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होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर फीस लगाने की तैयारी में IRAN

होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर फीस लगाने की तैयारी में IRAN

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच IRAN अब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों से फीस वसूलने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए ईरान और ओमान के बीच नए पेमेंट सिस्टम को लेकर बातचीत जारी है। वहीं, अमेरिका ने इस कदम का विरोध करते हुए साफ कहा है कि वह इसे स्वीकार नहीं करेगा। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य से हर दिन बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचती है। ऐसे में ईरान के इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल बाजार पर असर पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान जहाजों से ट्रांजिट फीस लेने के लिए ओमान के साथ वित्तीय व्यवस्था तैयार करने पर काम कर रहा है। माना जा रहा है कि इससे ईरान अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के असर को कम करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका ने इस प्रस्ताव पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर इस तरह की फीस लगाना गलत है और इससे वैश्विक व्यापार प्रभावित होगा। अमेरिका ने यह भी संकेत दिए हैं कि वह अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर इस मुद्दे पर रणनीति बना सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान यह कदम लागू करता है तो तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। भारत समेत कई देश, जो खाड़ी देशों से तेल आयात करते हैं, इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। मध्य पूर्व में पहले से जारी तनाव के बीच ईरान का यह कदम आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों पर असर डाल सकता है। Deshharpal पर पढ़ें देश-दुनिया की हर बड़ी खबर और ताजा अपडेट। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IRAN युद्ध को लेकर ट्रम्प और नेतन्याहू आमने-सामने, अमेरिका चाहता है समझौता

IRAN के खिलाफ जारी कार्रवाई को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बयान अलग-अलग नजर आ रहे हैं। जहां एक तरफ ट्रम्प का कहना है कि ईरान के साथ किसी तरह की डील और बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहिए, वहीं इजराइल का मानना है कि इस समय हमला रोकना बड़ी गलती साबित हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक अमेरिका नहीं चाहता कि हालात पूरी तरह युद्ध में बदलें, क्योंकि इससे पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ सकती है। ट्रम्प ने संकेत दिए हैं कि अगर बातचीत से समाधान निकल सकता है तो उसे मौका देना चाहिए। दूसरी ओर नेतन्याहू सरकार का कहना है कि ईरान लगातार इजराइल की सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ है। ऐसे में सैन्य कार्रवाई रोकना सही फैसला नहीं होगा। इजराइल का मानना है कि दबाव बनाए रखना जरूरी है ताकि ईरान पीछे हटने को मजबूर हो। इस मुद्दे पर दोनों देशों के नेताओं के अलग-अलग रुख ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और इजराइल के बीच रणनीति को लेकर मतभेद बढ़ते हैं तो इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है। मध्य पूर्व में पहले से ही तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और दुनिया की नजर अब अमेरिका व इजराइल की अगली रणनीति पर टिकी हुई है। अंतरराष्ट्रीय खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें Deshharpal News हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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अमेरिकी संसद में IRAN WAR रोकने का प्रस्ताव पास, Trump के 4 सांसदों ने किया विरोध में मतदान

अमेरिकी संसद में IRAN WAR रोकने का प्रस्ताव पास, Trump के 4 सांसदों ने किया विरोध में मतदान

अमेरिका में IRAN के साथ बढ़ते तनाव को लेकर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी संसद में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने से जुड़ा एक प्रस्ताव पास हो गया। खास बात यह रही कि राष्ट्रपति Donald Trump की पार्टी के 4 सांसदों ने भी उनके रुख के खिलाफ जाकर प्रस्ताव के समर्थन में वोटिंग की। यह प्रस्ताव अमेरिकी राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों को सीमित करने के उद्देश्य से लाया गया था। सांसदों का कहना है कि बिना संसद की मंजूरी के किसी भी बड़े युद्ध में अमेरिका को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। प्रस्ताव के पास होने के बाद अब यह मामला राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। हालांकि, मौजूदा राष्ट्रपति के पास इस प्रस्ताव को वीटो करने का अधिकार अभी भी मौजूद है। यानी अगर राष्ट्रपति चाहें तो इस प्रस्ताव को रोक सकते हैं। ऐसे में अंतिम फैसला अभी बाकी माना जा रहा है। अमेरिका और Iran के बीच पिछले कुछ समय से तनाव लगातार बढ़ता रहा है। इसी बीच संसद में हुई यह वोटिंग कई मायनों में अहम मानी जा रही है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला अमेरिका के भीतर युद्ध को लेकर बढ़ती चिंता को भी दिखाता है। इस मुद्दे पर अमेरिकी राजनीति दो हिस्सों में बंटी नजर आ रही है। एक तरफ कुछ नेता सख्त कार्रवाई के पक्ष में हैं, वहीं दूसरी ओर कई सांसद युद्ध से बचने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस प्रस्ताव पर नजर रखी जा रही है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के रिश्तों का असर पूरी दुनिया की राजनीति और तेल बाजार पर पड़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Xi Jinping

