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FSSAI

FSSAI का बड़ा एक्शन! Food Brands के भ्रामक दावों पर सख्ती, Domino’s के 5 लाइसेंस हुए Suspend

खाने-पीने की चीजों के विज्ञापनों और पैकेजिंग पर किए जाने वाले दावों को लेकर Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) ने अब सख्त रुख अपनाया है। FSSAI ने हाल के महीनों में 150 से ज्यादा Notices जारी किए हैं। इनमें Nestle India, PepsiCo, Coca-Cola India समेत कई नामी कंपनियां शामिल हैं। मामला Misleading Advertisements, गलत Claims और Labelling Rules से जुड़ा है। नियामक की इस कार्रवाई ने Food Industry में हलचल बढ़ा दी है। खास बात यह है कि कार्रवाई केवल बड़ी पैकेज्ड फूड कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि Restaurants, Food Chains और E-commerce Platforms भी इसकी जद में आए हैं। Nestle, PepsiCo और Coca-Cola समेत कई कंपनियों को Notice FSSAI की कार्रवाई में Nestle India, PepsiCo, Coca-Cola India, Abbott India, Red Bull India, Danone India, Monster Energy India, Mondelez India, Ferrero India और Kenvue समेत कई कंपनियों के नाम सामने आए हैं। नियामक ने ऐसे मामलों पर सवाल उठाए हैं, जहां Product या Advertisement में किए गए दावों को लेकर नियमों का पालन नहीं हुआ। कुछ मामलों में उत्पादों की जब्ती जैसी कार्रवाई भी की गई है। FSSAI की सख्ती का एक बड़ा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहक किसी Food Product को लेकर ऐसी जानकारी के आधार पर फैसला न लें, जो भ्रामक या नियमों के अनुरूप नहीं है। Domino’s के 5 Licenses हुए Suspend इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा Domino’s को लेकर है। FSSAI की कार्रवाई में Food Service Establishments को भी नोटिस दिए गए हैं। KFC, McDonald’s, Pizza Hut, Domino’s और Costa Coffee जैसे बड़े नाम भी जांच के दायरे में आए। रिपोर्ट के मुताबिक, Domino’s के पांच Food Licenses Suspend किए गए हैं। यह कदम Food Safety और Regulatory Compliance को लेकर गंभीरता दिखाता है। Amazon और Flipkart भी नहीं बचे FSSAI की निगरानी का दायरा Online Food Business तक भी पहुंच गया है। Amazon और Flipkart को कुल 12 Notices जारी किए गए हैं। वहीं, एक Amazon Warehouse का License भी रद्द किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे साफ है कि Food Safety Regulator अब केवल Manufacturing Companies ही नहीं, बल्कि Food Products की Online Supply Chain और उनके कारोबार से जुड़े अन्य हिस्सों पर भी नजर रख रहा है। क्यों महत्वपूर्ण है FSSAI की यह कार्रवाई? Food Products खरीदते समय ग्राहक अक्सर पैकेट पर लिखे Claims और Advertisements को देखकर फैसला लेते हैं। ऐसे में अगर किसी Product के फायदे, Ingredients या दूसरी खूबियों को लेकर जानकारी स्पष्ट नहीं है, तो Consumer Mislead हो सकता है। यही वजह है कि Misleading Advertising और Incorrect Labelling के खिलाफ कार्रवाई सीधे आम लोगों के हित से जुड़ी है। FSSAI की इस कार्रवाई से Food Companies के लिए भी साफ संदेश गया है कि Product Packaging और Advertising में किए गए Claims को नियमों के अनुरूप रखना होगा। कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि Consumer तक पहुंचने वाली जानकारी साफ, सही और भ्रामक न हो। Food Industry के लिए बड़ा संदेश 150 से ज्यादा Notices और कई Licenses पर कार्रवाई के बाद Food Industry में Regulatory Compliance को लेकर चर्चा तेज हो गई है। बड़ी कंपनियों से लेकर Restaurants और Online Platforms तक, सभी के लिए यह कार्रवाई एक तरह की चेतावनी है। आखिरकार, खाने की चीजों के मामले में ग्राहक का भरोसा सबसे अहम होता है। FSSAI की सख्ती का असर अगर कंपनियों को अपने Claims और Labelling को लेकर ज्यादा सावधान बनाता है, तो इसका सीधा फायदा Consumer को मिलेगा। FSSAI Action का संदेश साफ है—Food Business में Brand कितना भी बड़ा क्यों न हो, नियमों का पालन जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Stock Market

Stock Market Outlook: अगले हफ्ते बदलेगी बाजार की चाल? Sensex-Nifty पर इन 4 Factors की रहेगी नजर

शेयर बाजार (Stock Market) में पिछले कुछ दिनों से चल रही कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। हर कारोबारी दिन अब यही सवाल है कि बाजार आखिर कब पलटेगा? शुक्रवार को Sensex और Nifty ने हल्की बढ़त के साथ सप्ताह का अंत जरूर किया, लेकिन पूरे सप्ताह दोनों इंडेक्स लाल निशान में रहे। 21 अगस्त को Nifty 50 करीब 24,252 अंक पर, जबकि Sensex 77,540.83 के स्तर पर बंद हुआ। साप्ताहिक आधार पर दोनों प्रमुख इंडेक्स में करीब आधे फीसदी की गिरावट दर्ज हुई। अब 24 अगस्त से शुरू होने वाले नए कारोबारी सप्ताह में बाजार की नजर घरेलू घटनाक्रम के साथ-साथ कई Global Factors पर रहेगी। Crude Oil: बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता इन दिनों कच्चे तेल की कीमतें Dalal Street के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर बनी हुई हैं। Middle East में तनाव के चलते Oil Prices में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इसलिए तेल महंगा होने पर देश का Import Bill बढ़ सकता है और महंगाई को लेकर चिंता पैदा हो सकती है। इसका सीधा असर कंपनियों की लागत और बाजार के Sentiment पर भी पड़ सकता है। अगर अगले सप्ताह Crude Oil में नरमी आती है, तो शेयर बाजार को राहत मिल सकती है। वहीं तेल की कीमतें फिर तेज हुईं तो निवेशकों की मुश्किल बढ़ सकती है। Global Market का मूड भी तय करेगा दिशा भारतीय बाजार अब ग्लोबल संकेतों से अलग होकर नहीं चल सकता। अमेरिकी बाजार, Bond Yields और दुनिया के प्रमुख बाजारों में निवेशकों की Risk Appetite का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई देता है। खासकर ऊंची US Bond Yield विदेशी निवेशकों को Emerging Markets में निवेश को लेकर सतर्क कर सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में Global Market Trends पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा। FII-DII Flow बनेगा बड़ा संकेत विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FII लंबे समय से भारतीय बाजार की चाल को प्रभावित करते रहे हैं। ऐसे में अगले सप्ताह FII की खरीदारी और बिकवाली बाजार के लिए अहम संकेत होगी। अगर विदेशी निवेशकों की बिकवाली थमती है और घरेलू संस्थागत निवेशक यानी DII लगातार खरीदारी करते हैं, तो बाजार को निचले स्तरों पर मजबूत सहारा मिल सकता है। इसके उलट FII Selling बढ़ती है तो तेजी पर दबाव बन सकता है। Nifty के Technical Levels पर रहेगी नजर Nifty फिलहाल एक सीमित दायरे में कारोबार करता नजर आ रहा है। पिछले सप्ताह इंडेक्स 24,025.65 से 24,360.10 के बीच रहा और 24,252 के आसपास बंद हुआ। इससे साफ है कि बाजार अभी किसी मजबूत दिशा का इंतजार कर रहा है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले सत्रों में Consolidation जारी रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों को हर तेजी को Rally और हर गिरावट को Crash मानने से बचना होगा। Investors के लिए कैसा रहेगा अगला हफ्ता? अगले सप्ताह बाजार में उतार-चढ़ाव कम होने की उम्मीद करना फिलहाल मुश्किल है। Crude Oil की कीमत, Middle East की स्थिति, Global Bond Yields और FII-DII Activity चार ऐसे फैक्टर हैं, जो Sensex-Nifty की दिशा बदल सकते हैं। अगर इन मोर्चों पर माहौल सुधरता है तो बाजार में Recovery देखने को मिल सकती है। वहीं किसी बड़े Negative Global Trigger की स्थिति में बिकवाली फिर लौट सकती है। यानी फिलहाल Dalal Street पर जल्दबाजी के बजाय धैर्य जरूरी है। आने वाले सप्ताह में निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही होगी कि बाजार किस दिशा में Breakout देता है और उसके पीछे कितनी मजबूती दिखाई देती है।
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Gold-Silver

