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Pahalgam Terror Attack

Pahalgam Terror Attack के बाद Pakistan Army Chief को अपने ही देश में झेलना पड़ा विरोध

📰 Desh Harpal | राष्ट्रीय समाचार इस्लामाबाद और पहलगाम के बीच तनाव की कड़ी जुड़ती दिख रही है। Pahalgam Terror Attack- पहलगाम में मंगलवार को हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की मौत के बाद, Pakistan Army Chief असीम मुनीर (General Asim Munir) एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। दरअसल, इस हमले से ठीक पाँच दिन पहले उन्होंने इस्लामाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कश्मीर को लेकर एक उकसावे वाला बयान दिया था, जिसे भारत ही नहीं, अब उनके अपने देश के सोशल मीडिया यूज़र्स भी खारिज कर रहे हैं। मुनीर ने अपने भाषण में कश्मीर को पाकिस्तान की “गर्दन की नस” बताते हुए कहा था, “हम इसे नहीं भूलेंगे और अपने कश्मीरी भाइयों को संघर्ष में अकेला नहीं छोड़ेंगे।” उन्होंने भारत-पाक विभाजन के पीछे दो-राष्ट्र सिद्धांत को भी सही ठहराते हुए कहा, “हमारे पूर्वजों ने पाकिस्तान इसलिए बनाया क्योंकि हम हिंदुओं से पूरी तरह अलग थे – हमारी परंपराएं, धर्म, सोच, और रीति-रिवाज सब अलग हैं।” लेकिन पहलगाम की इस क्रूर घटना ने उनके इस बयान को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर कई पाकिस्तानी यूज़र्स ने उन्हें घेरते हुए पूछा है कि क्या कश्मीर को लेकर इस तरह की भड़काऊ बातें करना ही समाधान है? कई लोगों ने यह भी कहा कि जब पाकिस्तान खुद आंतरिक उथल-पुथल से जूझ रहा है, तब ऐसे बयानों से क्षेत्रीय शांति को खतरा पैदा करना गैर-जिम्मेदाराना है। एक पाकिस्तानी ट्विटर यूजर ने लिखा, “जब मुल्क में खुद रोटी नसीब नहीं हो रही, तब दूसरों की ‘गर्दन की नस’ पकड़ने की बात करना बेवकूफी नहीं तो और क्या है?” वहीं एक और यूजर ने तीखा सवाल दागा, “आपके बयान के बाद ही 26 बेगुनाह लोग मारे गए। क्या ये ‘भाईचारा’ है?” भारत में इस हमले को लेकर ग़ुस्सा है ही, लेकिन अब पाकिस्तान के भीतर से भी असीम मुनीर को जवाब मिलना यह दर्शाता है कि केवल भारत ही नहीं, उनके अपने देशवासी भी अब युद्धोन्माद और धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति से थक चुके हैं। 📌 Desh Harpal पर पढ़ते रहिए ऐसे ही निर्भीक और राष्ट्रवादी खबरें।
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Pahalgam Attack Live

Pahalgam Attack Live: पाकिस्तान में बंद होगा भारतीय उच्चायुक्त, सिंधु जल समझौता रोका गया

23 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की आपात बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में भारत की सुरक्षा और पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय निम्नलिखित हैं:​ यह बैठक लगभग तीन घंटे तक चली और इसमें लिए गए निर्णयों से स्पष्ट है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है।​ पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के कड़े कदम
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Pahalgam terror attack

Pahalgam Terror Attack में शहीद Navy Officer Lt. Vinay Narwal को पत्नी ने दी अंतिम विदाई, कांप उठी हर आंख

भारतीय नौसेना के OFFICER लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की पत्नी ने अपने पति को भावभीनी विदाई दी, जो पहलगाम आतंकी हमले में शहीद हो गए थे। दोनों की शादी 16 अप्रैल को हुई थी।हाथ जोड़कर विनती कर रही थीं, “मेरे पति को छोड़ दो!” लेकिन क्रूर आतंकियों ने एक न सुनी और गोलियों से भून दिया। इन आसुओं और चीख का जिम्मेदार कौन? Lt. Vinay Narwal की पत्नी के दर्द को और उनकी हालत को देखिए! महज 6 दिन पहले उनकी शादी हुई थी और हनीमून के लिए वे कश्मीर के पहलगाम गए थे।
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Pahalgam terror attack

Pahalgam terror attack: ‘चाय-पंक्चर-ढाबा-पौनी’, क्या इन पर भरोसा बना इंटेलिजेंस चूक

