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Pahalgam Terror Attack

Pahalgam Terror Attack के बाद Pakistan Army Chief को अपने ही देश में झेलना पड़ा विरोध

📰 Desh Harpal | राष्ट्रीय समाचार इस्लामाबाद और पहलगाम के बीच तनाव की कड़ी जुड़ती दिख रही है। Pahalgam Terror Attack- पहलगाम में मंगलवार को हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की मौत के बाद, Pakistan Army Chief असीम मुनीर (General Asim Munir) एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। दरअसल, इस हमले से ठीक पाँच दिन पहले उन्होंने इस्लामाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कश्मीर को लेकर एक उकसावे वाला बयान दिया था, जिसे भारत ही नहीं, अब उनके अपने देश के सोशल मीडिया यूज़र्स भी खारिज कर रहे हैं। मुनीर ने अपने भाषण में कश्मीर को पाकिस्तान की “गर्दन की नस” बताते हुए कहा था, “हम इसे नहीं भूलेंगे और अपने कश्मीरी भाइयों को संघर्ष में अकेला नहीं छोड़ेंगे।” उन्होंने भारत-पाक विभाजन के पीछे दो-राष्ट्र सिद्धांत को भी सही ठहराते हुए कहा, “हमारे पूर्वजों ने पाकिस्तान इसलिए बनाया क्योंकि हम हिंदुओं से पूरी तरह अलग थे – हमारी परंपराएं, धर्म, सोच, और रीति-रिवाज सब अलग हैं।” लेकिन पहलगाम की इस क्रूर घटना ने उनके इस बयान को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर कई पाकिस्तानी यूज़र्स ने उन्हें घेरते हुए पूछा है कि क्या कश्मीर को लेकर इस तरह की भड़काऊ बातें करना ही समाधान है? कई लोगों ने यह भी कहा कि जब पाकिस्तान खुद आंतरिक उथल-पुथल से जूझ रहा है, तब ऐसे बयानों से क्षेत्रीय शांति को खतरा पैदा करना गैर-जिम्मेदाराना है। एक पाकिस्तानी ट्विटर यूजर ने लिखा, “जब मुल्क में खुद रोटी नसीब नहीं हो रही, तब दूसरों की ‘गर्दन की नस’ पकड़ने की बात करना बेवकूफी नहीं तो और क्या है?” वहीं एक और यूजर ने तीखा सवाल दागा, “आपके बयान के बाद ही 26 बेगुनाह लोग मारे गए। क्या ये ‘भाईचारा’ है?” भारत में इस हमले को लेकर ग़ुस्सा है ही, लेकिन अब पाकिस्तान के भीतर से भी असीम मुनीर को जवाब मिलना यह दर्शाता है कि केवल भारत ही नहीं, उनके अपने देशवासी भी अब युद्धोन्माद और धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति से थक चुके हैं। 📌 Desh Harpal पर पढ़ते रहिए ऐसे ही निर्भीक और राष्ट्रवादी खबरें।
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Pahalgam Attack Live

Pahalgam Attack Live: पाकिस्तान में बंद होगा भारतीय उच्चायुक्त, सिंधु जल समझौता रोका गया

23 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की आपात बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में भारत की सुरक्षा और पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय निम्नलिखित हैं:​ यह बैठक लगभग तीन घंटे तक चली और इसमें लिए गए निर्णयों से स्पष्ट है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है।​ पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के कड़े कदम
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Pahalgam terror attack

Pahalgam Terror Attack में शहीद Navy Officer Lt. Vinay Narwal को पत्नी ने दी अंतिम विदाई, कांप उठी हर आंख

भारतीय नौसेना के OFFICER लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की पत्नी ने अपने पति को भावभीनी विदाई दी, जो पहलगाम आतंकी हमले में शहीद हो गए थे। दोनों की शादी 16 अप्रैल को हुई थी।हाथ जोड़कर विनती कर रही थीं, “मेरे पति को छोड़ दो!” लेकिन क्रूर आतंकियों ने एक न सुनी और गोलियों से भून दिया। इन आसुओं और चीख का जिम्मेदार कौन? Lt. Vinay Narwal की पत्नी के दर्द को और उनकी हालत को देखिए! महज 6 दिन पहले उनकी शादी हुई थी और हनीमून के लिए वे कश्मीर के पहलगाम गए थे।
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Pahalgam terror attack