Gold-Silver Rate: सोना-चांदी ने फिर पकड़ी रफ्तार, जानिए आज का ताजा भाव

सोना-चांदी (Gold-Silver) खरीदने वालों के लिए आज का दिन खास रहा। सराफा बाजार में दोनों कीमती धातुओं के दाम में जोरदार तेजी देखने को मिली। चांदी की कीमत एक ही कारोबारी सत्र में ₹9,260 बढ़कर करीब ₹2.38 लाख प्रति किलो पहुंच गई। वहीं, 10 ग्राम सोने का भाव भी ₹3,519 चढ़कर करीब ₹1.57 लाख तक पहुंच गया। कीमती धातुओं की कीमतों में इस तेजी ने निवेशकों के साथ-साथ उन लोगों का भी ध्यान खींचा है, जो आने वाले समय में शादी या किसी खास मौके के लिए सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। Silver Price में बड़ा उछाल चांदी की कीमत में हुई तेजी इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में है। करीब ₹9 हजार से ज्यादा की बढ़त के बाद चांदी का भाव ₹2.38 लाख प्रति किलो के आसपास पहुंच गया है। चांदी की कीमत में तेजी के पीछे घरेलू मांग के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल और औद्योगिक मांग को भी अहम माना जाता है। चांदी का इस्तेमाल सिर्फ गहनों और निवेश के लिए ही नहीं होता, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और कई औद्योगिक क्षेत्रों में भी किया जाता है। इसलिए इसकी कीमत पर वैश्विक आर्थिक गतिविधियों का असर तेजी से दिखाई देता है। Gold Price भी हुआ महंगा चांदी के साथ सोने ने भी तेजी दिखाई। 10 ग्राम सोने की कीमत में ₹3,519 का इजाफा हुआ और भाव करीब ₹1.57 लाख तक पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मजबूती और निवेशकों की सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ती दिलचस्पी ने घरेलू बाजार को भी सहारा दिया। हाल के कारोबार में कमजोर डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी जैसे संकेतों ने भी सोने की कीमत को सपोर्ट किया है। ऐसे माहौल में निवेशक अक्सर Gold को सुरक्षित विकल्प के तौर पर देखते हैं। क्या ₹1.70 लाख तक पहुंच सकता है Gold? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोने का भाव इस साल ₹1.70 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है? बाजार में ऐसी संभावनाओं को लेकर चर्चा जरूर है, लेकिन कीमत का अगला स्तर कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। अमेरिकी फेड की ब्याज दर नीति, डॉलर की चाल, महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी सोने की दिशा तय करने वाले प्रमुख फैक्टर हैं। अगर इन परिस्थितियों से सोने को लगातार समर्थन मिलता रहा, तो आने वाले महीनों में नए रिकॉर्ड देखने को मिल सकते हैं। खरीदारों के लिए क्या है मतलब? सोने-चांदी की लगातार बढ़ती कीमतों से आम खरीदारों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। खासकर शादी-ब्याह के सीजन में बड़ी मात्रा में खरीदारी करने वालों के लिए कुछ हजार रुपये का अंतर भी बजट पर असर डाल सकता है। हालांकि, सिर्फ तेजी देखकर जल्दबाजी में खरीदारी करना सही रणनीति नहीं मानी जाती। अगर खरीदारी जरूरी है तो स्थानीय सराफा बाजार का ताजा भाव, GST और making charges की जानकारी लेने के बाद ही फैसला करना बेहतर रहेगा। Gold-Silver Rate में आगे भी उतार-चढ़ाव संभव सोना और चांदी इस समय ऊंचे स्तरों पर कारोबार कर रहे हैं। ऐसे में आगे भी तेजी और मुनाफावसूली दोनों देखने को मिल सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाला छोटा बदलाव भी घरेलू कीमतों पर असर डाल सकता है। फिलहाल चांदी में ₹9,260 की छलांग और सोने में ₹3,519 की बढ़त ने बाजार की तस्वीर जरूर बदल दी है। अगर वैश्विक परिस्थितियां कीमती धातुओं के पक्ष में बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में सोना-चांदी नए स्तरों की ओर बढ़ते नजर आ सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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सोना-चांदी के दाम में गिरावट, 24 कैरेट सोना ₹1.53 लाख और चांदी ₹2.27 लाख किलो; जानें खरीदारी का सही तरीका

