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Stock Market

Stock Market सेंसेक्स 100 अंक मजबूत, Nifty 50 कमजोर; Realty और Auto Sector में खरीदारी

भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में बुधवार को कारोबार की शुरुआत उतार-चढ़ाव के साथ हुई। Sensex करीब 100 अंक चढ़कर 78,550 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि Nifty 50 करीब 50 अंक की गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया। बाजार में जहां कुछ प्रमुख शेयरों पर दबाव रहा, वहीं Realty और Auto सेक्टर के Stocks में निवेशकों ने जमकर खरीदारी की। Realty और Auto Stocks बने बाजार की पसंद बुधवार के कारोबार में Realty और Auto सेक्टर सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। दोनों सेक्टर के कई शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। रियल्टी कंपनियों में आई मजबूती से संकेत मिलता है कि निवेशक इस सेक्टर के चुनिंदा Stocks को लेकर सकारात्मक नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर, Auto सेक्टर में भी खरीदारी का माहौल रहा। बाजार की मौजूदा चाल में इन दोनों सेक्टर्स ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। Sensex ने दिखाई मजबूती, Nifty में गिरावट कारोबार के दौरान Sensex करीब 100 अंक की बढ़त के साथ 78,550 के आसपास पहुंचा। हालांकि, Nifty 50 में लगभग 50 अंकों की कमजोरी देखने को मिली। यानी बाजार में फिलहाल एकतरफा तेजी या गिरावट के बजाय मिला-जुला रुख बना हुआ है। इस तरह की स्थिति में निवेशक पूरे बाजार के बजाय खास सेक्टर और चुनिंदा कंपनियों पर ज्यादा ध्यान देते हैं। बुधवार को भी यही तस्वीर दिखाई दी, जहां Realty और Auto Stocks में खरीदारी ने बाजार की हलचल बढ़ाई। Investors की नजर आगे के संकेतों पर बाजार की दिशा को लेकर निवेशकों की नजर अब घरेलू और वैश्विक संकेतों पर बनी हुई है। इसके अलावा कंपनियों के तिमाही नतीजे, आर्थिक आंकड़े और विदेशी बाजारों की चाल भी भारतीय शेयर बाजार पर असर डाल सकती है। फिलहाल Sensex की बढ़त और Nifty की कमजोरी से बाजार में सावधानी का माहौल नजर आ रहा है। हालांकि Realty और Auto Stocks में खरीदारी यह बताती है कि निवेशक चुनिंदा सेक्टर्स में मौके तलाश रहे हैं। Market में आगे क्या रहेगा फोकस? आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की नजर प्रमुख कंपनियों के प्रदर्शन, ग्लोबल मार्केट के संकेत और निवेशकों के सेंटीमेंट पर रहेगी। ऐसे में सेंसेक्स और निफ्टी की आगे की चाल के साथ-साथ सेक्टरवार प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold

Gold-Silver Rate: खरीदारी से पहले जानें आज का भाव, सोना और चांदी दोनों हुए महंगे

अगर आप आज सोना (Gold)या चांदी (Silver) खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो बाजार से पहले ताजा रेट जान लेना आपके लिए जरूरी है। बुधवार, 5 अगस्त को घरेलू सर्राफा बाजार में दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी देखने को मिली। सोने के भाव में जहां करीब ₹2,200 तक की बढ़ोतरी बताई जा रही है, वहीं चांदी की कीमत में ₹5,000 तक का उछाल देखने को मिला है। कीमतों में अचानक आई इस तेजी का असर उन लोगों पर भी पड़ सकता है, जो आने वाले दिनों में शादी, त्योहार या किसी खास मौके के लिए ज्वेलरी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, सोने-चांदी के दाम शहर और बाजार के हिसाब से अलग-अलग हो सकते हैं। Silver Rate में जोरदार तेजी 5 अगस्त को चांदी के बाजार भाव ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा। कई बाजारों में चांदी की कीमत में हजारों रुपये प्रति किलो का अंतर देखने को मिला। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के मुताबिक पुणे में चांदी का भाव करीब ₹2,49,900 प्रति किलो दर्ज किया गया। चांदी के दाम में होने वाली तेजी सिर्फ ज्वेलरी बाजार तक सीमित नहीं रहती। इंडस्ट्री में चांदी की मांग और निवेशकों की खरीदारी भी इसके भाव को प्रभावित करती है। यही वजह है कि Silver Rate में कई बार कम समय में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है। Gold Rate भी चढ़ा, खरीदारी हुई महंगी चांदी के साथ सोने के भाव में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 5 अगस्त को Gold Rate में करीब ₹2,200 तक की तेजी की खबर है। सोने की कीमत उसकी शुद्धता के अनुसार बदलती है। 24 कैरेट सोना सबसे शुद्ध माना जाता है, जबकि ज्वेलरी में आमतौर पर 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल ज्यादा होता है। यहां एक बात समझना जरूरी है कि बाजार में बताए जाने वाले Gold Rate और ज्वेलरी की दुकान पर मिलने वाली अंतिम कीमत एक जैसी नहीं होती। ज्वेलरी खरीदते समय GST, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क भी जुड़ सकते हैं। हर शहर में एक जैसा नहीं होता Gold-Silver Rate सोने और चांदी की कीमत पूरे देश में बिल्कुल एक जैसी नहीं रहती। स्थानीय बाजार की स्थिति, मांग-सप्लाई, टैक्स और ज्वेलर्स के चार्ज के कारण शहर-दर-शहर कुछ अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप भोपाल, दिल्ली, मुंबई, इंदौर, जयपुर या किसी दूसरे शहर में खरीदारी करने जा रहे हैं, तो वहां के स्थानीय सर्राफा बाजार का ताजा भाव जरूर पता कर लें। अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी पड़ता है असर Gold और Silver की कीमतें सिर्फ घरेलू मांग से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बुलियन की कीमत, डॉलर की चाल, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और निवेशकों का रुख भी भारतीय बाजार पर असर डालता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की कीमत बढ़ती है या रुपये की स्थिति में बदलाव आता है, तो उसका असर घरेलू Gold-Silver Rate पर भी दिखाई दे सकता है। खरीदारी करने वालों के लिए क्या है सलाह? अगर आपको आज ही सोना या चांदी खरीदनी है, तो सिर्फ एक जगह का रेट देखकर फैसला न करें। अलग-अलग ज्वेलर्स से कीमत की जानकारी लें और शुद्धता, मेकिंग चार्ज, GST और अंतिम बिल को ध्यान से देखें। खासकर चांदी खरीदते समय प्रति किलो और प्रति ग्राम के रेट में अंतर को भी समझना जरूरी है। वहीं सोने की ज्वेलरी खरीदते वक्त हॉलमार्क और शुद्धता की जानकारी जरूर जांचें। Gold Silver Rate: आगे क्या? सोने और चांदी के बाजार में फिलहाल उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में कीमत किस दिशा में जाएगी, यह घरेलू और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। डिस्क्लेमर: सोने और चांदी के भाव समय, शहर, शुद्धता और स्थानीय बाजार के अनुसार बदल सकते हैं। ज्वेलरी खरीदने से पहले अपने स्थानीय ज्वेलर से उस समय का ताजा रेट और सभी अतिरिक्त शुल्क की जानकारी जरूर लें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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UPI

