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5 सितंबर को Delhi March करेगा CJP, Supreme Court ने रोक लगाने से किया इनकार

Table of Content

राजधानी दिल्ली में 5 सितंबर को प्रस्तावित CJP March को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने फिलहाल इस प्रदर्शन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसी कोई ठोस परिस्थिति सामने नहीं है, जिसके आधार पर अभी से यह मान लिया जाए कि मार्च के दौरान कोई अप्रिय घटना होगी। साथ ही अदालत ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन और पुलिस पर छोड़ दी।

CJP यानी Cockroach Janata Party ने 5 सितंबर को दिल्ली में शांतिपूर्ण मार्च निकालने का ऐलान किया है। संगठन के मुताबिक मार्च India Gate से Delhi Police Headquarters तक प्रस्तावित है। इस प्रदर्शन को लेकर पहले से ही सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे थे।

Supreme Court ने क्यों नहीं लगाई रोक?

5 सितंबर के मार्च पर पाबंदी लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई गई थीं।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा कि फिलहाल ऐसी कोई “compelling circumstance” नहीं है, जिससे यह अनुमान लगाया जा सके कि प्रदर्शन के दौरान कुछ अप्रिय होगा। कोर्ट ने सभी पक्षों से कानून के दायरे में रहकर जिम्मेदारी से काम करने की उम्मीद जताई।

अदालत ने याचिकाकर्ता को अपनी चिंताएं संबंधित पुलिस और प्रशासन के सामने रखने को भी कहा। यानी फिलहाल कोर्ट ने मार्च को रोकने के बजाय कानून-व्यवस्था से जुड़ा फैसला प्रशासन पर छोड़ दिया है।

5 सितंबर को क्यों निकलेगा CJP March?

CJP ने यह मार्च सरकार पर पहले किए गए कथित वादों को पूरा नहीं करने के आरोपों के बीच घोषित किया है। संगठन का कहना है कि 25 जुलाई के आंदोलन के दौरान सरकार की ओर से कुछ आश्वासन दिए गए थे, लेकिन उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

CJP ने खास तौर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR और युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाया है। संगठन का दावा है कि इन मामलों में कार्रवाई में देरी के कारण दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

March में कौन शामिल हो सकता है?

CJP के अनुसार प्रस्तावित मार्च में छात्र और युवा संगठनों के अलावा NEET से जुड़े मामलों में प्रभावित परिवारों तथा कथित पुलिस कार्रवाई से प्रभावित लोगों के शामिल होने की बात कही गई है। संगठन ने इसे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन बताया है।

वहीं, दिल्ली पुलिस ने पहले कहा था कि प्रस्तावित मार्च के लिए उसकी अनुमति मांगी गई थी या नहीं, इस संबंध में प्रक्रिया अलग से देखी जा रही है। पुलिस सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए तैयारियों का आकलन कर रही है।

अब प्रशासन के सामने बड़ी जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद 5 सितंबर के मार्च को लेकर अब नजर दिल्ली पुलिस और प्रशासन की तैयारियों पर रहेगी। India Gate और Delhi Police Headquarters के बीच प्रस्तावित रूट पर भीड़, ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था को संभालना प्रशासन के लिए अहम चुनौती होगी।

कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध का अधिकार अपनी जगह है, लेकिन प्रदर्शन के दौरान कानून का पालन करना भी उतना ही जरूरी है। अगर स्थिति भविष्य में गंभीर होती है, तो संबंधित पक्ष कानूनी उपाय अपना सकते हैं।

10 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को लंबित याचिकाओं के साथ 10 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। फिलहाल 5 सितंबर के मार्च पर कोई तत्काल रोक नहीं है और अदालत ने सभी पक्षों से शांतिपूर्ण तथा जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा की है।

