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Javed Akhtar का नीतीश सरकार पर हमला, बोले– बिना शर्त माफी मांगें

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प्रसिद्ध गीतकार और लेखक Javed Akhtar ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि हिजाब से जुड़े फैसले को लेकर मुख्यमंत्री को बिना किसी शर्त के माफी मांगनी चाहिए। जावेद अख्तर का कहना है कि इस तरह के फैसले समाज में गलत संदेश देते हैं और अल्पसंख्यकों की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं।

वहीं दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने नीतीश सरकार के फैसले का खुलकर समर्थन किया है। गिरिराज सिंह ने कहा कि हिजाब हटाने का फैसला बिल्कुल सही है, क्योंकि भारत कोई इस्लामिक देश नहीं है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर किसी को नौकरी चाहिए, तो उसे चेहरा दिखाना ही होगा

गिरिराज सिंह का कहना है कि सरकारी और निजी नौकरियों में नियम सभी के लिए समान होते हैं और किसी भी धर्म के आधार पर विशेष छूट नहीं दी जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि देश में संविधान सर्वोपरि है और उसी के अनुसार फैसले लिए जाते हैं।

इस पूरे विवाद को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। एक तरफ जहां जावेद अख्तर इस फैसले को गलत बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ गिरिराज सिंह इसे राष्ट्रहित और संविधान के अनुरूप बता रहे हैं। हिजाब को लेकर शुरू हुई यह बहस अब सामाजिक और राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बनती जा रही है।

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Neha Pandey

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4 साल बाद टेस्ट शतक के करीब पहुंचे बाबर आजम, वेस्टइंडीज के खिलाफ 88 रन बनाकर नाबाद

स्पोर्ट्स डेस्क। पाकिस्तान के टेस्ट कप्तान बाबर आजम चार साल बाद टेस्ट क्रिकेट में शतक के बेहद करीब पहुंच गए हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले जा रहे दूसरे टेस्ट की दूसरी पारी में बाबर 88 रन बनाकर नाबाद हैं और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा चुके हैं। बाबर आजम ने अपना पिछला टेस्ट शतक वर्ष 2022 में न्यूजीलैंड के खिलाफ कराची टेस्ट में लगाया था। उस मुकाबले में उन्होंने 161 रन की शानदार पारी खेली थी। संयोग से उस समय भी वह पाकिस्तान की कप्तानी कर रहे थे। कप्तानी में वापसी के बाद शानदार प्रदर्शन खराब फॉर्म के चलते बाबर आजम ने वर्ष 2023 में टेस्ट कप्तानी छोड़ दी थी, जिसके बाद शान मसूद को नियमित कप्तान बनाया गया। हालांकि, 5 जुलाई 2026 को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने एक बार फिर बाबर को टेस्ट टीम की कमान सौंपी। कप्तानी में वापसी के बाद उनका यह प्रदर्शन टीम के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। अब्दुल्ला शफीक के शतक से पाकिस्तान मजबूत दूसरी पारी में अब्दुल्ला शफीक के शानदार नाबाद शतक और बाबर आजम की अर्धशतकीय पारी की बदौलत पाकिस्तान ने 2 विकेट पर 273 रन बना लिए हैं। दोनों बल्लेबाजों के बीच तीसरे विकेट के लिए शतकीय साझेदारी हो चुकी है। पहली पारी के आधार पर पाकिस्तान अब वेस्टइंडीज से केवल 71 रन पीछे है। दो साल बाद शतक लगाने में सफल रहे शफीक अब्दुल्ला शफीक ने अपने टेस्ट करियर का छठा शतक लगाया। यह उनका 2024 के बाद पहला टेस्ट शतक है। वह लंबे समय तक 99 रन पर रुके रहे, लेकिन बाद में जोमेल वॉरिकन की गेंद पर मिडविकेट की दिशा में चौका लगाकर तीन अंकों तक पहुंचे। अजान ओवैस ने दिलाई तेज शुरुआत पाकिस्तान की दूसरी पारी की शुरुआत युवा बल्लेबाज अजान ओवैस ने आक्रामक अंदाज में की। उन्होंने दूसरे ही ओवर में तेज गेंदबाज केमार रोच के खिलाफ लगातार तीन चौके जड़कर टीम को तेज शुरुआत दिलाई। हालांकि, इमाम-उल-हक तेज गेंदबाज शमार जोसेफ की गेंद पर स्लिप में कैच देकर आउट हो गए। ओवैस ने अर्धशतक जरूर पूरा किया, लेकिन बाद में जोमेल वॉरिकन की गेंद पर एलबीडब्ल्यू आउट हो गए। पहली पारी में 344 रन पर सिमटी थी वेस्टइंडीज इससे पहले वेस्टइंडीज की पहली पारी 344 रन पर समाप्त हुई थी। टीम की ओर से जस्टिन ग्रीव्स और रोस्टन चेज ने अर्धशतकीय पारियां खेलीं। पाकिस्तान के लिए अली उस्मान ने पहली ही गेंद पर जस्टिन ग्रीव्स का विकेट लिया। उबैद शाह ने रोस्टन चेज को बोल्ड किया, जबकि साजिद खान ने शमार जोसेफ का विकेट लेकर वेस्टइंडीज की पारी का अंत किया। क्रिकेट और खेल जगत की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com

