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Bangladesh

Bangladesh President Election: 11 दलों से मुकाबला, फिर भी BNP की जीत तय मानी जा रही

बांग्लादेश (Bangladesh) की राजनीति में आज का दिन खास है। देश में करीब 35 साल बाद राष्ट्रपति पद के लिए मुकाबले वाला चुनाव हो रहा है। गुरुवार, 20 अगस्त को संसद में सांसद नए राष्ट्रपति के लिए वोट डालेंगे। चुनाव में सत्तारूढ़ Bangladesh Nationalist Party (BNP) के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर और 11 दलों के गठबंधन के उम्मीदवार ओली अहमद आमने-सामने हैं। हालांकि मुकाबला दो उम्मीदवारों के बीच है, लेकिन संसद में सीटों का गणित BNP के पक्ष में है। यही वजह है कि मिर्जा फखरुल की जीत को लगभग तय माना जा रहा है। 35 साल बाद क्यों खास है Presidential Election? बांग्लादेश में राष्ट्रपति का चुनाव आम जनता सीधे वोट डालकर नहीं करती। यहां संसद सदस्य राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। 1991 के बाद लंबे समय तक राष्ट्रपति पद के लिए केवल एक उम्मीदवार मैदान में रहा और चुनाव निर्विरोध होता रहा। इस बार पहली बार लंबे अंतराल के बाद दो उम्मीदवारों के बीच चुनाव हो रहा है। इसलिए नतीजे से ज्यादा चर्चा इस बात की है कि बांग्लादेश की राजनीति में यह मुकाबला किस तरह का संदेश देता है। BNP के पास मजबूत बहुमत राष्ट्रपति चुनाव में कुल 349 सांसद वोट डालने के पात्र हैं। इनमें BNP के पास 247 सांसद हैं। दूसरी तरफ जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11-दलीय गठबंधन के पास करीब 81 सांसद बताए जा रहे हैं। सीटों के इस अंतर को देखते हुए BNP उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर की जीत की संभावना काफी मजबूत है। विपक्षी गठबंधन ने ओली अहमद को उम्मीदवार बनाकर चुनाव को औपचारिक मुकाबले से आगे बढ़ाने की कोशिश की है। कौन हैं दोनों उम्मीदवार? BNP ने अपने महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को राष्ट्रपति पद के लिए मैदान में उतारा है। वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और संसद सदस्य भी हैं। खास बात यह है कि उम्मीदवार होने के बावजूद वह सांसद होने के कारण राष्ट्रपति चुनाव में अपना वोट भी डाल सकते हैं। वहीं 11-दलीय गठबंधन ने ओली अहमद को उम्मीदवार बनाया है। वह लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी यानी LDP के नेता और पूर्व सैन्य अधिकारी हैं। हालांकि वह मौजूदा संसद के सदस्य नहीं हैं, इसलिए राष्ट्रपति चुनाव में वोट नहीं डाल सकते। आज संसद में होगा मतदान चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार मतदान दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक संसद परिसर में होगा। मतदान पूरा होने के बाद वोटों की गिनती की जाएगी और परिणाम घोषित किया जाएगा। संविधान के तहत बांग्लादेश में राष्ट्रपति का चुनाव सांसद करते हैं। ऐसे में इस चुनाव में जनता की सीधी भूमिका नहीं है। पूर्व राष्ट्रपति के इस्तीफे के बाद चुनाव राष्ट्रपति पद पर यह चुनाव पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद हो रहा है। उनके पद छोड़ने के बाद संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नए राष्ट्रपति के चुनाव की तैयारी शुरू हुई। अब सबकी नजरें संसद के मतदान और उसके बाद आने वाले आधिकारिक परिणाम पर हैं। हालांकि राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए BNP उम्मीदवार का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। शुक्रवार को हो सकता है नए राष्ट्रपति का Oath चुनाव के बाद नए राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण की तैयारी भी की जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक नए राष्ट्रपति का Oath Ceremony शुक्रवार को बंगभवन में आयोजित किया जा सकता है। Bangladesh Election पर क्यों है सबकी नजर? यह चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सिर्फ राष्ट्रपति चुनने की संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि 35 साल बाद हुआ एक वास्तविक Presidential Contest भी है। एक तरफ संसद में मजबूत बहुमत वाली BNP है, तो दूसरी ओर 11 दलों का गठबंधन अपने उम्मीदवार के साथ मैदान में है। नतीजा भले ही पहले से काफी हद तक साफ दिखाई दे रहा हो, लेकिन बांग्लादेश की राजनीति में इस चुनाव की अहमियत लंबे समय तक चर्चा में रह सकती है।
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Iran Army

Iran Army का बड़ा ऐलान: अमेरिकी सैनिक पर ₹28 लाख का इनाम, हथियार Museum में रखने की तैयारी

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तेहरान की ओर से एक ऐसा ऐलान सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी सेना (Iran Army) ने किसी अमेरिकी सैनिक को पकड़ने या उसकी मौत के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को 30 हजार डॉलर यानी करीब ₹28 लाख का इनाम देने की बात कही है। खास बात यह है कि अगर यह काम किसी महिला के जरिए किया जाता है तो इनाम की राशि दोगुनी बताई गई है। ईरानी सेना प्रमुख आमिर हातमी के हवाले से सामने आई रिपोर्ट में कहा गया है कि इस योजना को लेकर लोगों की तरफ से बड़ी संख्या में अनुरोध मिले थे। इसके बाद अमेरिकी सैनिकों से जुड़े ऐसे मामलों में इनाम देने की घोषणा की गई। Women के लिए इनाम होगा दोगुना ईरान के इस ऐलान में महिलाओं के लिए अलग इनाम की बात ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, किसी अमेरिकी सैनिक को पकड़ने या मारने में शामिल महिला को सामान्य 30 हजार डॉलर के बजाय 60 हजार डॉलर तक का Reward दिया जा सकता है। हालांकि, इस घोषणा की व्यावहारिक परिस्थितियों और इसके लागू होने के तरीके को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। हथियार को Museum में रखने की भी बात ईरानी सेना के बयान से जुड़ी रिपोर्टों में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। बताया गया है कि अमेरिकी सैनिक की मौत में इस्तेमाल किए गए हथियार को भविष्य में बनाए जाने वाले एक Museum में सुरक्षित रखने की योजना है। ईरान ने इस कदम को अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के खिलाफ अपने कड़े रुख के रूप में पेश किया है। हालांकि, इस म्यूजियम की स्थापना और हथियार को सुरक्षित रखने की योजना के बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। क्यों बढ़ा हुआ है Iran और America के बीच तनाव? अमेरिका और ईरान के रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच लगातार मतभेद देखने को मिले हैं। इन सबके बीच Strait of Hormuz यानी होर्मुज जलडमरूमध्य भी बेहद अहम मुद्दा है। दुनिया के महत्वपूर्ण तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन जाता है। Iran के बयान से बढ़ी चिंता अमेरिकी सैनिकों को लेकर घोषित यह Reward ऐसे समय आया है जब पहले से ही दोनों देशों के बीच तनाव का माहौल है। यही वजह है कि ईरान के इस बयान को सिर्फ एक इनाम की घोषणा के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे Washington के खिलाफ तेहरान के सख्त संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आने वाले दिनों में Iran-US Relations किस दिशा में जाते हैं। अगर दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump

