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US Airstrikes in Yemen

US Airstrikes in Yemen: अमेरिकी हमले में 38 लोगों की मौत, 100 से अधिक घायल

18 अप्रैल 2025, Yemen के रस इसा (Ras Isa) ऑयल पोर्ट पर अमेरिका द्वारा किए गए जबरदस्त एयरस्ट्राइक में कम से कम 38 लोगों की मौत हो गई है और 100 से अधिक घायल बताए जा रहे हैं। यह हमला उस वक्त हुआ जब यमन के हूथी विद्रोही गुट इस बंदरगाह का इस्तेमाल कर रहे थे। इस हमले से इलाके में भारी तबाही और एक विशाल आग का गोला (Fireball) देखने को मिला। क्या हुआ था हमला? अमेरिकी सेना CENTCOM (U.S. Central Command) ने इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह एयरस्ट्राइक हूथी विद्रोहियों के फ्यूल नेटवर्क को खत्म करने और उनके राजस्व स्रोतों को बंद करने के मकसद से किया गया था। हमले के बाद क्या हुआ? हूथी समर्थक चैनल Al Masirah TV ने हमले की भयावह तस्वीरें साझा कीं, जिनमें शव, बिखरी चीज़ें और एक जलता हुआ ईंधन टर्मिनल साफ दिखा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले में पैरामेडिक्स और आम नागरिकों की भी जान गई है। हूथी गुट ने इस हमले को “यमन की संप्रभुता पर खुला हमला” करार दिया और कहा कि यह पोर्ट वर्षों से आम यमनी नागरिकों की सेवा कर रहा था। रणनीतिक महत्व क्यों है इस पोर्ट का? बढ़ते तनाव की वजह क्या है? यह हमला अमेरिका द्वारा पिछले कुछ हफ्तों से चलाए जा रहे एक बड़े मिलिट्री ऑपरेशन का हिस्सा है, जिसमें: गौरतलब है कि नवंबर 2023 से अब तक हूथी विद्रोही 100 से अधिक कॉमर्शियल जहाजों पर हमला कर चुके हैं, जिनमें 2 जहाज डूब चुके और 4 नाविकों की जान जा चुकी है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं? अब तक संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस हमले पर चिंता जाहिर की है, लेकिन अमेरिका ने अपने बयान में साफ किया है कि इस ऑपरेशन का मकसद हूथी आतंकवाद को आर्थिक रूप से कमजोर करना है। Deshharpal पर हम आपको अंतरराष्ट्रीय खबरों से लेकर लोकल अपडेट्स तक सब कुछ देते हैं !
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चीन का बड़ा फैसला: बोइंग जेट नहीं खरीदेगा, अमेरिका को दिया करारा जवाब

चीन का बड़ा फैसला: बोइंग जेट नहीं खरीदेगा, अमेरिका को दिया करारा जवाब

बीजिंग/वॉशिंगटन – अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव का असर अब विमान और धातुओं के व्यापार पर भी पड़ने लगा है। चीन ने साफ कर दिया है कि वह अब अमेरिकी विमान कंपनी बोइंग से नए जेट नहीं खरीदेगा। इसके साथ ही, चीन ने अमेरिका को कीमती मेटल्स (rare earth metals) की सप्लाई भी रोक दी है। क्यों लिया ये बड़ा फैसला? यह सब हुआ है अमेरिका द्वारा चीन पर लगाए गए नए टैक्स (टैरिफ) के बाद। अमेरिका ने हाल ही में कुछ चीनी सामानों पर भारी टैरिफ लगाए हैं। इसके जवाब में चीन ने बोइंग की डिलीवरी रोकने और कीमती मेटल्स की सप्लाई बंद करने का निर्णय लिया। बोइंग को लगेगा बड़ा झटका बोइंग के लिए चीन एक बड़ा ग्राहक रहा है। हर साल चीन दर्जनों बोइंग विमान खरीदता रहा है। लेकिन अब जब चीन ने मना कर दिया है, तो इसका सीधा असर अमेरिका की इकोनॉमी और बोइंग कंपनी पर पड़ेगा। टेक्नोलॉजी और मेटल की लड़ाई चीन के पास दुर्लभ मेटल्स का बड़ा भंडार है – जैसे लैन्थेनम, नियोडिमियम, डाइसप्रोसियम आदि। ये मेटल्स इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज़, गाड़ियाँ और रक्षा उपकरण बनाने में काम आते हैं। अगर चीन इनकी सप्लाई रोक देता है, तो अमेरिका और बाकी देशों की टेक इंडस्ट्री को बड़ी दिक्कत हो सकती है। आम लोगों पर भी असर? इस तरह की ट्रेड वॉर का असर आम लोगों पर भी पड़ता है। उड़ानों की कीमतें बढ़ सकती हैं, गैजेट्स महंगे हो सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता बढ़ जाती है।
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US Visa New Rules 2025

US Visa New Rules 2025: ट्रंप प्रशासन के नए कानून से Non-Citizens रहें सावधान, हर समय साथ रखें ये दस्तावेज़

