गुरु शंकराचार्य की जयंती पर ओंकारेश्वर में आयोजित एकात्म पर्व के समापन समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, “भारत को सिर्फ ज्ञान और शास्त्रों से नहीं, शक्ति और शस्त्रों की परंपरा से भी सशक्त बनाना होगा।” कार्यक्रम में 29 राज्यों से आए 500 शंकरदूतों को दीक्षा दी गई और अद्वैत लोक निर्माण से लेकर धार्मिक नगरों को शराबमुक्त बनाने तक कई बड़े संकल्पों की घोषणा हुई।
“धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र और शास्त्र दोनों जरूरी”
CM मोहन यादव ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य ने धर्मजागरण के लिए शक्ति की आराधना की थी। आज के भारत को भी ज्ञान, वैराग्य, अध्यात्म के साथ-साथ आत्मरक्षा और सामर्थ्य की आवश्यकता है। उन्होंने दंडी स्वामी की परंपरा को याद करते हुए कहा, “भारत को अब केवल उपदेश नहीं, क्रियात्मक संकल्प चाहिए।”
नर्मदा तट पर 500 शंकरदूतों को दीक्षा
शुक्रवार सुबह अभय घाट (ओंकारेश्वर) पर 29 राज्यों से आए 500 युवाओं को शंकरदूत की दीक्षा दी गई। स्वामी अवधेशानंद गिरी ने इन शंकरदूतों को अद्वैत वेदांत और शंकराचार्य जी के विचारों के प्रचार-प्रसार का संकल्प दिलाया। खंडवा जिले से पृथ्वी सिंह और अनिमेष ने भी दीक्षा ली।

धार्मिक शहरों को बनाया जाएगा शराब मुक्त
मुख्यमंत्री ने मंच से ऐलान किया कि राज्य सरकार अब धार्मिक नगरों को शराब मुक्त करने की दिशा में कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार गोशाला, गोपालन और दूध उत्पादन को बढ़ावा देने वाली कामधेनु योजना पर भी तेजी से काम कर रही है।
हर नगरीय निकाय में बनेगा गीता भवन
मुख्यमंत्री ने बताया कि हर नगर में गीता भवन बनाया जाएगा, जहां लोग धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग ले सकें। साथ ही 1 दिसंबर को गीता जयंती का आयोजन पूरे प्रदेश में किया जाएगा।

स्वामी अवधेशानंद बोले – “CM मोहन यादव को नर्मदा-क्षिप्रा और बाबा महाकाल ने चुना है”
जूना अखाड़ा के पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कहा कि ओंकारेश्वर में बन रहा अद्वैत लोक केवल शंकराचार्य का नहीं, बल्कि ईश्वरीय चेतना का स्थान होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री की प्रशंसा करते हुए कहा, “हो सकता है उनका चयन लोकतंत्र ने किया हो, लेकिन मुझे विश्वास है उन्हें मां नर्मदा, क्षिप्रा और बाबा महाकाल ने मुख्यमंत्री बनाया है।”
https://deshharpal.com/का संदेश:
शंकराचार्य का दर्शन केवल आध्यात्मिक नहीं, राष्ट्रीय चेतना का वाहक है। भारत को फिर से वैदिक चेतना, सांस्कृतिक गौरव और शक्ति की भावना से जोड़ने की यह यात्रा हर जन के सहयोग से ही संभव है।
