मध्यप्रदेश की सरकारी ट्रेजरी में अलग-अलग योजनाओं के भुगतान को लेकर बड़ी अनियमितताएं सामने आई हैं। स्टेट फाइनेंशियल इंटेलिजेंस सेल (SFIC) ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान जिलों की ट्रेजरी में जांच के दौरान कुल 66 तरह की गड़बड़ियां पकड़ी हैं। इनमें मुख्यमंत्री स्कूटी योजना, मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता योजना और मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं निकाह योजना के भुगतान में अनियमितताएं शामिल हैं।
जांच में अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों को मिलने वाली अवकाश यात्रा रियायत (LTC) में भी निर्धारित राशि से अधिक भुगतान किए जाने का मामला सामने आया है। इसके अलावा कर्मचारियों की पासबुक, पेंशन अंशदान और सरकारी खरीद से जुड़े नियमों की अनदेखी भी उजागर हुई है।
मुआवजा और सिक्योरिटी डिपॉजिट के भुगतान में गड़बड़ी
जांच के दौरान कंस्ट्रक्शन एजेंसी को 8.35 करोड़ रुपए का सिक्योरिटी डिपॉजिट लौटाने की प्रक्रिया में कई अनियमितताएं मिलीं। वहीं, पुराने लंबित मामलों में ट्रेजरी से भेजी गई 1.45 करोड़ रुपए की राशि धार जिला पंचायत की ग्रामीण विकास निधि के खाते में जमा करा दी गई।
इसके अलावा प्राकृतिक आपदा, सर्पदंश और बाढ़ से होने वाली मौतों के मामलों में मुआवजा वितरण के दौरान भी गड़बड़ियां सामने आईं।
जांच में यह भी पता चला कि कई जगह एक ही बैंक खाते में अलग-अलग नामों से भुगतान किया गया। वहीं, एक ही व्यक्ति के अलग-अलग बैंक खातों में समान नामों से राशि भेजे जाने के मामले भी सामने आए।
पेंशन और सरकारी अंशदान में भी अनियमितता
राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) के तहत सरकार की ओर से 14 प्रतिशत की दर से अंशदान दिया जाना था, लेकिन कई मामलों में निर्धारित राशि से कम अंशदान निकाला गया। 1 जनवरी 2005 और उसके बाद नियुक्त अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए लागू पेंशन व्यवस्था में भी नियमों की अनदेखी मिली।
इसके अलावा समूह बीमा की राशि का भुगतान एनपीएस खाते से किए जाने का मामला भी सामने आया है।
जीएसटी, सरकारी खरीद और बिजली बिल में मिली गड़बड़ी
एसएफआईसी की जांच में कई अन्य वित्तीय अनियमितताएं भी उजागर हुई हैं। इनमें शामिल हैं:
- वित्त विभाग की मंजूरी के बिना एक से अधिक व्यक्तिगत जमा खाते खोले गए।
- स्टांप का भंडारण निर्धारित सीमा से अधिक किया गया।
- जीएसटी की प्राप्ति और आरबीआई में जमा राशि के आंकड़ों में अंतर मिला।
- ठेकेदारों को भुगतान करते समय आयकर और जीएसटी की निर्धारित कटौती नहीं की गई।
- विभागाध्यक्ष (HOD) को जानकारी दिए बिना खरीदी की गई।
- टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी कर वाहनों को किराए पर लिया गया।
- सामान्य भविष्य निधि और विभागीय भविष्य निधि के एक ही पत्र पर दो बार भुगतान किया गया।
- एक ही बिजली बिल का दो-दो बार भुगतान किया गया।
पासबुक और एलटीसी भुगतान में भी नियमों की अनदेखी
जांच में सामने आया कि अखिल भारतीय सेवा के कुछ अधिकारियों को एलटीसी के तहत निर्धारित राशि से अधिक भुगतान किया गया। वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशों के अनुसार अधिकारी-कर्मचारियों के लिए दो पासबुक होना जरूरी है, लेकिन कई स्थानों पर इस नियम का पालन नहीं किया गया।
ट्रेजरी सॉफ्टवेयर की खामियां भी आईं सामने
ट्रेजरी डायरेक्टर राजीव सक्सेना की ओर से सभी संबंधित जिलों की ट्रेजरी को इन गड़बड़ियों की जानकारी भेजी गई है। साथ ही भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) को भी इसकी सूचना दी गई है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान ट्रेजरी के कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में भी कुछ तकनीकी खामियां सामने आई हैं। इन्हें ठीक करने की प्रक्रिया चल रही है, ताकि भविष्य में भुगतान संबंधी अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।