अगर आपका बेटा, दामाद या कोई जानने वाला अमेरिका (US) में रहता है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। अमेरिका में रहने वाले H-1B, F-1 या अन्य वीज़ा धारकों के लिए ट्रंप प्रशासन ने सख्त कानून लागू कर दिए हैं। अब यदि कोई भी गैर-अमेरिकी नागरिक अमेरिका में रह रहा है, तो उसे अपनी कानूनी स्थिति के प्रमाण हर समय साथ रखने होंगे। ये निर्देश 11 अप्रैल 2025 से लागू हो चुके हैं। क्यों जरूरी है ये कानून? यह नियम ट्रंप की कार्यकारी कार्रवाई ‘Protecting the American Public from Unauthorized Intrusions’ का हिस्सा है, जिसका मकसद अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे लोगों पर सख्त कार्रवाई करना है। यह कानून 1940 के Alien Registration Act पर आधारित है, लेकिन अब इसे कड़े दंड और नियमों के साथ लागू किया गया है। Alien Registration Requirement (ARR) के मुख्य बिंदु: भारतीयों पर इसका असर: अमेरिका में लगभग 54 लाख भारतीय रहते हैं, जिनमें करीब 2.2 लाख अवैध रूप से रह रहे हैं। H-1B वीजा और स्टूडेंट वीजा धारकों को दोबारा पंजीकरण की जरूरत नहीं है, लेकिन उन्हें अपने दस्तावेज़ हर समय साथ रखने होंगे। क्या करें भारतीय अप्रवासी? इमिग्रेशन वकीलों के सुझाव: अगर अधिकारी रोकें तो: गिरफ्तारी की स्थिति में: नागरिकों के लिए राहत: अमेरिकी नागरिकों को अपनी नागरिकता का प्रमाण साथ रखने की जरूरत नहीं है, लेकिन गैर-अमेरिकी नागरिकों को अब हर वक्त सतर्क रहना होगा। निष्कर्ष: अगर आपके परिवार या मित्र अमेरिका में रहते हैं, तो इस खबर को उनसे जरूर साझा करें। यह नया कानून अप्रवासियों के लिए बड़ी चेतावनी है। समय रहते दस्तावेज़ों को अपडेट करें और अपने अधिकारों की जानकारी रखें। पढ़ते रहिए DeshHarpal – आपकी खबर, आपकी भाषा में।
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Tariff Relief

US ने India को दी 90 दिन की Tariff Relief, PM Modi-Trump Deal से बढ़ेगा ₹500 Billion का Trade

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भारत पर लगाए गए अतिरिक्त आयात शुल्क (Tariffs) पर 90 दिनों की राहत देने का फैसला किया है। इस फैसले का स्वागत करते हुए भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने कहा कि भारत इस पूरे मामले को बेहद कुशलता से संभाल रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फरवरी में ही इस दिशा में सहमति बन चुकी थी। PM Modi और Trump पहले ही कर चुके थे Trade Deal की Planning पीयूष गोयल ने ANI से बातचीत में कहा,“PM नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने फरवरी में ही यह तय कर लिया था कि दोनों देश एक Bilateral Trade Agreement पर साइन करेंगे, जिससे व्यापार 500 अरब डॉलर तक पहुंच सकेगा। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि दोनों देशों के बीच बातचीत अच्छी प्रगति कर रही है और इस 90 दिनों की राहत से बातचीत को अंतिम रूप देने में मदद मिलेगी। Exporters को मिली राहत, अब समझौतों पर तेज़ी से होगा काम फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) के अध्यक्ष एस.सी. रल्हान ने भी अमेरिकी प्रशासन के इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा:“यह हमारे निर्यातकों के लिए बहुत बड़ी राहत है। यह 90 दिन की राहत एक कूटनीतिक खिड़की की तरह है, जिसमें हम अहम व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दे सकते हैं।” वाणिज्य मंत्रालय ने भी आश्वासन दिया है कि प्रस्तावित व्यापार समझौते को जल्द से जल्द फाइनल किया जाएगा। चीन पर टैरिफ बढ़ा, लेकिन India को मिली छूट ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता के बीच अमेरिका ने चीन पर टैरिफ बढ़ाकर 125% कर दिया है, जबकि भारत सहित कई अन्य देशों को 90 दिनों की छूट दी गई है। हालांकि भारत पर अब भी 10% का बेसिक टैरिफ लागू है, जो 5 अप्रैल से प्रभावी हुआ है। अमेरिका ने भारत पर कुल मिलाकर 26% अतिरिक्त शुल्क लगाया था, जिसमें से अधिकतर पर अस्थायी राहत दी गई है। क्या है आगे की राह? इस अस्थायी राहत के चलते भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता को मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह वार्ता सफल रहती है, तो दोनों देशों के बीच $500 अरब डॉलर का व्यापार संभव है। इससे न केवल व्यापार संबंध बेहतर होंगे, बल्कि निवेश और रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे। निष्कर्ष:अमेरिका की तरफ से दी गई यह 90 दिनों की टैरिफ राहत भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह न केवल एक्सपोर्टर्स को राहत देगा, बल्कि दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का रास्ता खोलता है।
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तहव्वुर राणा

26/11 का गुनहगार तहव्वुर राणा जल्द भारत में, US कोर्ट ने प्रत्यर्पण को दी मंज़ूरी

