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RBI ने Paytm Payments Bank का लाइसेंस रद्द किया: ग्राहकों और उनकी जमा राशि पर क्या असर पड़ेगा?

RBI ने Paytm Payments Bank का लाइसेंस रद्द किया: ग्राहकों और उनकी जमा राशि पर क्या असर पड़ेगा?

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा फैसला लेते हुए Paytm Payments Bank का लाइसेंस रद्द कर दिया है। इस कदम के बाद लाखों ग्राहकों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि उनकी जमा रकम, सेविंग्स और ट्रांजैक्शन का क्या होगा। सरल भाषा में समझें तो RBI का यह फैसला बैंकिंग नियमों के पालन और सुरक्षा को लेकर लिया गया है। ग्राहकों के लिए इसका क्या मतलब है? RBI के इस फैसले का सीधा असर Paytm Payments Bank के ग्राहकों पर पड़ेगा, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। 1. जमा पैसे सुरक्षित हैं ग्राहकों का पैसा तुरंत गायब नहीं होगा। बैंक में जमा राशि आमतौर पर तय नियमों के तहत सुरक्षित रहती है और उसे निकालने या ट्रांसफर करने का समय दिया जाता है। 2. नए अकाउंट और लेन-देन पर असर अब Paytm Payments Bank में नए खाते खोलने या कुछ बैंकिंग सेवाओं पर रोक लग सकती है। 3. UPI और Paytm ऐप पर असर Paytm ऐप का इस्तेमाल जारी रह सकता है, लेकिन बैंकिंग सेवाओं में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। UPI लेन-देन किसी अन्य बैंक के माध्यम से जुड़े रह सकते हैं। 4. ग्राहकों को क्या करना चाहिए? क्यों लिया गया यह फैसला? RBI का कहना है कि बैंकिंग नियमों और कंप्लायंस को लेकर गंभीर चिंताएं थीं, जिसके चलते यह कदम उठाया गया। इसका मकसद ग्राहकों की सुरक्षा और सिस्टम की स्थिरता बनाए रखना है।
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Meta

Meta Layoffs 2026 8 हजार नौकरियों पर खतरा, कंपनी का बड़ा restructuring प्लान

टेक दुनिया में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। Facebook और Instagram की पैरेंट कंपनी Meta को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। कंपनी में बड़े पैमाने पर छंटनी की तैयारी चल रही है, जिससे करीब 8,000 कर्मचारियों की नौकरी प्रभावित हो सकती है। यह खबर सामने आते ही पूरी टेक इंडस्ट्री में चर्चा शुरू हो गई है। Meta Layoffs 2026: क्या है पूरा मामला? रिपोर्ट्स के मुताबिक, Meta अपने संगठन को दोबारा restructure करने जा रही है। इसी प्रक्रिया के तहत कंपनी लगभग 10% workforce यानी करीब 8,000 कर्मचारियों की छंटनी कर सकती है। यह फैसला अचानक नहीं बल्कि लंबे समय से चल रही internal planning का हिस्सा बताया जा रहा है। कई रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि छंटनी की प्रक्रिया 2026 में चरणबद्ध तरीके से शुरू होगी, ताकि कंपनी अपने नए फोकस के अनुसार टीम को reshape कर सके। कब शुरू होगी छंटनी? जानकारी के अनुसार, Meta में layoffs का पहला चरण मई 2026 के आसपास शुरू हो सकता है। इसके बाद अलग-अलग departments में धीरे-धीरे असर देखने को मिलेगा। यह पूरा प्रोसेस एक साथ नहीं बल्कि phase-wise किया जाएगा। आखिर क्यों ले रहा है Meta इतना बड़ा फैसला? Meta के इस कदम के पीछे कुछ मुख्य कारण बताए जा रहे हैं: कर्मचारियों पर असर इस फैसले का सबसे बड़ा असर हजारों कर्मचारियों पर पड़ेगा। कई लोग जो लंबे समय से Meta के साथ जुड़े हुए हैं, उन्हें भी इस restructuring का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि कंपनी का कहना है कि यह कदम भविष्य की ग्रोथ और टेक्नोलॉजी बदलाव को ध्यान में रखकर लिया जा रहा है। टेक इंडस्ट्री के लिए बड़ा संकेत Meta जैसी बड़ी कंपनी का यह फैसला साफ दिखाता है कि आने वाले समय में AI और automation का प्रभाव और बढ़ने वाला है। इससे कई traditional roles बदल सकते हैं और नई skills की demand तेजी से बढ़ेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sensex

