West Bengal की राजनीति में इस समय बड़ा सियासी तूफान देखने को मिल रहा है। लोकसभा चुनाव में उम्मीद से कमजोर प्रदर्शन के बाद अब सत्ताधारी TMC यानी Trinamool Congress के भीतर ही बगावत की खबरें सामने आने लगी हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि चुनावी हार के सिर्फ 14 दिन बाद पार्टी के 19 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक कथित लेटर सामने आया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
स्पीकर को भेजे गए लेटर में क्या है?
जानकारी के मुताबिक, यह पत्र 18 मई को लोकसभा स्पीकर को भेजा गया था। इसमें पार्टी नेतृत्व और संगठन के कामकाज को लेकर नाराजगी जताई गई है। सूत्रों का दावा है कि कई सांसद लंबे समय से पार्टी के अंदर फैसले लेने के तरीके से खुश नहीं थे और चुनावी नतीजों के बाद उनका असंतोष खुलकर सामने आ गया।
ममता बनर्जी के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि TMC हमेशा से मजबूत संगठन और एकजुट नेतृत्व की बात करती रही है। लेकिन अब पार्टी के अंदर से ही उठ रही आवाजें विपक्ष को बड़ा मुद्दा दे रही हैं। बीजेपी और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इसे TMC की अंदरूनी कमजोरी करार दिया है।
पार्टी की तरफ से क्या आया जवाब?
हालांकि, पार्टी की तरफ से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। कुछ नेताओं ने इस लेटर को फर्जी बताया है, जबकि कई नेताओं का कहना है कि पार्टी के भीतर बातचीत से मामला सुलझाया जाएगा। इसके बावजूद बंगाल की राजनीति में इस खबर ने नई बहस छेड़ दी है।
आगे क्या हो सकता है?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर 19 सांसदों के हस्ताक्षर वाला यह पत्र सही साबित होता है, तो आने वाले दिनों में TMC को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसका असर सिर्फ पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति और विपक्षी गठबंधन की रणनीति पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल सबकी नजर ममता बनर्जी के अगले कदम पर टिकी है। अब देखना होगा कि वह इस संकट को संभाल पाती हैं या TMC के भीतर की दरार आने वाले समय में और गहरी होती जाएगी।
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