Trump का Hormuz Plan! Iran ने किया पलटवार, बोला- पोस्ट से नहीं मिलती किसी इलाके की संप्रभुता

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब Strait of Hormuz तक पहुंच गया है। Trump के एक बयान ने इस विवाद को और हवा दे दी है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ जीत के बाद अमेरिका Hormuz Strait को अमेरिकी क्षेत्र घोषित कर सकता है। इसके जवाब में ईरान ने भी दो टूक शब्दों में अपना रुख साफ कर दिया। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर पोस्ट करने भर से किसी इलाके पर कब्जा नहीं हो जाता। उन्होंने जोर देकर कहा कि होर्मुज ईरान का था, ईरान का है और ईरान का ही रहेगा। Trump के बयान से बढ़ा Hormuz विवाद डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे टकराव के बीच होर्मुज को लेकर बड़ा दावा किया। उनके बयान में यह संकेत था कि अमेरिका इस रणनीतिक समुद्री रास्ते पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य की अहमियत को देखते हुए ट्रंप का बयान सामान्य राजनीतिक बयान से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह समुद्री मार्ग Persian Gulf और Gulf of Oman के बीच कड़ी का काम करता है और दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। Iran ने दिया सीधा जवाब ट्रंप के बयान के बाद ईरान ने प्रतिक्रिया देने में देर नहीं की। ईरानी उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने सोशल मीडिया के जरिए अमेरिका के दावे को चुनौती दी। ईरान का कहना है कि किसी ट्वीट, बयान या सैन्य शक्ति के प्रदर्शन से Hormuz पर संप्रभुता हासिल नहीं की जा सकती। तेहरान लगातार यह संदेश दे रहा है कि वह इस समुद्री मार्ग को लेकर अपने दावे से पीछे हटने वाला नहीं है। यही वजह है कि अब अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी केवल राजनीतिक मंच तक सीमित नहीं दिख रही। दोनों देशों के रुख से यह साफ है कि Hormuz आने वाले दिनों में भी विवाद का बड़ा केंद्र बना रह सकता है। क्यों इतना महत्वपूर्ण है Strait of Hormuz? दुनिया के लिए Hormuz Strait की अहमियत समझना जरूरी है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण energy routes में से एक है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में crude oil और अन्य ऊर्जा उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचते हैं। ऐसे में अगर यहां जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित होती है, तो इसका असर सिर्फ Middle East तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है और इसका प्रभाव दुनिया के कई देशों में पेट्रोल-डीजल से लेकर महंगाई तक पर पड़ सकता है। भारत जैसे बड़े energy importer के लिए भी Hormuz की स्थिति खास तौर पर महत्वपूर्ण है। खाड़ी क्षेत्र में किसी बड़े व्यवधान का असर वैश्विक oil market के जरिए भारत पर भी पड़ सकता है। US-Iran tension का नया मोर्चा अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही तनाव काफी ज्यादा है। अब Hormuz को लेकर आए बयानों ने इस टकराव में एक नया मोर्चा खोल दिया है। अमेरिका की ओर से जहां दबाव और नियंत्रण की भाषा सुनाई दे रही है, वहीं ईरान अपने अधिकार को लेकर सख्त रुख अपना रहा है। दोनों पक्षों की बयानबाजी से फिलहाल तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता दिखाई दे रहा है। दुनिया की नजर अब Hormuz पर Trump के बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका आगे क्या कदम उठाता है और ईरान उसका किस तरह जवाब देता है। Hormuz की रणनीतिक अहमियत इतनी बड़ी है कि यहां होने वाला कोई भी बड़ा घटनाक्रम international oil market और global trade को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल ईरान ने साफ कर दिया है कि वह Hormuz Strait पर अमेरिकी दावे को स्वीकार नहीं करता। दूसरी ओर, ट्रंप का बयान आने वाले दिनों में इस विवाद को किस दिशा में ले जाता है, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। Hormuz विवाद अब सिर्फ अमेरिका और ईरान का मामला नहीं रह गया है। यह global energy security से जुड़ा मुद्दा बन चुका है, जिसका असर भारत समेत दुनिया के कई देशों पर पड़ सकता है।
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Indonesia

Indonesia में Earthquake का बड़ा झटका: 7.7 तीव्रता, Tsunami Alert के बाद सुरक्षित जगह पहुंचे लोग

इंडोनेशिया (Indonesia) में शनिवार, 15 अगस्त 2026 की सुबह आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने Flores Island और आसपास के इलाकों में दहशत फैला दी। जोरदार झटकों के बाद अधिकारियों ने Tsunami Warning जारी की, जिसके चलते तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत ऊंचे स्थानों की ओर जाने की सलाह दी गई। बाद में समुद्र के स्तर में बड़ा बदलाव नहीं मिलने पर सुनामी चेतावनी हटा दी गई। इस भूकंप में कम से कम दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। सुबह-सुबह आया जोरदार झटका US Geological Survey (USGS) के मुताबिक भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 5:58 बजे आया। इसका केंद्र Flores Island के उत्तरी तट से दूर समुद्र में, Ende शहर से करीब 68 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था। भूकंप की गहराई करीब 10 किलोमीटर बताई गई, जिससे जमीन पर झटकों का असर काफी तेज महसूस हुआ। झटके इतने तेज थे कि कई जगह लोग घबराकर घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। कुछ इलाकों में अस्पतालों से मरीजों को भी खुले और सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। Tsunami Alert से मची अफरा-तफरी समुद्र के नीचे आए इस शक्तिशाली भूकंप के बाद इंडोनेशियाई अधिकारियों ने कई तटीय इलाकों के लिए सुनामी चेतावनी जारी की। लोगों को समुद्र तट और निचले इलाकों से दूर रहने तथा ऊंचे स्थानों पर जाने को कहा गया। चेतावनी के बाद Flores के कई हिस्सों में लोगों ने तेजी से सुरक्षित जगहों का रुख किया। हालांकि, समुद्र के स्तर की निगरानी के बाद अधिकारियों ने पाया कि बड़े पैमाने पर सुनामी का खतरा नहीं है। इसके बाद करीब तीन घंटे के भीतर Tsunami Warning हटा दी गई। भूकंप के बाद लगातार Aftershocks मुख्य भूकंप के बाद कई आफ्टरशॉक्स भी आए। रिपोर्टों के अनुसार शुरुआती अवधि में 5.9, 5.6 और 6.1 तीव्रता के झटके दर्ज किए गए। लगातार झटकों के कारण लोगों में डर बना रहा और कई परिवार कुछ समय तक घरों में लौटने से बचते रहे। दो लोगों की मौत, इमारतों को नुकसान इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी के मुताबिक भूकंप में कम से कम दो लोगों की मौत हुई है। प्रभावित इलाकों में घरों और दूसरी इमारतों को नुकसान पहुंचने की खबर है। Maumere क्षेत्र में भी कुछ संरचनाओं के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है। राहत और बचाव टीमें प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन कर रही हैं। Indonesia में क्यों आते हैं इतने भूकंप? इंडोनेशिया Pacific Ring of Fire में स्थित है। यह इलाका कई सक्रिय टेक्टोनिक प्लेटों के संपर्क क्षेत्र में आता है, इसलिए यहां भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां अक्सर देखने को मिलती हैं। Flores में आए इस शक्तिशाली भूकंप ने एक बार फिर स्थानीय लोगों को सतर्क कर दिया है। फिलहाल प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों पर नजर रख रही हैं और आफ्टरशॉक्स के बीच स्थिति का आकलन किया जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Japan

