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Donald Trump

Donald Trump का Iran पर बड़ा Action, Map पर लगाई अपनी Photo; लिखा- ‘Bye Bye Kharg’

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने सोशल मीडिया पर ईरान को लेकर एक के बाद एक कई पोस्ट शेयर कर हलचल बढ़ा दी। करीब एक घंटे के दौरान ट्रंप ने ईरान से जुड़ी 7 पोस्ट कीं। इनमें ईरान का नक्शा, तेल निर्यात, करेंसी और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के साथ-साथ खार्ग द्वीप का भी जिक्र किया गया। इन पोस्ट में एक तस्वीर ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा। इसमें ईरान के मैप पर ट्रंप की तस्वीर दिखाई गई थी। पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर भी तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। ‘Bye Bye Kharg’ ने खींचा सबसे ज्यादा ध्यान ट्रंप की पोस्ट सीरीज में Kharg Island को लेकर किया गया संदेश खास चर्चा में रहा। उन्होंने एक ग्राफिक शेयर करते हुए लिखा- “Bye bye, Kharg.” खार्ग द्वीप ईरान के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। यह देश के प्रमुख Oil Export Terminal के तौर पर जाना जाता है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल के निर्यात की व्यवस्था होती है। ऐसे में खार्ग का नाम सामने आने के बाद ट्रंप के संदेश को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई। ट्रंप इससे पहले भी खार्ग द्वीप को लेकर सोशल मीडिया पर AI-generated तस्वीर और वीडियो शेयर कर चुके हैं। हालांकि सोशल मीडिया पर दिखाई गई तस्वीरों को वास्तविक सैन्य कार्रवाई की पुष्टि नहीं माना जा सकता। Iran की Economy और Currency पर भी निशाना ट्रंप की पोस्ट केवल सैन्य या रणनीतिक मुद्दों तक सीमित नहीं थीं। उन्होंने Iranian currency, inflation और oil exports से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। अमेरिकी प्रतिबंधों और क्षेत्रीय तनाव के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से दबाव में है। ट्रंप की पोस्टिंग में इसी आर्थिक स्थिति को लेकर ईरान पर निशाना साधने की कोशिश दिखाई दी। ईरान की ओर से लगातार यह संकेत दिया जाता रहा है कि वह बाहरी दबाव के बावजूद अपनी आर्थिक और रणनीतिक नीतियों को जारी रखेगा। Strait of Hormuz पर बढ़ी दुनिया की चिंता इस पूरे विवाद में Strait of Hormuz सबसे अहम मुद्दों में से एक बन गया है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के महत्वपूर्ण Oil Shipping Routes में शामिल है। यहां किसी भी तरह का लंबा व्यवधान अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर सीधा असर डाल सकता है। हालिया तनाव के बीच हॉर्मुज से गुजरने वाले Commercial Ships की आवाजाही में कमी की खबरों ने चिंता बढ़ा दी है। अगर स्थिति ज्यादा बिगड़ती है तो इसका असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के कई देशों में तेल की कीमतों और सप्लाई पर असर पड़ सकता है। Oil Market पर भी पड़ा असर अमेरिका-ईरान तनाव का असर Global Oil Market में भी दिखाई दे रहा है। बाजार की नजर खासतौर पर इस बात पर है कि हॉर्मुज से तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की आवाजाही कितनी सामान्य रहती है। अगर इस अहम समुद्री मार्ग पर लंबे समय तक तनाव बना रहता है, तो Supply Disruption की आशंका बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव देखने को मिल सकता है। पहले भी खार्ग को लेकर पोस्ट कर चुके हैं ट्रंप खार्ग द्वीप को लेकर ट्रंप का यह पहला सोशल मीडिया संदेश नहीं है। इससे पहले भी उन्होंने एक AI-generated वीडियो शेयर किया था, जिसमें खार्ग द्वीप को नुकसान पहुंचने जैसा दृश्य दिखाया गया था। उस समय भी इस पोस्ट ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। अब एक बार फिर “Bye Bye Kharg” लिखकर ट्रंप ने खार्ग को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आगे क्या होगा? ट्रंप की ताजा पोस्टिंग से साफ है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है। Oil Export, Economy और Strait of Hormuz जैसे मुद्दे अब इस पूरे विवाद के अहम हिस्से बन चुके हैं। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव किस दिशा में जाता है। अगर हॉर्मुज में स्थिति बिगड़ती है, तो इसका असर Middle East से बाहर भी महसूस किया जा सकता है। ट्रंप के “Bye Bye Kharg” संदेश ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ेगा या आने वाले दिनों में बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Cargo Plane Crash

Amazon Cargo Plane Crash: Landing के दौरान रनवे से फिसला विमान, 5 की गई जान

अमेरिका के मियामी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रविवार को हुए एक दर्दनाक Cargo Plane Crash ने हर किसी को झकझोर दिया। Amazon Prime Air का Boeing 767-300 विमान लैंडिंग के दौरान रनवे से आगे निकल गया और एयरपोर्ट के आसपास मौजूद कई वाहनों से जा टकराया। टक्कर के बाद विमान में आग लग गई और मौके पर धुएं का बड़ा गुबार दिखाई देने लगा। हादसे में 5 लोगों की मौत हुई है, जबकि 5 लोग घायल हुए हैं। इनमें 3 की हालत गंभीर बताई जा रही है। Landing के दौरान बिगड़ा विमान का संतुलन यह हादसा रविवार दोपहर करीब 2 बजे हुआ। Prime Air Flight 7598 सैन जुआन, प्यूर्टो रिको से मियामी पहुंची थी। लैंडिंग के दौरान विमान रनवे के निर्धारित हिस्से से आगे निकल गया। इसके बाद उसने एयरपोर्ट के पास की सड़क पार की और कई वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर के बाद विमान में आग भड़क उठी। हादसे की तस्वीरों और वीडियो में विमान का अगला हिस्सा जमीन की ओर झुका हुआ और उसके आसपास धुआं उठता नजर आया। राहत दलों के पहुंचने तक स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण हो चुकी थी। विमान में फंसे थे Pilot और Co-Pilot हादसे के बाद Rescue Teams ने तुरंत मोर्चा संभाला। अधिकारियों के अनुसार विमान के Pilot और Co-Pilot कॉकपिट में फंस गए थे। जिन वाहनों से विमान टकराया, उनमें भी कुछ लोग फंसे हुए थे। राहतकर्मियों ने लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। Miami-Dade Fire Rescue की 60 से ज्यादा यूनिट्स और करीब 200 कर्मचारी मौके पर पहुंचे। विमान से Fuel Leak की स्थिति भी सामने आई, जिससे Rescue Operation को और सावधानी से चलाना पड़ा। 5 की मौत, 3 की हालत Critical स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक हादसे में 5 लोगों की जान चली गई, जबकि 5 अन्य घायल हुए। घायलों में 3 की हालत गंभीर है और उन्हें Critical Care की जरूरत बताई गई है। दो अन्य घायलों को भी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अभी तक मृतकों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। यह भी जांच का विषय है कि मृतकों में विमान पर सवार लोग शामिल थे या जमीन पर मौजूद लोग। 32 साल पुराना था Boeing 767 हादसे में शामिल विमान Boeing 767-300 Freighter था। रिपोर्टों के अनुसार यह करीब 32 साल पुराना विमान था, जिसे पहले Passenger Aircraft के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था और बाद में Cargo विमान में बदला गया। विमान का संचालन North Carolina की कंपनी 21 Air कर रही थी और यह Amazon के लिए उड़ान भर रहा था। विमान सैन जुआन से मियामी आया था। Airport Operations पर पड़ा बड़ा असर हादसे के तुरंत बाद Miami International Airport पर सभी रनवे और Taxiways को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया। इससे बड़ी संख्या में उड़ानों पर असर पड़ा। रिपोर्टों के अनुसार सैकड़ों Flights में Delay और Cancellation की स्थिति बनी। बाद में एयरपोर्ट के कुछ रनवे दोबारा खोल दिए गए और Operations धीरे-धीरे बहाल होने लगे। आखिर क्यों हुआ हादसा? Investigation शुरू फिलहाल हादसे की असली वजह साफ नहीं हुई है। अमेरिका की Federal Aviation Administration (FAA) और National Transportation Safety Board (NTSB) ने जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि विमान रनवे से क्यों आगे निकल गया और Landing के दौरान किन परिस्थितियों में उसका नियंत्रण प्रभावित हुआ। मौसम, विमान की स्थिति और Landing से जुड़ी परिस्थितियों समेत कई पहलुओं की जांच की जा रही है। Amazon ने हादसे पर दुख जताया है और कहा है कि कंपनी स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर घटना की जानकारी जुटा रही है। फिलहाल जांच एजेंसियों की रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद Miami Cargo Plane Crash की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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UN

