मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के तराना कस्बे में एक बार फिर हिंसा ने लोगों की नींद उड़ा दी। गुरुवार शाम मामूली कहासुनी से शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते बड़े बवाल में बदल गया। गुस्साई भीड़ ने कई घरों पर पत्थर फेंके, दुकानों में तोड़फोड़ की और बस स्टैंड पर खड़ी बसों को निशाना बनाया। कुछ बसों में आग लगाए जाने की भी पुष्टि हुई है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, विवाद की जड़ एक युवक पर हुआ हमला बताया जा रहा है। युवक गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसी घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और कुछ ही देर में भीड़ उग्र हो गई। लोग अपने घरों में दुबक गए, बाजार बंद हो गए और सड़कों पर अफरा-तफरी मच गई।
बस स्टैंड पर सबसे ज्यादा नुकसान
हिंसा के दौरान तराना बस स्टैंड पर खड़ी करीब 10 से 11 बसों के शीशे तोड़ दिए गए। कुछ बसों में आग लगाने की कोशिश की गई और एक-दो बसों के अंदर आग भी भड़क गई। इसके अलावा आसपास खड़ी गाड़ियां और दुकानों को भी नुकसान पहुंचा। कई घरों पर पत्थर फेंके गए, जिससे लोगों में भारी दहशत फैल गई।
पुलिस और प्रशासन हरकत में
स्थिति बिगड़ने की खबर मिलते ही पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। भारी पुलिस बल तैनात किया गया और हालात काबू में करने के लिए इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा। रात भर पुलिस गश्त करती रही ताकि हालात दोबारा न बिगड़ें।
प्रशासन ने उपद्रवियों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है और ड्रोन की मदद भी ली जा रही है। अब तक कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं और कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।
लोग सहमे, बाजार बंद
घटना के बाद तराना के कई इलाकों में सन्नाटा पसरा रहा। दुकानदारों ने एहतियात के तौर पर बाजार बंद रखे। जिन घरों और दुकानों को नुकसान पहुंचा है, उनके मालिक गहरे सदमे में हैं। लोगों का कहना है कि पहले भी यहां तनाव की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन इस बार हिंसा ने ज्यादा डर पैदा कर दिया है।
प्रशासन की अपील
प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और नुकसान का आकलन कर मुआवजे की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
तराना की यह घटना एक बार फिर सवाल खड़े करती है कि छोटे-से विवाद कैसे बड़ी हिंसा में बदल जाते हैं। स्थानीय लोग चाहते हैं कि हालात जल्द सामान्य हों और कस्बे में फिर से सुकून लौटे।
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