रायपुर में भारत ग्रुप के खिलाफ सामूहिक शिकायत, रोजगार और बायबैक के नाम पर लाखों की ठगी का आरोप

रायपुर। राजधानी रायपुर के फाफाडीह स्थित वॉलफोर्ट ओजोन में संचालित भारत ग्रुप के खिलाफ छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के लोगों ने सामूहिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कंपनी ने अगरबत्ती बनाने की मशीन, बायबैक गारंटी और घर बैठे रोजगार का झांसा देकर उनसे लाखों रुपये वसूले, लेकिन किए गए वादे पूरे नहीं किए। पीड़ितों ने इस मामले की शिकायत जनदर्शन में कलेक्टर से की है। साथ ही कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर मंगलवार को रायपुर पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय भी पहुंचे। घर बैठे कमाई का दिया गया था दावा शिकायतकर्ताओं के अनुसार, कंपनी ने विज्ञापनों के माध्यम से दावा किया था कि लोग घर बैठे हर महीने 18 हजार से 60 हजार रुपये तक कमा सकते हैं। कंपनी ने भरोसा दिलाया था कि उसकी मशीन प्रतिदिन 80 से 100 किलो अगरबत्ती तैयार करेगी और तैयार उत्पाद को तय कीमत पर स्वयं खरीद लेगी। मशीन की सर्विस और रखरखाव की जिम्मेदारी भी कंपनी ने लेने का आश्वासन दिया था। मशीनों पर लाखों खर्च, उत्पादन नहीं मिलने का आरोप पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने अपनी बचत और कर्ज लेकर 1.10 लाख से 1.20 लाख रुपये तक की कीमत में मशीनें खरीदीं। आरोप है कि मशीनों का सही तरीके से इंस्टॉलेशन नहीं किया गया। कई मशीनें पूरी तरह बंद पड़ी हैं, जबकि जो मशीनें चल रही हैं, वे वादा किए गए उत्पादन के मुकाबले केवल 15 से 20 किलो तक ही अगरबत्ती बना पा रही हैं। GST बिल नहीं देने का भी आरोप शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने मशीन बेचते समय वैध GST बिल जारी नहीं किया और केवल कच्चा चालान देकर लेन-देन किया। उन्होंने इस मामले में संभावित कर अनियमितताओं की जांच कराने की मांग भी की है। कम वजन का कच्चा माल मिलने का दावा पीड़ितों का आरोप है कि कंपनी ने दस्तावेजों में जितना कच्चा माल दर्शाया, वास्तविक आपूर्ति उससे कम की गई। उनका दावा है कि कई बोरियों में 2 से 3 किलो तक वजन कम मिला। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इसके समर्थन में उनके पास डिजिटल कांटे से की गई तौल के फोटो और अन्य साक्ष्य मौजूद हैं। तैयार माल खरीदने से किया इनकार शिकायत में यह भी कहा गया है कि कंपनी ने तैयार अगरबत्ती वापस खरीदने का वादा पूरा नहीं किया। आरोप है कि विभिन्न कारण बताकर तैयार माल लेने से इनकार कर दिया गया, जिससे बड़ी मात्रा में उत्पाद खराब हो गया और लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। रिजेक्शन के नाम पर मनमानी कटौती करने का आरोप भी लगाया गया है। धमकी देने का भी आरोप पीड़ितों का कहना है कि जब उन्होंने मशीनों की खराबी, कम वजन या भुगतान को लेकर सवाल उठाए, तो कंपनी के संचालकों और कर्मचारियों ने अनुबंध समाप्त करने और कानूनी कार्रवाई की धमकी दी। कुछ लोगों पर कथित रूप से माफीनामा लिखने का दबाव भी बनाया गया। कलेक्टर से की ये मांग शिकायतकर्ताओं ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, कंपनी के वित्तीय लेन-देन और नापतौल की जांच कराने, दोषपूर्ण मशीनें वापस लेने तथा पीड़ितों की जमा राशि ब्याज और मुआवजे सहित लौटाने की मांग की है। साथ ही कंपनी के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी के मामले दर्ज करने की भी मांग की गई है। फिलहाल, मामले में संबंधित अधिकारियों या कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। छत्तीसगढ़ और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com

