अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तुर्किए यात्रा के दौरान सुरक्षा को लेकर ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया अधिकारियों को जानकारी मिली थी कि ईरान को अंकारा में ट्रंप के ठहरने की जगह की सटीक जानकारी थी। यहां तक कि होटल की मंजिल के बारे में भी जानकारी होने की बात सामने आई।
इसी इनपुट के बाद ट्रंप की वापसी से ठीक पहले उनकी यात्रा योजना बदल दी गई। सुरक्षा एजेंसियों ने ट्रंप को सार्वजनिक रूप से नजर आने वाले Air Force One से हटाकर दूसरे सैन्य विमान से रवाना किया। पूरी कार्रवाई इतनी गोपनीय रखी गई कि आखिरी समय तक इसकी भनक बाहर मौजूद लोगों को नहीं लगी।
अचानक क्यों बदला गया ट्रंप का Plane?
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों को संभावित missile threat की जानकारी मिली थी। आशंका थी कि ट्रंप जिस विमान से यात्रा करने वाले हैं, उसे निशाना बनाया जा सकता है। ऐसे में Secret Service ने जोखिम लेने के बजाय तुरंत वैकल्पिक योजना पर काम किया।
Trump को Air Force One से निकालकर C-32A सैन्य विमान में स्थानांतरित किया गया। इस बदलाव का मकसद राष्ट्रपति की वास्तविक यात्रा को सार्वजनिक नजरों से दूर रखना था।
Air Force One को बनाया गया Decoy
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प हिस्सा Air Force One का इस्तेमाल था। ट्रंप के दूसरे विमान में जाने के बाद Air Force One को आगे रवाना किया गया। बाहर से देखने वालों के लिए यही संदेश था कि राष्ट्रपति उसी विमान में हैं।
इस तरह Air Force One ने एक तरह से Decoy Plane की भूमिका निभाई। सुरक्षा के लिहाज से यह कदम संभावित खतरे को भ्रमित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
ईरान को कैसे मिली Trump की Location?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि ईरान को ट्रंप की इतनी सटीक Location की जानकारी कैसे मिली। रिपोर्टों में कहा गया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को इस बात के संकेत मिले थे कि ईरानी पक्ष को ट्रंप के होटल और उनकी मंजिल तक की जानकारी थी।
हालांकि, यह जानकारी ईरान तक किस माध्यम से पहुंची और इसके पीछे कौन सा Intelligence Source था, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इस दावे को फिलहाल उपलब्ध खुफिया रिपोर्टों और मीडिया रिपोर्ट्स के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
Trump ने भी Plane बदलने की बात मानी
मामला सामने आने के बाद ट्रंप ने खुद विमान बदले जाने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें दूसरे विमान से यात्रा करने की सलाह दी थी और उन्होंने अधिकारियों की बात मानी।
यानी जिस बदलाव को शुरुआत में सामान्य यात्रा प्रक्रिया का हिस्सा माना जा सकता था, उसके पीछे सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता मौजूद थी।
सुरक्षा एजेंसियों ने क्यों लिया इतना बड़ा फैसला?
अमेरिकी राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही बेहद कड़ी रहती है। ऐसे में किसी संभावित missile threat या लोकेशन लीक जैसी सूचना को नजरअंदाज करना आसान नहीं था।
इसी वजह से सुरक्षा एजेंसियों ने आखिरी समय में योजना बदलना बेहतर समझा। ट्रंप की वास्तविक Location को छिपाना और Air Force One को सामान्य तरीके से आगे भेजना इसी रणनीति का हिस्सा था।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सामने आया मामला
Trump की सुरक्षा से जुड़ा यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पहले से चर्चा में है। यही वजह है कि इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप के विमान पर वास्तव में हमला करने की कोई ठोस योजना थी या नहीं। लेकिन इतना जरूर है कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने मिली जानकारी को गंभीर माना और राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए तुरंत कदम उठाया।
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