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Yukta

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PM Modi

SCO Summit में PM Modi और Pezeshkian की मुलाकात, Iran War के बाद पहली बातचीत

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की बिश्केक में मुलाकात हुई। दोनों नेताओं की यह बैठक SCO Summit 2026 के दौरान हुई। हालिया ईरान-अमेरिका संघर्ष के बाद मोदी और पेजेश्कियान की यह पहली आमने-सामने की मुलाकात है, इसलिए इस बैठक पर दुनियाभर की नजरें टिकी हैं। मुलाकात ऐसे वक्त हुई है, जब पश्चिम एशिया की स्थिति लगातार संवेदनशील बनी हुई है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ ऊर्जा और व्यापार पर भी पड़ रहा है। ऐसे माहौल में भारत और ईरान के शीर्ष नेताओं की आमने-सामने बातचीत को कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। West Asia Crisis के बीच हुई बातचीत प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेश्कियान की बातचीत में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति प्रमुख मुद्दों में रही। इससे पहले भी दोनों नेताओं के बीच क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर संपर्क हुआ है। भारत लगातार क्षेत्र में तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा और बातचीत के जरिए समाधान की जरूरत पर जोर देता रहा है। भारत के लिए पश्चिम एशिया की स्थिति इसलिए भी अहम है क्योंकि इस क्षेत्र से बड़ी संख्या में भारतीयों का जुड़ाव है और ऊर्जा एवं व्यापार के लिहाज से भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है। Iran के साथ रिश्तों पर भी नजर भारत और ईरान के रिश्ते केवल राजनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। ऐसे समय में जब ईरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुश्किल दौर से गुजर रहा है, भारत का उसके साथ संवाद बनाए रखना खास महत्व रखता है। बिश्केक में हुई मोदी-पेजेश्कियान बैठक इसी निरंतर कूटनीतिक संपर्क की एक अहम कड़ी मानी जा रही है। SCO Summit में एक मंच पर बड़े नेता बिश्केक में हो रहे Shanghai Cooperation Organisation (SCO) Summit में भारत, चीन, रूस, ईरान समेत कई देशों के शीर्ष नेता हिस्सा ले रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा में कई द्विपक्षीय बैठकों का कार्यक्रम भी है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी ने इस सम्मेलन को और महत्वपूर्ण बना दिया है। SCO के मंच पर क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और बदलते वैश्विक समीकरणों जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच यह बैठक सदस्य देशों के लिए अपनी-अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताएं रखने का अहम मंच भी बन गई है। भारत की Balanced Diplomacy पर टिकी नजर ईरान के साथ बातचीत के दौरान भारत के सामने एक तरफ अपने रणनीतिक और आर्थिक हित हैं, तो दूसरी ओर पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता की जरूरत। मोदी सरकार पहले भी अलग-अलग पक्षों के साथ संवाद बनाए रखने की नीति पर आगे बढ़ती रही है। ऐसे में बिश्केक में मोदी और पेजेश्कियान की मुलाकात को भारत की Balanced Foreign Policy के नजरिए से भी देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति किस दिशा में जाती है और भारत इस संकट में अपनी कूटनीतिक भूमिका को किस तरह आगे बढ़ाता है, यह देखना दिलचस्प होगा। क्यों खास है यह मुलाकात? इस मुलाकात ने साफ कर दिया है कि पश्चिम एशिया के बदलते समीकरणों के बीच भारत ईरान समेत सभी प्रमुख पक्षों के साथ अपना संवाद बनाए रखना चाहता है। बिश्केक से हुई यह बैठक आने वाले समय में भारत की West Asia Policy के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CJP

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Hanuman Ansh

₹2 करोड़ की Hanuman Ansh ने किया कमाल, शानदार Collection के बाद डायरेक्टर हुए भावुक