सोने और चांदी की कीमतों में 19 अगस्त को गिरावट देखने को मिली है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, चांदी की कीमत 5,772 रुपये घटकर 2.27 लाख रुपये प्रति किलो हो गई है। वहीं 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 1,196 रुपये गिरकर 1.53 लाख रुपये पर आ गया। पिछले कुछ दिनों में कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी के बाद अब बाजार में मुनाफावसूली का असर दिखाई दे रहा है। सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट क्यों आई? 1. मुनाफावसूली का असर पिछले 10-15 दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में अच्छी तेजी देखने को मिली थी। ऐसे में कई निवेशकों और ट्रेडर्स ने मुनाफा निकालने के लिए बिकवाली शुरू कर दी। बाजार में बिकवाली बढ़ने से कीमतों पर दबाव आया और दोनों धातुओं के भाव नीचे आ गए। 2. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें ब्रेंट क्रूड की कीमत 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है। कच्चा तेल महंगा होने से दुनियाभर में महंगाई बढ़ने की चिंता बढ़ती है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखने या बढ़ाने की संभावना बन सकती है। ऊंची ब्याज दरों को आमतौर पर सोने के लिए नकारात्मक माना जाता है। इस साल सोना करीब 20 हजार रुपये महंगा साल 2026 में अब तक सोने की कीमत में अच्छी तेजी रही है। 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोने का भाव 1.33 लाख रुपये से ऊपर था, जो अब करीब 1.53 लाख रुपये हो गया है। हालांकि, इस दौरान कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव भी रहा। 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी ने 3.86 लाख रुपये प्रति किलो का ऑलटाइम हाई बनाया था। वहीं 31 दिसंबर 2025 को चांदी करीब 2.30 लाख रुपये प्रति किलो थी, जो अब 2.27 लाख रुपये पर आ गई है। क्या अभी सोना-चांदी खरीदना सही है? कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने और चांदी की कीमतें अपने ऊंचे स्तर से काफी नीचे आ चुकी हैं। ऐसे में लंबी अवधि के निवेशक धीरे-धीरे खरीदारी कर सकते हैं, लेकिन एकमुश्त बड़ी रकम लगाने से बचना बेहतर हो सकता है। उनके अनुमान के मुताबिक साल के अंत तक सोना फिर से 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2.80 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है। हालांकि, बाजार की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 3 बातों का रखें ध्यान 1. BIS हॉलमार्क वाला सोना खरीदें सोना खरीदते समय हमेशा BIS हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना लें। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता और कैरेट की जानकारी मिलती है। 2. कीमत और वजन जरूर जांचें खरीदारी से पहले सोने का वजन और उस दिन का भाव अलग-अलग विश्वसनीय स्रोतों से जांच लें। 24, 22 और 18 कैरेट सोने के भाव अलग-अलग होते हैं। 3. मेकिंग चार्ज पर ध्यान दें गहने खरीदते समय मेकिंग चार्ज भी कुल कीमत को काफी प्रभावित करता है। ज्वेलर से मेकिंग या लेबर चार्ज का पूरा ब्रेकअप मांगें और संभव हो तो इस पर बातचीत भी करें। चांदी खरीदते समय शुद्धता कैसे जांचें? चांदी की शुद्धता जांचने के लिए कुछ घरेलू तरीके बताए जाते हैं, जैसे मैग्नेट और आइस टेस्ट। हालांकि, सिर्फ इन घरेलू परीक्षणों के आधार पर चांदी को असली या नकली मानना पूरी तरह भरोसेमंद नहीं है। बेहतर है कि चांदी की खरीदारी करते समय उसकी शुद्धता, हॉलमार्क और बिल की जानकारी जरूर जांचें। बड़ी खरीदारी में प्रमाणित विक्रेता से खरीदना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।
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टाटा संस की AGM पहली बार टली, कानूनी अड़चन से अटकी बैठक; चेयरमैन समेत कई अहम फैसले प्रभावित

मुंबई स्थित टाटा समूह के मुख्यालय बॉम्बे हाउस में 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) स्थगित हो गई। टाटा संस के इतिहास में यह पहली बार है जब कंपनी की AGM टली है। चेयरमैन एन चंद्रशेखरन बैठक में शामिल होने के लिए सुबह ही पहुंच गए थे, लेकिन कानूनी और तकनीकी अड़चनों के चलते बैठक में कोई फैसला नहीं हो सका। पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि AGM के लिए जरूरी कोरम पूरा नहीं हो पाया। इस पूरे घटनाक्रम का असर कंपनी के कई महत्वपूर्ण फैसलों और टाटा समूह में नेतृत्व की आगे की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। सवाल 1: AGM क्यों टली? टाटा संस के नियमों के मुताबिक AGM के लिए कम से कम 5 सदस्यों की व्यक्तिगत मौजूदगी जरूरी है। साथ ही सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) की ओर से संयुक्त रूप से नामित प्रतिनिधि की मौजूदगी भी जरूरी है। बोर्ड मीटिंग नहीं हो पाने के कारण दोनों ट्रस्ट संयुक्त प्रतिनिधि का नाम तय नहीं कर सके। यह नियम तब तक लागू है, जब तक दोनों ट्रस्टों के पास टाटा संस की कम से कम 40% हिस्सेदारी है। फिलहाल SRTT और SDTT के पास करीब 51% और पूरे टाटा ट्रस्ट्स नेटवर्क के पास करीब 66% हिस्सेदारी बताई गई है। सवाल 2: SRTT की बैठक क्यों नहीं हो पा रही? महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने मई में SRTT के बोर्ड गठन से जुड़ी जांच को लेकर निर्देश जारी किए थे। इसके बाद से ट्रस्ट की बैठक नहीं हो सकी है। इसी वजह से AGM के लिए संयुक्त प्रतिनिधि के नाम पर भी फैसला नहीं हो पाया। सवाल 3: विवाद किस कानून से जुड़ा है? मामला महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट की धारा 30A (2) से जुड़ा है। यह प्रावधान 2025 के संशोधन के जरिए लागू किया गया था। इसके तहत किसी पब्लिक ट्रस्ट के बोर्ड में लाइफटाइम या परमानेंट ट्रस्टियों की संख्या कुल ट्रस्टियों के 25% तक सीमित की गई है। SRTT का तर्क है कि यह प्रावधान नया है और इसे पहले से की गई नियुक्तियों पर लागू नहीं किया जा सकता। सवाल 4: AGM टलने से कौन से फैसले अटके? AGM स्थगित होने से कंपनी के तीन अहम एजेंडे फिलहाल अटक गए हैं: सवाल 5: एन चंद्रशेखरन और नए चेयरमैन की स्थिति क्या है? एन चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को स्पष्ट किया था कि वह टाटा संस के चेयरमैन पद से हट रहे हैं और अगले कार्यकाल के लिए पद पर नहीं रहेंगे। हालांकि, वह टाटा संस के डायरेक्टर भी हैं। AGM स्थगित होने के बाद वह अगली बैठक होने तक डायरेक्टर पद पर बने रहेंगे। दूसरी ओर, नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। SDTT ने 13 अगस्त को नए चेयरमैन के चयन के लिए कमेटी बनाने का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन SRTT की बैठक नहीं होने से प्रक्रिया आगे बढ़ने में अड़चन आ सकती है। सवाल 6: क्या AGM स्थगित करने को लेकर नियम स्पष्ट हैं? टाटा संस के आर्टिकल 87 में कोरम पूरा नहीं होने की स्थिति में बैठक स्थगित करने का प्रावधान है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक यदि SRTT और SDTT का संयुक्त प्रतिनिधि आगे भी नियुक्त नहीं हो पाता है, तो स्थगित AGM को किस तरह आगे बढ़ाया जाएगा, इस स्थिति को लेकर नियमों में स्पष्टता नहीं है। सवाल 7: टाटा ट्रस्ट्स में पिछले एक साल से किन मुद्दों पर मतभेद? पिछले एक साल में टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टियों के बीच बोर्ड में प्रतिनिधित्व, नए ट्रस्टियों की नियुक्ति, टाटा संस की संभावित लिस्टिंग और एयर इंडिया, टाटा डिजिटल व टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कारोबारों में पूंजी आवंटन को लेकर मतभेद सामने आए हैं। इन मतभेदों के बीच कुछ बड़े इस्तीफे भी हुए हैं। टाटा समूह के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम? टाटा संस की AGM का पहली बार स्थगित होना सिर्फ एक कॉरपोरेट बैठक का टलना नहीं है। इसका सीधा असर कंपनी के वित्तीय फैसलों, बोर्ड में नियुक्तियों और नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। अब अगली बैठक कब और किस तरह होती है, इस पर टाटा संस के साथ-साथ पूरे टाटा ट्रस्ट्स की आगे की रणनीति भी निर्भर करेगी।
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Petrol