2008 के मुंबई आतंकी हमलों (26/11) के एक मुख्य साजिशकर्ता तहव्वुर हुसैन राणा को अमेरिका से भारत लाया जा रहा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उसकी प्रत्यर्पण याचिका खारिज कर दी, जिससे भारत आने का रास्ता साफ हो गया है। भारत की जांच एजेंसियों NIA (नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) और RAW की टीमें पहले से ही अमेरिका में हैं और उसे जल्द भारत लाया जाएगा। कौन है तहव्वुर राणा? तहव्वुर राणा पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक हैं, जिनका नाम 26/11 हमलों की साजिश में सामने आया था। वे डेविड कोलमैन हेडली के करीबी दोस्त हैं, जो पहले ही भारत की अदालत में हमलों की साजिश कबूल कर चुका है। हेडली ने भारत में रेकी की थी और आतंकियों को जानकारी दी थी – जिसमें तहव्वुर राणा की भूमिका सहयोगी की थी। राणा पर आरोप है कि उसने फर्जी बिजनेस वीज़ा और ट्रैवल एजेंसी के जरिए हेडली को भारत भेजा, ताकि वह मुंबई में हमले की तैयारी कर सके। कैसे हुआ प्रत्यर्पण का रास्ता साफ? राणा लंबे समय से अमेरिका में जेल में बंद था। भारत सरकार ने उसके प्रत्यर्पण की मांग की थी। हालांकि, राणा ने अदालत में कई बार याचिकाएं डालकर भारत भेजे जाने का विरोध किया। मगर आखिरकार, अमेरिका की अदालत ने साफ कर दिया कि उसे भारत भेजा जा सकता है। यह फैसला भारत की कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। इससे यह भी संदेश गया है कि आतंक के खिलाफ भारत वैश्विक मंच पर गंभीरता से काम कर रहा है। 26/11 हमलों की पृष्ठभूमि 26 नवंबर 2008 को मुंबई पर आतंकी हमला हुआ था। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने शहर के कई बड़े स्थानों जैसे ताज होटल, ओबेरॉय, सीएसटी स्टेशन, नरीमन हाउस आदि को निशाना बनाया था। इस हमले में 166 मासूम लोगों की जान गई, जिनमें कई विदेशी नागरिक और सुरक्षाकर्मी भी शामिल थे। भारत ने इस घटना को कभी नहीं भूला और लगातार दोषियों को सजा दिलाने की कोशिश की। भारत के लिए क्यों है यह महत्वपूर्ण? तहव्वुर राणा का भारत आना 26/11 के पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए न्याय की ओर एक बड़ा कदम है। इससे NIA को जांच को आगे बढ़ाने और नए सबूत जुटाने में मदद मिलेगी। इससे यह भी साबित होता है कि भारत अब केवल आतंकी हमलों को सहने वाला देश नहीं, बल्कि उनके खिलाफ कड़ा कदम उठाने वाला राष्ट्र बन चुका है।
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Mitra Vibhushan

PM Modi को मिला Sri Lanka का ‘Mitra Vibhushan’, कहा– पड़ोसी ही नहीं, सच्चा दोस्त है श्रीलंका

भारत और श्रीलंका के बीच गहरे और ऐतिहासिक संबंधों की एक और मिसाल उस वक्त सामने आई जब श्रीलंका सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च विदेशी सम्मान “मित्र विभूषण” से नवाजा। इस सम्मान के जरिए श्रीलंका ने पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत द्वारा दिए गए सहयोग, विशेष रूप से आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक क्षेत्रों में किए गए योगदान की सराहना की। PM Modi बोले – श्रीलंका भारत का सिर्फ पड़ोसी नहीं, बल्कि भरोसेमंद मित्र है सम्मान प्राप्त करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “यह सिर्फ एक सम्मान नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास और मित्रता का प्रतीक है। श्रीलंका सिर्फ भारत का पड़ोसी नहीं, बल्कि एक ऐसा मित्र है जो हर परिस्थिति में साथ खड़ा रहता है।” क्या है ‘मित्र विभूषण’ सम्मान? ‘मित्र विभूषण’ श्रीलंका का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है जो किसी विदेशी नेता को दिया जाता है। अब तक यह सम्मान केवल तीन बार दिया गया है, जिससे इसकी विशेषता का अंदाजा लगाया जा सकता है। द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा पीएम मोदी की यह यात्रा श्रीलंका के नए राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के न्योते पर हुई। दोनों देशों ने कई प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार देने पर सहमति जताई, जिनमें प्रमुख हैं: चीन के प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति भारत और श्रीलंका के इस सहयोग को चीन के बढ़ते प्रभाव के मुकाबले में एक अहम रणनीतिक कदम माना जा रहा है। हंबनटोटा बंदरगाह पर चीन की उपस्थिति को देखते हुए भारत की यह साझेदारी श्रीलंका के लिए भी संतुलन का काम करेगी। सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों का ज़िक्र पीएम मोदी ने कहा कि भारत और श्रीलंका के संबंध केवल राजनीतिक या आर्थिक नहीं हैं, बल्कि ये सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत से गहराई से जुड़े हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में यह साझेदारी पूरे दक्षिण एशिया में शांति, स्थिरता और विकास का रास्ता खोलेगी।
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China ने USA पर 34% जवाबी टैरिफ लगाया, राष्ट्रपति ट्रम्प बोले – ‘वो डर गए हैं, ये कदम उन्हें भारी पड़ेगा’