Share Market Today Sensex टूटा 1000 Points, Nifty Down IT Sector बना सबसे बड़ा कारण

शुक्रवार का दिन शेयर बाजार के लिए भारी साबित हुआ। सुबह की शुरुआत से ही कमजोरी दिखा रहे BSE Sensex में गिरावट बढ़ती गई और यह करीब 1000 अंक लुढ़ककर 76,600 के आसपास कारोबार करता नजर आया। वहीं Nifty 50 भी लगभग 280 अंकों की गिरावट के साथ दबाव में रहा। दिनभर के कारोबार में बाजार का मूड साफ तौर पर नकारात्मक रहा और निवेशकों में बेचैनी देखी गई। क्या है गिरावट की असली वजह? IT Shares में भारी बिकवालीआज बाजार पर सबसे ज्यादा असर आईटी सेक्टर की कमजोरी का पड़ा। Infosys और TCS जैसे बड़े शेयरों में गिरावट ने पूरे बाजार को नीचे खींच लिया। कमजोर ग्लोबल डिमांड और धीमी ग्रोथ के संकेतों ने निवेशकों का भरोसा डगमगाया। कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई टेंशनअंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने से भारत जैसे आयातक देश के लिए चिंता बढ़ गई है। इसका सीधा असर महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। Foreign Investors की लगातार बिकवालीविदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली बाजार के लिए बड़ा झटका बन रही है। जब बड़े निवेशक पैसा निकालते हैं, तो बाजार में दबाव तेजी से बढ़ता है। ग्लोबल संकेत भी रहे कमजोरमध्य-पूर्व में तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। सेक्टर का हाल कैसा रहा? लगभग हर सेक्टर लाल निशान में नजर आया, जिससे बाजार की व्यापक कमजोरी साफ दिखी। आगे बाजार कैसा रह सकता है? विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ग्लोबल हालात स्थिर नहीं होते और आईटी सेक्टर से सकारात्मक संकेत नहीं मिलते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Petrol-Diesel ₹28 महंगा होने की खबरें गलत, सरकार ने किया साफ इनकार

Petrol-Diesel ₹28 महंगा होने की खबरें गलत, सरकार ने किया साफ इनकार

देशभर में Petrol-Diesel की कीमतों को लेकर फैली चिंता के बीच सरकार ने बड़ी सफाई दी है। हाल ही में यह खबर तेजी से वायरल हो रही थी कि चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम ₹28 तक बढ़ सकते हैं। लेकिन अब सरकार ने इन दावों को पूरी तरह गलत बताया है। क्या था मामला? दरअसल, एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव खत्म होने के बाद तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल के दामों में भारी बढ़ोतरी कर सकती हैं। इस रिपोर्ट को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई थी और सोशल मीडिया पर भी यह खबर तेजी से फैलने लगी। सरकार ने क्या कहा? सरकार ने साफ कहा है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इस तरह की खबरें सिर्फ अफवाह हैं और लोगों को भ्रमित करने वाली हैं। सरकार के मुताबिक, कीमतों को लेकर कोई फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजार और अन्य आर्थिक परिस्थितियों को देखकर ही लिया जाता है। आम लोगों की चिंता तेल की कीमतों का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है। ऐसे में इस तरह की खबरों से लोगों में चिंता होना स्वाभाविक है। लेकिन सरकार के इस बयान के बाद लोगों को राहत जरूर मिली है। आगे क्या हो सकता है? विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल के दाम कई फैक्टर्स पर निर्भर करते हैं, जैसे कच्चे तेल की कीमत, डॉलर की स्थिति और टैक्स। इसलिए भविष्य में क्या होगा, यह कहना अभी मुश्किल है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold

