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Ranchi Protest: विधानसभा मार्च के बाद 600 प्रदर्शनकारियों पर केस, छात्रों का आंदोलन जारी

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झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे छात्रों का गुस्सा अब सड़क से लेकर सियासी गलियारों तक पहुंच गया है। भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों को लेकर चल रहे Ranchi Student Protest ने नया मोड़ ले लिया है। विधानसभा मार्च के दौरान हुए विवाद के बाद पुलिस ने करीब 600 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है।

मामला सिर्फ FIR तक सीमित नहीं है। छात्र अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि सरकार के साथ बातचीत के बावजूद कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में रांची में छात्र आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है।

क्यों आंदोलन कर रहे हैं छात्र?

छात्रों का आरोप है कि JPSC और JSSC की कुछ भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताएं सामने आई हैं। अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित पेपर लीक की जांच और प्रभावित परीक्षाओं को रद्द करने जैसी मांगें उठा रहे हैं।

छात्र संगठनों का कहना है कि सरकारी नौकरी की परीक्षा युवाओं के भविष्य से जुड़ी होती है। ऐसे में अगर परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो अभ्यर्थियों की मेहनत और भरोसे दोनों पर असर पड़ता है।

इसी को लेकर बड़ी संख्या में छात्र कई दिनों से रांची में आंदोलन कर रहे हैं।

विधानसभा मार्च के दौरान बढ़ा तनाव

आंदोलन के दौरान छात्रों ने अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने के लिए विधानसभा की ओर मार्च किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। मार्च के दौरान कुछ स्थानों पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

पुलिस के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी। वहीं प्रदर्शनकारी पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

यही घटनाक्रम अब FIR का कारण बना है।

600 प्रदर्शनकारियों पर FIR, CCTV से पहचान

विधानसभा मार्च के बाद पुलिस ने करीब 600 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। रिपोर्टों के अनुसार, FIR में कुछ लोगों को नामजद भी किया गया है।

पुलिस अब प्रदर्शन के दौरान बनाए गए CCTV फुटेज और दूसरे वीडियो रिकॉर्डिंग की मदद से उपद्रव या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप वाले लोगों की पहचान कर रही है।

इस कार्रवाई के बाद छात्रों के बीच भी नाराजगी बढ़ी है। छात्र संगठनों का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठाना उनका अधिकार है और सरकार को बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए।

सरकार और छात्रों के बीच बातचीत का दौर

आंदोलन को खत्म करने के लिए सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। सरकार की तरफ से कुछ मांगों पर कार्रवाई का दावा किया गया है, लेकिन छात्र संगठन अभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं।

छात्रों की प्रमुख मांगों में विवादित परीक्षाओं की जांच, जरूरत पड़ने पर परीक्षा रद्द करना और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है।

सरकार की ओर से कुछ परीक्षाओं को रद्द करने और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े कदम उठाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

Hunger Strike से भी बढ़ा दबाव

छात्र आंदोलन के दौरान Hunger Strike का रास्ता भी अपनाया गया। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत कुछ प्रदर्शनकारियों ने मांगों के समर्थन में अनशन किया। लंबे समय तक चले आंदोलन के बीच तबीयत बिगड़ने की खबरों ने सरकार पर दबाव और बढ़ा दिया।

छात्रों का कहना है कि वे अपने भविष्य से जुड़े मुद्दे पर पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं।

पुलिस कार्रवाई पर राजनीति भी तेज

छात्रों पर FIR और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया है। वहीं पुलिस और सरकार की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।

इस बीच छात्र संगठनों और राजनीतिक संगठनों की ओर से आंदोलन के समर्थन में अलग-अलग कार्यक्रम भी किए गए हैं।

अब आगे क्या होगा?

रांची का यह छात्र आंदोलन अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां सरकार और छात्रों दोनों के लिए अगला कदम महत्वपूर्ण होगा। एक तरफ सरकार बातचीत और परीक्षा से जुड़े फैसलों के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ छात्र संगठन अपनी मुख्य मांगों पर ठोस कार्रवाई चाहते हैं।

600 प्रदर्शनकारियों पर FIR के बाद पुलिस जांच आगे बढ़ेगी और CCTV फुटेज के आधार पर कार्रवाई की जा सकती है। दूसरी ओर, अगर छात्रों की मांगों पर जल्द कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकलता है तो आंदोलन आगे भी जारी रहने की संभावना है।

फिलहाल रांची में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार और छात्रों के बीच बातचीत से यह विवाद सुलझेगा या Jharkhand Student Protest आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेगा?