“देश हरपल” विशेष रिपोर्ट 📅 दिनांक: 4 अप्रैल 2025✍🏻 देश हरपल ब्यूरो अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक जंग ने एक बार फिर तगड़ा मोड़ ले लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, जो 2024 में दोबारा अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं, अब चीन को आर्थिक मोर्चे पर घेरने में पूरी आक्रामकता दिखा रहे हैं। अमेरिका ने लगाया 34% टैरिफ, चीन ने दिया जवाब हाल ही में राष्ट्रपति ट्रम्प ने 60 देशों पर नए टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जिसमें चीन पर 34% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया। इससे पहले ट्रम्प प्रशासन ने एक महीने में दो बार चीन पर 10-10% टैरिफ लगाया था। अब चीन पर कुल मिलाकर 54% आयात शुल्क लागू हो चुका है।इसके जवाब में चीन ने भी अमेरिका पर 34% का जवाबी टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है, जो 10 अप्रैल 2025 से लागू होगा। ट्रम्प ने इस मुद्दे पर ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा: “चीन ने गलत कदम उठाया है। वे घबरा गए हैं। यह एक ऐसी चीज है जिसे वे बर्दाश्त नहीं कर सकते। चीन का जवाबी टैरिफ उन्हें बहुत भारी पड़ेगा।” चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “अमेरिका का यह कदम WTO नियमों का उल्लंघन है। इससे चीन के कानूनी व्यापारिक अधिकारों का हनन हो रहा है। हम अपने अधिकारों की रक्षा करेंगे।” ट्रम्प की नीति: ‘अमेरिका फर्स्ट’ 2.0 ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद से ही उन्होंने व्यापारिक मोर्चे पर ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को और तेज़ कर दिया है। ट्रम्प का मानना है कि चीन वर्षों से अमेरिकी व्यापार और टेक्नोलॉजी का शोषण करता आया है और अब समय आ गया है कि अमेरिका मजबूत जवाब दे। ट्रम्प प्रशासन का दावा है कि नए टैरिफ से चीन की अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा और अमेरिकी उद्योगों को फायदा होगा। वैश्विक बाजारों पर असर इस व्यापार युद्ध के कारण वैश्विक बाजारों में हलचल देखने को मिल रही है। एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट आई है, वहीं डॉलर में मजबूती देखी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टकराव लंबा चला, तो इससे वैश्विक सप्लाई चेन और आर्थिक स्थिरता पर बुरा असर पड़ सकता है। भारत के लिए अवसर या चुनौती? भारत के लिए यह परिस्थिति दोधारी तलवार की तरह है। एक ओर जहां अमेरिका-चीन के बीच बढ़ते तनाव से भारत को वैकल्पिक सप्लायर बनने का मौका मिल सकता है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का असर भारत की निर्यात नीति पर भी पड़ सकता है। निष्कर्ष:डोनाल्ड ट्रम्प की चीन को लेकर आक्रामक नीति एक बार फिर वैश्विक व्यापार जगत को नई दिशा दे रही है। आने वाले हफ्तों में इस व्यापार युद्ध का असर न केवल अमेरिका और चीन, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखेगा। 👉 देश-विदेश से जुड़ी ऐसी ही बड़ी खबरों के लिए पढ़ते रहिए देश हरपल – हरपल आपके साथ।
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बैंकॉक में पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस की अहम मुलाकात: बांग्लादेश ने किया था बैठक का अनुरोध

रिपोर्ट: देश हरपल न्यूज | दिनांक: 4 अप्रैल 2025 बैंकॉक में पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस की अहम मुलाकात, बांग्लादेश ने खुद रखा था अनुरोध – दक्षिण एशिया में बदलते समीकरणों के बीच बड़ी कूटनीतिक बातचीत बैंकॉक में BIMSTEC सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश के नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के बीच एक विशेष मुलाकात हुई। यह मुलाकात अपने आप में कई राजनीतिक और कूटनीतिक संकेतों से भरी हुई मानी जा रही है, खासकर ऐसे समय में जब बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार सत्ता से बाहर हो चुकी है और देश में अल्पसंख्यकों पर हमलों की खबरें अंतरराष्ट्रीय मंच पर चिंता का विषय बनी हुई हैं। बांग्लादेश की तरफ से हुआ था मुलाकात का अनुरोधमीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बैठक की पहल बांग्लादेश की ओर से की गई थी। मोहम्मद यूनुस जो कि एक प्रसिद्ध सामाजिक उद्यमी और ‘ग्रामीण बैंक’ के संस्थापक हैं, उन्होंने खुद पीएम मोदी से भेंट करने की इच्छा जताई थी। बांग्लादेश की मौजूदा सत्ता परिवर्तन के बीच यह कदम कई मायनों में महत्वपूर्ण है। राजनीतिक संदेशों से भरी बातचीतमाना जा रहा है कि यह मुलाकात सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि इसके जरिए बांग्लादेश की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर भारत को एक भरोसा दिलाने की कोशिश की गई है। भारत, जो कि बांग्लादेश का सबसे करीबी और बड़ा पड़ोसी है, वहां के हालिया घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए है। मोहम्मद यूनुस की पीएम मोदी से मुलाकात को वहां की नई राजनीतिक व्यवस्था के संभावित संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अल्पसंख्यकों पर हमलों की पृष्ठभूमि में मुलाकात पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेश में हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदायों पर हुए हमलों की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे वहां की सामाजिक स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं। भारत इन मुद्दों को लेकर लगातार सतर्क रहा है। ऐसे में मोहम्मद यूनुस की यह मुलाकात यह संकेत भी देती है कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद, नई सरकार या उसके समर्थक भारत से रिश्तों को और बेहतर करना चाहते हैं। यूनुस को लेकर बांग्लादेश में भी उथल-पुथलयह भी ध्यान देने योग्य है कि मोहम्मद यूनुस खुद भी बांग्लादेश की राजनीति में एक विवादित शख्सियत रहे हैं। शेख हसीना की सरकार के कार्यकाल में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले भी दर्ज हुए थे। लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी छवि एक विचारशील और परिवर्तनकारी नेता की रही है। भारत-बांग्लादेश रिश्तों में नया अध्याय?बैंकॉक में हुई इस मुलाकात को भारत और बांग्लादेश के रिश्तों के संभावित नए अध्याय की शुरुआत के तौर पर देखा जा सकता है। पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस की यह बातचीत केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि रणनीतिक भी हो सकती है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के संबंध किस दिशा में बढ़ते हैं, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा। देश और विदेश की ऐसी ही अहम खबरों के लिए जुड़े रहिए — देश हरपल न्यूज़ के साथ।
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Donald Trump के 26% टैरिफ

Donald Trump के 26% टैरिफ से भारत को नुकसान या फायदा? सरकार कर रही है असर का विश्लेषण

