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चांद दिखा, ईद कल: यूपी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, मौलाना फरंगी महली की अपील – सड़कों पर न पढ़ें नमाज

लखनऊ: रमज़ान का मुकद्दस महीना खत्म होने के साथ ही देशभर में ईद-उल-फितर का चांद दिख गया है। चांद नजर आते ही देशभर में ईद की तैयारियां तेज हो गई हैं। उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में ईद 11 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस बीच, यूपी में कानून-व्यवस्था को लेकर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। मौलाना फरंगी महली की अपील – सड़कों पर न पढ़ें नमाजलखनऊ के इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने अपील की है कि ईद की नमाज मस्जिदों और ईदगाहों में ही पढ़ी जाए, सड़कों पर नमाज न अदा की जाए। उन्होंने मुसलमानों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रशासन का सहयोग करने की भी गुजारिश की है। यूपी में सुरक्षा कड़ी, फ्लैग मार्च और ड्रोन से निगरानीउत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन ने ईद को लेकर सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए हैं। संवेदनशील जिलों में अतिरिक्त फोर्स तैनात की गई है और पुलिस द्वारा फ्लैग मार्च किया जा रहा है। प्रमुख शहरों में ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। आतिशबाजी पर निगरानी, शांति बनाए रखने की अपीलसरकार ने लोगों से अपील की है कि वे शांति और सौहार्द बनाए रखें। ईद के मौके पर आतिशबाजी करने पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। किसी भी तरह की अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज समेत कई जिलों में अलर्टराजधानी लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, मेरठ, अलीगढ़, वाराणसी समेत कई शहरों में प्रशासन हाई अलर्ट पर है। संवेदनशील इलाकों में पैदल गश्त और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। ईद के लिए खास तैयारियां, बाजारों में रौनकचांद नजर आते ही बाजारों में खरीदारी के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लखनऊ, दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और कोलकाता समेत देशभर के बाजारों में मिठाइयों, सेवइयों और नए कपड़ों की खरीदारी जोरों पर है। प्रशासन की अपील – अफवाहों से बचें, शांति बनाए रखेंप्रशासन और पुलिस ने लोगों से सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों से बचने और शांति बनाए रखने की अपील की है। अगर कोई भी संदिग्ध गतिविधि नजर आती है तो तुरंत स्थानीय प्रशासन को सूचित करने के लिए कहा गया है। ईदगाहों और मस्जिदों में विशेष इंतजामईद के मौके पर मस्जिदों और ईदगाहों में विशेष इंतजाम किए गए हैं। लखनऊ की ऐतिहासिक ईदगाह और दिल्ली की जामा मस्जिद समेत प्रमुख मस्जिदों में हजारों लोग नमाज अदा करेंगे। ईद मुबारक!देशभर में ईद की खुशियों का माहौल है। लोग एक-दूसरे को बधाइयां दे रहे हैं और त्योहार की तैयारियों में जुटे हुए हैं। प्रशासन और धर्मगुरुओं ने अपील की है कि लोग मिलजुल कर इस पावन पर्व को शांति और भाईचारे के साथ मनाएं।
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pancang

26 मार्च 2025 के लिए हिंदू पंचांग

26 मार्च 2025 के लिए हिंदू पंचांग की जानकारी निम्नलिखित है: तिथि: कृष्ण पक्ष द्वादशी, जो रात 10:16 बजे तक रहेगी, उसके बाद त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होगी। नक्षत्र: धनिष्ठा नक्षत्र। योग: सिद्ध योग, जो दोपहर 12:26 बजे तक रहेगा। करण: कौलव। सूर्योदय एवं सूर्यास्त: चंद्रमा की स्थिति: मकर राशि में स्थित। राहुकाल: दोपहर 12:43 बजे से 2:15 बजे तक। यमगंड काल: सुबह 8:07 बजे से 9:39 बजे तक। गुलिक काल: सुबह 11:11 बजे से दोपहर 12:43 बजे तक। व्रत एवं त्योहार: इस दिन वैष्णव पापमोचनी एकादशी व्रत मनाया जाएगा। कृपया ध्यान दें कि पंचांग की जानकारी स्थान के अनुसार थोड़ी भिन्न हो सकती है।
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Pakistan

