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India A Crisis से बाहर, Gaikwad और Tilak की शानदार Partnership ने बदला मैच का रुख

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India-A और Sri Lanka-A के बीच खेली जा रही ट्राई नेशन वनडे सीरीज का मुकाबला अब रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका है। दांबुला में खेले जा रहे इस मैच में इंडिया-ए की शुरुआत भले ही खराब रही हो, लेकिन कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ और तिलक वर्मा की समझदारी भरी बल्लेबाजी ने टीम को फिर से मुकाबले में मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया।

मैच की शुरुआत में भारतीय टीम पर दबाव साफ नजर आया। युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी जल्दी आउट होकर पवेलियन लौट गए, जिससे टीम को पहला बड़ा झटका लगा। इसके बाद प्रभसिमरन सिंह भी ज्यादा देर टिक नहीं सके। वहीं प्रियांश आर्य अच्छी लय में दिख रहे थे, लेकिन रन आउट होने के कारण उनकी पारी जल्दी खत्म हो गई।

गायकवाड़ और तिलक ने संभाली पारी

तीन विकेट गिरने के बाद ऐसा लग रहा था कि इंडिया-ए मुश्किल में फंस सकती है, लेकिन कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली। उन्होंने तिलक वर्मा के साथ मिलकर पारी को संभाला और धीरे-धीरे रन गति को आगे बढ़ाया। दोनों बल्लेबाजों के बीच शानदार फिफ्टी पार्टनरशिप देखने को मिली, जिसने भारतीय टीम को राहत दी।

गायकवाड़ ने मैदान पर धैर्य और अनुभव का बेहतरीन उदाहरण पेश किया। दूसरी ओर तिलक वर्मा ने भी संयम के साथ बल्लेबाजी करते हुए कप्तान का पूरा साथ निभाया। दोनों बल्लेबाजों ने श्रीलंकाई गेंदबाजों के खिलाफ स्मार्ट क्रिकेट खेलते हुए स्कोरबोर्ड को लगातार आगे बढ़ाया।

युवा खिलाड़ियों पर टिकी सभी की नजर

यह मुकाबला ट्राई नेशन सीरीज के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। इस टूर्नामेंट में भारत-ए, श्रीलंका-ए और अफगानिस्तान-ए की टीमें हिस्सा ले रही हैं। युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर सभी की नजर बनी हुई है, क्योंकि यही खिलाड़ी आने वाले समय में भारतीय सीनियर टीम का हिस्सा बन सकते हैं।

अब क्रिकेट फैंस की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि गायकवाड़ और तिलक की यह साझेदारी इंडिया-ए को कितने बड़े स्कोर तक पहुंचा पाती है।

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Yukta

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Narendra Modi vs Nehru

सिर्फ नेहरू का रिकॉर्ड टूटा, या मोदी ने भारत की दिशा भी बदल दी…?

