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बिलासपुर के मल्हार स्कूल विवाद में प्राचार्य कल्याण संघ की एंट्री, निष्पक्ष जांच और CCTV फुटेज खंगालने की मांग

जिले के मल्हार स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में प्राचार्य और शिक्षकों के खिलाफ छात्रों की शिकायत का मामला तूल पकड़ने लगा है। छात्रों के प्रदर्शन के बाद अब प्राचार्य कल्याण संघ और प्राचार्य मंच भी प्राचार्य व शिक्षकों के समर्थन में उतर आए हैं। संगठनों ने कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संघ का आरोप है कि स्कूल में अनुशासन और व्यवस्था सुधारने की कोशिशों से नाराज कुछ शिक्षकों ने छात्रों को भड़काया, जिससे विवाद बढ़ा। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्राचार्य के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई का विरोध प्राचार्य मंच के संयोजक संजय शर्मा ने कहा कि छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लेना जरूरी है, लेकिन प्राचार्य और संबंधित शिक्षकों का पक्ष सुने बिना एकतरफा कार्रवाई करना उचित नहीं होगा। उन्होंने मांग की कि मामले की जांच में स्कूल की शाला प्रबंधन एवं विकास समिति (SMC) का प्रस्ताव पंजी, वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खाते, रसीद और CCTV फुटेज को भी शामिल किया जाए। उनके मुताबिक, सभी दस्तावेजों और तथ्यों की पड़ताल के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए। नवंबर 2025 में प्राचार्य ने संभाला था पद प्राचार्य कल्याण संघ के अनुसार, संबंधित प्राचार्य ने नवंबर 2025 में पदभार संभालने के बाद पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने, अनुशासन बनाए रखने और स्कूल की व्यवस्था बेहतर करने की कोशिश की थी। संघ का दावा है कि स्कूल के कुछ व्याख्याता और कर्मचारी इन प्रयासों में सहयोग नहीं कर रहे थे। इससे स्टाफ के बीच तालमेल की कमी बढ़ी और विवाद की स्थिति बनी। संघ ने प्रशासन से इस पहलू की भी जांच कराने की मांग की है। शिकायत के बाद दोबारा कलेक्ट्रेट पहुंचे छात्र इससे पहले छात्रों ने प्राचार्य और कुछ शिक्षकों के खिलाफ शिकायत की थी। जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले में कार्रवाई भी की थी। इसके बावजूद छात्र दोबारा कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और प्राचार्य सहित अन्य शिक्षकों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग की। इसके बाद प्राचार्य कल्याण संघ ने प्रशासन से पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों की जांच करने और शिकायतों से जुड़े सभी पक्षों की बात सुनने की मांग की है। SMC रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों की जांच पर जोर प्राचार्य मंच के संयोजक संजय शर्मा ने कहा कि स्कूल में छात्रों और शिक्षकों के बीच संवाद की कमी भी विवाद की वजह हो सकती है। उन्होंने नियमित पढ़ाई, सभी विषयों के लिए शिक्षकों की उपलब्धता और तय समय पर कक्षाएं संचालित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की समस्याओं और सवालों का समाधान करना भी जरूरी है। साथ ही, शिकायतों की जांच के दौरान स्कूल के सभी संबंधित रिकॉर्ड और CCTV फुटेज देखे जाने चाहिए, ताकि घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। दिव्यांग प्राचार्य के मामले में नैसर्गिक न्याय की मांग संजय शर्मा के मुताबिक, संबंधित प्राचार्य दिव्यांग हैं और उनकी नौकरी का एक साल से भी कम समय बचा है। उन्होंने कहा कि प्राचार्य नियमित रूप से स्कूल आ रहे हैं और व्यवस्था सुधारने का प्रयास कर रहे हैं। मंच का कहना है कि प्राचार्य का पक्ष सुने बिना उनके खिलाफ कार्रवाई करना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं होगा। वहीं, छात्रों की शिकायतों पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। संगठन ने दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर देने की मांग की है। बैठक कर विवाद सुलझाने का सुझाव प्राचार्य कल्याण संघ और प्राचार्य मंच ने स्कूल में सौहार्दपूर्ण वातावरण बहाल करने के लिए प्राचार्य, शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच संवाद बढ़ाने की जरूरत बताई है। संगठनों ने प्रशासन से बैठक आयोजित कर आपसी समन्वय बहाल करने और पढ़ाई की व्यवस्था सुधारने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि विवाद का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर नहीं पड़ना चाहिए। फिलहाल मामले में सभी पक्षों के आरोपों और शिकायतों की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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नवरात्रि पर रायपुर सेंट्रल जेल में सेवा की मिसाल, काली माता सेवा समिति ने 1300 बंदियों को बांटे फल

नवरात्रि के अवसर पर काली माता सेवा समिति ने रायपुर सेंट्रल जेल में करीब 1300 बंदियों को फल वितरित किए। समिति ने यह पहल उन बंदियों के लिए की, जो नवरात्रि में उपवास रखकर माता रानी की आराधना कर रहे हैं। इस आयोजन के जरिए समिति ने सेवा, करुणा और मानवीय संवेदना का संदेश दिया। समिति के अध्यक्ष दीपक भारद्वाज (पोल्ले) ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों के प्रति संवेदनशीलता और सेवा भाव को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की गलती या अपराध से उसके सुधरने और बेहतर जीवन जीने की संभावनाएं समाप्त नहीं हो जातीं। बंदियों के सुधार और पुनर्वास पर दिया जोर दीपक भारद्वाज ने कहा कि समाज को न्याय के प्रति सम्मान बनाए रखने के साथ-साथ सुधार और पुनर्वास की भावना को भी महत्व देना चाहिए। बंदियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने से समाज में मानवीय मूल्यों को मजबूती मिलती है। समिति का मानना है कि जेल में बंद लोगों के साथ भी सम्मानजनक और मानवीय व्यवहार होना चाहिए, ताकि उनमें सकारात्मक बदलाव की भावना विकसित हो सके। पहले भी जेल में कर चुके हैं फल वितरण काली माता सेवा समिति के अनुसार, वह पहले भी कई बार जेल में बंदियों को फल वितरित कर चुकी है। समिति का कहना है कि नवरात्रि केवल पूजा-पाठ और उपवास तक सीमित पर्व नहीं है, बल्कि यह सेवा, करुणा और सद्भावना को जीवन में अपनाने का अवसर भी है। इसी भावना के साथ समिति के सदस्यों ने उपवास रखने वाले बंदियों तक फल पहुंचाए। आगे भी जारी रहेंगे सेवा कार्य समिति ने समाज में सेवा, सद्भावना और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए ऐसे आयोजन आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में अशोक त्रिपाठी, गुड्डू, सुनील प्रमुख, राजू भाई तारवानी और रामकृष्ण धीवर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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छत्तीसगढ़ में MBBS के बाद ग्रामीण सेवा का बॉन्ड खत्म करने की तैयारी, 25 लाख जुर्माने से भी मिलेगी राहत

