Raipur: छत्तीसगढ़ में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में युवाओं का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। राजधानी रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक पर NSUI, विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक संगठनों और युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार तथा NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान NSUI के पांच कार्यकर्ता अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए।
भूख हड़ताल पर बैठे कार्यकर्ताओं में हेमंत पाल, अनुज शुक्ला, इंडिया घृतलहरे, ड्रिंकल और सोनम शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों ने अपने खून से “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो” लिखकर विरोध दर्ज कराया और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग की।
इधर, धमतरी में सामाजिक कार्यकर्ता मितेश जैन ने गांधी मैदान में एक दिवसीय अनशन किया। वहीं बीजापुर में बस्तर संभाग के आदिवासी युवा छात्र संगठन ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर सोनम वांगचुक की मांगों पर सकारात्मक पहल करने की अपील की।
छात्रों ने कहा- यह भविष्य की लड़ाई
प्रदर्शन में शामिल युवाओं का कहना है कि वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में शामिल नहीं हो सके, इसलिए रायपुर में रहकर शिक्षा सुधार और सोनम वांगचुक के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देशभर के छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने लाखों प्रतियोगी परीक्षार्थियों का भविष्य प्रभावित किया है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था लागू करने की मांग की।
साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी दोहराई गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान होना चाहिए।
पहले दिन भी जुटे थे सैकड़ों लोग
रविवार को आंदोलन के पहले दिन भी रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक पर 500 से अधिक छात्र, युवा और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एकत्र हुए थे। प्रदर्शन के बाद राज्यपाल के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया था।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
- पेपर लीक की घटनाओं पर सख्त रोक।
- परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।
- शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार।
- छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर ठोस सरकारी कार्रवाई।
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
- शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकारों का सम्मान।
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