China Russia Summit: Xi Jinping बोले– युद्ध रोकना जरूरी, दुनिया अस्थिर

बीजिंग में हुई हाई-लेवल बैठक ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान रूस और चीन की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी की ओर खींच लिया है। इस मुलाकात में चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping और रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने न सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों पर बात की, बल्कि पूरी दुनिया की मौजूदा स्थिति पर भी गंभीर टिप्पणी की। बैठक का सबसे चर्चित बयान Xi Jinping का रहा, जिसमें उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था कमजोर हो रही है और दुनिया धीरे-धीरे “जंगलराज” जैसी स्थिति की ओर बढ़ती दिख रही है। यह बयान ऐसे समय आया है जब कई देशों में युद्ध, तनाव और राजनीतिक अस्थिरता लगातार बढ़ रही है। Iran War Alert: युद्ध रोकना जरूरी, नहीं तो बढ़ेगा संकट चर्चा के दौरान पश्चिम एशिया के हालात और Iran को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई। जिनपिंग ने साफ कहा कि किसी भी तरह के युद्ध को आगे बढ़ने से रोकना अब बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर संघर्ष और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ एक देश या क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सप्लाई और व्यापार व्यवस्था पर इसका गहरा असर पड़ेगा। China-Russia Relations: साझेदारी और मजबूत करने पर सहमति बैठक में दोनों नेताओं ने अपने लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत करने पर सहमति जताई। ऊर्जा, व्यापार, रक्षा और वैश्विक सहयोग जैसे मुद्दों पर दोनों देशों ने एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में रूस और चीन की यह साझेदारी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव दर्शाती है। Global Politics का बदलता चेहरा आज की दुनिया लगातार बदलते भू-राजनीतिक हालात, युद्धों और आर्थिक दबावों से गुजर रही है। ऐसे में जिनपिंग का “जंगलराज” वाला बयान सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि वैश्विक व्यवस्था पर गहरा सवाल भी खड़ा करता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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अमेरिकी संसद में IRAN युद्ध रोकने का प्रस्ताव पास, ट्रम्प की पार्टी के 4 सांसदों ने किया विरोध में वोट

अमेरिकी संसद में IRAN युद्ध रोकने का प्रस्ताव पास, ट्रम्प की पार्टी के 4 सांसदों ने किया विरोध में वोट

अमेरिका में IRAN के साथ बढ़ते तनाव के बीच संसद में एक बड़ा फैसला लिया गया है। अमेरिकी संसद के निचले सदन में ऐसा प्रस्ताव पास हुआ है, जिसका मकसद राष्ट्रपति की सैन्य कार्रवाई की शक्तियों को सीमित करना और ईरान के खिलाफ संभावित युद्ध को रोकना है। खास बात यह रही कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी के ही 4 सांसदों ने उनके खिलाफ जाकर इस प्रस्ताव के समर्थन में वोट किया। प्रस्ताव में कहा गया है कि बिना संसद की मंजूरी के अमेरिका ईरान के खिलाफ किसी बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत नहीं करेगा। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिकी नेताओं के बीच ईरान को लेकर मतभेद गहराते जा रहे हैं। हालांकि, यह प्रस्ताव पास होने के बाद भी अंतिम फैसला पूरी तरह तय नहीं माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति के पास इस प्रस्ताव को वीटो करने का अधिकार मौजूद है। यानी राष्ट्रपति चाहें तो इस फैसले को रोक सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच पहले से चल रहा तनाव इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद और चर्चा में आ गया है। आम अमेरिकी नागरिकों के बीच भी युद्ध को लेकर चिंता बढ़ रही है, क्योंकि किसी भी बड़े संघर्ष का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर पड़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, ट्रम्प के अपने सांसदों का विरोध में जाना यह दिखाता है कि रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी ईरान नीति को लेकर एकजुटता नहीं है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति में और गरमा सकता है। Deshharpal पर देश-दुनिया की हर बड़ी खबर सबसे पहले पढ़ें हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Internet

