छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में राज्य शासन ने शिक्षा विभाग के सहायक संचालक एलपी डाहिरे को निलंबित कर दिया है। उन पर हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद एक रिटायर्ड शिक्षिका के पेंशन प्रकरण का निराकरण नहीं करने का आरोप है। यह मामला उनके मुंगेली जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के कार्यकाल का है। खास बात यह है कि करीब दो महीने पहले ही उनका तबादला मुंगेली से बिलासपुर स्थित संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा कार्यालय में किया गया था।
दरअसल, मुंगेली की रिटायर्ड शिक्षिका राजेश्वरी त्रिपाठी लंबे समय से पेंशन भुगतान की समस्या से जूझ रही थीं। उन्होंने मामले का निराकरण कराने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कई बार आवेदन दिया, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। पेंशन नहीं मिलने के कारण उन्हें परिवार का भरण-पोषण करने में भी परेशानी होने लगी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं हुआ पेंशन प्रकरण का निराकरण
विभागीय स्तर पर सुनवाई नहीं होने के बाद राजेश्वरी त्रिपाठी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को उनके पेंशन प्रकरण का निराकरण करने का आदेश दिया था। इसके बावजूद शिक्षिका को राहत नहीं मिली और पेंशन की समस्या बनी रही।
इससे परेशान होकर उन्होंने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर दी। इस पर कोर्ट ने शिक्षा सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए।
हाईकोर्ट की नाराजगी के बाद शासन ने की कार्रवाई
मामले में हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव के प्रति नाराजगी जाहिर की और पेंशन प्रकरण लंबित रखने के लिए जिम्मेदारी तय कर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
इसके बाद राज्य शासन ने तत्कालीन मुंगेली जिला शिक्षा अधिकारी एलपी डाहिरे को निलंबित कर दिया। निलंबन आदेश में उनके कृत्य को हाईकोर्ट के प्रति अनादर, प्रशासनिक अनुशासनहीनता और पदीय कर्तव्यों के प्रति गंभीर उदासीनता माना गया है।
निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बिलासपुर निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
दो महीने पहले ही हुआ था तबादला
बता दें कि एलपी डाहिरे करीब दो महीने पहले तक मुंगेली में जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर कार्यरत थे। अधिकारियों के तबादला आदेश के तहत उन्हें मुंगेली डीईओ पद से हटाकर बिलासपुर स्थित संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा कार्यालय में सहायक संचालक बनाया गया था। अब पुराने कार्यकाल से जुड़े पेंशन प्रकरण में लापरवाही के चलते शासन ने उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है।