छत्तीसगढ़ में MBBS के बाद एक साल की अनिवार्य ग्रामीण सेवा की व्यवस्था खत्म करने की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही ग्रामीण सेवा नहीं करने पर लगने वाला 25 लाख रुपए तक का जुर्माना और डिग्री रोकने की बाध्यता भी समाप्त हो सकती है। चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग इस संबंध में प्रस्ताव का ड्राफ्ट तैयार कर रहे हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ग्रामीण अस्पतालों में उन्हीं डॉक्टरों की पोस्टिंग की जाएगी, जो अपनी इच्छा से वहां सेवा देना चाहेंगे। अन्य खाली पदों को भर्ती के जरिए भरने की योजना पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। PG के बाद ग्रामीण सेवा का बॉन्ड रहेगा लागू फिलहाल छत्तीसगढ़ में MBBS के बाद एक साल और पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) के बाद दो साल की ग्रामीण सेवा का बॉन्ड अनिवार्य है। तय अवधि तक सेवा नहीं देने पर MBBS डॉक्टरों को 25 लाख रुपए और PG डॉक्टरों को 50 लाख रुपए तक का जुर्माना देना पड़ता है। आरक्षित वर्ग के डॉक्टरों के लिए यह राशि क्रमशः 20 लाख और 40 लाख रुपए है। जुर्माना जमा नहीं करने पर डिग्री रोकने का प्रावधान है। डिग्री नहीं मिलने से छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराने में परेशानी होती है और डॉक्टर प्रैक्टिस नहीं कर पाते। फिलहाल प्रस्ताव केवल MBBS के बाद अनिवार्य ग्रामीण सेवा समाप्त करने से जुड़ा है। PG के बाद दो साल की ग्रामीण सेवा की बाध्यता खत्म करने को लेकर अभी कोई संकेत नहीं मिले हैं। जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के बाद शुरू हुई कवायद ग्रामीण सेवा के बॉन्ड में राहत देने की मांग जूनियर डॉक्टरों की राज्यव्यापी हड़ताल के दौरान उठाई गई थी। हड़ताल के दौरान डॉक्टरों ने इस व्यवस्था में बदलाव की मांग की थी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जूनियर डॉक्टरों से चर्चा के दौरान उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया था। इसके बाद चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग ने अनिवार्य ग्रामीण सेवा की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव को लेकर ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की। हर सत्र में 800 से ज्यादा डॉक्टरों की होती है पोस्टिंग रिपोर्ट के मुताबिक, हर सत्र में 800 से अधिक डॉक्टर अनिवार्य ग्रामीण सेवा के तहत अस्पतालों में पदस्थ किए जाते हैं। इसके बावजूद दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। जानकारी के अनुसार, कई डॉक्टर ग्रामीण क्षेत्रों में पोस्टिंग मिलने के बाद अलग-अलग तरीकों से अपना तबादला करवा लेते हैं। विभागीय स्तर पर भी इस समस्या की जानकारी है। ऐसे में अब अस्थायी व्यवस्था के बजाय ग्रामीण अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के स्थायी विकल्प पर विचार किया जा रहा है। खाली पद भरने की व्यवस्था पर मंथन अनिवार्य ग्रामीण सेवा की बाध्यता समाप्त होने की स्थिति में ग्रामीण अस्पतालों के खाली पदों को किस तरह भरा जाएगा, इस पर अभी विचार चल रहा है। विभागों का जोर भर्ती प्रक्रिया के जरिए इन पदों को भरने पर है। प्रस्तावित बदलाव से MBBS के बाद ग्रामीण सेवा नहीं करने वाले डॉक्टरों को बॉन्ड और जुर्माने से राहत मिल सकती है। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए सरकार क्या व्यवस्था लागू करेगी, यह अंतिम निर्णय और विभागीय योजना सामने आने के बाद स्पष्ट होगा।
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बिलासपुर में म्यूल अकाउंट से 5 राज्यों में साइबर ठगी का लिंक, कमीशन के लालच में बैंक खाता दिया किराए पर

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में म्यूल बैंक अकाउंट के जरिए पांच राज्यों में साइबर ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि बलौदाबाजार के एक युवक ने कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता और ATM कार्ड साइबर ठगों को दे दिया था। इस खाते के जरिए ठगी की रकम जमा करने, निकालने और दूसरे खातों में ट्रांसफर करने का काम किया जा रहा था। केंद्र सरकार से मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया है। JMIS पोर्टल पर मिलीं पांच साइबर शिकायतें डीएसपी क्राइम सुदीप सरकार के मुताबिक, पुलिस मुख्यालय रायपुर से मिले निर्देश के बाद एक संदिग्ध म्यूल बैंक खाते की जांच शुरू की गई। भारत सरकार के समन्वय (JMIS) पोर्टल पर खाते की जानकारी खंगालने के दौरान पांच साइबर शिकायतें सामने आईं। जांच में बैंक ऑफ महाराष्ट्र के एक खाते में संदिग्ध लेनदेन का पता चला। बैंक स्टेटमेंट की पड़ताल से जानकारी मिली कि इस खाते में पांच साइबर अपराधों से जुड़ी रकम जमा कराई गई थी। ये शिकायतें देश के पांच राज्यों के पीड़ितों से संबंधित थीं। UPI और ATM से तुरंत निकालते थे रकम पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी की रकम खाते में जमा होने के बाद खाताधारक और उसके साथी सक्रिय हो जाते थे। UPI और ATM के जरिए कुछ ही मिनटों में रकम निकाल ली जाती थी या दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी। जांच में खाते में साइबर ठगी की रकम के अलावा अन्य राशि जमा होने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस को आशंका है कि तेजी से लेनदेन करने का उद्देश्य रकम को आगे पहुंचाना और बैंक या पुलिस की कार्रवाई से पहले खाते में मौजूद पैसा निकाल लेना था। कमीशन के लालच में सौंपा बैंक खाता और ATM कार्ड पुलिस जांच के मुताबिक, बलौदाबाजार के परसाडीह वार्ड-4 निवासी बलवन घृतलहरे ने कथित तौर पर कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता और ATM कार्ड साइबर ठगों को सौंप दिया था। आरोप है कि वह ठगी की रकम को छिपाने और उसे ठिकाने लगाने में मदद कर रहा था। मस्तूरी थाने के मल्हार पुलिस सहायता केंद्र में जांच के बाद आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। मामले में आगे की जांच की जा रही है।
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रायपुर में 13 पुलिसकर्मियों का सम्मान, नवजात को बचाने से लेकर मोबाइल लुटेरे को पकड़ने तक की कार्रवाई

