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Trump बिना परमाणु समझौते के भी खत्म कर सकते हैं Iran युद्ध

Trump बिना परमाणु समझौते के भी खत्म कर सकते हैं Iran युद्ध

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump Iran के साथ चल रहे युद्ध को बिना किसी नए परमाणु समझौते के भी खत्म करने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, इसके लिए ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना होगा। युद्ध के लंबे खिंचने के साथ अब अमेरिका का ध्यान केवल परमाणु मुद्दे से हटकर क्षेत्र में स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी केंद्रित होता दिखाई दे रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य बना अहम मुद्दा रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प प्रशासन की प्राथमिकताओं में अब होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना महत्वपूर्ण हो गया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लिए बेहद अहम है, क्योंकि बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और अन्य ऊर्जा संसाधन इसी रास्ते से होकर गुजरते हैं। अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और कई देशों में ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि अमेरिका इस मुद्दे को युद्ध खत्म करने की संभावित शर्त के तौर पर देख रहा है। पहले परमाणु समझौता था मुख्य मुद्दा ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका लंबे समय से चिंता जताता रहा है। युद्ध शुरू होने के बाद भी परमाणु गतिविधियों को रोकना और ईरान की परमाणु क्षमता को सीमित करना अमेरिकी रणनीति का अहम हिस्सा रहा। हालांकि, अब युद्ध के लंबा खिंचने के बीच ट्रम्प प्रशासन का फोकस कुछ बदलता नजर आ रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका अब केवल परमाणु समझौते पर जोर देने के बजाय युद्ध को जल्द खत्म करने और क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करने पर भी विचार कर रहा है। युद्ध का असर दुनिया पर भी ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक बाजारों और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही बाधित होने की स्थिति में भारत समेत कई देशों पर इसका असर पड़ सकता है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से परिवहन और रोजमर्रा की कई चीजों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है। ट्रम्प के सामने चुनौती ट्रम्प के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि युद्ध को खत्म करते हुए ईरान से ऐसी शर्तों पर सहमति कैसे बनाई जाए, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगियों के हित सुरक्षित रहें। दूसरी ओर, ईरान भी अपनी सुरक्षा और रणनीतिक हितों से समझौता करने के लिए आसानी से तैयार होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए क्या कोई नया रास्ता निकलता है। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुलता है और युद्ध समाप्ति की दिशा में बातचीत आगे बढ़ती है, तो इससे पश्चिम एशिया के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी बड़ी राहत मिल सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Dolphin Typhoon

Japan में 200 Kmph का तूफान: Dolphin Typhoon से बढ़ा खतरा, Toyota ने 9 Plants में रोका Production

Japan में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। देश के कई हिस्सों में Dolphin Typhoon का असर तेजी से बढ़ रहा है। करीब 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रहे इस तूफान को लेकर प्रशासन ने कई इलाकों में अलर्ट जारी किया है। भारी बारिश और तेज हवाओं के खतरे को देखते हुए करीब 2.6 लाख लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने का आदेश दिया गया है। तूफान के असर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जापान की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनी Toyota ने भी अपनी कई Manufacturing Units में काम रोकने का फैसला किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने सुरक्षा कारणों से 9 फैक्ट्रियों में उत्पादन अस्थायी रूप से बंद किया है। 200 Kmph की रफ्तार से बढ़ रहा तूफान Dolphin Typhoon के कारण Japan के कई क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने लोगों को समुद्र और निचले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है। तेज हवाओं की वजह से पेड़ गिरने, बिजली आपूर्ति प्रभावित होने और परिवहन व्यवस्था बाधित होने की आशंका जताई गई है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। 2.6 लाख लोगों को सुरक्षित जगह जाने का आदेश तूफान के संभावित खतरे को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने करीब 2.6 लाख लोगों के लिए Evacuation Order जारी किया है। लोगों से कहा गया है कि वे मौसम की स्थिति बिगड़ने से पहले सुरक्षित स्थानों पर पहुंच जाएं। खास तौर पर निचले इलाकों और उन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क किया गया है, जहां बाढ़ या भूस्खलन का खतरा हो सकता है। प्रशासन ने लोगों से सरकारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। Toyota ने 9 Factories में रोका Production Dolphin Typhoon का असर जापान के Industrial Sector पर भी दिखाई दे रहा है। देश की बड़ी कार निर्माता कंपनी Toyota ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपनी 9 फैक्ट्रियों में काम रोक दिया है। फैक्ट्रियों में Production रोकने का फैसला कर्मचारियों की सुरक्षा और संभावित Transport Disruptions को देखते हुए लिया गया है। मौसम सामान्य होने और परिस्थितियों का आकलन करने के बाद उत्पादन दोबारा शुरू करने पर फैसला लिया जाएगा। Transport और Daily Life पर भी असर तूफान के कारण जापान में सड़क और रेल यातायात प्रभावित होने की आशंका है। कई इलाकों में लोगों को गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। तेज हवाओं और बारिश के चलते Flights और अन्य Transport Services पर भी असर पड़ सकता है। प्रशासन की प्राथमिकता इस समय लोगों को सुरक्षित रखना है। लोगों से सतर्क रहने की अपील जापानी अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक मौसम और प्रशासनिक अपडेट पर भरोसा करें। लोगों को जरूरी सामान तैयार रखने और जरूरत पड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी गई है। फिलहाल Dolphin Typhoon के कारण जापान में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। आने वाले घंटों में तूफान की दिशा और रफ्तार के आधार पर इसके प्रभाव में बदलाव हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tariff

