नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र की भयावह तस्वीर सामने ला दी है। तेज बारिश, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया है। नेपाल और तिब्बत को मिलाकर इस आपदा में 800 से ज्यादा लोगों की मौत की रिपोर्ट सामने आई है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की तलाश कर रहे हैं।
सबसे ज्यादा चिंता उन परिवारों को लेकर है, जिनके अपने कई दिनों से लापता हैं। दूसरी तरफ बड़ी संख्या में शव मिलने के कारण प्रशासन के सामने उनकी पहचान और अंतिम संस्कार की चुनौती भी खड़ी हो गई है।
नदियों के साथ बहकर दूर तक पहुंचे शव
Nepal Flood की रफ्तार इतनी तेज थी कि कई जगहों पर लोग और सामान पानी के साथ बह गए। कुछ शव घटनास्थल से काफी दूर तक नदियों के जरिए पहुंच गए। चितवन समेत कई इलाकों में लगातार शव बरामद किए जा रहे हैं।
नेपाल सरकार के 30 अगस्त के आधिकारिक अपडेट के अनुसार, 734 शव बरामद किए जा चुके थे और 2,498 लोग लापता थे। हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में नेपाल और तिब्बत को मिलाकर मृतकों और लापता लोगों की संख्या इससे ज्यादा बताई गई है। राहत अभियान जारी रहने के कारण आंकड़ों में बदलाव भी हो सकता है।
पहचान मुश्किल, अज्ञात शवों को दफनाने की तैयारी
इस आपदा के बाद प्रशासन के सामने सबसे बड़ी मुश्किल शवों की पहचान को लेकर है। कई शव लंबे समय तक पानी, कीचड़ और मलबे में रहने के कारण क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ऐसे में परिवारों के लिए अपने लोगों की पहचान करना आसान नहीं है।
चितवन के देवघाट क्षेत्र में अज्ञात शवों को दफनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रशासन ने बड़ी संख्या में कब्रें तैयार कराई हैं। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि अस्पतालों और शवगृहों में शव रखने की क्षमता लगातार कम पड़ रही थी।
हालांकि प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि दफनाए जाने वाले शवों का रिकॉर्ड सुरक्षित रहे।
DNA से होगी लापता लोगों की पहचान
अज्ञात शवों की पहचान के लिए DNA Sampling और Forensic Investigation पर खास जोर दिया जा रहा है। शवों की तस्वीरें, DNA सैंपल और उपलब्ध पहचान संबंधी जानकारी रिकॉर्ड की जा रही है।
इससे भविष्य में किसी परिवार के अपने लापता सदस्य का पता चलने पर DNA जांच के जरिए पहचान करने में मदद मिल सकती है। भारत की ओर से भी फॉरेंसिक विशेषज्ञ नेपाल की सहायता कर रहे हैं।
हजारों जवान Rescue Operation में जुटे
बाढ़ प्रभावित इलाकों में Nepal Army, Nepal Police और Armed Police Force के जवान राहत एवं बचाव अभियान में लगे हुए हैं। हेलिकॉप्टरों की मदद से दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम किया जा रहा है।
कई इलाकों में सड़कें टूट गई हैं और पुलों को भी नुकसान पहुंचा है। इसके कारण जमीन के रास्ते राहत पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में हेलिकॉप्टर और स्थानीय बचाव दल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
खराब मौसम बना सबसे बड़ी चुनौती
Rescue Operation के दौरान खराब मौसम सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बना हुआ है। लगातार बारिश, मलबा और भूस्खलन के कारण कई स्थानों तक पहुंचना मुश्किल है।
कुछ जगहों पर पानी का बहाव इतना तेज है कि बचावकर्मियों को भी जोखिम उठाना पड़ रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और बरामद शवों की पहचान करना है।
हर परिवार को अपनों के मिलने का इंतजार
इस प्राकृतिक आपदा के बीच सबसे दर्दनाक तस्वीर उन परिवारों की है, जो अस्पतालों और पहचान केंद्रों के बाहर अपने रिश्तेदारों की जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
किसी के पास सिर्फ एक फोटो है तो किसी के पास अपने लापता परिजन से जुड़ी कुछ पुरानी जानकारी। ऐसे में DNA जांच और फॉरेंसिक रिकॉर्ड परिवारों के लिए उम्मीद की एक महत्वपूर्ण कड़ी बने हुए हैं।
नेपाल में राहत और बचाव अभियान अभी जारी है। आने वाले दिनों में जब दुर्गम इलाकों तक टीमें पहुंचेंगी, तब इस आपदा से हुए कुल नुकसान और लापता लोगों की वास्तविक संख्या की तस्वीर और साफ हो सकती है।
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