6 साल बाद UPI पर फिर MDR की तैयारी! बड़े कारोबारियों से वसूली जा सकती है Payment Fee

अगर आप रोजाना UPI से Payment करते हैं तो यह खबर आपके लिए काफी अहम है। देश में डिजिटल पेमेंट का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुके UPI को लेकर सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसके बाद आने वाले समय में कुछ ट्रांजैक्शन पर MDR यानी Merchant Discount Rate लागू होने का रास्ता खुल सकता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि अभी UPI पर कोई नई फीस लागू नहीं हुई है। वित्त मंत्रालय ने Payment and Settlement Systems Act, 2007 में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो सरकार के पास कुछ डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने की व्यवस्था करने का विकल्प होगा। 2020 में खत्म कर दिया गया था MDR UPI को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने साल 2020 में UPI के जरिए होने वाले Merchant Payments पर MDR को खत्म कर दिया था। इसका सीधा फायदा दुकानदारों और कारोबारियों को मिला और डिजिटल पेमेंट को तेजी से अपनाने में मदद मिली। धीरे-धीरे UPI छोटे किराना स्टोर से लेकर बड़े Shopping Platforms तक पहुंच गया। आज चाय की दुकान से लेकर बड़े मॉल तक QR Code से Payment करना आम बात हो चुकी है। लेकिन इस पूरी व्यवस्था के पीछे बैंक और Payment Companies लगातार टेक्नोलॉजी, सर्वर, नेटवर्क और साइबर सिक्योरिटी पर खर्च कर रहे हैं। इसी वजह से लंबे समय से UPI के लिए एक स्थायी Revenue Model की जरूरत पर चर्चा होती रही है। Payment Act में बदलाव क्यों जरूरी माना जा रहा है? वित्त मंत्रालय ने कानून के मौजूदा प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद डिजिटल पेमेंट से जुड़े शुल्क के लिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था को बदलना है। अगर संशोधन को मंजूरी मिल जाती है तो सरकार आगे यह तय कर सकती है कि किन पेमेंट सिस्टम, कारोबारियों या ट्रांजैक्शन पर MDR लगाया जाए। यानी अभी सरकार ने यह नहीं कहा है कि हर UPI Payment पर शुल्क लगेगा। फिलहाल मामला कानूनी बदलाव के प्रस्ताव तक सीमित है। क्या आम UPI Users को देना होगा पैसा? यही सवाल इस समय सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आम लोगों के सामान्य UPI Payments पर सीधे शुल्क लगाने की कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है। संभावना यह जताई जा रही है कि अगर MDR लागू किया जाता है तो इसका फोकस मुख्य रूप से बड़े कारोबारियों या कुछ खास तरह के Merchant Transactions पर हो सकता है। इसका मतलब है कि किसी दोस्त को पैसे भेजना, परिवार के सदस्य को Payment करना या रोजमर्रा की छोटी खरीदारी के लिए UPI इस्तेमाल करना फिलहाल शुल्क के दायरे में आने की पुष्टि नहीं हुई है। बड़े कारोबारियों पर क्यों हो सकता है असर? UPI का इस्तेमाल अब बड़े E-commerce Platforms, Food Delivery Apps, Travel Companies और दूसरे बड़े कारोबारों में भी बड़े पैमाने पर होता है। इन कंपनियों के जरिए रोजाना बड़ी संख्या में डिजिटल भुगतान किए जाते हैं। ऐसे में अगर सरकार बड़े कारोबारियों के कुछ UPI Transactions पर MDR लागू करती है तो सबसे पहले इसका असर इसी वर्ग पर पड़ सकता है। हालांकि, अंतिम नियम आने के बाद ही पता चलेगा कि किस Merchant को कितना MDR देना होगा और इसकी दर क्या होगी। छोटे दुकानदारों के लिए क्या बदलेगा? छोटे व्यापारियों के लिए UPI लंबे समय से एक आसान और कम लागत वाला Payment Option रहा है। इसलिए सरकार के सामने यह चुनौती भी होगी कि MDR की व्यवस्था बनाते समय छोटे दुकानदारों और छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। अगर भविष्य में शुल्क सिर्फ बड़े कारोबारियों और निर्धारित श्रेणी के Transactions तक सीमित रखा जाता है तो छोटे दुकानदारों पर इसका असर अपेक्षाकृत कम रह सकता है। UPI Users के लिए अभी क्या समझना जरूरी है? इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर ऐसी चर्चाएं भी हो सकती हैं कि अब हर UPI Payment पर Fee लगेगी। लेकिन फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा। अभी UPI Payment पर नई अनिवार्य फीस लागू नहीं हुई है। सरकार ने सिर्फ कानून में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। आगे संसद की प्रक्रिया, सरकार के नियम और संबंधित Notification के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी। UPI के Future के लिए बड़ा फैसला UPI ने भारत में Payment करने का तरीका ही बदल दिया है। छोटी रकम से लेकर लाखों रुपये के Business Transactions तक इसका इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में MDR की संभावित वापसी सिर्फ फीस से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि भारत के पूरे Digital Payment Ecosystem के भविष्य से जुड़ा फैसला है। सरकार के सामने दो बड़ी जरूरतें हैं—एक तरफ आम लोगों के लिए UPI को आसान और किफायती बनाए रखना और दूसरी तरफ इस पूरे सिस्टम को चलाने वाले बैंकों और Payment Companies के लिए टिकाऊ Revenue Model तैयार करना। फिलहाल नजर सरकार के अगले कदम पर है। अगर प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो आने वाले दिनों में यह साफ हो सकता है कि UPI पर MDR किन लोगों और किन Transactions पर लागू होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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FSSAI