Japan Weather चिबा में मूसलाधार बारिश से तबाही, 4 की मौत और 7 हजार यात्री हुए परेशान

जापान (Japan) के चिबा प्रीफेक्चर में गुरुवार को हुई रिकॉर्डतोड़ बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। कुछ इलाकों में महज एक घंटे में 115 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि चिबा शहर में 12 घंटे के भीतर 348 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई। इतनी तेज बारिश के कारण सड़कें और रेलवे लाइनें जलमग्न हो गईं, कई घरों में पानी घुस गया और बिजली आपूर्ति भी बाधित हुई। अधिकारियों के मुताबिक इस आपदा में कम से कम 4 लोगों की मौत हुई है और एक व्यक्ति लापता बताया गया है। एक घंटे में महीने भर जितनी बारिश बारिश की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चिबा में एक घंटे में 115 मिमी पानी बरसा। यह मात्रा आमतौर पर अगस्त के पूरे महीने में होने वाली बारिश के आसपास है। वहीं 12 घंटे में 348 मिमी बारिश ने पुराने रिकॉर्ड भी तोड़ दिए। मौसम विभाग के मुताबिक गर्म और नम हवा के ऊपर मौजूद ठंडी हवा के साथ मिलने से बेहद तेज बारिश की स्थिति बनी। पहली बार जारी हुई Level-5 की सबसे ऊंची चेतावनी हालात बिगड़ने पर Japan Meteorological Agency (JMA) ने चिबा के कई हिस्सों के लिए Level-5 की सबसे ऊंची भारी बारिश और भूस्खलन चेतावनी जारी की। रिपोर्टों के मुताबिक प्रीफेक्चर में इस स्तर की चेतावनी पहली बार जारी की गई। बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई और 4 लाख से ज्यादा लोगों के लिए evacuation orders/advisories जारी किए गए। Narita Airport पर 7 हजार यात्रियों की रात एयरपोर्ट में गुजरी भारी बारिश का सबसे बड़ा असर Transport Network पर पड़ा। बाढ़ के कारण कई ट्रेन सेवाएं रोक दी गईं और प्रमुख सड़कें भी प्रभावित हुईं। इसका सीधा असर Narita International Airport पर पड़ा, जहां करीब 7,000 यात्री रातभर फंसे रहे। यात्रियों के लिए एयरपोर्ट प्रशासन ने पानी, खाने-पीने का सामान, कंबल और sleeping bags उपलब्ध कराए। कुछ रेल सेवाएं शुक्रवार को सीमित रूप से दोबारा शुरू हुईं, जिससे यात्रियों को एयरपोर्ट से निकलने में थोड़ी राहत मिली। एयरपोर्ट खुद चालू रहा, हालांकि उड़ानों पर देरी का असर पड़ा। बिजली गुल, सड़कों पर सैलाब तेज बारिश के कारण चिबा और आसपास के इलाकों में हजारों घरों की बिजली चली गई। अलग-अलग समय पर बिजली कटौती से प्रभावित घरों की संख्या काफी बढ़ गई थी और शुक्रवार सुबह भी 22 हजार से ज्यादा घरों में बिजली आपूर्ति प्रभावित थी। कई इलाकों में पानी भरने के कारण वाहन सड़कों पर फंस गए और लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा। राहत और Rescue Operation जारी स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन ने राहत और बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा है। जापानी सेना के जवान भी राहत कार्य में लगाए गए हैं। बारिश की तीव्रता कम होने के बाद भी अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने को कहा है, क्योंकि जमीन में पानी भर जाने के कारण Flood और Landslide का खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। चिबा के गवर्नर तोशिहितो कुमागाई ने इस घटना को बेहद असामान्य बताया। उन्होंने कहा कि अपने लंबे आपदा प्रबंधन अनुभव के बावजूद उन्होंने ऐसी स्थिति पहले नहीं देखी थी। Japan Rain Disaster ने बढ़ाई चिंता जापान में इस समय छुट्टियों का व्यस्त दौर चल रहा है, इसलिए Transport Disruption का असर यात्रियों पर और ज्यादा पड़ा। रिकॉर्ड बारिश ने एक बार फिर दिखाया कि बेहद आधुनिक Infrastructure वाला देश भी अचानक होने वाली Extreme Weather घटनाओं के सामने बड़ी चुनौती का सामना कर सकता है। फिलहाल प्रशासन का फोकस प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने, बिजली और परिवहन व्यवस्था बहाल करने तथा बाढ़ और भूस्खलन के संभावित खतरे से निपटने पर है। मौसम विभाग ने भी लोगों को निचले इलाकों, नदियों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump

Trump Plane Change: ईरान को थी होटल की Floor तक जानकारी, Secret Service ने बदली रणनीति

