Assam विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपना बहुप्रतीक्षित संकल्प पत्र (Manifesto) जारी कर दिया है। गुवाहाटी में आयोजित कार्यक्रम में Nirmala Sitharaman की मौजूदगी में इसे पेश किया गया, जहां पार्टी ने साफ संकेत दिया कि इस बार चुनाव सिर्फ विकास ही नहीं, बल्कि पहचान और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी लड़ा जाएगा।
मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma के नेतृत्व में भाजपा ने 31 वादों के जरिए राज्य के लिए अपना रोडमैप सामने रखा है। इस घोषणापत्र में जहां एक ओर इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार पर जोर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर ‘लव जिहाद’, अवैध घुसपैठ और समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे मुद्दे भी केंद्र में हैं।
पहचान और कानून व्यवस्था पर फोकस
घोषणापत्र की सबसे ज्यादा चर्चा उन वादों की हो रही है, जिनमें ‘Love Jihad’ और ‘Land Jihad’ के खिलाफ सख्त कानून लाने की बात कही गई है। भाजपा का कहना है कि इन कानूनों के जरिए सामाजिक संतुलन बनाए रखने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने का प्रयास किया जाएगा।
इसके साथ ही पार्टी ने अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का वादा किया है। सरकार बनने पर कथित तौर पर कब्जाई गई जमीन को वापस दिलाने के लिए अभियान चलाने की बात भी कही गई है। यह मुद्दा असम की राजनीति में लंबे समय से संवेदनशील रहा है और इस बार भी चुनावी बहस का केंद्र बनने वाला है।
UCC पर बड़ा संकेत
भाजपा ने अपने घोषणापत्र में Uniform Civil Code (UCC) लागू करने का भी वादा किया है। हालांकि, इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की बात कही गई है, ताकि स्थानीय और पारंपरिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखा जा सके। Himanta Biswa Sarma पहले भी इस विषय पर अपनी स्पष्ट राय रख चुके हैं।
रोजगार और विकास का वादा
राज्य के युवाओं को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने 2 लाख सरकारी नौकरियां देने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप्स और इंडस्ट्रियल ग्रोथ को बढ़ावा देने की योजनाएं भी शामिल हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में पार्टी ने अगले पांच वर्षों में करीब ₹5 लाख करोड़ के निवेश का लक्ष्य रखा है। इसमें सड़क, रेलवे, एयर कनेक्टिविटी, मेडिकल कॉलेज और शैक्षणिक संस्थानों के विस्तार पर खास जोर दिया गया है।
भाजपा ने “One District, One Medical College” और बाढ़-मुक्त असम जैसे विजन भी पेश किए हैं, जो राज्य की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को संबोधित करने की कोशिश हैं।
चुनावी रणनीति क्या कहती है?
राजनीतिक नजरिए से देखें तो भाजपा ने इस बार विकास + पहचान की राजनीति का मिश्रण अपनाया है। एक तरफ रोजगार, निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए युवा और मध्यम वर्ग को साधने की कोशिश है, तो दूसरी तरफ UCC, घुसपैठ और ‘लव जिहाद’ जैसे मुद्दों के जरिए अपने कोर वोटबैंक को मजबूत करने का प्रयास।
जनता के लिए क्या मायने?
आम लोगों के लिए यह घोषणापत्र कई उम्मीदें लेकर आता है—रोजगार के नए अवसर, बेहतर सड़क और स्वास्थ्य सुविधाएं, और सुरक्षा से जुड़े वादे। लेकिन इन वादों का असली असर तभी दिखेगा जब वे जमीन पर उतरेंगे।
असम की जनता अब यह तय करेगी कि इन वादों पर कितना भरोसा किया जाए। चुनावी माहौल गर्म हो चुका है, और आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि किसकी रणनीति मतदाताओं के दिल तक पहुंचती है।
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