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में 26% अतिरिक्त टैरिफ (टैक्स) लगाने का ऐलान किया है। इस फैसले का असर भारत सहित कई देशों पर पड़ सकता है। भारत सरकार इस टैरिफ के प्रभाव का विश्लेषण कर रही है और इसका हल निकालने की कोशिश कर रही है। टैरिफ कब लागू होगा? टैरिफ दो चरणों में लागू होगा: भारत सरकार की रणनीति भारत सरकार ने पहले से ही इस स्थिति से निपटने की तैयारी कर रखी थी। वाणिज्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पर नजर बनाए रखने के लिए एक कंट्रोल रूम बनाया था। सरकार का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह नुकसानदायक नहीं है, क्योंकि अभी बातचीत की गुंजाइश बाकी है। ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि अगर कोई देश अमेरिका की व्यापारिक चिंताओं को दूर करता है, तो टैरिफ में राहत मिल सकती है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की कोशिशें भारत ने इस टैरिफ से छूट पाने के लिए पहले ही अमेरिका से बातचीत शुरू कर दी थी। इसी सिलसिले में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पिछले महीने अमेरिका गए थे। दोनों देशों के बीच एक व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है, जिसका पहला चरण सितंबर-अक्टूबर तक पूरा करने की योजना है। इसके अलावा, भारत पहले ही कुछ कदम उठा चुका है: डोनाल्ड ट्रंप का बयान और भारत पर असर 2 अप्रैल को ट्रंप ने इस टैरिफ की घोषणा की और इसे “लिबरेशन डे” (मुक्ति दिवस) करार दिया। उन्होंने कहा कि यह अमेरिकी उद्योग को फिर से मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। ट्रंप ने भारत की व्यापार नीतियों की आलोचना करते हुए कहा, “भारत हमसे 52% टैक्स लेता है, जो बहुत ज्यादा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं, लेकिन मैंने उनसे कहा कि यह सही नहीं है।” उन्होंने बताया कि अमेरिका ने भारत पर “डिस्काउंटेड” यानी रियायती टैरिफ लगाया है, जो 26% है। भारत पर क्या असर पड़ेगा? भारत सरकार इस टैरिफ के प्रभाव का विश्लेषण कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों को प्रभावित कर सकता है। क्या होगा आगे?
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Trump

ट्रंप का ‘डर्टी-15’ लिस्ट: किन देशों पर गिरेगी भारी टैरिफ की गाज?

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति और 2024 के चुनावी दौड़ में फिर से मैदान में उतरे डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संभावित आर्थिक एजेंडे का एक बड़ा खुलासा किया है। ट्रंप ने ‘डर्टी-15’ नाम से उन 15 देशों की सूची तैयार की है, जिन पर वह भारी टैरिफ लगाने की योजना बना रहे हैं। उनका कहना है कि ये देश अमेरिका के साथ व्यापार में “अनुचित लाभ” उठा रहे हैं और इसलिए इन्हें ‘रिसिप्रोकल टैरिफ’ (पारस्परिक शुल्क) देना होगा। क्या है ट्रंप की ‘डर्टी-15’ लिस्ट? ट्रंप ने अमेरिका के व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए उन देशों की पहचान की है, जिन पर नए टैरिफ लगाए जाएंगे। इनमें चीन, भारत, मैक्सिको, जर्मनी, वियतनाम, जापान, कनाडा और कई अन्य देश शामिल हैं। ट्रंप के मुताबिक, ये देश अमेरिका के बाजारों से फायदा उठाते हैं लेकिन बदले में समान अवसर नहीं देते। किन देशों को झेलनी पड़ेगी टैरिफ की मार? इस लिस्ट में प्रमुख रूप से वे देश हैं जो अमेरिका को बड़े पैमाने पर निर्यात करते हैं, लेकिन बदले में अमेरिकी सामान पर ऊंचे शुल्क लगाते हैं या व्यापार में असंतुलन बनाए रखते हैं। भारत और चीन खासतौर पर इस नीति से प्रभावित हो सकते हैं क्योंकि दोनों देश अमेरिका को बड़े पैमाने पर टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटोमोबाइल और आईटी सेक्टर में सेवाएं और उत्पाद निर्यात करते हैं। ट्रंप की व्यापार नीति और प्रभाव ट्रंप का यह कदम उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे अमेरिका में कुछ उद्योगों को फायदा हो सकता है, लेकिन कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों और निर्यात पर निर्भर देशों को बड़ा झटका लग सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ट्रंप 2024 का चुनाव जीतते हैं, तो उनकी टैरिफ नीति वैश्विक व्यापार को अस्थिर कर सकती है और चीन, भारत जैसे देशों के साथ आर्थिक संबंधों को प्रभावित कर सकती है। भारत पर असर? भारत, जो अमेरिका के लिए एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार है, ट्रंप की इस नई नीति से प्रभावित हो सकता है। अगर ट्रंप भारी टैरिफ लगाते हैं, तो भारत के टेक्सटाइल, आईटी और फार्मास्युटिकल उद्योगों को नुकसान हो सकता है। क्या ट्रंप का यह फैसला वाकई अमेरिका के हित में होगा या वैश्विक व्यापार के लिए एक नई चुनौती खड़ी करेगा? यह आने वाले समय में साफ होगा।
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उज्जैन में खड़े हनुमान की प्रतिमा नहीं हिली, IIT इंदौर की टीम ने शुरू की जांच