FSSAI ने डाबर इंडिया को भेजा नोटिस, 100% दावे के साथ शहद, घी, तेल आदि की बिक्री पर लगाई रोक

खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापन में किए जाने वाले दावों को लेकर FSSAI ने बड़ी कार्रवाई की है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने Dabur India को नोटिस जारी करते हुए उसके कुछ खाद्य उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। मामला खास तौर पर उत्पादों की पैकेजिंग और ऑनलाइन लिस्टिंग में इस्तेमाल किए जा रहे ‘100%’ दावों से जुड़ा है। FSSAI की कार्रवाई के बाद शहद, घी, तेल, नारियल पानी और एप्पल साइडर विनेगर जैसे उत्पादों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इस कार्रवाई का मतलब यह नहीं है कि डाबर के सभी संबंधित उत्पादों को मिलावटी या स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया गया है। नियामक की मुख्य आपत्ति लेबलिंग और विज्ञापन में किए गए दावों को लेकर है। किन उत्पादों पर FSSAI की नजर? रिपोर्ट्स के मुताबिक, FSSAI ने डाबर के कई खाद्य उत्पादों पर इस्तेमाल किए जा रहे ‘100%’ जैसे दावों पर आपत्ति जताई है। इनमें Honey, Apple Cider Vinegar, Virgin Coconut Oil, Sesame Oil, Cow Ghee, Coconut Water और Coconut Milk जैसे उत्पाद शामिल हैं। नियामक ने कंपनी की वेबसाइट और उत्पादों की ऑनलाइन लिस्टिंग में इस्तेमाल की गई भाषा की भी जांच की। कुछ उत्पादों के साथ ‘100% Natural’, ‘100% Pure’, ‘100% Purity Guaranteed’ और ‘100% Organic’ जैसे दावे पाए गए। FSSAI का मानना है कि इस तरह के दावे उपभोक्ताओं के मन में उत्पाद की पूरी तरह शुद्ध, प्राकृतिक या जैविक होने की धारणा बना सकते हैं। इसलिए खाद्य उत्पादों के प्रचार और लेबलिंग में ऐसी भाषा के इस्तेमाल को लेकर नियमों का पालन जरूरी है। Organic Products के दावों पर भी सवाल इस मामले में केवल ‘100%’ दावे ही नहीं, बल्कि कुछ ऑर्गेनिक उत्पादों की लेबलिंग भी जांच के दायरे में आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, Dabur Organic Honey और Dabur Himalayan Organic Apple Cider Vinegar पर इस्तेमाल किए गए ‘Jaivik Bharat’ लोगो को लेकर भी नियामक ने सवाल उठाए हैं। FSSAI ने संबंधित ऑर्गेनिक दावों और उनके लिए जरूरी प्रमाणन की स्थिति को लेकर कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को पैकेजिंग पर वही जानकारी दी जाए, जिसे नियमों के तहत प्रमाणित किया जा सकता है। पहले भी दी गई थी चेतावनी FSSAI की मौजूदा कार्रवाई अचानक नहीं हुई है। इससे पहले भी खाद्य कंपनियों को ‘100%’ जैसे दावों के इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए थे। मई 2025 में FSSAI ने खाद्य कारोबारियों को ऐसे दावों से बचने की सलाह दी थी, क्योंकि ‘100%’ जैसी भाषा किसी खाद्य उत्पाद की पूर्ण गुणवत्ता या श्रेष्ठता की गारंटी के तौर पर समझी जा सकती है। डाबर के मामले में भी नियामक की ओर से पहले सुधारात्मक कदम उठाने के लिए कहा गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी की ओर से की गई कार्रवाई को संतोषजनक नहीं माने जाने के बाद बिक्री रोकने का निर्देश दिया गया। 15 दिन में Action Taken Report मांगी FSSAI ने डाबर से इस मामले में 15 दिनों के भीतर Action Taken Report (ATR) जमा करने को कहा है। यानी कंपनी को यह जानकारी देनी होगी कि नियामक की आपत्तियों के बाद उसने क्या सुधारात्मक कदम उठाए हैं। यह कदम खाद्य कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी माना जा रहा है कि उत्पाद की पैकेजिंग, वेबसाइट और विज्ञापन में इस्तेमाल किए जाने वाले दावों को लेकर नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। क्या Dabur के उत्पाद मिलावटी हैं? इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि FSSAI की कार्रवाई को उत्पादों के मिलावटी या असुरक्षित होने की घोषणा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मौजूदा विवाद मुख्य रूप से ‘100%’ दावों, लेबलिंग और ऑर्गेनिक प्रमाणन से जुड़े पहलुओं पर है। इसलिए सोशल मीडिया या अन्य जगहों पर इस कार्रवाई को सीधे तौर पर ‘डाबर के उत्पाद मिलावटी पाए गए’ कहना भ्रामक हो सकता है। कंपनियों के लिए बढ़ी चुनौती FSSAI की यह कार्रवाई खाद्य उद्योग में लेबलिंग और मार्केटिंग के बढ़ते नियामकीय दबाव को भी दिखाती है। आज उपभोक्ता किसी उत्पाद को खरीदने से पहले पैकेजिंग पर लिखे शब्दों, ऑनलाइन डिस्क्रिप्शन और विज्ञापनों पर काफी भरोसा करते हैं। ऐसे में ‘Pure’, ‘Natural’, ‘Organic’ या ‘100%’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कंपनियों के लिए सिर्फ मार्केटिंग का हिस्सा नहीं, बल्कि नियमों के दायरे में आने वाला विषय भी है। डाबर मामले में अब नजर कंपनी की अगली कार्रवाई और FSSAI को दी जाने वाली रिपोर्ट पर रहेगी। अगर कंपनी को अपने उत्पादों की पैकेजिंग या ऑनलाइन दावों में बदलाव करना पड़ता है, तो इसका असर बाजार में मौजूद उत्पादों की लेबलिंग पर भी दिखाई दे सकता है। फिलहाल FSSAI का संदेश स्पष्ट है—खाद्य उत्पादों को बेचते समय कंपनियों को ऐसे दावों से बचना होगा, जो उपभोक्ताओं को उत्पाद की गुणवत्ता या शुद्धता के बारे में गलत या बढ़ा-चढ़ाकर धारणा दे सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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सरकार ने पेट्रोल, डीजल और ATF के निर्यात पर बढ़ाया विंडफॉल टैक्स, 3 अगस्त से नई दरें लागू