बॉक्स ऑफिस पर कई बार ऐसी फिल्में आ जाती हैं, जिनकी शुरुआत देखकर कोई अंदाजा नहीं लगा पाता कि आगे चलकर कहानी इतनी बदल जाएगी। ‘हनुमान अंश’ (Hanuman Ansh) भी कुछ ऐसी ही फिल्म साबित हो रही है। शुरुआत में धीमी रफ्तार से आगे बढ़ी इस फिल्म ने तीसरे हफ्ते के बाद ऐसी छलांग लगाई कि अब इसकी चर्चा हर तरफ हो रही है। नीम करौली बाबा के जीवन और आध्यात्मिक विचारों से प्रेरित ‘हनुमान अंश’ को विशाल चतुर्वेदी ने लिखा और डायरेक्ट किया है। करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म की कमाई अब उसके शुरुआती प्रदर्शन से बिल्कुल अलग तस्वीर दिखा रही है। 10 लाख की Opening से शुरू हुआ सफर Hanuman Ansh ने सिनेमाघरों में पहले दिन करीब 10 लाख रुपये की कमाई की थी। पहले दो हफ्तों में भी फिल्म की रफ्तार काफी धीमी रही। यही वजह थी कि शुरुआत में कुछ लोगों ने फिल्म के बॉक्स ऑफिस भविष्य पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। लेकिन फिल्म ने हार नहीं मानी। तीसरे हफ्ते में दर्शकों की संख्या बढ़ने लगी और Word of Mouth ने पूरा खेल बदल दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीसरे हफ्ते में फिल्म ने करीब 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया, जो शुरुआती प्रदर्शन के मुकाबले जबरदस्त उछाल था। 24वें दिन Box Office पर बड़ा उछाल फिल्म की सबसे ज्यादा चर्चा उसके चौथे हफ्ते के प्रदर्शन को लेकर हो रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 24वें दिन ‘हनुमान अंश’ ने करीब ₹12.75 करोड़ का India Net Collection किया और कुल कमाई ₹40 करोड़ के पार पहुंच गई। वहीं कुछ अन्य ट्रेड रिपोर्ट्स में आंकड़े अलग बताए गए हैं, इसलिए अंतिम कलेक्शन में अंतर संभव है। यह उछाल इसलिए भी खास है क्योंकि फिल्म की शुरुआत महज 10 लाख रुपये से हुई थी। यानी कुछ ही हफ्तों में फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर पूरी तरह अपना रंग बदल दिया। डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी हुए Emotional फिल्म की बढ़ती सफलता से डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी भी भावुक नजर आए। उन्होंने शुरुआती दौर को याद करते हुए बताया कि एक समय फिल्म के शो कम होने की स्थिति बन गई थी। लेकिन दर्शकों के रिस्पॉन्स ने हालात बदल दिए। फिल्म को मिल रहे प्यार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शो की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। डायरेक्टर का कहना है कि अभी फिल्म के शोज और बढ़ सकते हैं। कम बजट, लेकिन बड़ा असर ‘हनुमान अंश’ की कहानी सिर्फ कमाई की वजह से चर्चा में नहीं है। फिल्म की खासियत यह है कि इसे बड़े स्टार्स और भारी-भरकम बजट वाली फिल्मों के बीच अपनी अलग जगह बनाने में सफलता मिली है। फिल्म के विषय और आध्यात्मिक कहानी से जुड़े दर्शकों ने इसे पसंद किया। सोशल मीडिया और दर्शकों की आपसी चर्चाओं ने भी फिल्म को धीरे-धीरे ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। यही Word of Mouth फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आया है। ‘हनुमान अंश’ ने बदल दी Box Office की कहानी जिस फिल्म की शुरुआत बेहद मामूली रही, वही अब चौथे हफ्ते में बड़ी फिल्मों को टक्कर देती नजर आ रही है। रिपोर्ट्स में इसे 2026 की चौंकाने वाली Sleeper Hit में गिना जा रहा है। ‘हनुमान अंश’ की कहानी बॉक्स ऑफिस पर एक बात जरूर साबित करती है—हर फिल्म को पहले दिन करोड़ों की Opening की जरूरत नहीं होती। अगर कहानी दर्शकों के दिल तक पहुंच जाए, तो उसका असर देर से सही, लेकिन काफी दूर तक जा सकता है। फिलहाल फिल्म के बढ़ते शोज और दर्शकों की दिलचस्पी ने मेकर्स की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। डायरेक्टर के मुताबिक, सिनेमाघरों में फिल्म का सफर अभी जारी है और आने वाले दिनों में शोज की संख्या और बढ़ सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
E20 Petrol

E20 Petrol पर Supreme Court का फैसला, Ethanol Percentage और पुराने वाहनों पर बढ़ी चिंता

