SIR विवाद और चुनाव आयोग के आयुक्तों के बीच कथित मतभेद को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार विपक्षी नेताओं के निशाने पर हैं। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को हुगली में पार्टी की रैली के दौरान उन्हें ‘वैनिश कुमार’ यानी ‘गायब कुमार’कहा।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि SIR के दौरान मतदाता सूची से वोटरों के नाम ‘गायब’ किए जा रहे हैं। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के पद पर बने रहने का विरोध करते हुए कहा कि जब तक यह मुद्दा हल नहीं होता, उनकी पार्टी विरोध जारी रखेगी।
TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने भी CEC को लेकर टिप्पणी की और कहा कि उनके मुताबिक सिर्फ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ही CEC ज्ञानेश कुमार को हटा सकती है।
I.N.D.I.A. ब्लॉक की बैठक को लेकर चर्चा जारी
विपक्षी दलों के एक वर्ग की ओर से I.N.D.I.A. ब्लॉक की जल्द बैठक बुलाने की मांग की जा रही है। इसमें चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे पर विपक्षी दलों की संयुक्त रणनीति पर चर्चा किए जाने की बात सामने आई है।
हालांकि, अब तक गठबंधन की ओर से कोई साझा एक्शन प्लान जारी नहीं किया गया है।
CPI(ML) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य भी SIR के मुद्दे पर राहुल गांधी से I.N.D.I.A. ब्लॉक की बैठक बुलाने की बात कह चुके हैं। वहीं, एमए बेबी के 27 सितंबर को AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल से मुलाकात करने की जानकारी दी गई है।
विपक्षी नेताओं ने भी ज्ञानेश कुमार पर साधा निशाना
प्रियंका गांधी: उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। साथ ही चुनाव आयुक्तों को मिली कानूनी सुरक्षा को हटाने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने चुनाव आयोग को जवाबदेही से बचाने के लिए ये सुरक्षा उपाय लागू किए हैं।
डेरेक ओ ब्रायन: TMC के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव ने शनिवार को कहा कि CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की विपक्ष की मांग चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे उनके अभियान का प्रमुख हिस्सा है।
केसी वेणुगोपाल: उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार को ‘जुडास’ कहते हुए उनके केरल कैडर से जुड़े होने का उल्लेख किया और इस पर टिप्पणी की।
SIR को लेकर विवाद के बीच कांग्रेस का देशभर में प्रदर्शन
यह पूरा विवाद चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चल रही राजनीतिक और कानूनी बहस के बीच सामने आया है।
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के फैसलों पर 14 बार आपत्तिजताई। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने पहले इन मतभेदों को आंतरिक प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए कहा है कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
SIR से जुड़े कुछ चुनावी आदेशों और कथित सॉफ्टवेयर बदलावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल की गई है।
दो चुनाव आयुक्तों ने उठाए चार सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्तों की ओर से कुछ प्रक्रियाओं और फैसलों को लेकर सवाल उठाए गए थे।
1. फॉर्म-6 में बदलाव: नए मतदाताओं से पिछली SIR सूची में खुद या परिवार के सदस्यों के नाम की जानकारी मांगने के प्रावधान पर सवाल उठाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, संधू ने इसे हटाने की मांग की।
2. वोटर डेटा का कंट्रोल: वोटर डेटाबेस का नियंत्रण दिल्ली में बढ़ने और राज्यों की पहुंच सीमित होने को लेकर भी सवाल उठाए गए।
3. बंगाल में 16 लाख अपीलें: संधू ने कथित तौर पर सवाल किया कि हटाए गए नामों को लेकर करीब 16 लाख अपीलें किसने और किसकी अनुमति से दायर कीं।
4. गोवा के 97 वोटर: जांच में पात्र पाए गए 97 मतदाताओं के नाम सॉफ्टवेयर से जुड़ी समस्या के कारण अंतिम सूची में शामिल नहीं हो पाने को लेकर भी सवाल उठाया गया।