Gold Silver Price Update चांदी में भारी गिरावट सोने के दाम भी लुढ़के

सर्राफा बाजार से आज राहत भरी खबर सामने आई है। अगर आप सोना या चांदी खरीदने का प्लान बना रहे थे, तो आज का दिन आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। गुरुवार को बाजार खुलते ही सोने और चांदी दोनों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा चांदी की तेज गिरावट को लेकर हो रही है। चांदी टूटी, सोना भी फिसला आज चांदी की कीमत में अचानक ₹4,000 से ₹6,000 प्रति किलो तक की गिरावट देखी गई। वहीं सोना भी सस्ता हुआ और इसके दाम में करीब ₹800 से ₹1,000 तक की कमी दर्ज की गई।इस गिरावट के बाद बाजार में खरीदारों की हलचल बढ़ गई है। आज के ताजा रेट (Gold Silver Price Today) आखिर क्यों गिरे दाम? बाजार के जानकारों की मानें तो इसके पीछे कई वजहें हैं: क्या अभी खरीदना सही रहेगा? अगर आप निवेश के नजरिए से सोच रहे हैं, तो विशेषज्ञ इसे “Buy on Dip” का मौका मान रहे हैं।यानि जब कीमतें गिरती हैं, तब खरीदारी करना लंबे समय में फायदा दे सकता है। लेकिन अगर आप शॉर्ट टर्म में खरीद रहे हैं, तो थोड़ा इंतजार भी समझदारी हो सकती है। खरीदते समय ये बात जरूर याद रखें हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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8th Pay Commission: सैलरी के साथ HRA में बंपर बढ़ोतरी की उम्मीद, छोटे शहरों के कर्मचारियों को भी होगा फायदा

8th Pay Commission: सैलरी के साथ HRA में बंपर बढ़ोतरी की उम्मीद, छोटे शहरों के कर्मचारियों को भी होगा फायदा

केंद्र सरकार के 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अगर नई सिफारिशें लागू होती हैं तो सरकारी कर्मचारियों की सैलरी के साथ-साथ HRA (House Rent Allowance) में भी बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है। इससे सिर्फ बड़े शहरों जैसे दिल्ली-पटना ही नहीं, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में काम करने वाले कर्मचारियों को भी सीधा फायदा मिलेगा। HRA में क्या हो सकता है बदलाव? रिपोर्ट्स के मुताबिक, नए वेतन आयोग में HRA की दरों में बढ़ोतरी पर विचार किया जा सकता है। इसका मतलब है कि किराए पर रहने वाले कर्मचारियों को हर महीने ज्यादा भत्ता मिल सकता है। कर्मचारियों को कैसे होगा फायदा? छोटे शहरों के लिए भी बड़ी राहत अभी तक HRA का ज्यादा फायदा बड़े शहरों में रहने वालों को मिलता है, लेकिन अगर नया फॉर्मूला लागू हुआ तो टियर-2 और टियर-3 शहरों के कर्मचारी भी इससे लाभान्वित होंगे। अभी क्या है स्थिति? फिलहाल 8th Pay Commission को लेकर चर्चा जारी है। सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा और अंतिम सिफारिशों का इंतजार किया जा रहा है।
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Gold

Gold Price India सोना ₹2000 चढ़ा, Silver में बड़ा उछाल

देश के सर्राफा बाजार में आज अचानक आई तेजी ने खरीदारों और निवेशकों दोनों को चौंका दिया। सुबह जैसे ही बाजार खुला, Gold और Silver के दामों में जोरदार उछाल देखने को मिला। खास बात यह रही कि Silver ने एक ही दिन में ₹4500 तक की छलांग लगाकर सबका ध्यान खींच लिया, जबकि Gold भी करीब ₹2000 तक महंगा हो गया। आज के ताजा रेट (Gold Silver Price Today) आज के बाजार भाव पर नजर डालें तो: ध्यान रहे कि शहर और ज्वेलर्स के हिसाब से इन कीमतों में थोड़ा फर्क देखने को मिल सकता है। MCX Market में भी तेजी का असर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी आज तेजी साफ दिखी। यह संकेत देता है कि सिर्फ घरेलू बाजार ही नहीं, बल्कि फ्यूचर्स मार्केट में भी खरीदारी बढ़ी है। आखिर क्यों बढ़े सोना-चांदी के दाम? इस तेजी के पीछे कई बड़े कारण माने जा रहे हैं: इन वजहों से सोना और चांदी दोनों की मांग अचानक बढ़ गई, जिससे कीमतों में उछाल आया। बड़े शहरों में क्या है हाल? दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में भी आज दामों में तेजी दर्ज की गई। हालांकि, स्थानीय टैक्स और मेकिंग चार्ज के कारण हर शहर में कीमत थोड़ी अलग हो सकती है। आगे क्या करें – खरीदें या रुकें? अगर आप सोना या चांदी खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह फैसला थोड़ा सोच-समझकर लेना होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sensex