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तुर्किए यात्रा के दौरान सुरक्षा को लेकर ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया अधिकारियों को जानकारी मिली थी कि ईरान को अंकारा में ट्रंप के ठहरने की जगह की सटीक जानकारी थी। यहां तक कि होटल की मंजिल के बारे में भी जानकारी होने की बात सामने आई। इसी इनपुट के बाद ट्रंप की वापसी से ठीक पहले उनकी यात्रा योजना बदल दी गई। सुरक्षा एजेंसियों ने ट्रंप को सार्वजनिक रूप से नजर आने वाले Air Force One से हटाकर दूसरे सैन्य विमान से रवाना किया। पूरी कार्रवाई इतनी गोपनीय रखी गई कि आखिरी समय तक इसकी भनक बाहर मौजूद लोगों को नहीं लगी। अचानक क्यों बदला गया ट्रंप का Plane? रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों को संभावित missile threat की जानकारी मिली थी। आशंका थी कि ट्रंप जिस विमान से यात्रा करने वाले हैं, उसे निशाना बनाया जा सकता है। ऐसे में Secret Service ने जोखिम लेने के बजाय तुरंत वैकल्पिक योजना पर काम किया। Trump को Air Force One से निकालकर C-32A सैन्य विमान में स्थानांतरित किया गया। इस बदलाव का मकसद राष्ट्रपति की वास्तविक यात्रा को सार्वजनिक नजरों से दूर रखना था। Air Force One को बनाया गया Decoy इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प हिस्सा Air Force One का इस्तेमाल था। ट्रंप के दूसरे विमान में जाने के बाद Air Force One को आगे रवाना किया गया। बाहर से देखने वालों के लिए यही संदेश था कि राष्ट्रपति उसी विमान में हैं। इस तरह Air Force One ने एक तरह से Decoy Plane की भूमिका निभाई। सुरक्षा के लिहाज से यह कदम संभावित खतरे को भ्रमित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। ईरान को कैसे मिली Trump की Location? इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि ईरान को ट्रंप की इतनी सटीक Location की जानकारी कैसे मिली। रिपोर्टों में कहा गया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को इस बात के संकेत मिले थे कि ईरानी पक्ष को ट्रंप के होटल और उनकी मंजिल तक की जानकारी थी। हालांकि, यह जानकारी ईरान तक किस माध्यम से पहुंची और इसके पीछे कौन सा Intelligence Source था, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इस दावे को फिलहाल उपलब्ध खुफिया रिपोर्टों और मीडिया रिपोर्ट्स के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए। Trump ने भी Plane बदलने की बात मानी मामला सामने आने के बाद ट्रंप ने खुद विमान बदले जाने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें दूसरे विमान से यात्रा करने की सलाह दी थी और उन्होंने अधिकारियों की बात मानी। यानी जिस बदलाव को शुरुआत में सामान्य यात्रा प्रक्रिया का हिस्सा माना जा सकता था, उसके पीछे सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता मौजूद थी। सुरक्षा एजेंसियों ने क्यों लिया इतना बड़ा फैसला? अमेरिकी राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही बेहद कड़ी रहती है। ऐसे में किसी संभावित missile threat या लोकेशन लीक जैसी सूचना को नजरअंदाज करना आसान नहीं था। इसी वजह से सुरक्षा एजेंसियों ने आखिरी समय में योजना बदलना बेहतर समझा। ट्रंप की वास्तविक Location को छिपाना और Air Force One को सामान्य तरीके से आगे भेजना इसी रणनीति का हिस्सा था। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सामने आया मामला Trump की सुरक्षा से जुड़ा यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पहले से चर्चा में है। यही वजह है कि इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप के विमान पर वास्तव में हमला करने की कोई ठोस योजना थी या नहीं। लेकिन इतना जरूर है कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने मिली जानकारी को गंभीर माना और राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए तुरंत कदम उठाया। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump ने माना- Iran के डर से बदलना पड़ा विमान

Trump ने माना- Iran के डर से बदलना पड़ा विमान

America के राष्ट्रपति Donald Trump ने माना है कि ईरान से संभावित हमले के खतरे को देखते हुए उन्हें अपना विमान बदलना पड़ा था। ट्रम्प के मुताबिक, अगर हमला होता तो निशाना एयरफोर्स वन भी बन सकता था। ट्रम्प ने बताया कि सुरक्षा कारणों से उन्हें एक विमान से दूसरे विमान तक पहुंचने के लिए बेहद गोपनीय तरीके का इस्तेमाल करना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, वह एक ट्रक में छिपकर दूसरे विमान तक पहुंचे, ताकि उनकी गतिविधि के बारे में किसी को जानकारी न मिल सके। ट्रम्प ने कहा कि उस समय सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को लेकर बेहद सतर्क थीं। ईरान की ओर से हमले की आशंका के बीच राष्ट्रपति की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। हमला होता तो एयरफोर्स वन भी निशाने पर ट्रम्प ने कहा कि अगर उस समय हमला किया जाता तो एयरफोर्स वन भी इसकी चपेट में आ सकता था। यही वजह थी कि उनकी यात्रा और विमान बदलने की पूरी प्रक्रिया को बेहद गोपनीय रखा गया। राष्ट्रपति की सुरक्षा में आमतौर पर कई स्तरों की व्यवस्था होती है, लेकिन इस घटना ने दिखाया कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा कितनी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ट्रक में छिपकर बदला विमान ट्रम्प के अनुसार, उन्हें एक विमान से दूसरे विमान तक ले जाने के दौरान ट्रक का इस्तेमाल किया गया। सुरक्षा कारणों से उन्हें उसमें छिपाकर ले जाया गया, ताकि उनकी लोकेशन का पता न चल सके। इस पूरे घटनाक्रम से यह भी साफ होता है कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर किस स्तर की सावधानी बरती जा रही थी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump

Trump Security Alert: ईरान के खतरे के बीच ट्रंप ने बदला Plane, ट्रक से पहुंचे दूसरे विमान तक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की हालिया यात्रा से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था ने सबको हैरान कर दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान से संभावित खतरे की आशंका के चलते ट्रंप को Air Force One से हटाकर दूसरे सैन्य विमान में ले जाया गया। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इस पूरे ऑपरेशन को बेहद गोपनीय रखा गया और ट्रंप को एक कैटरिंग ट्रक की आड़ में दूसरे विमान तक पहुंचाया गया। ट्रंप ने अब इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा है कि विमान बदलने का फैसला सुरक्षा अधिकारियों की सलाह पर लिया गया था। उनके मुताबिक, अगर किसी हमले का खतरा होता तो Air Force One भी निशाने पर आ सकता था। Air Force One से अचानक बदला गया प्लान रिपोर्टों के अनुसार, NATO समिट के बाद तुर्की से वापसी के दौरान ट्रंप को पहले Air Force One पर लाया गया था। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने आखिरी समय में प्लान बदल दिया। ट्रंप को एक कैटरिंग ट्रक के जरिए चुपचाप दूसरे सैन्य विमान तक ले जाया गया। इसके बाद वह C-32A विमान से रवाना हुए। वहीं Air Force One को भी तय योजना के मुताबिक उड़ाया गया, ताकि बाहर से देखने वालों को यही लगे कि राष्ट्रपति उसी विमान में हैं। इस पूरी रणनीति का मकसद ट्रंप की वास्तविक लोकेशन को छिपाना था। ईरान से खतरे की वजह से लिया गया फैसला अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच ट्रंप की सुरक्षा को लेकर एजेंसियां पहले से सतर्क थीं। रिपोर्टों में दावा किया गया कि ईरान से जुड़े संभावित खतरे को देखते हुए राष्ट्रपति के विमान को बदलने का फैसला किया गया। ट्रंप ने कहा कि उन्हें सुरक्षा टीम ने विमान बदलने की सलाह दी थी। उन्होंने खुद इस फैसले को लेकर ज्यादा चिंता नहीं जताई और कहा कि राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की बात मानना जरूरी है। ट्रंप बोले- दूसरा विमान भी खतरे से बाहर नहीं था Trump के बयान का एक और हिस्सा खास चर्चा में है। उन्होंने संकेत दिया कि जिस दूसरे विमान में उन्हें भेजा गया, वह भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं था। उनके मुताबिक, अगर कोई हमला होता तो Air Force One को निशाना बनाया जा सकता था। ऐसे में विमान बदलने की रणनीति का उद्देश्य राष्ट्रपति की लोकेशन को लेकर भ्रम पैदा करना था। यानी एक तरफ Air Force One आसमान में था और दूसरी तरफ ट्रंप दूसरे विमान से अपनी यात्रा कर रहे थे। पत्रकारों को भी नहीं थी पूरी जानकारी इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि Air Force One में मौजूद कई पत्रकारों और कर्मचारियों को भी शुरुआत में ट्रंप के विमान बदलने की जानकारी नहीं थी। उन्हें यही लगा कि राष्ट्रपति उनके साथ उसी विमान में सफर कर रहे हैं। बाद में जब ट्रंप के दूसरे विमान से रवाना होने की जानकारी सामने आई, तब पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ हुई। क्यों खास है यह मामला? अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा में अचानक रूट, समय या विमान बदलना कोई नई बात नहीं है। लेकिन इस बार जिस तरह Air Force One को संभावित decoy के तौर पर इस्तेमाल किया गया और ट्रंप को कैटरिंग ट्रक के जरिए दूसरे विमान तक पहुंचाया गया, उसने इस घटना को खास बना दिया है। इससे यह भी पता चलता है कि राष्ट्रपति की सुरक्षा के दौरान उनकी वास्तविक लोकेशन को छिपाने के लिए किस स्तर तक गोपनीय रणनीति अपनाई जा सकती है। सुरक्षा या बड़ा जोखिम? ट्रंप के विमान बदलने की खबर सामने आने के बाद अब सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। समर्थकों का मानना है कि संभावित खतरे की स्थिति में राष्ट्रपति की लोकेशन छिपाना जरूरी कदम था। वहीं सवाल यह भी उठ रहा है कि Air Force One में मौजूद अन्य लोगों को इस तरह के सुरक्षा बदलाव की जानकारी क्यों नहीं दी गई। फिलहाल इतना साफ है कि ईरान से संभावित खतरे के बीच ट्रंप की यात्रा के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने बेहद असामान्य कदम उठाया। Air Force One को decoy बनाकर राष्ट्रपति को दूसरे विमान से भेजने का यह ऑपरेशन अमेरिकी राष्ट्रपति सुरक्षा व्यवस्था के सबसे चर्चित घटनाक्रमों में शामिल हो गया है।
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Colombia