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Yukta

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Gold

Gold Rate: सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट, 10 ग्राम Gold और 1 किलो Silver का नया भाव

सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए गुरुवार का दिन थोड़ी राहत लेकर आया। लगातार तेजी के बाद घरेलू बाजार में Gold और Silver Price में गिरावट दर्ज की गई। सोना करीब ₹972 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर लगभग ₹1.52 लाख पर आ गया। वहीं चांदी की कीमत में ₹3,414 प्रति किलो की कमी आई और यह करीब ₹2.34 लाख प्रति किलो रह गई। बाजार में आई इस नरमी का असर उन लोगों पर भी पड़ सकता है, जो आने वाले दिनों में शादी, त्योहार या निवेश के लिए सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। Gold Price Today: सोने के भाव में आई नरमी हालिया तेजी के बाद सोने की कीमतों में मुनाफावसूली का असर दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी Gold Rate में कमजोरी देखी गई। अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें फिलहाल कीमती धातुओं की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं। भारत में सोने की कीमत केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय नहीं होती। डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, आयात लागत, स्थानीय मांग और अंतरराष्ट्रीय Gold Rate भी घरेलू भाव पर असर डालते हैं। 24 कैरेट Gold Rate कितना है? गुरुवार को 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास रहा। हालांकि, अलग-अलग शहरों और ज्वेलर्स के यहां कीमत कुछ ऊपर-नीचे हो सकती है। आभूषण खरीदते समय यह भी ध्यान रखें कि बाजार में दिखाई जाने वाली सोने की कीमत और दुकान पर मिलने वाली अंतिम कीमत एक जैसी नहीं होती। GST, Making Charges और अन्य शुल्क जुड़ने के बाद बिल की राशि बढ़ सकती है। 22 कैरेट और 18 कैरेट Gold का क्या भाव? सोने की कीमत उसकी शुद्धता के हिसाब से बदलती है। इसलिए सोना खरीदते समय सिर्फ प्रति 10 ग्राम कीमत देखना काफी नहीं है। कैरेट और हॉलमार्क जरूर जांचें। Silver Price Today: चांदी भी ₹3,414 सस्ती सोने के साथ चांदी के बाजार में भी दबाव रहा। गुरुवार को चांदी करीब ₹3,414 प्रति किलो टूटकर ₹2.34 लाख प्रति किलो के आसपास पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी Silver Price में कमजोरी देखने को मिली। चांदी की कीमत पर औद्योगिक मांग, डॉलर की चाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का असर पड़ता है। चांदी की कीमत में आई यह गिरावट उन खरीदारों के लिए अहम है, जो निवेश के साथ-साथ सिक्के, बर्तन या अन्य चांदी के सामान खरीदने की योजना बना रहे हैं। क्यों बदलते रहते हैं Gold-Silver Rates? सोने और चांदी की कीमतें किसी एक वजह से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर, ब्याज दरों की उम्मीद, भू-राजनीतिक परिस्थितियां और घरेलू मांग जैसे कई फैक्टर मिलकर भाव को प्रभावित करते हैं। यही वजह है कि सुबह और शाम के बीच भी Gold-Silver Rate में बदलाव देखने को मिल सकता है। खरीदारी करने वालों के लिए जरूरी बात अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने की सोच रहे हैं तो केवल बाजार में चल रहे रेट पर भरोसा न करें। खरीदारी से पहले BIS Hallmark, कैरेट, प्रति ग्राम कीमत, Making Charges और GST की जानकारी जरूर लें। एक दिन की गिरावट देखकर यह मान लेना भी ठीक नहीं होगा कि कीमतें अब लगातार नीचे ही जाएंगी। कीमती धातुओं का बाजार तेजी से बदलता है, इसलिए खरीदारी का फैसला अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से करना बेहतर है। Gold-Silver Price पर नजर क्यों जरूरी? सोना और चांदी भारतीय परिवारों के लिए सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि भावनाओं और परंपराओं से भी जुड़े हैं। ऐसे में कुछ रुपये की गिरावट भी बड़ी खरीदारी करने वालों के लिए मायने रखती है। फिलहाल बाजार में आई नरमी ने खरीदारों को जरूर थोड़ी राहत दी है, लेकिन आगे के भाव पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nanded Gurudwara

