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कन्फर्म टिकट के बावजूद नहीं मिला कोच, बुजुर्गों को टॉयलेट के पास बैठकर करना पड़ा सफर; आयोग ने रेलवे को ठहराया दोषी

रेलवे की लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें कन्फर्म टिकट और सीट नंबर होने के बावजूद यात्रियों को तय कोच ही नहीं मिला। यह घटना 30 नवंबर 2024 की है, लेकिन अब इस पर फैसला आया है। क्या है पूरा मामला? नागपुर से भोपाल जा रहे चार वरिष्ठ यात्रियों ने अमृतसर एक्सप्रेस (22125) में DL-1 कोच की सीटें पहले से बुक कराई थीं। लेकिन जब ट्रेन स्टेशन पर पहुंची, तो वह कोच ट्रेन में लगा ही नहीं था। यात्रियों ने रेलवे स्टाफ से मदद मांगी, लेकिन उन्हें साफ कह दिया गया—“जाना है तो जनरल डिब्बे में बैठो।” मजबूरी में बुजुर्ग यात्रियों को भीड़भाड़ वाले जनरल कोच में चढ़ना पड़ा, जहां सीट न मिलने पर उन्हें टॉयलेट के पास बैठकर सफर करना पड़ा। सफर बना परेशानी का सबब ठंड का मौसम, भीड़भाड़ और टॉयलेट के पास बैठने की मजबूरी—इन सबके कारण यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। खासकर अस्थमा जैसी बीमारी से पीड़ित यात्रियों की तबीयत भी बिगड़ गई। शिकायत के बाद भी नहीं मिली मदद यात्रियों ने सफर के दौरान ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्हें सिर्फ सीट नंबर की जानकारी दी गई, कोच के बारे में कुछ स्पष्ट नहीं बताया गया। पूरे सफर में न टीटीई ने मदद की और न ही किसी अन्य स्टाफ ने। रेलवे का दावा, लेकिन सबूत नहीं मामला जब उपभोक्ता आयोग पहुंचा, तो रेलवे ने कहा कि उस दिन कोच लगाया गया था और सीट नंबर भी आवंटित थे। रेलवे का तर्क था कि एसएमएस के जरिए जानकारी दे दी गई थी, इसलिए सेवा में कोई कमी नहीं है। लेकिन आयोग ने पाया कि रेलवे के पास इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं था कि DL-1 कोच वास्तव में ट्रेन में लगाया गया था। यात्री के पक्ष में आया फैसला फरियादी मंगलेश कुमार जोशी की ओर से पेश किए गए फोटो, एफिडेविट और अन्य दस्तावेजों से यह साफ हो गया कि कोच मौजूद नहीं था। इसके बाद भोपाल उपभोक्ता आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए रेलवे के खिलाफ फैसला सुनाया। आयोग ने रेलवे को यात्रियों को मुआवजा देने का आदेश दिया। अधिक जानकारी और ताज़ा अपडेट के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
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खंडवा में दर्दनाक सड़क हादसा: शादी से लौट रहे लोगों की आयशर पलटी, 1 की मौत, 28 घायल

