कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए। भाजपा ने तीनों नेताओं को पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार भी घोषित किया है।
तीनों नेताओं ने हाल ही में राज्यसभा की सदस्यता और टीएमसी से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने पार्टी नेतृत्व और कार्यशैली को लेकर नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया था कि पार्टी मनमाने तरीके से चलाई जा रही है।
जून में दिया था इस्तीफा
जानकारी के अनुसार, सुखेंदु शेखर राय ने 8 जून, सुष्मिता देव ने 10 जून और प्रकाश चिक बराइक ने 11 जून को राज्यसभा सदस्यता और टीएमसी से इस्तीफा दिया था।
24 जुलाई को होगा मतदान
पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए 24 जुलाई को मतदान और मतगणना होगी।
चुनाव कार्यक्रम:
- अधिसूचना जारी: 7 जुलाई
- नामांकन की अंतिम तिथि: 14 जुलाई
- नामांकन पत्रों की जांच: 15 जुलाई
- मतदान और मतगणना: 24 जुलाई
सुखेंदु शेखर राय का आरोप
भाजपा में शामिल होने के बाद सुखेंदु शेखर राय ने कहा कि आरजी कर रेप-मर्डर केस में सबूतों से छेड़छाड़ का मुद्दा उठाने के बाद उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने व अपहरण की धमकियां मिलने लगी थीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस आयुक्त और अस्पताल के प्राचार्य से पूछताछ की मांग करने पर उन्हें भी लालबाजार पुलिस मुख्यालय बुलाया गया। खराब स्वास्थ्य के बावजूद उनकी बात नहीं सुनी गई, जिसके बाद उन्हें हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
सुष्मिता देव का बयान
भाजपा में शामिल होने के बाद सुष्मिता देव ने कहा कि पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा और त्रिपुरा में भाजपा की सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर जनता के भरोसे को दर्शाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि असम में लगातार तीसरी बार भाजपा सरकार का बनना इसकी बड़ी मिसाल है। साथ ही उन्होंने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें कोई अन्य राजनीतिक दल अपने साथ नहीं लेना चाहता।
TMC का पलटवार
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि तीनों नेता पहले से ही भाजपा के संपर्क में थे। उनके अनुसार, भाजपा ने केवल उनकी राजनीतिक स्थिति बचाने के लिए उन्हें उम्मीदवार बनाया है। उन्होंने दावा किया कि इससे टीएमसी को कोई नुकसान नहीं होगा और भाजपा को भी विशेष राजनीतिक लाभ मिलने वाला नहीं है।

TMC की मौजूदा स्थिति
टीएमसी के अनुसार, हाल के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद पार्टी की संसदीय और विधायी ताकत में कमी आई है।
- लोकसभा: पहले 28 सांसद, अब 8 सांसद।
- राज्यसभा: 13 में से 4 सांसदों के इस्तीफे के बाद अब 9 सांसद।
- विधानसभा: चुनाव में 80 सीटें जीतने के बाद अब 22 विधायक शेष होने का दावा किया जा रहा है, जबकि 58 विधायक अलग गुट में बताए जा रहे हैं।
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