उज्जैन: सिंहस्थ की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण के लिए उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर का ढांचा हटाया गया, लेकिन मंदिर में स्थापित हनुमान प्रतिमा को हटाने की कोशिश सफल नहीं हो सकी। जेसीबी और क्रेन की मदद से करीब 10 दिनों तक प्रयास किए गए, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। लगातार कोशिशों के बाद अब प्रशासन ने विशेषज्ञों की मदद ली है। IIT इंदौर की टीम ने मंगलवार को मौके पर पहुंचकर विशेष उपकरणों से प्रतिमा और आसपास की जमीन की जांच की। टीम यह पता लगा रही है कि प्रतिमा जमीन के अंदर कितनी गहराई तक है और उसके नीचे या आसपास किस तरह की संरचना मौजूद है। IIT इंदौर की टीम ने करीब दो घंटे की जांच IIT इंदौर के विशेषज्ञों ने करीब दो घंटे तक मंदिर परिसर में जांच की। विशेष उपकरणों के जरिए प्रतिमा की गहराई और आसपास की जमीन की संरचना से जुड़ी जानकारी जुटाई गई है। अब विशेषज्ञ अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेंगे। रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि प्रतिमा को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह ले जाना संभव है या नहीं। नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा के मुताबिक, मंदिर के पंडित के आग्रह पर IIT इंदौर की टीम को बुलाया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही प्रतिमा को हटाने की प्रक्रिया और तारीख तय की जाएगी। सिंहस्थ के लिए सड़क चौड़ीकरण का काम सिंहस्थ की तैयारियों के तहत कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। सड़क की चौड़ाई करीब 15 मीटर किए जाने की योजना है। इसी दायरे में खड़े हनुमान मंदिर का हिस्सा आ रहा था। प्रतिमा हटाने के लिए नगर निगम की टीम कटर और अन्य मशीनों के साथ पहुंची थी। हालांकि, भक्तों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि मशीनों या ज्यादा ताकत के इस्तेमाल से प्रतिमा को नुकसान पहुंच सकता है। इसके बाद मंदिर के आसपास बैरिकेडिंग की गई। भक्तों ने निगम कमिश्नर को ज्ञापन देकर विशेषज्ञों से प्रतिमा की जांच कराने की मांग की थी। पुरातत्व विशेषज्ञ के मुताबिक 1000 साल पुरानी हो सकती है प्रतिमा विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. डॉ. रमण सोलंकी के मुताबिक, प्रतिमा करीब 1000 वर्ष पुरानी हो सकती है। उनका कहना है कि पुराने समय में बड़ी प्रतिमाओं को इंटरलॉक तकनीक से स्थापित किया जाता था और संभव है कि खड़े हनुमान की प्रतिमा भी इसी तकनीक से स्थापित की गई हो। उनके मुताबिक, प्रतिमा मालवा क्षेत्र में मिलने वाले मजबूत बेसाल्ट पत्थर की हो सकती है। परमार वंश और राजा भोज के समय इस तरह के पत्थरों पर कलाकृतियां बनाने की परंपरा रही है। लंबे समय से सिंदूर चढ़ाए जाने के कारण प्रतिमा की मूल बनावट और भाव-भंगिमा भी स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती। प्रतिमा नहीं हिली तो भक्तों ने माना भगवान का संकेत प्रतिमा को हटाने की कोशिशों के बावजूद उसके नहीं हिलने की खबर सोशल मीडिया तक पहुंच गई। इसके बाद स्थानीय श्रद्धालुओं, पुजारियों और हिंदू संगठनों में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई। कई भक्त इसे भगवान का संकेत और चमत्कार मान रहे हैं। प्रतिमा को हटाने के विरोध में हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया। श्रद्धालुओं के बीच खड़े हनुमान को ‘डॉक्टर हनुमान’ और मंदिर को ‘उज्जैन का एम्स’ कहे जाने की मान्यता है। भक्तों का विश्वास है कि यहां बच्चों और बीमार लोगों की मन्नतें पूरी होती हैं। बच्चों के इलाज से जुड़ी है धार्मिक मान्यता मंदिर के पुजारी महेश बैरागी के मुताबिक, यहां लंबे समय से छोटे बच्चों को झाड़नी देने और ताबीज बांधने की परंपरा है। उनका दावा है कि इससे कई बच्चों को फायदा मिला है। उन्होंने एक बच्चे का उदाहरण देते हुए बताया कि उसका लिवर ट्रांसप्लांट होना था। परिवार बच्चे को एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले जाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन हर बार उसकी तबीयत बिगड़ जाती थी। इसके बाद परिवार मंदिर आया और बच्चे को भगवान का ताबीज बांधा गया। पुजारी के मुताबिक, इसके बाद बच्चे को एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले जाया गया, जहां उसका लिवर ट्रांसप्लांट हुआ। यह पुजारी द्वारा बताई गई घटना और धार्मिक मान्यता है, इसे चिकित्सकीय रूप से मंदिर की प्रक्रिया का परिणाम प्रमाणित नहीं किया गया है। मुस्लिम परिवार भी मन्नत लेकर पहुंचते हैं स्थानीय भक्त शिवेंद्र तिवारी के मुताबिक, मंदिर में मुस्लिम समाज के परिवार भी मन्नत मांगने आते हैं। उनके अनुसार संतान प्राप्ति या बीमारी जैसी समस्याओं को लेकर भी लोग यहां पहुंचते हैं। फिलहाल प्रशासन ने प्रतिमा को हटाने का फैसला विशेषज्ञ रिपोर्ट आने तक रोक दिया है। अब IIT इंदौर की रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह स्थानांतरित किया जा सकता है या नहीं।

स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर MP के इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन, भोपाल में सड़क पर बैठे

