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IRAN-AMERICA तनाव बढ़ा: कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर हमला

IRAN-AMERICA तनाव बढ़ा: कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर हमला

IRAN ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हमला किया। हालांकि अमेरिका का दावा है कि उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने सभी हमलों को नाकाम कर दिया और किसी तरह का बड़ा नुकसान नहीं हुआ। इस घटना के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कुवैत और बहरीन में रहने वाले लोगों के बीच डर और चिंता का माहौल बन गया है। कई जगहों पर रातभर सायरन बजते रहे और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर रहीं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, हमले के जवाब में अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित एक ईरानी आइलैंड को निशाना बनाकर कार्रवाई की। बताया जा रहा है कि यह इलाका रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है। फिलहाल दोनों देशों की ओर से लगातार बयानबाजी जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात इसी तरह बिगड़ते रहे तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। खासतौर पर कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र समेत कई देशों ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। आम लोगों को डर है कि कहीं यह तनाव बड़े युद्ध का रूप न ले ले। मध्य पूर्व में बढ़ते इस तनाव पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के अगले कदम हालात तय करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump

Trump vs Netanyahu: बयानबाजी से फिर सुर्खियों में आया अमेरिका-इजरायल रिश्ता

अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बार फिर Trump का बयान सुर्खियों में है। Trump ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को “Hardliner” यानी सख्त और कठोर रुख अपनाने वाला नेता बताया, वहीं खुद को उन्होंने गर्व से “Dealmaker” यानी समझौता कराने वाला नेता कहा। यह बयान किसी औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं, बल्कि बातचीत के दौरान सामने आया बताया जा रहा है, जहां ट्रंप ने अपनी कूटनीतिक शैली पर बात करते हुए कहा कि वे टकराव नहीं बल्कि बातचीत और डील के जरिए समस्याओं को सुलझाने में विश्वास रखते हैं। “Dealmaker vs Hardliner” वाली तुलना से बढ़ी चर्चा ट्रंप ने अपने बयान में खुद को ऐसे नेता के रूप में पेश किया जो ग्लोबल विवादों को बातचीत से हल करता है, जबकि नेतन्याहू की नीति को उन्होंने अधिक कठोर और निर्णायक बताया। इस तुलना के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है, खासकर मिडिल ईस्ट की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए। विवादित शब्द ने बढ़ाया सियासी तापमान रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप के बयान में एक आपत्तिजनक और सेंसर किया गया शब्द भी शामिल था, जिसे “Fu##### crazy…” के रूप में दर्शाया गया है। इस हिस्से ने सोशल मीडिया पर और ज्यादा चर्चा खड़ी कर दी है, हालांकि इसके संदर्भ को लेकर स्पष्टता अलग-अलग तरह से सामने आ रही है। राजनीतिक असर और मायने ट्रंप पहले भी खुद को “deal-maker president” कहकर अपनी विदेश नीति की छवि पेश करते रहे हैं, खासकर अब्राहम अकॉर्ड्स जैसे समझौतों का हवाला देते हुए। वहीं नेतन्याहू पर की गई यह टिप्पणी अमेरिका-इजरायल संबंधों और मिडिल ईस्ट डिप्लोमेसी को लेकर नई बहस का कारण बन सकती है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान न सिर्फ चुनावी माहौल को प्रभावित करते हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी संदेश भेजते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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लेबनान पर हमले से Trump नाराज, नेतन्याहू को लगाई फटकार