पेट्रोल पंप पर गाड़ी में डाला जा रहा E20 Petrol आखिर कितना Ethanol वाला है? इस सवाल का सीधा जवाब मांगने वाली याचिका पर Supreme Court ने सोमवार को सुनवाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपनी शिकायत संबंधित सक्षम अथॉरिटी या क्षेत्राधिकार वाले हाईकोर्ट के सामने रखने की छूट दी है। मामला सिर्फ पेट्रोल पंप पर Ethanol Percentage लिखने तक सीमित नहीं था। याचिका में पुराने वाहनों के लिए E20 Fuel की compatibility, fuel bills पर जानकारी और एक official vehicle-wise database बनाने जैसी कई मांगें भी उठाई गई थीं। ऐसे में इस फैसले के बाद E20 Petrol को लेकर वाहन मालिकों की चिंता एक बार फिर चर्चा में आ गई है। Petrol Pump पर Ethanol Percentage बताने की मांग याचिका दाखिल करने वाले नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने मांग की थी कि देश के सभी पेट्रोल पंपों पर dispensing nozzle के पास पेट्रोल में मौजूद Ethanol की exact percentage साफ तौर पर दिखाई जाए। उनका कहना था कि ग्राहक को यह पता होना चाहिए कि वह जिस fuel के लिए पैसे दे रहा है, उसकी composition क्या है। याचिका में यह भी कहा गया था कि पेट्रोल खरीदने के बाद मिलने वाले bill, invoice या receipt पर भी Ethanol की मात्रा दर्ज होनी चाहिए। इससे वाहन मालिकों को अपने वाहन के लिए fuel को लेकर बेहतर जानकारी मिल सकेगी। E20 Petrol को लेकर क्यों हो रही है चर्चा? E20 का मतलब ऐसे पेट्रोल से है जिसमें करीब 20 प्रतिशत Ethanol blending होती है। भारत में Ethanol blending को बढ़ावा देने की नीति का उद्देश्य imported crude oil पर निर्भरता कम करना और घरेलू biofuel के इस्तेमाल को बढ़ाना है। लेकिन इस बदलाव के बीच सबसे ज्यादा सवाल उन गाड़ियों को लेकर उठ रहे हैं जो E20 standards को ध्यान में रखकर तैयार नहीं की गई थीं। याचिका में पुराने और non-compatible vehicles के लिए अलग transition framework की मांग भी की गई थी। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि हर पुरानी गाड़ी में E20 Petrol डालने से खराबी होगी। किसी वाहन की compatibility उसके model, engine, manufacturing year और manufacturer की specifications पर निर्भर करती है। Vehicle-wise E20 Compatibility Database की मांग याचिका में एक ऐसा official और publicly searchable database बनाने की मांग की गई थी, जिसमें वाहन मालिक अपने वाहन की जानकारी डालकर यह देख सकें कि वह किस ethanol blend के लिए suitable है। इस database में manufacturer, model, engine type और manufacturing year के आधार पर जानकारी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव था। इससे खासकर पुराने वाहन मालिकों को अपने वाहन के लिए fuel compatibility समझने में आसानी हो सकती है। E20 पर Expert Committee बनाने की भी मांग याचिका में E20 के असर का व्यापक अध्ययन करने के लिए एक independent expert committee बनाने की मांग भी की गई थी। प्रस्तावित committee में Petroleum Ministry, Road Transport Ministry, Bureau of Indian Standards और automobile experts को शामिल करने की बात कही गई थी। समिति से vehicle compatibility, fuel efficiency, engine life, maintenance cost, warranty और insurance जैसे मुद्दों का अध्ययन कराने की मांग की गई थी। याचिका में E20 के environmental impact और ethanol production से जुड़े water use तथा food-security जैसे पहलुओं पर भी expert assessment की मांग की गई थी। Supreme Court ने क्या कहा? Supreme Court की जस्टिस एमएम सुंदरैश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने याचिका को Article 32 के तहत entertain करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपनी शिकायत के लिए संबंधित High Court का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता दी। इसका सीधा मतलब यह है कि फिलहाल Supreme Court ने पेट्रोल पंपों पर Ethanol Percentage लिखना अनिवार्य करने का कोई नया आदेश नहीं दिया है। अब आम Vehicle Owners के लिए क्या मायने हैं? इस मामले की सबसे बड़ी बात यह है कि E20 को लेकर बहस अब केवल सरकार की ethanol blending policy तक सीमित नहीं है। मामला consumer awareness और transparency से भी जुड़ गया है। वाहन मालिकों के लिए यह जानना अहम है कि उनके वाहन के लिए manufacturer ने किस ethanol blend को suitable बताया है। वहीं, याचिका ने यह सवाल जरूर सामने ला दिया है कि पेट्रोल खरीदते समय consumer को fuel की composition की स्पष्ट जानकारी कितनी आसानी से मिलनी चाहिए। फिलहाल Supreme Court से इस मामले में कोई mandatory labelling order नहीं आया है। आगे की कार्रवाई के लिए याचिकाकर्ता सक्षम अथॉरिटी या संबंधित High Court का रुख कर सकता है। E20 Petrol पर Supreme Court का यह फैसला भले ही याचिका को आगे नहीं बढ़ाता, लेकिन इसने एक आम सवाल जरूर सामने रख दिया है—जब fuel बदल रहा है, तो क्या consumer को भी उसके बारे में पूरी और साफ जानकारी नहीं मिलनी चाहिए?
SIR