World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
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Marco Rubio

India-Iran Trade Deal पर Marco Rubio का जवाब, Iran की मदद करने वालों को US ने दी Sanctions की Warning

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की मुलाकात के बाद India-Iran Relations एक बार फिर चर्चा में हैं। खास बात यह है कि इस बैठक को लेकर अमेरिका की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच किसी नए Trade Deal पर बातचीत चल रही है। रुबियो का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत ईरान के साथ अपने पुराने रिश्तों को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। दोनों देशों के नेताओं की मुलाकात में व्यापार, क्षेत्रीय हालात और आपसी सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। मोदी-Pezeshkian Meeting पर क्या बोले Rubio? मोदी और पेजेश्कियान की मुलाकात को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री से सवाल किया गया था कि क्या दोनों देश किसी नए व्यापार समझौते की तैयारी कर रहे हैं। रुबियो ने जवाब में कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच इस समय कोई Trade Deal हो रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि अलग-अलग देशों के ईरान के साथ अपने संबंध और विदेश नीति हो सकती है। यही वजह है कि रुबियो के बयान को भारत और ईरान के बीच बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता के संदर्भ में देखा जा रहा है। Iran की मदद करने वालों को US की चेतावनी रुबियो ने सिर्फ Trade Deal पर ही बात नहीं की। उन्होंने ईरान को लेकर अमेरिका की सख्त नीति भी दोहराई। अमेरिकी विदेश मंत्री ने चेतावनी दी कि जो देश ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद करेंगे, उनके खिलाफ भी Sanctions लगाए जा सकते हैं। अमेरिका लंबे समय से ईरान की आर्थिक गतिविधियों और उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर कड़ा रुख अपनाता रहा है। इस बयान से साफ है कि वॉशिंगटन ईरान से जुड़े आर्थिक और व्यापारिक मामलों पर करीबी नजर रख रहा है। भारत-ईरान के रिश्ते क्यों हैं महत्वपूर्ण? भारत और ईरान के रिश्ते काफी पुराने हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार के साथ-साथ ऊर्जा, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दे भी अहम रहे हैं। भारत के लिए ईरान की भौगोलिक स्थिति भी महत्वपूर्ण है। Chabahar Port के जरिए भारत मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक अपनी कनेक्टिविटी मजबूत करने की कोशिश करता रहा है। ऐसे में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए ईरान के साथ संबंधों को संतुलित रखना एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मुद्दा है। मोदी और पेजेश्कियान के बीच क्या हुई बातचीत? बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने और व्यापारिक सहयोग मजबूत करने पर चर्चा की। पश्चिम एशिया की स्थिति और क्षेत्रीय शांति का मुद्दा भी बातचीत में महत्वपूर्ण रहा। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि क्षेत्रीय विवादों का समाधान Dialogue और Diplomacy के जरिए होना चाहिए। मोदी-पेजेश्कियान मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया की स्थिति पहले से ही संवेदनशील बनी हुई है। इसलिए इस बैठक को सिर्फ सामान्य द्विपक्षीय मुलाकात के तौर पर नहीं देखा जा रहा। क्या भारत पर बढ़ेगा अमेरिकी दबाव? रुबियो के बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले दिनों में भारत और अमेरिका के बीच ईरान को लेकर कोई नया मतभेद सामने आएगा। भारत की विदेश नीति लंबे समय से अपने रणनीतिक हितों के आधार पर अलग-अलग देशों के साथ संबंध बनाए रखने पर केंद्रित रही है। अमेरिका के साथ भारत की साझेदारी लगातार मजबूत हुई है, लेकिन ईरान के साथ भी नई दिल्ली के अपने महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक हित हैं। फिलहाल किसी नए India-Iran Trade Deal की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन मोदी और पेजेश्कियान की मुलाकात ने यह जरूर संकेत दिया है कि दोनों देश अपने संबंधों को बनाए रखने और आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि भारत-अमेरिका संबंधों और भारत-ईरान साझेदारी के बीच नई दिल्ली किस तरह संतुलन कायम करती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Iran

