दिल्ली और एनसीआर में बढ़ते Dog Bite Cases और आवारा कुत्तों के हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने Suo Motu Cognizance लेते हुए इस गंभीर समस्या पर सुनवाई शुरू कर दी है। हाल के दिनों में कई बच्चों और बुजुर्गों पर आवारा कुत्तों के हमले की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे लोगों में डर और चिंता बढ़ गई है।
Supreme Court की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट की बेंच (जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता) ने कहा –
“अगर आप Stray Dogs को खाना खिलाना चाहते हैं तो अपने घर में क्यों नहीं करते? इंसानों के लिए जगह नहीं बची है और सड़कों पर खतरनाक स्थिति बन रही है।”
यह टिप्पणी नोएडा की रीमा शाह की याचिका पर सुनवाई के दौरान आई, जिसमें उन्होंने सोसाइटी से मिल रही परेशानियों के बावजूद कुत्तों को खाना खिलाने के अपने अधिकार का बचाव किया था।
पुराने कानून और कोर्ट के फैसले
- 2016: सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि आवारा कुत्तों का प्रबंधन केवल मानवीय तरीके से किया जा सकता है, उन्हें मारा नहीं जा सकता।
- 2022: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को बहाल किया, जिसमें कहा गया कि Stray Dogs और नागरिकों दोनों को खाना खिलाने का अधिकार है, लेकिन यह जिम्मेदारी और सावधानी से करना होगा।
- जस्टिस खन्ना ने सुझाव दिया था कि जो लोग कुत्तों को नियमित रूप से खाना खिलाते हैं, उन्हें उनके टीकाकरण और हमले की स्थिति में ज़िम्मेदारी भी लेनी होगी।
Delhi NCR में बढ़ते Dog Bite Incidents
दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों के हमलों से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। कई बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं और कुछ मामलों में जान भी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर नसबंदी, टीकाकरण और सुरक्षित डॉग शेल्टर्स की कमी से यह समस्या लगातार बढ़ रही है।
Supreme Court की अगली कार्रवाई
- NDMC, MCD, दिल्ली सरकार और Animal Welfare Board से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
- कोर्ट संभवतः Stray Dogs Management के लिए नई गाइडलाइंस और कानून बनाने का निर्देश दे सकती है।
- प्रस्तावित नीति में सुरक्षित शेल्टर्स, नियमित नसबंदी, टीकाकरण और तयशुदा Feeding Zones शामिल हो सकते हैं।
हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