Iran Internet Warning: क्या दुनिया का Internet खतरे में है? जानें पूरा मामला

ईरान की ओर से दिए गए एक बयान के बाद दुनिया भर में Internet को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया से लेकर टेक एक्सपर्ट्स तक इस बात पर बहस कर रहे हैं कि क्या भविष्य में किसी बड़े साइबर संकट या भू-राजनीतिक तनाव की स्थिति में इंटरनेट सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि अभी तक किसी भी आधिकारिक संस्था या बड़ी टेक कंपनी ने यह नहीं कहा है कि वैश्विक स्तर पर इंटरनेट बंद हो सकता है, लेकिन इस बयान ने डिजिटल दुनिया की स्थिरता और सुरक्षा को लेकर नई चिंता जरूर पैदा कर दी है। Iran Statement के बाद क्यों बढ़ी हलचल? रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की तरफ से साइबर सुरक्षा और ग्लोबल इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर कुछ टिप्पणियां सामने आई हैं। इसके बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या भविष्य में किसी बड़े संघर्ष या साइबर वॉर जैसी स्थिति में इंटरनेट सिस्टम पर असर पड़ सकता है। आज इंटरनेट पूरी दुनिया को जोड़ने वाला सबसे बड़ा नेटवर्क है, लेकिन इसके अलग-अलग हिस्से जैसे सर्वर, डेटा रूटिंग और नेटवर्क कंट्रोल कई देशों और कंपनियों के हाथ में हैं। क्या सच में बंद हो सकता है Global Internet? टेक एक्सपर्ट्स इस बात को लेकर काफी साफ हैं: इसलिए “ग्लोबल इंटरनेट ब्लैकआउट” की संभावना बेहद कम मानी जा रही है। लोगों में चिंता क्यों बढ़ रही है? आज की डिजिटल लाइफ में इंटरनेट हर चीज का हिस्सा बन चुका है—बैंकिंग, ऑनलाइन पेमेंट, पढ़ाई, सरकारी सेवाएं और बिजनेस सब कुछ इसी पर निर्भर है। ऐसे में जब इंटरनेट को लेकर किसी भी तरह की अनिश्चितता की खबर आती है, तो लोगों में चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। Experts क्या कहते हैं? विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयानों को सीधे इंटरनेट बंद होने की चेतावनी के रूप में नहीं देखना चाहिए। यह ज्यादा एक “साइबर सिक्योरिटी अलर्ट” जैसा संकेत है, जो डिजिटल सिस्टम की मजबूती और रिस्क को समझने की जरूरत बताता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Russia

Russia Oil Import India: भारत ने साफ किया रुख, खरीद जारी रहेगी

भारत ने साफ कर दिया है कि वह रूस (Russia) से कच्चे तेल की खरीद जारी रखेगा और अमेरिका द्वारा लगाए गए नए प्रतिबंधों का देश की ऊर्जा आपूर्ति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। सरकार का कहना है कि प्राथमिकता आम लोगों के लिए सस्ता ईंधन और स्थिर सप्लाई सुनिश्चित करना है। अमेरिका के नए प्रतिबंध और 30 दिन की राहत हाल ही में अमेरिका ने Russia से जुड़े कुछ तेल ढुलाई जहाजों और कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाए थे, जिससे कुछ शिपमेंट प्रभावित हुए। हालांकि, पहले से चल रहे सौदों को पूरा करने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दी गई है, ताकि सप्लाई चेन बाधित न हो। भारत की ऊर्जा नीति क्या कहती है? सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत की ऊर्जा नीति पूरी तरह आर्थिक और रणनीतिक संतुलन पर आधारित है। देश का लक्ष्य है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव का असर आम जनता पर न पड़े। सस्ता तेल और आर्थिक स्थिरता लंबे समय से अलग-अलग देशों से तेल आयात करता रहा है। रूस से मिलने वाला सस्ता कच्चा तेल देश के लिए महत्वपूर्ण विकल्प बन गया है, जिससे आयात बिल नियंत्रित रहता है और महंगाई पर भी असर कम पड़ता है। भारत का कड़ा संदेश भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करते हुए अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा। वहीं रूस से तेल खरीद को एक आर्थिक निर्णय माना जा रहा है, न कि किसी राजनीतिक गठजोड़ का हिस्सा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump ने टाला Iran पर हमला, बोले- समझौता नहीं हुआ तो अमेरिकी सेना बड़े एक्शन के लिए तैयार

