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UPI Payment पर लगेगा Charge? ₹2000 से ऊपर Transaction पर 0.40% Fee की चर्चा

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UPI ने आम आदमी की जिंदगी में डिजिटल पेमेंट को बेहद आसान बना दिया है। चाय की दुकान से लेकर बड़े स्टोर तक, आज कुछ सेकंड में मोबाइल से भुगतान हो जाता है। ऐसे में अगर UPI Transaction पर चार्ज की व्यवस्था आती है, तो इसका असर सीधे करोड़ों लोगों और कारोबारियों पर पड़ सकता है।

दरअसल, ₹2,000 से ज्यादा के UPI Transaction पर MDR (Merchant Discount Rate) लगाने का प्रस्ताव चर्चा में है। इसमें अधिकतम 0.40 फीसदी तक शुल्क लगाए जाने की संभावना बताई जा रही है। हालांकि, अभी इसे अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता है। शुल्क कब और किन ट्रांजैक्शन पर लागू होगा, यह आधिकारिक नियम आने के बाद ही साफ होगा।

₹2000 से ज्यादा के UPI Payment पर क्या बदलेगा?

प्रस्तावित व्यवस्था में ₹2,000 से अधिक के कुछ UPI Payment को शुल्क के दायरे में लाने की बात सामने आई है। इसका मकसद छोटे और रोजमर्रा के डिजिटल पेमेंट को प्रभावित किए बिना बड़े ट्रांजैक्शन से जुड़े खर्च की भरपाई के लिए नया मॉडल तैयार करना हो सकता है।

यानी अगर कोई व्यक्ति छोटी रकम का भुगतान करता है, तो उस पर अलग व्यवस्था हो सकती है। वहीं बड़े भुगतान के लिए MDR लागू किए जाने की संभावना है।

क्या हर UPI Transaction पर 0.40% Charge लगेगा?

नहीं, फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा। 0.40% को संभावित अधिकतम MDR दर के तौर पर बताया जा रहा है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर ₹2,000 से ज्यादा के UPI Payment पर अनिवार्य रूप से 0.40% चार्ज लगेगा।

अंतिम नियमों में यह तय होगा कि शुल्क की दर कितनी होगी, कौन-से ट्रांजैक्शन इसके दायरे में आएंगे और भुगतान का बोझ ग्राहक या व्यापारी में से किस पर पड़ेगा।

MDR Charge क्या होता है?

MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट को स्वीकार करने वाले कारोबारी से पेमेंट सिस्टम के तहत लिया जा सकता है।

UPI के मामले में लंबे समय से यह बहस चलती रही है कि इतने बड़े डिजिटल पेमेंट नेटवर्क को चलाने की लागत की भरपाई किस तरह की जाए। बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और दूसरे सिस्टम पार्टनर इसके संचालन से जुड़े खर्च उठाते हैं।

इसी वजह से UPI के लिए एक स्थायी Revenue Model को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है।

₹10,000 के UPI Payment पर कितना Charge हो सकता है?

मान लीजिए किसी पात्र ट्रांजैक्शन पर 0.40% MDR लागू होता है। ऐसे में ₹10,000 के भुगतान पर गणना के हिसाब से शुल्क करीब ₹40 बनता है।

लेकिन इसे केवल उदाहरण के तौर पर समझना चाहिए। वास्तविक स्थिति में शुल्क की दर, टैक्स और अन्य नियम अलग हो सकते हैं। अंतिम व्यवस्था लागू होने के बाद ही सही रकम स्पष्ट होगी।

आम UPI Users को सबसे ज्यादा चिंता किस बात की है?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या UPI से पैसा भेजते समय सीधे यूजर के बैंक अकाउंट से चार्ज काटा जाएगा?

