बिहार में Special Intensive Revision (SIR) को लेकर शुरू हुआ विवाद अब Form 6 तक पहुंच गया है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में बदलाव के आरोपों पर BJP और कांग्रेस आमने-सामने हैं। राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए हैं, वहीं BJP ने उनके दावों को गलत और भ्रामक बताया है।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत ने Form 6 के किसी बदले हुए प्रारूप को मंजूरी नहीं दी है। कोर्ट ने रिकॉर्ड देखने के बाद यह स्पष्ट करने की बात कही कि फॉर्म में कोई बदलाव हुआ है या नहीं।
BJP ने क्या कहा?
BJP का कहना है कि Form 6 के मूल फॉर्म में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पार्टी के मुताबिक बिहार में SIR की प्रक्रिया के दौरान Form 6 के साथ एक अतिरिक्त Declaration यानी घोषणा-पत्र लगाया गया था।
नेता संबित पात्रा ने राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने Form 6 को गैरकानूनी नहीं बताया है। उनका कहना है कि अदालत ने रिकॉर्ड मंगाकर पूरे मामले को समझने की प्रक्रिया शुरू की है।
Election Commission ने भी दी सफाई
चुनाव आयोग ने भी Form 6 को लेकर अपना पक्ष रखा है। आयोग के मुताबिक मूल Form 6 में कॉमा या फुल स्टॉप तक कोई बदलाव नहीं किया गया। SIR के दौरान इसके साथ एक अतिरिक्त Declaration जोड़ा गया था।
आयोग का कहना है कि यह Declaration बिहार में SIR की विशेष प्रक्रिया से जुड़ा था। सामान्य परिस्थितियों में मतदाता के नाम को जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाला Form 6 अपने निर्धारित प्रारूप में ही लागू है।
Supreme Court में क्या हुआ?
5 अक्टूबर को CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने कहा कि Form 6 के किसी modified version को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी है।
कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि वह चुनाव आयोग के रिकॉर्ड देखकर यह समझना चाहता है कि Form 6 में कथित बदलाव क्या था और अगर कोई बदलाव हुआ तो उसे किस प्रक्रिया के तहत किया गया।
यही टिप्पणी अब राजनीतिक विवाद का बड़ा आधार बन गई है।
Rahul Gandhi ने लगाए गंभीर आरोप
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने Form 6 में कथित तौर पर गैरकानूनी बदलाव किया और इससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।
राहुल गांधी के इन आरोपों को BJP और चुनाव आयोग ने खारिज किया है। चुनाव आयोग ने उनके दावे को भ्रामक बताते हुए कहा कि Form 6 में बदलाव किए जाने की बात सही नहीं है।
विवाद की जड़ में क्या है Form 6 का Declaration?
दरअसल, पूरा विवाद Form 6 और उसके साथ लगाए गए अतिरिक्त Declaration को लेकर है। SIR के दौरान मतदाताओं से अतिरिक्त जानकारी मांगी गई थी। इसी वजह से विपक्ष ने सवाल उठाया कि क्या Form 6 में नियमों के मुताबिक बदलाव किया गया था।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि यह Form 6 में संशोधन नहीं था, बल्कि SIR की प्रक्रिया के लिए उसके साथ लगाया गया अतिरिक्त Declaration था।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल इस मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। एक तरफ BJP और Election Commission Form 6 में किसी बदलाव से इनकार कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ राहुल गांधी और विपक्ष इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।
Supreme Court के सामने अब रिकॉर्ड आने के बाद तस्वीर और साफ हो सकती है। फिलहाल विवाद का सबसे अहम सवाल यही है कि क्या Form 6 के मूल प्रारूप में बदलाव हुआ था या सिर्फ SIR के लिए अतिरिक्त Declaration जोड़ा गया था।
मतदाता सूची से जुड़े इस मुद्दे पर आगे होने वाली सुनवाई और चुनाव आयोग के रिकॉर्ड पर सभी की नजर बनी हुई है।
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