Intelligence Failure in Pahalgam? Sleeper Cells, Local Informants & TRF Network Exposed Pahalgam terror attack- Intelligence Failure एक बार फिर Jammu-Kashmir की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकवादी हमले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आतंकियों के पास सुरक्षा ढांचे, पुलिस मूवमेंट और इलाके की बारीक जानकारियां पहले से मौजूद थीं। मंगलवार दोपहर हुए इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई, जबकि 17 लोग घायल हुए। हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की फ्रंट विंग The Resistance Front (TRF) ने ली है। सूत्रों का मानना है कि इस हमले की योजना बड़ी बारीकी से बनाई गई थी। आतंकियों को न सिर्फ गश्त की टाइमिंग की जानकारी थी, बल्कि वे जानते थे कि किस समय सुरक्षा बल मौके पर नहीं होंगे। Sleeper Cells ने आतंकियों को लोकल मूवमेंट, पुलिस चौकी की दूरी और पर्यटकों की मौजूदगी के बारे में पूरी सूचना दी थी। जिन चाय वालों, ढाबा संचालकों, पंक्चर मेकेनिकों और Mule-Pony Operators को आमतौर पर शक के दायरे से बाहर रखा जाता है, वहीं अब सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का कारण बनते जा रहे हैं। इन स्थानीय लोगों को पहचानना मुश्किल होता है, क्योंकि वे क्षेत्रीय भाषा जानते हैं, इलाके के भूगोल से वाकिफ हैं और पर्यटकों के साथ सहजता से घुलमिल जाते हैं। Retired Defence Expert Capt. Anil Gaur का कहना है कि ऐसे Sleeper Cells लंबे समय से घाटी में सक्रिय हैं। साल 2020 में भारतीय खुफिया एजेंसियों ने ISI और जैश-ए-मोहम्मद के एक ऑडियो इंटरसेप्ट से यह खुलासा किया था कि कैसे पंक्चर की दुकानें, ढाबे और चाय स्टॉल आतंकियों के मददगार के रूप में काम कर रहे हैं। सड़क किनारे प्लास्टिक में हथियार छिपाने, संचार यंत्र रखने और क्रॉस फायरिंग के लिए चुनी गई जगहों की प्लानिंग बाकायदा पाकिस्तान की एजेंसियों द्वारा की जाती है। Why this matters now? क्योंकि पहलगाम जैसे संवेदनशील इलाके में इतनी बड़ी संख्या में पर्यटकों की मौजूदगी के बावजूद सुरक्षा बलों की गैरमौजूदगी और आतंकियों की सटीक रणनीति दर्शाती है कि ground intelligence बुरी तरह फेल हुई है। सुरक्षा बलों के विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि हमले के वक्त कोई क्रॉस फायरिंग नहीं हुई, क्योंकि आस-पास कोई सुरक्षा बल मौजूद ही नहीं था। ये भी देखा गया कि आतंकी घोड़ों, खच्चरों और ढाबों के बीच से निकले, लेकिन इन पर किसी को शक नहीं हुआ। यही नहीं, हमला होने के काफी देर बाद सुरक्षा बल मौके पर पहुंचे – तब तक आतंकी जंगलों की ओर भाग चुके थे। घटना की एक और चिंताजनक बात यह है कि आतंकी ढाबा संचालकों और उनके कर्मचारियों को टारगेट नहीं कर रहे थे – इसका मतलब साफ है कि वे ‘अपने लोग’ थे या उन्हें पहले से सावधान किया गया था। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि ऐसी घटनाएं आतंकियों की गहरी local network intelligence की ओर इशारा करती हैं। Conclusion:अब वक्त आ गया है कि Jammu-Kashmir में चाय बेचने वालों, ढाबा संचालकों और घोड़ा-खच्चर वालों पर भी सतर्क नजर रखी जाए। हर ‘Local’ को ‘Friendly’ मान लेना अब महंगा साबित हो सकता है। सुरक्षा एजेंसियों को पुराने खांचे से बाहर आकर Hybrid Militants और Sleeper Informants की पहचान करनी होगी, नहीं तो अगला हमला और भी ज्यादा विनाशकारी हो सकता है।
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PahalgamTerrorist Attack

PahalgamTerrorist Attack: सऊदी से लौटे पीएम मोदी ने एयरपोर्ट पर ही कि डोभाल-जयशंकर से बैठक

(Desh Harpal के लिए विशेष रिपोर्ट): Pahalgam Terrorist Attack – जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत पर्यटन स्थल पहलगाम में मंगलवार को एक दिल दहला देने वाला आतंकी हमला हुआ, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई। मरने वालों में बड़ी संख्या में पर्यटक शामिल थे, जो छुट्टियां बिताने पहलगाम पहुंचे थे। आतंकियों ने चुन-चुनकर लोगों को निशाना बनाया, जिससे पूरे देश में शोक और आक्रोश की लहर दौड़ गई है। इस हमले की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi अपना विदेश दौरा बीच में छोड़कर भारत लौट आए। एयरपोर्ट पर उतरते ही उन्होंने National Security Advisor अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ आपात बैठक की और हमले की पूरी जानकारी ली। इसके बाद पीएम मोदी ने कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की हाई-लेवल मीटिंग बुलाई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस हमले की निंदा हो रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि “कश्मीर से आ रही खबरें बेहद दुखद हैं। आतंक के खिलाफ अमेरिका, भारत के साथ खड़ा है।” उन्होंने पीड़ित परिवारों के लिए शांति की प्रार्थना की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin, इजरायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu, और इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni ने भी भारत के प्रति एकजुटता जताई है और हमले की कड़ी निंदा की है। इन सभी नेताओं ने कहा कि आतंक के खिलाफ लड़ाई में भारत अकेला नहीं है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस हमले की योजना सीमापार से रची गई थी और इसका उद्देश्य भारत की Tourism Industry और शांति व्यवस्था को नुकसान पहुंचाना था। घटनास्थल पर सेना और सुरक्षाबल सक्रिय हैं और इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है। भारत सरकार ने यह भी संकेत दिए हैं कि इस हमले का कड़ा जवाब दिया जाएगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। Desh Harpal की विशेष टिप्पणी:एक ओर भारत अपनी Soft Power और पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर आतंकियों की यह कायराना हरकत दर्शाती है कि शांति से उन्हें सबसे ज़्यादा डर लगता है। यह हमला सिर्फ जम्मू-कश्मीर पर नहीं, बल्कि पूरे भारत पर किया गया हमला है।
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Congress