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में शुक्रवार को एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। मूंदी-सनावद हाईवे पर शादी समारोह से लौट रहे लोगों से भरी आयशर वाहन अनियंत्रित होकर पलट गई। इस हादसे में 60 वर्षीय बाबूलाल की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 28 लोग घायल हो गए। शादी की खुशी मातम में बदली जानकारी के अनुसार, वाहन में करीब 40 लोग सवार थे, जो गुर्जर समाज से जुड़े थे। सभी लोग ग्राम तलवड़िया (अत्तर) से मामेरा लेकर ग्राम ठुकरा देवला गए थे। परंपरागत कार्यक्रम के बाद जब सभी अपने गांव लौट रहे थे, तब रास्ते में यह हादसा हो गया। कुछ देर पहले तक जहां खुशियां थीं, वहीं अचानक चीख-पुकार मच गई। ओवरटेक करते समय पलटी गाड़ी हादसा डूडगांव के पास मूंदी-सनावद हाईवे पर हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, चालक ने ओवरटेक करने की कोशिश की, तभी वाहन का संतुलन बिगड़ गया और सड़क किनारे उतरते ही आयशर पलट गई। बताया जा रहा है कि वाहन में क्षमता से अधिक लोग बैठे थे, जिससे हादसे का खतरा और बढ़ गया। घटना के बाद मचा हड़कंप हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। कई लोग वाहन के नीचे दब गए और मदद के लिए चीखते-चिल्लाते रहे। आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया। घायलों को बाहर निकालकर एंबुलेंस और निजी वाहनों से सनावद अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर घायलों को खंडवा रेफर प्राथमिक इलाज के बाद कई गंभीर घायलों को जिला अस्पताल खंडवा रेफर किया गया है। वहीं मृतक बाबूलाल के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव में शोक का माहौल बना हुआ है। पुलिस जांच में जुटी पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में ओवरलोडिंग, ओवरटेक और लापरवाही हादसे की मुख्य वजह मानी जा रही है। हालांकि, वाहन की तकनीकी स्थिति और चालक की भूमिका की भी जांच की जा रही है। 👉 ऐसी ही ग्राउंड रिपोर्ट और लोकल खबरों के लिए जुड़े रहें www.deshharpal.com
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ग्वालियर में दर्दनाक सड़क हादसा: RTO सब-इंस्पेक्टर की मौके पर मौत, जीजा गंभीर घायल

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में गुरुवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में RTO सब-इंस्पेक्टर देवेंद्र मिश्रा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके जीजा बॉबी उर्फ आशीष गंभीर रूप से घायल हो गए। ड्यूटी से लौटते समय हुआ हादसा जानकारी के मुताबिक, 37 वर्षीय देवेंद्र मिश्रा अपने जीजा के साथ बाइक से ड्यूटी खत्म कर घर लौट रहे थे। तभी पनिहार थाना क्षेत्र में पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि देवेंद्र ट्रक के पहिए के नीचे आ गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घायल का अस्पताल में इलाज जारी हादसे में घायल बॉबी उर्फ आशीष को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि वे भी पनिहार RTO कार्यालय में पदस्थ हैं। ट्रक चालक फरार, पुलिस जांच में जुटी हादसे के बाद आरोपी ट्रक चालक वाहन लेकर फरार हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पनिहार थाना पुलिस ने अज्ञात चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और हाईवे के ढाबों व होटलों के CCTV फुटेज खंगालकर उसकी तलाश की जा रही है। इकलौते बेटे की मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ देवेंद्र मिश्रा अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। उनके परिवार में पत्नी, 10 साल का बेटा और 13 साल की बेटी है। घटना के बाद पोस्टमार्टम हाउस में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। होमगार्ड से RTO तक का सफर देवेंद्र मिश्रा पहले होमगार्ड में कार्यरत थे और साल 2025 में उनकी RTO में नौकरी लगी थी। इसी साल उनका ट्रांसफर पनिहार कार्यालय में हुआ था। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार वाहनों के खतरे को उजागर करता है। 👉 ऐसी ही ग्राउंड रिपोर्ट और लोकल खबरों के लिए जुड़े रहें www.deshharpal.com
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सागर मंडी हड़ताल से खरीदी ठप, किसानों ने किया चक्काजाम; जीतू पटवारी ने कलेक्टर को लगाई फटकार