Share Bazaar Sensex 600 अंक चढ़ा, Nifty 24,500 के पार क्या जारी रहेगी तेजी

हफ्ते की शुरुआत शेयर बाजार के लिए राहत भरी खबर लेकर आई। पिछले कुछ दिनों की उतार-चढ़ाव भरी चाल के बाद आज बाजार में मजबूती साफ नजर आई। BSE Sensex ने करीब 600 अंकों की छलांग लगाई, जबकि Nifty 50 भी 150 से ज्यादा अंकों की तेजी के साथ 24,500 के पार पहुंच गया। सुबह धीमी शुरुआत, फिर पकड़ी रफ्तार दिन की शुरुआत हल्की बढ़त के साथ हुई थी, लेकिन जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा, बाजार में खरीदारी तेज होती गई।दोपहर तक लगभग हर सेक्टर में हरियाली दिखने लगी और निवेशकों का भरोसा मजबूत होता गया। आखिर क्यों चढ़ा बाजार? आज की तेजी अचानक नहीं थी, इसके पीछे कई वजहें काम कर रही थीं: किन सेक्टर्स ने दिया साथ? आज की तेजी में सबसे बड़ा योगदान बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों का रहा। इसके अलावा: इन सभी में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। निवेशकों के लिए संकेत मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर Nifty 24,500 के ऊपर टिकता है, तो आगे और तेजी की गुंजाइश बन सकती है।हालांकि, अंतरराष्ट्रीय हालात अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं हैं, इसलिए बाजार में अचानक उतार-चढ़ाव से इनकार नहीं किया जा सकता। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold

Gold-Silver Price गिरा 10 Gram Gold ₹1.53 लाख के करीब, चांदी हुई सस्ती

Gold और Silver की कीमतों में आज फिर नरमी देखने को मिली है। पिछले कुछ दिनों से जारी उतार-चढ़ाव के बीच अब बाजार में हल्की ठंडक महसूस हो रही है। जहां सोना थोड़ा सस्ता हुआ है, वहीं चांदी के दाम में ज्यादा गिरावट ने खरीदारों को राहत दी है। महानगरों में आज का Gold Rate (10 ग्राम) देश के बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और हैदराबाद में सोने की कीमतों में मामूली फर्क देखने को मिल रहा है। सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना लगभग ₹1.53 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर ट्रेड करता दिखा। Silver Price Today: चांदी में बड़ी गिरावट आज चांदी के दाम में सबसे ज्यादा हलचल देखने को मिली। इस गिरावट के बाद छोटे निवेशकों और ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए यह थोड़ा राहत भरा दिन रहा। क्यों गिर रहे हैं सोना-चांदी के दाम? बाजार के जानकारों के मुताबिक इसके पीछे कई वजहें हैं: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Silver ₹1,214 बढ़कर ₹2.51 लाख, Gold ₹347 चढ़कर ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम

Silver ₹1,214 बढ़कर ₹2.51 लाख, Gold ₹347 चढ़कर ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम

आज Gold और Silver के दामों में एक बार फिर तेजी देखने को मिली है। बाजार में बढ़ती मांग और वैश्विक हालात के कारण कीमती धातुओं की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं। चांदी की कीमत आज ₹1,214 बढ़कर ₹2.51 लाख प्रति किलो तक पहुंच गई। वहीं, सोने की बात करें तो 10 ग्राम सोने का भाव ₹347 बढ़कर ₹1.52 लाख हो गया है। अगर पूरे साल की बात करें, तो सोना अब तक करीब ₹19,000 तक महंगा हो चुका है। यह बढ़ोतरी आम लोगों के लिए चिंता का कारण बन रही है, खासकर उन परिवारों के लिए जो शादी या निवेश के लिए सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता, डॉलर की चाल और निवेशकों का झुकाव सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ने के कारण सोने-चांदी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में अगर आप सोना या चांदी खरीदने की सोच रहे हैं, तो थोड़ा सोच-समझकर फैसला लेना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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हरियाणा में 6 HCS अधिकारियों के तबादले, शिक्षा और आयुष विभाग में मिली नई जिम्मेदारी