Petrol Export पर बड़ी राहत: Export Duty हुई Zero, Diesel और ATF Tax में भी कटौती

पेट्रोल-डीजल (Petrol- Diesel) की कीमतों और तेल कंपनियों से जुड़ी खबरों के बीच केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। सरकार ने Petrol, Diesel और Aviation Turbine Fuel (ATF) के Export पर लगने वाले शुल्क में कटौती की है। नए बदलाव के बाद पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी अब पूरी तरह खत्म हो गई है। वहीं डीजल और ATF पर भी शुल्क कम किया गया है। सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और पेट्रोलियम उत्पादों के दाम पर लगातार नजर बनी हुई है। Petrol Export पर अब कोई Duty नहीं नई दरों के मुताबिक पेट्रोल के Export पर लगने वाली ₹3.5 प्रति लीटर की ड्यूटी को घटाकर Zero कर दिया गया है। यानी भारतीय कंपनियां अब पेट्रोल का निर्यात करते समय इस अतिरिक्त शुल्क का भुगतान नहीं करेंगी। तेल क्षेत्र से जुड़े कारोबार के लिए इसे अहम राहत माना जा रहा है। खासकर उन कंपनियों के लिए इसका महत्व बढ़ जाता है, जिनकी रिफाइनरी क्षमता घरेलू जरूरतों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई पर भी निर्भर करती है। Diesel Export Duty भी हुई कम सरकार ने डीजल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में भी कटौती की है। डीजल पर Export Duty अब ₹24 प्रति लीटर होगी। इससे पहले यह दर ₹25.5 प्रति लीटर थी। यानी डीजल के निर्यात पर कंपनियों को ₹1.5 प्रति लीटर की राहत मिली है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रिफाइनरी उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति के लिहाज से यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ATF पर भी घटा Export Tax हवाई ईंधन यानी Aviation Turbine Fuel (ATF) के निर्यात पर भी शुल्क कम किया गया है। इसकी दर ₹22 प्रति लीटर से घटाकर ₹19.5 प्रति लीटर कर दी गई है। ATF पर शुल्क में कमी से एविएशन फ्यूल के निर्यात कारोबार को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि इसका सीधा असर घरेलू विमान किराए या घरेलू ATF की कीमत पर पड़ेगा, ऐसा अभी कहना सही नहीं होगा। क्या Petrol-Diesel के दाम भी होंगे कम? सरकार के इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आम लोगों को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलेगी? यह समझना जरूरी है कि Export Duty में कटौती सीधे घरेलू पेट्रोल-डीजल की Retail Price कम होने की गारंटी नहीं देती। मौजूदा बदलाव मुख्य रूप से विदेश भेजे जाने वाले पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू शुल्क से जुड़ा है। इसलिए पेट्रोल पंप पर कीमत घटने की उम्मीद को इस फैसले से सीधे जोड़ना जल्दबाजी होगी। Windfall Tax क्यों लगाया गया था? Windfall Tax का इस्तेमाल सरकार ऐसे समय करती है, जब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों की वजह से तेल कंपनियों को सामान्य से काफी ज्यादा मुनाफा होने की संभावना बनती है। इसका उद्देश्य उस अतिरिक्त लाभ पर सरकार का हिस्सा सुनिश्चित करना होता है। भारत में पेट्रोलियम उत्पादों पर Export Levy में समय-समय पर बदलाव किए जाते रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, रिफाइनरी मार्जिन और वैश्विक बाजार की स्थिति जैसे कई कारक इन दरों को प्रभावित करते हैं। सरकार की नजर International Oil Market पर पेट्रोलियम उत्पादों पर Export Duty में यह बदलाव बताता है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय Oil Market की परिस्थितियों पर लगातार नजर रख रही है। जरूरत के मुताबिक शुल्क बढ़ाया या घटाया जा सकता है। पेट्रोल पर Export Duty का पूरी तरह हटना, जबकि डीजल और ATF पर शुल्क कम होना, तेल कंपनियों के लिए फिलहाल सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और सरकार के अगले फैसलों पर सबकी नजर रहेगी। आम लोगों के लिए क्या मायने? सीधी बात यह है कि पेट्रोल Export पर Duty Zero हो गई है, Diesel पर ₹24 और ATF पर ₹19.5 प्रति लीटर शुल्क लागू होगा। यह फैसला मुख्य रूप से Export Market से जुड़ा है। घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर इसका असर अलग-अलग परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। ऐसे में अगर आप पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तुरंत बड़ी कटौती की उम्मीद कर रहे हैं, तो फिलहाल इंतजार करना बेहतर होगा। सरकार के अगले कदम और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें ही आगे की तस्वीर साफ करेंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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कारोबार से आत्मनिर्भरता तक India की नई उड़ान