Judicial Politics और Congress का ‘संविधान बचाओ’ ड्रामा – निशिकांत दुबे का तगड़ा वार

(Desh Harpal l News Desk):BJP सांसद निशिकांत दुबे ने एक बार फिर Congress पर करारा हमला बोला है, लेकिन इस बार उनका निशाना बना एक ऐसा नाम जिसे लेकर राजनीति और न्यायपालिका के संबंधों पर गंभीर सवाल उठाए जा सकते हैं – Justice Baharul Islam. निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया और संसद में Judicial Politics और Congress का ‘संविधान बचाओ’ ड्रामा – निशिकांत दुबे का तगड़ा वार की संविधान बचाओ मुहिम को ‘मजेदार कहानी’ बताते हुए तंज कसा कि Judicial Politics और Congress का ‘संविधान बचाओ’ ड्रामा – निशिकांत दुबे का तगड़ा वारही वो पार्टी है जो जब सत्ता में थी, तब उसने कैसे न्यायपालिका का अपने हिसाब से इस्तेमाल किया। उन्होंने Justice Baharul Islam का उदाहरण देते हुए कहा: “1977 में जब इंदिरा गांधी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे, तब Baharul Islam ने वह सभी केस तन्मयता से समाप्त कर दिए। इसके इनामस्वरूप कांग्रेस ने उन्हें 1983 में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर करवा कर तीसरी बार राज्यसभा में भेज दिया।” निशिकांत दुबे के इस बयान की पुष्टि सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट से भी होती है, जहाँ के अनुसार: निशिकांत दुबे ने इस इतिहास को उजागर करते हुए पूछा कि “क्या यही है कांग्रेस की न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा?” इस बयान के जरिए BJP सांसद ने न केवल कांग्रेस की राजनीतिक नीयत पर सवाल उठाया, बल्कि वर्तमान में जारी Judiciary vs Politics बहस को भी एक नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि ये पार्टी सिर्फ जब विपक्ष में होती है, तभी उसे संविधान और न्यायपालिका की याद आती है। अब देखना ये होगा कि कांग्रेस इस गंभीर आरोप का क्या जवाब देती है। लेकिन इतना तो तय है कि Baharul Islam का यह केस एक बार फिर Judicial Appointments और Political Rewards के बीच की ‘Thin Line’ को लोगों के सामने ला रहा है।
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Nishikant Dubye

Supreme Court, Contempt, Nishikant Dubey – अब कानूनी घेरे में घिरते दिख रहे हैं बीजेपी सांसद?

नई दिल्ली।Supreme Court के खिलाफ की गई कथित ‘अवमाननापूर्ण टिप्पणी’ अब बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकती है। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब वरिष्ठ अधिवक्ता शिवकुमार त्रिपाठी ने देश के Attorney General (एटॉर्नी जनरल) को एक आधिकारिक चिट्ठी भेजकर निशिकांत दुबे के खिलाफ Contempt of Court (कोर्ट की अवमानना) की कार्यवाही की अनुमति मांगी। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब दुबे ने उच्चतम न्यायालय के एक आदेश को लेकर आपत्ति जताते हुए एक सोशल मीडिया पोस्ट में कथित तौर पर ऐसी टिप्पणी की, जिसे न्यायपालिका के सम्मान और स्वायत्तता पर सीधा हमला माना जा रहा है। शिवकुमार त्रिपाठी की इस चिट्ठी में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ इस तरह की सार्वजनिक टिप्पणियां न केवल अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि आम जनता में न्यायिक व्यवस्था के प्रति विश्वास को भी कमजोर करती हैं। उन्होंने मांग की है कि सांसद दुबे पर Contempt of Court Act, 1971 के तहत कार्यवाही होनी चाहिए। त्रिपाठी ने चिट्ठी में यह भी उल्लेख किया है कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते निशिकांत दुबे को न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा का सम्मान करना चाहिए था, न कि उस पर उंगली उठानी चाहिए। हालांकि, इस मामले पर अब तक दुबे की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन यह साफ है कि अगर एटॉर्नी जनरल इस चिट्ठी को गंभीरता से लेते हैं और सहमति देते हैं, तो निशिकांत दुबे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना की विधिवत सुनवाई शुरू हो सकती है। इस प्रकरण ने एक बार फिर Judiciary vs Legislature की पुरानी बहस को हवा दे दी है, जिसमें यह सवाल उठ रहा है कि क्या लोकसभा सदस्य न्यायपालिका की आलोचना की आड़ में अपनी सीमाएं लांघ रहे हैं? अब सबकी निगाहें Attorney General की प्रतिक्रिया और Supreme Court के रुख पर टिकी हैं। क्या यह मामला आने वाले दिनों में संसद और अदालत के बीच टकराव का कारण बनेगा? देश हरपल इस प्रकरण से जुड़ी हर अहम जानकारी आपको सबसे पहले देगा।
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West Bengal Riots, Murshidabad Violence

