अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump एक बार फिर अपने सख्त ट्रेड फैसलों को लेकर चर्चा में हैं। नई रिपोर्ट्स के मुताबिक, Trump प्रशासन भारत और चीन समेत करीब 60 देशों पर 10% से 12.5% तक अतिरिक्त Tariff लगाने की तैयारी कर रहा है। इस प्रस्ताव ने दुनियाभर के कारोबारियों और एक्सपोर्ट सेक्टर की चिंता बढ़ा दी है।
अमेरिका का कहना है कि कई देश “forced labour” यानी जबरन मजदूरी से बने उत्पादों को रोकने में पूरी तरह सफल नहीं रहे। इसी वजह से नए टैरिफ लागू करने की योजना बनाई गई है। अगर यह फैसला लागू होता है, तो भारत के कई उद्योगों पर सीधा असर पड़ सकता है।
क्या है Trump का नया Tariff Plan?
अमेरिकी ट्रेड एजेंसी USTR ने Section 301 के तहत एक नई रिपोर्ट जारी की है। इसमें भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्राजील जैसे देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक:
- भारत और चीन पर 12.5% तक अतिरिक्त ड्यूटी लग सकती है।
- कुछ देशों पर 10% तक टैरिफ प्रस्तावित है।
- फार्मा, ऊर्जा और कुछ जरूरी उत्पादों को राहत मिल सकती है।
Trump पहले भी अपने कार्यकाल में चीन के खिलाफ कई बड़े टैरिफ फैसले ले चुके हैं। अब माना जा रहा है कि अमेरिका फिर से “America First” नीति को आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाना चाहता है।
भारत पर कितना पड़ेगा असर?
भारत और अमेरिका के बीच इस समय ट्रेड डील को लेकर बातचीत चल रही है। ऐसे में यह नया टैरिफ प्लान दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में तनाव बढ़ा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के टेक्सटाइल, लेदर, केमिकल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर इसका असर दिखाई दे सकता है। अमेरिका भारतीय उत्पादों के लिए बड़ा बाजार है, इसलिए अतिरिक्त शुल्क से एक्सपोर्ट महंगा हो सकता है।
भोपाल के एक एक्सपोर्ट कारोबारी ने कहा कि अगर अमेरिका यह फैसला लागू करता है, तो छोटे और मध्यम उद्योगों पर सबसे ज्यादा दबाव आएगा। खासकर वे कंपनियां जो अमेरिकी बाजार पर निर्भर हैं।
चीन फिर अमेरिका के निशाने पर
चीन पहले से ही अमेरिका के साथ लंबे समय से ट्रेड वॉर का सामना कर रहा है। अब नए प्रस्ताव में चीन को भी 12.5% अतिरिक्त टैरिफ वाले देशों की सूची में शामिल किया गया है।
जानकारों का कहना है कि इससे वैश्विक सप्लाई चेन और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर पर असर पड़ सकता है। अगर अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ता है, तो दुनियाभर के बाजारों में अस्थिरता देखने को मिल सकती है।
आखिर क्यों उठाया गया यह कदम?
अमेरिका का आरोप है कि कई देशों की सप्लाई चेन में forced labour से जुड़े उत्पाद शामिल हैं। Trump प्रशासन इसे अमेरिकी कंपनियों और मजदूरों के लिए नुकसानदायक मान रहा है।
हालांकि कई विशेषज्ञ इसे केवल ट्रेड पॉलिटिक्स का हिस्सा भी बता रहे हैं। उनका कहना है कि अमेरिका इस दबाव के जरिए दूसरे देशों से बेहतर ट्रेड शर्तें हासिल करना चाहता है।
अभी लागू नहीं हुआ फैसला
फिलहाल यह केवल प्रस्ताव है। अमेरिका ने इस पर सार्वजनिक सुझाव और सुनवाई की प्रक्रिया शुरू की है। आने वाले हफ्तों में कंपनियों, व्यापार संगठनों और आम लोगों से राय ली जाएगी। इसके बाद अंतिम फैसला सामने आएगा।
अगर यह टैरिफ लागू होता है, तो आने वाले महीनों में भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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