उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर धार्मिक मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। CM Yogi ने समाजवादी पार्टी (SP) पर निशाना साधते हुए हनुमानगढ़ी से जुड़े पुराने विवाद का जिक्र किया। योगी ने सवाल उठाया कि अगर किसी धार्मिक स्थल की मर्यादा का सवाल उठता है, तो क्या वही नियम हर जगह लागू किया जा सकता है?
सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या की हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ाने की कोशिश को लेकर पहले विवाद सामने आया था। उन्होंने इस घटना को लेकर सपा पर हमला बोला और कहा कि आस्था से जुड़े स्थानों की अपनी परंपराएं और सम्मान होता है, जिसका पालन किया जाना चाहिए।
योगी का SP पर सीधा हमला, उठाया बड़ा सवाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने बयान में कहा कि कुछ राजनीतिक दल धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों को अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने सपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछली सरकारों में तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा दिया गया।
योगी ने सवाल किया कि अगर हनुमानगढ़ी जैसे धार्मिक स्थल पर ऐसी मांग की जा सकती है, तो क्या जामा मस्जिद जैसे दूसरे धार्मिक स्थल पर हनुमान चालीसा पढ़ने की अनुमति दी जाएगी? उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
Ayodhya Politics: धार्मिक मुद्दों पर फिर गर्म हुई सियासत
अयोध्या हमेशा से उत्तर प्रदेश की राजनीति का अहम केंद्र रहा है। राम मंदिर निर्माण के बाद भी अयोध्या से जुड़े कई मुद्दे समय-समय पर राजनीतिक बहस का हिस्सा बनते रहे हैं।
योगी आदित्यनाथ के इस बयान को भाजपा समर्थक जहां धार्मिक समानता और परंपराओं की बात बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक बयानबाजी करार दे रहा है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर BJP और SP के बीच जुबानी जंग को तेज कर दिया है।
CM Yogi ने कानून व्यवस्था और परंपरा पर दिया जोर
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी सभी धर्मों की आस्था और कानून व्यवस्था को बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल की गरिमा को बनाए रखना जरूरी है और समाज में शांति बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दे हमेशा चुनावी राजनीति को प्रभावित करते रहे हैं। ऐसे में योगी का यह बयान आने वाले दिनों में सियासी बहस का बड़ा मुद्दा बन सकता है।
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