West Bengal Riots: मुर्शिदाबाद से मालदा तक बेघर हुए हिंदू परिवार, ममता सरकार पर उठे गंभीर सवाल”

(Desh Harpal l विशेष रिपोर्ट): West Bengal Riots, Murshidabad Violence, Hindu Refugees, Detention Camp Allegations West Bengal के Murshidabad जिले में दंगों के बाद हालात इतने बिगड़ गए कि सैकड़ों Hindu Families को जान बचाकर Malda के शरणार्थी शिविरों में पनाह लेनी पड़ी। पर अफसोस की बात यह रही कि जिस सरकार से उन्हें सुरक्षा की उम्मीद थी, उसी के तंत्र ने उन्हें ‘डिटेंशन कैंप’ जैसे माहौल में कैद कर दिया। Murshidabad Riots के दौरान, बड़ी संख्या में दंगाई भीड़ ने हिंदू घरों और दुकानों को निशाना बनाया। जब ये लोग जान बचाकर Malda पहुंचे, तो उन्हें सरकारी कैंपों में रखा गया—जहां उनके साथ मानवीय व्यवहार की जगह उन्हें धमकियों और निगरानी का सामना करना पड़ा। Refugees ने State Human Rights Commission, Mahila Aayog और यहां तक कि राज्यपाल तक को अपनी पीड़ा सुनाई। सबसे चौंकाने वाला हिस्सा ये रहा कि जब मीडिया इस मुद्दे को रिपोर्ट करने पहुंचा, तो उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया। IPS Officer Faisal Raza ने कोर्ट के किसी कथित आदेश का हवाला देकर मीडिया कवरेज पर रोक लगाई, लेकिन जब उनसे आदेश दिखाने की मांग की गई तो वो टालमटोल और धमकियों पर उतर आए। BJP Leader Suvendu Adhikari ने इन शिविरों को ‘Detention Camps’ बताया और कहा, “सरकार ने इन शरणार्थियों को संवेदनशील क्षेत्र में राहत देने की बजाय जेल जैसा ट्रीटमेंट दिया है। करीब 400 लोग अपने घर छोड़कर यहां आए हैं और अब उन्हें कैद की तरह रखा जा रहा है।” Congress ने भी राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की। इस बीच सबसे गंभीर सवाल यह है कि – मिडिया की टीम ने जब इन कैंपों की जमीनी सच्चाई जानने की कोशिश की, तो कई स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्हें Forced Silence में रखा गया है। न मीडिया से बात करने की अनुमति है, न ही बाहर किसी को बुलाने की। ये हालात न सिर्फ एक राज्य की विफलता को दिखाते हैं, बल्कि ये भी दर्शाते हैं कि भारत में अपने ही देश में कुछ नागरिक खुद को Refugee जैसा महसूस कर रहे हैं। Note: यह मामला सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि मानवता का भी है। देश को इस पर ध्यान देने की सख्त ज़रूरत है। (पांचजन्य से साभार)
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SupremeCourtHearingControversy; Supreme Court

वक्फ कानून पर SC से स्टे नहीं, सरकार को 7 दिन का समय , डिनोटिफाई करने और नई नियुक्तियों पर रहेगी रोक

Waqf Act Hearing | Supreme Court Latest Update | Centre Seeks Time नई दिल्लीl देश हरपल रिपोर्ट — Waqf Act को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन अहम सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने Supreme Court से जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। Chief Justice of India (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक अगला आदेश नहीं आता, तब तक status quo यानी वर्तमान स्थिति बनी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि केंद्र सरकार जब तक अपना जवाब दाखिल नहीं करती, तब तक Waqf Board में किसी भी प्रकार की नियुक्ति नहीं की जाएगी। साथ ही यह भी साफ किया कि waqf properties को लेकर किसी भी Collector द्वारा कोई नया आदेश पारित नहीं होगा। Chief Justice ने कहा, “जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक बोर्ड या काउंसिल में कोई नई नियुक्ति नहीं हो सकती। और अगर किसी संपत्ति का पंजीकरण 1995 Waqf Act के तहत हुआ है, तो उन संपत्तियों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।” CJI ने यह भी कहा कि कार्यपालिका को प्रशासनिक निर्णय लेने का अधिकार है जबकि न्यायपालिका न्यायिक फैसले लेती है। इसी संदर्भ में उन्होंने 2013 Waqf Amendment Act को चुनौती देने वाली याचिका पर कुछ विशेष पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने की अनुमति दी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारें और संबंधित वक्फ बोर्ड को 7 दिनों के भीतर अपना official response दाखिल करना होगा। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को केवल 5 याचिकाएं दाखिल करने की अनुमति होगी। इस पूरे मामले को कोर्ट ने “विशेष प्रकृति” का बताते हुए कहा है कि सुनवाई निष्पक्ष और त्वरित होगी। फिलहाल, वक्फ संपत्तियों की मौजूदा स्थिति यथावत बनी रहेगी और किसी भी तरह का नया प्रशासनिक या कानूनी हस्तक्षेप रोक दिया गया है। Desh Harpal की विशेष रिपोर्ट में हम आने वाले दिनों में केंद्र सरकार और वक्फ बोर्ड के जवाबों की विस्तृत जानकारी भी देंगे। यह मामला न सिर्फ कानूनी बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण बनता जा रहा है।
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National Herald Case ED