यातायात व्यवस्था संभालने के साथ अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने वाले 13 पुलिसकर्मियों को पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने सम्मानित किया। इन पुलिसकर्मियों ने ड्यूटी के दौरान लावारिस नवजात को अस्पताल पहुंचाया, मोबाइल छीनकर भागने वाले आरोपी को पकड़ा और चाकू लहराकर लोगों को डराने वाले ई-रिक्शा चालक को भी गिरफ्तार कराया। सम्मानित पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार दिया गया। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने कहा कि यातायात व्यवस्था संभालना पुलिस की जिम्मेदारी है। इसके साथ ही ड्यूटी के दौरान अपराध या संदिग्ध गतिविधि नजर आने पर तत्काल कार्रवाई करना भी जरूरी है। बिना नंबर की बाइक रोकी, मोबाइल छीनने का आरोपी पकड़ा 14 अक्टूबर को बंजारी मंदिर के पास यातायात पुलिस ने बिना नंबर प्लेट की बाइक को रोका। इस दौरान धनीराम चंद्रा ने बाइक चालक पर मोबाइल और 700 रुपये छीनने का आरोप लगाया। तलाशी के दौरान पुलिस को मोबाइल मिला, जिसके बाद आरोपी करण पाल को पकड़ लिया गया। इस कार्रवाई में प्रधान आरक्षक विजय मार्कण्डेय समेत पांच पुलिसकर्मी शामिल थे। उर्स मेले में चाकू लहराने वाला ई-रिक्शा चालक पकड़ा 8 अक्टूबर को एवरग्रीन चौक पर उर्स मेले के दौरान ड्यूटी कर रहे आरक्षक ललित कुमार साहू ने चाकू लहराकर लोगों को डराने वाले ई-रिक्शा चालक को पीछा कर पकड़ लिया। इसके बाद आरोपी को ई-रिक्शा समेत गोलबाजार पुलिस के हवाले कर दिया गया। नकली शराब की सूचना पर जांच, मिला चोरी का मोबाइल 14 अक्टूबर को पंडरी शराब दुकान के पास नकली शराब बेचने की सूचना मिलने पर यातायात पुलिस ने एक संदिग्ध को पकड़ा। तलाशी के दौरान उसके पास मोबाइल मिला। जांच में मोबाइल चोरी का होने की जानकारी सामने आई। इस कार्रवाई में निरीक्षक अमित पद्मशाली, प्रधान आरक्षक श्रीकांत मिश्रा और आरक्षक रमेंद्र वर्मा शामिल थे। नवजात को छोड़कर भाग रहे व्यक्ति को पकड़ा 13 अक्टूबर को राजेंद्र नगर अंडरब्रिज के पास मदर टेरेसा मिशनरीज के गेट पर एक नवजात को छोड़कर भाग रहे गोंदिया निवासी रफीक शेख को यातायात पुलिस ने पकड़ लिया। पुलिसकर्मियों ने नवजात को नवकार अस्पताल पहुंचाया और आरोपी को टिकरापारा थाने के सुपुर्द कर दिया। इस कार्रवाई में निरीक्षक गोविंद यादव, प्रधान आरक्षक कुलेश्वर राजपूत और आरक्षक सुनील क्षत्रीय, गोपाल सिंह राजपूत व विजय सेन शामिल थे। पुलिस कमिश्नर ने बढ़ाया पुलिसकर्मियों का उत्साह इन सभी मामलों में तत्परता दिखाने वाले कुल 13 पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने कहा कि पुलिसकर्मियों की सतर्कता और समय पर की गई कार्रवाई से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।
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SECL दीपका खदान प्रभावितों की मांगों पर बोर्ड लेगा फैसला, 500 रजिस्ट्री धारकों के मुआवजे का मामला अटका

छत्तीसगढ़ के हरदीबाजार में SECL की दीपका खदान विस्तार परियोजना से प्रभावित भू-विस्थापितों ने अधिग्रहित जमीन की खरीदी-बिक्री के बाद बने मकानों के मुआवजे में कटौती का मुद्दा उठाया है। प्रभावितों ने मांग की है कि 500 रजिस्ट्री धारकों को भी 100 प्रतिशत सोलेशियम के साथ मुआवजा दिया जाए। इस मामले में अंतिम निर्णय SECL कोल कंपनी का बोर्ड लेगा। एरिया प्रबंधन ने बोर्ड के अधिकारियों से चर्चा कराने का आश्वासन दिया है। मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने से 16 अक्टूबर को प्रस्तावित CMD कार्यालय के घेराव आंदोलन की तैयारी चल रही थी। हालांकि, SECL प्रबंधन के साथ करीब चार घंटे चली त्रिपक्षीय वार्ता में सकारात्मक चर्चा के बाद भू-विस्थापितों ने फिलहाल आंदोलन टाल दिया है। अन्य मांगों पर भी प्रबंधन ने निर्णय के लिए समय मांगा है। विधायक की मौजूदगी में हुई त्रिपक्षीय वार्ता खदान प्रभावितों और SECL प्रबंधन के बीच पाली SDM रोहित सिंह की मौजूदगी में बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल ने की। 16 अक्टूबर को प्रस्तावित CMD कार्यालय के घेराव की सूचना मिलने के बाद एरिया प्रबंधन ने वार्ता बुलाई थी। SECL दीपका सभागार में हुई बैठक में भू-विस्थापितों ने अपनी मांगें अधिकारियों के सामने रखीं। इससे पहले 21 सितंबर को CMD मुख्यालय में भी मांगों पर चर्चा हुई थी, लेकिन प्रभावितों के मुताबिक उस समय कोई ठोस जवाब नहीं मिला। इसके बाद आंदोलन की चेतावनी दिए जाने पर प्रबंधन दो बार समय मांग चुका था। बैठक में ग्राम पंचायत हरदीबाजार के सरपंच लोकेश्वर कंवर ने भू-विस्थापितों के हित से जुड़े छह बिंदु रखे। सभी मुद्दों पर क्रमवार चर्चा की गई। उपसरपंच रेखा जायसवाल ने बहू के नाम पर नापी किए गए मकानों के लिए भी 100 प्रतिशत सोलेशियम के साथ मुआवजा देने की मांग उठाई। प्रबंधन ने इस विषय पर चर्चा के बाद सकारात्मक निर्णय लेने का भरोसा दिलाया। 1800 मकानों को छह महीने में हटाने पर सहमति बैठक में हरदीबाजार के विस्थापन और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। जानकारी के मुताबिक, प्रभावितों ने बसाहट नहीं लेने पर सहमति जताई है। छह महीने के भीतर नापी किए गए करीब 1800 मकानों को तोड़कर दूसरी जगह बसने वाले प्रभावितों को बसाहट के एवज में 15 लाख रुपये अतिरिक्त देने की बात सामने आई है। वहीं, SECL में नियमित रोजगार के लिए 52 डिसमिल जमीन का कटऑफ तय किया गया है। यानी इससे कम जमीन के मालिकाना हक वाले प्रभावितों को कंपनी में नियमित रोजगार नहीं मिलेगा। इसके अलावा, हरदीबाजार की 212 एकड़ जमीन का अधिग्रहण SECL नहीं कर रही है। कंपनी ने इसकी वजह संबंधित जमीन पर कोयला उपलब्ध नहीं होना बताई है। 2004 और 2010 में दो चरणों में हुआ था अधिग्रहण दीपका खदान के विस्तार के लिए हरदीबाजार गांव की जमीन का अधिग्रहण वर्ष 2004 और 2010 में दो चरणों में किया गया था। आरोप है कि अधिग्रहण के बाद भी तहसील कार्यालय में रजिस्ट्री के जरिए जमीन की खरीदी-बिक्री होती रही और इसके बाद वहां मकान भी बनाए गए। SECL ने 26 अगस्त 2024 को अंतिम ड्रोन सर्वे कराया था। कंपनी के प्रावधानों के मुताबिक, इस सर्वे से पहले बने मकानों के लिए सोलेशियम सहित मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि ड्रोन सर्वे के बाद बने मकानों के लिए 40 प्रतिशत सिंगल मुआवजे का प्रावधान बताया गया है। इसी अंतर के कारण अधिग्रहण के बाद जमीन खरीदने वाले रजिस्ट्री धारक 100 प्रतिशत सोलेशियम के साथ मुआवजे की मांग कर रहे हैं। प्रभावितों का कहना है कि 26 अगस्त 2024 के अंतिम ड्रोन सर्वे को मकानों के मुआवजे के लिए कटऑफ माना जाना चाहिए। अब SECL बोर्ड के फैसले पर टिकी नजर बैठक में SECL के जीएम शरद तिवारी, गेवरा जीएम अशोक कुमार और CMD मुख्यालय के लैंड एक्विजिशन एंड रिहैबिलिटेशन (L&R) विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा ग्राम पंचायत रेंकी के सरपंच तीजराम उर्रे, उपसरपंच शिव यादव, पूर्व जनपद सदस्य अनिल टंडन, जिला पंचायत उपाध्यक्ष प्रतिनिधि मुकेश जायसवाल और अन्य लोग शामिल हुए। फिलहाल 500 रजिस्ट्री धारकों के मुआवजे पर अंतिम फैसला SECL बोर्ड को लेना है। अन्य मांगों पर भी प्रबंधन ने समय मांगा है। ऐसे में भू-विस्थापितों को अब कंपनी के अगले निर्णय का इंतजार है।
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बिलासपुर में 7-8 मिनट में हो रही वाहनों की फिटनेस जांच पर सवाल, 800 की फीस के बदले 5 हजार मांगने का आरोप