India पर 100% Tariff लगाएगा America? Trump के 500% Plan से बढ़ी चिंता

अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक बार फिर Tariff यानी आयात शुल्क को लेकर हलचल बढ़ गई है। अमेरिकी सीनेट से रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़ा एक अहम बिल पास होने के बाद भारत पर भी संभावित टैरिफ का मुद्दा चर्चा में आ गया है। सबसे ज्यादा चर्चा 100% Tariff को लेकर हो रही है। वहीं, इस पूरे मामले में 500% टैरिफ का जिक्र भी सामने आया है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर भारत पर कितना शुल्क लग सकता है और क्या अमेरिका वाकई भारतीय सामान पर 100% Tariff लगाने जा रहा है? आइए आसान भाषा में समझते हैं पूरा मामला। Russia से Oil खरीदना बना बड़ी वजह भारत लंबे समय से रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है। रूस से मिलने वाला तेल भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है। दूसरी ओर अमेरिका और उसके सहयोगी रूस पर यूक्रेन युद्ध के कारण आर्थिक दबाव बढ़ाना चाहते हैं। अमेरिका की कोशिश है कि रूस से तेल और दूसरी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर दबाव बनाया जाए, ताकि रूस की ऊर्जा से होने वाली कमाई प्रभावित हो। यही वजह है कि भारत जैसे बड़े रूसी तेल खरीदारों पर भी अमेरिकी टैरिफ कार्रवाई की चर्चा तेज हो गई है। US Senate ने क्या किया? अमेरिकी सीनेट ने रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े एक विधेयक को भारी बहुमत से मंजूरी दी है। इस प्रस्ताव में उन देशों के खिलाफ भी आर्थिक कार्रवाई का रास्ता बनाया गया है, जो रूस के साथ बड़े स्तर पर ऊर्जा कारोबार करते हैं। प्रस्ताव के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को कुछ परिस्थितियों में ऐसे देशों से आने वाले सामान पर 100% तक अतिरिक्त Tariff लगाने का अधिकार मिल सकता है। यहीं से भारत को लेकर चिंता बढ़ी है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि सीनेट से बिल पास होने का मतलब यह नहीं है कि भारत पर 100% टैरिफ आज से लागू हो गया है। क्या India पर तुरंत लगेगा 100% Tariff? नहीं। फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद भी कानून बनने की प्रक्रिया बाकी है। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन को यह तय करना होगा कि इस प्रावधान का इस्तेमाल कब और किस देश के खिलाफ किया जाए। इसलिए अभी भारत पर 100% टैरिफ को संभावित खतरा कहना ज्यादा सही है, न कि लागू हो चुका शुल्क। फिर 500% Tariff की चर्चा क्यों? 500% टैरिफ का आंकड़ा रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर बेहद कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने से जुड़े अमेरिकी प्रस्तावों के संदर्भ में सामने आया है। ऐसे प्रावधानों में अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस के साथ व्यापार जारी रखने वाले देशों पर बहुत ऊंचा शुल्क लगाने की शक्ति देने की बात की गई है। लेकिन यहां एक बड़ा फर्क समझना जरूरी है। 500% Tariff को भारत पर लागू होने वाला तय शुल्क नहीं माना जा सकता। वहीं मौजूदा चर्चा में भारत के लिए 100% तक अतिरिक्त टैरिफ की संभावना ज्यादा सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। India-US Trade पर कितना असर पड़ेगा? अगर भविष्य में भारत पर भारी टैरिफ लगाया जाता है, तो इसका असर दोनों देशों के कारोबार पर दिखाई दे सकता है। अमेरिका में भारतीय सामान की कीमत बढ़ सकती है। इसका असर भारतीय exporters पर पड़ सकता है और कुछ क्षेत्रों में अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा मुश्किल हो सकती है। दूसरी तरफ अमेरिका के लिए भी भारतीय उत्पाद महंगे हो जाएंगे। इसलिए इतना बड़ा टैरिफ सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों के लिए चुनौती बन सकता है। भारत के सामने Oil और Trade का Balance भारत के लिए मामला केवल व्यापार का नहीं है। रूस से मिलने वाला कच्चा तेल देश की energy security में अहम भूमिका निभाता है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में भारत और अमेरिका के बीच इस मुद्दे पर बातचीत काफी महत्वपूर्ण हो सकती है। Trump का अगला कदम क्या होगा? अब सबकी नजर अमेरिकी कानून की आगे की प्रक्रिया और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख पर है। यदि कानून अंतिम रूप लेता है और अमेरिकी प्रशासन इसका इस्तेमाल करता है, तो भारत समेत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, अभी यह कहना सही नहीं होगा कि भारत पर 100% Tariff तय हो चुका है। फिलहाल यह एक संभावित कार्रवाई है, जिस पर आगे अमेरिकी प्रशासन का फैसला महत्वपूर्ण होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump

America में Birth Tourism पर Trump का बड़ा Action, Birthright Citizenship पर सख्ती