लेबनान पर हमले से Trump नाराज, नेतन्याहू को लगाई फटकार

लेबनान पर इजराइली हमलों के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को फोन कर नाराजगी जताई। जानिए क्या कहा ट्रम्प ने और क्यों बढ़ा मध्य पूर्व में तनाव। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से नाराजगी जताई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लेबनान पर लगातार हो रहे इजराइली हमलों को लेकर ट्रम्प ने नेतन्याहू को फोन किया और कड़ी फटकार लगाई। बताया जा रहा है कि ट्रम्प ने फोन पर कहा, “क्या पागल हो गए हो? तुरंत ये सब बंद करो।” इस बातचीत के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लेबनान पर हमलों से बढ़ा तनाव इजराइल और लेबनान के बीच पिछले कुछ समय से हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। सीमा क्षेत्रों में लगातार हमले और जवाबी कार्रवाई हो रही है। आम लोगों की जिंदगी पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। कई परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं, जबकि डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार हो रहे धमाकों और हमलों के कारण बच्चों और बुजुर्गों में भय का माहौल है। लोग शांति की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। ट्रम्प ने जताई नाराजगी रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रम्प का मानना है कि इस तरह के हमले पूरे मध्य पूर्व को बड़े संघर्ष की ओर धकेल सकते हैं। उन्होंने नेतन्याहू से तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकने और हालात को शांत करने की अपील की। हालांकि, इजराइल की ओर से इस बातचीत पर आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं, राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर वैश्विक राजनीति और तेल बाजार पर भी पड़ सकता है। दुनिया की नजरें मध्य पूर्व पर इस पूरे घटनाक्रम पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। अमेरिका समेत कई देश पहले ही दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर चुके हैं। आम लोग अब सिर्फ यही चाहते हैं कि युद्ध और हिंसा के बजाय बातचीत से समाधान निकले, ताकि मासूम लोगों की जान बचाई जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump Netanyahu Phone Call

Trump vs Netanyahu: फोन कॉल में भड़के ट्रंप, इजरायल PM को बताया ‘पागल’, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

Trump-Netanyahu Phone Call: दोस्ती में दरार या कूटनीतिक दबाव? अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के बीच हुई एक फोन कॉल ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायली सैन्य कार्रवाई को लेकर ट्रंप बेहद नाराज नजर आए। बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान ट्रंप ने नेतन्याहू को “क्रेजी” (पागल) तक कह दिया और इजरायल की सैन्य रणनीति पर कड़ी नाराजगी जताई। आखिर क्यों भड़के ट्रंप? रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल ने बेरूत के दक्षिणी हिस्सों और हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए थे। इन हमलों से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका पैदा हो गई थी। अमेरिकी प्रशासन को डर था कि यह सैन्य कार्रवाई अमेरिका और ईरान के बीच चल रही संवेदनशील वार्ताओं को प्रभावित कर सकती है। इसी मुद्दे पर ट्रंप ने नेतन्याहू से नाराजगी जताई। रिपोर्ट्स में क्या कहा गया? Axios और अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने फोन पर नेतन्याहू से कहा कि उनकी कार्रवाई इजरायल को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग कर सकती है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ट्रंप ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया और इजरायली हमलों को “अनुपात से ज्यादा” प्रतिक्रिया बताया। क्या रुक सकते हैं हमले? बातचीत के बाद ऐसी खबरें सामने आईं कि इजरायल ने बेरूत पर कुछ संभावित हमलों की योजना रोक दी है। वहीं ट्रंप ने दावा किया कि दोनों पक्ष तनाव कम करने की दिशा में कदम बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। हालांकि नेतन्याहू ने साफ किया कि यदि हिजबुल्लाह की ओर से हमले जारी रहे तो इजरायल जवाबी कार्रवाई करता रहेगा। मिडिल ईस्ट में बढ़ सकती है नई चुनौती विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र पर पड़ सकता है। इससे अमेरिका-ईरान वार्ता, लेबनान की स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है। यह भी पढ़े –Iran ने अमेरिका के साथ सीजफायर वार्ता रोकी | होर्मुज स्ट्रेट बंद करने की तैयारी, लेबनान हमलों पर विरोध Desh Harpal Analysis ट्रंप और नेतन्याहू के रिश्ते लंबे समय से मजबूत माने जाते रहे हैं, लेकिन हालिया घटनाक्रम यह संकेत दे रहा है कि मिडिल ईस्ट संकट को लेकर दोनों नेताओं के बीच रणनीतिक मतभेद उभर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह विवाद केवल कूटनीतिक दबाव है या अमेरिका-इजरायल संबंधों में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत।
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Iran

US–Iran Tension के बीच ईरान में उथल-पुथल, राष्ट्रपति इस्तीफा अफवाह ने मचाया हड़कंप

