिस प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम, प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश के आरोपों और दर्ज FIR से संबंधित सवाल पूछ सकती है। दूसरी ओर, CJP मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी मांगें उठा रही है। ऐसे में यह मामला राजनीतिक विरोध, प्रदर्शन की अनुमति और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों के बीच चर्चा में बना हुआ है। अब सबकी नजर दिल्ली पुलिस की अगली कार्रवाई और जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर है। फिलहाल, दोनों नेताओं के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Jio Platforms IPO

Jio Platforms IPO: तीसरे दिन 6 गुना पार Subscription, QIBs ने लगाई ताबड़तोड़ बोली

मुकेश अंबानी की कंपनी Jio Platforms के IPO को लेकर शेयर बाजार में काफी चर्चा है। इश्यू के तीसरे दिन निवेशकों ने जमकर बोली लगाई और सब्सक्रिप्शन का आंकड़ा 6 गुना के पार पहुंच गया। सबसे ज्यादा उत्साह बड़े संस्थागत निवेशकों (QIBs) में देखने को मिला, जिन्होंने अपनी कैटेगरी में 13 गुना से ज्यादा बोली लगाई। अब निवेशकों की नजर IPO के अलॉटमेंट और शेयर बाजार में इसकी लिस्टिंग पर है। Jio Platforms IPO को निवेशकों का शानदार रिस्पॉन्स Jio Platforms का करीब 30,213 करोड़ रुपये का IPO 21 अक्टूबर 2026 को खुला था। इसमें निवेश करने का आखिरी मौका 23 अक्टूबर को है। शुरुआती दो दिनों से ही इस इश्यू को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा था। तीसरे दिन सुबह 9:20 बजे तक IPO का सब्सक्रिप्शन 5.72 गुना पहुंच चुका था और कारोबार आगे बढ़ने के साथ इसमें और तेजी देखने को मिली। IPO में इतनी मजबूत मांग ने इसे शेयर बाजार की प्रमुख चर्चाओं में शामिल कर दिया है। हालांकि, अंतिम सब्सक्रिप्शन आंकड़े और शुरुआती कारोबारी आंकड़ों में अंतर हो सकता है। QIBs ने 13 गुना से ज्यादा लगाई बोली इस IPO में सबसे ज्यादा दिलचस्पी Qualified Institutional Buyers यानी QIBs ने दिखाई। इस श्रेणी में बड़े संस्थागत निवेशक शामिल होते हैं, जैसे म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय संस्थान। दूसरे दिन के अंत तक QIB कैटेगरी 13.29 गुना सब्सक्राइब हो चुकी थी। वहीं, गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) की ओर से भी अच्छी मांग आई। रिटेल निवेशकों ने भी इश्यू में भागीदारी दिखाई। संस्थागत निवेशकों की मजबूत बोली से IPO को लेकर बाजार का उत्साह साफ नजर आता है। हालांकि, ज्यादा सब्सक्रिप्शन का मतलब यह नहीं है कि शेयर की लिस्टिंग पर निश्चित रूप से मुनाफा होगा। भारत के सबसे बड़े IPO में शामिल Jio Platforms का इश्यू Jio Platforms का करीब 30,213 करोड़ रुपये का सार्वजनिक निर्गम आकार के लिहाज से भारत के सबसे बड़े IPO में शामिल है। इससे पहले Hyundai Motor India का करीब 27,859 करोड़ रुपये का IPO देश का सबसे बड़ा इश्यू था। Platforms का कारोबार टेलीकॉम और डिजिटल सेवाओं से जुड़ा है। कंपनी मोबाइल कनेक्टिविटी, इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बड़ी संख्या में ग्राहकों तक पहुंच रखती है। डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल और कंपनी की बाजार में मौजूदगी के कारण इस IPO पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। Jio Platforms IPO का Price Band और जरूरी तारीखें निवेशकों के लिए IPO से जुड़ी जरूरी जानकारी यहां दी गई है: अलॉटमेंट और लिस्टिंग की तारीखों में बदलाव संभव है। निवेशकों को अंतिम जानकारी के लिए कंपनी और स्टॉक एक्सचेंज की आधिकारिक घोषणाएं देखनी चाहिए। GMP पर भी निवेशकों की नजर IPO में मजबूत सब्सक्रिप्शन के बीच ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) को लेकर भी निवेशकों की दिलचस्पी रहती है। GMP से बाजार में शेयर की संभावित लिस्टिंग कीमत को लेकर एक संकेत मिल सकता है, लेकिन यह आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। लिस्टिंग के दिन शेयर किस भाव पर खुलेगा, यह बाजार की स्थिति, निवेशकों की मांग और कंपनी के मूल्यांकन समेत कई बातों पर निर्भर करेगा। इसलिए सिर्फ GMP देखकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। क्या Jio Platforms IPO में निवेश करना सही रहेगा? IPO को मिल रहा शानदार रिस्पॉन्स निश्चित रूप से चर्चा का विषय है, लेकिन निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार की संभावनाओं और शेयर के मूल्यांकन को समझना जरूरी है। निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि IPO में आवेदन करने से शेयर अलॉट होने की गारंटी नहीं होती। इसी तरह, शेयर अलॉट होने के बाद लिस्टिंग पर फायदा होगा या नुकसान, यह पहले से तय नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, Jio Platforms IPO में QIBs की मजबूत भागीदारी ने बाजार का ध्यान खींचा है। अब सबकी नजर सब्सक्रिप्शन के अंतिम आंकड़ों, शेयर अलॉटमेंट और संभावित लिस्टिंग पर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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