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N Chandrasekaran Resigns: Tata Sons में बड़ा फेरबदल, फरवरी 2027 के बाद कौन संभालेगा कमान?

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Tata Group के कॉरपोरेट स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। N Chandrasekaran ने Tata Sons के चेयरमैन पद से हटने का फैसला किया है। हालांकि, यह बदलाव तुरंत नहीं होगा। चंद्रशेखरन अपने मौजूदा कार्यकाल के पूरा होने तक चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनका कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होगा।

चंद्रशेखरन के इस फैसले ने Tata Group के अगले नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं। खासकर इसलिए क्योंकि पिछले कुछ समय से Tata Trusts और Tata Sons के बीच governance और leadership को लेकर मतभेदों की खबरें आती रही हैं।

AGM से पहले आया बड़ा फैसला

Tata Sons की Annual General Meeting यानी AGM 18 अगस्त 2026 को होने वाली है। इस बैठक से पहले चंद्रशेखरन का पद छोड़ने का फैसला सामने आया है। ऐसे में AGM और उसके बाद होने वाली गतिविधियों पर कारोबारी जगत की नजर बनी हुई है।

चंद्रशेखरन फिलहाल अपने पद पर बने रहेंगे, इसलिए Tata Sons को नए चेयरमैन के लिए तैयारी करने का समय मिल जाएगा। फरवरी 2027 के बाद समूह की कमान किसके हाथ में होगी, यह आने वाले महीनों में सबसे बड़ा सवाल रहने वाला है।

Noel Tata से मतभेद की खबरों ने बढ़ाई हलचल

चंद्रशेखरन के फैसले के साथ Noel Tata का नाम भी चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स में Tata Trusts और Tata Sons के नेतृत्व के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद की बात कही गई है।

इनमें Tata Sons की future strategy, board representation और कंपनी की संभावित public listing जैसे मुद्दे शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, इन कथित मतभेदों को लेकर सभी दावे आधिकारिक रूप से सामने नहीं आए हैं। इसलिए इन्हें फिलहाल रिपोर्ट्स और सूत्रों के हवाले से ही देखा जाना चाहिए।

2017 में संभाली थी Tata Sons की जिम्मेदारी

N Chandrasekaran ने 2017 में Tata Sons के चेयरमैन का पद संभाला था। इससे पहले वह TCS के CEO और MD रह चुके थे। Tata Sons की कमान संभालने वाले वह Tata परिवार से बाहर के प्रमुख प्रोफेशनल चेहरों में से एक रहे हैं।

उनके कार्यकाल में Tata Group ने कई बड़े कारोबारी फैसले किए। Air India की Tata Group में वापसी, अलग-अलग कारोबारों में निवेश और समूह की global presence बढ़ाने की दिशा में भी इस दौरान महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।

Tata Trusts की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?

Tata सिर्फ एक सामान्य holding company नहीं है। यह Tata Group के कई बड़े कारोबारों के लिए केंद्रीय भूमिका निभाती है। TCS, Tata Motors, Tata Steel, Tata Power और Air India जैसे बड़े नाम समूह का हिस्सा हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल—अगला चेयरमैन कौन?

चंद्रशेखरन के फैसले के बाद अब Tata Group में succession planning पर सबकी नजर रहेगी। फरवरी 2027 तक उनके पद पर बने रहने से नए नेतृत्व की तलाश और transition को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने का समय मिलेगा।

यह बदलाव सिर्फ एक चेयरमैन के जाने तक सीमित नहीं है। Tata Group जिस दौर से गुजर रहा है, उसमें अगला चेयरमैन कंपनी की growth strategy, governance और future expansion में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

निवेशकों की भी नजर

Tata Group की listed कंपनियों में निवेश करने वाले लोगों के लिए भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। नेतृत्व में बदलाव का असर आगे चलकर समूह की रणनीति और बाजार की धारणा पर पड़ सकता है। हालांकि, किसी शेयर पर सिर्फ इस खबर के आधार पर निवेश का फैसला करना सही नहीं होगा।

फिलहाल तस्वीर साफ है—N Chandrasekaran फरवरी 2027 तक Tata Sons की कमान संभालेंगे, लेकिन उसके बाद Tata Group को नया नेतृत्व मिलेगा। अब निगाहें इस बात पर हैं कि यह जिम्मेदारी किसे सौंपी जाती है और Tata Trusts की भूमिका इस पूरी प्रक्रिया में कितनी अहम रहती है।