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 6 HCS अधिकारियों के तबादले और नई नियुक्तियों के आदेश जारी किए हैं। तबादला सूची के अनुसार, कुछ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जबकि कुछ को वर्तमान कार्यभार के साथ अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। डॉ. शिल्पी पात्र दत्त को एलिमेंट्री एजुकेशन की जिम्मेदारी महिला HCS अधिकारी डॉ. शिल्पी पात्र दत्त को एलिमेंट्री एजुकेशन विभाग में जॉइंट डायरेक्टर (एडमिनिस्ट्रेशन एवं मिड-डे मील) नियुक्त किया गया है। वहीं, डॉ. निर्मल नगर को एलिमेंट्री एजुकेशन विभाग में एडिशनल डायरेक्टर (एडमिनिस्ट्रेशन) की जिम्मेदारी दी गई है। सुरेंद्र सिंह और कुलधीर सिंह को अतिरिक्त प्रभार HCS अधिकारी सुरेंद्र सिंह को उनके वर्तमान कार्यभार के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग में एडिशनल डायरेक्टर (एडमिनिस्ट्रेशन) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इसी तरह, HCS अधिकारी कुलधीर सिंह को वर्तमान जिम्मेदारियों के साथ आयुष विभाग में एडिशनल डायरेक्टर (एडमिनिस्ट्रेशन) का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। दीपक कुमार को महेंद्रगढ़ में जिम्मेदारी HCS अधिकारी दीपक कुमार को जिला परिषद महेंद्रगढ़ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (DRDA), महेंद्रगढ़ से संबंधित अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। डॉ. इंद्रजीत शुगर मिल के मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त सरकार ने HCS अधिकारी डॉ. इंद्रजीत को कॉरपोरेशन शुगर मिल का मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया है। इन प्रशासनिक बदलावों के जरिए विभिन्न विभागों में अधिकारियों की जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया गया है। सभी संबंधित अधिकारियों को आदेशों के अनुसार नई जिम्मेदारियां संभालनी होंगी।

हरियाणा में गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों पर सख्ती, 2 नवंबर तक रिपोर्ट देने के निर्देश

चंडीगढ़। हरियाणा के शिक्षा विभाग ने प्रदेश में संचालित गैर-मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को ऐसे स्कूलों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई करने और 2 नवंबर 2026 तक पूरी जानकारी निदेशालय को भेजने के निर्देश दिए हैं। शिक्षा विभाग की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों (DEEO) को निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। विभाग के मुताबिक, पहले भी इन स्कूलों के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन संबंधित कार्यालयों से निर्धारित जानकारी नहीं मिली। गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों पर होगी कार्रवाई शिक्षा विभाग ने अपने पत्र में कहा है कि राज्य के सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित गैर-मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के खिलाफ तत्काल कड़ा प्रशासनिक संज्ञान लें। अधिकारियों को विभागीय आदेश क्रमांक 7/21-2017 PS (3), दिनांक 24 अप्रैल 2025 के तहत जारी निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियमों के अनुसार कार्रवाई में देरी नहीं होनी चाहिए। स्कूल बंद कराकर निदेशालय को भेजनी होगी सूची जारी पत्र के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों को गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों को तत्काल प्रभाव से बंद कराने की कार्रवाई करनी होगी। इसके साथ ही बंद किए गए स्कूलों की सूची निदेशालय को भेजना भी सुनिश्चित करना होगा। विभाग ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि पहले निर्देश दिए जाने के बावजूद संबंधित कार्यालयों से अब तक आवश्यक जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। इसी कारण अधिकारियों को 2 नवंबर 2026 तक हर हाल में रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं। लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर भी नजर शिक्षा विभाग ने संकेत दिया है कि निर्देशों का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है। विभागीय कामकाज में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर नजर रखी जा रही है। जारी पत्र की प्रतियां राज्य के सभी अतिरिक्त जिला उपायुक्तों (ADC) और पुलिस अधीक्षकों (SP) को भी भेजी गई हैं, ताकि संबंधित स्तर पर समन्वय के साथ कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। अब जिला स्तर के अधिकारियों को तय समय सीमा के भीतर गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों की जानकारी उपलब्ध कराने और नियमानुसार कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

दिल्ली में छठ पूजा के लिए बनेंगे 1400 से ज्यादा घाट, 6 नवंबर तक तैयारियां पूरी करने के निर्देश

