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Supreme Court on CEC: ज्ञानेश कुमार को Suspend करने से इनकार, SIR के 14 फैसलों पर EC को Notice

Table of Content

चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। कोर्ट ने फिलहाल CEC को पद से हटाने या सस्पेंड करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। हालांकि, Special Intensive Revision (SIR) से जुड़े विवादित फैसलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय बेंच ने की। याचिकाकर्ताओं की ओर से CEC के खिलाफ कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इनमें सबसे प्रमुख मुद्दा यह है कि क्या चुनाव आयोग के कुछ फैसले तय संवैधानिक प्रक्रिया के तहत सामूहिक रूप से लिए गए थे या नहीं।

SIR के 14 फैसलों पर क्यों उठे सवाल?

याचिकाओं में दावा किया गया है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच SIR से जुड़े कम से कम 14 मामलों में चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद सामने आए। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि कुछ मामलों में अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद फैसले आगे बढ़ाए गए।

वहीं, चुनाव आयोग की ओर से इन दावों पर अलग पक्ष रखा गया है। आयोग का कहना है कि जिन पत्रों और आपत्तियों का हवाला दिया जा रहा है, उनका संदर्भ अलग प्रशासनिक मामलों से था और उन्हें SIR की नीति या IT से जुड़े फैसलों से जोड़ना सही नहीं है।

Supreme Court ने CEC को Suspend क्यों नहीं किया?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल CEC ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने का आदेश नहीं दिया। कोर्ट ने पहले चुनाव आयोग का जवाब और संबंधित दस्तावेज देखने की जरूरत बताई।

अदालत यह भी जानना चाहती है कि जिन फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं, वे unanimity यानी सर्वसम्मति से, majority यानी बहुमत से या केवल CEC के स्तर पर लिए गए थे।

कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि अगर रिकॉर्ड की जांच में यह सामने आता है कि किसी फैसले में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ, तो उस फैसले को वापस लेने पर विचार किया जा सकता है।

Form-6 और Election Software का मुद्दा भी उठा

इस मामले में सिर्फ SIR ही नहीं, बल्कि चुनावी डेटा और सिस्टम से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए हैं। याचिकाओं में Form-6, ECINet और ERONet जैसे चुनावी सिस्टम से जुड़े कथित बदलावों और फैसलों पर भी सवाल किए गए हैं।

याचिकाकर्ताओं की मांग है कि इन मामलों से जुड़े रिकॉर्ड, फाइल नोटिंग और तकनीकी जानकारी की जांच की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फैसले निर्धारित नियमों के मुताबिक लिए गए थे या नहीं।

CEC के खिलाफ क्या मांग की गई?

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इसके अलावा SIR से जुड़े विवादित फैसलों की वैधता की जांच और कथित तौर पर एकतरफा लिए गए निर्णयों पर भी सवाल उठाए गए हैं।

कुछ याचिकाओं में पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई है। हालांकि, इन सभी आरोपों और मांगों पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।

अब Election Commission को देना होगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अब चुनाव आयोग को अपना पक्ष और संबंधित रिकॉर्ड अदालत के सामने रखना होगा। इसके बाद कोर्ट यह देखेगा कि विवादित फैसलों को लेने में संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया का पालन हुआ था या नहीं।

फिलहाल CEC ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने का कोई आदेश नहीं दिया गया है। इसलिए इस मामले में अगली सुनवाई और चुनाव आयोग का जवाब काफी महत्वपूर्ण होगा।

SIR से जुड़ा यह विवाद इसलिए भी अहम है क्योंकि इसका सीधा संबंध मतदाता सूची, चुनावी प्रक्रिया और Election Commission की decision-making process से है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से यह साफ हो सकता है कि जिन फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं, उनमें नियमों का पालन हुआ था या नहीं।