कारोबार से आत्मनिर्भरता तक India की नई उड़ान

India की आजादी की कहानी सिर्फ राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है। आज देश की पहचान एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, मजबूत कारोबारी बाजार और दुनिया के सामने उभरते नए औद्योगिक केंद्र के रूप में भी बन रही है। देश में मैन्युफैक्चरिंग, स्टार्टअप, डिजिटल कारोबार, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वदेशी उद्योगों को लगातार बढ़ावा मिला है। छोटे कारोबार से लेकर बड़े उद्योग समूहों तक, भारतीय कंपनियां अब घरेलू बाजार के साथ-साथ वैश्विक बाजार में भी अपनी जगह मजबूत कर रही हैं। स्टार्टअप से बदली कारोबार की तस्वीर भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम युवाओं के लिए रोजगार और नए अवसरों का बड़ा माध्यम बना है। फिनटेक, एडटेक, हेल्थटेक, ई-कॉमर्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियां तेजी से आगे बढ़ी हैं। छोटे शहरों के युवा भी अब बड़े कारोबारी आइडिया के साथ बाजार में उतर रहे हैं। मैन्युफैक्चरिंग पर बढ़ा जोर भारत में स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने से इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, डिफेंस, मोबाइल निर्माण और कई अन्य क्षेत्रों में निवेश बढ़ा है। इसका असर रोजगार के अवसरों और सप्लाई चेन पर भी दिखाई दे रहा है। भारत अब सिर्फ एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि दुनिया के लिए उत्पादन केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। डिजिटल इंडिया बना कारोबार की ताकत डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन सेवाओं ने कारोबार को आम लोगों तक पहुंचाने का काम किया है। UPI जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म ने छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक भुगतान के तरीके को आसान बनाया है। इससे देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है। आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम आजादी के इस पर्व पर भारत की आर्थिक यात्रा एक ऐसे देश की तस्वीर दिखाती है जो अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ दुनिया के बाजार में भी मजबूत भागीदारी चाहता है। स्वदेशी उत्पादन, स्थानीय कारोबार और भारतीय उद्यमिता का बढ़ता प्रभाव इसी बदलते भारत की कहानी कहता है। आज का भारत सिर्फ बाजार नहीं बना रहा, बल्कि अपने कारोबार, तकनीक और प्रतिभा के दम पर दुनिया में अपनी आर्थिक पहचान भी मजबूत कर रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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सोना-चांदी आज: 14 अगस्त को दोनों की कीमतों में गिरावट, जानें ताजा भाव और आगे का अनुमान

सोने-चांदी की कीमतों में 14 अगस्त को गिरावट देखने को मिली। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का भाव 10 ग्राम पर 708 रुपए घटकर 1,52,363 रुपए रह गया। 13 अगस्त को यह 1,53,071 रुपए था। वहीं, चांदी की कीमत भी कम हुई। एक किलो चांदी 386 रुपए गिरकर 2,33,842 रुपए पर आ गई, जबकि गुरुवार को इसका भाव 2,34,228 रुपए था। शहर बदलने पर क्यों बदल जाता है सोने का भाव? सोने की कीमत हर शहर में थोड़ी अलग हो सकती है। इसके पीछे कई वजहें होती हैं— ऑल टाइम हाई से सोना-चांदी काफी नीचे इस साल सोने-चांदी में बड़ी तेजी के बाद अब कीमतों में गिरावट आई है। 31 दिसंबर 2025 को सोना करीब 1.33 लाख रुपए था, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के स्तर तक पहुंच गया था। मौजूदा भाव के मुकाबले यह करीब 23,758 रुपए नीचे है। चांदी 31 दिसंबर 2025 को करीब 2.30 लाख रुपए थी और 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए के ऑल टाइम हाई तक पहुंच गई थी। मौजूदा भाव के मुकाबले इसमें करीब 1.52 लाख रुपए की गिरावट आ चुकी है। साल के अंत तक फिर बढ़ सकते हैं दाम कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक, मौजूदा गिरावट के बाद सोने-चांदी में निवेश का मौका बन सकता है। हालांकि, उनका सुझाव है कि एकमुश्त निवेश करने के बजाय धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर हो सकता है। उनके अनुमान के अनुसार, साल के अंत तक सोना करीब 1.60 लाख रुपए और चांदी 2.80 लाख रुपए तक पहुंच सकती है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान 1. BIS हॉलमार्क जरूर देखेंसोना खरीदते समय BIS हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना ही खरीदें। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता की जानकारी मिलती है। 2. भाव और वजन क्रॉस चेक करेंखरीदारी से पहले सोने का वजन और उस दिन का बाजार भाव जरूर जांचें। 24, 22 और 18 कैरेट सोने के भाव अलग-अलग होते हैं। चांदी असली है या नकली? इन तरीकों से पहचानें नोट: IBJA के रेट आम तौर पर बेस/बुलियन रेट होते हैं। ज्वेलरी खरीदते समय GST, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क जुड़ने से ग्राहक द्वारा चुकाई जाने वाली अंतिम कीमत अधिक हो सकती है।
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WPI

WPI Data July: महंगाई में मामूली कमी से राहत, खाने-पीने की चीजों की कीमतें बनीं चुनौती

महंगाई को लेकर जुलाई के आंकड़ों ने थोड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन आम आदमी की परेशानी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। Wholesale Price Inflation यानी WPI Inflation जुलाई में घटकर 9.78% रह गई, जबकि जून में यह 9.87% थी। यानी एक महीने में थोक महंगाई दर में मामूली कमी दर्ज की गई। हालांकि, आंकड़ों की तस्वीर सिर्फ राहत वाली नहीं है। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी ने महंगाई के दबाव को बनाए रखा है। दूसरी ओर Fuel और Electricity सेक्टर में कुछ नरमी देखने को मिली, जिससे कुल थोक महंगाई दर को नीचे आने में मदद मिली। July WPI Inflation में मामूली गिरावट जुलाई में WPI Inflation का 9.78% पर आना अर्थव्यवस्था के लिए हल्की राहत माना जा सकता है। जून में यह आंकड़ा 9.87% था। यानी थोक स्तर पर कीमतों का दबाव थोड़ा कम हुआ है। हालांकि, सिर्फ 0.09 प्रतिशत अंक की गिरावट को बड़ी राहत कहना जल्दबाजी होगी। बाजार में कई जरूरी सामान की कीमतें अभी भी उपभोक्ताओं के बजट पर असर डाल रही हैं। Food Prices ने बढ़ाई चिंता महंगाई की सबसे बड़ी चिंता फिलहाल Food Prices को लेकर है। खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर घर के मासिक बजट पर पड़ता है। सब्जियां, खाद्य उत्पाद और रोजमर्रा के इस्तेमाल की दूसरी चीजें महंगी होने पर परिवारों का खर्च बढ़ जाता है। यही वजह है कि थोक महंगाई में मामूली गिरावट के बावजूद आम लोगों को बाजार में राहत उतनी महसूस नहीं होती। Fuel और Electricity से मिली राहत जुलाई के आंकड़ों में Fuel & Power सेक्टर ने कुछ राहत दी। ईंधन और बिजली की कीमतों में नरमी का असर थोक महंगाई के कुल आंकड़े पर पड़ा। ऊर्जा की कीमतें अर्थव्यवस्था के लगभग हर हिस्से को प्रभावित करती हैं। Transport से लेकर Manufacturing तक, ईंधन की लागत बढ़ने पर उसका असर कई दूसरे उत्पादों की कीमतों पर भी दिखाई देता है। ऐसे में इस क्षेत्र में नरमी महंगाई के लिए सकारात्मक संकेत है। WPI और Retail Inflation में अंतर समझना जरूरी यहां एक बात समझना जरूरी है कि WPI Inflation और Retail Inflation एक जैसी चीजें नहीं हैं। WPI यानी Wholesale Price Index थोक बाजार में वस्तुओं की कीमतों में बदलाव को मापता है। वहीं Retail Inflation यानी CPI आम उपभोक्ता के स्तर पर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव को दर्शाता है। इसलिए WPI में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि बाजार में हर सामान सस्ता हो गया है। किसी एक श्रेणी में कीमतें घट सकती हैं, जबकि दूसरी जरूरी वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर? जुलाई के आंकड़ों को देखें तो तस्वीर मिली-जुली है। एक तरफ थोक महंगाई में थोड़ी कमी आई है और Fuel-Power सेक्टर से राहत मिली है। दूसरी तरफ खाद्य वस्तुओं की कीमतें लोगों की चिंता बढ़ा रही हैं। घर चलाने वाले परिवारों के लिए असली राहत तब मानी जाएगी, जब रोजमर्रा के खाने-पीने के सामान की कीमतों में भी स्थिरता आए। सिर्फ महंगाई दर में मामूली गिरावट से घरेलू बजट पर दबाव तुरंत कम नहीं होता। आगे किन चीजों पर रहेगी नजर? आने वाले महीनों में मानसून, कृषि उत्पादन, खाद्य पदार्थों की Supply, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें और घरेलू मांग महंगाई की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल जुलाई के WPI आंकड़ों से इतना जरूर कहा जा सकता है कि महंगाई के मोर्चे पर दबाव थोड़ा कम हुआ है, लेकिन पूरी तरह राहत की तस्वीर अभी सामने नहीं आई है। Food Prices में स्थिरता आने पर ही आम लोगों को महंगाई से वास्तविक राहत महसूस हो सकेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sensex