भोपाल:  मध्य प्रदेश में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन लगातार तीसरे दिन भी जारी है। राजधानी भोपाल में डॉक्टरों का सबसे बड़ा प्रदर्शन कमला पार्क के पास चल रहा है, जहां बड़ी संख्या में इंटर्न डॉक्टर सड़क पर बैठकर विरोध जता रहे हैं। इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन का असर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी देखने को मिल रहा है। कई अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं प्रभावित हुई हैं। डॉक्टरों का कहना है कि मांग पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। हमीदिया अस्पताल में 12 बजे तक OPD बंद भोपाल के हमीदिया अस्पताल में बुधवार को दोपहर 12 बजे तक ओपीडी सेवाएं बंद रहीं। इस दौरान सीनियर डॉक्टरों ने मरीजों का इलाज किया। अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे किडनी और लिवर के मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। बताया गया कि हमीदिया अस्पताल में बुधवार को सिर्फ 2 ऑपरेशन हुए, जबकि सामान्य दिनों में यहां 40 से ज्यादा ऑपरेशन किए जाते हैं। इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल के चलते अस्पताल की नियमित व्यवस्थाओं पर इसका असर पड़ा है। कमला पार्क के पास डॉक्टरों का प्रदर्शन भोपाल में कमला पार्क के पास बड़ी संख्या में इंटर्न डॉक्टर सड़क पर बैठकर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शन के कारण इलाके में यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। स्थिति को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने रास्ते को वन-वे कर दिया है। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी प्रदर्शनकारी डॉक्टरों से बातचीत कर रहे हैं, ताकि आंदोलन के कारण आम लोगों को कम से कम परेशानी हो। ‘मांग पूरी होने तक जारी रहेगा प्रदर्शन’ इंटर्न डॉक्टर सौरभ सोनी ने कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। डॉक्टरों का कहना है कि स्टाइपेंड में बढ़ोतरी को लेकर सरकार से लंबे समय से मांग की जा रही है। वहीं, डॉ. शालिनी खन्ना ने बताया कि तेज धूप और गर्मी के कारण प्रदर्शन के दौरान काफी परेशानी हो रही है। हालांकि, खाने-पीने की व्यवस्था को लेकर उन्हें कोई बड़ी दिक्कत नहीं है। उन्होंने बताया कि सीनियर डॉक्टरों, साथी डॉक्टरों और भोपाल के स्थानीय लोगों की ओर से भी प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों के लिए खाना भेजा जा रहा है। फिलहाल इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन जारी है और सरकार के साथ बातचीत के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
Punjab

Punjab Employees Protest खत्म: DA, OPS समेत लंबित मांगों पर सरकार से Agreement

Punjab में सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत के बाद आंदोलन खत्म करने पर सहमति बन गई है। हड़ताल खत्म होने के साथ ही सरकारी दफ्तरों में कामकाज सामान्य होने की उम्मीद है। कर्मचारी लंबे समय से DA (Dearness Allowance) की लंबित किस्तों, वेतन से जुड़े बकाये और दूसरी सेवा संबंधी मांगों को लेकर सरकार के सामने अपनी बात रख रहे थे। इसी को लेकर कर्मचारियों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया था। सरकार और कर्मचारियों के बीच बनी सहमति हड़ताल के दौरान कर्मचारियों और सरकार के बीच तनाव की स्थिति बन गई थी। कर्मचारियों की ओर से लगातार अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाया जा रहा था। वहीं सरकार ने भी ड्यूटी से गैरहाजिर रहने वाले कर्मचारियों को लेकर सख्त रुख अपनाया था। बातचीत के बाद सरकार की ओर से कर्मचारियों के खिलाफ जारी किए गए Show Cause Notice और कार्रवाई से जुड़े कदम वापस लेने पर सहमति बनी। इसके बाद कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल खत्म करने का फैसला किया। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि आंदोलन खत्म जरूर किया गया है, लेकिन उनकी सभी मांगों का अंतिम समाधान अभी बाकी है। इन मुद्दों को लेकर सरकार के साथ आगे भी बातचीत जारी रहेगी। DA की मांग सबसे अहम पंजाब के सरकारी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में महंगाई भत्ते यानी DA की लंबित किस्तों का भुगतान शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से DA की कई किस्तें बकाया हैं, जिसका सीधा असर उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। इसके साथ ही वेतन और भत्तों के बकाये का भुगतान भी कर्मचारी संगठनों की प्राथमिक मांगों में शामिल है। कर्मचारी चाहते हैं कि सरकार इन मामलों में जल्द स्पष्ट फैसला ले। Old Pension Scheme और दूसरी मांगें भी शामिल DA के अलावा कर्मचारी Old Pension Scheme (OPS), ACP योजना, वेतन विसंगतियों को दूर करने और विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को भी उठा रहे हैं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इन मांगों पर सरकार के साथ लंबे समय से चर्चा चल रही है। अब हड़ताल खत्म होने के बाद उम्मीद है कि बातचीत के जरिए इन मामलों का समाधान निकलेगा। ‘No Work, No Pay’ को लेकर भी था विवाद हड़ताल के दौरान सरकार की ओर से ‘No Work, No Pay’ को लेकर सख्त रुख अपनाया गया था। यानी जो कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद नहीं रहेंगे, उनके वेतन को लेकर कार्रवाई की जा सकती थी। इस फैसले के बाद कर्मचारियों और सरकार के बीच विवाद और बढ़ गया था। बाद में दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर आए और कर्मचारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को वापस लेने की दिशा में सहमति बनी। अब मुख्यमंत्री से बातचीत पर नजर हड़ताल खत्म होने के बाद अब कर्मचारियों की नजर सरकार के साथ होने वाली अगली बातचीत पर है। कर्मचारी संगठन DA, OPS और बाकी लंबित मांगों को मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामने रखेंगे। फिलहाल आंदोलन खत्म होने से आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकारी विभागों में रुका हुआ काम फिर से रफ्तार पकड़ सकता है। हालांकि कर्मचारियों की प्रमुख मांगों पर अंतिम फैसला आगामी बैठकों और सरकार के निर्णय के बाद ही साफ होगा। Punjab Employees Strike: आगे क्या? हड़ताल खत्म होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि DA की लंबित किस्तों, OPS और अन्य मांगों पर सरकार कब तक फैसला लेती है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि आंदोलन खत्म करने के बाद सरकार बातचीत को आगे बढ़ाएगी और लंबे समय से लंबित मुद्दों का कोई व्यावहारिक समाधान निकलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