सागर कृषि उपज मंडी में हम्मालों की हड़ताल के चलते गुरुवार को खरीदी पूरी तरह बंद हो गई। इससे परेशान किसानों ने मंडी के सामने सड़क पर चक्काजाम कर दिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर विरोध जताया। किसानों ने रोकी जीतू पटवारी की गाड़ी इसी दौरान छतरपुर जा रहे Jitu Patwari की कार को किसानों ने रोक लिया। किसानों ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि कई दिनों से मंडी में खरीदी नहीं हो रही है और वे गर्मी में परेशान हो रहे हैं। कलेक्टर को फोन पर लगाई फटकार किसानों की समस्या सुनते ही PCC चीफ ने तुरंत सागर कलेक्टर Sandeep GR को फोन लगाया। फोन पर पटवारी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि,“कलेक्टर साहब, मंडी में तीन-चार दिन से किसान परेशान हैं, क्या आपको जानकारी नहीं है? किसान धूप में बैठा है और खरीदी बंद है, प्रशासन क्या कर रहा है?” उन्होंने कलेक्टर से मौके पर पहुंचकर व्यवस्था सुधारने और तुरंत खरीदी शुरू कराने के निर्देश दिए। शाम तक समाधान नहीं तो लौटने की चेतावनी पटवारी ने साफ कहा कि अगर शाम 7 बजे तक समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे वापस आकर खुद स्थिति देखेंगे। इससे प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। शिवराज सिंह चौहान पर साधा निशाना किसानों को संबोधित करते हुए पटवारी ने केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी पार्टी की नहीं, बल्कि किसानों के हक की है। पटवारी ने सवाल उठाया कि अगर सरकार कहती है कि किसानों की आय कई गुना बढ़ी है, तो यहां मौजूद किसानों की स्थिति क्यों खराब है? किसानों की परेशानी बनी बड़ी चिंता मंडी में खरीदी बंद होने से किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। कई किसान अपनी उपज लेकर कई दिनों से मंडी में रुके हुए हैं, लेकिन व्यवस्था नहीं सुधरने से उनका गुस्सा बढ़ता जा रहा है। 👉 www.deshharpal.com Portal पर पढ़ें ऐसी ही ग्राउंड रिपोर्ट्स और अपडेट्स
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इंदौर नगर निगम में ‘वंदे मातरम्’ पर विवाद: कांग्रेस पार्षदों के इनकार से गरमाई राजनीति

इंदौर नगर निगम में बजट चर्चा के दौरान ‘वंदे मातरम्’ को लेकर बड़ा विवाद सामने आया। कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम और रुबीना इकबाल ने सदन में ‘वंदे मातरम्’ गाने से इनकार कर दिया, जिसके बाद माहौल अचानक गरमा गया। सदन में हुआ हंगामा सभापति के निर्देश पर जब ‘वंदे मातरम्’ गाने को कहा गया, तो पार्षद फौजिया शेख ने सवाल उठाया कि कौन-सा कानून इसे अनिवार्य बनाता है। इस पर बीजेपी पार्षद भड़क गए और जोरदार विरोध शुरू हो गया। स्थिति बिगड़ती देख सभापति ने फौजिया को सदन से बाहर जाने के निर्देश दिए। रुबीना का बयान बना विवाद की वजह सदन के बाद मीडिया से बात करते हुए पार्षद रुबीना इकबाल ने कहा कि वे किसी की “दादागीरी” नहीं मानेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके धर्म में ‘वंदे मातरम्’ गाना मना है, इसलिए वे इसे नहीं गा सकतीं। रुबीना ने साफ कहा कि वे देश का सम्मान करती हैं, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ कुछ नहीं करेंगी। BJP ने जताया कड़ा विरोध बीजेपी नेताओं ने इस घटना को शहीदों का अपमान बताया। नगर अध्यक्ष और अन्य नेताओं ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ देशभक्ति का प्रतीक है और इसका विरोध करना गलत है। मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने भी कहा कि देश सबसे ऊपर है और ऐसे मामलों में सभी को राष्ट्र का सम्मान करना चाहिए। कांग्रेस ने भी दिखाई सख्ती मामले को बढ़ता देख कांग्रेस संगठन ने भी सख्त रुख अपनाया। शहर कांग्रेस अध्यक्ष ने संकेत दिए कि पार्टी में इस तरह के व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रुबीना इकबाल को पार्टी से बाहर करने का प्रस्ताव भी प्रदेश नेतृत्व को भेजा गया है। थाने में शिकायत, FIR की मांग इस मामले को लेकर हिंदूवादी संगठनों ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है और पार्षदों के खिलाफ FIR की मांग की है। उनका कहना है कि इस बयान से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। राजनीति हुई तेज, बयानबाजी जारी इस घटना के बाद बीजेपी और कांग्रेस दोनों तरफ से लगातार बयानबाजी हो रही है। मामला अब सिर्फ नगर निगम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन गया है। 👉 www.deshharpal.com Portal पर पढ़ें ऐसी ही अपडेट्स और ग्राउंड रिपोर्ट्स
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ओंकारेश्वर में संत की संदिग्ध मौत पर विवाद: समाधि से शव निकालने की मांग, 73 एकड़ जमीन का एंगल

मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में उदासीन अखाड़े से जुड़े संत ब्रजराज पुरी महाराज की संदिग्ध मौत ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। जल्दबाजी में दी गई समाधि, उठे सवाल संत की मौत को आश्रम के लोगों ने हार्ट अटैक बताया, लेकिन खाचरोद से आए संतों और परिजनों का कहना है कि मौत संदिग्ध है। आरोप है कि संत को जल्दबाजी में समाधि दे दी गई, जबकि परंपरा के अनुसार अन्य संतों के आने का इंतजार किया जाता है। मौत के अलग-अलग कारण, बढ़ा शक उदासीन अखाड़े के महंत ओंकारदास उदासीन का कहना है कि उन्हें फांसी लगने की जानकारी दी गई थी, जबकि आश्रम में हार्ट अटैक की बात कही गई। इसी विरोधाभास के कारण मामला और संदिग्ध हो गया है। गायब मिले गहने और नकदी महंत और संत समाज ने आरोप लगाया है कि संत के गले में पहनी सोने की चेन, रुद्राक्ष माला, मोबाइल और नकदी भी गायब है। उन्होंने मांधाता थाने में आवेदन देकर समाधि से शव निकालकर पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। भतीजे ने भी जताई हत्या की आशंका संत के भतीजे संदीप रघुवंशी (निवासी धार) ने भी पुलिस को आवेदन देकर हत्या की आशंका जताई है। उनका कहना है कि आश्रम में मौजूद लोगों के बयानों में विरोधाभास है और कुछ लोगों के शरीर पर चोट के निशान भी दिखाई दिए हैं। 73 एकड़ जमीन का विवाद आया सामने इस पूरे मामले में 73 एकड़ जमीन का विवाद भी सामने आया है। हिंदू महासभा के पदाधिकारियों का दावा है कि जमीन को लेकर पहले से विवाद चल रहा था, जिसे अब इस घटना से जोड़कर देखा जा रहा है। कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश मामले में कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने पुलिस अधीक्षक को जांच के निर्देश दिए हैं। पुलिस पर उठे सवाल वहीं मांधाता थाना पुलिस का कहना है कि अभी तक किसी नजदीकी परिजन की औपचारिक शिकायत नहीं मिली है, इसलिए कार्रवाई नहीं की गई है। इस पर संत समाज और संगठनों ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि हत्या जैसे मामलों में आशंका के आधार पर भी जांच शुरू होनी चाहिए। यह मामला अब तेजी से तूल पकड़ता जा रहा है, जहां संत समाज, संगठन और प्रशासन आमने-सामने नजर आ रहे हैं। 👉 ऐसी ही ग्राउंड रिपोर्ट और सच्ची खबरों के लिए जुड़े रहें www.deshharpal.com
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भोपाल में एक्टर राहुल चेलानी से मोबाइल स्नैचिंग: स्टेशन के बाहर बदमाशों ने दिया वारदात को अंजाम