Nanded Gurudwara Attack: सुखबीर बादल पर हमले से मचा हड़कंप, पुलिस ने संदिग्ध पकड़ा

महाराष्ट्र के नांदेड़ (Nanded Gurudwara) में गुरुवार को शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल पर हमले की घटना सामने आई। बताया जा रहा है कि बादल गुरुद्वारा परिसर में मौजूद थे, तभी एक व्यक्ति ने उन पर हमला करने की कोशिश की। इस दौरान उनके हाथ में चोट आई, जबकि उन्हें बचाने की कोशिश में एक पुलिसकर्मी भी घायल हो गया। घटना के तुरंत बाद गुरुद्वारा परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों ने स्थिति को संभालते हुए संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में ले लिया। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। गुरुद्वारा परिसर में अचानक हुआ हमला जानकारी के मुताबिक, सुखबीर सिंह बादल नांदेड़ स्थित तख्त श्री हजूर साहिब में धार्मिक सेवा के सिलसिले में मौजूद थे। इसी दौरान एक व्यक्ति उनके नजदीक पहुंचा और हमला कर दिया। सुरक्षा कर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप किया, जिससे स्थिति को और बिगड़ने से रोका जा सका। हमले में बादल के हाथ में चोट लगने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद उनकी मेडिकल जांच कराई गई। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था संभालने के दौरान एक पुलिसकर्मी भी घायल हुआ। हमलावर को पुलिस ने हिरासत में लिया घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए एक संदिग्ध को हिरासत में लिया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हमला किस वजह से किया गया और इसके पीछे आरोपी की क्या मंशा थी। फिलहाल जांच एजेंसियां घटनास्थल से जुड़े तमाम पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस की ओर से हमले के मकसद को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल नांदेड़ के प्रमुख धार्मिक स्थल में सुखबीर बादल जैसे बड़े राजनीतिक नेता की मौजूदगी के दौरान हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि संदिग्ध व्यक्ति सुरक्षा घेरे के इतने करीब कैसे पहुंचा। घटना के बाद गुरुद्वारा परिसर में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों की निगरानी में आगे की कार्रवाई जारी है। सुखबीर बादल पर पहले भी हो चुका है हमला सुखबीर सिंह बादल इससे पहले दिसंबर 2024 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में भी हमले की कोशिश का सामना कर चुके हैं। उस समय भी सुरक्षा कर्मियों की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया था। नांदेड़ की ताजा घटना ने एक बार फिर सुखबीर बादल की सुरक्षा और धार्मिक स्थलों पर VIP सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। फिलहाल सुखबीर बादल की स्थिति को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार उन्हें चोट लगी है और घटना की जांच जारी है। पुलिस की जांच के बाद ही हमले की पूरी वजह और घटना से जुड़े अन्य तथ्य स्पष्ट हो पाएंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Modi

Modi-Shah Meet: कनिमोझी ने बढ़ाई सियासी हलचल, Tea Party से Rahul Gandhi और Akhilesh रहे दूर