Iran एक बार फिर बड़े राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय तनाव के केंद्र में है। अमेरिका के साथ बढ़ते टकराव और देश के अंदर चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच सोशल मीडिया और कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन (Masoud Pezeshkian) ने इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, अब तक किसी भी आधिकारिक स्रोत ने इस बात की पुष्टि नहीं की है। इस्तीफे की खबर या सिर्फ अफवाह? तेजी से वायरल हुई खबरों में कहा गया कि ईरान के राष्ट्रपति ने कथित तौर पर सुप्रीम लीडर को इस्तीफा पत्र भेजा है। बताया गया कि यह कदम देश की सुरक्षा एजेंसियों (IRGC) और राष्ट्रपति कार्यालय के बीच बढ़ते तनाव के चलते उठाया गया। लेकिन ईरान सरकार से जुड़े सूत्रों और कई मीडिया रिपोर्ट्स ने साफ किया है कि: यानी फिलहाल ईरान के राष्ट्रपति पद में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अमेरिका–ईरान तनाव फिर चरम पर दूसरी तरफ, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज होता दिख रहा है। क्षेत्रीय हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। इस टकराव ने पूरे इलाके में चिंता बढ़ा दी है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजरें इस पर टिकी हैं। ईरान के अंदर बढ़ती राजनीतिक और आर्थिक हलचल ईरान सिर्फ बाहरी तनाव ही नहीं, बल्कि अंदरूनी चुनौतियों से भी जूझ रहा है। इन्हीं हालात के बीच अफवाहों ने और तेजी पकड़ ली, जिससे स्थिति और भ्रमित हो गई। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IRAN के राष्ट्रपति के इस्तीफे की खबर से मचा हड़कंप, सरकार ने किया खंडन

IRAN के राष्ट्रपति के इस्तीफे की खबर से मचा हड़कंप, सरकार ने किया खंडन

IRAN की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि ईरानी राष्ट्रपति ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। खबरों में यह भी आरोप लगाया गया कि देश की असली सत्ता अब इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडरों के हाथ में चली गई है और सरकार पर उनका कंट्रोल बढ़ता जा रहा है। हालांकि, ईरान सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने इन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अधिकारी का कहना है कि राष्ट्रपति के इस्तीफे की खबरें झूठी और भ्रामक हैं। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील भी की। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से ईरान में राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के बीच तनाव की चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच राष्ट्रपति के इस्तीफे की खबर सामने आने से देश और दुनिया में कई तरह के सवाल उठने लगे। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में IRGC का प्रभाव पहले से काफी मजबूत रहा है। देश की सुरक्षा, विदेश नीति और कई अहम फैसलों में इस संगठन की बड़ी भूमिका मानी जाती है। ऐसे में जब सत्ता पर नियंत्रण को लेकर आरोप सामने आए तो लोगों की चिंता बढ़ गई। फिलहाल ईरान सरकार ने साफ कर दिया है कि राष्ट्रपति अपने पद पर बने हुए हैं और सरकार सामान्य रूप से काम कर रही है। इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में इस खबर को लेकर चर्चाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। मध्य पूर्व में पहले से चल रहे तनाव के बीच इस तरह की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल बढ़ा दी है। अब सभी की नजर ईरान की अगली राजनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nepal PM Balen Shah, India Nepal Border Dispute,

Breaking News: नेपाल PM बालेन शाह का बड़ा दावा, बोले- “नेपाल ने भी भारत की जमीन पर किया कब्जा”, सीमा विवाद पर नई बहस