अमेरिका (America) में Birth Tourism को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा कदम उठाया है। Trump प्रशासन ने अमेरिका में बच्चे को जन्म देने के मकसद से होने वाली यात्राओं पर शिकंजा कसने के लिए नए Executive Orders जारी किए हैं। इसके साथ ही Birthright Citizenship को लेकर भी सरकार ने अपना रुख साफ कर दिया है। इस फैसले के बाद उन विदेशी परिवारों के बीच चिंता बढ़ सकती है, जो बच्चे के जन्म के लिए अमेरिका जाने की योजना बनाते हैं। हालांकि, एक बात साफ समझना जरूरी है कि अमेरिका में पैदा होने वाले हर विदेशी बच्चे की नागरिकता खत्म नहीं की गई है। Birth Tourism क्या है? सबसे पहले समझते हैं कि आखिर Birth Tourism होता क्या है। जब कोई विदेशी महिला या परिवार मुख्य रूप से बच्चे के जन्म के लिए अमेरिका की यात्रा करता है और बच्चे को अमेरिकी नागरिकता मिलने की उम्मीद रखता है, तो इसे Birth Tourism कहा जाता है। America में जन्म के आधार पर नागरिकता का नियम लंबे समय से लागू रहा है। इसी वजह से कई विदेशी परिवार अमेरिका में बच्चे के जन्म को लेकर योजनाएं बनाते हैं। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि कुछ लोग इस व्यवस्था का गलत फायदा उठाकर अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। Trump ने Birth Tourism पर क्यों कसा शिकंजा? राष्ट्रपति ट्रंप लंबे समय से Birthright Citizenship की मौजूदा व्यवस्था के आलोचक रहे हैं। उनका मानना है कि अमेरिका की नागरिकता को इस तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए कि कोई व्यक्ति सिर्फ बच्चे के जन्म के जरिए भविष्य में अमेरिकी नागरिकता से जुड़े फायदे हासिल कर सके। नए आदेशों के जरिए प्रशासन ने Birth Tourism से जुड़े मामलों में वीजा प्रक्रिया और जांच को सख्त करने की दिशा में कदम उठाया है। सरकार का दावा है कि इसका उद्देश्य अमेरिकी नागरिकता की अहमियत और उसकी कानूनी स्थिति को मजबूत करना है। क्या अब विदेशी माता-पिता के बच्चे को अमेरिकी Citizenship नहीं मिलेगी? यही इस पूरे मामले का सबसे अहम सवाल है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई तरह के दावे सामने आ सकते हैं, लेकिन तस्वीर इतनी सीधी नहीं है। नए फैसले का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका में पैदा होने वाले हर विदेशी माता-पिता के बच्चे को अब नागरिकता नहीं मिलेगी। प्रशासन का कदम खास परिस्थितियों और कुछ विशेष मामलों पर केंद्रित है। इसलिए यह कहना कि “अब अमेरिका में पैदा होने वाले किसी भी विदेशी बच्चे को Citizenship नहीं मिलेगी”, पूरी तरह सही तस्वीर पेश नहीं करता। पहले भी Birthright Citizenship पर Trump ने उठाए सवाल Birthright Citizenship को लेकर ट्रंप का रुख नया नहीं है। वह पहले भी अमेरिका में जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता की व्यवस्था में बदलाव की बात करते रहे हैं। ट्रंप प्रशासन की ओर से पहले भी इस दिशा में कदम उठाए गए थे। लेकिन मामला अदालतों तक पहुंच गया और इस मुद्दे पर कानूनी लड़ाई शुरू हो गई। अब नए Executive Orders के जरिए प्रशासन ने Birth Tourism और नागरिकता से जुड़े कुछ विशेष मामलों पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। Supreme Court की भूमिका भी अहम Birthright Citizenship को लेकर अमेरिका में पहले से ही कानूनी विवाद चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों के बाद ट्रंप प्रशासन को अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ा है। यही वजह है कि नए आदेशों को लेकर भी अदालतों में चुनौती की संभावना जताई जा रही है। नागरिक अधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि अदालतें इन नए कदमों को किस तरह देखती हैं। भारतीय परिवारों पर भी पड़ सकता है असर अमेरिका में बच्चे के जन्म से जुड़े मामलों में भारतीय परिवार भी इस बदलाव को लेकर सतर्क रहेंगे। खासकर वे लोग जो Pregnancy के दौरान अमेरिका की यात्रा करने की योजना बनाते हैं। अब यात्रा का उद्देश्य, Visa प्रक्रिया और अमेरिकी अधिकारियों की जांच पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, किसी भी परिवार पर इसका वास्तविक असर उसकी व्यक्तिगत परिस्थितियों और लागू अमेरिकी नियमों पर निर्भर करेगा। आगे क्या होगा? फिलहाल Trump administration ने Birth Tourism के खिलाफ अपना रुख और सख्त कर दिया है। लेकिन इस नीति की अंतिम कानूनी स्थिति अदालतों के फैसलों पर निर्भर करेगी। यानी मामला सिर्फ एक Executive Order तक सीमित नहीं है। आने वाले दिनों में US Courts, Immigration Policy और Birthright Citizenship को लेकर बड़ी कानूनी और राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है। सीधी बात यह है कि अमेरिका ने Birth Tourism पर सख्ती बढ़ा दी है, लेकिन यह कहना जल्दबाजी होगी कि अब अमेरिका में जन्म लेने वाले हर विदेशी बच्चे की अमेरिकी Citizenship खत्म हो गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Thailand

Thailand School Firing: घर में दादा-दादी की हत्या के बाद School में गोलीबारी, कई लोगों की मौत

थाईलैंड (Thailand) से सामने आई एक बेहद चौंकाने वाली घटना ने लोगों को सकते में डाल दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 9वीं कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र पर अपने घर में दादा-दादी की हत्या करने और इसके बाद स्कूल में फायरिंग करने का आरोप है। स्कूल में हुई गोलीबारी में कई लोगों के मारे जाने की खबर है। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और मामले की जांच शुरू कर दी है। घर से शुरू हुआ मामला स्कूल तक पहुंचा रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना की शुरुआत छात्र के घर से हुई। आरोप है कि उसने पहले अपने दादा-दादी को निशाना बनाया। इसके बाद वह स्कूल पहुंचा, जहां कथित तौर पर फायरिंग की गई। स्कूल में हुई इस घटना ने छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच डर पैदा कर दिया। शुरुआती जानकारी में कई लोगों के हताहत होने की बात सामने आई है। हालांकि, मृतकों और घायलों की संख्या को लेकर आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है। स्कूल में मची भगदड़ फायरिंग की खबर फैलते ही स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। छात्रों और स्टाफ को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की कोशिश की गई। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई और पुलिस ने पूरे इलाके को अपने नियंत्रण में ले लिया। अधिकारियों की ओर से घटना के पीछे की वजह और आरोपी छात्र की मानसिक स्थिति समेत कई पहलुओं की जांच की जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि फायरिंग के पीछे उसका मकसद क्या था। पुलिस जांच में जुटी घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि छात्र के पास हथियार कैसे पहुंचा और घर से स्कूल तक पहुंचने के दौरान क्या-क्या हुआ। साथ ही, पुलिस घटना से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही है और उपलब्ध सबूतों को जुटाया जा रहा है। अधिकारियों की जांच पूरी होने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। Thailand School Shooting ने उठाए सुरक्षा पर सवाल इस घटना ने एक बार फिर स्कूलों में बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल परिसर में हथियार पहुंचने से रोकने और किसी भी संभावित हिंसक घटना की समय रहते पहचान करने को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा शुरू हो गई है। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता घटना में प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाना और मामले की सच्चाई सामने लाना है। पुलिस की जांच के बाद ही यह साफ होगा कि इस वारदात के पीछे वास्तविक कारण क्या था और घटनाक्रम किस तरह आगे बढ़ा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Yemen

