तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब समुद्र के खारे पानी को पीने योग्य बनाने वाले डिसैलिनेशन (जल शोधन) प्लांटों तक पहुंच गया है। ईरान ने शनिवार को दावा किया कि अमेरिकी हवाई हमले में होर्मोजगान प्रांत स्थित बोंजी डिसैलिनेशन प्लांट पूरी तरह तबाह हो गया, जिससे करीब 20 गांवों के 10 हजार लोगों की पेयजल आपूर्ति प्रभावित हुई है।
दूसरी ओर, कुवैत ने भी आरोप लगाया है कि लगातार दूसरे दिन उसके जल शोधन संयंत्र को निशाना बनाया गया। कुवैत में लगभग 90 प्रतिशत पेयजल समुद्री पानी को मीठा बनाने वाले डिसैलिनेशन प्लांटों से प्राप्त होता है। ऐसे में इन संयंत्रों पर किसी भी तरह का हमला देश की जल सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना जा रहा है।

पिछले 24 घंटे के प्रमुख घटनाक्रम
- ईरान के अनुसार, अमेरिकी एयरस्ट्राइक में चाबहार पोर्ट के कंट्रोल टावर को नुकसान पहुंचा है, जिससे जहाजों की निगरानी व्यवस्था प्रभावित हुई।
- भारत से जुड़े शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा है। इसकी पुष्टि भारत के विदेश मंत्रालय ने की है।
- ईरान ने ऊर्जा ढांचे पर हमलों के बाद दक्षिणी प्रांतों के नागरिकों से बिजली की खपत कम करने की अपील की है।
- ब्रिटेन ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित करते हुए उसके समर्थन को अपराध की श्रेणी में रखा है।
- ईरान ने दावा किया है कि उसने कतर स्थित अमेरिकी अल उदैद एयरबेस पर हमला कर HIMARS रॉकेट सिस्टम और अन्य सैन्य उपकरणों को निशाना बनाया।
बढ़ते सैन्य तनाव के बीच पश्चिम एशिया में जल, ऊर्जा और रणनीतिक ठिकानों पर हमलों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। हालांकि, दोनों पक्षों के कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
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