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CBSE ऑन-स्क्रीन मार्किंग टेंडर विवाद में बड़ा एक्शन, चेयरमैन-सचिव हटाए गए

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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड CBSE एक बड़े प्रशासनिक और तकनीकी संकट के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ जहां ऑन-स्क्रीन मार्किंग टेंडर में कथित अनियमितताओं को लेकर सख्त कार्रवाई हुई है, वहीं दूसरी तरफ री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर साइबर अटैक की खबर ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है।

ऑन-स्क्रीन मार्किंग टेंडर विवाद: बड़ी कार्रवाई

सूत्रों के मुताबिक, ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम से जुड़े टेंडर में गड़बड़ियों और प्रक्रिया में खामियों की शिकायतें सामने आने के बाद सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। इसी जांच के तहत CBSE के चेयरमैन और सचिव को उनके पद से हटा दिया गया है।

इस कार्रवाई को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

Re-evaluation Portal पर Cyber Attack, सेवाएं प्रभावित

इसी बीच आज CBSE के री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर साइबर अटैक की घटना सामने आई, जिससे छात्रों को आवेदन और रिजल्ट से जुड़ी सेवाओं में अस्थायी परेशानी का सामना करना पड़ा।

तकनीकी टीम ने तुरंत स्थिति को संभालने की कोशिश शुरू कर दी है। फिलहाल किसी बड़े डेटा लीक की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा को लेकर निगरानी बढ़ा दी गई है।

छात्रों की परेशानी और बढ़ी चिंता

दो बड़े घटनाक्रम—एक तरफ प्रशासनिक बदलाव और दूसरी तरफ साइबर सुरक्षा में सेंध—ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। कई छात्रों को री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया में देरी और तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

अभिभावकों का कहना है कि परीक्षा और रिजल्ट सिस्टम में लगातार आ रही समस्याएं भरोसे को कमजोर कर रही हैं।

क्या होगा आगे?

सरकार ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में ऑन-स्क्रीन मार्किंग टेंडर और साइबर अटैक दोनों मामलों में और स्पष्टता सामने आएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि अब जरूरत है एक मजबूत डिजिटल सुरक्षा ढांचे और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की, ताकि छात्रों का भरोसा फिर से मजबूत हो सके।

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Yukta

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Rajat Patidar: कहानी उस शांत कप्तान की जिसने RCB को IPL चैंपियन बनाया, लेकिन चर्चा फिर भी कम है

Rajat Patidar: कहानी उस शांत कप्तान की जिसने RCB को IPL चैंपियन बनाया, लेकिन चर्चा फिर भी कम है

IPL में हर साल किसी न किसी खिलाड़ी या कप्तान की खूब चर्चा होती है, लेकिन इस बार एक नाम लगातार सुर्खियों में होकर भी “कम शोर” में रह गया — वह हैं Rajat Patidar। जहां विराट कोहली, बड़े सितारे और टीम की जीत की कहानियां छाई रहीं, वहीं पाटीदार ने चुपचाप अपनी कप्तानी से एक ऐसी टीम खड़ी कर दी जिसने RCB को ऐतिहासिक सफलता दिलाई। कैसे बने रजत पाटीदार RCB के कप्तान? रजत पाटीदार का IPL सफर आसान नहीं रहा। इसी भरोसे के दम पर RCB ने उन्हें कप्तानी सौंपी — और यहीं से कहानी बदल गई। कप्तान बनते ही बदल गई RCB की किस्मतकप्तान बनने के बाद पाटीदार ने टीम को एक नई दिशा दी: नतीजा यह हुआ कि RCB ने लंबे इंतजार के बाद IPL खिताब अपने नाम किया। जीत के बाद भी क्यों कम हो रही चर्चा? RCB की जीत के बाद भी पाटीदार की चर्चा उतनी नहीं हो रही, जितनी होनी चाहिए थी। इसके पीछे कुछ कारण हैं: खास बात जो उन्हें अलग बनाती हैरजत पाटीदार की सबसे बड़ी ताकत उनकी सादगी है। ना ज्यादा बयानबाजी यही वजह है कि वह “कम बोले लेकिन बड़ा असर छोड़ने वाले कप्तान” बनकर उभरे हैं।
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर सरकार और विपक्ष क्यों आमने-सामने? समझिए पूरा मामला