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी कर दी है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार नई दरें 3 अगस्त से लागू हो गई हैं। सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू परिस्थितियों को देखते हुए हर 15 दिन में इन टैक्स दरों की समीक्षा करती है। डीजल और ATF पर सबसे ज्यादा बढ़ी ड्यूटी नई अधिसूचना के अनुसार, डीजल के निर्यात पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) को 15.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 25.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट ईंधन के निर्यात पर ड्यूटी 14.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 22 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। इसके अलावा पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला विंडफॉल टैक्स भी 2.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 3.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। घरेलू उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा असर वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह बढ़ोतरी केवल निर्यात पर लागू होगी। देश के भीतर बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली मौजूदा एक्साइज ड्यूटी में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। यानी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए ईंधन पर लागू कर व्यवस्था पहले जैसी ही रहेगी। क्यों बढ़ाया गया विंडफॉल टैक्स? सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि तेल कंपनियां अधिक मुनाफे के लिए घरेलू जरूरतों की अनदेखी कर निर्यात को प्राथमिकता न दें। गौरतलब है कि सरकार ने 27 मार्च से डीजल और ATF के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लागू किया था। इसके बाद 16 मई से पेट्रोल के निर्यात को भी इस दायरे में शामिल कर लिया गया था। देश-दुनिया, बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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Claude AI

Claude AI Controversy: क्या AI ने किया System Hack? टेस्टिंग की गलती से सामने आया बड़ा Security Risk

AI तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उससे जुड़े सुरक्षा जोखिम भी उतनी ही तेजी से चर्चा में आ रहे हैं। हाल ही में Claude AI से जुड़ी एक टेस्टिंग घटना ने दुनिया भर के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। शुरुआती रिपोर्ट्स में इसे “AI ने कंपनियों के सिस्टम हैक कर दिए” के तौर पर पेश किया गया, लेकिन जांच में सामने आया कि मामला किसी वास्तविक साइबर हमले का नहीं, बल्कि टेस्टिंग के दौरान हुई सुरक्षा चूक (Misconfiguration) का था। इस घटना ने यह जरूर दिखा दिया कि यदि किसी AI मॉडल को जरूरत से ज्यादा अधिकार और लाइव इंटरनेट एक्सेस मिल जाए, तो वह अनजाने में भी संवेदनशील सिस्टम तक पहुंच सकता है। क्या हुआ था? जानकारी के अनुसार, Claude AI का एक नियंत्रित सुरक्षा परीक्षण (Controlled Security Test) चल रहा था। इस दौरान AI को इंटरनेट एक्सेस और कुछ ऑटोमेशन टूल्स उपलब्ध कराए गए थे, ताकि उसकी क्षमताओं और सीमाओं का आकलन किया जा सके। टेस्टिंग के दौरान सिस्टम की कॉन्फ़िगरेशन में हुई एक गलती के कारण AI उन तीन कंपनियों के नेटवर्क तक पहुंच गया, जहां उसे सामान्य परिस्थितियों में पहुंचने की अनुमति नहीं होनी चाहिए थी। हालांकि, अब तक ऐसी कोई पुष्टि नहीं हुई है कि AI ने किसी कंपनी का डेटा चुराया, सिस्टम को नुकसान पहुंचाया या किसी तरह का मैलवेयर इंस्टॉल किया हो। ‘हैकिंग’ नहीं, सुरक्षा सेटअप की कमजोरी साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटना को सीधे “AI हैकिंग” कहना पूरी तरह सही नहीं होगा। असल समस्या सुरक्षा नियमों और एक्सेस कंट्रोल में हुई चूक थी। AI वही कर पाया जिसकी अनुमति उसे उपलब्ध सिस्टम ने दी। यानी अगर सुरक्षा सीमाएं सही तरीके से लागू होतीं, तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होती। यही कारण है कि विशेषज्ञ इस घटना को AI की गलती से ज्यादा सुरक्षा प्रबंधन (Security Configuration) की विफलता मान रहे हैं। AI Security को लेकर क्यों बढ़ी चिंता? Agentic AI और Autonomous AI सिस्टम अब पहले से कहीं अधिक जटिल काम कर सकते हैं। ऐसे में यदि उन्हें इंटरनेट, क्लाउड सर्वर, डेटाबेस या कंपनी के इंटरनल टूल्स तक सीधी पहुंच दी जाती है, तो सुरक्षा उपाय और भी मजबूत होने चाहिए। इस घटना ने कंपनियों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि भविष्य में AI मॉडल्स को कितनी स्वतंत्रता दी जानी चाहिए और उनके लिए कौन-कौन से सुरक्षा मानक अनिवार्य होने चाहिए। विशेषज्ञों ने क्या सलाह दी? AI सुरक्षा पर काम कर रहे विशेषज्ञों के अनुसार, कंपनियों को कुछ जरूरी कदम अपनाने चाहिए— AI का बढ़ता इस्तेमाल, बढ़ती जिम्मेदारी आज AI का उपयोग बैंकिंग, हेल्थकेयर, साइबर सिक्योरिटी, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और सरकारी सेवाओं तक पहुंच चुका है। ऐसे में किसी भी छोटी सुरक्षा चूक का असर बड़ा हो सकता है। Claude AI से जुड़ी यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि केवल एडवांस AI बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि उसके आसपास मजबूत सुरक्षा ढांचा तैयार करना भी उतना ही जरूरी है।
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ITR

ITR Deadline 2026: आज चूके तो लगेगा ₹5,000 तक का जुर्माना, CA ने बताए 4 आसान Steps