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Yukta

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JEE Main 2027

JEE Main 2027 NTA ने जारी की Exam Dates, 22 जनवरी से शुरू होगा पहला Session

JEE Main 2027 की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए जरूरी अपडेट सामने आया है। National Testing Agency (NTA) ने JEE Main 2027 के पहले Session की परीक्षा तारीखों का ऐलान कर दिया है। परीक्षा जनवरी 2027 में आयोजित होगी और इसके लिए कुल 6 तारीखें तय की गई हैं। NTA के शेड्यूल के मुताबिक JEE Main 2027 Session 1 की परीक्षा 22, 23, 24, 28, 29 और 30 जनवरी 2027 को होगी। इसके अलावा 31 जनवरी को Buffer Date के तौर पर रखा गया है। 6 Dates पर होगी JEE Main 2027 परीक्षा इस बार JEE Main Session 1 की परीक्षा जनवरी में अलग-अलग दिनों में कराई जाएगी। उम्मीदवारों को परीक्षा की तारीख उनके Application और Exam City से जुड़ी जानकारी के आधार पर पता चलेगी। JEE Main 2027 Session 1 का शेड्यूल इस तरह है: Registration Date का अभी इंतजार परीक्षा की तारीखों की घोषणा हो चुकी है, लेकिन JEE Main 2027 Registration की शुरुआत को लेकर छात्रों को अभी आधिकारिक अपडेट का इंतजार है। NTA की ओर से Application Form जारी होने के बाद ही आवेदन की अंतिम तारीख और फीस समेत बाकी जानकारी साफ होगी। छात्रों को सलाह है कि वे केवल NTA की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होने वाली सूचना को ही अंतिम मानें। सोशल मीडिया या दूसरी वेबसाइटों पर चल रही संभावित तारीखों पर पूरी तरह भरोसा न करें। JEE Main 2027 Session 2 कब होगा? JEE Main का आयोजन दो Sessions में किया जाता है। पहला Session जनवरी 2027 में प्रस्तावित है, जबकि दूसरा Session अप्रैल 2027 में आयोजित किया जाना है। Session 2 की सटीक तारीखों का ऐलान बाद में किया जाएगा। दोनों Sessions में शामिल होने वाले छात्रों को अपने Score और तैयारी के हिसाब से दोनों मौके का इस्तेमाल करने का अवसर मिलेगा। छात्रों के लिए अभी सबसे जरूरी काम परीक्षा की तारीख सामने आने के बाद तैयारी कर रहे छात्रों के लिए अब टाइम मैनेजमेंट और भी अहम हो गया है। अगर Syllabus पूरा हो चुका है तो अब केवल पढ़ने के बजाय Revision, Previous Year Questions और Mock Tests पर ज्यादा ध्यान देना फायदेमंद रहेगा। खासकर कमजोर Topics को दोबारा देखना और नियमित Mock Test देकर अपनी Speed और Accuracy सुधारना तैयारी को बेहतर बना सकता है। JEE Main 2027 को लेकर छात्रों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि NTA की ओर से जारी विस्तृत Information Bulletin में Eligibility, Registration, Exam Pattern, Application Fee, Admit Card और दूसरे जरूरी नियमों की पूरी जानकारी दी जाएगी। ऐसे में उम्मीदवारों को सलाह है कि वे NTA के Official Updates पर नजर बनाए रखें और Application Form जारी होते ही जरूरी दस्तावेजों के साथ आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold Price Today 10 ग्राम सोना ₹1.48 लाख, चांदी के दाम में ₹2,105 का उछाल