बिलासपुर। मटियारी-बेलतरा बाईपास स्थित निजी वाहन फिटनेस सेंटर में व्यावसायिक वाहनों की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। मौके पर एक वाहन की फिटनेस जांच महज 7 से 8 मिनट में पूरी होती दिखाई दी। जांच के बाद बाहर निकली एक बस गेट पर दस्तावेज लेते समय ही बंद हो गई। चालक ने दोबारा इंजन स्टार्ट करने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। आखिरकार लोगों को धक्का लगाकर बस को हटाना पड़ा। घटना ने फिटनेस जांच की गुणवत्ता और प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सेंटर के बाहर सुबह से ही बसों और ट्रकों की कतार लगी थी। कई वाहन मालिक जांच से पहले इंडिकेटर, हेडलाइट और दूसरी लाइटों की खराबियां ठीक कराते नजर आए। कुछ वाहनों पर रेडियम पट्टियां भी लगाई जा रही थीं। कमियां दूर करने के बाद वाहनों को जांच के लिए अंदर भेजा जा रहा था। ढाई साल पहले निजी संस्था को सौंपी गई व्यवस्था करीब ढाई साल पहले तक व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच आरटीओ परिसर में होती थी। बाद में यह व्यवस्था निजी संस्था रोविंग आई सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को सौंप दी गई। इसके बाद फिटनेस सेंटर को मटियारी-बेलतरा बाईपास पर स्थानांतरित कर दिया गया। अब वाहन मालिकों को लगरा स्थित आरटीओ कार्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर इस सेंटर तक जाना पड़ता है। व्यवस्था निजी हाथों में जाने के बाद जांच प्रक्रिया, समय और खर्च को लेकर वाहन मालिकों की शिकायतें सामने आ रही हैं। 29 बिंदुओं की जांच 7-8 मिनट में कैसे? बिलासपुर बस मालिक परिवहन संघ के महासचिव नितिन जुनेजा ने कहा कि फिटनेस जांच निजी हाथों में जाने के बाद वाहन मालिकों की परेशानियां बढ़ी हैं। उनके मुताबिक, कुछ लोग संपर्कों के जरिए जल्दी काम करा लेते हैं, जबकि अन्य वाहन मालिकों को चार-चार घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। इससे उनका समय और पैसा दोनों प्रभावित होते हैं। जुनेजा के अनुसार, फिटनेस जांच के दौरान करीब 29 बिंदुओं की जांच की जानी होती है। इसमें ब्रेक, सस्पेंशन, स्टीयरिंग, लाइट, टायर, उत्सर्जन मानक और अन्य सुरक्षा उपकरणों की स्थिति शामिल है। संबंधित वाहन श्रेणियों में स्पीड गवर्नर और जीपीएस उपकरणों की जांच भी जरूरी हो सकती है। ऐसे में मौके पर 7 से 8 मिनट में जांच पूरी होते दिखाई देने से यह सवाल उठ रहा है कि सभी जरूरी तकनीकी बिंदुओं की जांच किस तरह की जा रही है। हालांकि, जांच की गुणवत्ता और नियमों के पालन की वास्तविक स्थिति रिकॉर्ड और प्रक्रिया की विस्तृत पड़ताल के बाद ही स्पष्ट होगी। 800 रुपये की फीस के बदले 5 हजार मांगने का आरोप कुछ वाहन मालिकों ने आरोप लगाया कि करीब 800 रुपये की निर्धारित सरकारी फीस वाले काम के लिए उनसे 5 हजार रुपये तक मांगे जाते हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वाहन मालिकों के मुताबिक, सेंटर के बाहर एजेंट सक्रिय रहते हैं। उनका दावा है कि आरटीओ कार्यालय के पास एजेंटों से बातचीत के बाद उन्हें फिटनेस सेंटर भेजा जाता है। वहीं, सेंटर में दलालों के प्रवेश पर प्रतिबंध होने की बात भी कही जा रही है। इन आरोपों के संबंध में शुल्क का आधिकारिक विवरण, भुगतान की रसीदें और संबंधित रिकॉर्ड सामने आने पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। सेंटर प्रबंधन का दावा- जांच प्रक्रिया सही फिटनेस सेंटर के मैनेजर नवीन ने बताया कि एक वाहन की जांच में 7 से 8 मिनट लगते हैं। उनके मुताबिक, वाहनों की फिटनेस जांच सही तरीके से की जाती है और जांच क्षेत्र में किसी को प्रवेश नहीं दिया जाता। उन्होंने बताया कि सेंटर में निगरानी के लिए 36 कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा, वाहन चालकों के लिए पीने के पानी और बैठने की व्यवस्था भी की गई है। फिलहाल, कम समय में फिटनेस जांच पूरी होने और अतिरिक्त रकम मांगे जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच से ही व्यवस्था की पारदर्शिता और सुरक्षा मानकों के पालन की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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बिलासपुर एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से 3 सप्ताह में मांगा जवाब