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मंगलवार को एक्टर राहुल चेलानी के साथ मोबाइल स्नैचिंग की घटना सामने आई है। कैब बुक करते समय हुआ हादसा जानकारी के अनुसार, राहुल मुंबई से भोपाल लौटे थे और नर्मदापुरम जाने के लिए रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के बाहर कैब बुक कर रहे थे। इसी दौरान वे फोन पर बात कर रहे थे, तभी बाइक सवार बदमाश आए और उनका मोबाइल छीनकर मौके से फरार हो गए। पुलिस ने शुरू की जांच घटना के बाद राहुल ने हबीबगंज थाना में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। पहले भी रह चुके हैं सुर्खियों में राहुल चेलानी इससे पहले नोटबंदी के दौरान भी चर्चा में रहे थे, जब होशंगाबाद में उनके पास से 43 लाख 60 हजार रुपए की नई करेंसी बरामद हुई थी। उस समय उन्होंने इसे अपनी कमाई बताया था और मामला आयकर विभाग तक पहुंचा था। अब निभाएंगे शिवाजी महाराज का किरदार खबरों के मुताबिक, राहुल चेलानी जल्द ही एक बड़े प्रोजेक्ट में छत्रपति शिवाजी महाराज का किरदार निभाते नजर आएंगे। यह फिल्म महाराष्ट्र सरकार के बड़े बजट से बनाई जा रही है। मुंबई में होगा भव्य प्रदर्शन फिल्म का प्रदर्शन पवई लेक पर बनने वाले विशाल म्यूजिकल फाउंटेन शो में किया जाएगा। इस शो में अत्याधुनिक साउंड, VFX और फायर इफेक्ट्स का उपयोग किया जाएगा। यह घटना एक बार फिर शहर में बढ़ती स्नैचिंग की घटनाओं को उजागर करती है, जहां आम लोगों के साथ-साथ अब सेलिब्रिटी भी निशाने पर हैं। 👉 ऐसी ही लेटेस्ट खबरों के लिए जुड़े रहें www.deshharpal.com
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CDS और NDA Exam 2026: 12 अप्रैल को होंगी परीक्षाएं, जानें टाइमिंग और सेंटर डिटेल

CDS और NDA परीक्षा 2026 का आयोजन 12 अप्रैल को किया जाएगा। परीक्षाओं को लेकर प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और अधिकारियों की ड्यूटी भी तय कर दी गई है। CDS परीक्षा तीन पालियों में होगी CDS परीक्षा 3 शिफ्ट में आयोजित की जाएगी: यह परीक्षा शहर के प्रमुख केंद्रों—बाल आश्रम परिसर कचहरी चौक, शांति नगर स्थित शासकीय स्कूल और पीजी डागा गर्ल्स कॉलेज में आयोजित होगी। NDA परीक्षा के लिए 5 सेंटर तय NDA परीक्षा 2 पालियों में आयोजित होगी: इसके लिए 5 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें गुरुकुल परिसर, लालपुर, गुढियारी और अन्य प्रमुख शिक्षण संस्थान शामिल हैं। प्रशासन ने की खास व्यवस्था परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी गई है। डिप्टी कलेक्टर उपेन्द्र किण्डो को सहायक को-ऑर्डिनेटिंग सुपरवाइजर और रोजगार अधिकारी केदारनाथ पटेल को कंट्रोल रूम प्रभारी बनाया गया है। अभ्यर्थियों के लिए जरूरी सलाह प्रशासन ने सभी अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचे और सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें, ताकि परीक्षा सुचारू रूप से संपन्न हो सके। यह परीक्षा हजारों युवाओं के करियर से जुड़ी है, इसलिए समय की पाबंदी और नियमों का पालन बेहद जरूरी है। 👉 ऐसी ही एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए जुड़े रहें www.deshharpal.com
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जबलपुर में फिल्मी अंदाज में पकड़ा गया शातिर चोर: 5 घंटे तालाब में छिपा रहा, कमल की नाल से लेता रहा सांस