Iran में Wedding Party पर US Attack का दावा, 5 की मौत; Jordan-Bahrain में पलटवार

Iran और America के बीच जारी तनाव अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। दक्षिणी ईरान के सिरिक इलाके में एक घर को अमेरिकी हमले में निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, जिस जगह हमला हुआ वहां शादी समारोह चल रहा था। घटना में कम से कम 5 लोगों की मौत हुई है, जबकि 63 लोग घायल बताए जा रहे हैं। इस हमले के बाद ईरान ने भी पलटवार किया है। ईरान की ओर से जॉर्डन और बहरीन में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया गया है। लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई ने पूरे Middle East में तनाव बढ़ा दिया है। शादी की खुशी के बीच मची अफरा-तफरी ईरानी अधिकारियों के अनुसार, हमला हार्मोजगान प्रांत के सिरिक इलाके में हुआ। बताया गया कि एक घर में शादी समारोह चल रहा था। इसी दौरान हुए हमले से वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, घटना में 5 लोगों की जान गई और 63 लोग घायल हुए। घायलों में महिलाएं और बच्चे भी बताए गए हैं। राहत और बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया। ईरानी अधिकारियों ने इस घटना को अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से जोड़ा है। हालांकि, अमेरिका की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि उसके अभियान का लक्ष्य ईरान के सैन्य ठिकाने और सैन्य ढांचा था। इसलिए शादी समारोह को जानबूझकर निशाना बनाए जाने का दावा अभी विवादित है। Iran ने किया जवाबी हमला अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू करने का दावा किया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के अनुसार, अमेरिका से जुड़े सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए गए। ईरान के दावे के मुताबिक, जॉर्डन और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य सुविधाएं भी इन हमलों के निशाने पर रहीं। इसके बाद दोनों देशों में एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय किया गया। जॉर्डन ने अपने क्षेत्र की ओर आने वाली कुछ मिसाइलों को रोकने की कार्रवाई की बात कही है। वहीं बहरीन में भी ड्रोन और मिसाइल खतरे के बीच सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई। Middle East में बढ़ी चिंता अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष का असर अब केवल दोनों देशों तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मौजूदगी और ईरान के जवाबी हमलों से दूसरे देशों के भी इसकी चपेट में आने का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले दिनों में संघर्ष किस दिशा में जाता है। अगर दूसरे देश सीधे तौर पर इसमें शामिल होते हैं, तो Middle East में हालात और बिगड़ सकते हैं। Strait of Hormuz पर भी दुनिया की नजर इस पूरे घटनाक्रम के बीच Strait of Hormuz को लेकर भी चिंता बनी हुई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने से तेल की सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर असर पड़ने की आशंका है। संघर्ष लंबा खिंचने पर इसका असर केवल Middle East तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के कई देशों में पेट्रोलियम और अन्य ऊर्जा कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। अब आगे क्या? शादी समारोह के दौरान हुई मौतों की खबर ने Iran-US Conflict के मानवीय असर को एक बार फिर सामने ला दिया है। एक तरफ अमेरिका अपने सैन्य अभियान को ईरान के सैन्य ढांचे के खिलाफ कार्रवाई बता रहा है, वहीं ईरान लगातार जवाबी हमलों के जरिए दबाव बढ़ा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि दोनों देशों के बीच यह टकराव यहीं रुकता है या आने वाले दिनों में इसका दायरा और बढ़ता है। फिलहाल Jordan, Bahrain और Gulf region में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है और दुनिया की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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SCO Summit

SCO Summit में Pakistan की Edited Photo पर बवाल, PM Modi और Iran President गायब

SCO Summit से जुड़ी एक तस्वीर ने भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से चल रही तल्खी को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के आधिकारिक X अकाउंट से शेयर की गई एक तस्वीर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तस्वीर के एडिटेड वर्जन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके साथ खड़े ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन नजर नहीं आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर तस्वीर सामने आने के बाद यूजर्स ने पाकिस्तान सरकार के आधिकारिक अकाउंट पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। खास बात यह है कि जिस कार्यक्रम की तस्वीर साझा की गई, उसमें भारत और ईरान दोनों के शीर्ष नेता मौजूद थे। Original Photo और Edited Version को लेकर सवाल SCO Summit की ग्रुप फोटो में संगठन के कई सदस्य देशों के नेता एक साथ नजर आए थे। इसी तस्वीर का एक अलग वर्जन पाकिस्तान PMO के X हैंडल से पोस्ट किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन दिखाई नहीं देते। इसके बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई कि क्या तस्वीर को जानबूझकर एडिट किया गया था। हालांकि, तस्वीर को लेकर पाकिस्तान सरकार की ओर से ऐसी कोई स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है कि पोस्ट में मूल तस्वीर के बजाय बदला हुआ फ्रेम क्यों इस्तेमाल किया गया। PM Modi और Pezeshkian की मुलाकात भी रही अहम SCO Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ मुलाकात भी हुई। दोनों नेताओं के बीच भारत-ईरान संबंधों, व्यापार और क्षेत्रीय हालात पर बातचीत हुई। भारत और ईरान के रिश्ते लंबे समय से रणनीतिक और आर्थिक महत्व रखते हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की बैठक Summit के दौरान महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रमों में शामिल रही। यही वजह है कि ग्रुप फोटो से दोनों नेताओं के गायब होने वाली तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। Pakistan PM की भी ईरानी राष्ट्रपति से मुलाकात इस मामले का एक और दिलचस्प पहलू सामने आया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी SCO Summit के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत हुई। ऐसे में सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाया कि अगर ईरानी राष्ट्रपति पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से भी मिले थे, तो ग्रुप फोटो के साझा किए गए वर्जन में उनका नजर नहीं आना आखिर क्यों हुआ। India-Pakistan Relations के बीच बढ़ी चर्चा भारत और पाकिस्तान के रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। ऐसे में SCO जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच से सामने आने वाली छोटी-सी तस्वीर भी राजनीतिक और कूटनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रधानमंत्री मोदी ने Summit में आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट और सामूहिक कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया। भारत लगातार यह रुख रखता रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी तरह का दोहरा रवैया नहीं होना चाहिए। ऐसे माहौल में पाकिस्तान के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से सामने आई कथित Edited Photo ने राजनीतिक बहस को और हवा दे दी। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने उठाए सवाल तस्वीर पोस्ट होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। कई यूजर्स ने Original Group Photo और पाकिस्तान PMO द्वारा साझा तस्वीर की तुलना करते हुए सवाल पूछे। हालांकि, यह भी जरूरी है कि तस्वीर के पीछे की मंशा को लेकर जल्दबाजी में निष्कर्ष न निकाला जाए। पाकिस्तान सरकार की ओर से इस मामले में आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि तस्वीर में बदलाव क्यों किया गया था। SCO Summit ने फिर खींचा दुनिया का ध्यान SCO Summit में भारत, पाकिस्तान, चीन, रूस, ईरान समेत कई देशों के शीर्ष नेता शामिल हुए। बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, आर्थिक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर चर्चा हुई। एक तरफ Summit में भारत का आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश सुर्खियों में रहा, तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी की ईरानी राष्ट्रपति से मुलाकात ने भारत-ईरान संबंधों को लेकर ध्यान खींचा। अब पाकिस्तान PMO की कथित Edited Photo इस पूरे घटनाक्रम में एक नया विवाद बनकर सामने आई है। सोशल मीडिया पर बहस जारी है और लोगों की नजर इस बात पर है कि पाकिस्तान सरकार इस तस्वीर को लेकर कोई आधिकारिक सफाई देती है या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Iran-America

Iran-America फिर बढ़ा Middle East तनाव, Hormuz के पास US Strike के बाद Iran का Missile Attack