Pakistan Airstrike on Afghanistan: 11 बच्चों समेत 13 की मौत, सीमा तनाव फिर बढ़ा

Pakistan और Afghanistan के बीच एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। अफगान तालिबान सरकार ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान ने उसके सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की है, जिसमें बड़ी संख्या में निर्दोष नागरिकों की जान गई है। इस घटना ने दोनों देशों के रिश्तों को और ज्यादा बिगाड़ दिया है। क्या है पूरा मामला? अफगान अधिकारियों के अनुसार, यह एयरस्ट्राइक कूनर, खोस्त और पक्तिका प्रांतों में की गई। दावा किया गया है कि हमले रिहायशी इलाकों पर हुए, जहां आम लोग अपने रोजमर्रा के जीवन में थे। इस हमले में भारी नुकसान की खबर सामने आई है। मौतों और घायलों का आंकड़ा तालिबान प्रशासन के मुताबिक: यह आंकड़ा सामने आने के बाद स्थानीय इलाकों में मातम और दहशत का माहौल है। तालिबान का पाकिस्तान पर आरोप तालिबान सरकार ने पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि: अफगान प्रशासन ने इस हमले को देश की संप्रभुता पर हमला बताया है और कड़ी प्रतिक्रिया की बात कही है। पाकिस्तान की प्रतिक्रिया क्या है? इस पूरे मामले पर पाकिस्तान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या पुष्टि नहीं की गई है। हालांकि पहले पाकिस्तान कई बार यह दावा करता रहा है कि उसकी सैन्य कार्रवाई आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ होती है, न कि आम नागरिकों के खिलाफ। दोनों देशों के बीच तनाव क्यों बढ़ रहा है? पिछले कुछ समय से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच: लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जिससे हालात और संवेदनशील हो गए हैं। क्यों यह घटना गंभीर है? यह घटना सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं मानी जा रही, बल्कि इसके कई बड़े प्रभाव हो सकते हैं: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Narendra Modi vs Nehru

सिर्फ नेहरू का रिकॉर्ड टूटा, या मोदी ने भारत की दिशा भी बदल दी…?