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Yukta

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Gold

Gold Rate: सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट, 10 ग्राम Gold और 1 किलो Silver का नया भाव

सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए गुरुवार का दिन थोड़ी राहत लेकर आया। लगातार तेजी के बाद घरेलू बाजार में Gold और Silver Price में गिरावट दर्ज की गई। सोना करीब ₹972 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर लगभग ₹1.52 लाख पर आ गया। वहीं चांदी की कीमत में ₹3,414 प्रति किलो की कमी आई और यह करीब ₹2.34 लाख प्रति किलो रह गई। बाजार में आई इस नरमी का असर उन लोगों पर भी पड़ सकता है, जो आने वाले दिनों में शादी, त्योहार या निवेश के लिए सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। Gold Price Today: सोने के भाव में आई नरमी हालिया तेजी के बाद सोने की कीमतों में मुनाफावसूली का असर दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी Gold Rate में कमजोरी देखी गई। अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें फिलहाल कीमती धातुओं की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं। भारत में सोने की कीमत केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय नहीं होती। डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, आयात लागत, स्थानीय मांग और अंतरराष्ट्रीय Gold Rate भी घरेलू भाव पर असर डालते हैं। 24 कैरेट Gold Rate कितना है? गुरुवार को 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास रहा। हालांकि, अलग-अलग शहरों और ज्वेलर्स के यहां कीमत कुछ ऊपर-नीचे हो सकती है। आभूषण खरीदते समय यह भी ध्यान रखें कि बाजार में दिखाई जाने वाली सोने की कीमत और दुकान पर मिलने वाली अंतिम कीमत एक जैसी नहीं होती। GST, Making Charges और अन्य शुल्क जुड़ने के बाद बिल की राशि बढ़ सकती है। 22 कैरेट और 18 कैरेट Gold का क्या भाव? सोने की कीमत उसकी शुद्धता के हिसाब से बदलती है। इसलिए सोना खरीदते समय सिर्फ प्रति 10 ग्राम कीमत देखना काफी नहीं है। कैरेट और हॉलमार्क जरूर जांचें। Silver Price Today: चांदी भी ₹3,414 सस्ती सोने के साथ चांदी के बाजार में भी दबाव रहा। गुरुवार को चांदी करीब ₹3,414 प्रति किलो टूटकर ₹2.34 लाख प्रति किलो के आसपास पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी Silver Price में कमजोरी देखने को मिली। चांदी की कीमत पर औद्योगिक मांग, डॉलर की चाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का असर पड़ता है। चांदी की कीमत में आई यह गिरावट उन खरीदारों के लिए अहम है, जो निवेश के साथ-साथ सिक्के, बर्तन या अन्य चांदी के सामान खरीदने की योजना बना रहे हैं। क्यों बदलते रहते हैं Gold-Silver Rates? सोने और चांदी की कीमतें किसी एक वजह से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर, ब्याज दरों की उम्मीद, भू-राजनीतिक परिस्थितियां और घरेलू मांग जैसे कई फैक्टर मिलकर भाव को प्रभावित करते हैं। यही वजह है कि सुबह और शाम के बीच भी Gold-Silver Rate में बदलाव देखने को मिल सकता है। खरीदारी करने वालों के लिए जरूरी बात अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने की सोच रहे हैं तो केवल बाजार में चल रहे रेट पर भरोसा न करें। खरीदारी से पहले BIS Hallmark, कैरेट, प्रति ग्राम कीमत, Making Charges और GST की जानकारी जरूर लें। एक दिन की गिरावट देखकर यह मान लेना भी ठीक नहीं होगा कि कीमतें अब लगातार नीचे ही जाएंगी। कीमती धातुओं का बाजार तेजी से बदलता है, इसलिए खरीदारी का फैसला अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से करना बेहतर है। Gold-Silver Price पर नजर क्यों जरूरी? सोना और चांदी भारतीय परिवारों के लिए सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि भावनाओं और परंपराओं से भी जुड़े हैं। ऐसे में कुछ रुपये की गिरावट भी बड़ी खरीदारी करने वालों के लिए मायने रखती है। फिलहाल बाजार में आई नरमी ने खरीदारों को जरूर थोड़ी राहत दी है, लेकिन आगे के भाव पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nanded Gurudwara

Nanded Gurudwara Attack: सुखबीर बादल पर हमले से मचा हड़कंप, पुलिस ने संदिग्ध पकड़ा