National Herald Case: ED ने सोनिया-राहुल गांधी पर चार्जशीट दायर, कांग्रेस बोली – ‘ये बदले की राजनीति है’

16 अप्रैल 2025 – प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत सात लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को “राजनीतिक बदले और डराने की कोशिश” बताया है और बुधवार को देशभर में ED दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन की घोषणा की है। चार्जशीट में कौन-कौन? ED ने 9 अप्रैल को विशेष PMLA अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें जिन लोगों के नाम शामिल हैं, वे हैं: अदालत ने चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए मामले की अगली सुनवाई 25 अप्रैल को तय की है।क्या है नेशनल हेराल्ड केस? यह मामला एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की संपत्तियों को लेकर है, जो National Herald अखबार का प्रकाशन करती है। ED का आरोप है कि कांग्रेस ने AJL को ₹50 लाख में यंग इंडियन नाम की कंपनी के ज़रिए अधिग्रहित किया, जबकि उसकी संपत्ति की कीमत ₹2,000 करोड़ से ज्यादा थी। सोनिया गांधी और राहुल गांधी यंग इंडियन में बहुमत हिस्सेदारी रखते हैं। ED ने हाल ही में ₹661 करोड़ की संपत्ति दिल्ली, मुंबई और लखनऊ में जब्त करने के नोटिस भी दिए हैं। जांच की शुरुआत कैसे हुई? ये जांच भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की 2013 में दाखिल याचिका के आधार पर शुरू हुई थी। इसके बाद दिल्ली की एक अदालत ने इनकम टैक्स विभाग को जांच की अनुमति दी थी। ED ने कहा कि जांच के दौरान उन्हें ₹18 करोड़ के फर्जी डोनेशन, ₹38 करोड़ के फर्जी किराया और ₹29 करोड़ के फर्जी विज्ञापन की जानकारी मिली।कांग्रेस ने क्या कहा? कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “यह पूरा मामला फर्जी है। ना कोई पैसा ट्रांसफर हुआ, ना कोई संपत्ति बेची गई। फिर भी सरकार इसे मनी लॉन्ड्रिंग बता रही है।” केसी वेणुगोपाल ने कहा, “मोदी-शाह सरकार जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए विपक्ष को टारगेट कर रही है। ये केस राजनीति को दबाने का तरीका है।” जयराम रमेश ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “नेशनल हेराल्ड की संपत्तियों की जब्ती कानून की आड़ में किया गया अपराध है।” भाजपा का पलटवार भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, “जो लोग भ्रष्टाचार और जनता की संपत्ति की लूट में शामिल रहे हैं, अब उन्हें जवाब देना होगा। ED का मतलब अब ‘एंटाइटलमेंट टू डकैती’ नहीं है।”कोर्ट की टिप्पणी विशेष अदालत ने कहा कि PMLA की कार्रवाई के साथ-साथ CBI की जांच से जुड़ा मामला भी इसी अदालत में स्थानांतरित किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए आदेश जिला जज को देना होगा। DeshHarpal पर पढ़ते रहिए देश-दुनिया की सबसे सटीक और सरल खबरें।
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इंदौर में ‘Gen Z Protest 2.0’ जारी, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़े युवा

इंदौर में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर युवाओं का आंदोलन जारी है। 5 अक्टूबर से प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने अपने आंदोलन को ‘Gen Z Protest 2.0’ नाम दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई के बावजूद वे अपनी मांग को लेकर पीछे नहीं हटेंगे। 19 अक्टूबर को भंवरकुआं चौराहे पर प्रदर्शन के दौरान कुछ युवाओं ने पेट्रोल डालकर आत्मदाह की कोशिश की थी। हालांकि, पुलिस ने उन्हें समय रहते हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इसके बाद उन्हें करीब 24 घंटे तक नजरबंद रखा गया। रिहा होने के बाद युवाओं ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। प्रदर्शन से पहले सोशल मीडिया के जरिए युवाओं से जुटने की अपील की गई थी। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के हाथों में संविधान और महात्मा गांधी की तस्वीरें थीं। इसके अलावा, उन्होंने अलग-अलग संदेश लिखी तख्तियों के जरिए अपनी मांगें भी रखीं। 50-60 पुलिसकर्मियों ने हटाया, प्रदर्शनकारी का दावा प्रदर्शनकारी योगित गुप्ता के मुताबिक, 19 अक्टूबर को वह अपने 10 साथियों के साथ भंवरकुआं चौराहे पर पहुंचे थे। उनके पास पेट्रोल से भरी बोतलें थीं और वे आत्मदाह करने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान करीब 50 से 60 पुलिसकर्मियों ने उन्हें बलपूर्वक वहां से हटा दिया। योगित ने दावा किया कि पुलिस ने उन्हें आत्मदाह करने से रोकने के बाद करीब 24 घंटे तक नजरबंद रखा। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई के बावजूद उनका आंदोलन खत्म नहीं हुआ है और वे अपनी मांग को लेकर आगे भी प्रदर्शन जारी रखेंगे।
Neha Bora