Sensex-Nifty में गिरावट: 250 अंक टूटा सेंसेक्स, Banking और IT Stocks में भारी बिकवाली

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार की शुरुआत निवेशकों के लिए कुछ मायूस करने वाली रही। Sensex करीब 250 अंक फिसलकर 77,700 के आसपास आ गया, वहीं Nifty भी करीब 100 अंक नीचे कारोबार करता नजर आया। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव Banking और IT Stocks में देखने को मिला। सुबह के कारोबार में बिकवाली बढ़ने के साथ ही निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि बाजार दिन के अंत तक इस कमजोरी से कितना उबर पाता है। पिछले कुछ सत्रों से शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, ऐसे में छोटी सी खबर भी सेंटीमेंट पर असर डाल रही है। Banking और IT शेयरों में क्यों बढ़ी बिकवाली? गुरुवार को बाजार की कमजोरी में बैंकिंग और IT सेक्टर की अहम भूमिका रही। IT कंपनियों के शेयरों में बिकवाली से इंडेक्स पर दबाव बढ़ा। दूसरी ओर बैंकिंग शेयरों में भी निवेशकों ने मुनाफावसूली का रुख अपनाया। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा माहौल में निवेशक नए दांव लगाने से पहले ग्लोबल संकेतों और कंपनियों से जुड़े अपडेट का इंतजार कर रहे हैं। यही वजह है कि मजबूत कंपनियों के शेयरों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। पिछले कारोबारी सत्र में भी बाजार रहा कमजोर बुधवार का कारोबारी सत्र भी भारतीय शेयर बाजार के लिए अच्छा नहीं रहा था। Sensex 188 अंक की गिरावट के साथ 77,966.35 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 36 अंक टूटकर 24,435.95 के स्तर पर रहा। IT Stocks में कमजोरी खास तौर पर नजर आई। TCS के शेयर में भी तेज गिरावट दर्ज की गई थी। इससे IT इंडेक्स का प्रदर्शन प्रभावित हुआ और बाजार का मूड कमजोर बना रहा। Global Market से मिले-जुले संकेत घरेलू बाजार के अलावा विदेशी बाजारों के संकेत भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं। अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों और Federal Reserve की संभावित ब्याज दरों को लेकर बाजार की नजर बनी हुई है। वहीं, Middle East में तनाव और Crude Oil की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय है। कच्चा तेल महंगा होने पर भारत के आयात बिल और महंगाई पर असर पड़ सकता है, इसलिए निवेशक इस मोर्चे पर भी सतर्क हैं। Tata Group के शेयरों पर भी नजर इन सबके बीच Tata Group Stocks भी बाजार की निगाह में हैं। Tata Sons से जुड़े घटनाक्रम के बाद समूह की कई कंपनियों के शेयरों में हलचल देखने को मिली है। निवेशक अब कंपनियों के अगले कदम और इससे जुड़े संभावित असर को समझने की कोशिश कर रहे हैं। आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल? फिलहाल बाजार में साफ तेजी के बजाय volatility यानी उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है। अगर ग्लोबल संकेतों में सुधार आता है और Banking तथा IT Stocks में खरीदारी लौटती है तो बाजार को सहारा मिल सकता है। वहीं Crude Oil और Geopolitical Tension बढ़ने पर दबाव दोबारा मजबूत हो सकता है। निवेशकों के लिए फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि बाजार की हर छोटी गिरावट या तेजी को देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय कंपनियों के फंडामेंटल और व्यापक बाजार संकेतों पर नजर रखें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IND vs NZ