संसद के गलियारों में इन दिनों राजनीतिक हलचल कम होने का नाम नहीं ले रही है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) से जुड़ी एक चाय पार्टी चर्चा में आ गई है। इस दौरान विपक्ष की ओर से डीएमके सांसद कनिमोझी की मौजूदगी ने सबका ध्यान खींचा, जबकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव वहां नजर नहीं आए। कनिमोझी की मौजूदगी को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि संसद के भीतर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर लगातार तीखी बहस देखने को मिल रही है। ऐसे माहौल में किसी अनौपचारिक आयोजन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं का साथ दिखाई देना राजनीतिक चर्चा को हवा दे देता है। कनिमोझी की मौजूदगी ने खींचा ध्यान डीएमके सांसद कनिमोझी लंबे समय से संसद में पार्टी की प्रमुख आवाजों में शामिल रही हैं। केंद्र की नीतियों पर डीएमके का कई मुद्दों पर अलग रुख रहा है। इसके बावजूद चाय पार्टी में उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू कर दी। हालांकि, किसी अनौपचारिक कार्यक्रम में शामिल होना अपने आप में किसी राजनीतिक समझौते या गठबंधन में बदलाव का संकेत नहीं माना जा सकता। इसे सामान्य राजनीतिक संवाद के तौर पर भी देखा जा सकता है। Rahul Gandhi और Akhilesh Yadav क्यों नहीं आए? इस पूरे घटनाक्रम का दूसरा पहलू राहुल गांधी और अखिलेश यादव की गैरमौजूदगी है। दोनों नेताओं के शामिल नहीं होने को लेकर अलग-अलग राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, उनकी गैरमौजूदगी की कोई आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल यह कहना ठीक नहीं होगा कि दोनों नेताओं ने किसी रणनीति के तहत कार्यक्रम से दूरी बनाई। संसद में विपक्षी दल कई मुद्दों पर सरकार के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाते रहे हैं, लेकिन हर कार्यक्रम में सभी नेताओं की मौजूदगी जरूरी नहीं होती। संसद के बाहर भी जारी है Political Buzz संसद का मौजूदा सत्र सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर टकराव का गवाह रहा है। एक ओर सरकार अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में जुटी है, तो दूसरी तरफ विपक्ष लगातार विभिन्न मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहा है। ऐसे में मोदी और शाह के साथ चाय पार्टी में कनिमोझी की मौजूदगी ने राजनीतिक चर्चा को एक नया विषय दे दिया है। सोशल मीडिया से लेकर संसद के गलियारों तक इसे लेकर तरह-तरह की बातें हो रही हैं। क्या यह विपक्षी रणनीति में बदलाव का संकेत है? फिलहाल इसका जवाब देना जल्दबाजी होगी। किसी एक बैठक या चाय पार्टी के आधार पर विपक्षी दलों के राजनीतिक समीकरण का आकलन करना सही नहीं होगा। असली तस्वीर संसद में इन दलों के रुख और आने वाले दिनों में उनकी रणनीति से साफ होगी। फिलहाल इतना जरूर है कि Modi-Shah Tea Party में Kanimozhi की मौजूदगी और Rahul Gandhi-Akhilesh Yadav की गैरमौजूदगी ने दिल्ली के राजनीतिक माहौल में चर्चा जरूर बढ़ा दी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में इस मुलाकात को लेकर कोई राजनीतिक बयान सामने आता है या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
LNCT

LNCT Tiranga Yatra: हाथों में तिरंगा, दिल में देशभक्ति; वंदे भारत यात्रा में दिखा जोश

देशभक्ति सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि उसे महसूस करने और दूसरों तक पहुंचाने में भी है। इसी भावना को सामने रखते हुए LNCT परिवार ने “वंदे भारत तिरंगा यात्रा” का आयोजन किया। हाथों में लहराता तिरंगा, चेहरे पर उत्साह और दिल में देश के लिए सम्मान—यात्रा के दौरान ऐसा ही माहौल देखने को मिला। इस आयोजन में LNCT परिवार से जुड़े विद्यार्थियों, शिक्षकों और अन्य सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। तिरंगे के साथ आगे बढ़ती यात्रा ने लोगों का ध्यान खींचा और पूरे वातावरण में राष्ट्रप्रेम की भावना नजर आई। तिरंगे के साथ एकता और राष्ट्रप्रेम का संदेश “वंदे भारत तिरंगा यात्रा” का उद्देश्य लोगों के बीच देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और तिरंगे के सम्मान की भावना को मजबूत करना रहा। यात्रा में शामिल प्रतिभागियों ने राष्ट्रीय ध्वज को देश की आन, बान और शान बताते हुए एकजुटता का संदेश दिया। यात्रा के दौरान विद्यार्थियों में खास उत्साह देखने को मिला। युवाओं की भागीदारी ने कार्यक्रम को ऊर्जा दी और यह भी दिखाया कि नई पीढ़ी देश के प्रति अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को लेकर जागरूक है। युवाओं ने बढ़ाया कार्यक्रम का उत्साह LNCT परिवार के विद्यार्थियों ने यात्रा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। हाथों में तिरंगा लेकर आगे बढ़ते युवाओं के चेहरों पर देश के प्रति गर्व साफ दिखाई दिया। इस दौरान देश की एकता और अखंडता से जुड़े संदेश भी लोगों तक पहुंचाए गए। आयोजन से जुड़े लोगों का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम युवाओं को देश के इतिहास, राष्ट्रीय प्रतीकों और नागरिक जिम्मेदारियों से जोड़ने का काम करते हैं। साथ ही, सामूहिक रूप से मनाए जाने वाले ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा भी पैदा करते हैं। लोगों ने भी दिखाई सहभागिता तिरंगा यात्रा के दौरान आम लोगों में भी उत्साह नजर आया। यात्रा को देखने के लिए कई लोग रुके और राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान व्यक्त किया। इस पूरे आयोजन ने देशभक्ति की भावना को एक सामूहिक अनुभव में बदल दिया। यात्रा का संदेश साफ था—देश की ताकत उसकी एकता में है और तिरंगा इस एकता का सबसे बड़ा प्रतीक है। LNCT परिवार ने दिया राष्ट्रहित का संदेश “वंदे भारत तिरंगा यात्रा” LNCT परिवार के लिए सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों और समाज के बीच राष्ट्रप्रेम और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का प्रयास रहा। कार्यक्रम के जरिए यह संदेश दिया गया कि देश के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी हर नागरिक के जीवन का हिस्सा होनी चाहिए। तिरंगे के साथ निकली इस यात्रा ने लोगों के बीच देशभक्ति का माहौल बनाया और युवाओं को राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका समझने का संदेश दिया। यही इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत रही। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Sensex