Pahalgam terror attack: ‘चाय-पंक्चर-ढाबा-पौनी’, क्या इन पर भरोसा बना इंटेलिजेंस चूक

Intelligence Failure in Pahalgam? Sleeper Cells, Local Informants & TRF Network Exposed Pahalgam terror attack- Intelligence Failure एक बार फिर Jammu-Kashmir की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकवादी हमले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आतंकियों के पास सुरक्षा ढांचे, पुलिस मूवमेंट और इलाके की बारीक जानकारियां पहले से मौजूद थीं। मंगलवार दोपहर हुए इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई, जबकि 17 लोग घायल हुए। हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की फ्रंट विंग The Resistance Front (TRF) ने ली है। सूत्रों का मानना है कि इस हमले की योजना बड़ी बारीकी से बनाई गई थी। आतंकियों को न सिर्फ गश्त की टाइमिंग की जानकारी थी, बल्कि वे जानते थे कि किस समय सुरक्षा बल मौके पर नहीं होंगे। Sleeper Cells ने आतंकियों को लोकल मूवमेंट, पुलिस चौकी की दूरी और पर्यटकों की मौजूदगी के बारे में पूरी सूचना दी थी। जिन चाय वालों, ढाबा संचालकों, पंक्चर मेकेनिकों और Mule-Pony Operators को आमतौर पर शक के दायरे से बाहर रखा जाता है, वहीं अब सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का कारण बनते जा रहे हैं। इन स्थानीय लोगों को पहचानना मुश्किल होता है, क्योंकि वे क्षेत्रीय भाषा जानते हैं, इलाके के भूगोल से वाकिफ हैं और पर्यटकों के साथ सहजता से घुलमिल जाते हैं। Retired Defence Expert Capt. Anil Gaur का कहना है कि ऐसे Sleeper Cells लंबे समय से घाटी में सक्रिय हैं। साल 2020 में भारतीय खुफिया एजेंसियों ने ISI और जैश-ए-मोहम्मद के एक ऑडियो इंटरसेप्ट से यह खुलासा किया था कि कैसे पंक्चर की दुकानें, ढाबे और चाय स्टॉल आतंकियों के मददगार के रूप में काम कर रहे हैं। सड़क किनारे प्लास्टिक में हथियार छिपाने, संचार यंत्र रखने और क्रॉस फायरिंग के लिए चुनी गई जगहों की प्लानिंग बाकायदा पाकिस्तान की एजेंसियों द्वारा की जाती है। Why this matters now? क्योंकि पहलगाम जैसे संवेदनशील इलाके में इतनी बड़ी संख्या में पर्यटकों की मौजूदगी के बावजूद सुरक्षा बलों की गैरमौजूदगी और आतंकियों की सटीक रणनीति दर्शाती है कि ground intelligence बुरी तरह फेल हुई है। सुरक्षा बलों के विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि हमले के वक्त कोई क्रॉस फायरिंग नहीं हुई, क्योंकि आस-पास कोई सुरक्षा बल मौजूद ही नहीं था। ये भी देखा गया कि आतंकी घोड़ों, खच्चरों और ढाबों के बीच से निकले, लेकिन इन पर किसी को शक नहीं हुआ। यही नहीं, हमला होने के काफी देर बाद सुरक्षा बल मौके पर पहुंचे – तब तक आतंकी जंगलों की ओर भाग चुके थे। घटना की एक और चिंताजनक बात यह है कि आतंकी ढाबा संचालकों और उनके कर्मचारियों को टारगेट नहीं कर रहे थे – इसका मतलब साफ है कि वे ‘अपने लोग’ थे या उन्हें पहले से सावधान किया गया था। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि ऐसी घटनाएं आतंकियों की गहरी local network intelligence की ओर इशारा करती हैं। Conclusion:अब वक्त आ गया है कि Jammu-Kashmir में चाय बेचने वालों, ढाबा संचालकों और घोड़ा-खच्चर वालों पर भी सतर्क नजर रखी जाए। हर ‘Local’ को ‘Friendly’ मान लेना अब महंगा साबित हो सकता है। सुरक्षा एजेंसियों को पुराने खांचे से बाहर आकर Hybrid Militants और Sleeper Informants की पहचान करनी होगी, नहीं तो अगला हमला और भी ज्यादा विनाशकारी हो सकता है।
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PahalgamTerrorist Attack