ग्रेट nicobar प्रोजेक्ट पर सरकार और विपक्ष क्यों आमने-सामने? समझिए पूरा मामला

ग्रेट nicobar प्रोजेक्ट एक बार फिर देश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन गया है। एक तरफ सरकार इसे देश के विकास और रणनीतिक सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी बता रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष और कुछ पर्यावरण विशेषज्ञ इसे पर्यावरण और आदिवासी समुदाय के लिए खतरा मान रहे हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर विवाद है क्या। क्या है ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट? ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के ग्रेट निकोबार आइलैंड में प्रस्तावित एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है। इसके तहत: बनाने की योजना है। सरकार का कहना है कि यह प्रोजेक्ट भारत की समुद्री ताकत और व्यापार को मजबूत करेगा। सरकार का पक्ष क्या है? सरकार इस प्रोजेक्ट को “गेम चेंजर” मानती है। इसके पीछे प्रमुख तर्क हैं: सरकार का दावा है कि इससे देश की अर्थव्यवस्था को लंबे समय में बड़ा फायदा मिलेगा। विपक्ष क्यों कर रहा है विरोध? विपक्ष और पर्यावरण विशेषज्ञ इस प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं: उनका कहना है कि विकास के नाम पर पर्यावरण और स्थानीय लोगों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। सबसे बड़ा विवाद क्या है? इस पूरे मामले का सबसे बड़ा मुद्दा “विकास बनाम पर्यावरण” है।एक तरफ देश की रणनीतिक जरूरतें हैं, तो दूसरी तरफ प्रकृति और आदिवासी जीवन की सुरक्षा। यही वजह है कि यह प्रोजेक्ट राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है। आगे क्या होगा? आने वाले समय में इस प्रोजेक्ट पर और चर्चाएं और समीक्षा होने की संभावना है। पर्यावरण मंजूरी और स्थानीय लोगों की सहमति इस प्रोजेक्ट की दिशा तय करेगी।
“IIT बाबा” और अभिषेक मिश्रा – मामला क्या है?

“IIT बाबा” और अभिषेक मिश्रा – मामला क्या है?

मथुरा में IIT से पासआउट एक ऐसा फर्जी बाबा पकड़ा गया है, जो पढ़ी लिखी लड़कियों का ब्रेनवॉश करके उनका यौन शोषण करता था और उसका वीडियो बनाकर उन्हें और उनके परिवार को ब्लैकमेल करने का काम करता था. ऑनलाइन प्रवचन देकर ये अपने भक्त बनाने और उसकी आड़ में लड़कियों को आकर्षित कर उनका शोषण करने का काम करता था. एक पीड़िता की शिकायत के आधार पर मथुरा पुलिस ने आरोपी अभिषेक मिश्रा उर्फ आदिकर्ता नारायण दास को गिरफ्तार कर लिया है.  कितनी लड़कियों का किया शोषण, पुलिस जांच में जुटी  आईआईटियन बाबा की यौन शोषण मामले में गिरफ्तारी के बाद पुलिस पीड़िताओं की पड़ताल कर रही है कि आखिर इस फर्जी बाबा ने कितनी लड़कियों का शोषण किया है. मात्र 29 साल की उम्र में आईआईटी से पासआउट इस फर्जी बाबा ने दर्जनों लड़कियों को गंधर्व विवाह के नाम पर अपने साथ जोड़कर उनका यौन शोषण किया और अश्लील फोटो वीडियो के आधार पर उनको ब्लैकमेल करता रहा. इस फर्जी बाबा ने साल 2017 से 2021 तक आईआईटी रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी. ओडिशा का रहने वाला है अभिषेक मिश्रा  ओडिशा का रहने वाला आरोपी अभिषेक मिश्रा खुद को आदिकर्ता नारायण दास कहता था. मथुरा में जहां ये रहता था, वहां करीब 24 लड़के लड़कियां भी रहती थीं. हालांकि इसकी हरकतें देखकर धीरे-धीरे ज्यादातर उसका साथ छोड़कर चले गए. बताया जा रहा है कि इसने इन सबका ब्रेनवॉश करके अपने साथ जोड़ रखा था. इसके फोन से भी कुछ लड़कियों की तस्वीरें और वीडियो मिले हैं. छत्तीसगढ़ की एक लड़की की शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इसे गिरफ्तार किया है.  वीडियो के जरिए लड़कियों को करता था टारगेट  फर्जी बाबा आदिकर्ता नारायण दास ने यूट्यूब पर राधा कृपा अमृता नाम से एक चैनल बनाया था. इस चैनल पर वो ऑनलाइन अपने प्रवचन डालता था. इसमें हिंदी और इंग्लिश में ये ज्ञान देकर अपना प्रभाव बढ़ाने का काम कर रहा था. धर्म के नाम पर इन्हीं वीडियो के ज़रिए ये लड़कियों को टारगेट करता था. लिंक्डइन पर भी आदिकर्ता नारायण दास के नाम से इसने अपनी प्रोफाइल बनाई थी. बताया जा रहा है कि ये फर्जी बाबा खासतौर पर इंजीनियरिंग की हुई लड़कियों को अपने झांसे में लेता था.
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CBSE ऑन-स्क्रीन मार्किंग टेंडर विवाद में बड़ा एक्शन, चेयरमैन-सचिव हटाए गए