Neha Bora High Court: ‘न हमने कॉल दिया, न वहां गए’, CJP प्रदर्शन से किया किनारा

दिल्ली में CJP प्रदर्शन को लेकर विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। 22 अक्टूबर को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नेहा बोरा (Neha Bora) ने साफ कहा कि उन्होंने कनॉट प्लेस में हुए प्रदर्शन के लिए न तो कोई कॉल दिया और न ही वह वहां गई थीं। उनके इस बयान के बाद CJP प्रदर्शन और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। Neha Bora की ओर से अदालत में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए। उनका कहना है कि जिस प्रदर्शन से उन्हें जोड़कर कार्रवाई की गई, उसमें उनकी भूमिका को लेकर लगाए गए आरोप सही नहीं हैं। अब इस मामले में सबकी नजर हाईकोर्ट की सुनवाई और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर है। Delhi High Court में नेहा बोरा ने क्या कहा? दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नेहा बोरा की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में होने वाले प्रदर्शन का आह्वान नहीं किया था। उन्होंने यह भी कहा कि वह वहां मौजूद नहीं थीं। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष के मुताबिक, नेहा को हिरासत में लेने की प्रक्रिया और उसके बाद जारी किए गए नोटिस के लिए पर्याप्त आधार नहीं बताया गया। नेहा बोरा ने अदालत में पुलिस की ओर से जारी उस नोटिस को भी चुनौती दी है, जिसमें शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का निजी मुचलका और एक जमानतदार देने की शर्त रखी गई थी। क्या है Neha Bora और CJP प्रदर्शन का पूरा मामला? यह पूरा विवाद 16 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से जुड़ा है। इस मार्च के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विरोध दर्ज कराने की योजना थी। नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को दिल्ली के मंडी हाउस इलाके में हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। बाद में उन्हें शांति बनाए रखने के लिए मुचलका देने से संबंधित नोटिस जारी किया गया। नेहा की ओर से अदालत में कहा गया कि मंडी हाउस में प्रस्तावित सभा और कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में होने वाले प्रदर्शन को एक ही मामला मानकर कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने पुलिस के कदम को चुनौती देते हुए नोटिस की वैधता पर सवाल उठाए हैं। CJP Leaders Update: सौरव दास और आशुतोष रांका को भी मिली राहत CJP प्रदर्शन से जुड़े मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका का नाम भी चर्चा में है। दोनों नेताओं को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सात दिन की न्यायिक हिरासत के बाद 21 अक्टूबर को दोनों की रिहाई का आदेश दिया गया। इसके लिए उन्हें निजी और जमानती मुचलके भरने तथा निर्धारित शर्तों का पालन करने को कहा गया। दोनों नेताओं की हिरासत और नेहा बोरा की याचिका ने दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार को लेकर बहस तेज कर दी है। SIR Controversy: क्यों हो रहा है विरोध? मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों और कुछ संगठनों ने सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उससे जुड़े विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी जारी है। CJP से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया है। इसी बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों से मुचलका भरवाने जैसे मुद्दे अदालत तक पहुंच गए हैं। अब आगे क्या होगा? दिल्ली हाईकोर्ट में नेहा बोरा की ओर से पुलिस के नोटिस और हिरासत की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। अब इस मामले में अदालत की आगे की कार्यवाही अहम होगी। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह दावा नहीं किया जा सकता कि हाईकोर्ट ने नेहा बोरा को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है या पुलिस का नोटिस रद्द कर दिया है। मामले में अंतिम आदेश की पुष्टि होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