PahalgamTerrorist Attack: सऊदी से लौटे पीएम मोदी ने एयरपोर्ट पर ही कि डोभाल-जयशंकर से बैठक

(Desh Harpal के लिए विशेष रिपोर्ट): Pahalgam Terrorist Attack – जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत पर्यटन स्थल पहलगाम में मंगलवार को एक दिल दहला देने वाला आतंकी हमला हुआ, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई। मरने वालों में बड़ी संख्या में पर्यटक शामिल थे, जो छुट्टियां बिताने पहलगाम पहुंचे थे। आतंकियों ने चुन-चुनकर लोगों को निशाना बनाया, जिससे पूरे देश में शोक और आक्रोश की लहर दौड़ गई है। इस हमले की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi अपना विदेश दौरा बीच में छोड़कर भारत लौट आए। एयरपोर्ट पर उतरते ही उन्होंने National Security Advisor अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ आपात बैठक की और हमले की पूरी जानकारी ली। इसके बाद पीएम मोदी ने कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की हाई-लेवल मीटिंग बुलाई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस हमले की निंदा हो रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि “कश्मीर से आ रही खबरें बेहद दुखद हैं। आतंक के खिलाफ अमेरिका, भारत के साथ खड़ा है।” उन्होंने पीड़ित परिवारों के लिए शांति की प्रार्थना की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin, इजरायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu, और इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni ने भी भारत के प्रति एकजुटता जताई है और हमले की कड़ी निंदा की है। इन सभी नेताओं ने कहा कि आतंक के खिलाफ लड़ाई में भारत अकेला नहीं है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस हमले की योजना सीमापार से रची गई थी और इसका उद्देश्य भारत की Tourism Industry और शांति व्यवस्था को नुकसान पहुंचाना था। घटनास्थल पर सेना और सुरक्षाबल सक्रिय हैं और इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है। भारत सरकार ने यह भी संकेत दिए हैं कि इस हमले का कड़ा जवाब दिया जाएगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। Desh Harpal की विशेष टिप्पणी:एक ओर भारत अपनी Soft Power और पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर आतंकियों की यह कायराना हरकत दर्शाती है कि शांति से उन्हें सबसे ज़्यादा डर लगता है। यह हमला सिर्फ जम्मू-कश्मीर पर नहीं, बल्कि पूरे भारत पर किया गया हमला है।
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Congress

Judicial Politics और Congress का ‘संविधान बचाओ’ ड्रामा – निशिकांत दुबे का तगड़ा वार

