ईरान और अमेरिका (Iran-America) के बीच एक महीने से जारी अपेक्षाकृत शांति अब फिर टूट गई है। अमेरिका ने ईरान के Larak Island पर दो लॉन्चर्स को निशाना बनाया। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा किया। इस घटनाक्रम के बाद पूरे Middle East में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है।
Hormuz के पास अमेरिका ने क्यों किया हमला?
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, Larak Island पर ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। अमेरिका का दावा है कि वहां मौजूद दो लॉन्चर्स के जरिए Strait of Hormuz में समुद्री बारूदी सुरंगें पहुंचाने की तैयारी की जा रही थी।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस कार्रवाई को सीमित और सटीक बताया। अमेरिका के अनुसार, इसका मकसद Hormuz में Commercial Shipping के लिए संभावित खतरे को रोकना था।
ईरान ने हमले को बताया बड़ी कार्रवाई
अमेरिकी हमले के बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि इस कार्रवाई में उसके सैनिकों और नागरिकों के हताहत होने की जानकारी है। ईरानी पक्ष ने अमेरिका को जवाब देने की चेतावनी भी दी।
इसके बाद ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही। हालांकि, हमले से हुए नुकसान को लेकर ईरान और अमेरिका की तरफ से अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
Jordan में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमला
ईरान के IRGC के अनुसार, जॉर्डन में मौजूद दो अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें Al Azraq और King Hussein से जुड़े सैन्य ठिकाने शामिल बताए गए हैं।
जॉर्डन की सेना के मुताबिक, उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने हवाई क्षेत्र में दाखिल हुई 8 मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया। शुरुआती जानकारी में बड़े नुकसान या बड़े पैमाने पर हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है।
Strait of Hormuz क्यों है इतना अहम?
इस पूरे विवाद के केंद्र में Strait of Hormuz है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा और समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इस रास्ते में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या बाधा का असर सिर्फ खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता।
Hormuz में तनाव बढ़ने पर तेल की सप्लाई, समुद्री परिवहन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर सीधा असर पड़ सकता है। ताजा हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई। Reuters के मुताबिक, 31 अगस्त को Brent crude करीब 2.5% बढ़कर 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया था।
एक महीने बाद फिर क्यों बढ़ा तनाव?
अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ समय से सैन्य गतिविधियों में कमी देखने को मिल रही थी। लेकिन Hormuz में समुद्री सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ था।
अमेरिका का कहना है कि ईरानी गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए खतरा पैदा कर सकती थीं। वहीं, ईरान अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को आक्रामक कदम मानता है। Larak Island पर हुए हमले और उसके बाद Jordan में जवाबी मिसाइल हमले ने दोनों देशों के बीच तनाव को फिर सुर्खियों में ला दिया है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव यहीं रुक जाएगा या फिर Middle East में तनाव और बढ़ेगा। अगर Hormuz में सैन्य गतिविधियां बढ़ती हैं, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार और Shipping Industry पर भी पड़ सकता है।
अमेरिका की कार्रवाई और ईरान की जवाबी प्रतिक्रिया के बाद अब दुनिया की नजर दोनों देशों के अगले कदम पर है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि दोनों पक्ष तनाव कम करने की कोशिश करते हैं या संघर्ष एक बार फिर बड़े स्तर पर पहुंचता है।
फिलहाल इतना साफ है कि Larak Island पर अमेरिकी कार्रवाई ने लंबे समय से चल रहे US-Iran तनाव को फिर भड़का दिया है और इसका असर पूरे Middle East के साथ-साथ Global Oil Market पर भी दिखाई दे सकता है।