Yemen में Houthi Attack से मचा हड़कंप, 58 सैनिकों की मौत; Saudi Arabia में भी नुकसान

यमन (Yemen) और सऊदी अरब (Saudi Arabia) से सामने आई हमलों की खबर ने एक बार फिर Middle East की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हूती विद्रोहियों से जुड़े हमलों में यमन के 58 सैनिकों की मौत की खबर है। वहीं, सऊदी अरब में हुए हमले में 11 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। हमलों के बाद कई जगह आग लगने से हालात और तनावपूर्ण हो गए। Yemen में खूनी संघर्ष, 58 सैनिकों की मौत यमन में हूती विद्रोहियों और सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष लगातार चुनौती बना हुआ है। ताजा घटनाक्रम में 58 सैनिकों की मौत की खबर सामने आई है। इस घटना के बाद प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। यमन में लंबे समय से चल रही राजनीतिक और सैन्य अस्थिरता के बीच यह घटना हालात की गंभीरता को दिखाती है। स्थानीय स्तर पर भी लोगों के बीच डर और बेचैनी का माहौल बताया जा रहा है। Saudi Arabia में भी हमले का असर यमन के अलावा सऊदी अरब में भी हमले का असर देखने को मिला। रिपोर्ट के अनुसार, हमले में 11 लोग घायल हुए हैं। घटना के बाद कई जगहों पर आग लगने की सूचना मिली, जिसके चलते स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। वहीं, प्रभावित इलाकों में नुकसान का जायजा लेने के साथ सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है। Middle East में फिर बढ़ा तनाव यमन और सऊदी अरब के बीच हूती विद्रोहियों को लेकर तनाव कोई नया नहीं है। हालांकि, ताजा घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता जरूर बढ़ा दी है। Middle East पहले से ही कई संघर्षों और तनाव का सामना कर रहा है। ऐसे में यमन से लेकर सऊदी अरब तक हुई इन घटनाओं को गंभीरता से देखा जा रहा है। अगर इस तरह के हमले आगे भी जारी रहते हैं तो क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है। इसका असर सुरक्षा के साथ-साथ आम लोगों की जिंदगी पर भी पड़ने की आशंका है। हूती विद्रोहियों को लेकर क्यों बढ़ती है चिंता? हूती विद्रोही यमन में लंबे समय से सक्रिय हैं और उनका संघर्ष क्षेत्रीय राजनीति का अहम हिस्सा बन चुका है। सऊदी अरब भी अतीत में हूती हमलों का सामना कर चुका है। यही वजह है कि यमन में होने वाली किसी भी बड़ी सैन्य घटना का असर आसपास के देशों की सुरक्षा पर भी पड़ता है। फिलहाल ताजा हमलों को लेकर पूरी तस्वीर सामने आने का इंतजार है। आने वाले समय में यमन और Saudi Arabia की ओर से क्या प्रतिक्रिया दी जाती है, इस पर सबकी नजर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sajeeb Wazed Joy

Sajeeb Wazed Joy का बड़ा दावा: Bangladesh में बढ़ता कट्टरपंथ, बोले- ‘दूसरा Pakistan’ न बन जाए

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina के बेटे और पूर्व सलाहकार Sajeeb Wazed Joy एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने बांग्लादेश में बढ़ते इस्लामी कट्टरपंथ और सुरक्षा हालात को लेकर भारत के लिए चिंता जताई है। Joy का कहना है कि बांग्लादेश में जिस तरह राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियां बदल रही हैं, उसका असर सिर्फ बांग्लादेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। ‘दूसरे Pakistan’ जैसा खतरा? Sajeeb Wazed Joy ने बांग्लादेश में बढ़ते कट्टरपंथ को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनके बयान का मुख्य केंद्र यह है कि यदि देश में कट्टरपंथी ताकतों को बढ़ने का मौका मिलता रहा, तो बांग्लादेश की स्थिति भविष्य में पाकिस्तान जैसी दिशा ले सकती है। हालांकि, यह Joy का राजनीतिक आकलन है और इसे किसी स्वतंत्र सुरक्षा आकलन या आधिकारिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके बयान ने भारत-बांग्लादेश संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चल रही बहस को जरूर तेज कर दिया है। भारत के लिए क्यों अहम है Bangladesh? भारत और बांग्लादेश की करीब 4,000 किलोमीटर लंबी सीमा है। दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा और पूर्वोत्तर भारत से जुड़े कई अहम मुद्दे हैं। ऐसे में पड़ोसी देश में राजनीतिक अस्थिरता या कट्टरपंथी गतिविधियों का बढ़ना भारत के लिए चिंता का विषय बन सकता है। Joy पहले भी बांग्लादेश की स्थिति को भारत की सुरक्षा से जोड़कर बयान दे चुके हैं। दिसंबर 2025 में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बांग्लादेश में सुरक्षा हालात को भारत के लिए बढ़ता हुआ खतरा बताया था। Pakistan का भी आया जिक्र Joy के बयानों में Pakistan और उसकी खुफिया एजेंसी ISI का संदर्भ पहले भी सामने आ चुका है। अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हुए बड़े राजनीतिक उथल-पुथल के दौरान उन्होंने विदेशी हस्तक्षेप की आशंका जताते हुए ISI की संभावित भूमिका का आरोप लगाया था। हालांकि, उस समय भी यह एक आरोप था और इसे स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के तौर पर स्थापित नहीं किया गया था। यही वजह है कि बांग्लादेश की मौजूदा परिस्थितियों पर Joy की टिप्पणी को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है। Sheikh Hasina के बयान से भी बढ़ा तनाव इस पूरे घटनाक्रम के बीच Sheikh Hasina भी चर्चा में हैं। भारत में रह रहीं पूर्व प्रधानमंत्री ने अगस्त 2026 में दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित किया और दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का इरादा जताया। बांग्लादेश की मौजूदा सरकार ने उनके बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। ढाका और नई दिल्ली के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों के बीच Hasina के सार्वजनिक बयान ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। भारत ने भी स्पष्ट किया है कि वह उस कार्यक्रम का आयोजक नहीं था और वहां व्यक्त विचारों से खुद को अलग रखा है। बांग्लादेश की राजनीति में बढ़ती खींचतान 2024 में Sheikh Hasina की सरकार के पतन के बाद से बांग्लादेश में राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदली हैं। Awami League पर प्रतिबंध, Hasina के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और उनकी भारत में मौजूदगी दोनों देशों के बीच रिश्तों के लिए लगातार संवेदनशील मुद्दे बने हुए हैं। ऐसे समय में Sajeeb Wazed Joy का कट्टरपंथ और Pakistan से जुड़ा बयान केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है। इसके असर का दायरा भारत-बांग्लादेश संबंधों और पूरे South Asia की regional security तक जाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IRAN की खाड़ी देशों को चेतावनी, कहा- अमेरिका ने हमला किया तो ऊर्जा ठिकाने होंगे निशाने पर