नेपाल के प्रधानमंत्री Balendra Shah (बालेन शाह) ने भारत-नेपाल संबंधों को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। संसद में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि नेपाल ने भी कुछ स्थानों पर भारतीय जमीन पर कब्जा किया हुआ है। बालेन शाह ने कहा कि दोनों देशों के बीच वर्षों से चले आ रहे सीमा विवाद का समाधान टकराव नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से निकाला जाना चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे पर ब्रिटेन की भूमिका का भी जिक्र किया और कहा कि ऐतिहासिक संधियों के कारण UK की भागीदारी पर विचार किया जा सकता है। कौन सा क्षेत्र बना चर्चा का केंद्र? रिपोर्ट्स के अनुसार, नेपाल की ओर से जिस क्षेत्र का सबसे अधिक उल्लेख किया जा रहा है, उसमें सुस्ता, कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा जैसे विवादित इलाके शामिल हैं। नेपाल लंबे समय से इन क्षेत्रों पर अपना दावा करता रहा है, जबकि भारत इन्हें अपने प्रशासनिक क्षेत्र का हिस्सा मानता है। नेपाल सरकार ने दी सफाई बयान के बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय को सफाई देनी पड़ी। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि बालेन शाह की कुछ टिप्पणियां उनके व्यक्तिगत विचार हो सकती हैं और नेपाल की आधिकारिक विदेश नीति भारत के साथ मैत्रीपूर्ण और कूटनीतिक संबंध बनाए रखने की है। क्यों महत्वपूर्ण है यह बयान? विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद बालेन शाह का यह अब तक का सबसे चर्चित विदेश नीति संबंधी बयान है। इससे पहले भी वह “ग्रेटर नेपाल” और सीमा विवादों को लेकर अपने विचारों के कारण चर्चा में रह चुके हैं। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा, सांस्कृतिक संबंध और आर्थिक साझेदारी काफी मजबूत मानी जाती है। ऐसे में सीमा विवाद से जुड़े बयान दोनों देशों के राजनीतिक और कूटनीतिक समीकरणों पर असर डाल सकते हैं। देश हरपल विश्लेषण भारत और नेपाल के रिश्ते केवल पड़ोसी देशों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक स्तर पर भी गहराई से जुड़े हुए हैं। ऐसे में सीमा विवाद जैसे मुद्दों का समाधान संवाद और आपसी सहमति से निकलना ही दोनों देशों के हित में माना जा रहा है।
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Trump की ओमान को चेतावनी: ‘होर्मुज स्ट्रेट पर किसी का कब्जा बर्दाश्त नहीं’, बोले- जरूरत पड़ी तो उड़ा देंगे

Trump की ओमान को चेतावनी: ‘होर्मुज स्ट्रेट पर किसी का कब्जा बर्दाश्त नहीं’, बोले- जरूरत पड़ी तो उड़ा देंगे

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर मध्य पूर्व को लेकर बड़ा और विवादित बयान दिया है। ईरान को चेतावनी देने के बाद अब उन्होंने ओमान को भी सख्त संदेश देते हुए कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पर किसी भी देश का कंट्रोल अमेरिका बर्दाश्त नहीं करेगा। ट्रम्प ने यहां तक कह दिया कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। ट्रम्प ने अपने बयान में कहा कि उन्हें चुनाव या राजनीतिक नुकसान की परवाह नहीं है। उनका कहना है कि अमेरिका की सुरक्षा और वैश्विक व्यापार सबसे पहले है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि दुनिया की तेल सप्लाई के लिए होर्मुज स्ट्रेट बेहद अहम रास्ता है और यहां किसी तरह की रोक-टोक पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक माना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर दुनिया तक पहुंचता है। ऐसे में इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है। मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव के बीच दुनिया की नजर अब अमेरिका, ईरान और खाड़ी देशों की अगली रणनीति पर टिकी हुई है। अधिक अपडेट्स और देश-दुनिया की ताजा खबरों के लिए विजिट करें Deshharpal news portal। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Pakistan

