Middle East Tension का India की Basmati Export पर असर
Israel और Iran के बीच चल रहे युद्ध का सीधा असर अब भारत के Basmati Export के व्यापार पर पड़ रहा है। लगभग 1 लाख टन बासमती चावल, जो ईरान को एक्सपोर्ट किया जाना था, भारत के कांडला और मुंद्रा पोर्ट्स पर फंसा हुआ है।
Export क्यूं हो रहा है प्रभावित?
- युद्ध के चलते शिपिंग कंपनियों ने ईरान रूट पर सर्विस बंद कर दी है।
- ईरान को जाने वाली खेपों के लिए अब बीमा कंपनियां इंश्योरेंस देने से इनकार कर रही हैं।
- इसका सीधा असर Basmati Exporters और किसानों पर पड़ रहा है, जो अब नुकसान में जा रहे हैं।
गिर गई है बासमती की कीमतें
भारतीय मंडियों में बासमती चावल की कीमतें ₹4 से ₹5 प्रति किलो तक गिर गई हैं। व्यापारियों का कहना है कि यदि जल्द हल नहीं निकला, तो किसानों और Exporters को करोड़ों का नुकसान हो सकता है।
भारत-ईरान व्यापार पर संकट
- भारत हर साल ईरान को करीब 10 लाख टन बासमती चावल एक्सपोर्ट करता है, जो कुल बासमती एक्सपोर्ट का 20% है।
- इस बार Israel-Iran War ने इस पूरे ट्रेड को अस्थिर कर दिया है।
- भारत की तुलना में Pakistan ने बार्टर सिस्टम से फायदा उठाया है और ईरान को सीधे चावल सप्लाई कर रहा है।
शेयर मार्केट पर भी असर
इस स्थिति से Adani Wilmar, KRBL, LT Foods, GRM Overseas जैसी कंपनियों के शेयरों में 1-3% की गिरावट देखी गई है। निवेशकों में अनिश्चितता है क्योंकि Middle East Conflict लंबा खिंच सकता है।
सरकार से राहत की मांग
AIREA (All India Rice Exporters Association) ने सरकार और APEDA से राहत की मांग की है।
30 जून को एक प्रतिनिधिमंडल वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal से मिलेगा ताकि Export Issue का कोई समाधान निकाला जा सके।
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