IRAN की खाड़ी देशों को चेतावनी, कहा- अमेरिका ने हमला किया तो ऊर्जा ठिकाने होंगे निशाने पर

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। IRAN ने खाड़ी (गल्फ) देशों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर अमेरिका ने उस पर हमला किया, तो वह पूरे क्षेत्र के ऊर्जा ठिकानों (ऑयल और गैस सुविधाओं) को निशाना बनाएगा। ईरान के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान का कहना है कि यदि अमेरिका किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई करता है, तो उसका जवाब सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। ऐसे सभी ऊर्जा केंद्र, जिनका इस्तेमाल अमेरिका या उसके सहयोगी देशों के हित में किया जा रहा है, ईरान के निशाने पर होंगे। खाड़ी देशों में दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस उत्पादन केंद्र मौजूद हैं। ऐसे में यदि इस क्षेत्र में संघर्ष बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने की आशंका भी जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर डाल सकता है। अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता देखने को मिल सकती है। फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर मध्य पूर्व में बड़े संघर्ष की आशंका को बढ़ा दिया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Shakib Al Hasan

Bangladesh: Shakib Al Hasan के पैतृक घर पर Attack, Sheikh Hasina Event से जुड़ रहा मामला

बांग्लादेश के पूर्व क्रिकेट कप्तान और ऑलराउंडर शाकिब अल-हसन (Shakib Al Hasan) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह उनका क्रिकेट प्रदर्शन नहीं, बल्कि उनके पैतृक घर पर हुआ हमला है। मगुरा जिले में स्थित उनके घर पर अज्ञात लोगों ने पथराव किया, तोड़फोड़ की और पेट्रोल बम फेंककर आग लगाने की कोशिश की। राहत की बात यह रही कि घटना के समय घर में कोई मौजूद नहीं था, इसलिए किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। शेख हसीना के कार्यक्रम के बाद बढ़ा विवाद स्थानीय मीडिया और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, यह घटना उस वर्चुअल कार्यक्रम के कुछ समय बाद हुई, जिसमें बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारत से संबोधित किया था। शाकिब अल-हसन भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बने थे। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं और कुछ ही घंटों में उनके घर पर हमला होने की खबर सामने आई। हालांकि, जांच एजेंसियों ने अभी तक यह आधिकारिक तौर पर नहीं कहा है कि हमले के पीछे कौन लोग थे या इसका सीधा संबंध कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी से है। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। कैसे हुआ हमला? प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने पहले घर पर पत्थर फेंके, जिससे खिड़कियों और बाहरी हिस्से को नुकसान पहुंचा। इसके बाद पेट्रोल बम फेंककर आग लगाने की कोशिश की गई। स्थानीय लोगों और प्रशासन की सतर्कता के कारण आग ज्यादा नहीं फैल सकी। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके। राजनीतिक पृष्ठभूमि भी बनी चर्चा का विषय शाकिब अल-हसन सिर्फ बांग्लादेश के सबसे सफल क्रिकेटरों में से एक नहीं हैं, बल्कि वे अवामी लीग के टिकट पर सांसद भी रह चुके हैं। 2024 में बांग्लादेश की राजनीतिक परिस्थितियों में बड़े बदलाव के बाद से वे लगातार राजनीतिक चर्चाओं में बने हुए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना फिलहाल भारत में रह रही हैं। उनके हालिया संबोधन में उन्होंने देश लौटने की इच्छा जताई और अपनी पार्टी पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग दोहराई। इसी कार्यक्रम में शाकिब की मौजूदगी ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो हमले के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से साझा किए गए। इनमें कुछ लोगों को घर पर पथराव और आग लगाने की कोशिश करते हुए दिखाने का दावा किया गया है। हालांकि, इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। प्रशासन लोगों से अपील कर रहा है कि जांच पूरी होने तक अपुष्ट जानकारी साझा करने से बचें। पुलिस जांच जारी पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है और हमले में शामिल लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। अभी तक किसी संगठन या समूह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही हमले की असली वजह और जिम्मेदार लोगों के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जाएगी।
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Iran युद्ध से तेल कंपनियों की चांदी, 6 बड़ी कंपनियों ने कमाए अरबों डॉलर