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड CBSE एक बड़े प्रशासनिक और तकनीकी संकट के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ जहां ऑन-स्क्रीन मार्किंग टेंडर में कथित अनियमितताओं को लेकर सख्त कार्रवाई हुई है, वहीं दूसरी तरफ री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर साइबर अटैक की खबर ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। ऑन-स्क्रीन मार्किंग टेंडर विवाद: बड़ी कार्रवाई सूत्रों के मुताबिक, ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम से जुड़े टेंडर में गड़बड़ियों और प्रक्रिया में खामियों की शिकायतें सामने आने के बाद सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। इसी जांच के तहत CBSE के चेयरमैन और सचिव को उनके पद से हटा दिया गया है। इस कार्रवाई को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। Re-evaluation Portal पर Cyber Attack, सेवाएं प्रभावित इसी बीच आज CBSE के री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर साइबर अटैक की घटना सामने आई, जिससे छात्रों को आवेदन और रिजल्ट से जुड़ी सेवाओं में अस्थायी परेशानी का सामना करना पड़ा। तकनीकी टीम ने तुरंत स्थिति को संभालने की कोशिश शुरू कर दी है। फिलहाल किसी बड़े डेटा लीक की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा को लेकर निगरानी बढ़ा दी गई है। छात्रों की परेशानी और बढ़ी चिंता दो बड़े घटनाक्रम—एक तरफ प्रशासनिक बदलाव और दूसरी तरफ साइबर सुरक्षा में सेंध—ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। कई छात्रों को री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया में देरी और तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि परीक्षा और रिजल्ट सिस्टम में लगातार आ रही समस्याएं भरोसे को कमजोर कर रही हैं। क्या होगा आगे? सरकार ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में ऑन-स्क्रीन मार्किंग टेंडर और साइबर अटैक दोनों मामलों में और स्पष्टता सामने आएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अब जरूरत है एक मजबूत डिजिटल सुरक्षा ढांचे और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की, ताकि छात्रों का भरोसा फिर से मजबूत हो सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
BH सीरीज नंबर प्लेट क्या होती है? किसे मिलती है और क्या फायदे हैं?

BH सीरीज नंबर प्लेट क्या होती है? किसे मिलती है और क्या फायदे हैं?

अगर आपने कभी गाड़ी पर “BH” लिखा हुआ नंबर प्लेट देखा है, तो इसका मतलब है कि वह वाहन Bharat Series (BH Series) के तहत रजिस्टर्ड है। यह भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक खास नंबर प्लेट व्यवस्था है, जिसका मकसद है देश में कहीं भी वाहन चलाने को आसान बनाना। BH सीरीज नंबर प्लेट क्या है? BH (Bharat) सीरीज एक All India Vehicle Registration System है।इसका मतलब यह है कि इस नंबर प्लेट वाली गाड़ी को आप भारत के किसी भी राज्य में बिना दोबारा रजिस्ट्रेशन कराए चला सकते हैं। पहले अगर कोई व्यक्ति एक राज्य से दूसरे राज्य में शिफ्ट होता था, तो उसे RTO में जाकर गाड़ी फिर से रजिस्टर करानी पड़ती थी। BH सीरीज ने इस झंझट को काफी हद तक खत्म कर दिया है। BH नंबर प्लेट का फॉर्मेट कैसा होता है? BH नंबर प्लेट इस तरह दिखती है: YY BH #### XX जैसे: 24 BH 1234 AB BH सीरीज नंबर प्लेट किसे मिलती है? यह सभी लोगों को नहीं मिलती। इसके लिए कुछ शर्तें होती हैं: ये लोग पात्र (Eligible) हैं:

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