Middle East Pakistan का सख्त रुख, इजराइल को लेकर फिर गरमाई सियासत

मध्य पूर्व की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। Pakistan ने साफ कर दिया है कि वह Israel को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देगा। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब दुनिया में इजराइल को लेकर कूटनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के उस बयान की भी चर्चा तेज है, जिसमें उन्होंने मुस्लिम देशों से इजराइल के साथ रिश्ते सामान्य करने की अपील की थी। Pakistan का साफ संदेश: “Ideology से कोई समझौता नहीं” पाकिस्तान ने अपने रुख को दोहराते हुए कहा है कि इजराइल को मान्यता देना उसके लिए सिर्फ राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि एक “वैचारिक मुद्दा” है। पाकिस्तानी विदेश नीति लंबे समय से फिलिस्तीन के समर्थन में रही है। सरकार का कहना है कि वह इस रुख से पीछे नहीं हटेगी, चाहे अंतरराष्ट्रीय दबाव कितना भी क्यों न बढ़ जाए। Trump की अपील से फिर छिड़ी बहस डोनाल्ड ट्रम्प ने मुस्लिम देशों से कहा था कि इजराइल के साथ संबंध सुधारने से मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता लाई जा सकती है। उनकी इस अपील के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि क्या क्षेत्रीय देश अपने पुराने रुख को बदलेंगे या नहीं। कुछ देशों ने रिश्ते सामान्य किए हैं, लेकिन कई अब भी दूरी बनाए हुए हैं। Middle East की जटिल सियासत मध्य पूर्व में इजराइल और मुस्लिम देशों के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में भले ही कुछ देशों ने कूटनीतिक रिश्ते शुरू किए हों, लेकिन बड़ा हिस्सा अभी भी इस मुद्दे पर बंटा हुआ है। पाकिस्तान का ताजा बयान इस बात को और स्पष्ट करता है कि यह विवाद अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ईरान

ईरान पर अमेरिका का हमला फिर चर्चा में, सीजफायर के बीच बढ़ा तनाव

मध्य पूर्व में पहले से ही नाजुक बने हालात एक बार फिर गर्म हो गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच घोषित सीजफायर के बीच अचानक सैन्य कार्रवाई ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने “सेल्फ-डिफेंस” का हवाला देते हुए दक्षिणी ईरान और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास कुछ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। क्या हुआ है ताज़ा घटनाक्रम में? अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह कार्रवाई अचानक बढ़े खतरे के जवाब में की गई। बताया जा रहा है कि होर्मुज के पास कुछ नौसैनिक बोट्स संदिग्ध गतिविधियों में शामिल थीं और वे समुद्री रास्ते में माइन (बारूदी सुरंग) बिछाने की कोशिश कर रही थीं। इसके बाद अमेरिकी बलों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए: अमेरिका का दावा – “Self Defence Action” अमेरिका का कहना है कि यह कोई आक्रामक कदम नहीं था, बल्कि पूरी तरह “डिफेंसिव स्ट्राइक” थी। अमेरिकी सेना के मुताबिक, उनके जहाज़ों और सैनिकों की सुरक्षा खतरे में थी, इसलिए तुरंत कार्रवाई करनी पड़ी। हालांकि, सीजफायर लागू होने के बावजूद इस तरह की कार्रवाई ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या समझौता वास्तव में स्थिर है या केवल कागजों तक सीमित है। ईरान की तरफ से तनाव और बढ़ने के संकेत ईरान की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पहले के रुझानों को देखते हुए माना जा रहा है कि वह इस कार्रवाई को उकसावे के रूप में देख सकता है। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है। क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट? होर्मुज स्ट्रेट सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सप्लाई की “लाइफलाइन” है। ग्राउंड पर हालात कैसे हैं? सीजफायर के बावजूद स्थिति पूरी तरह शांत नहीं कही जा सकती।एक तरफ कूटनीतिक बातचीत जारी है, वहीं दूसरी तरफ सीमित सैन्य टकराव ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय स्तर पर अनिश्चितता और डर का माहौल बना हुआ है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Voter ID