Trump ने टाला Iran पर हमला, बोले- समझौता नहीं हुआ तो अमेरिकी सेना बड़े एक्शन के लिए तैयार

Donald Trump ने ईरान पर होने वाले प्रस्तावित अमेरिकी हमले को फिलहाल टाल दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गल्फ देशों की अपील के बाद ट्रम्प ने यह फैसला लिया। हालांकि उन्होंने साफ कहा है कि अगर ईरान के साथ समझौता नहीं हुआ तो अमेरिकी सेना बड़े हमले के लिए पूरी तरह तैयार है। मध्य पूर्व में लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने अमेरिका से सैन्य कार्रवाई रोकने और बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की थी। इसके बाद ट्रम्प ने हमले की योजना को रोक दिया। ट्रम्प ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर बातचीत सफल नहीं होती है तो अमेरिका अब तक का सबसे बड़ा सैन्य कदम उठा सकता है। दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर सख्त निगरानी स्वीकार करे, जबकि ईरान अपनी शर्तों पर कायम है। फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान निकालें ताकि मध्य पूर्व में बड़ा युद्ध टाला जा सके। अंतरराष्ट्रीय और ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहें Deshharpal News Portal हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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43 साल बाद नॉर्वे पहुंचे PM MODI, भारत-नॉर्डिक समिट में लेंगे हिस्सा; 5 देशों के नेताओं से करेंगे मुलाकात

43 साल बाद नॉर्वे पहुंचे PM MODI, भारत-नॉर्डिक समिट में लेंगे हिस्सा; 5 देशों के नेताओं से करेंगे मुलाकात

PM Narendra Modi सोमवार को नॉर्वे पहुंच गए। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री का 43 साल बाद पहला नॉर्वे दौरा है। पीएम मोदी यहां तीसरे भारत-नॉर्डिक समिट में हिस्सा लेंगे और नॉर्डिक देशों के नेताओं के साथ अहम बैठकें करेंगे। यह दौरा भारत और नॉर्डिक देशों के बीच बढ़ते रिश्तों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पीएम मोदी नॉर्वे के प्रधानमंत्री के अलावा स्वीडन, फिनलैंड, डेनमार्क और आइसलैंड के नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, ग्रीन टेक्नोलॉजी और समुद्री सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। पीएम मोदी का यह पहला नॉर्वे दौरा है। इससे पहले साल 1983 में किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने नॉर्वे की यात्रा की थी। ऐसे में इस दौरे को ऐतिहासिक माना जा रहा है। दौरे के दौरान पीएम मोदी नॉर्वे के राजा हेराल्ड पंचम और क्वीन सोन्या से भी मुलाकात करेंगे। साथ ही भारत-नॉर्वे बिजनेस एंड रिसर्च समिट को संबोधित करेंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें Deshharpal News Portal हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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America ने Iran के सामने रखीं 5 बड़ी शर्तें, जंग खत्म करने के लिए यूरेनियम सौंपने की मांग

America ने Iran के सामने रखीं 5 बड़ी शर्तें, जंग खत्म करने के लिए यूरेनियम सौंपने की मांग