ईरान और अमेरिका (Iran-America) के बीच एक महीने से जारी अपेक्षाकृत शांति अब फिर टूट गई है। अमेरिका ने ईरान के Larak Island पर दो लॉन्चर्स को निशाना बनाया। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा किया। इस घटनाक्रम के बाद पूरे Middle East में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। Hormuz के पास अमेरिका ने क्यों किया हमला? अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, Larak Island पर ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। अमेरिका का दावा है कि वहां मौजूद दो लॉन्चर्स के जरिए Strait of Hormuz में समुद्री बारूदी सुरंगें पहुंचाने की तैयारी की जा रही थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस कार्रवाई को सीमित और सटीक बताया। अमेरिका के अनुसार, इसका मकसद Hormuz में Commercial Shipping के लिए संभावित खतरे को रोकना था। ईरान ने हमले को बताया बड़ी कार्रवाई अमेरिकी हमले के बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि इस कार्रवाई में उसके सैनिकों और नागरिकों के हताहत होने की जानकारी है। ईरानी पक्ष ने अमेरिका को जवाब देने की चेतावनी भी दी। इसके बाद ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही। हालांकि, हमले से हुए नुकसान को लेकर ईरान और अमेरिका की तरफ से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। Jordan में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमला ईरान के IRGC के अनुसार, जॉर्डन में मौजूद दो अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें Al Azraq और King Hussein से जुड़े सैन्य ठिकाने शामिल बताए गए हैं। जॉर्डन की सेना के मुताबिक, उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने हवाई क्षेत्र में दाखिल हुई 8 मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया। शुरुआती जानकारी में बड़े नुकसान या बड़े पैमाने पर हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है। Strait of Hormuz क्यों है इतना अहम? इस पूरे विवाद के केंद्र में Strait of Hormuz है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा और समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इस रास्ते में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या बाधा का असर सिर्फ खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। Hormuz में तनाव बढ़ने पर तेल की सप्लाई, समुद्री परिवहन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर सीधा असर पड़ सकता है। ताजा हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई। Reuters के मुताबिक, 31 अगस्त को Brent crude करीब 2.5% बढ़कर 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया था। एक महीने बाद फिर क्यों बढ़ा तनाव? अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ समय से सैन्य गतिविधियों में कमी देखने को मिल रही थी। लेकिन Hormuz में समुद्री सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ था। अमेरिका का कहना है कि ईरानी गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए खतरा पैदा कर सकती थीं। वहीं, ईरान अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को आक्रामक कदम मानता है। Larak Island पर हुए हमले और उसके बाद Jordan में जवाबी मिसाइल हमले ने दोनों देशों के बीच तनाव को फिर सुर्खियों में ला दिया है। आगे क्या होगा? फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव यहीं रुक जाएगा या फिर Middle East में तनाव और बढ़ेगा। अगर Hormuz में सैन्य गतिविधियां बढ़ती हैं, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार और Shipping Industry पर भी पड़ सकता है। अमेरिका की कार्रवाई और ईरान की जवाबी प्रतिक्रिया के बाद अब दुनिया की नजर दोनों देशों के अगले कदम पर है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि दोनों पक्ष तनाव कम करने की कोशिश करते हैं या संघर्ष एक बार फिर बड़े स्तर पर पहुंचता है। फिलहाल इतना साफ है कि Larak Island पर अमेरिकी कार्रवाई ने लंबे समय से चल रहे US-Iran तनाव को फिर भड़का दिया है और इसका असर पूरे Middle East के साथ-साथ Global Oil Market पर भी दिखाई दे सकता है।
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H-1B

H-1B Rules में बड़ा बदलाव: Trump हटाएंगे 60 Days Grace Period? Indian IT Professionals पर असर

अमेरिका में काम करने वाले भारतीय H-1B visa holders के लिए Donald Trump administration की immigration policies लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। अब H-1B के तहत मिलने वाली 60 Days Grace Period को खत्म करने की तैयारी की खबरों ने भारतीय IT professionals के बीच नई चिंता पैदा कर दी है। अगर यह प्रस्ताव अंतिम रूप से लागू होता है, तो नौकरी जाने के बाद H-1B workers को अमेरिका में नई नौकरी तलाशने के लिए मिलने वाली मौजूदा 60 दिनों की राहत खत्म हो सकती है। इसके साथ ही H-1B visa से जुड़ी बढ़ी हुई लागत और दूसरे proposed immigration changes भी भारतीय professionals के लिए अमेरिका में नौकरी और long-term career planning को प्रभावित कर सकते हैं। क्या है H-1B 60 Days Grace Period? मौजूदा नियमों के तहत, अगर किसी H-1B worker की नौकरी समाप्त हो जाती है, तो कुछ परिस्थितियों में उसे अधिकतम 60 दिन या उसके authorized stay की समाप्ति तक, जो भी पहले हो, अमेरिका में रहने की अनुमति मिल सकती है। इस दौरान कर्मचारी: टेक्नोलॉजी सेक्टर में layoffs के दौरान यह grace period H-1B workers के लिए एक महत्वपूर्ण safety net बन गई है। Trump Administration क्यों बदलना चाहती है H-1B Rules? Trump administration लंबे समय से अमेरिकी workers को प्राथमिकता देने और foreign workers पर अमेरिकी कंपनियों की निर्भरता कम करने की नीति पर जोर देती रही है। प्रस्तावित बदलावों का व्यापक उद्देश्य H-1B program में ज्यादा सख्ती और oversight लाना है। हालांकि, 60-day grace period को खत्म करने का प्रस्ताव अभी अंतिम रूप से लागू नियम नहीं माना जा सकता। अंतिम regulatory process और effective date यह तय करेंगे कि बदलाव वास्तव में कब और किस रूप में लागू होगा। Indians पर सबसे बड़ा असर क्या होगा? H-1B program में भारतीय professionals की बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण किसी भी बड़े बदलाव का असर भारतीयों पर विशेष रूप से पड़ सकता है। 1. Layoff के बाद बढ़ेगा Immigration Pressure अगर किसी भारतीय H-1B employee की नौकरी चली जाती है, तो मौजूदा 60 दिनों का buffer उपलब्ध नहीं होने पर उसे बहुत तेजी से नया employer या दूसरा वैध immigration option तलाशना पड़ सकता है। इससे layoffs का असर सिर्फ नौकरी खोने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिका में रहने की स्थिति भी तुरंत चिंता का विषय बन सकती है। 2. IT Professionals पर ज्यादा असर भारतीय H-1B workers की बड़ी संख्या technology और specialized professional roles में काम करती है। इसलिए software engineers, IT consultants, data professionals और दूसरे skilled workers के लिए नौकरी बदलने की समय-सीमा महत्वपूर्ण हो सकती है। नई व्यवस्था में companies के बीच job switch करने की प्रक्रिया को पहले से ज्यादा जल्दी पूरा करना जरूरी हो सकता है। 3. कम समय में Job Search का दबाव 60 दिन की grace period खत्म होने की स्थिति में कर्मचारी के पास नई नौकरी तलाशने के लिए कम flexibility होगी। ऐसे में कुछ workers को: H-1B Fee में भारी बढ़ोतरी से भी बढ़ी चिंता H-1B program में प्रस्तावित एक और बड़ा बदलाव इसकी लागत से जुड़ा है। Trump administration ने नए H-1B petitions से जुड़ी $103,265 की proposed fee को लेकर कदम उठाए हैं। यह समझना जरूरी है कि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर H-1B employee को अपनी जेब से करीब $100,000 देना होगा। यह मुख्य रूप से employer-side cost से जुड़ा प्रस्ताव है। फिर भी इतनी बड़ी लागत कंपनियों के hiring decisions को प्रभावित कर सकती है। Indian IT Companies के लिए क्या बदल सकता है? H-1B rules में सख्ती और बढ़ी हुई लागत का असर भारतीय IT companies की US business strategy पर भी पड़ सकता है। कंपनियां संभावित रूप से: इसका मतलब यह हो सकता है कि आने वाले समय में भारतीय IT professionals के लिए US onsite opportunities की competition और बढ़ जाए। H-4 Visa पर रहने वाले परिवारों पर भी असर H-1B employee की immigration स्थिति का असर उसके परिवार पर भी पड़ सकता है। H-4 status पर अमेरिका में रहने वाले spouse और children के लिए भी primary H-1B holder की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। अगर principal H-1B worker को नौकरी जाने के बाद जल्दी नया immigration solution नहीं मिलता, तो परिवार को भी relocation या दूसरे immigration options पर विचार करना पड़ सकता है। इसका असर बच्चों की schooling, spouse की employment और परिवार की financial planning पर भी पड़ सकता है। क्या हर H-1B worker को नौकरी जाते ही अमेरिका छोड़ना पड़ेगा? यह सबसे महत्वपूर्ण बात है। 60-day grace period खत्म करने का प्रस्ताव अगर लागू होता भी है, तो उसकी वास्तविक conditions अंतिम नियम में स्पष्ट होंगी। इसके अलावा H-1B worker की स्थिति उसके individual immigration circumstances, pending petitions, authorized stay और उपलब्ध दूसरे legal options पर निर्भर कर सकती है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि grace period हटते ही हर H-1B worker को नौकरी खत्म होने के अगले दिन अमेरिका छोड़ना पड़ेगा। क्या भारतीयों के लिए US में Jobs खत्म हो जाएंगी? ऐसा कहना भी सही नहीं होगा। अमेरिका की technology, healthcare, research, engineering और दूसरे specialized sectors में skilled professionals की मांग बनी हुई है। लेकिन नए नियमों से H-1B sponsorship की लागत और immigration uncertainty बढ़ सकती है। इसका सबसे बड़ा असर नए applicants और ऐसे professionals पर पड़ सकता है जिन्हें employer sponsorship की जरूरत है। H-1B Indians के लिए आगे क्या महत्वपूर्ण होगा? भारतीय H-1B professionals को आने वाले समय में immigration policy में होने वाले बदलावों पर नजर रखनी होगी। खासकर ये चार चीजें महत्वपूर्ण रहेंगी: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Pakistan