Iran युद्ध से तेल कंपनियों की चांदी, 6 बड़ी कंपनियों ने कमाए अरबों डॉलर

दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और तनाव का असर आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देता है। Iran से जुड़े हालिया संघर्ष के दौरान जहां कई देशों में पेट्रोल-डीजल और जरूरी सामान महंगे हुए, वहीं दुनिया की छह बड़ी तेल कंपनियों ने रिकॉर्ड मुनाफा कमाया। रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई। इसका सबसे बड़ा फायदा तेल उत्पादन और कारोबार करने वाली बड़ी कंपनियों को मिला। इन कंपनियों ने अरबों डॉलर का मुनाफा दर्ज किया, जबकि आम लोग बढ़ती महंगाई और महंगे ईंधन की कीमतों से परेशान रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि जब भी किसी बड़े तेल उत्पादक क्षेत्र में युद्ध या तनाव बढ़ता है, तो वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ जाती है। इसी वजह से कच्चे तेल के दाम ऊपर चले जाते हैं और तेल कंपनियों की कमाई में भारी इजाफा होता है। दूसरी ओर, तेल महंगा होने का असर केवल पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता। परिवहन खर्च बढ़ने से खाद्य पदार्थों, रोजमर्रा के सामान और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ जाती हैं। इसका सीधा असर आम लोगों की जिंदगी और घरेलू बजट पर पड़ता है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर जारी युद्ध और तनाव अगर लंबे समय तक बना रहा तो महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में आम लोगों के लिए राहत मिलना आसान नहीं होगा, जबकि बड़ी ऊर्जा कंपनियां लगातार मुनाफा कमाती रहेंगी।
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Tibet-Nepal

Tibet-Nepal Border पर भारी तबाही, 11 दिन बाद Foreign Journalists ने देखा Ground Reality

Tibet-Nepal की सीमा पर 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और मलबे की तबाही के 11 दिन बाद आखिरकार विदेशी मीडिया को तिब्बत के प्रभावित इलाके तक पहुंच मिली। चीन के विदेश मंत्रालय की व्यवस्था के तहत चुनिंदा International Journalists को Gyirong County ले जाया गया, जहां आपदा के बाद की तस्वीरें पहली बार दुनिया के सामने ज्यादा साफ तौर पर आई हैं। यह आपदा इतनी भयावह थी कि चीन-नेपाल सीमा पर मौजूद कभी व्यस्त रहने वाला Gyirong Border Crossing मलबे और कीचड़ में बदल गया। पांच मंजिला कस्टम बिल्डिंग समेत कई ढांचे बाढ़ की चपेट में आ गए। मौके पर पहुंचे पत्रकारों ने बड़े पैमाने पर तबाही देखी, जबकि Rescue Teams अब भी मलबे के बीच लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। Nepal में 5,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता इस प्राकृतिक आपदा का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि नेपाल और तिब्बत में मिलाकर 5,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। मृतकों की संख्या भी 1,300 के पार पहुंच चुकी है। नेपाल में बड़ी संख्या में लापता लोग Hydropower Projects से जुड़े कर्मचारी हैं। नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक करीब 900 हाइड्रोपावर कर्मचारी लापता हैं। इनमें 121 लोगों के सुरंगों के भीतर फंसे होने की आशंका जताई गई है। मलबे से घिरी सुरंगों तक पहुंचना Rescue Teams के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। तबाही के बीच जिंदा बचने की उम्मीद इतनी बड़ी त्रासदी के बीच कुछ घटनाओं ने उम्मीद भी जगाई है। नेपाल में दो हाइड्रोपावर कर्मचारियों को करीब नौ दिन बाद सुरंग से जिंदा बाहर निकाला गया। उनके बचने की कहानी ने उन परिवारों में भी उम्मीद पैदा की है, जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। बचाव अभियान में नेपाल के साथ भारत, चीन, दक्षिण कोरिया और अमेरिका समेत कई देशों की टीमें मदद कर रही हैं। मुश्किल पहाड़ी इलाका, भारी मलबा, क्षतिग्रस्त सड़कें और सुरंगों में जमा पानी Rescue Operation को लगातार कठिन बना रहे हैं। Tibet में 43 मौतें, 519 लोग Missing चीन की ओर से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक तिब्बत के Gyirong इलाके में अब तक 43 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 519 लोग लापता हैं। इनमें 23 देशों के 261 विदेशी नागरिक भी शामिल बताए गए हैं। यही वजह है कि लापता लोगों के परिवार लगातार जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। कुछ विदेशी राजनयिकों और परिवारों ने चीन से राहत अभियान और Missing Persons को लेकर ज्यादा जानकारी साझा करने की मांग की है। Foreign Media की पहुंच पर क्यों उठे सवाल? आपदा के शुरुआती दिनों में तिब्बत के प्रभावित हिस्से तक विदेशी पत्रकारों की पहुंच सीमित रही। नेपाल की तरफ से आपदा की तस्वीरें और जमीनी रिपोर्ट लगातार सामने आती रहीं, लेकिन चीनी हिस्से की स्थिति को लेकर जानकारी अपेक्षाकृत कम उपलब्ध थी। अब 11 दिन बाद चीन की ओर से चुनिंदा विदेशी पत्रकारों को Gyirong ले जाने के बाद सीमा क्षेत्र में हुई तबाही की तस्वीरें सामने आई हैं। इससे वहां चल रहे Search and Rescue Operation और नुकसान के वास्तविक स्तर को समझने में मदद मिली है। भारत के नागरिक भी प्रभावित इस आपदा में भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार 275 भारतीय नागरिक अब भी लापता बताए गए हैं, जबकि 166 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। भारत ने नेपाल के राहत अभियान में करीब 95 टन राहत सामग्री और विशेषज्ञों की टीम भेजी है। भारतीय टीमों में Tunnel Rescue, Forensic और Medical Experts भी शामिल हैं। इन टीमों की मदद से मलबे और सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश का अभियान आगे बढ़ाया जा रहा है। सिर्फ बाढ़ नहीं, Himalayan Disaster का बड़ा संकेत इस पूरी घटना ने हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते ग्लेशियर और Glacial Lake से जुड़े जोखिमों पर भी चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के लिए यह हादसा केवल एक स्थानीय प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि पहाड़ी इलाकों में Infrastructure और Disaster Preparedness को लेकर बड़ी चेतावनी भी है। फिलहाल Nepal और Tibet में हजारों परिवार अपने लापता परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। राहत और बचाव दल मलबे, सुरंगों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में लगातार Search Operation चला रहे हैं। कुछ लोगों के कई दिनों बाद जिंदा मिलने से उम्मीद जरूर बनी है, लेकिन 5,500 से ज्यादा लोगों का अब भी लापता होना इस आपदा की भयावहता को बयां करता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Vishwas Sarang