(Desh Harpal l News Desk):BJP सांसद निशिकांत दुबे ने एक बार फिर Congress पर करारा हमला बोला है, लेकिन इस बार उनका निशाना बना एक ऐसा नाम जिसे लेकर राजनीति और न्यायपालिका के संबंधों पर गंभीर सवाल उठाए जा सकते हैं – Justice Baharul Islam. निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया और संसद में Judicial Politics और Congress का ‘संविधान बचाओ’ ड्रामा – निशिकांत दुबे का तगड़ा वार की संविधान बचाओ मुहिम को ‘मजेदार कहानी’ बताते हुए तंज कसा कि Judicial Politics और Congress का ‘संविधान बचाओ’ ड्रामा – निशिकांत दुबे का तगड़ा वारही वो पार्टी है जो जब सत्ता में थी, तब उसने कैसे न्यायपालिका का अपने हिसाब से इस्तेमाल किया। उन्होंने Justice Baharul Islam का उदाहरण देते हुए कहा: “1977 में जब इंदिरा गांधी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे, तब Baharul Islam ने वह सभी केस तन्मयता से समाप्त कर दिए। इसके इनामस्वरूप कांग्रेस ने उन्हें 1983 में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर करवा कर तीसरी बार राज्यसभा में भेज दिया।” निशिकांत दुबे के इस बयान की पुष्टि सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट से भी होती है, जहाँ के अनुसार: निशिकांत दुबे ने इस इतिहास को उजागर करते हुए पूछा कि “क्या यही है कांग्रेस की न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा?” इस बयान के जरिए BJP सांसद ने न केवल कांग्रेस की राजनीतिक नीयत पर सवाल उठाया, बल्कि वर्तमान में जारी Judiciary vs Politics बहस को भी एक नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि ये पार्टी सिर्फ जब विपक्ष में होती है, तभी उसे संविधान और न्यायपालिका की याद आती है। अब देखना ये होगा कि कांग्रेस इस गंभीर आरोप का क्या जवाब देती है। लेकिन इतना तो तय है कि Baharul Islam का यह केस एक बार फिर Judicial Appointments और Political Rewards के बीच की ‘Thin Line’ को लोगों के सामने ला रहा है।
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Nishikant Dubye

Supreme Court, Contempt, Nishikant Dubey – अब कानूनी घेरे में घिरते दिख रहे हैं बीजेपी सांसद?

नई दिल्ली।Supreme Court के खिलाफ की गई कथित ‘अवमाननापूर्ण टिप्पणी’ अब बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकती है। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब वरिष्ठ अधिवक्ता शिवकुमार त्रिपाठी ने देश के Attorney General (एटॉर्नी जनरल) को एक आधिकारिक चिट्ठी भेजकर निशिकांत दुबे के खिलाफ Contempt of Court (कोर्ट की अवमानना) की कार्यवाही की अनुमति मांगी। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब दुबे ने उच्चतम न्यायालय के एक आदेश को लेकर आपत्ति जताते हुए एक सोशल मीडिया पोस्ट में कथित तौर पर ऐसी टिप्पणी की, जिसे न्यायपालिका के सम्मान और स्वायत्तता पर सीधा हमला माना जा रहा है। शिवकुमार त्रिपाठी की इस चिट्ठी में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ इस तरह की सार्वजनिक टिप्पणियां न केवल अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि आम जनता में न्यायिक व्यवस्था के प्रति विश्वास को भी कमजोर करती हैं। उन्होंने मांग की है कि सांसद दुबे पर Contempt of Court Act, 1971 के तहत कार्यवाही होनी चाहिए। त्रिपाठी ने चिट्ठी में यह भी उल्लेख किया है कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते निशिकांत दुबे को न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा का सम्मान करना चाहिए था, न कि उस पर उंगली उठानी चाहिए। हालांकि, इस मामले पर अब तक दुबे की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन यह साफ है कि अगर एटॉर्नी जनरल इस चिट्ठी को गंभीरता से लेते हैं और सहमति देते हैं, तो निशिकांत दुबे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना की विधिवत सुनवाई शुरू हो सकती है। इस प्रकरण ने एक बार फिर Judiciary vs Legislature की पुरानी बहस को हवा दे दी है, जिसमें यह सवाल उठ रहा है कि क्या लोकसभा सदस्य न्यायपालिका की आलोचना की आड़ में अपनी सीमाएं लांघ रहे हैं? अब सबकी निगाहें Attorney General की प्रतिक्रिया और Supreme Court के रुख पर टिकी हैं। क्या यह मामला आने वाले दिनों में संसद और अदालत के बीच टकराव का कारण बनेगा? देश हरपल इस प्रकरण से जुड़ी हर अहम जानकारी आपको सबसे पहले देगा।
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West Bengal Riots, Murshidabad Violence

West Bengal Riots: मुर्शिदाबाद से मालदा तक बेघर हुए हिंदू परिवार, ममता सरकार पर उठे गंभीर सवाल”