30 Crore Voter ID Cards होंगे अपडेट, पहचान और Verification होगा आसान

देशभर के करोड़ों मतदाताओं के लिए जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। चुनाव आयोग पुराने वोटर आईडी कार्ड्स को अपडेट करने की तैयारी में है। इस अभियान के तहत करीब 30 करोड़ Voter ID Cards में मौजूद धुंधले फोटो बदले जाएंगे और जिन कार्ड्स में मकान नंबर की जगह “00” लिखा है, वहां पूरा और सही पता दर्ज किया जाएगा। दरअसल, लंबे समय से शिकायतें सामने आ रही थीं कि कई वोटर कार्ड्स में फोटो इतने पुराने या धुंधले हैं कि पहचान करना मुश्किल हो जाता है। वहीं कई कार्ड्स में अधूरा पता होने से वोटिंग के दौरान लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब चुनाव आयोग इन खामियों को दूर करने के लिए बड़ा अपडेट अभियान शुरू करने जा रहा है। Blur Photo और गलत Address बने परेशानी की वजह ग्रामीण और शहरी इलाकों में बड़ी संख्या में ऐसे वोटर कार्ड पाए गए हैं, जिनमें फोटो साफ दिखाई नहीं देते। कई मामलों में कार्ड पर सिर्फ “00” लिखा होने से सही पता पता नहीं चल पाता। इससे मतदान केंद्रों पर पहचान सत्यापन में समय ज्यादा लगता है और कई बार विवाद जैसी स्थिति भी बन जाती है। इसी को देखते हुए अब रिकॉर्ड को ज्यादा सटीक और डिजिटल बनाने पर जोर दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि इस कदम से फर्जी मतदान रोकने में भी मदद मिलेगी। कैसे होगा Voter Card Update? जानकारी के मुताबिक चुनाव आयोग चरणबद्ध तरीके से यह प्रक्रिया पूरी करेगा। जरूरत पड़ने पर मतदाताओं से नया फोटो और सही पता मांगा जा सकता है। कई जगह ऑनलाइन अपडेट की सुविधा भी दी जाएगी ताकि लोगों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। अगर किसी मतदाता के कार्ड में फोटो साफ नहीं है या पता गलत दर्ज है, तो उसे अपडेट करवाने का मौका मिलेगा। आयोग का फोकस डेटा को पूरी तरह साफ और आधुनिक बनाने पर है। चुनाव से पहले रिकॉर्ड सुधारने की तैयारी आने वाले चुनावों को देखते हुए चुनाव आयोग मतदाता सूची और पहचान संबंधी रिकॉर्ड को मजबूत करना चाहता है। साफ फोटो और सही एड्रेस होने से मतदान प्रक्रिया पहले से ज्यादा आसान और पारदर्शी हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान करोड़ों लोगों के लिए राहत लेकर आएगा, क्योंकि लंबे समय से लोग पुराने और खराब प्रिंट वाले वोटर कार्ड्स की समस्या झेल रहे थे।
India vs Afghanistan

India vs Afghanistan ODI 2026: पहली बार भारत के खिलाफ वनडे सीरीज खेलेगा अफगानिस्तान

भारत और अफगानिस्तान (India vs Afghanistan) के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का आगाज आज धर्मशाला के खूबसूरत HPCA स्टेडियम में होने जा रहा है। यह सीरीज इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि अफगानिस्तान पहली बार भारत के खिलाफ पूरी ODI सीरीज खेलने उतर रहा है। दोनों टीमों के फैंस इस मुकाबले का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे, लेकिन मैच से पहले मौसम ने चिंता बढ़ा दी है। Kohli-Hardik के बिना उतरेगी Team India भारतीय टीम इस सीरीज में कई बड़े बदलावों के साथ मैदान पर उतरेगी। स्टार बल्लेबाज विराट कोहली चोट के कारण उपलब्ध नहीं हैं, जबकि हार्दिक पंड्या भी फिटनेस समस्या की वजह से टीम से बाहर हैं। ऐसे में टीम इंडिया की जिम्मेदारी कप्तान रोहित शर्मा और युवा खिलाड़ियों पर होगी। टीम मैनेजमेंट इस सीरीज को भविष्य की तैयारी के तौर पर देख रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले बड़े टूर्नामेंट्स को ध्यान में रखते हुए कुछ नए खिलाड़ियों को मौका दिया जा सकता है। ईशान किशन, यशस्वी जायसवाल और नितीश कुमार रेड्डी जैसे युवा खिलाड़ियों पर सभी की नजरें रहेंगी। Afghanistan के पास भी हैं मैच विनर खिलाड़ी अफगानिस्तान की टीम अब सिर्फ कमजोर टीम नहीं मानी जाती। पिछले कुछ वर्षों में टीम ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया है। राशिद खान, मोहम्मद नबी और रहमानुल्लाह गुरबाज जैसे खिलाड़ी किसी भी मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। भारतीय परिस्थितियों में खेलने का अनुभव भी अफगानिस्तान के खिलाड़ियों के पास है। ऐसे में टीम इंडिया के लिए यह सीरीज आसान नहीं रहने वाली। Dharamshala Weather ने बढ़ाई टेंशन धर्मशाला में मौसम मैच का सबसे बड़ा विलेन बन सकता है। मौसम विभाग के अनुसार मुकाबले के दौरान करीब 55 प्रतिशत बारिश की संभावना है। सुबह से ही इलाके में बादल छाए हुए हैं और हल्की बारिश भी देखने को मिली है। अगर बारिश लगातार होती रही तो मैच में ओवर कट सकते हैं या मुकाबला प्रभावित भी हो सकता है। हालांकि फैंस उम्मीद कर रहे हैं कि मौसम साफ हो और उन्हें पूरा मैच देखने को मिले। तेज गेंदबाजों को मिल सकती है मदद धर्मशाला की पिच आमतौर पर तेज गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती है। बादलों और नमी की वजह से शुरुआती ओवरों में गेंद ज्यादा स्विंग कर सकती है। ऐसे में टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी चुन सकती है। मैच की जरूरी जानकारी भारत जहां घरेलू मैदान का फायदा उठाकर सीरीज में जीत के साथ शुरुआत करना चाहेगा, वहीं अफगानिस्तान की नजर इतिहास रचने पर होगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि बारिश के बीच कौन सी टीम मैदान पर बेहतर प्रदर्शन करती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Pranit More