रायपुर के आरंग में महिला की संदिग्ध मौत, परिजनों ने पति पर हत्या का आरोप लगाया

रायपुर। राजधानी रायपुर से लगे आरंग क्षेत्र में एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। मृतका के परिजनों ने उसके पति पर हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस से निष्पक्ष जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मृतका की पहचान पुष्पा सोनकर के रूप में हुई है, जो आरंग के वार्ड नंबर-14 स्थित शनि मंदिर के पास रहती थीं। परिजनों का आरोप- पति का दूसरी महिला से था संबंध मृतका के पिता रामधार सोनकर ने पुलिस को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि उनकी बेटी की शादी करीब 20 वर्ष पहले भोला सोनकर से हुई थी। दोनों के चार बच्चे हैं। परिजनों का दावा है कि पिछले तीन वर्षों से भोला सोनकर का दूसरी महिला से संबंध था और उससे एक बच्चा भी है। इसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता था। उनका आरोप है कि आरोपी पति आए दिन पुष्पा के साथ मारपीट करता था और उसे जान से मारने की धमकी भी देता था। घटना वाले दिन झगड़े का दावा परिजनों के अनुसार, घटना से एक रात पहले भोला सोनकर घर नहीं लौटा था। मृतका की बेटी का दावा है कि 31 जुलाई की सुबह करीब 5 बजे वह घर पहुंचा, जिसके बाद पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ। परिजनों का आरोप है कि इसके बाद वह पुष्पा को घर के पीछे स्थित बाड़ी की ओर ले गया। बाद में सुबह करीब 8:15 बजे उसने फोन कर पुष्पा के कुएं में गिरने की सूचना परिवार को दी। इलाज के दौरान हुई मौत परिवार के मुताबिक, सूचना मिलने पर वे मौके पर पहुंचे तो पुष्पा गंभीर हालत में मिलीं। उन्हें पहले आरंग के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां से डॉक्टरों ने रायपुर रेफर कर दिया। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। “तैरना जानती थी, हादसा नहीं लग रहा” मृतका के परिजनों का कहना है कि पुष्पा को तैरना आता था, इसलिए उनके अनुसार कुएं में गिरने की घटना संदिग्ध है। उन्होंने आरोप लगाया है कि दूसरी महिला से संबंधों में बाधा बनने के कारण आरोपी पति ने उन्हें कुएं में धक्का दिया। पुलिस ने कहा- जांच के बाद होगी कार्रवाई मृतका के पिता, भाइयों और बेटियों ने आरंग थाने में लिखित शिकायत देकर आरोपी पति के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग की है। आरंग पुलिस ने बताया कि परिजनों का आवेदन प्राप्त हुआ है। मामले की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों तथा जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। छत्तीसगढ़ और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com

मंडी शुल्क बढ़ाने के फैसले का खंडवा में विरोध, व्यापारियों ने सरकार से बढ़ोतरी वापस लेने की मांग की