Colombia Earthquake: 7.4 तीव्रता के भूकंप से भारी तबाही, 132 की मौत, 570 घायल

दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया (Colombia) सोमवार को आए शक्तिशाली भूकंप से बुरी तरह हिल गया। पश्चिमी हिस्से में आए 7.4 magnitude के भूकंप ने कई शहरों में तबाही मचा दी। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक हादसे में 132 लोगों की मौत हुई है, जबकि 570 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव का काम अभी भी जारी है, इसलिए मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। भूकंप का असर इतना व्यापक रहा कि कई इलाकों में घर, अस्पताल, स्कूल और दूसरी इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं। शुरुआती आकलन के अनुसार 86 इमारतें पूरी तरह ढह गईं, जबकि 1,500 से ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचा है। कई जगह लोग मलबे में फंसे हुए हैं और बचाव दल लगातार उन्हें निकालने की कोशिश कर रहे हैं। पश्चिमी Colombia में सबसे ज्यादा तबाही भूकंप का केंद्र चोको क्षेत्र के सैन जोसे डेल पालमार के आसपास बताया गया है। इसके झटके कैली, पेरेइरा, क्विब्दो, मनीसालेस और आर्मेनिया जैसे शहरों में भी महसूस किए गए। रिपोर्टों के मुताबिक देश के 32 शहरों पर भूकंप का गंभीर असर पड़ा है। पांच विभागीय राजधानियों को रेड अलर्ट पर रखा गया है। भूकंप के झटके महसूस होते ही बड़ी संख्या में लोग घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। कई इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दूरदराज के इलाकों में सड़क और संचार व्यवस्था प्रभावित होने से राहत टीमों के लिए घटनास्थल तक पहुंचना भी चुनौती बन गया है। 1,500 से ज्यादा घरों को नुकसान भूकंप के बाद सामने आई तस्वीरों में कई इलाकों में इमारतों के मलबे में तब्दील होने की स्थिति दिखाई दी। 1,500 से ज्यादा घर प्रभावित हुए हैं, जबकि दर्जनों इमारतें पूरी तरह गिर गईं। कई स्कूल और अस्पताल भी नुकसान की चपेट में आए हैं। सबसे बड़ी चिंता उन लोगों को लेकर है जो अब भी मलबे के नीचे या क्षतिग्रस्त इमारतों के आसपास फंसे हो सकते हैं। राहतकर्मी और स्थानीय लोग मिलकर लगातार तलाश अभियान चला रहे हैं। Hospitals में बढ़ा दबाव, मरीज भी फंसे भूकंप ने स्वास्थ्य सेवाओं को भी प्रभावित किया है। कुछ अस्पतालों की इमारतों को नुकसान पहुंचा है और कई जगह बड़ी संख्या में घायल लोगों को इलाज के लिए लाया गया। कैली में अस्पताल से जुड़े हिस्सों में भी नुकसान की खबर सामने आई है। अचानक बढ़े मरीजों की संख्या के कारण मेडिकल टीमों पर भी दबाव बढ़ गया है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाएं और राहत सामग्री पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। सात Airports पर काम बंद भूकंप का असर सिर्फ जमीन पर नहीं, बल्कि air connectivity पर भी पड़ा है। नुकसान और सुरक्षा जांच के चलते सात एयरपोर्ट पर संचालन रोक दिया गया। इनमें कैली, पेरेइरा, मनीसालेस, क्विब्दो, आर्मेनिया, कार्टागो और बुएनावेंतुरा के एयरपोर्ट शामिल बताए गए हैं। एयरपोर्ट बंद होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। साथ ही राहत और बचाव टीमों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। Aftershocks ने बढ़ाई चिंता मुख्य भूकंप के बाद कई aftershocks भी महसूस किए गए। रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार रात तक करीब 21 आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए थे। इससे पहले से कमजोर हो चुकी इमारतों को लेकर चिंता और बढ़ गई है। प्रशासन ने लोगों से क्षतिग्रस्त इमारतों में वापस नहीं जाने और स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। Colombia में National Emergency घोषित हालात की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रपति अबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला ने राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया है। सरकार का पूरा ध्यान फिलहाल राहत और बचाव अभियान पर है। प्रभावित इलाकों में जरूरी संसाधन पहुंचाए जा रहे हैं और मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश जारी है। भूकंप के बाद कुछ शहरों में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर भरोसा नहीं करने और आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करने की अपील की है। International help के लिए आगे आए देश इस बड़ी प्राकृतिक आपदा के बाद कोलंबिया के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद भी सामने आई है। अमेरिका ने राहत और मानवीय सहायता के लिए 15.5 मिलियन डॉलर की मदद देने की घोषणा की है। इसके अलावा दूसरे देशों ने भी सहायता की पेशकश की है। फिलहाल कोलंबिया में राहत-बचाव अभियान युद्धस्तर पर चल रहा है। जैसे-जैसे दूरदराज के इलाकों से जानकारी सामने आएगी, नुकसान और हताहतों का आंकड़ा बदल सकता है। प्रशासन की सबसे बड़ी कोशिश यही है कि मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जाए और प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाई जाए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump Secret Flight: ईरान के डर से Air Force One बना Decoy, Catering Truck से बदला विमान

