राजधानी रायपुर में कांग्रेस सोमवार को वोट चोरी के आरोप और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट का घेराव करेगी। पार्टी का प्रदर्शन दोपहर में प्रस्तावित है। प्रदेश कांग्रेस के नए प्रभारी सुखदेव भगत भी इस प्रदर्शन में शामिल होंगे।
कांग्रेस ने देशभर में चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। इसके तहत 25 सितंबर को प्रदेश कांग्रेस कमेटियों ने राज्य चुनाव आयोग के कार्यालयों तक मार्च निकाला था। अब आंदोलन के दूसरे चरण में 28 सितंबर को जिला कांग्रेस कमेटियों को कलेक्ट्रेट तक मार्च और प्रदर्शन करने के निर्देश दिए गए हैं।
सुखदेव भगत की मौजूदगी में होगा प्रदर्शन
प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सुखदेव भगत रविवार को रायपुर पहुंचे। सोमवार को वे पार्टी के विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इसी दौरान कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट तक मार्च निकालेंगे।
प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, विधायकों, जिला और ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के शामिल होने की तैयारी है। कांग्रेस नेता चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े मुद्दे उठाएंगे।
25 सितंबर को राज्य चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च
कांग्रेस ने आंदोलन के पहले चरण में 25 सितंबर को देशभर में प्रदर्शन किया था। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस कमेटियों को राज्य चुनाव आयोग के कार्यालयों तक मार्च निकालने का कार्यक्रम दिया गया था।
अब 28 सितंबर को जिला स्तर पर कलेक्ट्रेट घेराव को आंदोलन का दूसरा चरण बताया जा रहा है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने जिला कांग्रेस समितियों को कलेक्ट्रेट तक मार्च निकालने के निर्देश दिए हैं।
चुनाव आयोग के फैसलों पर 14 बार आपत्ति का दावा
विवाद के बीच इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि पिछले 10 महीनों में दो चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के कुछ फैसलों पर 14 बार आपत्ति जताई। रिपोर्ट में कहा गया कि इन आपत्तियों पर सुनवाई नहीं हुई। चुनाव आयोग ने बैठक के बाद इन दावों पर अपना पक्ष भी रखा।
कांग्रेस ने आयोग की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि वह अंदरूनी मतभेद सामने आने के बाद स्थिति संभालने की कोशिश कर रहा है। पार्टी ने कई राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया को रोकने और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पहले भी उठा चुकी है कांग्रेस
अप्रैल 2026 में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया था कि विपक्ष के 73 राज्यसभा सांसदों ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए नोटिस दिया है। इसमें उनके खिलाफ ‘साबित कदाचार’ का आरोप लगाए जाने की बात कही गई थी।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। कांग्रेस ने SIR के दौरान वास्तविक मतदाताओं के प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की थी।
इससे पहले लोकसभा में भी उन्हें हटाने से जुड़ा प्रस्ताव लाए जाने की बात सामने आई थी। हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।
पहले भी चुनाव आयोग में सामने आए हैं मतभेद
1993-95: टीएन शेषन और साथी चुनाव आयुक्त
1993 में दो और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के बाद चुनाव आयोग बहुसदस्यीय हो गया था। तत्कालीन CEC टीएन शेषन ने इस व्यवस्था को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। 14 जुलाई 1995 को सुप्रीम कोर्ट ने बहुसदस्यीय चुनाव आयोग की व्यवस्था को बरकरार रखा। इस दौरान शेषन और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच अधिकारों और कामकाज को लेकर मतभेद भी सामने आए थे।
2009: CEC ने चुनाव आयुक्त को हटाने की सिफारिश की
जनवरी 2009 में तत्कालीन CEC एन. गोपालस्वामी ने चुनाव आयुक्त नवीन चावला को हटाने की सिफारिश राष्ट्रपति से की थी। उन्होंने चावला पर पक्षपात का आरोप लगाया था। राष्ट्रपति ने इस सिफारिश को स्वीकार नहीं किया। बाद में अप्रैल 2009 में नवीन चावला CEC बने।
2019: अशोक लवासा की अलग राय
2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह से जुड़े आचार संहिता के कुछ मामलों में आयोग के बहुमत से अलग राय रखी थी। उन्होंने अपनी असहमति को आदेशों में दर्ज करने की मांग की थी।
21 मई 2019 को आयोग ने 2:1 के बहुमत से तय किया कि ऐसी असहमति को अंतिम आदेश में सार्वजनिक नहीं किया जाएगा, हालांकि उसे फाइल में दर्ज किया जा सकता है। इसके बाद लवासा ने आचार संहिता से संबंधित कुछ बैठकों से खुद को अलग कर लिया था।
कांग्रेस ने उठाए चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवाल
कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के जरिए मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। पार्टी CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ उनके कार्यकाल में लिए गए फैसलों और मतदाता सूची में किए गए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग कर रही है।