खंडवा। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कृषि उपज मंडियों में मंडी शुल्क 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत किए जाने के फैसले का विरोध तेज हो गया है। मंगलवार को खंडवा में व्यापार एवं उद्योग कांग्रेस के पदाधिकारियों और व्यापारियों ने पुरानी अनाज मंडी कार्यालय पहुंचकर मंडी सचिव को ज्ञापन सौंपा और शुल्क में की गई 0.5 प्रतिशत बढ़ोतरी वापस लेने की मांग की। व्यापारियों ने बढ़ती लागत पर जताई चिंता ज्ञापन में व्यापारियों ने कहा कि मंडी शुल्क बढ़ने से व्यापार की लागत में इजाफा होगा, जिसका सीधा असर किसानों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि बढ़ा हुआ शुल्क मध्य प्रदेश की मंडियों को पड़ोसी राज्यों की मंडियों की तुलना में प्रतिस्पर्धा में कमजोर कर सकता है, जिससे कृषि व्यापार प्रभावित होने की आशंका है। पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग व्यापार एवं उद्योग कांग्रेस के खंडवा शहर अध्यक्ष संदीप सोनी ने कहा कि संगठन व्यापार और उद्योग से जुड़े मुद्दों को शासन-प्रशासन के सामने मजबूती से उठाएगा। उन्होंने बताया कि यह संगठन का पहला सामूहिक कार्यक्रम था, जिसमें बड़ी संख्या में व्यापारियों ने भाग लिया। उन्होंने सरकार से मंडी शुल्क में की गई वृद्धि को वापस लेकर पहले की व्यवस्था बहाल करने की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने दिया समर्थन कार्यक्रम में शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा रघुवंशी और नेता प्रतिपक्ष मुल्लू राठौर भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने व्यापारियों की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को ऐसे निर्णय लेने से बचना चाहिए, जिनका नकारात्मक प्रभाव व्यापार, कृषि और आम नागरिकों पर पड़े। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने “देश का कल्चर-एग्रीकल्चर” जैसे नारे लगाकर भी अपना विरोध दर्ज कराया। ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांग व्यापारियों ने सरकार से मांग की कि मंडी शुल्क में की गई 0.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी तत्काल वापस ली जाए और किसानों, व्यापारियों तथा उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए पहले वाली शुल्क व्यवस्था दोबारा लागू की जाए। मध्य प्रदेश और कारोबार से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com

केंद्र का दावा: सात वर्षों में 36 देशों से 274 भगोड़े भारत लाए गए, ₹17,874 करोड़ की संपत्ति अटैच

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि पिछले सात वर्षों में 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। सरकार के अनुसार, यह आंकड़ा वर्ष 2004 से 2013 के दौरान हुए प्रत्यर्पण की तुलना में करीब 10 गुना अधिक है। सरकार ने यह भी बताया कि इस अवधि में भगोड़ों की 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति भी अटैच की गई है। कई तरह के गंभीर मामलों में थे वांछित सरकार के मुताबिक, 2019 से जुलाई 2026 के बीच भारत लाए गए 274 भगोड़ों में विभिन्न गंभीर अपराधों के आरोपी शामिल हैं। इनमें 9 आर्थिक अपराध, 17 आतंकवाद, 42 संगठित अपराध, 62 हत्या, लूट और अन्य हिंसक अपराध, 53 यौन अपराध और बच्चों के खिलाफ यौन अपराध, 16 मादक पदार्थों की तस्करी, 12 नकली मुद्रा तस्करी, 18 मानव तस्करी और 45 अन्य मामलों में वांछित आरोपी शामिल थे। इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस में भी बढ़ोतरी केंद्र सरकार ने बताया कि हाल के वर्षों में इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में 40, 2023 में 100, 2024 में 107, 2025 में 112 और 2026 में अब तक 182 रेड नोटिस जारी किए जा चुके हैं। पिछले तीन वर्षों में कुल 401 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ रेड नोटिस जारी किए गए। प्रत्यर्पण प्रक्रिया को बनाया गया अधिक प्रभावी गृह मंत्रालय के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री के मार्गदर्शन में प्रत्यर्पण संबंधी अनुरोधों को अब अधिक पेशेवर तरीके से तैयार किया जा रहा है। संबंधित देशों की कानूनी आवश्यकताओं के अनुरूप दस्तावेज, साक्ष्य और आवश्यक लिखित आश्वासन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे प्रत्यर्पण प्रक्रिया को मजबूती मिली है। पुराने ढांचे पर भी सरकार का बयान सरकार ने दावा किया कि 2004-13 के दौरान भारत का प्रत्यर्पण तंत्र अपेक्षाकृत कमजोर था। उस समय केवल 37 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधियां थीं और आर्थिक भगोड़ों से निपटने के लिए अलग कानून भी उपलब्ध नहीं था। सरकार के अनुसार, जटिल कागजी प्रक्रिया के कारण कई मामलों में विदेशी अदालतों ने भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध स्वीकार नहीं किए थे। केंद्र ने यह भी कहा कि वर्ष 2018 में Fugitive Economic Offenders Act लागू किया गया, जबकि 2019 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) में संशोधन कर कार्रवाई के दायरे को और मजबूत किया गया। देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com

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