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट के रनवे विस्तार और हवाई सुविधाओं में बढ़ोतरी को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) से जवाब मांगा है। मंगलवार को हुई सुनवाई में चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि बिलासपुर एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने के लिए अब तक किए गए प्रयासों की विस्तृत जानकारी तीन सप्ताह के भीतर शपथ पत्र के जरिए पेश की जाए। कोर्ट ने AAI से भी एयरपोर्ट के प्रबंधन, संचालन और विकास की जिम्मेदारी संभालने के संबंध में अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। पत्राचार से नहीं चलेगा काम, ठोस कदम उठाने की जरूरत सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि बिलासपुर एयरपोर्ट और हवाई सुविधाओं के विस्तार के लिए केंद्र और राज्य सरकार से ठोस कदमों की अपेक्षा है। केवल आपस में पत्राचार करते हुए समय नहीं गंवाया जाना चाहिए। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि बिलासपुर एयरपोर्ट वर्तमान में 3C श्रेणी में एटीआर विमानों के संचालन के लिए उपयुक्त है। साथ ही, इसे 4C श्रेणी में अपग्रेड करने के लिए राज्य सरकार तैयार है। AAI के जवाब पर याचिकाकर्ताओं ने उठाए सवाल पिछली सुनवाई 29 सितंबर को हुई थी। उस दौरान हाईकोर्ट ने AAI के वरिष्ठ और सक्षम अधिकारी को शपथ पत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया था कि बिलासपुर एयरपोर्ट के प्रबंधन, विकास और संचालन की जिम्मेदारी AAI को सौंपने के राज्य सरकार के प्रस्ताव पर क्या कार्रवाई की गई है। मंगलवार को याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि AAI की ओर से दाखिल शपथ पत्र ऐसे वरिष्ठ और सक्षम अधिकारी का नहीं है, जैसा कोर्ट ने निर्देश दिया था। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, दस्तावेजों से यह भी सामने आया है कि राज्य सरकार बिलासपुर के साथ अंबिकापुर और जगदलपुर एयरपोर्ट को भी AAI को सौंपने पर विचार कर रही है। जमीन और सुविधाओं की जानकारी मांगने में उलझा मामला याचिकाकर्ताओं ने बताया कि राज्य सरकार के प्रस्ताव पर AAI ने स्पष्ट सहमति या असहमति देने के बजाय एयरपोर्ट की उपलब्ध जमीन, कुल क्षेत्रफल, खसरा-वार विवरण, स्वामित्व और मौजूदा सुविधाओं से जुड़ी जानकारी मांगी है। उनका कहना है कि इस तरह के पत्राचार से एयरपोर्ट को समयबद्ध तरीके से AAI को सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ती नहीं दिख रही है। बिलासपुर का रनवे अंबिकापुर और जगदलपुर से छोटा याचिकाकर्ताओं के अनुसार, बिलासपुर एयरपोर्ट का रनवे करीब 1,495 मीटर लंबा है। वहीं, अंबिकापुर एयरपोर्ट का रनवे 1,900 मीटर और जगदलपुर का रनवे 1,707 मीटर लंबा बताया गया है। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि गर्मियों में तापमान बढ़ने के कारण विमान की क्षमता के अनुसार सभी यात्रियों को ले जाना संभव नहीं हो पाता। उनके मुताबिक, 72 यात्रियों की क्षमता वाले विमान में यात्रियों की संख्या घटाकर करीब 52 करनी पड़ती है। इसी वजह से अब तक कोई निजी विमानन कंपनी बिलासपुर से अपना संचालन शुरू नहीं कर पाई है। रनवे विस्तार और नए ATC टावर के प्रस्ताव अटके याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि रनवे विस्तार के लिए 63 करोड़ रुपये और नए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टावर के निर्माण के लिए 41 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बिलासपुर एयरपोर्ट प्रबंधन की ओर से मंत्रालय भेजा जा चुका है। हालांकि, इन कार्यों को AAI करेगी या राज्य सरकार, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसी असमंजस के कारण काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। तीन सप्ताह में शपथ पत्र, 23 नवंबर को अगली सुनवाई हाईकोर्ट ने विमानन विभाग के सचिव को निर्देश दिया है कि बिलासपुर एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने के लिए अब तक किए गए प्रयासों का विस्तृत ब्यौरा तीन सप्ताह के भीतर शपथ पत्र के माध्यम से पेश किया जाए। AAI को भी मामले की अद्यतन स्थिति बताते हुए शपथ पत्र दाखिल करना होगा। अब अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर एयरपोर्ट के विस्तार और बेहतर हवाई कनेक्टिविटी की दिशा तय हो सकती है।
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कैंसर की दवाओं की कीमतों में बड़ा अंतर: ₹538 का इंजेक्शन बाजार में ₹1,500 तक, एक ही दवा की MRP में 16 गुना तक फर्क

रायपुर। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों और उनके परिजनों पर इलाज के खर्च का भारी बोझ पड़ रहा है। दवाओं की कीमतों में बड़े अंतर ने इस परेशानी को और बढ़ा दिया है। एक ही दवा अलग-अलग कंपनियों के ब्रांड में अलग कीमत पर बेची जा रही है। वहीं, सरकारी खरीद दर और बाजार में मिलने वाली कीमत के बीच भी काफी अंतर सामने आया है। कैंसर की दवाओं की कीमतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी सवाल उठाया है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए पूछा कि 2,700 रुपये की दवा 27,000 रुपये की कैसे हो सकती है? इसी मुद्दे पर दैनिक भास्कर की पड़ताल में दवाओं की एमआरपी, बाजार में उपलब्ध कीमत और सरकारी खरीद दरों के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। ₹538 का इंजेक्शन बाजार में 1,500 रुपये तक पड़ताल के मुताबिक, एज़ासिटिडाइन (Azacitidine) 100 एमजी इंजेक्शन सरकारी खरीद में 538 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि बाजार में इसकी कीमत करीब 1,200 से 1,500 रुपये तक बताई गई है। एक ही दवा के अलग-अलग ब्रांड की एमआरपी और वास्तविक बिक्री कीमत में भी बड़ा अंतर मिला। एक ब्रांड के इंजेक्शन की एमआरपी 8,888 रुपये दर्ज है, लेकिन कुछ मेडिकल स्टोर पर यह 1,890 रुपये में मिल रहा है। दूसरे ब्रांड की एमआरपी 6,337 रुपये है, जबकि इसकी कीमत 1,100 रुपये बताई गई। वहीं, तीसरे ब्रांड की एमआरपी 5,964.70 रुपये होने के बावजूद यह 800 रुपये में बिक रहा है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि केवल एमआरपी देखकर मरीज के लिए दवा की वास्तविक कीमत का अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है। 10 में से 8 दवाओं की कीमतों में बड़ा अंतर दैनिक भास्कर की पड़ताल में कैंसर की 10 आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतों की सरकारी खरीद दरों से तुलना की गई। इसके लिए रायपुर के थोक दवा बाजार, मेडिकल स्टोर, निजी अस्पतालों की फार्मेसी, एम्स की फार्मेसी और सरकारी खरीद के आंकड़े जुटाए गए। कैंसर विशेषज्ञों की मदद से इन कीमतों का विश्लेषण भी किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, 10 में से 2 दवाओं की कीमतों में सरकारी खरीद दर की तुलना में 12 से 16 गुना तक अंतर मिला। वहीं, 6 अन्य दवाओं की कीमतें 2 से 8 गुना तक अधिक पाई गईं। पड़ताल में यह भी सामने आया कि कई दवाओं की एमआरपी काफी ऊंची दर्ज है। ऐसे में मेडिकल स्टोर पर मरीजों को वास्तविक कीमत और उपलब्ध विकल्पों की जानकारी न होने पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है। सरकारी अस्पताल में मुफ्त दवा, बिल आयुष्मान कार्ड से रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल स्थित कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट की फार्मेसी में सरकारी दरों पर खरीदी गई दवाओं पर 12 प्रतिशत टैक्स लगाए जाने की जानकारी भी पड़ताल में सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, यहां मरीजों को ये दवाएं मुफ्त दी जाती हैं, जबकि इनका बिल आयुष्मान कार्ड के माध्यम से समायोजित किया जाता है। मरीजों के लिए कीमतों में पारदर्शिता जरूरी कैंसर का इलाज अक्सर लंबे समय तक चलता है और मरीजों को कई महंगी दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में सरकारी खरीद दर, दवा की एमआरपी और वास्तविक बिक्री मूल्य के बीच बड़ा अंतर मरीजों के लिए आर्थिक परेशानी बढ़ा सकता है। दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता, अलग-अलग ब्रांड की कीमतों की स्पष्ट जानकारी और निर्धारित दरों की निगरानी से मरीजों को राहत मिल सकती है। हालांकि, किसी दवा की वास्तविक कीमत उसके ब्रांड, पैकिंग, उपलब्धता और खरीद की शर्तों के आधार पर अलग हो सकती है।
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छत्तीसगढ़ में बस किराया 75% तक बढ़ा, रायपुर-बिलासपुर सफर के लिए अब देने होंगे ₹228