नई दिल्ली। दिल्ली में छठ महापर्व की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार राजधानी में 1400 से अधिक छठ घाट विकसित किए जाने की संभावना है, जबकि पिछले साल 1326 घाट बनाए गए थे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को तैयारियों की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को 6 नवंबर तक घाटों पर बुनियादी व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि तय समय सीमा तक सभी प्रमुख काम पूरे कर लिए जाएं, ताकि बाद में केवल पानी भरने, टेंट लगाने और अंतिम सफाई जैसे कार्य शेष रहें। इस वर्ष छठ पूजा 13 से 16 नवंबर तक मनाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने छठ पूजा के अवसर पर अवकाश रहने की भी जानकारी दी। ठंड से बचाव के लिए घाटों पर लगेंगे कवर वाले टेंट नवंबर में संभावित ठंड को देखते हुए मुख्यमंत्री ने बड़े और मध्यम आकार के घाटों पर पर्याप्त कवर वाले टेंट लगाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य पूजा स्थल, मंच के पीछे और अन्य जरूरी स्थानों पर भी टेंट की व्यवस्था की जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त शौचालय, चेंजिंग रूम, पेयजल और साफ-सफाई का इंतजाम करने को कहा गया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि तैयारियां केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी नियमित रूप से घाटों का निरीक्षण करें और मौके पर मिलने वाली कमियों को समय रहते दूर कराएं, ताकि श्रद्धालुओं को पूजा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो। भीड़भाड़ वाले घाटों पर CCTV से होगी निगरानी छठ पूजा के दौरान बड़े और अधिक भीड़ वाले घाटों पर CCTV कैमरों के जरिए निगरानी की जाएगी। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए फायर टेंडर तैनात करने के निर्देश भी दिए गए हैं। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए ट्रैफिक पुलिस स्थानीय आयोजकों के साथ समन्वय करेगी। पार्किंग, ट्रैफिक डायवर्जन और संभावित सड़क बंदी की जानकारी पहले से साझा करने को कहा गया है, ताकि श्रद्धालुओं को घाटों तक पहुंचने में परेशानी न हो। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कई विभागों के अधिकारी बैठक में रहे मौजूद छठ पूजा की तैयारियों को लेकर हुई समीक्षा बैठक में कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा, विधायक अभय वर्मा, चंदन कुमार चौधरी और संदीप सहरावत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में दिल्ली पुलिस, ट्रैफिक पुलिस, नगर निगम (MCD), दिल्ली जल बोर्ड, लोक निर्माण विभाग (PWD) और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

बिलासपुर NSUI नियुक्तियों में देवेंद्र यादव समर्थक खेमे का दबदबा, रंजीत सिंह को लगा झटका

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में NSUI की नई नियुक्तियों के बाद कांग्रेस संगठन के भीतर गुटीय समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। नियुक्तियों में AICC सचिव और विधायक देवेंद्र यादव समर्थक खेमे का दबदबा नजर आने की बात कही जा रही है। इससे पहले यूथ कांग्रेस चुनाव के दौरान जारी नियुक्ति आदेशों पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समर्थक खेमे की आपत्तियों के बाद रोक लगा दी गई थी। बताया गया था कि चुनाव नियमों का हवाला देकर नियुक्तियों को फ्रीज कराया गया था। आरोप था कि नियुक्ति सूची में संबंधित खेमे के समर्थकों को जगह नहीं मिली थी। अब रोक हटने के बाद संशोधन के नाम पर लगभग उन्हीं नियुक्तियों को दोबारा जारी किए जाने की चर्चा है। पहली बार शहर और ग्रामीण में बांटा गया जिलाध्यक्ष का पद NSUI के प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय की ओर से जारी नियुक्ति आदेश में बिलासपुर जिलाध्यक्ष का पद रायपुर की तर्ज पर शहर और ग्रामीण, दो हिस्सों में बांटा गया है। ग्रामीण जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी रंजेश सिंह क्षत्री को सौंपी गई है, जिन्हें देवेंद्र यादव समर्थक माना जाता है। वहीं, इसी खेमे से जुड़े समर्थ मिरानी को शहर जिलाध्यक्ष बनाया गया है। समर्थ मिरानी को जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री का समर्थन हासिल बताया जाता है। नई नियुक्तियों के बाद संगठन में अलग-अलग गुटों के प्रभाव और राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। रंजीत सिंह को लगा झटका राजनीतिक प्रेक्षकों के मुताबिक, बिलासपुर जिले में पिछले कुछ वर्षों से NSUI की कमान संभाल रहे रंजीत सिंह को नई नियुक्तियों से झटका लगा है। इसके पीछे यूथ कांग्रेस चुनाव के दौरान भूपेश बघेल समर्थक खेमे का खुलकर साथ देने को एक संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि, नियुक्तियों को लेकर अलग-अलग खेमों के बीच मतभेद और उनके प्रभाव को लेकर सामने आ रही बातें राजनीतिक आकलन का हिस्सा हैं। संगठन को मजबूत करने पर रंजेश सिंह क्षत्री का जोर ग्रामीण जिलाध्यक्ष नियुक्त होने के बाद रंजेश सिंह क्षत्री ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और विद्यार्थियों के हितों के लिए काम करने की बात कही। उन्होंने कहा, “मैं किसान का बेटा हूं। मेहनत से सींचना बचपन से सीखा हूं।” रंजेश सिंह क्षत्री के मुताबिक, NSUI केवल एक छात्र संगठन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के अधिकारों, सम्मान और उज्ज्वल भविष्य के लिए संघर्ष करने वाला मंच है। जिलाध्यक्ष के रूप में उनकी प्राथमिकता संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना और कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए काम करना होगा। नई नियुक्तियों के बाद अब बिलासपुर में NSUI की संगठनात्मक गतिविधियों और अलग-अलग गुटों के बीच तालमेल पर नजर रहेगी।

