शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार (Share Bazaar) में कमजोरी का माहौल देखने को मिला। सुबह कारोबार शुरू होते ही बीएसई सेंसेक्स करीब 600 अंक टूटकर 77,250 के आसपास पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी भी 150 अंकों से ज्यादा फिसलकर 24,150 के करीब कारोबार करता नजर आया। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों पर दिखाई दिया।
ग्लोबल तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। यही वजह रही कि दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा और निवेशकों का भरोसा थोड़ा कमजोर नजर आया।
Oil Prices बढ़ने से बाजार पर दबाव
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर सीधे शेयर बाजार पर पड़ रहा है। खाड़ी क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण होने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड के दाम बढ़ने से भारतीय बाजार में दबाव बढ़ गया, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल विदेशों से खरीदता है।
तेल महंगा होने का असर कंपनियों की लागत और महंगाई दोनों पर पड़ सकता है। इसी डर से निवेशकों ने कई सेक्टरों में बिकवाली शुरू कर दी।
Bank Stocks में सबसे ज्यादा गिरावट
आज के कारोबार में HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank और SBI जैसे बड़े बैंकिंग शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखे। निफ्टी बैंक इंडेक्स में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञों के मुताबिक हाल के दिनों में बैंकिंग शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिली थी, इसलिए अब निवेशक मुनाफावसूली कर रहे हैं। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बैंकिंग सेक्टर पर दबाव बढ़ाया।
Auto Sector भी दबाव में
ऑटो सेक्टर के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। Tata Motors, Mahindra & Mahindra और Maruti Suzuki जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञ मानते हैं कि तेल की कीमतें बढ़ने से ऑटो सेक्टर की मांग पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल इस सेक्टर में सावधानी बरत रहे हैं।
IT और Pharma Stocks ने संभालने की कोशिश की
गिरते बाजार के बीच आईटी और फार्मा सेक्टर के कुछ शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। हालांकि इन सेक्टरों की मजबूती बाजार को बड़ी गिरावट से बचाने के लिए काफी नहीं रही।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
मार्केट जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में शेयर बाजार की चाल काफी हद तक ग्लोबल घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी।
यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होता है और विदेशी निवेशकों की बिकवाली थमती है, तो बाजार में दोबारा रिकवरी देखने को मिल सकती है। फिलहाल निवेशकों को जल्दबाजी से बचने और सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
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