Pakistan Hospital Fire: Islamabad के सरकारी अस्पताल में बड़ा हादसा, Newborns की मौत से दहला शहर

पाकिस्तान (Pakistan) की राजधानी इस्लामाबाद में बुधवार सुबह एक सरकारी अस्पताल में लगी आग ने हर किसी को झकझोर दिया। Pakistan Institute of Medical Sciences (PIMS) के एक वार्ड में अचानक आग भड़क उठी। इस हादसे में कई नवजात बच्चों की जान चली गई, जबकि रेस्क्यू टीम सिर्फ एक बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल सकी। मृतकों की संख्या को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में थोड़ा अंतर है। कुछ रिपोर्टों में 15 नवजातों की मौत की बात कही गई है, जबकि कुछ आधिकारिक शुरुआती जानकारियों में यह संख्या 14 बताई गई। घटना की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी। AC Compressor में धमाके के बाद फैली आग स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, आग अस्पताल के उस हिस्से में लगी जहां नवजात बच्चों को रखा गया था। शुरुआती जांच में AC Compressor में विस्फोट को आग की संभावित वजह माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि कंप्रेसर में खराबी के बाद अचानक आग भड़की और कुछ ही समय में पूरे वार्ड को अपनी चपेट में ले लिया। वार्ड में मौजूद नवजात बच्चों के लिए स्थिति बेहद गंभीर थी, क्योंकि इतनी कम उम्र के बच्चों को अपने दम पर सुरक्षित स्थान तक ले जाना संभव नहीं था। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक आग की अंतिम वजह की पुष्टि नहीं की है। इसके लिए विस्तृत जांच की जा रही है। सुबह-सुबह मची अफरा-तफरी जानकारी के मुताबिक, आग बुधवार सुबह करीब 6:45 से 7 बजे के बीच लगी। धुआं और आग फैलते ही अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। कर्मचारियों ने तुरंत फायर ब्रिगेड और रेस्क्यू टीम को सूचना दी। दमकलकर्मी मौके पर पहुंचे और आग बुझाने के साथ वार्ड में फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक नवजात को सुरक्षित बचा लिया गया। लेकिन बाकी बच्चों को बचाने की कोशिशें कामयाब नहीं हो सकीं। इस दर्दनाक हादसे ने अस्पताल में मौजूद परिवारों और कर्मचारियों को गहरे सदमे में डाल दिया। Fire Safety व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना के बाद अस्पताल की Fire Safety System को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। खासकर नवजात बच्चों के वार्ड में आग जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए कितनी तैयारी थी, इसकी जांच की जा रही है। अस्पतालों में नर्सरी और ICU जैसे संवेदनशील हिस्सों में छोटी सी तकनीकी खराबी भी बड़ा खतरा बन सकती है। ऐसे में Fire Alarm, Emergency Exit, बिजली और AC सिस्टम की नियमित जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। PM शहबाज शरीफ ने दिए जांच के आदेश हादसे पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दुख जताया है। उन्होंने घटना की जांच के निर्देश दिए हैं और यह पता लगाने को कहा है कि आग किन परिस्थितियों में लगी और इतनी तेजी से कैसे फैली। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि हादसे के समय अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी और रेस्क्यू के दौरान किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हादसे ने कई सवाल छोड़े PIMS में हुआ यह हादसा सिर्फ एक अस्पताल की घटना नहीं है, बल्कि इससे सरकारी अस्पतालों की Emergency Preparedness और Fire Safety पर भी बहस शुरू हो गई है। फिलहाल जांच एजेंसियां आग की वजह और जिम्मेदारी तय करने में जुटी हैं। मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट सामने आने के कारण आधिकारिक आंकड़े का इंतजार किया जा रहा है। एक तरफ अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर आए परिवारों पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा, वहीं इस हादसे ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया कि संवेदनशील मरीजों और खासकर नवजात बच्चों की सुरक्षा के लिए अस्पतालों में सुरक्षा मानकों की नियमित निगरानी कितनी जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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France