संपादकीय | निखिल सिद्धभट्टी 10 जून 2026 भारतीय राजनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण तारीख बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले मोदी ने आज अपने कार्यकाल के 4399 दिन पूरे कर लिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया, जो 1952 से 1964 तक लगातार 4398 दिनों तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहे थे। यहां एक तथ्य समझना जरूरी है। जवाहरलाल नेहरू 15 अगस्त 1947 से ही देश के प्रधानमंत्री थे, लेकिन उस समय वे स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त हुए थे। 1952 में देश के पहले आम चुनाव के बाद कांग्रेस संसदीय दल ने उन्हें नेता चुना और वे 13 मई 1952 से 27 मई 1964 तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहे। अब, 74 वर्ष बाद नरेंद्र मोदी ने उस रिकॉर्ड को पार कर लिया है। यही वह क्षण है, जिसने हमें यह संपादकीय लिखने के लिए प्रेरित किया। क्योंकि यह केवल एक रिकॉर्ड टूटने की घटना नहीं है। यह भारत के दो सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों, दो अलग-अलग विचारधाराओं और दो अलग-अलग विकास मॉडलों की तुलना का अवसर भी है। एक रिकॉर्ड, लेकिन दो बिल्कुल अलग भारत जब नेहरू ने 1952 में जनता के जनादेश के साथ सरकार बनाई, तब भारत एक नवजात राष्ट्र था। देश विभाजन की त्रासदी झेल चुका था। करोड़ों लोग गरीबी में जी रहे थे। औद्योगिक आधार लगभग नहीं था। साक्षरता बेहद कम थी और लोकतंत्र का भविष्य भी अनिश्चित था। नेहरू के सामने चुनौती थी—भारत को टूटने से बचाना और उसे खड़ा करना। दूसरी ओर, जब नरेंद्र मोदी 2014 में सत्ता में आए, तब भारत दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था था। अर्थव्यवस्था वैश्विक मंच पर हाफ राही थी, सेना मजबूत थी पर उसे नियंत्रण में रखा था , परमाणु शक्ति मौजूद थी और सूचना क्रांति देश में प्रवेश कर चुकी थी पर उस की गाती धीमी थी । लेकिन मोदी के सामने सवाल अलग था—क्या भारत केवल एक विकासशील देश बना रहेगा या 21वीं सदी की वैश्विक शक्ति बनेगा? यहीं से दोनों नेताओं की तुलना शुरू होती है। नेहरू ने नींव रखी, इसमें विवाद नहीं आज जो लोग नेहरू की आलोचना करते हैं, उन्हें भी यह स्वीकार करना होगा कि स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं की बुनियाद उनके दौर में रखी गई। संसद, चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय की प्रतिष्ठा, IIT, AIIMS, बड़े बांध, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग—ये सब उस दौर की उपलब्धियां हैं। दुनिया के कई नवस्वतंत्र देशों में लोकतंत्र असफल हो गया। कहीं सेना सत्ता में आ गई, कहीं तानाशाही स्थापित हो गई। भारत उस रास्ते पर नहीं गया। यह नेहरू युग की एक बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। लेकिन इतिहास का दूसरा पक्ष भी है। नेहरू ने जिस समाजवादी आर्थिक मॉडल को अपनाया, उसने राज्य को अत्यधिक शक्तिशाली बना दिया। लाइसेंस-परमिट राज ने आने वाले दशकों में निजी क्षेत्र की ऊर्जा को सीमित कर दिया। और फिर 1962 में चीन युद्ध ने उनकी विदेश नीति की सबसे बड़ी कमजोरी उजागर कर दी। “हिंदी-चीनी भाई-भाई” का आदर्शवाद चीन की सैन्य आक्रामकता के सामने टिक नहीं सका। यहीं से नेहरू की विरासत पर बहस शुरू होती है। मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है? यहां अक्सर लोग UPI, एक्सप्रेस-वे, जी-20, अनुच्छेद 370 या डिजिटल इंडिया की बात करते हैं। लेकिन क्या यही मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि है? शायद नहीं। मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह हो सकती है कि उन्होंने भारत की शासन प्रणाली और विकास की सोच को बदलने का प्रयास किया। दशकों तक भारत में सरकार योजनाएं बनाती थी, लेकिन लाभार्थी तक पहुंचने से पहले व्यवस्था में रिसाव हो जाता था। जनधन, आधार और मोबाइल के संयोजन ने पहली बार सरकार और नागरिक के बीच सीधा संपर्क स्थापित किया। UPI केवल एक भुगतान प्रणाली नहीं है। यह उस नए भारत का प्रतीक है जो तकनीक को शासन का उपकरण बना रहा है। इसी तरह सड़क, रेलवे, एयरपोर्ट और रक्षा ढांचे में जो निवेश हुआ, उसने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई गति दी। चीन: दो युग, दो प्रतिक्रियाएं यदि किसी एक मुद्दे पर नेहरू और मोदी की तुलना सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, तो वह चीन है। 1962 में भारत तैयार नहीं था। राजनीतिक आदर्शवाद राष्ट्रीय सुरक्षा पर भारी पड़ गया। 2020 में गलवान घाटी में फिर चीन सामने था। यह कहना सही नहीं होगा कि भारत ने चीन को पराजित कर दिया। लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि इस बार भारत ने 1962 जैसी असहाय स्थिति नहीं दिखाई। सीमा पर सड़कें बनीं, सैन्य तैनाती बढ़ी और चीन को लेकर नीति अधिक यथार्थवादी दिखाई दी। यहीं दोनों नेताओं के दृष्टिकोण का मूल अंतर दिखता है। असली बहस मोदी बनाम नेहरू नहीं, दो मॉडलों की है नेहरू का भारत राज्य-नियंत्रित अर्थव्यवस्था, समाजवादी सोच और गुटनिरपेक्ष विदेश नीति पर आधारित था। मोदी का भारत बाज़ार आधारित विकास, डिजिटल शासन, राष्ट्रीय पहचान और बहु-संरेखीय (Multi-alignment) कूटनीति पर आधारित दिखाई देता है। नेहरू संस्थानों के जरिए भारत को मजबूत करना चाहते थे। मोदी नेतृत्व और क्रियान्वयन की गति के जरिए भारत को बदलना चाहते हैं। एक ने भारत का ढांचा बनाया। दूसरा उस ढांचे को नए सिरे से आकार देने की कोशिश कर रहा है। क्या मोदी नेहरू से बेहतर प्रधानमंत्री साबित हुए हैं? इस प्रश्न का उत्तर राजनीति नहीं, इतिहास देगा। लेकिन 2026 में खड़े होकर यदि केवल प्रभाव, निर्णायकता, वैश्विक उपस्थिति, डिजिटल परिवर्तन, इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण और शासन की गति को मापदंड बनाया जाए, तो नरेंद्र मोदी का कार्यकाल स्वतंत्र भारत के सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों में निश्चित रूप से गिना जाएगा। इतना ही नहीं, वे संभवतः नेहरू के बाद पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने भारत के विकास मॉडल की दिशा बदलने का प्रयास किया है। नरेंद्र मोदी द्वारा नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ना केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं है। यह उस राजनीतिक यात्रा का प्रतीक है जिसमें भारत ने समाजवादी दौर से डिजिटल दौर तक, गुटनिरपेक्षता से बहु-संरेखीय कूटनीति तक और धीमी प्रशासनिक प्रक्रियाओं से तकनीक-आधारित शासन तक का सफर तय किया है। नेहरू ने आधुनिक भारत की नींव रखी थी। मोदी उस भारत को...
LPG महंगाई पर राजनीति तेज: Pradhan Mantri Ujjwala Yojana बदलाव को लेकर सरकार घिरी