छत्तीसगढ़ में यात्री बसों का किराया करीब एक साल के भीतर दूसरी बार बढ़ा दिया गया है। परिवहन विभाग ने 8 अक्टूबर को नई किराया दरों की अधिसूचना जारी की है। इस बार सबसे ज्यादा असर साधारण बसों में सफर करने वाले यात्रियों पर पड़ेगा। साधारण बसों का प्रति किलोमीटर किराया 1 रुपये से बढ़ाकर 1.75 रुपये कर दिया गया है। यानी प्रति किलोमीटर दर में 75 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा शुरुआती 5 किलोमीटर का किराया भी 8 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये कर दिया गया है। नई दरें साधारण बसों के साथ डीलक्स, लग्जरी और एसी स्लीपर बसों पर भी लागू होंगी। रायपुर से बिलासपुर और जगदलपुर का सफर होगा महंगा नई किराया दरों के कारण प्रदेश के प्रमुख शहरों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को अब अधिक पैसे खर्च करने होंगे। इस बढ़ोतरी का असर रोजाना और नियमित रूप से बसों में यात्रा करने वाले लोगों के मासिक खर्च पर भी पड़ सकता है। पिछले साल किराया घटने से मिली राहत अब खत्म साल 2025 में सरकार ने साधारण बसों का शुरुआती किराया 7.50 रुपये से बढ़ाकर 8 रुपये किया था। हालांकि, उस समय प्रति किलोमीटर किराया 1.25 रुपये से घटाकर 1 रुपये कर दिया गया था। अब नई दरों में प्रति किलोमीटर किराया 1 रुपये से बढ़ाकर 1.75 रुपये कर दिया गया है। इससे पिछले साल प्रति किलोमीटर दर में कटौती से यात्रियों को मिली राहत खत्म हो गई है और उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। प्रदेश में 13 हजार से ज्यादा यात्री बसें छत्तीसगढ़ में 13 हजार से अधिक यात्री बसें पंजीकृत हैं। इनमें करीब 5 हजार साधारण बसें हैं। बाकी बसें स्लीपर, एसी, सेमी स्लीपर, डीलक्स और लग्जरी श्रेणियों में आती हैं। साधारण बसों का इस्तेमाल मुख्य रूप से मध्यम और कम आय वर्ग के यात्री करते हैं। ऐसे में किराया बढ़ने का सीधा असर इन यात्रियों के परिवहन खर्च पर पड़ने की संभावना है। बस ऑपरेटरों की मांग के बाद बढ़ाया गया किराया बस ऑपरेटर पिछले कई दिनों से किराया बढ़ाने की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि ईंधन, टायर, कल-पुर्जों और वाहनों के रखरखाव का खर्च बढ़ने के कारण पुरानी दरों पर बसों का संचालन मुश्किल हो रहा है। ऑपरेटरों ने मांग पूरी नहीं होने पर हड़ताल करने और बसों का संचालन बंद करने की चेतावनी भी दी थी। इसके बाद किराया बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया, जिस पर परिवहन विभाग ने नई दरों की अधिसूचना जारी की।
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न्यूजीलैंड क्रिकेट का बड़ा फैसला, MLC में नहीं करेगा निवेश; NZ20 लीग भी टली

न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड ने अमेरिका की मेजर लीग क्रिकेट (MLC) में निवेश नहीं करने का फैसला किया है। बोर्ड ने 2027 सीजन से पहले लीग की नई टीम शुरू करने के लिए अमेरिकी कंपनी ट्रू नॉर्थ स्पोर्ट्स (TNS) वेंचर्स के साथ साझेदारी की थी। हालांकि, अब न्यूजीलैंड क्रिकेट घरेलू क्रिकेट और अपने संसाधनों पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है। मेजर लीग क्रिकेट में न्यूजीलैंड के कई प्रमुख खिलाड़ी हिस्सा लेते रहे हैं। इनमें रचिन रवींद्र, फिन एलन, डेवोन कॉनवे, टिम सेफर्ट और लॉकी फर्ग्यूसन जैसे नाम शामिल हैं। अप्रैल 2025 में हुई थी साझेदारी की घोषणा न्यूजीलैंड क्रिकेट ने अप्रैल 2025 में TNS वेंचर्स के साथ साझेदारी की घोषणा की थी। इस समझौते के तहत बोर्ड को 2027 में MLC की प्रस्तावित दो नई टीमों में से एक को शुरू करने और संचालित करने में सहयोग देना था। इसके लिए न्यूजीलैंड क्रिकेट को हाई-परफॉर्मेंस और संचालन से जुड़ी सहायता उपलब्ध करानी थी। हालांकि, अब बोर्ड ने इस योजना से पीछे हटने का निर्णय लिया है। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने कहा- अभी सही समय नहीं न्यूजीलैंड क्रिकेट के CEO ज्योफ एलॉट ने कहा कि उन्हें इस साझेदारी के उद्देश्य और महत्वाकांक्षा पर भरोसा है। उनके मुताबिक, अमेरिकी बाजार में क्रिकेट के विस्तार की काफी संभावनाएं हैं, लेकिन विस्तृत आकलन के बाद बोर्ड को लगता है कि फिलहाल इस दिशा में आगे बढ़ने का सही समय नहीं है। एलॉट ने TNS और MLC के सह-संस्थापक समीर मेहता तथा विजय श्रीनिवासन का अवसर तलाशने में सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने यह भी कहा कि न्यूजीलैंड क्रिकेट भविष्य में दोनों के साथ संपर्क बनाए रखेगा। न्यूजीलैंड की NZ20 टी-20 लीग भी टली न्यूजीलैंड में प्रस्तावित पुरुष और महिला टी-20 लीग NZ20 की शुरुआत भी टाल दी गई है। इस लीग की योजना मौजूदा सुपर स्मैश टूर्नामेंट की जगह एक नई प्रतियोगिता शुरू करने की थी। पहले NZ20 को जनवरी 2027 में शुरू करने की योजना थी, लेकिन अब इसकी शुरुआत दिसंबर 2027 तक के लिए टाल दी गई है। इससे न्यूजीलैंड क्रिकेट की घरेलू टी-20 प्रतियोगिता की योजनाओं में भी बदलाव हुआ है।

Zomato-Blinkit की पैरेंट कंपनी Eternal लाएगी Dark.ai, सीक्रेट चैट और प्राइवेसी पर होगा फोकस

