Indore: पश्चिमी रिंग रोड परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन के चार गुना मुआवजे की मांग को लेकर करणी सेना परिवार और किसानों का आंदोलन सोमवार को तेज हो गया। ट्रैक्टरों के साथ भोपाल कूच के लिए निकले किसानों को शिप्रा चौराहे पर पुलिस और प्रशासन ने रोक दिया, जिसके बाद मौके पर तनाव की स्थिति बन गई।
किसानों का आरोप है कि उन्हें आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। प्रदर्शनकारियों के अनुसार इस कार्रवाई में सात किसान घायल हुए। इसके बाद किसान बरलाई जागीर में धरने पर बैठ गए और देर रात तक शिप्रा-सांवेर मार्ग पर डटे रहे। आंदोलन के दौरान किसानों ने सड़क किनारे भोजन बनाया और सरकार को सद्बुद्धि देने की कामना के साथ सुंदरकांड का पाठ भी किया।
करणी सेना परिवार के इंदौर जिलाध्यक्ष ऋषिराज सिंह सिसोदिया ने कहा कि किसान पिछले तीन वर्षों से अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को करीब 50 ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाने भोपाल जा रहे थे, लेकिन उन्हें बलपूर्वक रोक दिया गया।

सिसोदिया ने दावा किया कि ग्रेटर रिंग रोड परियोजना से 39 गांवों के 991 किसान प्रभावित हो रहे हैं और लगभग 4,442 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण के दायरे में है। उनका आरोप है कि जहां जमीन की बाजार कीमत एक करोड़ से साढ़े तीन करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक है, वहीं किसानों को केवल 18 लाख से 42 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जा रहा है।
करणी सेना के सदस्य रवींद्र कन्नौजिया ने भी आरोप लगाया कि प्रशासन ने डंपर लगाकर रास्ता बंद किया और वाटर कैनन व आंसू गैस का इस्तेमाल किया। उन्होंने बताया कि आंसू गैस का एक गोला उनके पैर के पास फटा, जिससे उन्हें चोट आई। वहीं किसान राम मकवाना का दावा है कि कार्रवाई में आठ से दस किसान घायल हुए, जिनमें कुछ को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
किसानों का कहना है कि वे इंदौर-देवास वेस्टर्न रिंग रोड परियोजना का विरोध नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि विकास कार्यों का स्वागत है, लेकिन उपजाऊ और सिंचित जमीन के बदले उचित मुआवजा मिलना चाहिए। किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

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