ईरान ने पहली बार होर्मुज खोलने का प्रस्ताव दिया और अमेरिका से समुद्री नाकेबंदी हटाने की अपील की। हालांकि, डोनाल्ड ट्रम्प ने परमाणु मुद्दों के बिना इस प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया।
मिडिल ईस्ट संकट के बीच एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ सामने आया है। पहली बार ईरान ने नरमी दिखाते हुए होर्मुज खोलने की पेशकश की है।
ईरान ने दिया नया प्रस्ताव
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका को नया प्रस्ताव भेजा है। इसमें समुद्री नाकेबंदी हटाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की बात कही गई है।
The New York Times की रिपोर्ट के अनुसार, तीन ईरानी अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है।
प्रस्ताव की 3 बड़ी शर्तें
ईरान ने बातचीत के लिए तीन मुख्य शर्तें रखी हैं:
- अमेरिका-इजराइल के साथ चल रहा युद्ध खत्म हो और आगे हमला न करने की गारंटी मिले
- समुद्री नाकेबंदी हटे, होर्मुज खुले और जहाजों की आवाजाही बहाल हो
- सबसे अंत में परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन पर बातचीत हो
ट्रम्प ने प्रस्ताव को किया खारिज
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस प्रस्ताव से सहमत नहीं हैं।
CNN के मुताबिक, अमेरिका का मानना है कि अगर पहले होर्मुज खोल दिया गया, तो बातचीत में उसकी स्थिति कमजोर हो सकती है।
इसलिए वॉशिंगटन चाहता है कि परमाणु मुद्दे और अन्य विवाद एक साथ सुलझाए जाएं।
परमाणु कार्यक्रम बना सबसे बड़ा विवाद
ईरान और अमेरिका के बीच सबसे बड़ा टकराव परमाणु कार्यक्रम को लेकर है।
अमेरिका चाहता है कि ईरान 20 साल तक अपना परमाणु कार्यक्रम रोक दे और अपने पास मौजूद 440 किलो समृद्ध यूरेनियम सौंप दे।
लेकिन ईरान ने इन शर्तों को अस्वीकार्य बताते हुए ठुकरा दिया है।
पहले भी खारिज हो चुका है प्रस्ताव
ईरान ने 26 अप्रैल को एक और प्रस्ताव दिया था, जिसमें:
- 5 साल तक पूरी तरह यूरेनियम संवर्धन रोकना
- अगले 5 साल सीमित स्तर पर नागरिक उपयोग के लिए अनुमति
- यूरेनियम भंडार कम करना और उसका हिस्सा अंतरराष्ट्रीय निगरानी में रखना
हालांकि, डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे भी खारिज कर दिया था।
पाकिस्तान के जरिए जारी है बातचीत
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से मुलाकात की है।
ईरान, पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका तक अपने प्रस्ताव पहुंचा रहा है।
पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स
- ईरान ने अमेरिका को नया प्रस्ताव भेजा
- व्लादिमीर पुतिन से ईरानी विदेश मंत्री की मुलाकात
- रूस ने अमेरिका-इजराइल हमलों की आलोचना की
- फ्रांस ने कहा- ईरान नरम पड़े तभी समाधान संभव
- जर्मनी ने अमेरिका की रणनीति पर सवाल उठाए

