भारतीय शेयर बाजार में सोमवार की शुरुआत निवेशकों के लिए झटके भरी रही। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन बीएसई सेंसेक्स करीब 1000 अंक टूटकर 76,300 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी भी 300 अंकों से ज्यादा गिरकर 23,900 के नीचे पहुंच गया। बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव इतना बढ़ गया कि ज्यादातर सेक्टर्स लाल निशान में नजर आए।
Auto और Banking सेक्टर में सबसे ज्यादा बिकवाली
इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर ऑटो और बैंकिंग शेयरों पर देखने को मिला। एसबीआई, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक जैसे बड़े बैंकिंग स्टॉक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई। वहीं ऑटो सेक्टर में भी निवेशकों ने जमकर मुनाफावसूली की, जिससे कई दिग्गज कंपनियों के शेयर फिसल गए। रियल्टी, मेटल और कंज्यूमर सेक्टर में भी कमजोरी बनी रही।
Middle East तनाव का भी पड़ा असर
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि ग्लोबल स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर दुनियाभर के बाजारों पर दिखाई दे रहा है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिसने भारतीय बाजार की चिंता और बढ़ा दी है। भारत तेल आयात पर काफी हद तक निर्भर है, इसलिए क्रूड ऑयल महंगा होने का सीधा असर अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ सकता है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ा दबाव
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार की कमजोरी की बड़ी वजह मानी जा रही है। विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) पिछले कुछ समय से भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे निवेशकों का सेंटीमेंट प्रभावित हुआ है। एशियाई बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भी घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ा दिया।
गिरते बाजार में भी कुछ शेयरों में रही मजबूती
हालांकि भारी गिरावट के बीच कुछ शेयरों में मजबूती भी देखने को मिली। बेहतर तिमाही नतीजों की वजह से टाटा कंज्यूमर और एमसीएक्स जैसे चुनिंदा स्टॉक्स में खरीदारी बनी रही। लेकिन कुल मिलाकर बाजार में डर और सतर्कता का माहौल साफ नजर आया।
आगे क्या रहेगी बाजार की चाल?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में ग्लोबल घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों का रुख बाजार की दिशा तय करेगा। फिलहाल निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचने और सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
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