France Tornado Pomas में तूफान ने मचाई तबाही, घरों की छतें उड़ीं

France में सोमवार शाम मौसम ने अचानक करवट ली और कुछ ही मिनटों में Pomas गांव का नजारा बदल गया। तेज तूफान के बीच आए Tornado ने घरों की छतें उड़ा दीं, पेड़ गिरा दिए और कई इमारतों को नुकसान पहुंचाया। इस प्राकृतिक आपदा में 41 लोगों के घायल होने की खबर है, जबकि करीब 300 घरों को नुकसान पहुंचा है। मलबे और टूटे-फूटे सामान से सड़कों के भर जाने के बाद स्थानीय प्रशासन को राहत और बचाव अभियान तेज करना पड़ा। कई परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। अचानक आया Tornado, लोगों में मची दहशत Aude क्षेत्र के Pomas और आसपास के इलाकों में सोमवार शाम तेज हवाओं के साथ मौसम बिगड़ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ ही समय में हवा इतनी तेज हो गई कि लोगों को घरों के अंदर सुरक्षित जगह तलाशनी पड़ी। Tornado के गुजरने के बाद कई मकानों की छतों और खिड़कियों को नुकसान पहुंचा। गांव की गलियों में पेड़ और मलबा बिखरा दिखाई दिया। प्रभावित इलाकों में प्रशासन और Emergency Services की टीमें पहुंचीं और नुकसान का जायजा लेना शुरू किया। 41 लोग घायल, कई अस्पताल में भर्ती इस घटना में 41 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। इनमें से कुछ लोगों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। राहत टीमों ने प्रभावित इलाकों में जाकर लोगों की मदद की और क्षतिग्रस्त इमारतों की सुरक्षा जांच शुरू की। प्रशासन ने लोगों से अपील की कि वे क्षतिग्रस्त मकानों में बिना जांच के वापस न जाएं। कुछ परिवारों के लिए अस्थायी राहत केंद्रों की व्यवस्था भी की गई। 300 घरों को नुकसान, कई छतें उड़ीं Tornado का सबसे ज्यादा असर मकानों पर दिखाई दिया। करीब 300 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं। कई घरों की छतों को नुकसान पहुंचा, जबकि खिड़कियां और बाहरी हिस्से भी टूट गए। स्थानीय लोगों के लिए यह अनुभव बेहद डरावना रहा। कई परिवारों ने बताया कि उन्हें कुछ ही मिनटों में समझ नहीं आया कि अचानक इतनी तेज हवा कहां से आ गई। 117 kmph तक पहुंची हवा की रफ्तार मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक आसपास के क्षेत्र में 117 kmph तक की तेज हवाएं दर्ज की गईं। हालांकि, इस आंकड़े को सीधे Tornado की स्पीड बताना सही नहीं होगा। यह आसपास के इलाके में दर्ज तेज हवा की गति है। दक्षिणी फ्रांस में पहले से ही खराब मौसम को लेकर चेतावनी जारी थी। तेज बारिश, गरज-चमक और आंधी ने हालात को और मुश्किल बना दिया। बिजली और सड़क व्यवस्था प्रभावित तूफान के कारण बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। कई इलाकों में पेड़ और मलबा सड़कों पर गिरने से यातायात बाधित हुआ। Emergency teams को रास्ते साफ करने और बिजली व्यवस्था बहाल करने के लिए काम करना पड़ा। खराब मौसम का असर Road और Rail Services पर भी पड़ा। कई जगहों पर यातायात धीमा हुआ और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। Flight Services पर भी पड़ा असर फ्रांस के कई हिस्सों में खराब मौसम के कारण Flight Operations भी प्रभावित हुए। कुछ उड़ानों में देरी हुई, जबकि कुछ सेवाओं को रद्द या प्रभावित करना पड़ा। यात्रियों को एयरपोर्ट जाने से पहले अपनी Flight Status जांचने की सलाह दी गई। यानी Tornado और Storm का असर केवल एक गांव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि Transport Network पर भी इसका असर दिखाई दिया। Vuelta a España पर भी मौसम का असर खराब मौसम का असर खेल आयोजनों पर भी पड़ा। Vuelta a España Cycling Race के तीसरे चरण को सुरक्षा कारणों से रोकना पड़ा। तेज बारिश और ओलावृष्टि के बाद आयोजकों ने खिलाड़ियों की सुरक्षा को देखते हुए रेस को रोकने का फैसला किया। राहत कार्य जारी, सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिश फिलहाल प्रशासन प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य में जुटा है। क्षतिग्रस्त मकानों की जांच की जा रही है और सड़कों से मलबा हटाया जा रहा है। Pomas के लोगों के लिए यह शाम लंबे समय तक याद रहने वाली है। कुछ ही मिनटों में तेज हवाओं ने जिस तरह घरों और आसपास के इलाके को प्रभावित किया, उसने पूरे क्षेत्र को हिला दिया। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित परिवारों को सुरक्षित जगह उपलब्ध कराना और बिजली, सड़क व परिवहन व्यवस्था को जल्द से जल्द सामान्य करना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Editor's Picks

Vishwas Sarang

Vishwas Sarang को बहनों का बेशुमार प्यार, Narela Rakshabandhan Mahotsav में बना नया उत्साह

नरेला विधानसभा क्षेत्र में चल रहे Rakshabandhan Mahotsav 2026 में रविवार को भाई-बहन के रिश्ते की खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। वार्ड नंबर 36, 37 और 70 में आयोजित कार्यक्रम के पांचवें दिन 24 हजार 604 बहनों ने मंत्री Vishwas Sarang को रक्षासूत्र बांधा। बहनों ने राखी बांधकर उनके प्रति स्नेह और आशीर्वाद जताया। कार्यक्रम में पहुंचते ही मंत्री विश्वास सारंग का स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। ढोल-ताशों और DJ की गूंज के बीच उन्हें बग्गी से मुख्य कार्यक्रम स्थल तक ले जाया गया। इस दौरान आतिशबाजी भी हुई। मंच पर पहुंचने के बाद सारंग ने बहनों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। बहनों के प्यार को बताया अपनी ताकत रक्षाबंधन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वास सारंग ने कहा कि रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच विश्वास, स्नेह और अपनत्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हर साल बड़ी संख्या में बहनों का प्यार और आशीर्वाद मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। कार्यक्रम में पहुंचीं बहनों से उन्होंने राखी बंधवाई और उनका आशीर्वाद लिया। सारंग ने कहा कि लाखों बहनों का स्नेह और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। चौथे दिन भी उमड़ा था बहनों का सैलाब नरेला रक्षाबंधन महोत्सव के चौथे दिन भी बड़ी संख्या में बहनें कार्यक्रम में पहुंची थीं। उस दिन 31,117 बहनों ने मंत्री विश्वास सारंग को रक्षासूत्र बांधा था। आयोजकों के अनुसार, पिछले साल के महोत्सव में कुल 1 लाख 84 हजार 632 बहनों ने रक्षासूत्र बांधा था। इस बार भी लगातार बढ़ रही भागीदारी को देखते हुए पिछले साल का आंकड़ा पार होने की उम्मीद जताई जा रही है। 7 सितंबर को इन दो वार्डों में होगा आयोजन नरेला रक्षाबंधन महोत्सव का अगला चरण 7 सितंबर 2026 को होगा। इस दिन दो वार्डों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में भी बड़ी संख्या में बहनों के शामिल होने की उम्मीद है। महोत्सव के जरिए रक्षाबंधन के पारंपरिक रिश्ते को सामाजिक जुड़ाव और भाईचारे के भाव से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। नरेला क्षेत्र में लगातार कई दिनों से चल रहे इस आयोजन में बहनों की बड़ी भागीदारी देखने को मिल रही है। पांचवें दिन 24,604 रक्षासूत्र बांधे जाने के साथ महोत्सव का उत्साह और बढ़ गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CM रेखा गुप्ता