संपादकीय | निखिल सिद्धभट्टी 10 जून 2026 भारतीय राजनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण तारीख बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले मोदी ने आज अपने कार्यकाल के 4399 दिन पूरे कर लिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया, जो 1952 से 1964 तक लगातार 4398 दिनों तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहे थे। यहां एक तथ्य समझना जरूरी है। जवाहरलाल नेहरू 15 अगस्त 1947 से ही देश के प्रधानमंत्री थे, लेकिन उस समय वे स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त हुए थे। 1952 में देश के पहले आम चुनाव के बाद कांग्रेस संसदीय दल ने उन्हें नेता चुना और वे 13 मई 1952 से 27 मई 1964 तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहे। अब, 74 वर्ष बाद नरेंद्र मोदी ने उस रिकॉर्ड को पार कर लिया है। यही वह क्षण है, जिसने हमें यह संपादकीय लिखने के लिए प्रेरित किया। क्योंकि यह केवल एक रिकॉर्ड टूटने की घटना नहीं है। यह भारत के दो सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों, दो अलग-अलग विचारधाराओं और दो अलग-अलग विकास मॉडलों की तुलना का अवसर भी है। एक रिकॉर्ड, लेकिन दो बिल्कुल अलग भारत जब नेहरू ने 1952 में जनता के जनादेश के साथ सरकार बनाई, तब भारत एक नवजात राष्ट्र था। देश विभाजन की त्रासदी झेल चुका था। करोड़ों लोग गरीबी में जी रहे थे। औद्योगिक आधार लगभग नहीं था। साक्षरता बेहद कम थी और लोकतंत्र का भविष्य भी अनिश्चित था। नेहरू के सामने चुनौती थी—भारत को टूटने से बचाना और उसे खड़ा करना। दूसरी ओर, जब नरेंद्र मोदी 2014 में सत्ता में आए, तब भारत दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था था। अर्थव्यवस्था वैश्विक मंच पर हाफ राही थी, सेना मजबूत थी पर उसे नियंत्रण में रखा था , परमाणु शक्ति मौजूद थी और सूचना क्रांति देश में प्रवेश कर चुकी थी पर उस की गाती धीमी थी । लेकिन मोदी के सामने सवाल अलग था—क्या भारत केवल एक विकासशील देश बना रहेगा या 21वीं सदी की वैश्विक शक्ति बनेगा? यहीं से दोनों नेताओं की तुलना शुरू होती है। नेहरू ने नींव रखी, इसमें विवाद नहीं आज जो लोग नेहरू की आलोचना करते हैं, उन्हें भी यह स्वीकार करना होगा कि स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं की बुनियाद उनके दौर में रखी गई। संसद, चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय की प्रतिष्ठा, IIT, AIIMS, बड़े बांध, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग—ये सब उस दौर की उपलब्धियां हैं। दुनिया के कई नवस्वतंत्र देशों में लोकतंत्र असफल हो गया। कहीं सेना सत्ता में आ गई, कहीं तानाशाही स्थापित हो गई। भारत उस रास्ते पर नहीं गया। यह नेहरू युग की एक बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। लेकिन इतिहास का दूसरा पक्ष भी है। नेहरू ने जिस समाजवादी आर्थिक मॉडल को अपनाया, उसने राज्य को अत्यधिक शक्तिशाली बना दिया। लाइसेंस-परमिट राज ने आने वाले दशकों में निजी क्षेत्र की ऊर्जा को सीमित कर दिया। और फिर 1962 में चीन युद्ध ने उनकी विदेश नीति की सबसे बड़ी कमजोरी उजागर कर दी। “हिंदी-चीनी भाई-भाई” का आदर्शवाद चीन की सैन्य आक्रामकता के सामने टिक नहीं सका। यहीं से नेहरू की विरासत पर बहस शुरू होती है। मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है? यहां अक्सर लोग UPI, एक्सप्रेस-वे, जी-20, अनुच्छेद 370 या डिजिटल इंडिया की बात करते हैं। लेकिन क्या यही मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि है? शायद नहीं। मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह हो सकती है कि उन्होंने भारत की शासन प्रणाली और विकास की सोच को बदलने का प्रयास किया। दशकों तक भारत में सरकार योजनाएं बनाती थी, लेकिन लाभार्थी तक पहुंचने से पहले व्यवस्था में रिसाव हो जाता था। जनधन, आधार और मोबाइल के संयोजन ने पहली बार सरकार और नागरिक के बीच सीधा संपर्क स्थापित किया। UPI केवल एक भुगतान प्रणाली नहीं है। यह उस नए भारत का प्रतीक है जो तकनीक को शासन का उपकरण बना रहा है। इसी तरह सड़क, रेलवे, एयरपोर्ट और रक्षा ढांचे में जो निवेश हुआ, उसने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई गति दी। चीन: दो युग, दो प्रतिक्रियाएं यदि किसी एक मुद्दे पर नेहरू और मोदी की तुलना सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, तो वह चीन है। 1962 में भारत तैयार नहीं था। राजनीतिक आदर्शवाद राष्ट्रीय सुरक्षा पर भारी पड़ गया। 2020 में गलवान घाटी में फिर चीन सामने था। यह कहना सही नहीं होगा कि भारत ने चीन को पराजित कर दिया। लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि इस बार भारत ने 1962 जैसी असहाय स्थिति नहीं दिखाई। सीमा पर सड़कें बनीं, सैन्य तैनाती बढ़ी और चीन को लेकर नीति अधिक यथार्थवादी दिखाई दी। यहीं दोनों नेताओं के दृष्टिकोण का मूल अंतर दिखता है। असली बहस मोदी बनाम नेहरू नहीं, दो मॉडलों की है नेहरू का भारत राज्य-नियंत्रित अर्थव्यवस्था, समाजवादी सोच और गुटनिरपेक्ष विदेश नीति पर आधारित था। मोदी का भारत बाज़ार आधारित विकास, डिजिटल शासन, राष्ट्रीय पहचान और बहु-संरेखीय (Multi-alignment) कूटनीति पर आधारित दिखाई देता है। नेहरू संस्थानों के जरिए भारत को मजबूत करना चाहते थे। मोदी नेतृत्व और क्रियान्वयन की गति के जरिए भारत को बदलना चाहते हैं। एक ने भारत का ढांचा बनाया। दूसरा उस ढांचे को नए सिरे से आकार देने की कोशिश कर रहा है। क्या मोदी नेहरू से बेहतर प्रधानमंत्री साबित हुए हैं? इस प्रश्न का उत्तर राजनीति नहीं, इतिहास देगा। लेकिन 2026 में खड़े होकर यदि केवल प्रभाव, निर्णायकता, वैश्विक उपस्थिति, डिजिटल परिवर्तन, इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण और शासन की गति को मापदंड बनाया जाए, तो नरेंद्र मोदी का कार्यकाल स्वतंत्र भारत के सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों में निश्चित रूप से गिना जाएगा। इतना ही नहीं, वे संभवतः नेहरू के बाद पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने भारत के विकास मॉडल की दिशा बदलने का प्रयास किया है। नरेंद्र मोदी द्वारा नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ना केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं है। यह उस राजनीतिक यात्रा का प्रतीक है जिसमें भारत ने समाजवादी दौर से डिजिटल दौर तक, गुटनिरपेक्षता से बहु-संरेखीय कूटनीति तक और धीमी प्रशासनिक प्रक्रियाओं से तकनीक-आधारित शासन तक का सफर तय किया है। नेहरू ने आधुनिक भारत की नींव रखी थी। मोदी उस भारत को...
AIADMK के दोनों गुटों में पैचअप! फ्लोर टेस्ट में विजय का सपोर्ट करने वाले 21 विधायकों को नहीं मिलेगी सजा