अगर आपने अभी तक Income Tax Return (ITR) फाइल नहीं किया है, तो अब और इंतजार करना भारी पड़ सकता है। 31 जुलाई को ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख है और इसके बाद रिटर्न भरने वालों को नियमों के अनुसार ₹5,000 तक की लेट फीस चुकानी पड़ सकती है। आयकर विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 5 करोड़ से ज्यादा टैक्सपेयर्स अपना रिटर्न दाखिल कर चुके हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी अंतिम समय का इंतजार कर रहे हैं। टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि आखिरी दिन पोर्टल पर ट्रैफिक काफी बढ़ जाता है। ऐसे में सर्वर धीमा होने या तकनीकी दिक्कत आने की संभावना रहती है। इसलिए अंतिम समय का जोखिम लेने के बजाय जल्द से जल्द ITR फाइल करना बेहतर रहेगा। देर से ITR भरने पर कितना लगेगा जुर्माना? अगर तय समय सीमा के बाद Income Tax Return दाखिल किया जाता है, तो आयकर कानून के तहत लेट फीस देनी पड़ सकती है। CA ने बताए ITR Filing के 4 आसान Steps चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का कहना है कि थोड़ी तैयारी के साथ ITR भरना काफी आसान हो जाता है। इसके लिए इन चार बातों का ध्यान रखें। 1. जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखें रिटर्न भरने से पहले PAN, Aadhaar, Form-16, AIS (Annual Information Statement), बैंक अकाउंट की जानकारी, निवेश और TDS से जुड़े दस्तावेज अपने पास रखें। इससे फाइलिंग के दौरान समय बचेगा। 2. सही ITR Form का चयन करें हर टैक्सपेयर के लिए ITR फॉर्म अलग हो सकता है। आपकी आय का स्रोत वेतन, बिजनेस, किराया या अन्य किसी माध्यम से है, उसी के अनुसार सही फॉर्म चुनें। गलत फॉर्म भरने पर रिटर्न अमान्य हो सकता है। 3. सभी जानकारी अच्छी तरह जांच लें रिटर्न सबमिट करने से पहले बैंक अकाउंट, PAN, TDS, आय और टैक्स की सभी जानकारियों का मिलान जरूर करें। छोटी-सी गलती भी बाद में नोटिस या रिफंड में देरी की वजह बन सकती है। 4. e-Verification करना बिल्कुल न भूलें ITR जमा करने के बाद Aadhaar OTP, Net Banking या Digital Signature के जरिए e-Verification जरूर करें। बिना e-Verification के आपका रिटर्न अधूरा माना जाएगा। आखिरी दिन इन बातों का रखें विशेष ध्यान समय पर ITR भरना क्यों है जरूरी? Income Tax Return केवल टैक्स भरने का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह आपकी वित्तीय पहचान का भी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड होता है। होम लोन, पर्सनल लोन, वीजा आवेदन, क्रेडिट प्रोफाइल और टैक्स रिफंड जैसी कई प्रक्रियाओं में ITR की जरूरत पड़ती है। इसलिए समय पर रिटर्न दाखिल करना भविष्य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Women’s Forum

India to Host Women’s Forum 2026: मुंबई में होगा Global Conference, Women Empowerment पर होगा मंथन

भारत इस साल एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन का गवाह बनने जा रहा है, जो देश की वैश्विक पहचान को नई मजबूती देगा। पहली बार प्रतिष्ठित Women’s Forum for the Economy & Society अपनी Global Meeting फ्रांस से बाहर भारत में आयोजित करने जा रहा है। यह सम्मेलन 2 और 3 नवंबर 2026 को मुंबई में होगा और France-India Innovation Year 2026 का अहम हिस्सा रहेगा। इस आयोजन में भारत में फ्रांस का दूतावास और Indo-French Chamber of Commerce and Industry (IFCCI) सहयोगी की भूमिका निभा रहे हैं। सम्मेलन में दुनिया के कई देशों से नीति-निर्माता, उद्योग जगत के दिग्गज, स्टार्टअप लीडर्स, शिक्षाविद और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ शामिल होंगे। 20 साल बाद पहली बार फ्रांस से बाहर Global Meeting पिछले दो दशकों से Women’s Forum दुनिया भर में महिलाओं की भागीदारी, आर्थिक विकास और सामाजिक बदलाव जैसे विषयों पर संवाद का एक प्रमुख मंच रहा है। लेकिन यह पहला मौका होगा जब इसकी सबसे महत्वपूर्ण Global Meeting फ्रांस के बाहर आयोजित की जा रही है। भारत को मेजबानी मिलना इस बात का संकेत है कि वैश्विक स्तर पर देश को नवाचार, डिजिटल विकास और आर्थिक नेतृत्व के नए केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। AI, Innovation और Future of Work पर होगी बड़ी चर्चा इस वर्ष सम्मेलन की थीम “The Future of Prosperity: Women, Work and the Forces Reshaping Our World” रखी गई है। सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञ इन अहम विषयों पर चर्चा करेंगे— इसके अलावा यह भी विचार किया जाएगा कि तेजी से बदलती तकनीक का लाभ समाज के हर वर्ग तक कैसे पहुंचाया जाए और भविष्य के लिए किस तरह की नीतियां तैयार की जाएं। भारत क्यों बना इस Global Summit का मेजबान? दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत आज डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप इकोसिस्टम और टेक्नोलॉजी इनोवेशन के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। इन्हीं कारणों से Women’s Forum ने अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय Global Meeting के लिए भारत को चुना है। इससे भारत को वैश्विक नीति निर्माण और नवाचार पर होने वाली चर्चाओं में और मजबूत स्थान मिलने की उम्मीद है। भारत-फ्रांस साझेदारी को मिलेगी नई दिशा यह सम्मेलन केवल एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक सहयोग को भी नई गति देगा। उद्योग, सरकार, शिक्षा, तकनीकी संस्थानों और नागरिक समाज के प्रतिनिधि एक ही मंच पर भविष्य की साझेदारियों पर चर्चा करेंगे। विशेषज्ञ इस बात पर भी मंथन करेंगे कि AI आधारित भविष्य में कौन-से कौशल सबसे अधिक जरूरी होंगे और समावेशी आर्थिक विकास को कैसे आगे बढ़ाया जाए। Women’s Forum अध्यक्ष ने क्या कहा? Women’s Forum की अध्यक्ष नैनेट लाफोंड डुफोर ने कहा कि आर्थिक विकास, तकनीकी बदलाव और नवाचार तभी सार्थक होंगे जब समाज के सभी लोगों को समान अवसर मिलेंगे। उनके अनुसार लैंगिक समानता केवल सामाजिक न्याय का विषय नहीं, बल्कि नवाचार, प्रतिस्पर्धा और सतत आर्थिक विकास की मजबूत नींव भी है। फ्रांस के राजदूत का बयान भारत में फ्रांस के राजदूत थियरी माथू ने कहा कि France-India Innovation Year 2026 दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य की समृद्धि तभी संभव है, जब महिलाओं और पुरुषों को समान अवसर और बराबर भागीदारी मिले। भारत के लिए क्यों खास है यह आयोजन? मुंबई में होने वाला यह सम्मेलन भारत को वैश्विक नवाचार, महिला नेतृत्व और समावेशी विकास से जुड़े विमर्श के केंद्र में स्थापित करेगा। साथ ही यह आयोजन भारत और फ्रांस के बीच आर्थिक, तकनीकी और सामाजिक सहयोग को और मजबूत बनाने का अवसर भी देगा।
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सोने