Vishwas Sarang को बहनों का बेशुमार प्यार, Narela Rakshabandhan Mahotsav में बना नया उत्साह

नरेला विधानसभा क्षेत्र में चल रहे Rakshabandhan Mahotsav 2026 में रविवार को भाई-बहन के रिश्ते की खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। वार्ड नंबर 36, 37 और 70 में आयोजित कार्यक्रम के पांचवें दिन 24 हजार 604 बहनों ने मंत्री Vishwas Sarang को रक्षासूत्र बांधा। बहनों ने राखी बांधकर उनके प्रति स्नेह और आशीर्वाद जताया। कार्यक्रम में पहुंचते ही मंत्री विश्वास सारंग का स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। ढोल-ताशों और DJ की गूंज के बीच उन्हें बग्गी से मुख्य कार्यक्रम स्थल तक ले जाया गया। इस दौरान आतिशबाजी भी हुई। मंच पर पहुंचने के बाद सारंग ने बहनों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। बहनों के प्यार को बताया अपनी ताकत रक्षाबंधन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वास सारंग ने कहा कि रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच विश्वास, स्नेह और अपनत्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हर साल बड़ी संख्या में बहनों का प्यार और आशीर्वाद मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। कार्यक्रम में पहुंचीं बहनों से उन्होंने राखी बंधवाई और उनका आशीर्वाद लिया। सारंग ने कहा कि लाखों बहनों का स्नेह और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। चौथे दिन भी उमड़ा था बहनों का सैलाब नरेला रक्षाबंधन महोत्सव के चौथे दिन भी बड़ी संख्या में बहनें कार्यक्रम में पहुंची थीं। उस दिन 31,117 बहनों ने मंत्री विश्वास सारंग को रक्षासूत्र बांधा था। आयोजकों के अनुसार, पिछले साल के महोत्सव में कुल 1 लाख 84 हजार 632 बहनों ने रक्षासूत्र बांधा था। इस बार भी लगातार बढ़ रही भागीदारी को देखते हुए पिछले साल का आंकड़ा पार होने की उम्मीद जताई जा रही है। 7 सितंबर को इन दो वार्डों में होगा आयोजन नरेला रक्षाबंधन महोत्सव का अगला चरण 7 सितंबर 2026 को होगा। इस दिन दो वार्डों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में भी बड़ी संख्या में बहनों के शामिल होने की उम्मीद है। महोत्सव के जरिए रक्षाबंधन के पारंपरिक रिश्ते को सामाजिक जुड़ाव और भाईचारे के भाव से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। नरेला क्षेत्र में लगातार कई दिनों से चल रहे इस आयोजन में बहनों की बड़ी भागीदारी देखने को मिल रही है। पांचवें दिन 24,604 रक्षासूत्र बांधे जाने के साथ महोत्सव का उत्साह और बढ़ गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CM रेखा गुप्ता

Satya Niketan हादसे पर CM रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला, Deputy Commissioner समेत 5 Suspend

दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। पांच मंजिला इमारत के अचानक गिरने से अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे के बाद CM रेखा गुप्ता ने जिम्मेदारी तय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। MCD के साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत 5 अधिकारियों को Suspend कर दिया गया है। सरकार के इस एक्शन के बाद नगर निगम के कामकाज और इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हादसे के बाद MCD में बड़ा Action सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद MCD ने पांच अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। इनमें साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर सहित इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े अधिकारी शामिल हैं। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि इमारत की हालत को लेकर पहले कोई शिकायत या नोटिस जारी हुआ था या नहीं और निर्माण या मरम्मत के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं। PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी इमारत बताया जा रहा है कि जिस बिल्डिंग का हिस्सा ढहा, उसका इस्तेमाल PG accommodation के तौर पर किया जा रहा था। हादसे के समय वहां कई लोग मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इमारत गिरते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। धूल का गुबार उठ गया और लोग मदद के लिए मौके पर पहुंचने लगे। इसके बाद दिल्ली फायर सर्विस, NDRF और अन्य बचाव दलों ने मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। 7 लोगों की मौत, कई घायल रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे से कई लोगों को बाहर निकाला गया। हादसे में अब तक 7 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हादसे के बाद आसपास के लोगों में भी डर का माहौल है। स्थानीय स्तर पर दूसरी पुरानी और कमजोर इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। Building Owner भी पुलिस की गिरफ्त में मामले में पुलिस ने बिल्डिंग के मालिक हरिराम के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस ने उसकी तलाश के लिए कई टीमें लगाई थीं। बाद में उसे भिवाड़ी से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई। पुलिस अब हादसे से जुड़े दस्तावेज, बिल्डिंग की स्थिति और निर्माण या मरम्मत से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे और लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। आसपास की इमारतों की भी जांच सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने आसपास की इमारतों की स्थिति को लेकर भी जांच शुरू की है। अधिकारियों की नजर खास तौर पर उन भवनों पर है जो पुराने हैं या जिनमें निर्माण और मरम्मत का काम चल रहा है। इस घटना ने दिल्ली में old buildings, PG और construction safety को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर इमारत में पहले से कोई खामी थी, तो उसे समय रहते क्यों नहीं रोका गया? सरकार के Action से उठे कई सवाल MCD के पांच अधिकारियों का निलंबन सरकार की ओर से उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, असली तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। सत्य निकेतन की इस घटना ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच में हादसे की असली वजह क्या सामने आती है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CM House