ट्रंप (Trump) की तुर्किये से ब्रिटेन वापसी को लेकर एक ऐसी जानकारी सामने आई है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान से जुड़े संभावित खतरे को देखते हुए ट्रंप की वापसी के लिए बेहद गोपनीय प्लान तैयार किया गया था। बाहर से सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था, लेकिन पर्दे के पीछे राष्ट्रपति की यात्रा का पूरा तरीका बदल दिया गया। ट्रंप पहले Air Force One में सवार होते हुए नजर आए। वहां मौजूद लोगों और पत्रकारों को भी यही लगा कि राष्ट्रपति इसी विमान से आगे की यात्रा करेंगे। लेकिन कुछ समय बाद ट्रंप को एयरपोर्ट पर इस्तेमाल होने वाली एक Catering Truck के जरिए चुपचाप दूसरे विमान तक ले जाया गया। Air Force One बना ‘Decoy’ रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप की वास्तविक यात्रा को छिपाने के लिए Air Force One को एक तरह के Decoy यानी भ्रम पैदा करने वाले विमान के रूप में इस्तेमाल किया गया। इसका मकसद यह था कि ट्रंप की असली लोकेशन और उनके विमान की जानकारी आसानी से सार्वजनिक न हो। बताया गया कि ट्रंप को बाद में एक छोटे अमेरिकी सैन्य विमान C-32A तक पहुंचाया गया। इसके बाद उन्होंने इसी विमान से ब्रिटेन के लिए उड़ान भरी। पत्रकारों को भी नहीं थी पूरी जानकारी इस पूरे ऑपरेशन की सबसे खास बात इसकी गोपनीयता थी। रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति के साथ यात्रा कर रहे कुछ पत्रकारों को भी विमान बदलने की जानकारी पहले से नहीं थी। एयरपोर्ट पर भी सुरक्षा और मूवमेंट इस तरह रखा गया कि ट्रंप के वास्तविक विमान की पहचान करना आसान न हो। यही वजह है कि कुछ समय तक यह भ्रम बना रहा कि राष्ट्रपति Air Force One से ही ब्रिटेन जा रहे हैं। Iran Threat को लेकर बढ़ी चिंता ट्रंप की इस Secret Flight को ईरान से जुड़े संभावित खतरे से जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर लगातार सतर्क रही हैं। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ट्रंप की तुर्किये से वापसी को लेकर सुरक्षा अधिकारियों ने अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी थी। इसी वजह से यात्रा के अंतिम चरण में अचानक बदलाव किया गया। हालांकि, इस पूरे ऑपरेशन के हर विवरण की आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक तौर पर नहीं हुई है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि ट्रंप पर तत्काल किसी हमले की पुष्टि हुई थी। उपलब्ध रिपोर्टों में इसे संभावित सुरक्षा खतरे से जोड़कर बताया गया है। C-32A से ब्रिटेन पहुंचे ट्रंप रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप C-32A विमान से ब्रिटेन पहुंचे। वहीं Air Force One को भी आगे भेजा गया। इस तरह राष्ट्रपति की वास्तविक यात्रा और Air Force One की गतिविधि को अलग रखा गया। सुरक्षा के लिहाज से यह तरीका काफी असामान्य माना जा रहा है। आमतौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति की यात्रा में सुरक्षा के कई स्तर होते हैं, लेकिन इस बार विमान बदलने की जानकारी को भी बेहद सीमित रखा गया। कतर के विमान को लेकर भी चर्चा ट्रंप की तुर्किये यात्रा के दौरान कतर से मिले Boeing 747 विमान को लेकर भी काफी चर्चा हुई थी। यह विमान भविष्य में अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए इस्तेमाल किए जाने की योजना का हिस्सा है। हालांकि, वापसी के दौरान पुराने Air Force One का इस्तेमाल किया गया। इसके पीछे सुरक्षा और विमान की तैयारी से जुड़ी चिंताओं को वजह बताया गया है। आखिर क्यों इतना बड़ा Secret Operation? राष्ट्रपति की यात्रा से जुड़ी जानकारी अगर पहले से सार्वजनिक हो जाए तो सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में विमान बदलने और वास्तविक यात्रा को कुछ समय के लिए छिपाने जैसी रणनीति का इस्तेमाल किया जा सकता है। ट्रंप के मामले में भी यही वजह सबसे अहम मानी जा रही है। Air Force One को सामने रखकर और राष्ट्रपति को दूसरे विमान से रवाना कर सुरक्षा एजेंसियों ने उनकी वास्तविक लोकेशन को ज्यादा समय तक गोपनीय रखने की कोशिश की। Trump की Secret Flight ने बढ़ाई चर्चा ट्रंप की तुर्किये से यह गुप्त उड़ान अब अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। खासकर ईरान के साथ तनाव के बीच इस तरह की सुरक्षा व्यवस्था ने कई सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है और ऑपरेशन से जुड़े कई सुरक्षा विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। लेकिन इतना साफ है कि ट्रंप की वापसी सामान्य यात्रा जैसी नहीं थी। Air Force One में दिखाई देने से लेकर Catering Truck के जरिए दूसरे विमान तक पहुंचने तक पूरी कहानी में सुरक्षा और गोपनीयता सबसे अहम रही। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Vishwas Sarang

Vishwas Sarang को बहनों का बेशुमार प्यार, Narela Rakshabandhan Mahotsav में बना नया उत्साह

