बुधवार को शेयर बाजार (Share Market) खुलते ही माहौल कुछ ऐसा रहा कि निवेशकों की नजरें स्क्रीन पर टिक गईं। Sensex करीब 600 अंक तक फिसल गया, वहीं Nifty 50 में भी कमजोरी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बिकवाली बढ़ने से बाजार का कुल मार्केट कैप भी घटा और निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹2 लाख करोड़ तक की कमी आने की बात सामने आई।
आखिर बाजार में अचानक इतनी गिरावट क्यों आई? इसके पीछे घरेलू के साथ-साथ कई Global Factors भी जिम्मेदार माने जा रहे हैं।
Crude Oil ने बढ़ाई Market की चिंता
शेयर बाजार की गिरावट में सबसे अहम वजहों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने से भारत के लिए आयात बिल बढ़ सकता है। इसका असर रुपये और महंगाई पर पड़ने की आशंका रहती है।
महंगा तेल कंपनियों की लागत भी बढ़ा सकता है। यही वजह है कि Crude Oil में तेजी आते ही बाजार में अक्सर सावधानी बढ़ जाती है।
Middle East Tension का असर
मध्य पूर्व में तनाव ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। खासकर तेल की सप्लाई और Strait of Hormuz से जुड़े घटनाक्रम पर दुनियाभर के बाजारों की नजर है।
अगर तनाव लंबा खिंचता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आने का खतरा बना रहता है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह अच्छी खबर नहीं मानी जाती।
Global Market से भी नहीं मिला मजबूत Support
भारतीय शेयर बाजार अकेले नहीं चलता। दुनिया के बड़े बाजारों में होने वाली हलचल का असर यहां भी दिखाई देता है। अमेरिका समेत प्रमुख बाजारों में आर्थिक नीतियों और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क रखा।
ऐसे माहौल में विदेशी निवेशक जोखिम कम करने के लिए बिकवाली कर सकते हैं, जिससे घरेलू बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनता है।
Inflation Data पर Investors की नजर
महंगाई के आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि Inflation का अगला रुख ब्याज दरों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों को किस तरह प्रभावित करेगा।
ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बढ़ने पर शेयरों में Volatility बढ़ना स्वाभाविक है।
कौन-कौन से Sector दबाव में रहे?
बाजार में गिरावट का असर कई सेक्टर्स पर दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में बड़ी संख्या में सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में रहे। हालांकि कुछ चुनिंदा क्षेत्रों, खासकर Metal और PSU Bank Stocks, में खरीदारी भी देखने को मिली।
इससे साफ है कि निवेशक पूरी तरह बाजार से बाहर नहीं निकल रहे, बल्कि मौजूदा परिस्थितियों में ज्यादा सावधानी से पैसा लगा रहे हैं।
क्या Investors को घबराने की जरूरत है?
Sensex में 600 अंकों की गिरावट निश्चित रूप से बड़ी नजर आती है, लेकिन सिर्फ एक दिन की कमजोरी को देखकर इसे बड़ी Market Crash की शुरुआत मानना सही नहीं होगा।
फिलहाल बाजार की नजर Crude Oil Prices, Middle East Tension, Global Cues और Inflation Data पर है। इन मोर्चों पर हालात सुधरते हैं तो बाजार में तेजी से रिकवरी भी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर, तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव में और बढ़ोतरी बाजार की परेशानी बढ़ा सकती है।
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