IND vs NZ 1st T20I: संजू सैमसन-नमन धीर का धमाका, भारत ने रचा रिकॉर्ड

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच पहले T20 इंटरनेशनल मुकाबले में टीम इंडिया ने शानदार जीत दर्ज की। 226 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय बल्लेबाजों ने ऐसा खेल दिखाया कि न्यूजीलैंड के गेंदबाज दबाव में आ गए। संजू सैमसन की तूफानी पारी और नमन धीर की आखिरी ओवरों में विस्फोटक बल्लेबाजी ने मैच का रुख भारत की ओर मोड़ दिया। मुकाबले में भारत ने 19.4 ओवर में 6 विकेट खोकर 230 रन बनाए और 4 विकेट से जीत हासिल की। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने पांच मैचों की T20 सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। 226 रन का लक्ष्य हासिल करना भारत के लिए T20 इंटरनेशनल क्रिकेट में नया रिकॉर्ड भी रहा। NZ vs IND: न्यूजीलैंड ने खड़ा किया 225 रन का बड़ा स्कोर पहले बल्लेबाजी करने उतरी न्यूजीलैंड की टीम ने निर्धारित 20 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 225 रन बनाए। मेजबान टीम के बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश की। ग्लेन फिलिप्स ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 40 गेंदों पर नाबाद 82 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। वहीं, फिन एलन ने 24 गेंदों पर 45 रन बनाकर टीम को तेज शुरुआत दी। बेवॉन जैकब्स ने भी 16 गेंदों पर 31 रन की अहम पारी खेली। न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाए और भारत के सामने 226 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रख दिया। उस समय लग रहा था कि भारतीय टीम के लिए इस स्कोर तक पहुंचना आसान नहीं होगा। Sanju Samson ने खेली तूफानी पारी लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम इंडिया को संजू सैमसन ने शानदार शुरुआत दिलाई। उन्होंने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए मैदान के चारों ओर शॉट लगाए। संजू ने 33 गेंदों पर 67 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 4 छक्के शामिल रहे। उन्होंने केवल 23 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर भारतीय टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। दूसरी ओर, अभिषेक शर्मा ने भी तेजी से रन बनाए। उन्होंने 12 गेंदों पर 29 रन की पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों की आक्रामक शुरुआत से भारत को बड़े लक्ष्य का पीछा करने में काफी मदद मिली। हालांकि, शुरुआती विकेट गिरने के बाद भारतीय टीम की रफ्तार कुछ धीमी हुई। न्यूजीलैंड ने वापसी करने की कोशिश की, लेकिन भारत के बल्लेबाजों ने मैच को हाथ से निकलने नहीं दिया। Shreyas Iyer ने संभाली जिम्मेदारी मध्यक्रम में विकेट गिरने के बाद श्रेयस अय्यर ने पारी को संभाला। उन्होंने 28 गेंदों पर 42 रन बनाकर टीम को लक्ष्य के करीब पहुंचाया। ऐसे मुकाबलों में सिर्फ तेजी से रन बनाना ही जरूरी नहीं होता, बल्कि सही समय पर पारी को संभालना भी अहम होता है। अय्यर ने यही भूमिका निभाई और भारत की उम्मीदों को बनाए रखा। इसके बाद नमन धीर ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड की जीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। Naman Dhir बने भारत की जीत के हीरो मैच के आखिरी ओवरों में नमन धीर की बल्लेबाजी ने भारतीय प्रशंसकों का उत्साह बढ़ा दिया। उन्होंने महज 15 गेंदों पर नाबाद 42 रन बनाए। उनकी पारी में 5 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। नमन ने तेजी से रन बनाकर न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बढ़ाया। भारतीय टीम को जब जीत के लिए तेज रन बनाने की जरूरत थी, तब उनकी आक्रामक बल्लेबाजी सबसे ज्यादा काम आई। भारत ने 19.4 ओवर में 230 रन बनाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। संजू सैमसन की शुरुआत और नमन धीर की शानदार फिनिशिंग इस ऐतिहासिक रनचेज की सबसे बड़ी वजह बनी। IND vs NZ 1st T20I Scorecard: एक नजर में पूरा मैच न्यूजीलैंड: 225/4 (20 ओवर) भारत: 230/6 (19.4 ओवर) नतीजा: भारत 4 विकेट से जीता। न्यूजीलैंड के टॉप स्कोरर: ग्लेन फिलिप्स – 82* रन भारत के टॉप स्कोरर: संजू सैमसन – 67 रन मैच के अहम बल्लेबाज: नमन धीर – 15 गेंदों पर नाबाद 42 रन भारत ने अपने नाम किया बड़ा रिकॉर्ड इस जीत की सबसे खास बात भारत का रिकॉर्ड रनचेज रहा। 226 रन जैसे बड़े लक्ष्य को हासिल करके टीम इंडिया ने T20 इंटरनेशनल क्रिकेट में अपना सबसे बड़ा सफल रनचेज दर्ज किया। संजू सैमसन ने तेज शुरुआत देकर टीम को मजबूत आधार दिया, श्रेयस अय्यर ने मध्यक्रम में पारी संभाली और नमन धीर ने अंतिम ओवरों में तेजी से रन बनाकर जीत सुनिश्चित की। इस प्रदर्शन ने एक बार फिर दिखाया कि भारतीय टीम बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भी दबाव में संयम बनाए रख सकती है। दूसरे T20I में भी रहेगी जीत की उम्मीद पहले मुकाबले में जीत के बाद भारतीय टीम सीरीज में अपनी बढ़त मजबूत करना चाहेगी। वहीं, न्यूजीलैंड की टीम अगले मैच में वापसी करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। पहले मैच में दोनों टीमों के बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया। ऐसे में अगले मुकाबले में भी क्रिकेट प्रशंसकों को एक रोमांचक भिड़ंत देखने की उम्मीद रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
India vs New Zealand

India vs New Zealand: आखिरी 3 ओवर में 29 रन की जरूरत, रोमांचक मोड़ पर मैच

भारत और न्यूजीलैंड (India vs New Zealand) के बीच T20 मुकाबला अब बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है। न्यूजीलैंड के 226 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम ने 5 विकेट के नुकसान पर 197 रन बना लिए हैं। अब जीत के लिए भारत को 18 गेंदों में 29 रन बनाने हैं। क्रीज पर श्रेयस अय्यर और नमन धीर मौजूद हैं। ऐसे में भारतीय फैंस की नजरें दोनों बल्लेबाजों पर टिकी हैं। मैच के इस मोड़ पर एक छोटी-सी गलती भी टीम की मुश्किल बढ़ा सकती है। वहीं, अगर भारतीय बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाए और विकेट बचाए रखे, तो जीत हासिल करने का मौका बना हुआ है। IND vs NZ: न्यूजीलैंड ने खड़ा किया 225 रन का स्कोर पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ने 20 ओवर में 4 विकेट खोकर 225 रन बनाए। टीम की ओर से ग्लेन फिलिप्स ने शानदार बल्लेबाजी की और 40 गेंदों पर नाबाद 82 रन बनाए। उनकी आक्रामक पारी ने न्यूजीलैंड को बड़े स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। कीवी बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। बड़े शॉट खेलने के साथ-साथ उन्होंने रन गति को भी धीमा नहीं पड़ने दिया। इसी वजह से भारत के सामने 226 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य आया। India vs New Zealand: लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की स्थिति 226 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को तेजी से रन बनाने थे। टीम ने स्कोर आगे बढ़ाया, लेकिन पांच विकेट गिरने के बाद मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। अब श्रेयस अय्यर और नमन धीर के सामने दोहरी चुनौती है। उन्हें एक तरफ जरूरी रन बनाने हैं, तो दूसरी तरफ विकेट भी बचाकर रखना है। दोनों के बीच अच्छी साझेदारी भारत को जीत के करीब पहुंचा सकती है। आखिरी 18 गेंदों का खेल होगा निर्णायक भारत को 18 गेंदों में 29 रन चाहिए। इसका मतलब है कि टीम को बचे हुए तीन ओवरों में लगातार रन बनाने होंगे। T20 क्रिकेट में यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है, लेकिन न्यूजीलैंड के गेंदबाज भी इस मौके को आसानी से हाथ से जाने नहीं देना चाहेंगे। अगर भारतीय बल्लेबाज शुरुआती गेंदों पर बाउंड्री लगाने में सफल रहते हैं, तो आखिरी ओवर का दबाव कम हो सकता है। वहीं, विकेट गिरने की स्थिति में भारत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। क्या Team India हासिल कर पाएगी जीत? मैच का रुख अब काफी हद तक श्रेयस अय्यर और नमन धीर की बल्लेबाजी पर निर्भर करेगा। भारतीय टीम को जीत के लिए बड़े शॉट खेलने के साथ समझदारी से स्ट्राइक भी बदलनी होगी। न्यूजीलैंड की टीम अपने स्कोर का बचाव करने की पूरी कोशिश करेगी। ऐसे में अंतिम तीन ओवर में गेंदबाजों और बल्लेबाजों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। फिलहाल मुकाबला रोमांचक स्थिति में है और भारत के पास लक्ष्य हासिल करने का मौका मौजूद है। अब देखना होगा कि भारतीय बल्लेबाज आखिरी गेंदों में टीम को जीत दिला पाते हैं या न्यूजीलैंड मुकाबले पर कब्जा जमा लेता है। IND vs NZ Live Score: मैच की ताजा स्थिति हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