RTE पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सख्त, सरकार से 3 सप्ताह में मांगा हर स्कूल का पूरा डेटा

रायपुर: छत्तीसगढ़ में राइट टू एजुकेशन (RTE) के तहत बच्चों के प्रवेश और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। नए चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कार्यभार संभालने के पहले ही दिन RTE से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सरकार से छत्तीसगढ़ के हर स्कूल से जुड़ा RTE का पूरा डेटा भी मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी। RTE की धारा 12(1)(c) पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब सीवी भगवंत राव, विकास तिवारी समेत 13 अन्य लोगों ने RTE के क्रियान्वयन को लेकर हाईकोर्ट में अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर की हैं। इन मामलों पर लगातार सुनवाई चल रही है। चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से पूछा कि RTE अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(c) को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए फिलहाल कौन सी SOP यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर लागू है। हर स्कूल की आरक्षित और खाली सीटों का देना होगा ब्योरा हाईकोर्ट ने सरकार को एक विस्तृत चार्ट पेश करने का निर्देश दिया है। इसमें छत्तीसगढ़ के हर स्कूल में RTE के तहत आरक्षित कुल सीटों की संख्या बतानी होगी। इसके साथ ही सरकार को यह जानकारी भी देनी होगी कि प्रत्येक स्कूल में RTE के तहत कितने बच्चों को प्रवेश दिया गया है और कितनी सीटें अभी खाली हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह हलफनामा और जरूरी चार्ट राज्य सरकार के किसी सक्षम अधिकारी के माध्यम से तीन सप्ताह के भीतर पेश किया जाए। अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील ने अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को निर्धारित करने का अनुरोध किया। सरकार की ओर से कोर्ट को भरोसा दिलाया गया कि तब तक हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन कर लिया जाएगा। इस पर हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से 7 दिन पहले हलफनामा दाखिल किया जाए। साथ ही इसकी एक प्रति याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं को भी उपलब्ध कराने को कहा गया है। पहले ही दिन RTE मामले पर दिखाई गंभीरता चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र ने कार्यभार संभालने के पहले दिन डिवीजन बेंच में जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल के साथ कई मामलों की सुनवाई की। इसी दौरान RTE से जुड़े मामलों पर भी सुनवाई हुई। स्कूली बच्चों के प्रवेश और RTE कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने विस्तृत जानकारी मांगते हुए सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। अब सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले हलफनामे और स्कूलवार डेटा पर अगली सुनवाई में कोर्ट की नजर रहेगी।
Iran

Iran Missile Attack: 5 Tankers पर US Action के बाद जॉर्डन में US Base पर मिसाइल हमला

America और Iran के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी सेना की कार्रवाई के बाद ईरान ने भी जवाबी हमला किया है। अमेरिका ने ईरान से जुड़े पांच Oil Tankers को निशाना बनाया, जिसके बाद ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने के पास करीब 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इस घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में पहले से बने तनाव को और बढ़ा दिया है। खासकर Strait of Hormuz में बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ रही है। अमेरिका ने 5 ईरानी Oil Tankers को बनाया निशाना अमेरिकी सेना के अनुसार, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की ओर से अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि जहाज पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया, लेकिन अमेरिकी डिफेंस सिस्टम ने खतरे को नाकाम कर दिया। इसके बाद अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े पांच Oil Tankers के खिलाफ कार्रवाई की। अमेरिका का दावा है कि इन जहाजों का इस्तेमाल ईरान के IRGC और उससे जुड़े नेटवर्क के लिए आर्थिक गतिविधियों में किया जा रहा था। अमेरिकी कार्रवाई से पहले जहाजों पर मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने के निर्देश दिए जाने की बात भी सामने आई है। ईरान का जवाब, US Military Base पर 20 मिसाइलें अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान ने देर नहीं की और जवाबी हमला किया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जॉर्डन के Al-Azraq क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन के अधिकारियों के मुताबिक, करीब 20 मिसाइलें दागी गईं। इनमें से 18 को एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही रोक लिया, जबकि दो मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस हमले में अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है। Strait of Hormuz पर भी बढ़ा दबाव इस पूरे घटनाक्रम में Strait of Hormuz सबसे अहम जगह बनकर सामने आया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने यहां से गुजर रहे कई जहाजों को निशाना बनाया। हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल है। दुनिया के बड़े हिस्से का Oil Supply इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में अगर यहां लंबे समय तक तनाव बना रहता है तो इसका असर International Oil Market पर पड़ सकता है। Crude Oil की कीमतों पर नजर अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है। बाजार की सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगर हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही बाधित हुई तो Supply Chain पर दबाव पड़ सकता है। इसका असर आगे चलकर भारत समेत कई देशों में पेट्रोल-डीजल और दूसरी पेट्रोलियम आधारित चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। Middle East में Conflict बढ़ने का खतरा अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव अब सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा। जॉर्डन और हॉर्मुज जैसे इलाकों में सैन्य गतिविधियां बढ़ने से पूरे Middle East में Conflict फैलने की आशंका बनी हुई है। ईरान समर्थित संगठनों की गतिविधियों ने भी स्थिति को और जटिल बना दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान की अगली रणनीति पर दुनिया की नजर रहेगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों देश तनाव कम करने की दिशा में कोई कदम उठाएंगे या फिर सैन्य कार्रवाई का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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