Pranit More Controversy: महिलाओं पर विवादित Comments के बाद कॉमेडियन की माफी

स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे (Pranit More) एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। महिलाओं को लेकर किए गए विवादित कमेंट्स के बाद इंटरनेट पर उनके खिलाफ भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। मामला बढ़ने के बाद अब कॉमेडियन ने सार्वजनिक तौर पर माफी मांगते हुए लोगों से एक मौका देने की अपील की है। प्रणित मोरे का एक वीडियो पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह महिलाओं को लेकर ऐसी टिप्पणियां करते दिखाई दिए, जिन्हें कई लोगों ने अपमानजनक और असंवेदनशील बताया। वीडियो सामने आने के बाद यूजर्स ने जमकर आलोचना शुरू कर दी और देखते ही देखते मामला सोशल मीडिया ट्रेंड बन गया। Viral Video के बाद बढ़ा विवाद वीडियो वायरल होने के बाद X, Instagram और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने कहा कि कॉमेडी के नाम पर महिलाओं का मजाक उड़ाना गलत है। कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर मनोरंजन की सीमा क्या होनी चाहिए। सोशल मीडिया पर #PranitMoreControversy ट्रेंड करने लगा और कई महिला संगठनों ने भी इस बयान पर नाराजगी जताई। सोशल मीडिया पोस्ट में मांगी माफी लगातार बढ़ते विवाद के बीच प्रणित मोरे ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक लंबा नोट शेयर किया। उन्होंने माना कि उनके शब्दों से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। प्रणित ने लिखा, “मैं समझता हूं कि लोग मुझसे नाराज हैं। शायद मैं इस नफरत का हकदार भी हूं, लेकिन मैं सिर्फ इतना चाहता हूं कि लोग मुझे खुद को सुधारने का एक मौका दें।” उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था, लेकिन अब उन्हें अपनी गलती का एहसास हो चुका है। लोगों की राय बंटी हुई नजर आई इस पूरे मामले में सोशल मीडिया यूजर्स दो हिस्सों में बंटे नजर आए। कुछ लोगों का कहना है कि सार्वजनिक मंच पर इस तरह की भाषा स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। वहीं दूसरी तरफ कुछ यूजर्स का मानना है कि गलती मान लेने के बाद किसी को सुधारने का मौका मिलना चाहिए। हालांकि, विवाद अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है और सोशल मीडिया पर बहस जारी है। करियर पर पड़ सकता है असर मनोरंजन जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि इस विवाद का असर प्रणित मोरे की इमेज और करियर पर पड़ सकता है। आज के डिजिटल दौर में किसी भी बयान पर तुरंत प्रतिक्रिया देखने को मिलती है और सोशल मीडिया का दबाव कई बार कलाकारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। फिलहाल, सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि दर्शक और इंडस्ट्री उनके माफीनामे को किस तरह लेते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
S Jaishankar