AIADMK के दोनों गुटों में पैचअप! फ्लोर टेस्ट में विजय का सपोर्ट करने वाले 21 विधायकों को नहीं मिलेगी सजा

तमिलनाडु की राजनीति में AIADMK को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। पार्टी के भीतर चल रहे विवाद के बीच अब सुलह की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। सूत्रों और रिपोर्ट्स के मुताबिक, फ्लोर टेस्ट के दौरान सरकार के पक्ष में समर्थन देने वाले 21 AIADMK विधायकों के खिलाफ अब किसी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। ये विधायक पहले पार्टी लाइन से अलग जाकर दूसरी तरफ मतदान करने के कारण चर्चा में आ गए थे। लेकिन अब पार्टी नेतृत्व ने मामले को और आगे न बढ़ाते हुए अंदरूनी एकता बनाए रखने का फैसला किया है। हालांकि इस घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि AIADMK के भीतर मतभेद अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं, लेकिन फिलहाल पार्टी नेतृत्व स्थिति को संभालने और संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला पार्टी में टूट को रोकने और आने वाले समय में स्थिरता बनाए रखने की कोशिश का हिस्सा है।
Badshah Mystery Girl Photos: खेतों में मिस्ट्री गर्ल के साथ दिखे रैपर बादशाह, रोमांटिक तस्वीरों ने बढ़ाई हलचल

Badshah Mystery Girl Photos: खेतों में मिस्ट्री गर्ल के साथ दिखे रैपर बादशाह, रोमांटिक तस्वीरों ने बढ़ाई हलचल

मशहूर रैपर और सिंगर Badshah एक बार फिर अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर उनकी कुछ तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिनमें वह एक मिस्ट्री गर्ल के साथ खेतों में नजर आ रहे हैं। इन तस्वीरों में बादशाह काफी रिलैक्स और रोमांटिक अंदाज में दिखाई दे रहे हैं। खास बात यह है कि उन्होंने एक क्रिप्टिक कैप्शन भी लिखा है, जिसके बाद फैंस के बीच तरह-तरह की अटकलें शुरू हो गई हैं। सोशल मीडिया पर लोग इस मिस्ट्री गर्ल की पहचान को लेकर अनुमान लगा रहे हैं। कुछ यूजर्स इसे उनकी निजी जिंदगी से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे सिर्फ एक शूट या प्रमोशनल तस्वीर मान रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन तस्वीरों के सामने आने के बाद बादशाह की रिलेशनशिप और शादी को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, अभी तक उनकी तरफ से इस बारे में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। फिलहाल, यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और फैंस लगातार इन तस्वीरों पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
LPG महंगाई पर राजनीति तेज: Pradhan Mantri Ujjwala Yojana बदलाव को लेकर सरकार घिरी

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केंद्र सरकार ने Pradhan Mantri Ujjwala Yojana के तहत मिलने वाले सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की सालाना सीमा 9 से घटाकर 4 कर दी है। इस फैसले के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने इस कदम को लेकर मोदी सरकार पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए सरकार की आर्थिक नीतियों और विदेश नीति पर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने कहा कि पिछले 12 सालों की आर्थिक नीतियों के कारण गरीब परिवारों पर दबाव बढ़ा है और अब सब्सिडी घटने से स्थिति और मुश्किल हो गई है। उनका कहना है कि लाखों गरीब परिवारों और महिलाओं को खाना पकाने के लिए फिर से लकड़ी के जहरीले धुएं का सहारा लेने की मजबूरी हो सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले तीन महीनों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम करीब ₹89 बढ़े हैं। साथ ही 5 किलो के छोटे सिलेंडर की कीमत में भी लगभग ₹323 की बढ़ोतरी का उल्लेख किया गया है। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब पहले ही महंगाई बढ़ रही है, तो सब्सिडी कम करने का फैसला आम लोगों पर और बोझ डालता है। उन्होंने कहा कि इसका सबसे ज्यादा असर गरीब, मजदूर, किसान, महिलाएं और मध्यम वर्ग पर पड़ेगा। सरकार की तरफ से इस फैसले को लेकर अभी तक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

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