मध्य प्रदेश के जबलपुर में मंगलवार शाम एक फिल्मी सीन जैसा मामला देखने को मिला, जब पुलिस और एक शातिर चोर के बीच हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ। पुलिस से बचने तालाब में कूदा आरोपी घटना रीवा-इतवारी एक्सप्रेस ट्रेन की है, जहां एसी कोच में एक महिला का पर्स चोरी करने की कोशिश के दौरान आरोपी हरविंदर सिंह आरपीएफ की नजर में आ गया। जैसे ही ट्रेन सिहोरा रोड स्टेशन के पास धीमी हुई, आरोपी कूदकर भागा और खितौला इलाके के एक गहरे तालाब में कूद गया। कमल की नाल से लेता रहा सांस सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आरोपी करीब 5 घंटे तक तालाब में छिपा रहा। वह पानी के अंदर रहते हुए कमल की डंठल (नाल) के जरिए सांस लेता रहा, जिससे पुलिस उसे ढूंढ नहीं पाई। गोताखोरों ने किया गिरफ्तार खितौला थाना पुलिस और गोताखोरों की टीम ने घंटों की मशक्कत के बाद आखिरकार आरोपी को काई के बीच से बाहर निकाला और गिरफ्तार कर लिया। नाम छिपाता रहा, पुरानी फोटो से खुली पोल गिरफ्तारी के बाद आरोपी पुलिस को गुमराह करता रहा और खुद को ‘बबलू’ बताता रहा। लेकिन आरपीएफ अधिकारी को शक हुआ और पुराने रिकॉर्ड से मिलान करने पर उसकी असली पहचान सामने आ गई। ‘सन्नी’ नाम सुनते ही आरोपी टूट गया और अपनी सच्चाई कबूल कर ली। 400 से ज्यादा चोरी, कभी रहा पार्षद जांच में सामने आया कि हरविंदर सिंह पर देशभर में 400 से ज्यादा चोरी के मामले दर्ज हैं। वह 2017 में यूपी के बिजनौर में निर्दलीय पार्षद भी रह चुका है। 2018 में उसके पास से 70 लाख रुपए के हीरे-जेवरात बरामद किए गए थे। वह अक्सर ट्रेनों के एसी कोच को निशाना बनाता था और वारदात के बाद सिम बदलकर फरार हो जाता था। कई राज्यों की पुलिस को थी तलाश मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में उसके खिलाफ मामले दर्ज हैं। फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और अन्य वारदातों का खुलासा होने की संभावना है। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि अपराधी बचने के लिए कितनी चालाकी कर सकते हैं, लेकिन कानून के हाथ आखिरकार उन तक पहुंच ही जाते हैं। 👉 ऐसी ही क्राइम स्टोरी और ग्राउंड रिपोर्ट के लिए जुड़े रहें www.deshharpal.com
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इंदौर के मालवा मिल में शराब दुकान का विरोध: रहवासी सड़क पर उतरे, पुलिस बल तैनात

मध्य प्रदेश के इंदौर के मालवा मिल इलाके में मंगलवार को माहौल उस समय गरमा गया, जब प्रस्तावित शराब दुकान के विरोध में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग सड़क पर उतर आए। रिहायशी इलाके में शराब दुकान का विरोध स्थानीय रहवासियों का कहना है कि इस इलाके में पहले से ही परिवार रहते हैं और यहां बच्चों का आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में शराब दुकान खुलने से माहौल खराब होगा और बच्चों पर गलत असर पड़ेगा। लोगों के मुताबिक, यह दुकान किसी दूसरे इलाके से शिफ्ट होकर यहां लाई जा रही है, जिसे वे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करेंगे। बीजेपी पार्षद भी पहुंचे मौके पर विरोध के बीच बीजेपी पार्षद और MIC सदस्य नंदू पहाड़िया भी अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने रहवासियों से बातचीत की और उनकी मांगों का समर्थन करते नजर आए। भारी पुलिस बल तैनात स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया। पुलिस लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। टेंट लगाने से रोका, फैसला बाकी प्रदर्शन कर रहे लोग मौके पर टेंट लगाकर विरोध जारी रखना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। आबकारी विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे, लेकिन अभी तक दुकान को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका है। पहले भी हो चुका है विरोध स्थानीय लोगों का कहना है कि साल 2022 में भी इस तरह का विरोध हुआ था। रहवासी शिल्पा जैन और अनुराधा जैन ने बताया कि 600 मीटर के दायरे में पहले से ही 4 शराब दुकानें मौजूद हैं। उनका कहना है कि इतनी कम दूरी पर एक और दुकान खोलना इलाके के लिए ठीक नहीं है। विरोध जारी रखने की चेतावनी रहवासियों ने साफ कर दिया है कि जब तक शराब दुकान का स्थान नहीं बदला जाता, उनका विरोध जारी रहेगा। यह मामला अब स्थानीय प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है, जहां एक तरफ नियम हैं और दूसरी तरफ जनता का विरोध। 👉 ऐसी ही लोकल अपडेट्स और ग्राउंड रिपोर्ट के लिए जुड़े रहें www.deshharpal.com
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UN

World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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