Chhattisgarh में प्लास्टिक बोतलों में शराब बिक्री लागू करने के फैसले के बाद आबकारी विभाग की सप्लाई व्यवस्था गड़बड़ा गई है। अधूरी तैयारी के बीच नई व्यवस्था लागू होने से प्रदेशभर की शराब दुकानों में देसी और सस्ती अंग्रेजी शराब की कमी देखने को मिल रही है।
कई दुकानों में पसंदीदा ब्रांड का स्टॉक खत्म हो चुका है। वहीं डिस्टिलर्स और बोतल सप्लाई लॉबी पर सप्लाई प्रभावित करने के आरोप लग रहे हैं।
सप्लाई तिथि बढ़ाने पड़ रहे आदेश
जानकारी के मुताबिक कैबिनेट से फैसला होने के बाद 1 अप्रैल से डिस्टिलरियों को पीईटी प्लास्टिक बोतलों में शराब बॉटलिंग करने के निर्देश दिए गए थे।
हालांकि अचानक लागू हुए इस फैसले के कारण डिस्टिलर्स और बोतल सप्लायरों में अफरा-तफरी मच गई। कई कारोबारी कोर्ट तक पहुंच गए।
बड़ी संख्या में प्लास्टिक बोतलों की व्यवस्था नहीं होने से विभाग को दोबारा आदेश जारी कर 31 मई तक कांच की बोतलों में भी सप्लाई की अनुमति देनी पड़ी।
10 दिन तक बंद रही बॉटलिंग
नई व्यवस्था के बीच कई डिस्टिलरियों में करीब 10 दिनों तक उत्पादन और बॉटलिंग का काम प्रभावित रहा।
पुराना स्टॉक खत्म होने के बाद अब शराब दुकानों तक मांग के मुकाबले कम सप्लाई पहुंच रही है। इसी वजह से कई दुकानों में शराब की कमी हो गई है।

सरकार को राजस्व नुकसान का अंदेशा
आबकारी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में रोजाना करीब 70 करोड़ रुपए की देसी और किफायती अंग्रेजी शराब बिकती है।
सप्लाई प्रभावित होने से सरकार को हर दिन 40 से 50 करोड़ रुपए तक के राजस्व नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
मिलावट रोकने के लिए लिया गया था फैसला
सरकार ने प्लास्टिक बोतलों में शराब सप्लाई का फैसला मिलावट रोकने के उद्देश्य से लिया था।
लेकिन तैयारियां पूरी नहीं होने और सप्लायरों की मनमानी के चलते विभाग को बार-बार अपने आदेश बदलने पड़ रहे हैं।
31 मई के बाद होगी सख्ती
आबकारी आयुक्त पदुम एल्मा ने बताया कि डिस्टिलर्स के साथ लगातार बैठक की जा रही है। फिलहाल प्लास्टिक और कांच दोनों बोतलों में सप्लाई जारी है।
उन्होंने कहा कि 15 मई से डिस्टिलर्स प्लास्टिक बोतलों में सप्लाई बढ़ाएंगे। वहीं 31 मई के बाद सप्लाई में लापरवाही मिलने पर संबंधित डिस्टिलर्स का लाइसेंस सस्पेंड किया जाएगा।
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