Bullion Market Update: सोने में फिर तेजी, ₹177 बढ़कर ₹1.42 लाख पहुंचा भाव; Silver Rate फिसला

देश के सर्राफा बाजार में एक बार फिर Gold Price Today चर्चा में है। सोने की कीमतों में लगातार तेजी जारी है और गुरुवार को इसके भाव में ₹177 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस उछाल के बाद सोना करीब ₹1.42 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी के दाम में हल्की गिरावट देखने को मिली है। Silver Rate Today में ₹789 प्रति किलो की कमी आई, जिसके बाद चांदी करीब ₹2.17 लाख रुपए प्रति किलो पर आ गई। सोने की चमक बरकरार, 2026 में ₹9 हजार तक बढ़े भाव सोना इस साल निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है। साल की शुरुआत से अब तक सोने की कीमतों में करीब ₹9 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी हो चुकी है। लगातार बढ़ती कीमतों के पीछे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार के कई फैक्टर काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही वजह है कि मांग बढ़ने के साथ सोने के भाव में भी तेजी देखने को मिल रही है। Silver Price Update: चांदी हुई सस्ती, लेकिन मांग मजबूत जहां सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिली, वहीं चांदी के बाजार में थोड़ी नरमी आई है। चांदी का भाव ₹789 प्रति किलो गिरकर ₹2.17 लाख रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है। हालांकि, चांदी की लंबी अवधि की मांग मजबूत बनी हुई है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंडस्ट्रियल सेक्टर में चांदी के बढ़ते इस्तेमाल के कारण निवेशकों की नजर इस पर भी बनी हुई है। Gold Rate बढ़ने के पीछे क्या हैं कारण? सोने की कीमतों में तेजी के पीछे कई अहम वजहें मानी जा रही हैं— शादी और त्योहारों की खरीदारी पर असर सोने के लगातार महंगे होने का असर आम ग्राहकों पर भी दिखाई दे रहा है। खासतौर पर शादी-विवाह और त्योहारों के सीजन में ज्वेलरी खरीदने वालों को अब ज्यादा बजट तैयार करना पड़ सकता है। हालांकि, निवेश के लिहाज से सोना अभी भी लोगों के बीच पसंदीदा विकल्प बना हुआ है। वहीं, चांदी में आई गिरावट को कुछ निवेशक खरीदारी के मौके के रूप में भी देख रहे हैं। Gold-Silver Market पर निवेशकों की नजर फिलहाल Gold Rate Today ₹1.42 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है, जबकि Silver Price Today करीब ₹2.17 लाख रुपए प्रति किलो है। बाजार जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में भी सोने और चांदी की कीमतों में वैश्विक संकेतों के आधार पर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IND vs NZ

IND vs NZ 1st T20I: संजू सैमसन-नमन धीर का धमाका, भारत ने रचा रिकॉर्ड

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच पहले T20 इंटरनेशनल मुकाबले में टीम इंडिया ने शानदार जीत दर्ज की। 226 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय बल्लेबाजों ने ऐसा खेल दिखाया कि न्यूजीलैंड के गेंदबाज दबाव में आ गए। संजू सैमसन की तूफानी पारी और नमन धीर की आखिरी ओवरों में विस्फोटक बल्लेबाजी ने मैच का रुख भारत की ओर मोड़ दिया। मुकाबले में भारत ने 19.4 ओवर में 6 विकेट खोकर 230 रन बनाए और 4 विकेट से जीत हासिल की। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने पांच मैचों की T20 सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। 226 रन का लक्ष्य हासिल करना भारत के लिए T20 इंटरनेशनल क्रिकेट में नया रिकॉर्ड भी रहा। NZ vs IND: न्यूजीलैंड ने खड़ा किया 225 रन का बड़ा स्कोर पहले बल्लेबाजी करने उतरी न्यूजीलैंड की टीम ने निर्धारित 20 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 225 रन बनाए। मेजबान टीम के बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश की। ग्लेन फिलिप्स ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 40 गेंदों पर नाबाद 82 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। वहीं, फिन एलन ने 24 गेंदों पर 45 रन बनाकर टीम को तेज शुरुआत दी। बेवॉन जैकब्स ने भी 16 गेंदों पर 31 रन की अहम पारी खेली। न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाए और भारत के सामने 226 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रख दिया। उस समय लग रहा था कि भारतीय टीम के लिए इस स्कोर तक पहुंचना आसान नहीं होगा। Sanju Samson ने खेली तूफानी पारी लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम इंडिया को संजू सैमसन ने शानदार शुरुआत दिलाई। उन्होंने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए मैदान के चारों ओर शॉट लगाए। संजू ने 33 गेंदों पर 67 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 4 छक्के शामिल रहे। उन्होंने केवल 23 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर भारतीय टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। दूसरी ओर, अभिषेक शर्मा ने भी तेजी से रन बनाए। उन्होंने 12 गेंदों पर 29 रन की पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों की आक्रामक शुरुआत से भारत को बड़े लक्ष्य का पीछा करने में काफी मदद मिली। हालांकि, शुरुआती विकेट गिरने के बाद भारतीय टीम की रफ्तार कुछ धीमी हुई। न्यूजीलैंड ने वापसी करने की कोशिश की, लेकिन भारत के बल्लेबाजों ने मैच को हाथ से निकलने नहीं दिया। Shreyas Iyer ने संभाली जिम्मेदारी मध्यक्रम में विकेट गिरने के बाद श्रेयस अय्यर ने पारी को संभाला। उन्होंने 28 गेंदों पर 42 रन बनाकर टीम को लक्ष्य के करीब पहुंचाया। ऐसे मुकाबलों में सिर्फ तेजी से रन बनाना ही जरूरी नहीं होता, बल्कि सही समय पर पारी को संभालना भी अहम होता है। अय्यर ने यही भूमिका निभाई और भारत की उम्मीदों को बनाए रखा। इसके बाद नमन धीर ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड की जीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। Naman Dhir बने भारत की जीत के हीरो मैच के आखिरी ओवरों में नमन धीर की बल्लेबाजी ने भारतीय प्रशंसकों का उत्साह बढ़ा दिया। उन्होंने महज 15 गेंदों पर नाबाद 42 रन बनाए। उनकी पारी में 5 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। नमन ने तेजी से रन बनाकर न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बढ़ाया। भारतीय टीम को जब जीत के लिए तेज रन बनाने की जरूरत थी, तब उनकी आक्रामक बल्लेबाजी सबसे ज्यादा काम आई। भारत ने 19.4 ओवर में 230 रन बनाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। संजू सैमसन की शुरुआत और नमन धीर की शानदार फिनिशिंग इस ऐतिहासिक रनचेज की सबसे बड़ी वजह बनी। IND vs NZ 1st T20I Scorecard: एक नजर में पूरा मैच न्यूजीलैंड: 225/4 (20 ओवर) भारत: 230/6 (19.4 ओवर) नतीजा: भारत 4 विकेट से जीता। न्यूजीलैंड के टॉप स्कोरर: ग्लेन फिलिप्स – 82* रन भारत के टॉप स्कोरर: संजू सैमसन – 67 रन मैच के अहम बल्लेबाज: नमन धीर – 15 गेंदों पर नाबाद 42 रन भारत ने अपने नाम किया बड़ा रिकॉर्ड इस जीत की सबसे खास बात भारत का रिकॉर्ड रनचेज रहा। 226 रन जैसे बड़े लक्ष्य को हासिल करके टीम इंडिया ने T20 इंटरनेशनल क्रिकेट में अपना सबसे बड़ा सफल रनचेज दर्ज किया। संजू सैमसन ने तेज शुरुआत देकर टीम को मजबूत आधार दिया, श्रेयस अय्यर ने मध्यक्रम में पारी संभाली और नमन धीर ने अंतिम ओवरों में तेजी से रन बनाकर जीत सुनिश्चित की। इस प्रदर्शन ने एक बार फिर दिखाया कि भारतीय टीम बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भी दबाव में संयम बनाए रख सकती है। दूसरे T20I में भी रहेगी जीत की उम्मीद पहले मुकाबले में जीत के बाद भारतीय टीम सीरीज में अपनी बढ़त मजबूत करना चाहेगी। वहीं, न्यूजीलैंड की टीम अगले मैच में वापसी करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। पहले मैच में दोनों टीमों के बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया। ऐसे में अगले मुकाबले में भी क्रिकेट प्रशंसकों को एक रोमांचक भिड़ंत देखने की उम्मीद रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
India vs New Zealand