न्यूजीलैंड क्रिकेट का बड़ा फैसला, MLC में नहीं करेगा निवेश; NZ20 लीग भी टली

न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड ने अमेरिका की मेजर लीग क्रिकेट (MLC) में निवेश नहीं करने का फैसला किया है। बोर्ड ने 2027 सीजन से पहले लीग की नई टीम शुरू करने के लिए अमेरिकी कंपनी ट्रू नॉर्थ स्पोर्ट्स (TNS) वेंचर्स के साथ साझेदारी की थी। हालांकि, अब न्यूजीलैंड क्रिकेट घरेलू क्रिकेट और अपने संसाधनों पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है। मेजर लीग क्रिकेट में न्यूजीलैंड के कई प्रमुख खिलाड़ी हिस्सा लेते रहे हैं। इनमें रचिन रवींद्र, फिन एलन, डेवोन कॉनवे, टिम सेफर्ट और लॉकी फर्ग्यूसन जैसे नाम शामिल हैं। अप्रैल 2025 में हुई थी साझेदारी की घोषणा न्यूजीलैंड क्रिकेट ने अप्रैल 2025 में TNS वेंचर्स के साथ साझेदारी की घोषणा की थी। इस समझौते के तहत बोर्ड को 2027 में MLC की प्रस्तावित दो नई टीमों में से एक को शुरू करने और संचालित करने में सहयोग देना था। इसके लिए न्यूजीलैंड क्रिकेट को हाई-परफॉर्मेंस और संचालन से जुड़ी सहायता उपलब्ध करानी थी। हालांकि, अब बोर्ड ने इस योजना से पीछे हटने का निर्णय लिया है। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने कहा- अभी सही समय नहीं न्यूजीलैंड क्रिकेट के CEO ज्योफ एलॉट ने कहा कि उन्हें इस साझेदारी के उद्देश्य और महत्वाकांक्षा पर भरोसा है। उनके मुताबिक, अमेरिकी बाजार में क्रिकेट के विस्तार की काफी संभावनाएं हैं, लेकिन विस्तृत आकलन के बाद बोर्ड को लगता है कि फिलहाल इस दिशा में आगे बढ़ने का सही समय नहीं है। एलॉट ने TNS और MLC के सह-संस्थापक समीर मेहता तथा विजय श्रीनिवासन का अवसर तलाशने में सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने यह भी कहा कि न्यूजीलैंड क्रिकेट भविष्य में दोनों के साथ संपर्क बनाए रखेगा। न्यूजीलैंड की NZ20 टी-20 लीग भी टली न्यूजीलैंड में प्रस्तावित पुरुष और महिला टी-20 लीग NZ20 की शुरुआत भी टाल दी गई है। इस लीग की योजना मौजूदा सुपर स्मैश टूर्नामेंट की जगह एक नई प्रतियोगिता शुरू करने की थी। पहले NZ20 को जनवरी 2027 में शुरू करने की योजना थी, लेकिन अब इसकी शुरुआत दिसंबर 2027 तक के लिए टाल दी गई है। इससे न्यूजीलैंड क्रिकेट की घरेलू टी-20 प्रतियोगिता की योजनाओं में भी बदलाव हुआ है।

Zomato-Blinkit की पैरेंट कंपनी Eternal लाएगी Dark.ai, सीक्रेट चैट और प्राइवेसी पर होगा फोकस

जोमैटो और ब्लिंकइट की पैरेंट कंपनी एटरनल (Eternal) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में नया कदम उठाने की तैयारी कर रही है। कंपनी के प्रमुख दीपिंदर गोयल ने ‘Dark.ai’ नाम के नए AI ऐप के बारे में जानकारी दी है। इसका मुख्य फोकस यूजर्स की प्राइवेसी और संवेदनशील बातचीत की सुरक्षा पर होगा। गोयल के मुताबिक, इस ऐप को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि लोग अपनी निजी बातें, गोपनीय विचार, रिसर्च और जटिल सवाल बिना किसी झिझक के साझा कर सकें। फिलहाल कंपनी के कर्मचारी इसकी टेस्टिंग कर रहे हैं। डेटा सुरक्षा पर जोर, कंपनी भी नहीं पढ़ पाएगी चैट दीपिंदर गोयल ने बताया कि Dark.ai को कंपनी के अपने कंप्यूटर सिस्टम और सुरक्षित तकनीक पर चलाने की योजना है। इसमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन जैसी सुरक्षा व्यवस्था का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है, ताकि बातचीत को अनधिकृत रूप से पढ़े जाने से बचाया जा सके। ऐप में एक विशेष मेमोरी सिस्टम भी होगा, जिस पर यूजर का नियंत्रण रहेगा। इसके जरिए यूजर अपनी जरूरत के अनुसार पुरानी बातचीत से जुड़ी जानकारी को सुरक्षित रख सकेंगे या हटा सकेंगे। हालांकि, ऐप की सुरक्षा व्यवस्था और डेटा प्रबंधन से जुड़े सभी तकनीकी विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इसलिए कंपनी के दावों की वास्तविक सीमा लॉन्च के समय उपलब्ध जानकारी से स्पष्ट होगी। स्टार्टअप, वैज्ञानिकों और रिसर्चर्स के लिए होगा उपयोगी Dark.ai को खास तौर पर उन लोगों और संस्थानों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, जिन्हें संवेदनशील जानकारियों के साथ काम करना पड़ता है। इनमें स्टार्टअप संस्थापक, वैज्ञानिक, रिसर्चर्स, बड़ी कंपनियां और सरकारी कार्यालय शामिल हैं। गोयल के मुताबिक, इस AI को केवल यूजर को खुश करने के लिए जवाब देने के बजाय तथ्यों के आधार पर उत्तर देने के लिए तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसा सिस्टम बनाना है, जो यूजर की बातों से सहमत होने के बजाय अपनी समझ के अनुसार जवाब दे। मौजूदा AI ऐप्स की प्राइवेसी पर उठाए सवाल गोयल ने मौजूदा AI प्लेटफॉर्म्स पर डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि कई सेवाओं में यूजर डेटा सेव न करने का विकल्प चुनने के बाद भी बैकएंड पर जानकारी के प्रबंधन को लेकर स्पष्टता की कमी महसूस हो सकती है। उन्होंने कहा कि आम AI ऐप्स इस्तेमाल करते समय यूजर्स के मन में यह आशंका बनी रह सकती है कि उनकी बातचीत कोई पढ़ सकता है। उनके मुताबिक, इसी तरह का डर और अविश्वास लोगों को AI का पूरी क्षमता से इस्तेमाल करने से रोक सकता है। Dark.ai के जरिए कंपनी इस चिंता को कम करने और यूजर्स को निजी बातचीत के लिए अधिक सुरक्षित माहौल देने की कोशिश कर रही है। इसी साल लॉन्च की तैयारी, कीमत पर फैसला नहीं कंपनी की ओर से ऐप की लॉन्चिंग को लेकर इसी साल की तैयारी का संकेत दिया गया है। हालांकि, इसके काम करने की गति, इस्तेमाल किए जाने वाले AI मॉडल और अन्य तकनीकी विशेषताओं की विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। ऐप मुफ्त होगा या इसके लिए सब्सक्रिप्शन लेना पड़ेगा, इस बारे में भी कंपनी ने कोई जानकारी नहीं दी है। इससे होने वाली संभावित कमाई को लेकर भी फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो और क्विक कॉमर्स सेवा ब्लिंकइट के बाद AI सॉफ्टवेयर क्षेत्र में एटरनल का यह संभावित कदम कंपनी के कारोबार के विस्तार की दिशा में अहम हो सकता है।