दिल्ली-NCR में GRAP-1 लागू, प्रदूषण से निपटने के लिए 334 टीमें करेंगी निगरानी; 1 नवंबर से सख्ती

दिल्ली की वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंचने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पूरे दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया है। इस बीच दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दावा किया कि सरकार के प्रयासों और जनभागीदारी के कारण इस बार पिछले वर्षों की तुलना में GRAP-1 देर से लागू हुआ है। सिरसा के मुताबिक, सर्दियों में प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार 11 सूत्रीय एक्शन प्लान पर काम कर रही है। इसमें करीब 30 एजेंसियां शामिल हैं। प्रदूषण नियंत्रण के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक, दोनों तरह के उपाय किए जा रहे हैं। 334 टीमें करेंगी निगरानी, मॉनिटरिंग स्टेशन बढ़कर होंगे 60 पर्यावरण मंत्री ने बताया कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता की निगरानी करने वाले स्टेशनों की संख्या 47 से बढ़ाकर 60 की जाएगी। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए 334 प्रवर्तन टीमें तैनात की जाएंगी। सिरसा ने दावा किया कि दिल्ली के प्रदूषण में स्थानीय स्रोतों की हिस्सेदारी करीब 30% है, जबकि आसपास के राज्यों और क्षेत्रों से 60 से 65% प्रदूषण आता है। ऐसे में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए पूरे NCR में समन्वित कार्रवाई जरूरी है। 1 नवंबर से प्रदूषण रोकने के लिए प्रस्तावित सख्त कदम सरकार की ओर से साझा की गई योजना के मुताबिक, प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई उपाय किए जाने हैं। 1. वैध PUC प्रमाणपत्र के बिना नहीं मिलेगा ईंधन ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ व्यवस्था के तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) के बिना वाहनों को पेट्रोल या डीजल नहीं देने का प्रावधान है। 2. बाहरी राज्यों के वाहनों पर प्रतिबंध योजना के अनुसार, 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों को इससे छूट देने की बात कही गई है। 3. सरकारी और निजी दफ्तरों में 50% वर्क फ्रॉम होम प्रदूषण कम करने के लिए सरकारी और निजी कार्यालयों के आधे कर्मचारियों से घर से काम कराने की योजना भी शामिल है। 4. सरकारी दफ्तरों के समय में बदलाव योजना के मुताबिक, नगर निगम (MCD) के कार्यालय सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक और दिल्ली सरकार के कार्यालय सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक संचालित किए जाने का प्रस्ताव है। 5. पार्किंग शुल्क दोगुना करने की योजना निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए 1 नवंबर से पार्किंग शुल्क दोगुना करने की योजना है। मेट्रो पार्किंग को इससे छूट देने की बात कही गई है। 6. निर्माण और तोड़फोड़ के काम पर रोक धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल फैलाने वाले निर्माण और तोड़फोड़ कार्यों पर रोक लगाने का प्रावधान है। इसके अलावा, 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध की योजना भी बताई गई है।

दिवाली से पहले दिल्ली में रात को भी होगी सफाई, CM रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

दीपावली और अन्य त्योहारों को देखते हुए दिल्ली के रिहायशी इलाकों और प्रमुख बाजारों में अब रात के समय भी सफाई कराई जाएगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को दिल्ली सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक कर राजधानी की सफाई व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सफाई में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां भी कूड़े के ढेर लगे हैं, उन्हें तत्काल हटाया जाए और नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों से सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए तेजी से काम करने को कहा। कूड़ा नहीं उठने की शिकायतों पर CM नाराज मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के कई इलाकों से समय पर कूड़ा नहीं उठने और जगह-जगह गंदगी की शिकायतें मिल रही हैं। कुछ जोन में सफाई व्यवस्था को लेकर लापरवाही भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि सफाई के प्रयासों के बावजूद जमीन पर अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लोगों की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। साथ ही, सफाई व्यवस्था में किए जा रहे सुधार सड़कों और बाजारों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने चाहिए। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कर्मचारी होंगे तैनात मुख्यमंत्री ने मेयर प्रवेश वाही और नगर निगम आयुक्त संजीव खिरवार को पूरी दिल्ली में सफाई अभियान तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में सफाई कर्मचारियों की कमी है, वहां अतिरिक्त स्टाफ लगाया जाए। जरूरत पड़ने पर रात में सफाई के लिए नए कर्मचारियों की नियुक्ति भी की जाए। रात में सफाई से दिन में नहीं होगी परेशानी मुख्यमंत्री के मुताबिक, बाजारों और रिहायशी कॉलोनियों में रात के समय सफाई कराने से दिन में लोगों की आवाजाही प्रभावित नहीं होगी। इससे त्योहारों के दौरान भीड़भाड़ वाले इलाकों में स्वच्छता बनाए रखने में मदद मिलेगी। बैठक में शहरी विकास मंत्री आशीष सूद, मेयर प्रवेश वाही, मुख्य सचिव राजीव वर्मा, नगर निगम आयुक्त संजीव खिरवार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे

छत्तीसगढ़ में 11 डॉक्टरों के तबादले, डॉ. संजय कुमार बने रायपुर जिला अस्पताल के प्रभारी सिविल सर्जन

छत्तीसगढ़ सरकार के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 11 डॉक्टरों का तबादला किया है। प्रशासनिक आधार पर चिकित्सा अधिकारियों और विशेषज्ञों की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए गए हैं। सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई जगह पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्रालय महानदी भवन से अवर सचिव दिव्या वैष्णव की ओर से जारी आदेश के तहत यह फेरबदल किया गया है। डॉ. संजय कुमार को मिली रायपुर जिला अस्पताल की जिम्मेदारी तबादला आदेश के अनुसार, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. संजय कुमार को जिला चिकित्सालय रायपुर (पंडरी) में प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक नियुक्त किया गया है। वहीं, जिला चिकित्सालय रायपुर में अब तक प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉ. भेनुज कुमार सिन्हा को स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय में प्रभारी उप संचालक के पद पर पदस्थ किया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए प्रशासनिक फेरबदल विभाग के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह प्रशासनिक बदलाव किया गया है। इसके तहत दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी अस्पतालों में भी स्वास्थ्य सुविधाओं को सुचारु बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। तबादला आदेश में सभी संबंधित डॉक्टरों को बिना देरी किए अपने नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।

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