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केंद्र सरकार ने Pradhan Mantri Ujjwala Yojana के तहत मिलने वाले सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की सालाना सीमा 9 से घटाकर 4 कर दी है। इस फैसले के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने इस कदम को लेकर मोदी सरकार पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए सरकार की आर्थिक नीतियों और विदेश नीति पर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने कहा कि पिछले 12 सालों की आर्थिक नीतियों के कारण गरीब परिवारों पर दबाव बढ़ा है और अब सब्सिडी घटने से स्थिति और मुश्किल हो गई है। उनका कहना है कि लाखों गरीब परिवारों और महिलाओं को खाना पकाने के लिए फिर से लकड़ी के जहरीले धुएं का सहारा लेने की मजबूरी हो सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले तीन महीनों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम करीब ₹89 बढ़े हैं। साथ ही 5 किलो के छोटे सिलेंडर की कीमत में भी लगभग ₹323 की बढ़ोतरी का उल्लेख किया गया है। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब पहले ही महंगाई बढ़ रही है, तो सब्सिडी कम करने का फैसला आम लोगों पर और बोझ डालता है। उन्होंने कहा कि इसका सबसे ज्यादा असर गरीब, मजदूर, किसान, महिलाएं और मध्यम वर्ग पर पड़ेगा। सरकार की तरफ से इस फैसले को लेकर अभी तक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
INDIA गठबंधन को मजबूत करने पर जोर: अखिलेश यादव बोले – यूपी में BJP को हराना है सबसे बड़ा लक्ष्य