जोमैटो और ब्लिंकइट की पैरेंट कंपनी एटरनल (Eternal) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में नया कदम उठाने की तैयारी कर रही है। कंपनी के प्रमुख दीपिंदर गोयल ने ‘Dark.ai’ नाम के नए AI ऐप के बारे में जानकारी दी है। इसका मुख्य फोकस यूजर्स की प्राइवेसी और संवेदनशील बातचीत की सुरक्षा पर होगा। गोयल के मुताबिक, इस ऐप को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि लोग अपनी निजी बातें, गोपनीय विचार, रिसर्च और जटिल सवाल बिना किसी झिझक के साझा कर सकें। फिलहाल कंपनी के कर्मचारी इसकी टेस्टिंग कर रहे हैं। डेटा सुरक्षा पर जोर, कंपनी भी नहीं पढ़ पाएगी चैट दीपिंदर गोयल ने बताया कि Dark.ai को कंपनी के अपने कंप्यूटर सिस्टम और सुरक्षित तकनीक पर चलाने की योजना है। इसमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन जैसी सुरक्षा व्यवस्था का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है, ताकि बातचीत को अनधिकृत रूप से पढ़े जाने से बचाया जा सके। ऐप में एक विशेष मेमोरी सिस्टम भी होगा, जिस पर यूजर का नियंत्रण रहेगा। इसके जरिए यूजर अपनी जरूरत के अनुसार पुरानी बातचीत से जुड़ी जानकारी को सुरक्षित रख सकेंगे या हटा सकेंगे। हालांकि, ऐप की सुरक्षा व्यवस्था और डेटा प्रबंधन से जुड़े सभी तकनीकी विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इसलिए कंपनी के दावों की वास्तविक सीमा लॉन्च के समय उपलब्ध जानकारी से स्पष्ट होगी। स्टार्टअप, वैज्ञानिकों और रिसर्चर्स के लिए होगा उपयोगी Dark.ai को खास तौर पर उन लोगों और संस्थानों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, जिन्हें संवेदनशील जानकारियों के साथ काम करना पड़ता है। इनमें स्टार्टअप संस्थापक, वैज्ञानिक, रिसर्चर्स, बड़ी कंपनियां और सरकारी कार्यालय शामिल हैं। गोयल के मुताबिक, इस AI को केवल यूजर को खुश करने के लिए जवाब देने के बजाय तथ्यों के आधार पर उत्तर देने के लिए तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसा सिस्टम बनाना है, जो यूजर की बातों से सहमत होने के बजाय अपनी समझ के अनुसार जवाब दे। मौजूदा AI ऐप्स की प्राइवेसी पर उठाए सवाल गोयल ने मौजूदा AI प्लेटफॉर्म्स पर डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि कई सेवाओं में यूजर डेटा सेव न करने का विकल्प चुनने के बाद भी बैकएंड पर जानकारी के प्रबंधन को लेकर स्पष्टता की कमी महसूस हो सकती है। उन्होंने कहा कि आम AI ऐप्स इस्तेमाल करते समय यूजर्स के मन में यह आशंका बनी रह सकती है कि उनकी बातचीत कोई पढ़ सकता है। उनके मुताबिक, इसी तरह का डर और अविश्वास लोगों को AI का पूरी क्षमता से इस्तेमाल करने से रोक सकता है। Dark.ai के जरिए कंपनी इस चिंता को कम करने और यूजर्स को निजी बातचीत के लिए अधिक सुरक्षित माहौल देने की कोशिश कर रही है। इसी साल लॉन्च की तैयारी, कीमत पर फैसला नहीं कंपनी की ओर से ऐप की लॉन्चिंग को लेकर इसी साल की तैयारी का संकेत दिया गया है। हालांकि, इसके काम करने की गति, इस्तेमाल किए जाने वाले AI मॉडल और अन्य तकनीकी विशेषताओं की विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। ऐप मुफ्त होगा या इसके लिए सब्सक्रिप्शन लेना पड़ेगा, इस बारे में भी कंपनी ने कोई जानकारी नहीं दी है। इससे होने वाली संभावित कमाई को लेकर भी फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो और क्विक कॉमर्स सेवा ब्लिंकइट के बाद AI सॉफ्टवेयर क्षेत्र में एटरनल का यह संभावित कदम कंपनी के कारोबार के विस्तार की दिशा में अहम हो सकता है।

eMudhra में तकनीकी गड़बड़ी की जांच के लिए IT मंत्रालय ने बनाई स्पेशल टीम, सरकार बोली- भारतीय वेबसाइट्स और ऐप सुरक्षित

डिजिटल सुरक्षा सेवाएं देने वाली कंपनी ई-मुद्रा (eMudhra) में तकनीकी गड़बड़ी सामने आने के बाद आईटी मंत्रालय ने मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की है। सरकार के मुताबिक, इस गड़बड़ी का असर कंपनी के विदेशी कारोबार तक सीमित है। भारतीय वेबसाइट्स और ऐप्स की सुरक्षा प्रभावित होने की बात सामने नहीं आई है। सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से सावधान रहने की अपील की है। मामले की जांच साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मदद से की जा रही है, ताकि गड़बड़ी की वजह और उसके संभावित प्रभाव का पता लगाया जा सके। eMudhra दो तरह की डिजिटल सुरक्षा सेवाएं देती है ई-मुद्रा का कारोबार मुख्य रूप से दो क्षेत्रों में फैला है। पहला, भारत में डिजिटल सिग्नेचर और eSign सेवाएं देना। दूसरा, विदेशी वेबसाइट्स के लिए डिजिटल सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी करना। कंपनी से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, हालिया तकनीकी गड़बड़ी उसके विदेशी कारोबार से संबंधित डिजिटल सर्टिफिकेट्स में सामने आई। भारतीय डिजिटल सिग्नेचर और eSign सेवाओं पर इसका असर होने की जानकारी नहीं दी गई है। सिस्टम की खराबी से बने कमजोर सुरक्षा कोड ई-मुद्रा के मुताबिक, सिस्टम में तकनीकी खराबी के कारण कुछ कमजोर सुरक्षा कोड बन गए थे। एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ ने इस समस्या के बारे में एप्पल, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मोजिला जैसी बड़ी टेक कंपनियों को अलर्ट किया। चिंता जताई गई कि इन कमजोर कोड का फायदा उठाकर साइबर हमलावर सुरक्षा प्रमाणपत्रों की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि इन कोड का इस्तेमाल करके वास्तव में कोई हमला हुआ था। गूगल और मोजिला ने प्रभावित सर्टिफिकेट्स पर की कार्रवाई तकनीकी गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद ब्राउजर कंपनियों ने प्रभावित सुरक्षा प्रमाणपत्रों के खिलाफ कदम उठाए। इन कदमों का उद्देश्य प्रभावित प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल से जुड़े जोखिम को सीमित करना है। eMudhra का दावा- ग्राहक का डेटा चोरी नहीं हुआ ई-मुद्रा ने कहा है कि उसका मुख्य सिस्टम सुरक्षित है और किसी ग्राहक का डेटा चोरी नहीं हुआ है। कंपनी के अनुसार, जिस विदेशी कारोबार में गड़बड़ी सामने आई, उससे उसकी कुल कमाई का लगभग 1 प्रतिशत हिस्सा आता है। कंपनी प्रभावित विदेशी ग्राहकों को नए और सुरक्षित डिजिटल सर्टिफिकेट उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में भी जुटी है, ताकि उनकी सेवाएं जारी रह सकें। सरकार ने अफवाहों से बचने की अपील की आईटी मंत्रालय ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है और सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट खबरों के आधार पर घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार की साइबर सुरक्षा टीम और विशेषज्ञ तकनीकी पहलुओं की पड़ताल कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल, गड़बड़ी के वास्तविक दायरे और संभावित प्रभाव को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
Gold