(Desh Harpal l विशेष रिपोर्ट): West Bengal Riots, Murshidabad Violence, Hindu Refugees, Detention Camp Allegations West Bengal के Murshidabad जिले में दंगों के बाद हालात इतने बिगड़ गए कि सैकड़ों Hindu Families को जान बचाकर Malda के शरणार्थी शिविरों में पनाह लेनी पड़ी। पर अफसोस की बात यह रही कि जिस सरकार से उन्हें सुरक्षा की उम्मीद थी, उसी के तंत्र ने उन्हें ‘डिटेंशन कैंप’ जैसे माहौल में कैद कर दिया। Murshidabad Riots के दौरान, बड़ी संख्या में दंगाई भीड़ ने हिंदू घरों और दुकानों को निशाना बनाया। जब ये लोग जान बचाकर Malda पहुंचे, तो उन्हें सरकारी कैंपों में रखा गया—जहां उनके साथ मानवीय व्यवहार की जगह उन्हें धमकियों और निगरानी का सामना करना पड़ा। Refugees ने State Human Rights Commission, Mahila Aayog और यहां तक कि राज्यपाल तक को अपनी पीड़ा सुनाई। सबसे चौंकाने वाला हिस्सा ये रहा कि जब मीडिया इस मुद्दे को रिपोर्ट करने पहुंचा, तो उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया। IPS Officer Faisal Raza ने कोर्ट के किसी कथित आदेश का हवाला देकर मीडिया कवरेज पर रोक लगाई, लेकिन जब उनसे आदेश दिखाने की मांग की गई तो वो टालमटोल और धमकियों पर उतर आए। BJP Leader Suvendu Adhikari ने इन शिविरों को ‘Detention Camps’ बताया और कहा, “सरकार ने इन शरणार्थियों को संवेदनशील क्षेत्र में राहत देने की बजाय जेल जैसा ट्रीटमेंट दिया है। करीब 400 लोग अपने घर छोड़कर यहां आए हैं और अब उन्हें कैद की तरह रखा जा रहा है।” Congress ने भी राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की। इस बीच सबसे गंभीर सवाल यह है कि – मिडिया की टीम ने जब इन कैंपों की जमीनी सच्चाई जानने की कोशिश की, तो कई स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्हें Forced Silence में रखा गया है। न मीडिया से बात करने की अनुमति है, न ही बाहर किसी को बुलाने की। ये हालात न सिर्फ एक राज्य की विफलता को दिखाते हैं, बल्कि ये भी दर्शाते हैं कि भारत में अपने ही देश में कुछ नागरिक खुद को Refugee जैसा महसूस कर रहे हैं। Note: यह मामला सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि मानवता का भी है। देश को इस पर ध्यान देने की सख्त ज़रूरत है। (पांचजन्य से साभार)
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SupremeCourtHearingControversy; Supreme Court

वक्फ कानून पर SC से स्टे नहीं, सरकार को 7 दिन का समय , डिनोटिफाई करने और नई नियुक्तियों पर रहेगी रोक

Waqf Act Hearing | Supreme Court Latest Update | Centre Seeks Time नई दिल्लीl देश हरपल रिपोर्ट — Waqf Act को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन अहम सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने Supreme Court से जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। Chief Justice of India (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक अगला आदेश नहीं आता, तब तक status quo यानी वर्तमान स्थिति बनी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि केंद्र सरकार जब तक अपना जवाब दाखिल नहीं करती, तब तक Waqf Board में किसी भी प्रकार की नियुक्ति नहीं की जाएगी। साथ ही यह भी साफ किया कि waqf properties को लेकर किसी भी Collector द्वारा कोई नया आदेश पारित नहीं होगा। Chief Justice ने कहा, “जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक बोर्ड या काउंसिल में कोई नई नियुक्ति नहीं हो सकती। और अगर किसी संपत्ति का पंजीकरण 1995 Waqf Act के तहत हुआ है, तो उन संपत्तियों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।” CJI ने यह भी कहा कि कार्यपालिका को प्रशासनिक निर्णय लेने का अधिकार है जबकि न्यायपालिका न्यायिक फैसले लेती है। इसी संदर्भ में उन्होंने 2013 Waqf Amendment Act को चुनौती देने वाली याचिका पर कुछ विशेष पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने की अनुमति दी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारें और संबंधित वक्फ बोर्ड को 7 दिनों के भीतर अपना official response दाखिल करना होगा। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को केवल 5 याचिकाएं दाखिल करने की अनुमति होगी। इस पूरे मामले को कोर्ट ने “विशेष प्रकृति” का बताते हुए कहा है कि सुनवाई निष्पक्ष और त्वरित होगी। फिलहाल, वक्फ संपत्तियों की मौजूदा स्थिति यथावत बनी रहेगी और किसी भी तरह का नया प्रशासनिक या कानूनी हस्तक्षेप रोक दिया गया है। Desh Harpal की विशेष रिपोर्ट में हम आने वाले दिनों में केंद्र सरकार और वक्फ बोर्ड के जवाबों की विस्तृत जानकारी भी देंगे। यह मामला न सिर्फ कानूनी बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण बनता जा रहा है।
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National Herald Case ED