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समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने कहा है कि हाल ही में हुई INDIA Alliance की बैठक में सभी सहयोगी दलों के बीच संगठन को और मजबूत करने पर सहमति बनी है। अखिलेश यादव ने कहा कि INDIA गठबंधन तभी मजबूत माना जाएगा जब उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को कड़ी टक्कर दी जाए और उसे सत्ता से बाहर किया जाए। उन्होंने साफ कहा कि यूपी देश की राजनीति में सबसे अहम राज्य है और यहां जीत-हार का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ता है। इसलिए विपक्षी दलों की एकजुटता का सबसे बड़ा लक्ष्य उत्तर प्रदेश में भाजपा को हराना होना चाहिए। अखिलेश यादव के इस बयान के बाद एक बार फिर राज्य की राजनीति में सियासी हलचल तेज हो गई है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आने वाले समय में टकराव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
Shefali Jariwala के निधन के बाद भावुक हुए पति पराग त्यागी, श्मशान घाट को लेकर किए गए दावे पर चर्चा तेज

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टीवी और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री Shefali Jariwala के निधन के बाद उनके पति Parag Tyagi गहरे सदमे में हैं। 2025 में शेफाली के अचानक निधन ने उनके परिवार, फैंस और पूरी इंडस्ट्री को झकझोर दिया था। शेफाली जरीवाला सिर्फ 42 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गई थीं। उनके जाने के बाद पराग त्यागी लगातार उनकी यादों में जी रहे हैं और अक्सर सोशल मीडिया पर उनकी यादें साझा करते नजर आते हैं। इसी बीच हाल ही में पराग त्यागी से जुड़ी कुछ बातें सामने आई हैं, जिनमें बताया जा रहा है कि वे श्मशान घाट भी पहुंचे थे और वहां अपने भावनात्मक अनुभवों को लेकर कुछ दावे किए। सोशल मीडिया पर यह भी चर्चा है कि उन्होंने वहां कुछ अजीब अनुभव महसूस करने की बात कही, हालांकि ये बातें उनकी निजी भावनाओं और विश्वास से जुड़ी बताई जा रही हैं। फिलहाल पराग त्यागी पूरी तरह अपनी पत्नी की यादों में डूबे हुए हैं और इस मुश्किल समय में खुद को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। फैंस भी लगातार उन्हें सोशल मीडिया पर सपोर्ट और हिम्मत दे रहे हैं।
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ज्योतिष के अनुसार 15 June 2026 को एक खास ग्रहों का संयोग बनने जा रहा है, जिसे Trigrahi Yog कहा जाता है। इस दिन सूर्य के गोचर के साथ यह शक्तिशाली राजयोग बनने की संभावना है, जिसका असर कई राशियों पर देखने को मिल सकता है। इस योग में Surya (Sun) का गोचर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार जब तीन प्रमुख ग्रह एक विशेष स्थिति में आते हैं, तो उसे त्रिग्रही योग कहा जाता है और यह समय भाग्य, करियर और आर्थिक स्थिति में बड़े बदलाव ला सकता है। मान्यता है कि इस योग के प्रभाव से कुछ राशियों को अचानक लाभ, नई नौकरी के अवसर, व्यापार में बढ़ोतरी और रुके हुए कामों में तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं कुछ लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास भी बढ़ सकता है। हालांकि इसका प्रभाव हर राशि पर अलग-अलग होता है और यह व्यक्ति की कुंडली पर भी निर्भर करता है।

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