पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की बिश्केक में मुलाकात हुई। दोनों नेताओं की यह बैठक SCO Summit 2026 के दौरान हुई। हालिया ईरान-अमेरिका संघर्ष के बाद मोदी और पेजेश्कियान की यह पहली आमने-सामने की मुलाकात है, इसलिए इस बैठक पर दुनियाभर की नजरें टिकी हैं।
मुलाकात ऐसे वक्त हुई है, जब पश्चिम एशिया की स्थिति लगातार संवेदनशील बनी हुई है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ ऊर्जा और व्यापार पर भी पड़ रहा है। ऐसे माहौल में भारत और ईरान के शीर्ष नेताओं की आमने-सामने बातचीत को कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
West Asia Crisis के बीच हुई बातचीत
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेश्कियान की बातचीत में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति प्रमुख मुद्दों में रही। इससे पहले भी दोनों नेताओं के बीच क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर संपर्क हुआ है। भारत लगातार क्षेत्र में तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा और बातचीत के जरिए समाधान की जरूरत पर जोर देता रहा है।
भारत के लिए पश्चिम एशिया की स्थिति इसलिए भी अहम है क्योंकि इस क्षेत्र से बड़ी संख्या में भारतीयों का जुड़ाव है और ऊर्जा एवं व्यापार के लिहाज से भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है।
Iran के साथ रिश्तों पर भी नजर
भारत और ईरान के रिश्ते केवल राजनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। ऐसे समय में जब ईरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुश्किल दौर से गुजर रहा है, भारत का उसके साथ संवाद बनाए रखना खास महत्व रखता है।
बिश्केक में हुई मोदी-पेजेश्कियान बैठक इसी निरंतर कूटनीतिक संपर्क की एक अहम कड़ी मानी जा रही है।
SCO Summit में एक मंच पर बड़े नेता
बिश्केक में हो रहे Shanghai Cooperation Organisation (SCO) Summit में भारत, चीन, रूस, ईरान समेत कई देशों के शीर्ष नेता हिस्सा ले रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा में कई द्विपक्षीय बैठकों का कार्यक्रम भी है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी ने इस सम्मेलन को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
SCO के मंच पर क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और बदलते वैश्विक समीकरणों जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच यह बैठक सदस्य देशों के लिए अपनी-अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताएं रखने का अहम मंच भी बन गई है।
भारत की Balanced Diplomacy पर टिकी नजर
ईरान के साथ बातचीत के दौरान भारत के सामने एक तरफ अपने रणनीतिक और आर्थिक हित हैं, तो दूसरी ओर पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता की जरूरत। मोदी सरकार पहले भी अलग-अलग पक्षों के साथ संवाद बनाए रखने की नीति पर आगे बढ़ती रही है।
ऐसे में बिश्केक में मोदी और पेजेश्कियान की मुलाकात को भारत की Balanced Foreign Policy के नजरिए से भी देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति किस दिशा में जाती है और भारत इस संकट में अपनी कूटनीतिक भूमिका को किस तरह आगे बढ़ाता है, यह देखना दिलचस्प होगा।
क्यों खास है यह मुलाकात?
- ईरान-अमेरिका संघर्ष के बाद मोदी-पेजेश्कियान की पहली Face-to-Face Meeting।
- West Asia Crisis के बीच दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की बातचीत।
- SCO Summit के मंच पर भारत और ईरान के बीच संवाद।
- ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से बैठक अहम।
- बिश्केक में मोदी, पुतिन, शी जिनपिंग और पेजेश्कियान समेत कई बड़े नेताओं की मौजूदगी।
इस मुलाकात ने साफ कर दिया है कि पश्चिम एशिया के बदलते समीकरणों के बीच भारत ईरान समेत सभी प्रमुख पक्षों के साथ अपना संवाद बनाए रखना चाहता है। बिश्केक से हुई यह बैठक आने वाले समय में भारत की West Asia Policy के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है।
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