eMudhra में तकनीकी गड़बड़ी की जांच के लिए IT मंत्रालय ने बनाई स्पेशल टीम, सरकार बोली- भारतीय वेबसाइट्स और ऐप सुरक्षित

डिजिटल सुरक्षा सेवाएं देने वाली कंपनी ई-मुद्रा (eMudhra) में तकनीकी गड़बड़ी सामने आने के बाद आईटी मंत्रालय ने मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की है। सरकार के मुताबिक, इस गड़बड़ी का असर कंपनी के विदेशी कारोबार तक सीमित है। भारतीय वेबसाइट्स और ऐप्स की सुरक्षा प्रभावित होने की बात सामने नहीं आई है। सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से सावधान रहने की अपील की है। मामले की जांच साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मदद से की जा रही है, ताकि गड़बड़ी की वजह और उसके संभावित प्रभाव का पता लगाया जा सके। eMudhra दो तरह की डिजिटल सुरक्षा सेवाएं देती है ई-मुद्रा का कारोबार मुख्य रूप से दो क्षेत्रों में फैला है। पहला, भारत में डिजिटल सिग्नेचर और eSign सेवाएं देना। दूसरा, विदेशी वेबसाइट्स के लिए डिजिटल सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी करना। कंपनी से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, हालिया तकनीकी गड़बड़ी उसके विदेशी कारोबार से संबंधित डिजिटल सर्टिफिकेट्स में सामने आई। भारतीय डिजिटल सिग्नेचर और eSign सेवाओं पर इसका असर होने की जानकारी नहीं दी गई है। सिस्टम की खराबी से बने कमजोर सुरक्षा कोड ई-मुद्रा के मुताबिक, सिस्टम में तकनीकी खराबी के कारण कुछ कमजोर सुरक्षा कोड बन गए थे। एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ ने इस समस्या के बारे में एप्पल, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मोजिला जैसी बड़ी टेक कंपनियों को अलर्ट किया। चिंता जताई गई कि इन कमजोर कोड का फायदा उठाकर साइबर हमलावर सुरक्षा प्रमाणपत्रों की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि इन कोड का इस्तेमाल करके वास्तव में कोई हमला हुआ था। गूगल और मोजिला ने प्रभावित सर्टिफिकेट्स पर की कार्रवाई तकनीकी गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद ब्राउजर कंपनियों ने प्रभावित सुरक्षा प्रमाणपत्रों के खिलाफ कदम उठाए। इन कदमों का उद्देश्य प्रभावित प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल से जुड़े जोखिम को सीमित करना है। eMudhra का दावा- ग्राहक का डेटा चोरी नहीं हुआ ई-मुद्रा ने कहा है कि उसका मुख्य सिस्टम सुरक्षित है और किसी ग्राहक का डेटा चोरी नहीं हुआ है। कंपनी के अनुसार, जिस विदेशी कारोबार में गड़बड़ी सामने आई, उससे उसकी कुल कमाई का लगभग 1 प्रतिशत हिस्सा आता है। कंपनी प्रभावित विदेशी ग्राहकों को नए और सुरक्षित डिजिटल सर्टिफिकेट उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में भी जुटी है, ताकि उनकी सेवाएं जारी रह सकें। सरकार ने अफवाहों से बचने की अपील की आईटी मंत्रालय ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है और सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट खबरों के आधार पर घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार की साइबर सुरक्षा टीम और विशेषज्ञ तकनीकी पहलुओं की पड़ताल कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल, गड़बड़ी के वास्तविक दायरे और संभावित प्रभाव को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

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