महाराष्ट्र के नांदेड़ (Nanded Gurudwara) में गुरुवार को शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल पर हमले की घटना सामने आई। बताया जा रहा है कि बादल गुरुद्वारा परिसर में मौजूद थे, तभी एक व्यक्ति ने उन पर हमला करने की कोशिश की। इस दौरान उनके हाथ में चोट आई, जबकि उन्हें बचाने की कोशिश में एक पुलिसकर्मी भी घायल हो गया। घटना के तुरंत बाद गुरुद्वारा परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों ने स्थिति को संभालते हुए संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में ले लिया। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। गुरुद्वारा परिसर में अचानक हुआ हमला जानकारी के मुताबिक, सुखबीर सिंह बादल नांदेड़ स्थित तख्त श्री हजूर साहिब में धार्मिक सेवा के सिलसिले में मौजूद थे। इसी दौरान एक व्यक्ति उनके नजदीक पहुंचा और हमला कर दिया। सुरक्षा कर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप किया, जिससे स्थिति को और बिगड़ने से रोका जा सका। हमले में बादल के हाथ में चोट लगने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद उनकी मेडिकल जांच कराई गई। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था संभालने के दौरान एक पुलिसकर्मी भी घायल हुआ। हमलावर को पुलिस ने हिरासत में लिया घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए एक संदिग्ध को हिरासत में लिया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हमला किस वजह से किया गया और इसके पीछे आरोपी की क्या मंशा थी। फिलहाल जांच एजेंसियां घटनास्थल से जुड़े तमाम पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस की ओर से हमले के मकसद को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल नांदेड़ के प्रमुख धार्मिक स्थल में सुखबीर बादल जैसे बड़े राजनीतिक नेता की मौजूदगी के दौरान हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि संदिग्ध व्यक्ति सुरक्षा घेरे के इतने करीब कैसे पहुंचा। घटना के बाद गुरुद्वारा परिसर में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों की निगरानी में आगे की कार्रवाई जारी है। सुखबीर बादल पर पहले भी हो चुका है हमला सुखबीर सिंह बादल इससे पहले दिसंबर 2024 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में भी हमले की कोशिश का सामना कर चुके हैं। उस समय भी सुरक्षा कर्मियों की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया था। नांदेड़ की ताजा घटना ने एक बार फिर सुखबीर बादल की सुरक्षा और धार्मिक स्थलों पर VIP सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। फिलहाल सुखबीर बादल की स्थिति को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार उन्हें चोट लगी है और घटना की जांच जारी है। पुलिस की जांच के बाद ही हमले की पूरी वजह और घटना से जुड़े अन्य तथ्य स्पष्ट हो पाएंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Modi

Modi-Shah Meet: कनिमोझी ने बढ़ाई सियासी हलचल, Tea Party से Rahul Gandhi और Akhilesh रहे दूर

