नासिक TCS धर्मांतरण और यौन शोषण मामले में मुख्य आरोपी निदा खान को छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब मोबाइल, डायरी और कथित मालेगांव-मलेशिया नेटवर्क की जांच में जुटी है।
BREAKING: 40 दिन तक फरार रही निदा खान आखिरकार गिरफ्तार, नासिक TCS कांड में नए खुलासों से हड़कंप
महाराष्ट्र के चर्चित नासिक TCS कांड में बड़ा मोड़ आ गया है। लगभग 40 दिनों से फरार चल रही मुख्य आरोपी निदा खान को आखिरकार पुलिस ने छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियों की नजर उसके मोबाइल फोन, निजी डायरी और कथित धर्मांतरण नेटवर्क पर टिक गई है।
पुलिस के अनुसार, निदा खान पिछले चार दिनों से छत्रपति संभाजीनगर के नारेगांव स्थित कैसर कॉलोनी के एक फ्लैट में छिपकर रह रही थी। उसके साथ उसके माता-पिता, भाई और मौसी भी मौजूद थे। नासिक SIT, क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम पिछले दो दिनों से उस फ्लैट पर नजर रखे हुए थी। देर रात हुई कार्रवाई में उसे दबोच लिया गया।
कौन है निदा खान?
निदा खान देश की बड़ी IT कंपनी TCS की नासिक यूनिट में कार्यरत थी, लेकिन मामला सामने आने के बाद कंपनी ने उसे निलंबित कर दिया। उसके खिलाफ बलात्कार, यौन शोषण, मानसिक प्रताड़ना और कथित धर्मांतरण के लिए दबाव डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
इस मामले में इससे पहले भी छह कर्मचारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन पुलिस को सबसे ज्यादा तलाश निदा खान की थी क्योंकि जांच एजेंसियां उसे पूरे कथित नेटवर्क की “मुख्य कड़ी” मान रही हैं।
पुलिस को कैसे मिला सुराग?
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस को तकनीकी निगरानी और कुछ संदिग्ध संपर्कों के जरिए निदा खान की लोकेशन का इनपुट मिला था। इसके बाद नारेगांव इलाके में लगातार निगरानी रखी गई। जैसे ही पुलिस को पुष्टि हुई कि निदा फ्लैट के अंदर मौजूद है, टीम ने देर रात कार्रवाई कर उसे हिरासत में ले लिया।
गिरफ्तारी के बाद उसे तुरंत नासिक ले जाया गया, जहां JMFC जज के समक्ष पेश कर ट्रांजिट रिमांड लिया गया।
FIR में क्या-क्या आरोप?
FIR में दर्ज आरोपों के मुताबिक, कार्यस्थल पर कुछ महिला कर्मचारियों पर इस्लामी परंपराएं अपनाने का दबाव बनाया गया। आरोप है कि:
- सहकर्मियों को बुर्का और हिजाब दिए गए
- नमाज पढ़ने की सलाह दी गई
- मोबाइल फोन में इस्लामी ऐप इंस्टॉल कराए गए
- खानपान और पहनावे में बदलाव के लिए कहा गया
जांच एजेंसियों का दावा है कि एक पीड़िता का नाम बदलकर “हानिया” रखने और उसे नौकरी के नाम पर मलेशिया भेजने की योजना भी बनाई जा रही थी।
मोबाइल और डायरी से खुल सकते हैं बड़े राज
SIT का मानना है कि निदा खान का मोबाइल फोन और निजी डायरी इस पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी साबित हो सकते हैं। जांचकर्ताओं को शक है कि:
- बाहरी फंडिंग का नेटवर्क सक्रिय हो सकता है
- मालेगांव और मलेशिया से जुड़े संपर्क सामने आ सकते हैं
- कथित धर्मांतरण मॉड्यूल का बड़ा खुलासा हो सकता है
इसी वजह से पुलिस उसकी कस्टोडियल पूछताछ पर जोर दे रही है।
गर्भावस्था का हवाला देकर मांगी थी राहत
गिरफ्तारी से पहले निदा खान ने अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर करते हुए खुद को दो महीने की गर्भवती बताया था और सुरक्षा की मांग की थी। हालांकि अदालत ने SIT की दलीलों को अहम मानते हुए राहत देने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता और जांच में आरोपी की भूमिका को देखते हुए हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज
इस केस के सामने आने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति भी गरमा गई है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी बहस जारी है। एक पक्ष इसे संगठित धर्मांतरण नेटवर्क बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष जांच पूरी होने से पहले निष्कर्ष निकालने से बचने की बात कह रहा है।
फिलहाल पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और डिजिटल सबूतों की जांच के बाद कई और बड़े खुलासे संभव हैं।