United States और Iran के बीच जारी तनाव के बीच अब युद्ध खत्म करने को लेकर नई शर्तें सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के सामने 5 बड़ी शर्तें रखी हैं। इनमें सबसे अहम मांग एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने और परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने की बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने पास मौजूद करीब 400 किलोग्राम एनरिच्ड यूरेनियम को अमेरिकी निगरानी में दे दे। इसके अलावा ईरान को अपनी परमाणु सुविधाओं को भी सीमित करना होगा। अमेरिका ने यह भी साफ कर दिया है कि युद्ध से हुए नुकसान का कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेशों में जमा ईरान की जब्त संपत्तियों में से केवल 25% हिस्सा ही वापस किया जाएगा। वहीं, किसी भी सीजफायर को बातचीत की प्रगति से जोड़ने की बात भी सामने आई है। दूसरी ओर, ईरान ने भी अपनी कुछ शर्तें रखी हैं। ईरान चाहता है कि सभी मोर्चों पर युद्ध पूरी तरह खत्म हो, आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं और विदेशों में फंसी उसकी पूरी संपत्ति वापस की जाए। साथ ही युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा देने की मांग भी की गई है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ती है या हालात और ज्यादा बिगड़ते हैं। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें Deshharpal News Portal हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Amit Shah से मिले कैप्टन अमरिंदर सिंह, कांग्रेस में वापसी की चर्चाओं के बीच बढ़ी सियासी हलचल

Amit Shah से मिले कैप्टन अमरिंदर सिंह, कांग्रेस में वापसी की चर्चाओं के बीच बढ़ी सियासी हलचल

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता Amarinder Singh ने दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah से मुलाकात की है। इस मुलाकात के बाद पंजाब की राजनीति में एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस में वापसी की अटकलें तेज पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा चल रही थी कि कैप्टन अमरिंदर सिंह जल्द ही दोबारा Indian National Congress में वापसी कर सकते हैं। हालांकि, अमित शाह से हुई मुलाकात के बाद अब इन अटकलों को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। दिल्ली में अहम मुलाकात सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में हुई इस मुलाकात को पंजाब की आगामी राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पंजाब की राजनीति पर नजर कैप्टन अमरिंदर सिंह लंबे समय तक कांग्रेस का बड़ा चेहरा रहे हैं। बाद में उन्होंने पार्टी छोड़कर बीजेपी का साथ लिया था। अब उनकी संभावित राजनीतिक दिशा को लेकर पंजाब की राजनीति में हलचल बढ़ गई है।
TMC नेताओं पर बढ़ी कार्रवाई: कैलाश मिश्रा गिरफ्तार, पूर्व विधायक सुजॉय हाजरा भी अरेस्ट

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TMC : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद All India Trinamool Congress के कई नेताओं की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी से जुड़े नेताओं पर लगातार कानूनी कार्रवाई हो रही है, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कैलाश मिश्रा बिहार से गिरफ्तार तृणमूल कांग्रेस सांसद Abhishek Banerjee के करीबी माने जाने वाले टीएमसी नेता Kailash Mishra को बिहार से गिरफ्तार किया गया है। उन पर रंगदारी और मारपीट जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस के अनुसार मामले की जांच जारी है और आगे भी पूछताछ की जाएगी। जमीन घोटाले में पूर्व विधायक गिरफ्तार वहीं, टीएमसी के पूर्व विधायक Sujoy Hazra को भी जमीन घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि जमीन से जुड़े विवादित मामलों में उनकी भूमिका सामने आई है। पार्टी पर बढ़ा दबाव लगातार हो रही गिरफ्तारियों और जांच एजेंसियों की कार्रवाई से तृणमूल कांग्रेस पर राजनीतिक दबाव बढ़ता दिख रहा है। विपक्ष भी इन मामलों को लेकर राज्य सरकार और पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठा रहा है। कई नेताओं पर जांच जारी सूत्रों के मुताबिक, पुलिस और जांच एजेंसियां टीएमसी से जुड़े अन्य नेताओं और मामलों की भी जांच कर रही हैं। आने वाले दिनों में और कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।
IATA : एशिया-पैसिफिक में एविएशन बूम: 2044 तक 4.1 अरब यात्री, भारत निभा रहा अहम भूमिका

IATA : एशिया-पैसिफिक में एविएशन बूम: 2044 तक 4.1 अरब यात्री, भारत निभा रहा अहम भूमिका

इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन International Air Transport Association(IATA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में हवाई यात्रा की मांग तेजी से बढ़ रही है, और इसमें भारत एक प्रमुख भूमिका निभा रहा है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि साल 2044 तक इस क्षेत्र में हवाई यात्रियों की संख्या 4.1 अरब तक पहुंच सकती है। कितनी तेजी से बढ़ेगा एयर ट्रैफिक? IATA के मुताबिक: यह आंकड़ा दर्शाता है कि आने वाले दो दशकों में एशिया-पैसिफिक दुनिया के सबसे बड़े एविएशन बाजारों में से एक बन जाएगा। भारत की भूमिका क्यों अहम है? IATA के एशिया-पैसिफिक रीजनल वाइस प्रेसिडेंट शेल्डन ही के अनुसार, भारत पिछले कई वर्षों से इस ग्रोथ स्टोरी का एक मजबूत हिस्सा रहा है। भारत को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते घरेलू सिविल एविएशन बाजारों में से एक माना जा रहा है, जहां एयर ट्रैफिक लगातार बढ़ रहा है। क्या हैं बड़ी चुनौतियां? रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि तेज ग्रोथ के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं, जैसे:
D. K. Shivakumar का बयान: “मैं अपना धर्म और पहचान नहीं छोड़ सकता”, आस्था को लेकर दी सफाई

D. K. Shivakumar का बयान: “मैं अपना धर्म और पहचान नहीं छोड़ सकता”, आस्था को लेकर दी सफाई

कर्नाटक के वरिष्ठ नेता और नवनियुक्त मुख्यमंत्री D. K. Shivakumar ने अपने धर्म और आस्था को लेकर उठे सवालों पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि वह न तो अपना हिंदू धर्म छोड़ सकते हैं और न ही अपनी व्यक्तिगत पहचान को दरकिनार कर सकते हैं। शपथ ग्रहण और विवाद क्या था? 3 जून को हुए शपथ ग्रहण समारोह के दौरान उन्होंने हिंदू रीति-रिवाजों का पालन किया था। इसी को लेकर राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे थे कि क्या यह किसी राजनीतिक संदेश का हिस्सा था। इस पर सफाई देते हुए शिवकुमार ने कहा कि उनका यह कदम पूरी तरह निजी आस्था से जुड़ा था, न कि राजनीति से। “ईश्वर से रिश्ता सबसे अहम” पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनके लिए राजनीति से ज्यादा महत्वपूर्ण व्यक्ति और ईश्वर के बीच का संबंध है। उनके अनुसार, मंदिर जाना और धार्मिक आस्था इसी व्यक्तिगत संबंध का हिस्सा है। राजनीति नहीं, आस्था का मामला शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि उनके धार्मिक आचरण को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी आस्था के अनुसार जीवन जीने का अधिकार है।
Haircut Price Hike: अब सैलून सेवाएं 20% महंगी, जानें नई रेट लिस्ट

Haircut Price Hike: अब सैलून सेवाएं 20% महंगी, जानें नई रेट लिस्ट

Haircut Price Hike: देश में बढ़ती महंगाई का असर अब रोजमर्रा की जरूरतों पर भी साफ दिखने लगा है। पेट्रोल-डीजल और खाद्य पदार्थों के बाद अब लोगों की जेब पर असर सीधे सैलून सेवाओं में भी देखने को मिल रहा है। महाराष्ट्र के नाई संगठनों ने हेयरकट, शेविंग और अन्य ग्रूमिंग सेवाओं की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें 6 जून से लागू हो चुकी हैं। कितनी बढ़ी कीमतें? नई दरों के अनुसार अब ग्राहकों को सैलून सेवाओं के लिए ज्यादा पैसे चुकाने होंगे: क्यों बढ़ाए गए दाम? Maharashtra Nabhik Mahamandal के प्रतिनिधियों के अनुसार, सैलून में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों और अन्य सामग्री की लागत लगातार बढ़ रही है। संगठन का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय तनाव, खासकर ईरान और अमेरिका के बीच हालात, की वजह से जरूरी सामान महंगा हो गया है, जिसका सीधा असर सैलून व्यवसाय पर पड़ा है।

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