India vs New Zealand: आखिरी 3 ओवर में 29 रन की जरूरत, रोमांचक मोड़ पर मैच

भारत और न्यूजीलैंड (India vs New Zealand) के बीच T20 मुकाबला अब बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है। न्यूजीलैंड के 226 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम ने 5 विकेट के नुकसान पर 197 रन बना लिए हैं। अब जीत के लिए भारत को 18 गेंदों में 29 रन बनाने हैं। क्रीज पर श्रेयस अय्यर और नमन धीर मौजूद हैं। ऐसे में भारतीय फैंस की नजरें दोनों बल्लेबाजों पर टिकी हैं। मैच के इस मोड़ पर एक छोटी-सी गलती भी टीम की मुश्किल बढ़ा सकती है। वहीं, अगर भारतीय बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाए और विकेट बचाए रखे, तो जीत हासिल करने का मौका बना हुआ है। IND vs NZ: न्यूजीलैंड ने खड़ा किया 225 रन का स्कोर पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ने 20 ओवर में 4 विकेट खोकर 225 रन बनाए। टीम की ओर से ग्लेन फिलिप्स ने शानदार बल्लेबाजी की और 40 गेंदों पर नाबाद 82 रन बनाए। उनकी आक्रामक पारी ने न्यूजीलैंड को बड़े स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। कीवी बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। बड़े शॉट खेलने के साथ-साथ उन्होंने रन गति को भी धीमा नहीं पड़ने दिया। इसी वजह से भारत के सामने 226 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य आया। India vs New Zealand: लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की स्थिति 226 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को तेजी से रन बनाने थे। टीम ने स्कोर आगे बढ़ाया, लेकिन पांच विकेट गिरने के बाद मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। अब श्रेयस अय्यर और नमन धीर के सामने दोहरी चुनौती है। उन्हें एक तरफ जरूरी रन बनाने हैं, तो दूसरी तरफ विकेट भी बचाकर रखना है। दोनों के बीच अच्छी साझेदारी भारत को जीत के करीब पहुंचा सकती है। आखिरी 18 गेंदों का खेल होगा निर्णायक भारत को 18 गेंदों में 29 रन चाहिए। इसका मतलब है कि टीम को बचे हुए तीन ओवरों में लगातार रन बनाने होंगे। T20 क्रिकेट में यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है, लेकिन न्यूजीलैंड के गेंदबाज भी इस मौके को आसानी से हाथ से जाने नहीं देना चाहेंगे। अगर भारतीय बल्लेबाज शुरुआती गेंदों पर बाउंड्री लगाने में सफल रहते हैं, तो आखिरी ओवर का दबाव कम हो सकता है। वहीं, विकेट गिरने की स्थिति में भारत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। क्या Team India हासिल कर पाएगी जीत? मैच का रुख अब काफी हद तक श्रेयस अय्यर और नमन धीर की बल्लेबाजी पर निर्भर करेगा। भारतीय टीम को जीत के लिए बड़े शॉट खेलने के साथ समझदारी से स्ट्राइक भी बदलनी होगी। न्यूजीलैंड की टीम अपने स्कोर का बचाव करने की पूरी कोशिश करेगी। ऐसे में अंतिम तीन ओवर में गेंदबाजों और बल्लेबाजों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। फिलहाल मुकाबला रोमांचक स्थिति में है और भारत के पास लक्ष्य हासिल करने का मौका मौजूद है। अब देखना होगा कि भारतीय बल्लेबाज आखिरी गेंदों में टीम को जीत दिला पाते हैं या न्यूजीलैंड मुकाबले पर कब्जा जमा लेता है। IND vs NZ Live Score: मैच की ताजा स्थिति हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