संसद के गलियारों में इन दिनों राजनीतिक हलचल कम होने का नाम नहीं ले रही है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) से जुड़ी एक चाय पार्टी चर्चा में आ गई है। इस दौरान विपक्ष की ओर से डीएमके सांसद कनिमोझी की मौजूदगी ने सबका ध्यान खींचा, जबकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव वहां नजर नहीं आए। कनिमोझी की मौजूदगी को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि संसद के भीतर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर लगातार तीखी बहस देखने को मिल रही है। ऐसे माहौल में किसी अनौपचारिक आयोजन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं का साथ दिखाई देना राजनीतिक चर्चा को हवा दे देता है। कनिमोझी की मौजूदगी ने खींचा ध्यान डीएमके सांसद कनिमोझी लंबे समय से संसद में पार्टी की प्रमुख आवाजों में शामिल रही हैं। केंद्र की नीतियों पर डीएमके का कई मुद्दों पर अलग रुख रहा है। इसके बावजूद चाय पार्टी में उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू कर दी। हालांकि, किसी अनौपचारिक कार्यक्रम में शामिल होना अपने आप में किसी राजनीतिक समझौते या गठबंधन में बदलाव का संकेत नहीं माना जा सकता। इसे सामान्य राजनीतिक संवाद के तौर पर भी देखा जा सकता है। Rahul Gandhi और Akhilesh Yadav क्यों नहीं आए? इस पूरे घटनाक्रम का दूसरा पहलू राहुल गांधी और अखिलेश यादव की गैरमौजूदगी है। दोनों नेताओं के शामिल नहीं होने को लेकर अलग-अलग राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, उनकी गैरमौजूदगी की कोई आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल यह कहना ठीक नहीं होगा कि दोनों नेताओं ने किसी रणनीति के तहत कार्यक्रम से दूरी बनाई। संसद में विपक्षी दल कई मुद्दों पर सरकार के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाते रहे हैं, लेकिन हर कार्यक्रम में सभी नेताओं की मौजूदगी जरूरी नहीं होती। संसद के बाहर भी जारी है Political Buzz संसद का मौजूदा सत्र सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर टकराव का गवाह रहा है। एक ओर सरकार अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में जुटी है, तो दूसरी तरफ विपक्ष लगातार विभिन्न मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहा है। ऐसे में मोदी और शाह के साथ चाय पार्टी में कनिमोझी की मौजूदगी ने राजनीतिक चर्चा को एक नया विषय दे दिया है। सोशल मीडिया से लेकर संसद के गलियारों तक इसे लेकर तरह-तरह की बातें हो रही हैं। क्या यह विपक्षी रणनीति में बदलाव का संकेत है? फिलहाल इसका जवाब देना जल्दबाजी होगी। किसी एक बैठक या चाय पार्टी के आधार पर विपक्षी दलों के राजनीतिक समीकरण का आकलन करना सही नहीं होगा। असली तस्वीर संसद में इन दलों के रुख और आने वाले दिनों में उनकी रणनीति से साफ होगी। फिलहाल इतना जरूर है कि Modi-Shah Tea Party में Kanimozhi की मौजूदगी और Rahul Gandhi-Akhilesh Yadav की गैरमौजूदगी ने दिल्ली के राजनीतिक माहौल में चर्चा जरूर बढ़ा दी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में इस मुलाकात को लेकर कोई राजनीतिक बयान सामने आता है या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
LNCT

LNCT Tiranga Yatra: हाथों में तिरंगा, दिल में देशभक्ति; वंदे भारत यात्रा में दिखा जोश

देशभक्ति सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि उसे महसूस करने और दूसरों तक पहुंचाने में भी है। इसी भावना को सामने रखते हुए LNCT परिवार ने “वंदे भारत तिरंगा यात्रा” का आयोजन किया। हाथों में लहराता तिरंगा, चेहरे पर उत्साह और दिल में देश के लिए सम्मान—यात्रा के दौरान ऐसा ही माहौल देखने को मिला। इस आयोजन में LNCT परिवार से जुड़े विद्यार्थियों, शिक्षकों और अन्य सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। तिरंगे के साथ आगे बढ़ती यात्रा ने लोगों का ध्यान खींचा और पूरे वातावरण में राष्ट्रप्रेम की भावना नजर आई। तिरंगे के साथ एकता और राष्ट्रप्रेम का संदेश “वंदे भारत तिरंगा यात्रा” का उद्देश्य लोगों के बीच देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और तिरंगे के सम्मान की भावना को मजबूत करना रहा। यात्रा में शामिल प्रतिभागियों ने राष्ट्रीय ध्वज को देश की आन, बान और शान बताते हुए एकजुटता का संदेश दिया। यात्रा के दौरान विद्यार्थियों में खास उत्साह देखने को मिला। युवाओं की भागीदारी ने कार्यक्रम को ऊर्जा दी और यह भी दिखाया कि नई पीढ़ी देश के प्रति अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को लेकर जागरूक है। युवाओं ने बढ़ाया कार्यक्रम का उत्साह LNCT परिवार के विद्यार्थियों ने यात्रा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। हाथों में तिरंगा लेकर आगे बढ़ते युवाओं के चेहरों पर देश के प्रति गर्व साफ दिखाई दिया। इस दौरान देश की एकता और अखंडता से जुड़े संदेश भी लोगों तक पहुंचाए गए। आयोजन से जुड़े लोगों का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम युवाओं को देश के इतिहास, राष्ट्रीय प्रतीकों और नागरिक जिम्मेदारियों से जोड़ने का काम करते हैं। साथ ही, सामूहिक रूप से मनाए जाने वाले ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा भी पैदा करते हैं। लोगों ने भी दिखाई सहभागिता तिरंगा यात्रा के दौरान आम लोगों में भी उत्साह नजर आया। यात्रा को देखने के लिए कई लोग रुके और राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान व्यक्त किया। इस पूरे आयोजन ने देशभक्ति की भावना को एक सामूहिक अनुभव में बदल दिया। यात्रा का संदेश साफ था—देश की ताकत उसकी एकता में है और तिरंगा इस एकता का सबसे बड़ा प्रतीक है। LNCT परिवार ने दिया राष्ट्रहित का संदेश “वंदे भारत तिरंगा यात्रा” LNCT परिवार के लिए सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों और समाज के बीच राष्ट्रप्रेम और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का प्रयास रहा। कार्यक्रम के जरिए यह संदेश दिया गया कि देश के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी हर नागरिक के जीवन का हिस्सा होनी चाहिए। तिरंगे के साथ निकली इस यात्रा ने लोगों के बीच देशभक्ति का माहौल बनाया और युवाओं को राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका समझने का संदेश दिया। यही इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत रही। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Sensex