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अगर आप आने वाले दिनों में IndiGo Flight से सफर करने वाले हैं, तो टिकट बुक करने से पहले एक बार किराया जरूर चेक कर लें। एयरलाइन ने Fuel Charge बढ़ाने का फैसला किया है, जिसका असर घरेलू के साथ-साथ इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराए पर भी पड़ेगा। नई दरें 6 अक्टूबर से लागू होंगी। इस बदलाव के बाद यात्रियों को अपनी यात्रा के रूट और दूरी के हिसाब से पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। घरेलू उड़ानों में यह अतिरिक्त चार्ज ₹150 से ₹1,300 तक हो सकता है, जबकि इंटरनेशनल फ्लाइट्स में यात्रियों को ₹2,500 से लेकर ₹10,000 तक अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है। 6 महीने में तीसरी बार बढ़ा Fuel Charge IndiGo की ओर से Fuel Charge में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब एयरलाइन कंपनियों की ऑपरेशनल लागत पर लगातार दबाव बना हुआ है। खास बात यह है कि पिछले 6 महीनों में यह तीसरी बढ़ोतरी है। यानी जो यात्री नियमित रूप से फ्लाइट से सफर करते हैं, उनके लिए हवाई यात्रा का खर्च धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। खासकर लंबी दूरी की फ्लाइट लेने वालों को इसका असर ज्यादा महसूस हो सकता है। Domestic Flights पर कितना असर? घरेलू उड़ानों के लिए Fuel Charge यात्रा की दूरी के आधार पर तय होगा। छोटी दूरी की फ्लाइट पर अतिरिक्त शुल्क अपेक्षाकृत कम रहेगा, जबकि लंबी दूरी के रूट पर यह बढ़कर ₹1,300 तक पहुंच सकता है। इसका मतलब है कि टिकट की शुरुआती कीमत देखकर बुकिंग करने वाले यात्रियों को अंतिम भुगतान के समय ज्यादा रकम दिखाई दे सकती है। International Flights में ₹10,000 तक अतिरिक्त खर्च इंटरनेशनल यात्रियों के लिए बढ़ोतरी और बड़ी है। अलग-अलग इंटरनेशनल रूट के आधार पर Fuel Charge ₹2,500 से ₹10,000 तक हो सकता है। लंबी दूरी की इंटरनेशनल यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह अतिरिक्त खर्च खासा बड़ा साबित हो सकता है। ऐसे में विदेश यात्रा की प्लानिंग कर रहे लोगों के लिए टिकट की कुल कीमत की तुलना करना जरूरी हो गया है। क्यों बढ़ाया गया Fuel Charge? एयरलाइन के खर्च में Aviation Turbine Fuel (ATF) यानी विमान ईंधन की बड़ी भूमिका होती है। ईंधन की कीमतों में बदलाव का सीधा असर एयरलाइंस की लागत पर पड़ता है। जब ईंधन और ऑपरेशनल खर्च बढ़ते हैं, तो एयरलाइंस अतिरिक्त लागत को संभालने के लिए Fuel Charge जैसे शुल्क में बदलाव करती हैं। IndiGo की नई बढ़ोतरी को भी इसी लागत दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है। यात्रियों की जेब पर पड़ेगा सीधा असर Fuel Charge बढ़ने का सीधा असर टिकट के final fare पर पड़ेगा। यानी यात्रियों को केवल बेस फेयर नहीं, बल्कि लागू Fuel Charge और अन्य टैक्स समेत कुल रकम देखनी होगी। अगर आप अगले कुछ दिनों में IndiGo से यात्रा करने वाले हैं, तो टिकट बुक करने से पहले अलग-अलग तारीखों और रूट का किराया जरूर compare करें। कई बार यात्रा की तारीख में थोड़ा बदलाव करने से कुल खर्च में फर्क पड़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nobel Medicine Prize 2026 GLP-1 से Sleep Research तक, इन 5 Scientific Discoveries पर नजर