National Herald Case: ED ने सोनिया-राहुल गांधी पर चार्जशीट दायर, कांग्रेस बोली – ‘ये बदले की राजनीति है’

16 अप्रैल 2025 – प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत सात लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को “राजनीतिक बदले और डराने की कोशिश” बताया है और बुधवार को देशभर में ED दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन की घोषणा की है। चार्जशीट में कौन-कौन? ED ने 9 अप्रैल को विशेष PMLA अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें जिन लोगों के नाम शामिल हैं, वे हैं: अदालत ने चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए मामले की अगली सुनवाई 25 अप्रैल को तय की है।क्या है नेशनल हेराल्ड केस? यह मामला एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की संपत्तियों को लेकर है, जो National Herald अखबार का प्रकाशन करती है। ED का आरोप है कि कांग्रेस ने AJL को ₹50 लाख में यंग इंडियन नाम की कंपनी के ज़रिए अधिग्रहित किया, जबकि उसकी संपत्ति की कीमत ₹2,000 करोड़ से ज्यादा थी। सोनिया गांधी और राहुल गांधी यंग इंडियन में बहुमत हिस्सेदारी रखते हैं। ED ने हाल ही में ₹661 करोड़ की संपत्ति दिल्ली, मुंबई और लखनऊ में जब्त करने के नोटिस भी दिए हैं। जांच की शुरुआत कैसे हुई? ये जांच भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की 2013 में दाखिल याचिका के आधार पर शुरू हुई थी। इसके बाद दिल्ली की एक अदालत ने इनकम टैक्स विभाग को जांच की अनुमति दी थी। ED ने कहा कि जांच के दौरान उन्हें ₹18 करोड़ के फर्जी डोनेशन, ₹38 करोड़ के फर्जी किराया और ₹29 करोड़ के फर्जी विज्ञापन की जानकारी मिली।कांग्रेस ने क्या कहा? कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “यह पूरा मामला फर्जी है। ना कोई पैसा ट्रांसफर हुआ, ना कोई संपत्ति बेची गई। फिर भी सरकार इसे मनी लॉन्ड्रिंग बता रही है।” केसी वेणुगोपाल ने कहा, “मोदी-शाह सरकार जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए विपक्ष को टारगेट कर रही है। ये केस राजनीति को दबाने का तरीका है।” जयराम रमेश ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “नेशनल हेराल्ड की संपत्तियों की जब्ती कानून की आड़ में किया गया अपराध है।” भाजपा का पलटवार भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, “जो लोग भ्रष्टाचार और जनता की संपत्ति की लूट में शामिल रहे हैं, अब उन्हें जवाब देना होगा। ED का मतलब अब ‘एंटाइटलमेंट टू डकैती’ नहीं है।”कोर्ट की टिप्पणी विशेष अदालत ने कहा कि PMLA की कार्रवाई के साथ-साथ CBI की जांच से जुड़ा मामला भी इसी अदालत में स्थानांतरित किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए आदेश जिला जज को देना होगा। DeshHarpal पर पढ़ते रहिए देश-दुनिया की सबसे सटीक और सरल खबरें।
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UN

World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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