CM House March पर Police का पहरा, Hamidia में Intern Doctors से धक्का-मुक्की

अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टर सोमवार को मुख्यमंत्री आवास (CM House) की ओर बढ़ रहे थे। लेकिन हमीदिया अस्पताल के पास पुलिस ने उनका रास्ता रोक दिया। डॉक्टरों को आगे जाने से रोकने के लिए पुलिस ने आसपास के रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी। इस दौरान डॉक्टरों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। प्रदर्शन को देखते हुए हमीदिया अस्पताल परिसर और आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए मौके पर Water Cannon भी तैयार रखा गया। CM House की तरफ मार्च करना चाहते थे डॉक्टर इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। इसी सिलसिले में डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने का फैसला किया। डॉक्टरों का समूह हमीदिया अस्पताल से आगे बढ़ने लगा तो पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। पुलिस की Barricading के बाद डॉक्टरों ने मौके पर नारेबाजी शुरू कर दी। आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान से आगे नहीं जाने के लिए समझाती रही। चारों तरफ से रास्ते किए गए बंद प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हमीदिया के आसपास कई रास्तों को बंद कर दिया। बैरिकेड लगाकर आवाजाही को नियंत्रित किया गया। मौके पर अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की गई, ताकि भीड़ को संभाला जा सके। Water Cannon की मौजूदगी से साफ था कि प्रशासन किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी में था। हालांकि, डॉक्टरों का प्रदर्शन अपनी मांगों को लेकर जारी रहा। मांगों पर सरकार से जवाब चाहते हैं Intern Doctors प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि वे अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। CM House तक मार्च के जरिए उनका उद्देश्य सीधे सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचना था। फिलहाल पुलिस ने डॉक्टरों को मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने से रोक दिया है। हमीदिया अस्पताल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और स्थिति पर पुलिस लगातार नजर बनाए हुए है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा डॉक्टरों की मांगों और सरकार की ओर से संभावित बातचीत को लेकर है। अब देखना होगा कि प्रदर्शन के बाद प्रशासन और इंटर्न डॉक्टरों के बीच क्या समाधान निकलता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold

Gold Rate Today: सोने की कीमत ₹2409 गिरी, चांदी भी ₹3967 सस्ती

सोना खरीदने वालों के लिए सोमवार को बाजार से थोड़ी राहत की खबर आई। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोने (Gold) और चांदी (Silver) दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। आपके दिए बाजार आंकड़ों के मुताबिक सोना करीब ₹2,409 और चांदी करीब ₹3,967 सस्ती हुई है। इसके बाद 10 ग्राम सोने का भाव करीब ₹1.52 लाख, जबकि एक किलो चांदी करीब ₹2.35 लाख के आसपास पहुंच गई। हालांकि, अलग-अलग बाजार, शुद्धता और कारोबार के समय के हिसाब से रेट में अंतर हो सकता है। सोमवार को एक अन्य बाजार रिपोर्ट में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,52,590 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,36,240 प्रति किलो बताया गया। सोने के भाव में फिर आई नरमी पिछले कुछ समय से रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास कारोबार कर रहा Gold सोमवार को दबाव में नजर आया। घरेलू बाजार में भी इसकी कीमत में कमजोरी देखने को मिली। MCX पर अक्टूबर गोल्ड फ्यूचर्स में भी गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत इससे कम है। अगर आप ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं तो ध्यान रखें कि दुकान पर मिलने वाला अंतिम रेट बाजार भाव से अलग हो सकता है। Silver Price Today: चांदी भी हुई सस्ती सोने के साथ चांदी में भी कमजोरी रही। चांदी करीब ₹3,967 प्रति किलो सस्ती होने के बाद लगभग ₹2.35 लाख प्रति किलो के स्तर पर आ गई है। हालांकि, सोमवार के अलग-अलग बाजार अपडेट में चांदी का भाव करीब ₹2.36 लाख प्रति किलो भी बताया गया है। इससे साफ है कि कारोबार के समय के साथ कीमतों में बदलाव हो रहा है। आखिर क्यों गिर रहे हैं सोना और चांदी? कीमती धातुओं में इस गिरावट का कनेक्शन सीधे ग्लोबल मार्केट से जुड़ा है। अमेरिका के रोजगार आंकड़े उम्मीद से मजबूत रहने के बाद वहां Federal Reserve की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें बदली हैं। मजबूत अमेरिकी जॉब डेटा के बाद सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना को लेकर दांव बढ़े हैं। इसका असर सोने पर पड़ा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में Spot Gold करीब 0.7% नीचे आया। वहीं Silver में भी लगभग 1% की गिरावट दर्ज की गई। अब आगे क्या होगा? अब बाजार की नजर अमेरिका से आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर है। इस सप्ताह PPI और CPI जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े जारी होने हैं। इनसे Federal Reserve की अगली ब्याज दर नीति को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में Gold और Silver में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। निवेशकों के साथ-साथ शादी या त्योहार के लिए खरीदारी करने वाले लोगों की भी बाजार पर नजर बनी हुई है। Gold खरीदते समय सिर्फ भाव न देखें अगर आप आज सोना खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो सिर्फ 10 ग्राम का बाजार भाव देखकर फैसला न लें। 22K या 24K purity, GST, making charges और ज्वेलर के अन्य शुल्क अंतिम कीमत को बदल सकते हैं। अलग-अलग शहरों और ज्वेलर्स के बीच भी रेट में अंतर हो सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले अपने स्थानीय ज्वेलर से उसी समय का ताजा रेट जरूर पता करें। बाजार में तेजी से बदलाव होने के कारण सुबह और शाम के भाव में भी अंतर देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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