दुनिया भर की नजर आज 5 अक्टूबर को होने वाले Nobel Medicine Prize 2026 के ऐलान पर है। हर साल की तरह इस बार भी यह देखना दिलचस्प होगा कि मेडिकल साइंस की कौन-सी खोज को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक सम्मानों में से एक के लिए चुना जाता है। Stockholm के Karolinska Institutet से होने वाली घोषणा का इंतजार वैज्ञानिकों के साथ आम लोगों को भी है। इस बार Nobel Medicine Prize को लेकर कई ऐसी रिसर्च चर्चा में हैं, जिनका सीधा असर हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई देता है। Weight Loss Drugs, Sleep Research, Gene Editing, Cancer Treatment और Medical Imaging जैसे क्षेत्रों ने इस साल खास ध्यान खींचा है। हालांकि, अंतिम फैसला Nobel Committee ही करेगी और आधिकारिक घोषणा होने तक किसी भी नाम को विजेता नहीं माना जा सकता। Weight Loss Drugs से जुड़ी Research पर सबसे ज्यादा चर्चा इस साल की संभावित Nobel चर्चा में GLP-1 Research सबसे प्रमुख नामों में है। GLP-1 शरीर में भूख और Blood Sugar को नियंत्रित करने वाले सिस्टम से जुड़ा हार्मोन है। इसी रिसर्च ने आगे चलकर Diabetes और Obesity के इलाज में इस्तेमाल होने वाली नई पीढ़ी की दवाओं का रास्ता तैयार किया। इस क्षेत्र में Daniel Drucker, Jens Juul Holst और Svetlana Mojsov के नाम चर्चा में हैं। इन वैज्ञानिकों के काम ने GLP-1 की भूमिका को समझने में अहम योगदान दिया। आज जिन दवाओं को वजन कम करने और ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए जाना जाता है, उनके पीछे इसी तरह की लंबी वैज्ञानिक रिसर्च रही है। Sleep Research ने भी बढ़ाई उम्मीद Nobel Medicine की संभावित चर्चाओं में Sleep-Wake System भी शामिल है। इस क्षेत्र में Emmanuel Mignot और Masashi Yanagisawa के नाम सामने आते हैं। Orexin से जुड़ी उनकी रिसर्च ने यह समझने में मदद की कि हमारे शरीर में नींद और जागने का सिस्टम किस तरह काम करता है। खासकर Narcolepsy जैसे Sleep Disorder को समझने में इस खोज का महत्व रहा है। Gene Editing में David Liu का नाम Medical Science की दुनिया में Gene Editing पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आगे बढ़ा है। इस क्षेत्र में वैज्ञानिक David Liu का नाम भी संभावित दावेदारों की चर्चा में है। David Liu और उनकी टीम ने Base Editing और Prime Editing जैसी तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन तकनीकों का मकसद DNA में ज्यादा सटीक तरीके से बदलाव करना है। भविष्य में Genetic Diseases के इलाज के लिहाज से ऐसी तकनीकों को काफी अहम माना जाता है। Cancer Treatment में CAR-T Therapy Cancer के इलाज में हुई प्रगति भी इस साल Nobel Medicine की चर्चा का हिस्सा है। खास तौर पर CAR-T Cell Therapy ने Blood Cancer के कुछ मामलों में इलाज की नई उम्मीद पैदा की है। इस तकनीक में मरीज की अपनी Immune Cells यानी T-Cells को तैयार किया जाता है, ताकि वे Cancer Cells को पहचानकर उनसे लड़ सकें। इस क्षेत्र में अमेरिकी वैज्ञानिक Carl June का नाम भी चर्चा में है। CAR-T Therapy को Cellular Immunotherapy की दिशा में बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है और इसकी वजह से गंभीर बीमारियों के इलाज को लेकर वैज्ञानिकों की उम्मीदें बढ़ी हैं। Medical Imaging की OCT Technology भी दौड़ में Optical Coherence Tomography यानी OCT भी उन रिसर्च में शामिल है, जिन पर Nobel watchers की नजर है। यह एक ऐसी Imaging Technology है, जिसमें Light Waves की मदद से शरीर के अंदर मौजूद tissues की बेहद बारीक तस्वीरें हासिल की जा सकती हैं। खासकर आंखों और Retina से जुड़ी बीमारियों की पहचान में OCT ने Medical Science को काफी मदद दी है। इस क्षेत्र से James Fujimoto, David Huang और Eric Swanson के नाम जुड़े हैं। Nobel Committee के फैसले पर सबकी नजर इन सभी नामों और रिसर्च को लेकर फिलहाल सिर्फ चर्चा है। Nobel Committee ने पुरस्कार की आधिकारिक घोषणा से पहले संभावित विजेताओं की कोई सूची जारी नहीं की है। इसलिए असली तस्वीर सामने आने में अभी घोषणा का इंतजार करना होगा। 2026 Nobel Prize announcements की शुरुआत Medicine Prize से हो रही है। इसके बाद Physics, Chemistry, Literature और Peace Prize का ऐलान किया जाएगा। Economics Prize की घोषणा बाद में होगी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस साल Nobel Medicine Prize किस वैज्ञानिक या वैज्ञानिकों को मिलता है। Weight Loss Drugs से लेकर Gene Editing और Cancer Treatment तक, कई ऐसी खोजें चर्चा में हैं, जिनका असर आने वाले वर्षों में मेडिकल साइंस और आम जिंदगी दोनों पर दिखाई दे सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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