Gold Price Today: सोने के दाम में बड़ी गिरावट, 10 ग्राम का भाव ₹1.43 लाख पर

सोना (Gold) और चांदी (Silver) खरीदने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। पिछले तीन दिनों में दोनों कीमती धातुओं के भाव में अच्छी-खासी गिरावट आई है। सोना करीब ₹3,000 और चांदी लगभग ₹9,000 तक सस्ती हुई है। ऐसे में शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने या निवेश की योजना बना रहे लोगों की नजर अब बाजार के अगले रुख पर है। 22 अक्टूबर 2026 के बाजार अपडेट के मुताबिक, 10 ग्राम सोने की कीमत करीब ₹1.43 लाख और चांदी का भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो बताया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग बाजारों में कीमतों का अंतर हो सकता है। Gold Rate Today: ₹1.43 लाख पर पहुंचा 10 ग्राम सोना Gold Price में आई गिरावट से खरीदारों को कुछ राहत जरूर मिली है। बीते तीन दिनों में भाव करीब ₹3,000 नीचे आने से उन लोगों के लिए खरीदारी का मौका बन सकता है, जो लंबे समय से कीमतें कम होने का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, सोना खरीदने से पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर पता कर लें। 24 कैरेट सोने की कीमत और गहने बनाने में इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने के भाव में अंतर होता है। इसके अलावा ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और GST भी देना पड़ता है। Silver Rate Today: चांदी ₹9,000 तक हुई सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है। पिछले तीन दिनों में चांदी करीब ₹9,000 तक सस्ती हुई है और इसका भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो के स्तर पर बताया जा रहा है। चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर उन ग्राहकों पर भी पड़ता है, जो त्योहारों पर चांदी के सिक्के, बर्तन या दूसरे सामान खरीदते हैं। हालांकि, खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार में चांदी का ताजा भाव और शुद्धता की जानकारी लेना जरूरी है। सोना-चांदी के दाम क्यों गिर रहे हैं? Gold or Silver की कीमतें केवल घरेलू मांग से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव, डॉलर की चाल, रुपये की स्थिति और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदें भी इनके भाव पर असर डालती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतें कमजोर होती हैं, तो भारतीय बाजार में भी इसका असर दिखाई दे सकता है। इसके अलावा मुनाफावसूली के कारण भी कीमतों में गिरावट आ सकती है। हालांकि, बाजार में आई गिरावट की किसी एक वजह को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। कीमतों की चाल कई आर्थिक और वैश्विक कारकों पर निर्भर करती है। क्या अभी सोना और चांदी खरीदना सही रहेगा? अगर आप शादी या त्योहार के लिए गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो मौजूदा गिरावट आपके लिए राहत की बात हो सकती है। लेकिन केवल तीन दिन की गिरावट देखकर यह मान लेना ठीक नहीं है कि आगे भी भाव लगातार कम होंगे। खरीदारी से पहले अलग-अलग ज्वेलर्स के रेट की तुलना करें। सोने पर हॉलमार्क और शुद्धता की जांच करें तथा बिल में मेकिंग चार्ज और GST का पूरा विवरण देखें। निवेश के लिहाज से भी जल्दबाजी करने के बजाय अपने बजट और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना बेहतर है। आगे Gold-Silver Price में क्या बदलाव हो सकता है? आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार का रुख, अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों से जुड़ी खबरें और रुपये की चाल सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में भाव में फिर तेजी आने या गिरावट जारी रहने, दोनों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, तीन दिनों में सोने और चांदी के दाम में आई गिरावट ने खरीदारों को थोड़ी राहत दी है। अगर आप आज खरीदारी करने जा रहे हैं, तो पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर जांच लें, क्योंकि बाजार भाव और ज्वेलरी की अंतिम कीमत में अंतर हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Amit Shah

Amit Shah Statement: धरने से कुछ नहीं होगा, जनता के बीच जाएं- विपक्ष को शाह की सलाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि सिर्फ धरना-प्रदर्शन करने से जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता। अगर विपक्ष को राजनीति में आगे बढ़ना है, तो उसे जनता के बीच जाकर काम करना होगा। शाह ने कांग्रेस को लेकर दावा किया कि पार्टी अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं लौट पाएगी। उन्होंने अपने बयान में राहुल गांधी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी राजनीति और विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों पर सवाल उठाए। अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और कथित वोट चोरी को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच सियासी टकराव जारी है। कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग से जवाब मांग रही है, जबकि भाजपा विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक हताशा से जोड़ रही है। Amit Shah Statement: कांग्रेस पर क्यों बरसे गृह मंत्री? अमित शाह ने अपने संबोधन में कांग्रेस की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव जीतने के लिए केवल विरोध प्रदर्शन करना काफी नहीं है। राजनीतिक दलों को जनता की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए काम करना चाहिए। शाह के मुताबिक, विपक्ष को अपनी चुनावी हार की वजहों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर निशाना साधते हुए दावा किया कि पार्टी की मौजूदा राजनीति उसे लंबे समय तक सत्ता से दूर रख सकती है। हालांकि, कांग्रेस के अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं आने का बयान अमित शाह का राजनीतिक दावा है। इसे किसी निश्चित चुनावी नतीजे के तौर पर नहीं देखा जा सकता। Rahul Gandhi का नाम लिए बिना क्या बोले अमित शाह? अमित शाह ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना विपक्ष के धरने और प्रदर्शनों पर टिप्पणी की। उनके बयान को कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ उठाए जा रहे सवालों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। शाह का कहना है कि विपक्ष को जनता के बीच जाकर अपना समर्थन बढ़ाना चाहिए। केवल आरोप लगाने या सड़कों पर उतरने से चुनावी राजनीति में सफलता नहीं मिलती। दूसरी तरफ, कांग्रेस का तर्क है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। पार्टी और INDIA गठबंधन के नेता मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। Vote Chori और SIR पर भाजपा-विपक्ष में टकराव देश की राजनीति में वोट चोरी और SIR यानी Special Intensive Revision का मुद्दा लगातार चर्चा में है। राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि इन मामलों में स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। वहीं, भाजपा इन आरोपों को खारिज करती रही है और विपक्ष पर चुनावी हार के बाद संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप लगाती है। इस विवाद में दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। मतदाता सूची से जुड़े आरोपों की सच्चाई समझने के लिए आधिकारिक आंकड़ों, चुनाव आयोग के जवाब और उपलब्ध प्रमाणों को देखना जरूरी है। चुनाव आयोग को लेकर भी जारी है सियासी लड़ाई मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों का विरोध पहले भी सामने आ चुका है। विपक्ष ने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर जवाब मांगा है। वहीं, भाजपा का कहना है कि चुनावी नतीजों को लेकर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय विपक्ष को अपनी रणनीति पर ध्यान देना चाहिए। इस मुद्दे ने भाजपा और INDIA गठबंधन के बीच राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। आने वाले समय में यह विवाद चुनावी भाषणों और विपक्षी अभियानों में भी अहम भूमिका निभा सकता है। Amit Shah ने AAP पर भी साधा निशाना अमित शाह ने अपने संबोधन में आम आदमी पार्टी (AAP) की राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने विपक्षी दलों को सलाह दी कि वे आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर जनता के लिए काम करें। दिल्ली की राजनीति में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच लंबे समय से टकराव रहा है। ऐसे में शाह का बयान विपक्ष पर राजनीतिक दबाव बनाने के साथ-साथ भाजपा के चुनावी संदेश को मजबूत करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। आगे क्या होगा? कांग्रेस के सामने क्या चुनौती है? अमित शाह के बयान से साफ है कि भाजपा कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। दूसरी ओर, कांग्रेस चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर जवाब मांगने की अपनी रणनीति पर कायम है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि विपक्ष अपने आरोपों के समर्थन में क्या तथ्य सामने रखता है और चुनाव आयोग इन सवालों पर क्या जवाब देता है। साथ ही, यह भी देखना होगा कि इन मुद्दों का आने वाले चुनावों में मतदाताओं पर कितना असर पड़ता है। फिलहाल, अमित शाह का 30 साल वाला बयान राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। लेकिन आखिरकार चुनाव में किसे जनता का समर्थन मिलेगा, इसका फैसला मतदाता ही करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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