जरूरी नहीं। MDR का संबंध मुख्य रूप से मर्चेंट और पेमेंट सिस्टम से जुड़ी शुल्क व्यवस्था से होता है। इसलिए MDR की चर्चा का सीधा मतलब यह नहीं है कि हर ग्राहक को UPI Payment करते समय अतिरिक्त पैसा देना पड़ेगा।

हालांकि, भविष्य में अगर शुल्क व्यवस्था बदली जाती है, तो इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतिम नियम किस तरह तैयार किए जाते हैं।

छोटे दुकानदारों और ग्राहकों पर क्या होगा असर?

UPI का सबसे बड़ा फायदा यही रहा है कि छोटे कारोबारी भी बिना कैश के भुगतान ले सकते हैं। किराना दुकान, सब्जी वाला, रेस्टोरेंट या स्थानीय दुकानदार—हर जगह QR Code से भुगतान करना आसान हो गया है।

अगर ₹2,000 की सीमा के आधार पर नया मॉडल बनाया जाता है, तो छोटे मूल्य वाले पेमेंट को इससे बाहर रखने की कोशिश की जा सकती है। इससे रोजाना होने वाले छोटे UPI Transactions पर असर सीमित रह सकता है।

हालांकि, कारोबारियों के लिए बड़े भुगतान पर शुल्क का मुद्दा महत्वपूर्ण रहेगा। यही वजह है कि अंतिम नियम आने के बाद मर्चेंट और ग्राहक दोनों की प्रतिक्रिया अहम होगी।

UPI पर Charge लगाने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है?

भारत में UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। करोड़ों लोग रोजाना डिजिटल पेमेंट के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इतने बड़े नेटवर्क को संचालित करने में तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर, बैंकिंग सिस्टम और पेमेंट कंपनियों की लागत भी जुड़ी होती है।

ऐसे में UPI को लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने के लिए Revenue Model पर चर्चा होती रही है। MDR इसी बहस का एक संभावित हिस्सा है।

अभी UPI Users को क्या करना चाहिए?

फिलहाल UPI Payment को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। ₹2,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर 0.40% तक MDR की बात एक प्रस्तावित व्यवस्था के रूप में सामने आई है। इसे हर UPI Payment पर लागू हो चुका नियम समझना सही नहीं होगा।

अंतिम फैसला आने के बाद ही पता चलेगा कि शुल्क किन ट्रांजैक्शन पर लागू होगा और इसका भुगतान कौन करेगा।

UPI ने भारत में डिजिटल पेमेंट का तरीका ही बदल दिया है। ऐसे में किसी भी तरह की Fee या MDR व्यवस्था का असर बड़ा हो सकता है। ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन पर संभावित 0.40% तक MDR Charge की चर्चा इसी वजह से महत्वपूर्ण है।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि अंतिम नियम क्या होते हैं और सरकार किस तरह छोटे पेमेंट, आम ग्राहकों और कारोबारियों के हितों के बीच संतुलन बनाती है।

Yukta

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मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

इंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR

शहर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्लॉट का सौदा करने के बाद ब्रोकर और प्लॉट मालिक ने फरियादी से 7 लाख 80 हजार रुपये ले लिए, लेकिन न तो प्लॉट की रजिस्ट्री कराई और न ही कब्जा दिया। शिकायत की जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। 9.30 लाख में तय हुआ था प्लॉट का सौदा पुलिस के मुताबिक, नंदबाग कॉलोनी निवासी विजय चौहान ने शिकायत में बताया कि उन्होंने नंदबाग में एक प्लॉट का सौदा 9 लाख 30 हजार रुपये में तय किया था। इस संबंध में एग्रीमेंट भी किया गया था। फरियादी ने आरोप लगाया कि उन्होंने नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 7 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्लॉट का कब्जा नहीं मिला और रजिस्ट्री भी नहीं कराई गई। ब्रोकर ने परिचित बताकर कराया था सौदा विजय चौहान के अनुसार, धर्मेंद्र ठाकुर ने उन्हें बताया था कि नंदकिशोर मनावत उसका परिचित है और वह अपना प्लॉट बेचना चाहता है। इसके बाद धर्मेंद्र ने सौदे में ब्रोकर की भूमिका निभाई और इसके बदले 10 हजार रुपये लिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के बाद जब उन्होंने रजिस्ट्री कराने और प्लॉट का कब्जा देने की मांग की, तो उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। 25 से ज्यादा केस होने की धमकी देने का आरोप फरियादी ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री और कब्जे के लिए दबाव बनाने पर धर्मेंद्र ठाकुर ने धमकी दी। शिकायत के मुताबिक, उसने कहा कि उसके खिलाफ 25 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। साथ ही, उसके या नंदकिशोर मनावत के पास दोबारा आने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी। 2.80 लाख रुपये लौटाए, 5 लाख बाकी होने का दावा विजय चौहान के मुताबिक, पुलिस में शिकायत करने की बात कहने के बाद नंदकिशोर मनावत ने 2 लाख 50 हजार रुपये नकद और 30 हजार रुपये ऑनलाइन वापस किए। हालांकि, फरियादी का आरोप है कि बाकी 5 लाख रुपये लौटाने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद विजय चौहान ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।

SIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप

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बांग्लादेश टेस्ट सीरीज से बाहर हुए शाई होप और अल्जारी जोसेफ, केविन विकहम को पहली बार मिला मौका

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IMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, 2026 और 2027 में 7% विकास दर रहने की उम्मीद

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने साल 2026 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। वैश्विक तनाव, आर्थिक सुस्ती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का ध्यान खींचा है। मजबूत घरेलू मांग और सर्विसेज सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन को भारत की तेज विकास दर की प्रमुख वजह माना गया है। IMF ने अक्टूबर 2026 की अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में भारत की विकास संभावनाओं को सकारात्मक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा आयात पर निर्भर कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं जहां दबाव का सामना कर रही हैं, वहीं भारत की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। 2027 में भी 7% ग्रोथ का अनुमान IMF ने 2026 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान में जुलाई के मुकाबले 0.6 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की है। वहीं, 2027 के लिए भी विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया गया है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2027 का अनुमान जुलाई के मुकाबले 0.3 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी भारत में विकास की संभावनाओं को लेकर उम्मीद बनी हुई है। IMF से पहले विश्व बैंक और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी भारत की विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी कर चुकी हैं। चीन की सुस्ती के बीच भारत पर नजर रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया की अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती देखने को मिल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी गतिविधियों में तेजी ने भी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित किया है। भारत और चीन एशिया की आर्थिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रहे हैं, हालांकि दोनों देशों की विकास संभावनाओं में अंतर दिखाई दे रहा है। IMF के अनुमान के अनुसार, चीन की विकास दर 2026 में 4.5% और 2027 में 4% रह सकती है। वैश्विक तनाव और ऊर्जा की ऊंची कीमतों को चीन की आर्थिक वृद्धि के सामने चुनौतियों में शामिल किया गया है। दुनिया की आर्थिक विकास दर पर दबाव IMF के मुताबिक, 2028 से 2031 के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था औसतन 3.2% की दर से बढ़ सकती है। यह 2000 से 2019 के बीच महामारी से पहले दर्ज औसत 3.7% की विकास दर से कम है। रिपोर्ट में वैश्विक तनाव, ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और ऊर्जा आयात पर निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले दबाव को आर्थिक विकास के लिए चुनौती बताया गया है। ऐसे माहौल में भारत की अनुमानित विकास दर अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई देती है। मजबूत घरेलू मांग और जनसांख्यिकी से मिल रहा सहारा भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे बढ़ता घरेलू बाजार, मजबूत मांग, अनुकूल जनसांख्यिकी और सुधारों को अहम कारक माना गया है। सर्विसेज सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन भी विकास दर को सहारा दे रहा है। हालांकि, बेहतर अनुमान के बावजूद चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय तनाव और वैश्विक मांग में कमजोरी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

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