नरेला विधानसभा क्षेत्र में चल रहे Rakshabandhan Mahotsav 2026 में रविवार को भाई-बहन के रिश्ते की खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। वार्ड नंबर 36, 37 और 70 में आयोजित कार्यक्रम के पांचवें दिन 24 हजार 604 बहनों ने मंत्री Vishwas Sarang को रक्षासूत्र बांधा। बहनों ने राखी बांधकर उनके प्रति स्नेह और आशीर्वाद जताया। कार्यक्रम में पहुंचते ही मंत्री विश्वास सारंग का स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। ढोल-ताशों और DJ की गूंज के बीच उन्हें बग्गी से मुख्य कार्यक्रम स्थल तक ले जाया गया। इस दौरान आतिशबाजी भी हुई। मंच पर पहुंचने के बाद सारंग ने बहनों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। बहनों के प्यार को बताया अपनी ताकत रक्षाबंधन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वास सारंग ने कहा कि रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच विश्वास, स्नेह और अपनत्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हर साल बड़ी संख्या में बहनों का प्यार और आशीर्वाद मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। कार्यक्रम में पहुंचीं बहनों से उन्होंने राखी बंधवाई और उनका आशीर्वाद लिया। सारंग ने कहा कि लाखों बहनों का स्नेह और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। चौथे दिन भी उमड़ा था बहनों का सैलाब नरेला रक्षाबंधन महोत्सव के चौथे दिन भी बड़ी संख्या में बहनें कार्यक्रम में पहुंची थीं। उस दिन 31,117 बहनों ने मंत्री विश्वास सारंग को रक्षासूत्र बांधा था। आयोजकों के अनुसार, पिछले साल के महोत्सव में कुल 1 लाख 84 हजार 632 बहनों ने रक्षासूत्र बांधा था। इस बार भी लगातार बढ़ रही भागीदारी को देखते हुए पिछले साल का आंकड़ा पार होने की उम्मीद जताई जा रही है। 7 सितंबर को इन दो वार्डों में होगा आयोजन नरेला रक्षाबंधन महोत्सव का अगला चरण 7 सितंबर 2026 को होगा। इस दिन दो वार्डों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में भी बड़ी संख्या में बहनों के शामिल होने की उम्मीद है। महोत्सव के जरिए रक्षाबंधन के पारंपरिक रिश्ते को सामाजिक जुड़ाव और भाईचारे के भाव से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। नरेला क्षेत्र में लगातार कई दिनों से चल रहे इस आयोजन में बहनों की बड़ी भागीदारी देखने को मिल रही है। पांचवें दिन 24,604 रक्षासूत्र बांधे जाने के साथ महोत्सव का उत्साह और बढ़ गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CM रेखा गुप्ता

Satya Niketan हादसे पर CM रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला, Deputy Commissioner समेत 5 Suspend

दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। पांच मंजिला इमारत के अचानक गिरने से अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे के बाद CM रेखा गुप्ता ने जिम्मेदारी तय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। MCD के साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत 5 अधिकारियों को Suspend कर दिया गया है। सरकार के इस एक्शन के बाद नगर निगम के कामकाज और इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हादसे के बाद MCD में बड़ा Action सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद MCD ने पांच अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। इनमें साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर सहित इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े अधिकारी शामिल हैं। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि इमारत की हालत को लेकर पहले कोई शिकायत या नोटिस जारी हुआ था या नहीं और निर्माण या मरम्मत के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं। PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी इमारत बताया जा रहा है कि जिस बिल्डिंग का हिस्सा ढहा, उसका इस्तेमाल PG accommodation के तौर पर किया जा रहा था। हादसे के समय वहां कई लोग मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इमारत गिरते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। धूल का गुबार उठ गया और लोग मदद के लिए मौके पर पहुंचने लगे। इसके बाद दिल्ली फायर सर्विस, NDRF और अन्य बचाव दलों ने मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। 7 लोगों की मौत, कई घायल रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे से कई लोगों को बाहर निकाला गया। हादसे में अब तक 7 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हादसे के बाद आसपास के लोगों में भी डर का माहौल है। स्थानीय स्तर पर दूसरी पुरानी और कमजोर इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। Building Owner भी पुलिस की गिरफ्त में मामले में पुलिस ने बिल्डिंग के मालिक हरिराम के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस ने उसकी तलाश के लिए कई टीमें लगाई थीं। बाद में उसे भिवाड़ी से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई। पुलिस अब हादसे से जुड़े दस्तावेज, बिल्डिंग की स्थिति और निर्माण या मरम्मत से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे और लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। आसपास की इमारतों की भी जांच सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने आसपास की इमारतों की स्थिति को लेकर भी जांच शुरू की है। अधिकारियों की नजर खास तौर पर उन भवनों पर है जो पुराने हैं या जिनमें निर्माण और मरम्मत का काम चल रहा है। इस घटना ने दिल्ली में old buildings, PG और construction safety को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर इमारत में पहले से कोई खामी थी, तो उसे समय रहते क्यों नहीं रोका गया? सरकार के Action से उठे कई सवाल MCD के पांच अधिकारियों का निलंबन सरकार की ओर से उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, असली तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। सत्य निकेतन की इस घटना ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच में हादसे की असली वजह क्या सामने आती है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CM House

CM House March पर Police का पहरा, Hamidia में Intern Doctors से धक्का-मुक्की

अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टर सोमवार को मुख्यमंत्री आवास (CM House) की ओर बढ़ रहे थे। लेकिन हमीदिया अस्पताल के पास पुलिस ने उनका रास्ता रोक दिया। डॉक्टरों को आगे जाने से रोकने के लिए पुलिस ने आसपास के रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी। इस दौरान डॉक्टरों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। प्रदर्शन को देखते हुए हमीदिया अस्पताल परिसर और आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए मौके पर Water Cannon भी तैयार रखा गया। CM House की तरफ मार्च करना चाहते थे डॉक्टर इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। इसी सिलसिले में डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने का फैसला किया। डॉक्टरों का समूह हमीदिया अस्पताल से आगे बढ़ने लगा तो पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। पुलिस की Barricading के बाद डॉक्टरों ने मौके पर नारेबाजी शुरू कर दी। आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान से आगे नहीं जाने के लिए समझाती रही। चारों तरफ से रास्ते किए गए बंद प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हमीदिया के आसपास कई रास्तों को बंद कर दिया। बैरिकेड लगाकर आवाजाही को नियंत्रित किया गया। मौके पर अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की गई, ताकि भीड़ को संभाला जा सके। Water Cannon की मौजूदगी से साफ था कि प्रशासन किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी में था। हालांकि, डॉक्टरों का प्रदर्शन अपनी मांगों को लेकर जारी रहा। मांगों पर सरकार से जवाब चाहते हैं Intern Doctors प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि वे अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। CM House तक मार्च के जरिए उनका उद्देश्य सीधे सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचना था। फिलहाल पुलिस ने डॉक्टरों को मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने से रोक दिया है। हमीदिया अस्पताल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और स्थिति पर पुलिस लगातार नजर बनाए हुए है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा डॉक्टरों की मांगों और सरकार की ओर से संभावित बातचीत को लेकर है। अब देखना होगा कि प्रदर्शन के बाद प्रशासन और इंटर्न डॉक्टरों के बीच क्या समाधान निकलता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold

Gold Rate Today: सोने की कीमत ₹2409 गिरी, चांदी भी ₹3967 सस्ती

सोना खरीदने वालों के लिए सोमवार को बाजार से थोड़ी राहत की खबर आई। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोने (Gold) और चांदी (Silver) दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। आपके दिए बाजार आंकड़ों के मुताबिक सोना करीब ₹2,409 और चांदी करीब ₹3,967 सस्ती हुई है। इसके बाद 10 ग्राम सोने का भाव करीब ₹1.52 लाख, जबकि एक किलो चांदी करीब ₹2.35 लाख के आसपास पहुंच गई। हालांकि, अलग-अलग बाजार, शुद्धता और कारोबार के समय के हिसाब से रेट में अंतर हो सकता है। सोमवार को एक अन्य बाजार रिपोर्ट में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,52,590 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,36,240 प्रति किलो बताया गया। सोने के भाव में फिर आई नरमी पिछले कुछ समय से रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास कारोबार कर रहा Gold सोमवार को दबाव में नजर आया। घरेलू बाजार में भी इसकी कीमत में कमजोरी देखने को मिली। MCX पर अक्टूबर गोल्ड फ्यूचर्स में भी गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत इससे कम है। अगर आप ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं तो ध्यान रखें कि दुकान पर मिलने वाला अंतिम रेट बाजार भाव से अलग हो सकता है। Silver Price Today: चांदी भी हुई सस्ती सोने के साथ चांदी में भी कमजोरी रही। चांदी करीब ₹3,967 प्रति किलो सस्ती होने के बाद लगभग ₹2.35 लाख प्रति किलो के स्तर पर आ गई है। हालांकि, सोमवार के अलग-अलग बाजार अपडेट में चांदी का भाव करीब ₹2.36 लाख प्रति किलो भी बताया गया है। इससे साफ है कि कारोबार के समय के साथ कीमतों में बदलाव हो रहा है। आखिर क्यों गिर रहे हैं सोना और चांदी? कीमती धातुओं में इस गिरावट का कनेक्शन सीधे ग्लोबल मार्केट से जुड़ा है। अमेरिका के रोजगार आंकड़े उम्मीद से मजबूत रहने के बाद वहां Federal Reserve की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें बदली हैं। मजबूत अमेरिकी जॉब डेटा के बाद सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना को लेकर दांव बढ़े हैं। इसका असर सोने पर पड़ा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में Spot Gold करीब 0.7% नीचे आया। वहीं Silver में भी लगभग 1% की गिरावट दर्ज की गई। अब आगे क्या होगा? अब बाजार की नजर अमेरिका से आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर है। इस सप्ताह PPI और CPI जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े जारी होने हैं। इनसे Federal Reserve की अगली ब्याज दर नीति को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में Gold और Silver में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। निवेशकों के साथ-साथ शादी या त्योहार के लिए खरीदारी करने वाले लोगों की भी बाजार पर नजर बनी हुई है। Gold खरीदते समय सिर्फ भाव न देखें अगर आप आज सोना खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो सिर्फ 10 ग्राम का बाजार भाव देखकर फैसला न लें। 22K या 24K purity, GST, making charges और ज्वेलर के अन्य शुल्क अंतिम कीमत को बदल सकते हैं। अलग-अलग शहरों और ज्वेलर्स के बीच भी रेट में अंतर हो सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले अपने स्थानीय ज्वेलर से उसी समय का ताजा रेट जरूर पता करें। बाजार में तेजी से बदलाव होने के कारण सुबह और शाम के भाव में भी अंतर देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Sagar

Sagar में जहरीली शराब का कहर: 19 मौत, 112 मरीज भर्ती; Liquor Network पर पुलिस का शिकंजा

मध्य प्रदेश के सागर (Sagar) जिले में जहरीली शराब ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। शराब पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने का सिलसिला शुरू हुआ और देखते ही देखते अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ती चली गई। अब तक 19 लोगों की मौत की बात सामने आई है, जबकि 112 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती बताए जा रहे हैं। मृतकों में पिता-पुत्र के शामिल होने की जानकारी ने इस घटना को और दर्दनाक बना दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। पुलिस ने लाइसेंसी शराब ठेकेदारों समेत 30 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। इनमें से 10 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। अधिकारियों की नजर अब उस पूरे नेटवर्क पर है, जिसके जरिए कथित तौर पर मिलावटी या जहरीली शराब लोगों तक पहुंची। शराब पीने के बाद बिगड़ी लोगों की तबीयत जानकारी के मुताबिक, सागर जिले के बंडा क्षेत्र में कई लोगों ने शराब का सेवन किया था। इसके बाद एक के बाद एक लोगों की तबीयत खराब होने लगी। कुछ लोगों को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया। स्थानीय स्तर पर इलाज के बाद गंभीर मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया। अस्पतालों में अचानक मरीजों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया। प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीमों को भेजकर लोगों की जांच की जा रही है। प्रशासन यह भी पता लगाने में जुटा है कि कितने लोगों ने संदिग्ध शराब का सेवन किया था। 112 मरीजों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जहरीली शराब की आशंका के बाद अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या लगातार चिंता बढ़ा रही है। 112 लोगों के इलाज की जानकारी सामने आई है। इनमें कुछ मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में पहुंचकर स्थिति पर नजर रख रही हैं। अधिकारियों का फोकस इस बात पर है कि संदिग्ध शराब पीने वाले किसी व्यक्ति की हालत बिगड़ने पर उसे समय रहते अस्पताल पहुंचाया जा सके। पिता-पुत्र की मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ इस हादसे में पिता-पुत्र की मौत की खबर ने स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है। एक ही परिवार के दो सदस्यों की जान जाने से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना के बाद प्रभावित इलाकों में मातम का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि शराब की एक बोतल इतनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है। अब लोगों में अवैध और संदिग्ध शराब की बिक्री को लेकर डर भी है और गुस्सा भी। 30 नामजद आरोपियों पर FIR, 10 गिरफ्तार पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए 30 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। इनमें लाइसेंसी शराब कारोबार से जुड़े लोगों के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शराब की सप्लाई कहां से हुई और इसे किन लोगों तक पहुंचाया गया। अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी है। पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी है। जांच में जिस किसी की भूमिका सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है। लाइसेंसी ठेकेदारों की भूमिका भी जांच के घेरे में मामले में लाइसेंसी शराब ठेकेदारों के नाम सामने आने के बाद आबकारी विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसियां यह पता कर रही हैं कि यदि शराब की बिक्री वैध दुकानों से हुई थी, तो उसमें मिलावट कैसे पहुंची। अधिकारियों की जिम्मेदारी और संभावित लापरवाही की भी जांच की जा रही है। प्रशासन की कोशिश है कि शराब के स्रोत से लेकर इसकी बिक्री तक पूरी चेन का पता लगाया जाए। जहरीली शराब की सप्लाई का नेटवर्क खंगाल रही पुलिस पुलिस को शक है कि इस मामले के पीछे सिर्फ कुछ स्थानीय लोगों का हाथ नहीं, बल्कि शराब की सप्लाई से जुड़ा बड़ा नेटवर्क भी हो सकता है। जांच एजेंसियां शराब की बोतल, लेबल और सप्लाई चैन से जुड़े हर पहलू की जांच कर रही हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जहरीली शराब लोगों तक कैसे पहुंची और इस लापरवाही के पीछे कौन जिम्मेदार है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है। प्रशासन की नजर अब हर कड़ी पर सागर की इस घटना ने अवैध और मिलावटी शराब के कारोबार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग भी प्रभावित लोगों की निगरानी कर रहा है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल परिवार अपनों को खोने के दर्द में हैं और अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजन उनके जल्द ठीक होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगा कि इस जहरीली शराब की असली सप्लाई कहां से हुई और इस पूरे मामले में किसकी कितनी भूमिका थी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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