ठोस कचरा प्रबंधन में छत्तीसगढ़ का बेहतर प्रदर्शन, रोजाना 2,612 टन से ज्यादा कचरे का प्रसंस्करण

रायपुर। छत्तीसगढ़ ठोस कचरा प्रबंधन के मामले में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। प्रदेश में हर दिन 2,615.14 टन ठोस कचरा पैदा होता है, जिसमें से 2,612.97 टन कचरे का प्रसंस्करण किया जा रहा है। यानी उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पैदा होने वाले लगभग पूरे ठोस कचरे का प्रसंस्करण हो रहा है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की वर्ष 2026 की रिपोर्ट पॉलिसी, प्रैक्टिस एंड प्लास्टिक: कॉस्ट ऑफ मैनेजिंग प्लास्टिक वेस्ट इन इंडियन सिटीज में प्रदेश की कचरा प्रबंधन व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में कचरा प्रसंस्करण की दर 100% दर्ज की गई है। प्रदेश के नगरीय निकायों के सभी 3,255 वार्डों में घरों से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग एकत्र किया जा रहा है। प्लास्टिक कचरे की मात्रा में आई कमी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में वर्ष 2022-23 के दौरान 21,170 टन प्लास्टिक कचरा पैदा हुआ। इससे पहले वर्ष 2021-22 में यह मात्रा 51,100 टन और 2020-21 में 47,450 टन दर्ज की गई थी। आंकड़ों में प्लास्टिक कचरे की मात्रा में उल्लेखनीय कमी दिखाई देती है। हालांकि, केवल इन आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि प्लास्टिक का इस्तेमाल या कचरे की वास्तविक मात्रा भी उसी अनुपात में कम हुई है। इसके लिए आंकड़ों के संकलन, रिपोर्टिंग और कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को भी समझना जरूरी है। कचरा प्रबंधन के खर्च को सार्वजनिक करने की सिफारिश CSE की रिपोर्ट में कचरा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नगरीय निकायों को कचरा संग्रहण से लेकर उसके अंतिम निस्तारण तक होने वाले खर्च का विवरण सार्वजनिक करना चाहिए। इसके साथ ही प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन में उत्पादक कंपनियों की जिम्मेदारी के तहत मिलने वाली राशि को वास्तविक खर्च के अनुरूप बनाने की सिफारिश की गई है। कचरे को प्रसंस्करण संयंत्र तक पहुंचाने में लगने वाली लागत को भी इसमें शामिल करने पर जोर दिया गया है। प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन में जवाबदेही जरूरी प्लास्टिक कचरे का प्रभावी प्रबंधन केवल संग्रहण और प्रसंस्करण तक सीमित नहीं है। इसके लिए लागत का सही आकलन, पारदर्शी व्यवस्था और उत्पादक कंपनियों की जिम्मेदारी तय करना भी महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ में ठोस कचरे के प्रसंस्करण और घरों से गीला-सूखा कचरा अलग-अलग एकत्र करने के आंकड़े सकारात्मक तस्वीर पेश करते हैं। अब कचरा प्रबंधन पर होने वाले खर्च और प्लास्टिक कचरे के निस्तारण की व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना भी महत्वपूर्ण होगा।

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