जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि केवल एमएसपी घोषित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों को उसका वास्तविक लाभ मिले, इसके लिए प्रभावी सरकारी खरीद व्यवस्था सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
यह टिप्पणी जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण और जस्टिस अनुरूप सिंघी की खंडपीठ ने भारतीय किसान संघ, राजस्थान प्रांत की ओर से दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान की।
सभी खरीद केंद्रों का ब्योरा मांगा
हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वे प्रदेश में एमएसपी के तहत संचालित सभी सरकारी खरीद केंद्रों, नामित खरीद एजेंसियों और उनकी कार्यप्रणाली का विस्तृत विवरण अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें।
कोर्ट ने यह भी पूछा कि जिन क्षेत्रों में किसानों को एमएसपी पर फसल बेचने का अवसर नहीं मिल रहा है, वहां सरकार ने खरीद की क्या व्यवस्था की है।
12 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी। तब तक केंद्र और राज्य सरकार को विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी।
किसानों को नहीं मिल रहा समर्थन मूल्य
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रदेश की कई कृषि मंडियों में किसानों की फसलें घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमत पर बिक रही हैं।
याचिका में कहा गया कि राजस्थान कृषि उपज मंडी अधिनियम, 1961 की धारा 9(2)(xii) के तहत मंडी समितियों की जिम्मेदारी है कि किसानों की उपज एमएसपी से कम कीमत पर न बिके। इसके बावजूद कई मंडियों में नियमों का पालन नहीं हो रहा है।
खुली नीलामी पर भी उठाए सवाल
याचिका में यह भी कहा गया कि राजस्थान कृषि उपज मंडी नियम, 1963 के नियम 64(3) के तहत होने वाली खुली नीलामी में एमएसपी को आधार मूल्य (Base Price) नहीं बनाया जाता। इससे किसानों को सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिल पाता और कानून का उद्देश्य प्रभावित होता है।
कोर्ट ने सरकार से क्या पूछा?
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार की व्यवस्था के अनुसार गेहूं और धान की खरीद भारतीय खाद्य निगम (FCI) तथा अन्य फसलों की खरीद NAFED, CCI और अन्य नामित एजेंसियों के माध्यम से की जाती है।
अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि राजस्थान में इन एजेंसियों के कितने खरीद केंद्र संचालित हैं और किसानों को एमएसपी दिलाने के लिए जमीन पर क्या व्यवस्था की गई है।
सरकार नहीं दे सकी संतोषजनक जवाब
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार यह स्पष्ट नहीं कर सकी कि जिन क्षेत्रों में किसानों को एमएसपी नहीं मिल रही है, वहां प्रभावी सरकारी खरीद व्यवस्था कैसे उपलब्ध कराई जा रही है। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए केंद्र और राज्य सरकार दोनों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
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