Sensex-Nifty में गिरावट: 250 अंक टूटा सेंसेक्स, Banking और IT Stocks में भारी बिकवाली

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार की शुरुआत निवेशकों के लिए कुछ मायूस करने वाली रही। Sensex करीब 250 अंक फिसलकर 77,700 के आसपास आ गया, वहीं Nifty भी करीब 100 अंक नीचे कारोबार करता नजर आया। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव Banking और IT Stocks में देखने को मिला। सुबह के कारोबार में बिकवाली बढ़ने के साथ ही निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि बाजार दिन के अंत तक इस कमजोरी से कितना उबर पाता है। पिछले कुछ सत्रों से शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, ऐसे में छोटी सी खबर भी सेंटीमेंट पर असर डाल रही है। Banking और IT शेयरों में क्यों बढ़ी बिकवाली? गुरुवार को बाजार की कमजोरी में बैंकिंग और IT सेक्टर की अहम भूमिका रही। IT कंपनियों के शेयरों में बिकवाली से इंडेक्स पर दबाव बढ़ा। दूसरी ओर बैंकिंग शेयरों में भी निवेशकों ने मुनाफावसूली का रुख अपनाया। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा माहौल में निवेशक नए दांव लगाने से पहले ग्लोबल संकेतों और कंपनियों से जुड़े अपडेट का इंतजार कर रहे हैं। यही वजह है कि मजबूत कंपनियों के शेयरों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। पिछले कारोबारी सत्र में भी बाजार रहा कमजोर बुधवार का कारोबारी सत्र भी भारतीय शेयर बाजार के लिए अच्छा नहीं रहा था। Sensex 188 अंक की गिरावट के साथ 77,966.35 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 36 अंक टूटकर 24,435.95 के स्तर पर रहा। IT Stocks में कमजोरी खास तौर पर नजर आई। TCS के शेयर में भी तेज गिरावट दर्ज की गई थी। इससे IT इंडेक्स का प्रदर्शन प्रभावित हुआ और बाजार का मूड कमजोर बना रहा। Global Market से मिले-जुले संकेत घरेलू बाजार के अलावा विदेशी बाजारों के संकेत भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं। अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों और Federal Reserve की संभावित ब्याज दरों को लेकर बाजार की नजर बनी हुई है। वहीं, Middle East में तनाव और Crude Oil की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय है। कच्चा तेल महंगा होने पर भारत के आयात बिल और महंगाई पर असर पड़ सकता है, इसलिए निवेशक इस मोर्चे पर भी सतर्क हैं। Tata Group के शेयरों पर भी नजर इन सबके बीच Tata Group Stocks भी बाजार की निगाह में हैं। Tata Sons से जुड़े घटनाक्रम के बाद समूह की कई कंपनियों के शेयरों में हलचल देखने को मिली है। निवेशक अब कंपनियों के अगले कदम और इससे जुड़े संभावित असर को समझने की कोशिश कर रहे हैं। आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल? फिलहाल बाजार में साफ तेजी के बजाय volatility यानी उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है। अगर ग्लोबल संकेतों में सुधार आता है और Banking तथा IT Stocks में खरीदारी लौटती है तो बाजार को सहारा मिल सकता है। वहीं Crude Oil और Geopolitical Tension बढ़ने पर दबाव दोबारा मजबूत हो सकता है। निवेशकों के लिए फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि बाजार की हर छोटी गिरावट या तेजी को देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय कंपनियों के फंडामेंटल और व्यापक बाजार संकेतों पर नजर रखें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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