Sensex-Nifty में गिरावट: 250 अंक टूटा सेंसेक्स, Banking और IT Stocks में भारी बिकवाली

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार की शुरुआत निवेशकों के लिए कुछ मायूस करने वाली रही। Sensex करीब 250 अंक फिसलकर 77,700 के आसपास आ गया, वहीं Nifty भी करीब 100 अंक नीचे कारोबार करता नजर आया। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव Banking और IT Stocks में देखने को मिला। सुबह के कारोबार में बिकवाली बढ़ने के साथ ही निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि बाजार दिन के अंत तक इस कमजोरी से कितना उबर पाता है। पिछले कुछ सत्रों से शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, ऐसे में छोटी सी खबर भी सेंटीमेंट पर असर डाल रही है। Banking और IT शेयरों में क्यों बढ़ी बिकवाली? गुरुवार को बाजार की कमजोरी में बैंकिंग और IT सेक्टर की अहम भूमिका रही। IT कंपनियों के शेयरों में बिकवाली से इंडेक्स पर दबाव बढ़ा। दूसरी ओर बैंकिंग शेयरों में भी निवेशकों ने मुनाफावसूली का रुख अपनाया। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा माहौल में निवेशक नए दांव लगाने से पहले ग्लोबल संकेतों और कंपनियों से जुड़े अपडेट का इंतजार कर रहे हैं। यही वजह है कि मजबूत कंपनियों के शेयरों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। पिछले कारोबारी सत्र में भी बाजार रहा कमजोर बुधवार का कारोबारी सत्र भी भारतीय शेयर बाजार के लिए अच्छा नहीं रहा था। Sensex 188 अंक की गिरावट के साथ 77,966.35 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 36 अंक टूटकर 24,435.95 के स्तर पर रहा। IT Stocks में कमजोरी खास तौर पर नजर आई। TCS के शेयर में भी तेज गिरावट दर्ज की गई थी। इससे IT इंडेक्स का प्रदर्शन प्रभावित हुआ और बाजार का मूड कमजोर बना रहा। Global Market से मिले-जुले संकेत घरेलू बाजार के अलावा विदेशी बाजारों के संकेत भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं। अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों और Federal Reserve की संभावित ब्याज दरों को लेकर बाजार की नजर बनी हुई है। वहीं, Middle East में तनाव और Crude Oil की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय है। कच्चा तेल महंगा होने पर भारत के आयात बिल और महंगाई पर असर पड़ सकता है, इसलिए निवेशक इस मोर्चे पर भी सतर्क हैं। Tata Group के शेयरों पर भी नजर इन सबके बीच Tata Group Stocks भी बाजार की निगाह में हैं। Tata Sons से जुड़े घटनाक्रम के बाद समूह की कई कंपनियों के शेयरों में हलचल देखने को मिली है। निवेशक अब कंपनियों के अगले कदम और इससे जुड़े संभावित असर को समझने की कोशिश कर रहे हैं। आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल? फिलहाल बाजार में साफ तेजी के बजाय volatility यानी उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है। अगर ग्लोबल संकेतों में सुधार आता है और Banking तथा IT Stocks में खरीदारी लौटती है तो बाजार को सहारा मिल सकता है। वहीं Crude Oil और Geopolitical Tension बढ़ने पर दबाव दोबारा मजबूत हो सकता है। निवेशकों के लिए फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि बाजार की हर छोटी गिरावट या तेजी को देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय कंपनियों के फंडामेंटल और व्यापक बाजार संकेतों पर नजर रखें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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