Satya Niketan हादसे पर CM रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला, Deputy Commissioner समेत 5 Suspend

दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। पांच मंजिला इमारत के अचानक गिरने से अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे के बाद CM रेखा गुप्ता ने जिम्मेदारी तय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। MCD के साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत 5 अधिकारियों को Suspend कर दिया गया है। सरकार के इस एक्शन के बाद नगर निगम के कामकाज और इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हादसे के बाद MCD में बड़ा Action सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद MCD ने पांच अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। इनमें साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर सहित इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े अधिकारी शामिल हैं। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि इमारत की हालत को लेकर पहले कोई शिकायत या नोटिस जारी हुआ था या नहीं और निर्माण या मरम्मत के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं। PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी इमारत बताया जा रहा है कि जिस बिल्डिंग का हिस्सा ढहा, उसका इस्तेमाल PG accommodation के तौर पर किया जा रहा था। हादसे के समय वहां कई लोग मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इमारत गिरते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। धूल का गुबार उठ गया और लोग मदद के लिए मौके पर पहुंचने लगे। इसके बाद दिल्ली फायर सर्विस, NDRF और अन्य बचाव दलों ने मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। 7 लोगों की मौत, कई घायल रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे से कई लोगों को बाहर निकाला गया। हादसे में अब तक 7 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हादसे के बाद आसपास के लोगों में भी डर का माहौल है। स्थानीय स्तर पर दूसरी पुरानी और कमजोर इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। Building Owner भी पुलिस की गिरफ्त में मामले में पुलिस ने बिल्डिंग के मालिक हरिराम के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस ने उसकी तलाश के लिए कई टीमें लगाई थीं। बाद में उसे भिवाड़ी से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई। पुलिस अब हादसे से जुड़े दस्तावेज, बिल्डिंग की स्थिति और निर्माण या मरम्मत से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे और लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। आसपास की इमारतों की भी जांच सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने आसपास की इमारतों की स्थिति को लेकर भी जांच शुरू की है। अधिकारियों की नजर खास तौर पर उन भवनों पर है जो पुराने हैं या जिनमें निर्माण और मरम्मत का काम चल रहा है। इस घटना ने दिल्ली में old buildings, PG और construction safety को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर इमारत में पहले से कोई खामी थी, तो उसे समय रहते क्यों नहीं रोका गया? सरकार के Action से उठे कई सवाल MCD के पांच अधिकारियों का निलंबन सरकार की ओर से उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, असली तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। सत्य निकेतन की इस घटना ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच में हादसे की असली वजह क्या सामने आती है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CM House

CM House March पर Police का पहरा, Hamidia में Intern Doctors से धक्का-मुक्की

अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टर सोमवार को मुख्यमंत्री आवास (CM House) की ओर बढ़ रहे थे। लेकिन हमीदिया अस्पताल के पास पुलिस ने उनका रास्ता रोक दिया। डॉक्टरों को आगे जाने से रोकने के लिए पुलिस ने आसपास के रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी। इस दौरान डॉक्टरों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। प्रदर्शन को देखते हुए हमीदिया अस्पताल परिसर और आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए मौके पर Water Cannon भी तैयार रखा गया। CM House की तरफ मार्च करना चाहते थे डॉक्टर इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। इसी सिलसिले में डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने का फैसला किया। डॉक्टरों का समूह हमीदिया अस्पताल से आगे बढ़ने लगा तो पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। पुलिस की Barricading के बाद डॉक्टरों ने मौके पर नारेबाजी शुरू कर दी। आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान से आगे नहीं जाने के लिए समझाती रही। चारों तरफ से रास्ते किए गए बंद प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हमीदिया के आसपास कई रास्तों को बंद कर दिया। बैरिकेड लगाकर आवाजाही को नियंत्रित किया गया। मौके पर अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की गई, ताकि भीड़ को संभाला जा सके। Water Cannon की मौजूदगी से साफ था कि प्रशासन किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी में था। हालांकि, डॉक्टरों का प्रदर्शन अपनी मांगों को लेकर जारी रहा। मांगों पर सरकार से जवाब चाहते हैं Intern Doctors प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि वे अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। CM House तक मार्च के जरिए उनका उद्देश्य सीधे सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचना था। फिलहाल पुलिस ने डॉक्टरों को मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने से रोक दिया है। हमीदिया अस्पताल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और स्थिति पर पुलिस लगातार नजर बनाए हुए है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा डॉक्टरों की मांगों और सरकार की ओर से संभावित बातचीत को लेकर है। अब देखना होगा कि प्रदर्शन के बाद प्रशासन और इंटर्न डॉक्टरों के बीच क्या समाधान निकलता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold

