कुआलालंपुर – थाईलैंड (Thailand) और कंबोडिया (Cambodia) के बीच बीते एक हफ्ते से जारी खूनी सीमा विवाद अब कूटनीतिक रास्ते से सुलझने की कोशिश में है। मलेशिया (Malaysia) की राजधानी कुआलालंपुर में सोमवार को दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की शांति वार्ता (Peace Talks) हुई, जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि लंबे समय से चला आ रहा सीमा विवाद समाप्त हो सकता है।
कैसे भड़का Thailand-Cambodia Border Conflict?
24 जुलाई को सीमा क्षेत्र में एक लैंडमाइन धमाके (Landmine Blast) में थाई सैनिक घायल हो गए। इसके बाद दोनों देशों की सेनाओं के बीच भीषण गोलीबारी और बमबारी शुरू हो गई। यह संघर्ष पिछले 10 सालों का सबसे बड़ा माना जा रहा है, जिसमें अब तक 35 लोगों की मौत हो चुकी है और 2.6 लाख से ज्यादा नागरिक विस्थापित हो चुके हैं।
विवादित सीमा और मंदिरों का मुद्दा
दोनों देशों की 800 किलोमीटर लंबी सीमा का बड़ा हिस्सा अब तक तय नहीं हुआ है। खासकर प्रीह विहार (Preah Vihear) और ता मोन थॉम (Ta Moan Thom) मंदिरों का क्षेत्र दशकों से विवाद का कारण बना हुआ है।
International Pressure: US और China भी शामिल
संघर्ष बढ़ने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने दोनों देशों के नेताओं से बात कर तुरंत सीजफायर (Ceasefire) की अपील की। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर हिंसा जारी रही तो अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार समझौते खतरे में पड़ सकते हैं।
ASEAN चेयरमैन देश मलेशिया ने शांति वार्ता की मेजबानी की, जहां अमेरिका और चीन के प्रतिनिधियों को भी पर्यवेक्षक के तौर पर बुलाया गया।
Peace Talks में क्या हुआ?
कुआलालंपुर में हुई इस बैठक में थाईलैंड की ओर से कार्यवाहक प्रधानमंत्री फुमथम वेचायाचाई और कंबोडिया की ओर से प्रधानमंत्री हुन मानेट शामिल हुए।
कंबोडिया ने कहा कि उनका उद्देश्य “बिना शर्त तुरंत युद्धविराम (Unconditional Immediate Ceasefire)” करना है, जबकि थाईलैंड ने इस पर भरोसा जताने में हिचक दिखाई और कहा कि किसी भी समझौते के लिए ठोस कदम जरूरी हैं।
सीमा पर अब भी तनाव बरकरार
वार्ता के बावजूद सीमा पर गोलीबारी और बमबारी की घटनाएं जारी हैं। दोनों देशों की सेनाएं मोर्चे पर तैनात हैं और हालात अभी भी नाजुक हैं।
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