3 भारतीयों की मौत से भारत सख्त, US Secretary S Jaishankar की अहम बातचीत

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपने नागरिकों की मौत को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्री S Jaishankar ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत कर कॉमर्शियल जहाज पर हुए हमले में तीन भारतीय नागरिकों की मौत पर गहरी चिंता और विरोध दर्ज कराया। भारत ने साफ शब्दों में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर चल रहे व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाना पूरी तरह गलत है और इससे वैश्विक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। क्या है पूरा मामला? हाल ही में मध्य पूर्व के समुद्री क्षेत्र में एक कॉमर्शियल जहाज पर हमला हुआ था। इस हमले में तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। घटना के बाद भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और पीड़ित परिवारों के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री से बातचीत के दौरान इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया और कहा कि निर्दोष नागरिकों की जान जाना बेहद दुखद है। भारत ने क्या कहा? विदेश मंत्री जयशंकर ने बातचीत में कहा कि समुद्री व्यापार दुनिया की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। ऐसे में कॉमर्शियल जहाजों पर हमला न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है, बल्कि इससे वैश्विक व्यापार और कई देशों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और इस तरह की घटनाओं को लेकर बेहद संवेदनशील है। Middle East Tension पर बढ़ी चिंता मध्य पूर्व में पिछले कुछ समय से तनाव लगातार बढ़ रहा है। कई देशों ने समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हमले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव और कूटनीतिक गतिविधियों को और तेज कर सकते हैं। भारत भी लगातार शांति और सुरक्षित समुद्री व्यापार की वकालत करता रहा है। भारत सरकार की नजर स्थिति पर सरकार ने कहा है कि प्रभावित भारतीयों के परिवारों को हर संभव सहायता दी जाएगी। साथ ही क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है। इस घटना के बाद भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील भी की है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
धर्मेंद्र प्रधान

“खेल और पढ़ाई साथ-साथ चलेंगे” — Bhopal में धर्मेंद्र प्रधान ने खिलाड़ियों को दिया बड़ा संदेश

भोपाल में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने खिलाड़ियों के साथ संवाद करते हुए देश की नई शिक्षा और खेल नीति को लेकर बड़ा संदेश दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर धर्मेंद्र प्रधान मध्यप्रदेश पहुंचे, जहां उन्होंने खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग के साथ शूटिंग एकेडमी का दौरा किया। खिलाड़ियों से सीधा संवाद, स्किल और स्पोर्ट्स पर जोर इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों से मुलाकात की और कहा कि भारत अब शिक्षा के साथ-साथ स्किल और स्पोर्ट्स सेक्टर में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के जरिए पहली बार खेल और पढ़ाई को एक साथ जोड़ने पर गंभीरता से काम किया जा रहा है। पढ़ाई और खेल साथ-साथ चलेंगे धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि अब ऐसा सिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिससे खिलाड़ी अपनी पढ़ाई और खेल दोनों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ा सकें। इसके लिए अलग से कोर्स वर्क तैयार किया जा रहा है, ताकि छात्रों को खेल गतिविधियों का भी अकादमिक लाभ मिल सके। APAAR ID और Credit Score सिस्टम पर काम उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों की APAAR ID के माध्यम से उनकी पढ़ाई और खेल उपलब्धियों को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जाएगा। साथ ही इंटर स्पोर्ट्स एक्टिविटी को क्रेडिट स्कोर सिस्टम से जोड़ने की तैयारी भी की जा रही है। इससे खिलाड़ियों को भविष्य में शिक्षा और करियर दोनों में फायदा मिलेगा। IIT में Sports Quota से युवाओं को मिलेगा फायदा केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार IIT जैसे बड़े संस्थानों में स्पोर्ट्स कोटा लागू किया गया है। यह कदम उन युवाओं के लिए नई उम्मीद लेकर आया है, जो खेल के साथ-साथ उच्च शिक्षा में भी आगे बढ़ना चाहते हैं। 2036 Olympics और Developed India Vision 2047 पर फोकस उन्होंने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले 20 वर्षों में भारत को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है। भारत का फोकस अब 2036 ओलंपिक की तैयारियों पर भी है और देश खेलों में विश्व स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में काम कर रहा है। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जब भारत आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब प्रधानमंत्री मोदी का विकसित भारत का सपना साकार होगा और देश दुनिया की महाशक्ति के रूप में उभरेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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