Gold Rate Today: सोने की कीमत ₹2409 गिरी, चांदी भी ₹3967 सस्ती

सोना खरीदने वालों के लिए सोमवार को बाजार से थोड़ी राहत की खबर आई। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोने (Gold) और चांदी (Silver) दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। आपके दिए बाजार आंकड़ों के मुताबिक सोना करीब ₹2,409 और चांदी करीब ₹3,967 सस्ती हुई है। इसके बाद 10 ग्राम सोने का भाव करीब ₹1.52 लाख, जबकि एक किलो चांदी करीब ₹2.35 लाख के आसपास पहुंच गई। हालांकि, अलग-अलग बाजार, शुद्धता और कारोबार के समय के हिसाब से रेट में अंतर हो सकता है। सोमवार को एक अन्य बाजार रिपोर्ट में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,52,590 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,36,240 प्रति किलो बताया गया। सोने के भाव में फिर आई नरमी पिछले कुछ समय से रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास कारोबार कर रहा Gold सोमवार को दबाव में नजर आया। घरेलू बाजार में भी इसकी कीमत में कमजोरी देखने को मिली। MCX पर अक्टूबर गोल्ड फ्यूचर्स में भी गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत इससे कम है। अगर आप ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं तो ध्यान रखें कि दुकान पर मिलने वाला अंतिम रेट बाजार भाव से अलग हो सकता है। Silver Price Today: चांदी भी हुई सस्ती सोने के साथ चांदी में भी कमजोरी रही। चांदी करीब ₹3,967 प्रति किलो सस्ती होने के बाद लगभग ₹2.35 लाख प्रति किलो के स्तर पर आ गई है। हालांकि, सोमवार के अलग-अलग बाजार अपडेट में चांदी का भाव करीब ₹2.36 लाख प्रति किलो भी बताया गया है। इससे साफ है कि कारोबार के समय के साथ कीमतों में बदलाव हो रहा है। आखिर क्यों गिर रहे हैं सोना और चांदी? कीमती धातुओं में इस गिरावट का कनेक्शन सीधे ग्लोबल मार्केट से जुड़ा है। अमेरिका के रोजगार आंकड़े उम्मीद से मजबूत रहने के बाद वहां Federal Reserve की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें बदली हैं। मजबूत अमेरिकी जॉब डेटा के बाद सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना को लेकर दांव बढ़े हैं। इसका असर सोने पर पड़ा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में Spot Gold करीब 0.7% नीचे आया। वहीं Silver में भी लगभग 1% की गिरावट दर्ज की गई। अब आगे क्या होगा? अब बाजार की नजर अमेरिका से आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर है। इस सप्ताह PPI और CPI जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े जारी होने हैं। इनसे Federal Reserve की अगली ब्याज दर नीति को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में Gold और Silver में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। निवेशकों के साथ-साथ शादी या त्योहार के लिए खरीदारी करने वाले लोगों की भी बाजार पर नजर बनी हुई है। Gold खरीदते समय सिर्फ भाव न देखें अगर आप आज सोना खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो सिर्फ 10 ग्राम का बाजार भाव देखकर फैसला न लें। 22K या 24K purity, GST, making charges और ज्वेलर के अन्य शुल्क अंतिम कीमत को बदल सकते हैं। अलग-अलग शहरों और ज्वेलर्स के बीच भी रेट में अंतर हो सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले अपने स्थानीय ज्वेलर से उसी समय का ताजा रेट जरूर पता करें। बाजार में तेजी से बदलाव होने के कारण सुबह और शाम के भाव में भी अंतर देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Sagar

Sagar में जहरीली शराब का कहर: 19 मौत, 112 मरीज भर्ती; Liquor Network पर पुलिस का शिकंजा

मध्य प्रदेश के सागर (Sagar) जिले में जहरीली शराब ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। शराब पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने का सिलसिला शुरू हुआ और देखते ही देखते अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ती चली गई। अब तक 19 लोगों की मौत की बात सामने आई है, जबकि 112 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती बताए जा रहे हैं। मृतकों में पिता-पुत्र के शामिल होने की जानकारी ने इस घटना को और दर्दनाक बना दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। पुलिस ने लाइसेंसी शराब ठेकेदारों समेत 30 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। इनमें से 10 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। अधिकारियों की नजर अब उस पूरे नेटवर्क पर है, जिसके जरिए कथित तौर पर मिलावटी या जहरीली शराब लोगों तक पहुंची। शराब पीने के बाद बिगड़ी लोगों की तबीयत जानकारी के मुताबिक, सागर जिले के बंडा क्षेत्र में कई लोगों ने शराब का सेवन किया था। इसके बाद एक के बाद एक लोगों की तबीयत खराब होने लगी। कुछ लोगों को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया। स्थानीय स्तर पर इलाज के बाद गंभीर मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया। अस्पतालों में अचानक मरीजों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया। प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीमों को भेजकर लोगों की जांच की जा रही है। प्रशासन यह भी पता लगाने में जुटा है कि कितने लोगों ने संदिग्ध शराब का सेवन किया था। 112 मरीजों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जहरीली शराब की आशंका के बाद अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या लगातार चिंता बढ़ा रही है। 112 लोगों के इलाज की जानकारी सामने आई है। इनमें कुछ मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में पहुंचकर स्थिति पर नजर रख रही हैं। अधिकारियों का फोकस इस बात पर है कि संदिग्ध शराब पीने वाले किसी व्यक्ति की हालत बिगड़ने पर उसे समय रहते अस्पताल पहुंचाया जा सके। पिता-पुत्र की मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ इस हादसे में पिता-पुत्र की मौत की खबर ने स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है। एक ही परिवार के दो सदस्यों की जान जाने से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना के बाद प्रभावित इलाकों में मातम का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि शराब की एक बोतल इतनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है। अब लोगों में अवैध और संदिग्ध शराब की बिक्री को लेकर डर भी है और गुस्सा भी। 30 नामजद आरोपियों पर FIR, 10 गिरफ्तार पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए 30 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। इनमें लाइसेंसी शराब कारोबार से जुड़े लोगों के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शराब की सप्लाई कहां से हुई और इसे किन लोगों तक पहुंचाया गया। अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी है। पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी है। जांच में जिस किसी की भूमिका सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है। लाइसेंसी ठेकेदारों की भूमिका भी जांच के घेरे में मामले में लाइसेंसी शराब ठेकेदारों के नाम सामने आने के बाद आबकारी विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसियां यह पता कर रही हैं कि यदि शराब की बिक्री वैध दुकानों से हुई थी, तो उसमें मिलावट कैसे पहुंची। अधिकारियों की जिम्मेदारी और संभावित लापरवाही की भी जांच की जा रही है। प्रशासन की कोशिश है कि शराब के स्रोत से लेकर इसकी बिक्री तक पूरी चेन का पता लगाया जाए। जहरीली शराब की सप्लाई का नेटवर्क खंगाल रही पुलिस पुलिस को शक है कि इस मामले के पीछे सिर्फ कुछ स्थानीय लोगों का हाथ नहीं, बल्कि शराब की सप्लाई से जुड़ा बड़ा नेटवर्क भी हो सकता है। जांच एजेंसियां शराब की बोतल, लेबल और सप्लाई चैन से जुड़े हर पहलू की जांच कर रही हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जहरीली शराब लोगों तक कैसे पहुंची और इस लापरवाही के पीछे कौन जिम्मेदार है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है। प्रशासन की नजर अब हर कड़ी पर सागर की इस घटना ने अवैध और मिलावटी शराब के कारोबार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग भी प्रभावित लोगों की निगरानी कर रहा है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल परिवार अपनों को खोने के दर्द में हैं और अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजन उनके जल्द ठीक होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगा कि इस जहरीली शराब की असली सप्लाई कहां से हुई और इस पूरे मामले में किसकी कितनी भूमिका थी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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