दिल्ली-NCR में GRAP-1 लागू, प्रदूषण से निपटने के लिए 334 टीमें करेंगी निगरानी; 1 नवंबर से सख्ती

दिल्ली की वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंचने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पूरे दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया है। इस बीच दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दावा किया कि सरकार के प्रयासों और जनभागीदारी के कारण इस बार पिछले वर्षों की तुलना में GRAP-1 देर से लागू हुआ है। सिरसा के मुताबिक, सर्दियों में प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार 11 सूत्रीय एक्शन प्लान पर काम कर रही है। इसमें करीब 30 एजेंसियां शामिल हैं। प्रदूषण नियंत्रण के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक, दोनों तरह के उपाय किए जा रहे हैं। 334 टीमें करेंगी निगरानी, मॉनिटरिंग स्टेशन बढ़कर होंगे 60 पर्यावरण मंत्री ने बताया कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता की निगरानी करने वाले स्टेशनों की संख्या 47 से बढ़ाकर 60 की जाएगी। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए 334 प्रवर्तन टीमें तैनात की जाएंगी। सिरसा ने दावा किया कि दिल्ली के प्रदूषण में स्थानीय स्रोतों की हिस्सेदारी करीब 30% है, जबकि आसपास के राज्यों और क्षेत्रों से 60 से 65% प्रदूषण आता है। ऐसे में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए पूरे NCR में समन्वित कार्रवाई जरूरी है। 1 नवंबर से प्रदूषण रोकने के लिए प्रस्तावित सख्त कदम सरकार की ओर से साझा की गई योजना के मुताबिक, प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई उपाय किए जाने हैं। 1. वैध PUC प्रमाणपत्र के बिना नहीं मिलेगा ईंधन ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ व्यवस्था के तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) के बिना वाहनों को पेट्रोल या डीजल नहीं देने का प्रावधान है। 2. बाहरी राज्यों के वाहनों पर प्रतिबंध योजना के अनुसार, 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों को इससे छूट देने की बात कही गई है। 3. सरकारी और निजी दफ्तरों में 50% वर्क फ्रॉम होम प्रदूषण कम करने के लिए सरकारी और निजी कार्यालयों के आधे कर्मचारियों से घर से काम कराने की योजना भी शामिल है। 4. सरकारी दफ्तरों के समय में बदलाव योजना के मुताबिक, नगर निगम (MCD) के कार्यालय सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक और दिल्ली सरकार के कार्यालय सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक संचालित किए जाने का प्रस्ताव है। 5. पार्किंग शुल्क दोगुना करने की योजना निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए 1 नवंबर से पार्किंग शुल्क दोगुना करने की योजना है। मेट्रो पार्किंग को इससे छूट देने की बात कही गई है। 6. निर्माण और तोड़फोड़ के काम पर रोक धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल फैलाने वाले निर्माण और तोड़फोड़ कार्यों पर रोक लगाने का प्रावधान है। इसके अलावा, 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध की योजना भी बताई गई है।

दिवाली से पहले दिल्ली में रात को भी होगी सफाई, CM रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

दीपावली और अन्य त्योहारों को देखते हुए दिल्ली के रिहायशी इलाकों और प्रमुख बाजारों में अब रात के समय भी सफाई कराई जाएगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को दिल्ली सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक कर राजधानी की सफाई व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सफाई में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां भी कूड़े के ढेर लगे हैं, उन्हें तत्काल हटाया जाए और नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों से सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए तेजी से काम करने को कहा। कूड़ा नहीं उठने की शिकायतों पर CM नाराज मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के कई इलाकों से समय पर कूड़ा नहीं उठने और जगह-जगह गंदगी की शिकायतें मिल रही हैं। कुछ जोन में सफाई व्यवस्था को लेकर लापरवाही भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि सफाई के प्रयासों के बावजूद जमीन पर अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लोगों की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। साथ ही, सफाई व्यवस्था में किए जा रहे सुधार सड़कों और बाजारों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने चाहिए। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कर्मचारी होंगे तैनात मुख्यमंत्री ने मेयर प्रवेश वाही और नगर निगम आयुक्त संजीव खिरवार को पूरी दिल्ली में सफाई अभियान तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में सफाई कर्मचारियों की कमी है, वहां अतिरिक्त स्टाफ लगाया जाए। जरूरत पड़ने पर रात में सफाई के लिए नए कर्मचारियों की नियुक्ति भी की जाए। रात में सफाई से दिन में नहीं होगी परेशानी मुख्यमंत्री के मुताबिक, बाजारों और रिहायशी कॉलोनियों में रात के समय सफाई कराने से दिन में लोगों की आवाजाही प्रभावित नहीं होगी। इससे त्योहारों के दौरान भीड़भाड़ वाले इलाकों में स्वच्छता बनाए रखने में मदद मिलेगी। बैठक में शहरी विकास मंत्री आशीष सूद, मेयर प्रवेश वाही, मुख्य सचिव राजीव वर्मा, नगर निगम आयुक्त संजीव खिरवार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे

छत्तीसगढ़ में 11 डॉक्टरों के तबादले, डॉ. संजय कुमार बने रायपुर जिला अस्पताल के प्रभारी सिविल सर्जन

छत्तीसगढ़ सरकार के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 11 डॉक्टरों का तबादला किया है। प्रशासनिक आधार पर चिकित्सा अधिकारियों और विशेषज्ञों की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए गए हैं। सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई जगह पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्रालय महानदी भवन से अवर सचिव दिव्या वैष्णव की ओर से जारी आदेश के तहत यह फेरबदल किया गया है। डॉ. संजय कुमार को मिली रायपुर जिला अस्पताल की जिम्मेदारी तबादला आदेश के अनुसार, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. संजय कुमार को जिला चिकित्सालय रायपुर (पंडरी) में प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक नियुक्त किया गया है। वहीं, जिला चिकित्सालय रायपुर में अब तक प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉ. भेनुज कुमार सिन्हा को स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय में प्रभारी उप संचालक के पद पर पदस्थ किया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए प्रशासनिक फेरबदल विभाग के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह प्रशासनिक बदलाव किया गया है। इसके तहत दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी अस्पतालों में भी स्वास्थ्य सुविधाओं को सुचारु बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। तबादला आदेश में सभी संबंधित डॉक्टरों को बिना देरी किए अपने नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।

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