Delhi SIR Draft Voter List: 47.7 लाख नाम बाहर, ऐसे Check करें अपना नाम

दिल्ली में SIR (Special Intensive Revision) के तहत Draft Voter List जारी होने के बाद मतदाताओं के बीच हलचल बढ़ गई है। नई सूची में करीब 47.7 लाख लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। यह आंकड़ा सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतने नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर क्यों रह गए और जिन लोगों का नाम नहीं है, वे अब क्या करें? सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि ड्राफ्ट लिस्ट में नाम नहीं होना अंतिम रूप से वोटर लिस्ट से नाम कटने का मतलब नहीं है। पात्र मतदाताओं को अपना नाम वापस शामिल कराने के लिए दावा और आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया गया है। दिल्ली में कितने मतदाता, कितने नाम Draft List में? SIR से पहले दिल्ली में कुल 1,45,10,299 मतदाता दर्ज थे। Revision के दौरान करीब 97.5 लाख मतदाताओं के Enumeration Forms प्राप्त हुए और उन्हें डिजिटल किया गया। इसके आधार पर करीब 97.5 लाख नाम Draft Electoral Roll में शामिल किए गए हैं। दूसरी ओर, करीब 47.7 लाख नाम फिलहाल ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं दिखाई दे रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक इन मामलों को मुख्य रूप से Absent, Shifted, Dead, Duplicate and Others (ASDDO) जैसी श्रेणियों में रखा गया है। यानी कई मामलों में मतदाता का पता बदल चुका हो सकता है, किसी व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी हो सकती है या रिकॉर्ड में एक से ज्यादा एंट्री होने की संभावना हो सकती है। नाम नहीं मिला तो क्या करें? अगर आपने SIR के दौरान अपना Enumeration Form जमा किया था, लेकिन Draft Voter List में नाम नहीं दिख रहा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। Election authorities ने ऐसे लोगों को Claim और Objection दाखिल करने का मौका दिया है। दावा-आपत्ति की प्रक्रिया 31 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक चलेगी। पात्र व्यक्ति अपना नाम वोटर लिस्ट में शामिल कराने के लिए Form 6 के जरिए आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद अधिकारियों की ओर से दस्तावेजों और दावे की जांच की जाएगी। जरूरी होने पर संबंधित व्यक्ति से अतिरिक्त जानकारी या दस्तावेज भी मांगे जा सकते हैं। Final Voter List कब आएगी? Draft Electoral Roll जारी होने के बाद अब अगला चरण claims और objections का है। इस दौरान जिन लोगों के नाम गलती से छूट गए हैं, उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 29 अक्टूबर 2026 तक नोटिस और दावों के निपटारे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद 4 नवंबर 2026 को Delhi की Final Voter List जारी की जाएगी। SIR में क्यों हटाए गए इतने नाम? SIR का उद्देश्य वोटर लिस्ट को अपडेट करना और उसमें मौजूद गलत या पुराने रिकॉर्ड की पहचान करना है। लंबे समय से दिल्ली में रह रहे लेकिन पता बदल चुके मतदाताओं, मृत व्यक्तियों के नाम, डुप्लीकेट एंट्री और अन्य संदिग्ध रिकॉर्ड की जांच इस प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में नाम Draft List से बाहर होने के बाद अब यह भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि कोई वास्तविक और पात्र मतदाता गलती से मतदान के अधिकार से वंचित न रह जाए। अलग-अलग इलाकों में अलग रहा Verification दिल्ली की अलग-अलग विधानसभा सीटों पर Enumeration Forms के digitisation का प्रतिशत भी एक जैसा नहीं रहा। रिपोर्ट के मुताबिक रोहिणी में करीब 83.43% फॉर्म डिजिटाइज हुए, जबकि तुगलकाबाद में यह आंकड़ा करीब 52.15% रहा। इसी वजह से अब Draft Roll के बाद शुरू होने वाली Claim और Objection प्रक्रिया काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Delhi Voter List में नाम जरूर Check करें अगर आप दिल्ली के मतदाता हैं, तो इस समय सबसे जरूरी काम है कि Draft Voter List में अपना नाम जरूर चेक करें। खासकर उन लोगों को ध्यान देना चाहिए जिनका पता हाल के वर्षों में बदला है या जिनके Enumeration Form को लेकर कोई समस्या हुई थी। अगर नाम नहीं मिलता है और आप मतदान के लिए पात्र हैं, तो 30 सितंबर 2026 से पहले Claim दाखिल करना जरूरी होगा। Final Voter List में नाम शामिल होने के बाद ही आगामी चुनाव में मतदान का अधिकार सुनिश्चित होगा। Delhi SIR Voter List की Important Dates हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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